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June 24, 2026
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बस्तर

बस्तर (1102)

देशभक्तिपूर्ण कार्यक्रमों से गूंजा प्रेरणा कक्ष

जगदलपुर, शौर्यपथ। गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर जिले के कलेक्टर आकाश छिकारा ने कलेक्टोरेट में ध्वजारोहण कर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्र गान और राष्ट्रीय गीत का गायन किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर आकाश छिकारा ने उपस्थित समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी के प्रतिमा में पुष्प अर्पित किया।

     कलेक्टोरेट में ध्वजारोहण के पश्चात प्रेरणा कक्ष में अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए देशभक्ति से ओत-प्रोत शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद सभी लोगों के भीतर राष्ट्रप्रेम की भावना को और प्रगाढ़ कर दिया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर सीपी बघेल एवं प्रवीण वर्मा, सहायक कलेक्टर विपिन दुबे, संयुक्त कलेक्टर एआर राणा सहित डिप्टी कलेक्टर सुश्री हीरा गवर्ना और सुश्री नंदिनी साहू समेत अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

9 टीमों का गठन, उड़ीसा व पड़ोसी जिलों में सघन जांच जारी

जगदलपुर, शौर्यपथ। माँ दंतेश्वरी मंदिर जगदलपुर में दिनांक 23–24 जनवरी की दरमियानी रात को अज्ञात चोर द्वारा चोरी की बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया। घटना की जानकारी मंदिर पुजारी द्वारा 24 जनवरी की सुबह पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया।

पुलिस अधीक्षक बस्तर शलभ सिन्हा के निर्देशन में जिला पुलिस एवं फॉरेंसिक टीम की संयुक्त टीम द्वारा तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुल 9 विशेष पुलिस टीमों का गठन कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान शहर के 100 से अधिक शासकीय एवं निजी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गए, जिसके आधार पर चोर के चेहरे की पहचान कर ली गई है। आरोपी से संबंधित सटीक जानकारी देने वाले व्यक्ति को बस्तर पुलिस द्वारा ₹5000 नकद इनाम दिए जाने की घोषणा की गई है।

वहीं पुलिस की 4–5 टीमें उड़ीसा एवं आसपास के जिलों में भी सक्रिय रूप से जांच कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विवेचना लगातार जारी है और नई जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी को आरोपी के संबंध में कोई भी जानकारी प्राप्त हो, तो तत्काल पुलिस को सूचित करें, ताकि आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार किया जा सके।

जगदलपुर, शौर्यपथ। भारत निर्वाचन आयोग के बेहद महत्वपूर्ण कार्य विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में घोर लापरवाही बरतने के कारण जिला शिक्षा अधिकारी बस्तर बीआर बघेल ने सहायक शिक्षक विवेक राणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बकावंड विकासखंड के प्राथमिक शाला बड़ेपारा, छोटेदेवड़ा में पदस्थ सहायक शिक्षक श्री राणा को विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी बकावंड द्वारा सहायक शिक्षक श्री राणा को मतदान केंद्र क्रमांक 198 के अंतर्गत नो-मैपिंग मतदाताओं को नोटिस तामील कराने का कार्य सौंपा गया था। किंतु नोटिस प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने संबंधित मतदाताओं तक इसे नहीं पहुँचाया। इसे शासकीय कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और उदासीनता मानते हुए इस कृत्य को सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 के उपनियमों का स्पष्ट उल्लंघन निरूपित कर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उन्हें प्रथम दृष्टया दोषी पाकर विवेक राणा का निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी लोहण्डीगुड़ा निर्धारित किया गया है, निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त करने की पात्रता रहेगी।

