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जगदलपुर, शौर्यपथ I नगर पालिक निगम जगदलपुर द्वारा रजत जयंती वर्ष एवं स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत शहरवासियों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आज विशेष अभियान एक दिन, एक घंटा, एक साथ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता, स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर सहित बड़ी संख्या में नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ दंतेश्वरी मंदिर नगरगुड़ी परिसर से किया गया, जहां मंदिर परिसर एवं उसके आस-पास के क्षेत्रों में व्यापक सफाई अभियान चलाया गया। लोगों ने झाड़ू लगाकर गंदगी हटाई, कचरा एकत्र किया और स्वच्छता के महत्व पर नागरिकों को जागरूक किया।
इस अवसर पर महापौर संजय पांडे ने कहा स्वच्छता न केवल हमारे स्वास्थ्य से जुड़ी है, बल्कि यह हमारे शहर की पहचान और संस्कृति का भी प्रतीक है। एक दिन, एक घंटा, एक साथ जैसे अभियान लोगों में जिम्मेदारी और सामूहिकता की भावना जगाने का माध्यम हैं। मैं जगदलपुर के सभी नागरिकों से अपील करता हूँ कि वे नियमित रूप से अपने आस-पास की सफाई रखें और इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दें। मिलकर ही हम स्वच्छ और सुरक्षित जगदलपुर का सपना साकार कर सकते हैं।
नगर निगम आयुक्त प्रवीण कुमार वर्मा ने कहा स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत रजत जयंती वर्ष में इस तरह के विशेष कार्यक्रम नागरिक सहभागिता को बढ़ाते हैं। जब लोग स्वयं आगे आकर सफाई करते हैं, तो स्वच्छता आदत में शामिल हो जाती है। नगर निगम का लक्ष्य है कि हर वार्ड, हर मोहल्ला स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक बने, जिसके लिए हम लगातार जनसहभागिता को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अभियान के दौरान नागरिकों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने, खुले में कचरा न फेंकने और साफ-सुथरा वातावरण बनाए रखने के लिए जागरूक किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी लोगों ने स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प भी लिया। मालूम हो कि नगर निगम जगदलपुर द्वारा आयोजित यह अभियान स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ शहर निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
स्वच्छता कार्यक्रम के बाद वाकथान का आयोजन, ली स्वच्छता की शपथ
रजत जयंती वर्ष एवं स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत आयोजित स्वच्छता कार्यक्रम के पश्चात आज नगर निगम द्वारा स्वच्छता वाकथान का आयोजन किया गया। यह वाकथान माँ दंतेश्वरी मंदिर से प्रारंभ होकर गोल बाजार चौक, मिताली चौक होते हुए नगरगुड़ी के सामने संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, स्वयंसेवी संगठन, स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर, भाजपा कार्यकर्ता एवं नागरिकों ने भाग लिया। वाकथान के माध्यम से लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने और स्वच्छ शहर बनाने का संदेश दिया गया। वाकथान के समापन के बाद उपस्थित सभी लोगों ने स्वच्छता की शपथ ली और प्रतिज्ञा ली कि वे अपने आसपास सफाई बनाए रखेंगे तथा अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। कार्यक्रम में महापौर संजय पांडे, एमआईसी सदस्य लक्ष्मण झा, सुरेश गुप्ता, कलावती कसेर, त्रिवेणी रंधारी, संग्राम सिंह राणा, नगर निगम आयुक्त प्रवीण कुमार वर्मा, पार्षद उमा मिश्रा, संतोष गौर, कुबेर देवांगन, स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर रामनरेश पांडे, रतन व्यास, कोटेश्वर नायडू, धीरज कश्यप, धर्मेंद्र महापात्र, बादशाह खान, एच वाय कुकड़े, सुलता महाराणा, संतोष नाग, गोपाल भारद्वाज, विनय श्रीवास्तव, हेमंत श्रीवास, अमर सिंह, दामोदर कुमार, शक्ति वेल, रुपेश बीजोरा, राजपाल कसेर, प्रकाश झा, अविनाश श्रीवास्तव, शशिनाथ पाठक, दशरथ गुप्ता, पप्पू वर्मा, अभिषेक तिवारी, रितेश सिन्हा, योगेश मिश्रा, प्रभात चौहान, सुप्रीयो मुखर्जी, आनंद झा आदि उपस्थित रहे।
जगदलपुर, शौर्यपथ। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर सेवा पखवाड़े कार्यक्रम के अंतर्गत लोहंडीगुड़ा ब्लॉक के ग्राम मांदर में बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत उपस्थित जनप्रतिनिधियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। इस दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों से संवाद किया और उन्हें हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया। सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को दर्शाते हुए इस अवसर पर एक पेड़ भी “माँ” के नाम रोपा गया।
कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानववाद’ के आदर्शों पर अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विचार हमें समाज की असली शक्ति के महत्व को समझाते हैं और एक सशक्त, समृद्ध बस्तर के निर्माण की प्रेरणा देते हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं जगदलपुर विधायक किरण देव ने कहा कि केंद्र की मोदी और प्रदेश की साय सरकार हमेशा पीड़ितों और जरूरतमंदों के साथ खड़ी है और बस्तर के विकास के लिए सभी योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है ताकि बस्तर का विकास चौगुनी गति से होl चित्रकोट विधायक विनायक गोयल ने इस अवसर पर पीड़ित परिवारों के साथ मिलकर राहत वितरण में भागीदारी निभाई और कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद प्रदान की जाएगी। इस अवसर पर पूर्व सांसद दिनेश कश्यप,भाजपा जिला अध्यक्ष वेद प्रकाश पांडे, पूर्व विधायक लच्छुराम कश्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। गुरुवार को यातायात विभाग की हाईवे पेट्रोलिंग टीम ने दंतेश्वरी माता दर्शन हेतु जगदलपुर से दंतेवाड़ा जा रहे पद यात्री श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सेवा का सराहनीय काम किया। टीम ने केवल सड़क सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की, बल्कि लगातार पैदल यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं के पैरों में पड़े छालों का भी ध्यान रखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के रूप में मरहम-पट्टी बाँधकर राहत प्रदान की। श्रद्धालुओं ने इस मानवीय पहल की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा, “पैदल चलते-चलते जब पैरों में छाले पड़ गए थे, तब हाईवे पेट्रोलिंग टीम ने हमारी मदद कर हमें राहत दी। यह हमारी यात्रा को और भी सुरक्षित और सुखद बना गया।” इस संवेदनशील सेवा ने श्रद्धालुओं में सुरक्षा का भरोसा जगाया और प्रशासन की संवेदनशील छवि को और मजबूत किया।
By - नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के निर्देश एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग के मार्गदर्शन में बस्तर पुलिस ने यातायात सुरक्षा को लेकर एक सराहनीय कदम उठाया है।
नवरात्र पर्व के दौरान दंतेश्वरी माता जी के दर्शन हेतु दंतेवाड़ा जा रहे पदयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके बैग पर सड़क सुरक्षा के मद्देनज़र रेडियम रिफ्लेक्टर स्टीकर लगाए जा रहे हैं। यह पहल 22 सितंबर 2025 से निरंतर जारी है।
प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु जगदलपुर मार्ग से होते हुए दंतेवाड़ा पहुँच रहे हैं और अनुमान है कि पूरे नौ दिनों में लगभग एक लाख से अधिक श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरेंगे। ऐसे में पुलिस द्वारा की गई यह पहल दुर्घटनाओं से बचाव में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
बस्तर पुलिस की इस पहल की हर ओर प्रशंसा हो रही है। श्रद्धालुओं ने भी पुलिस विभाग का आभार जताया है और कहा कि इस व्यवस्था से उन्हें रात के समय यात्रा करने में विशेष रूप से सुरक्षा का एहसास हो रहा है।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की शुरुआत के साथ, एक सदियों पुरानी और अनूठी परंपरा 'जोगी बिठाई' भी सम्पन्न हो गई है। यहां बड़े आमाबाल के रघुनाथ नाग जोगी बनकर नौ दिन की कठोर तपस्या पर बैठे। मंगलवार को सिरहासार में आयोजित जोगी बिठाई रस्म के अवसर पर जगदलपुर के विधायक किरण देव, बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष बलराम मांझी, नगर निगम अध्यक्ष खेमसिंह देवांगन सहित मांझी, चालकी, नाइक, पाइक, मेंबर, मेंबरिन तथा जनप्रतिनिधि व बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
यह रस्म बस्तर दशहरा को बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से निभाई जाती है। इस वर्ष भी, हल्बा समुदाय का एक युवक नौ दिनों के उपवास और योग की मुद्रा में जगदलपुर के सिरहासार भवन में बैठ गया है।
क्या है 'जोगी बिठाई' की रस्म?
यह रस्म हल्बा जाति के एक पुरुष द्वारा लगभग 600 सालों से निभाई जा रही है। जोगी पितृमोक्ष अमावस्या के दिन सिरहासार भवन पहुंचता है और दशहरा की शुरुआत से लेकर नौ दिनों तक उपवास पर रहता है। इस दौरान वह केवल फल और दूध का सेवन करता है। इस तपस्या का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बस्तर दशहरा का भव्य आयोजन बिना किसी विघ्न के सफलतापूर्वक पूरा हो।
कैसे निभाई जाती है यह रस्म?
जोगी के रूप में बैठने वाले व्यक्ति को कई विशेष प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। सबसे पहले, वह अपने पितरों का श्राद्ध करता है। इसके बाद, उसे नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और मावली माता मंदिर ले जाया जाता है, जहां तलवार की पूजा होती है। पूजा के बाद, जोगी तलवार लेकर सिरहासार भवन लौटता है और एक कुंड में योगासन की मुद्रा में बैठ जाता है। इस दौरान उसे बुरी नजर से बचाने के लिए चारों ओर कपड़े का पर्दा लगाया जाता है। नौ दिनों तक जोगी इसी अवस्था में रहकर बस्तर की शांति के लिए तपस्या करता है।
पौराणिक कथा: महाराजा का सम्मान
इस रस्म से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि बहुत साल पहले, दशहरा के दौरान एक हल्बा युवक ने निर्जल उपवास रखकर तपस्या शुरू कर दी थी। जब तत्कालीन महाराजा को इस बात का पता चला, तो वह स्वयं युवक से मिलने गए। युवक ने महाराजा को बताया कि उसने यह तपस्या दशहरा को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए की है। इससे प्रसन्न होकर, महाराजा ने उसके लिए सिरहासार भवन का निर्माण करवाया और इस परंपरा को हमेशा के लिए जारी रखने का आदेश दिया।
आज भी यह रस्म उसी सम्मान और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है, जो बस्तर दशहरा को न केवल एक पर्व, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत बनाती है।
बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन आज से शुरू
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दंतेवाड़ा से की पंजीयन की शुरूआत
दंतेवाड़ा में विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ देने की घोषणा की
रायपुर / शौर्यपथ / बस्तर संभाग में आगामी अक्टूबर-नवम्बर में होने वाले बस्तर ओलंपिक के लिए आज से पंजीयन प्रारंभ हो गया। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने आज दंतेवाड़ा में आयोजित कार्यक्रम में इसकी औपचारिक शुरूआत की। बस्तर ओलंपिक के दौरान आयोजित होने वाले खेलों में भाग लेने के लिए खिलाड़ी 20 अक्टूबर तक अपना पंजीयन करा सकते हैं। बस्तर ओलंपिक का विकासखंड स्तर पर आयोजन 25 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक, जिला स्तरीय आयोजन 5 नवम्बर से 15 नवम्बर तक तथा संभाग स्तरीय आयोजन 24 नवम्बर से 30 नवम्बर तक किया जाएगा। वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा दंतेवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप और विधायक श्री चैतराम अटामी भी पंजीयन के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन की शुरूआत करते हुए कहा कि पिछले वर्ष आयोजित बस्तर ओलंपिक से बस्तर की दशा और दिशा बदली है। आने वाले समय में बस्तर विश्व के मानचित्र पर अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा। यहां की प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी चमक बिखेरेंगे। उन्होंने बताया कि पिछले बस्तर ओलंपिक में एक लाख 62 हजार खिलाड़ियों ने अपना पंजीयन कराया था। इस वर्ष दो लाख खिलाड़ियों के पंजीयन का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी बस्तर ओलंपिक की प्रशंसा की थी। इस आयोजन को पूरे देश में लोकप्रिय बनाना है। बस्तर के हर गांव के हर बच्चे और युवा की भागीदारी इसमें सुनिश्चित करना है। श्री साव ने कार्यक्रम में दंतेवाड़ा जिले में मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए पांच करोड़ रुपए देने की घोषणा की।
वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा दंतेवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर आज बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन का शुभारंभ किया जा रहा है। बस्तर अनेक मामलों में समृद्ध है, चाहे वह खेल हो, संस्कृति हो या अन्य कोई क्षेत्र... बस्तर ने हमेशा अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। बस्तर अपनी अनूठी परंपराओं और रीति-रिवाजों के कारण विशेष महत्व रखता है, जिन्हें हमारे पूर्वज आदिकाल से निभाते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। बस्तर ओलंपिक से इन प्रतिभाओं को पहचान और प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में बस्तर ओलंपिक में भाग लेने की अपील की।
विधायक चैतराम अटामी और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार ने भी पंजीयन के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित किया। राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ओजस्वी मंडावी, दंतेवाड़ा जिला पंचायत के अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, उपाध्यक्ष अरविन्द कुंजाम, दंतेवाड़ा नगर पालिका की अध्यक्ष श्रीमती पायल गुप्ता, खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती तनुजा सलाम, डीआईजी कमलोचन कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव राय, जिला पंचायत के सीईओ जयंत नाहटा और डीएफओ सागर जाधव सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।
नारायणपुर के अबूझमाड़ में सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता : दो इनामी नक्सली ढेर
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नारायणपुर ज़िले के अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षाबलों की ओर से चलाए गए सफल अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक निर्णायक उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 2 नक्सली न्यूट्रलाइज किए गए हैं। दोनों पर 40-40 लाख रुपये का इनाम घोषित था। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सफलता केवल नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक निर्णायक पड़ाव ही नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ में शांति, सुरक्षा और विकास की प्रक्रिया को और भी गति प्रदान करती है।
मुख्यमंत्री ने इस अभियान में शामिल सुरक्षाकर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी बहादुरी और समर्पण से ही प्रदेश आज शांति और विकास की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न और माननीय केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में नक्सलवाद का अंत अब पहले से कहीं अधिक निकट और निश्चित होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त भारत का संकल्प अवश्य साकार होगा।
‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच और परामर्श
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में जब बस्तर के दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने की बात होती है तो सबसे पहले दुर्गम जंगलों और उफनती इंद्रावती नदी का ख्याल आता है। बरसात के मौसम में दुर्गम गाँवों तक पहुँचना बेहद जोखिमपूर्ण माना जाता है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में प्रदेश का प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हुए लोगों की जान बचाने की प्राथमिकता के साथ कार्य कर रहा है।
नक्सल प्रभावित जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। कांकेर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ अब आमजन तक पहुँच रहा है। यह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का परिणाम है, जिसने बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया और आयुक्त-सह-संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार हेतु प्रतिबद्ध हैं। इसी क्रम में प्रदेशव्यापी “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” अभियान ने बीजापुर जिले के सबसे दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित की है। बीते शनिवार को स्वास्थ्य दल ने स्वयं नाव चलाकर उफनती इंद्रावती नदी पार की और अबूझमाड़ से लगे ग्राम कोंडे में शिविर लगाया। इस शिविर में कुल 132 मरीजों की जांच की गई, जिनमें मलेरिया, सर्दी-खाँसी और त्वचा रोग से पीड़ित रोगी प्रमुख रहे। विशेष रूप से 10 गर्भवती महिलाओं की संपूर्ण स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और परामर्श प्रदान किया गया। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत महिलाओं को पोषण, एनीमिया से बचाव और सुरक्षित मातृत्व संबंधी विस्तृत जानकारी भी दी गई।
बीजापुर जिले में बीते तीन दिनों के दौरान अभियान की गति उल्लेखनीय रही है। इस अवधि में हजारों लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिनमें उच्च रक्तचाप के 3,177 मामले सामने आए। इसके अतिरिक्त, महिलाओं में मुख, स्तन और सर्वाइकल कैंसर की 2,823 स्क्रीनिंग की गई तथा उन्हें आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराया गया। साथ ही 314 गर्भवती महिलाओं को जांच, टीकाकरण और परामर्श का लाभ मिला। अभियान के अंतर्गत दूरस्थ अंचलों में आयोजित शिविरों के माध्यम से अब तक 1,200 से अधिक लोगों की टीबी स्क्रीनिंग और 800 से अधिक व्यक्तियों की सिकल सेल जांच भी की जा चुकी है।
ये आँकड़े केवल संख्याएँ नहीं, बल्कि उस संकल्प का प्रमाण हैं जिसके तहत प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि बीजापुर जिले के दूरस्थ और दुर्गम अंचलों में भी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बाधित न हो। यही कारण है कि स्वास्थ्य कर्मी नदी, पहाड़ और जंगल पार करके महिलाओं और बच्चों तक जीवन रक्षक सेवाएँ पहुँचा रहे हैं। प्रदेश सरकार का यह प्रयास इस विचार को सशक्त करता है कि “स्वस्थ नारी ही सशक्त परिवार की आधारशिला है।” इसी दिशा में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर पहुँच इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता है।
बस्तर संभाग में स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे ये सुधार न केवल स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर को ऊँचा उठा रहे हैं, बल्कि यह भी प्रमाणित कर रहे हैं कि सुशासन और समर्पित प्रयासों से सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव संभव है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