जगदलपुर, शौर्यपथ। जगदलपुर के प्रसिद्ध लामनी पार्क में बुधवार को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उत्साह, उल्लास और रंगों का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। वन विभाग द्वारा 'चित्र-विचित्र' संस्था के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रकृति प्रेम और संस्कृति का सुंदर संगम नजर आया। शहरवासियों और स्कूली बच्चों ने इस पहल का स्वागत जबरदस्त उत्साह के साथ किया। आयोजन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कड़ाके की ठंड और त्यौहार की व्यस्तता के बावजूद 630 प्रतिभागियों ने चित्रकला और 256 प्रतिभागियों ने पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच प्रकृति, वन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, जो पूरी तरह सफल होता दिखा। दोपहर 12 बजे से शुरू हुई चित्रकला प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने 'प्रकृति, वन एवं पर्यावरण' विषय पर अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतारा। बच्चों ने अपनी पेंटिंग के जरिए पर्यावरण को बचाने के जो संदेश दिए, उसने वहां मौजूद सभी दर्शकों और निर्णायकों का मन मोह लिया। शाम 3 बजे के बाद कार्यक्रम का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया जब पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता की शुरुआत हुई। लामनी पार्क का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से छा गया। बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे पारिवारिक सहभागिता और सामाजिक जुड़ाव का एक सुखद दृश्य उपस्थित हो गया।

          बस्तर वनमंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिताओं को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि हर आयु वर्ग के बच्चे इसमें शामिल हो सकें। उन्होंने बताया कि 11 से 18 वर्ष (वरिष्ठ वर्ग) के विजेताओं को क्रमशः 10 हजार रुपए, 07 हजार रुपए और 04 हजार रुपए के आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। वहीं 6 से 10 वर्ष के कनिष्ठ वर्ग के विजेताओं को 05 हजार रुपए, 03 हजार रुपए और 02 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इन प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों की सहभागिता उम्मीद से बढ़कर हुई तथा इस प्रतियोगिता के विजेताओं को शीघ्र ही पुरस्कृत किया जाएगा।

         पतंगबाजी के शौकीनों का उत्साह बढ़ाने के लिए इसमें भी विजेताओं को 2,100 रुपए और 1,100 रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। कार्यक्रम की सबसे खास बात 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की भागीदारी रही, जिन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए सांत्वना पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया जाएगा। वन विभाग की इस पहल ने मकर संक्रांति के पर्व को शहरवासियों, पर्यटकों और बच्चों के लिए स्मरणीय बना दिया।

जगदलपुर, शौर्यपथ। जगदलपुर के प्रसिद्ध लामनी पार्क में बुधवार को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उत्साह, उल्लास और रंगों का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। वन विभाग द्वारा 'चित्र-विचित्र' संस्था के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रकृति प्रेम और संस्कृति का सुंदर संगम नजर आया। शहरवासियों और स्कूली बच्चों ने इस पहल का स्वागत जबरदस्त उत्साह के साथ किया। आयोजन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कड़ाके की ठंड और त्यौहार की व्यस्तता के बावजूद 630 प्रतिभागियों ने चित्रकला और 256 प्रतिभागियों ने पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच प्रकृति, वन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, जो पूरी तरह सफल होता दिखा। दोपहर 12 बजे से शुरू हुई चित्रकला प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने 'प्रकृति, वन एवं पर्यावरण' विषय पर अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतारा। बच्चों ने अपनी पेंटिंग के जरिए पर्यावरण को बचाने के जो संदेश दिए, उसने वहां मौजूद सभी दर्शकों और निर्णायकों का मन मोह लिया। शाम 3 बजे के बाद कार्यक्रम का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया जब पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता की शुरुआत हुई। लामनी पार्क का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से छा गया। बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे पारिवारिक सहभागिता और सामाजिक जुड़ाव का एक सुखद दृश्य उपस्थित हो गया।

          बस्तर वनमंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिताओं को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि हर आयु वर्ग के बच्चे इसमें शामिल हो सकें। उन्होंने बताया कि 11 से 18 वर्ष (वरिष्ठ वर्ग) के विजेताओं को क्रमशः 10 हजार रुपए, 07 हजार रुपए और 04 हजार रुपए के आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। वहीं 6 से 10 वर्ष के कनिष्ठ वर्ग के विजेताओं को 05 हजार रुपए, 03 हजार रुपए और 02 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इन प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों की सहभागिता उम्मीद से बढ़कर हुई तथा इस प्रतियोगिता के विजेताओं को शीघ्र ही पुरस्कृत किया जाएगा।

         पतंगबाजी के शौकीनों का उत्साह बढ़ाने के लिए इसमें भी विजेताओं को 2,100 रुपए और 1,100 रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। कार्यक्रम की सबसे खास बात 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की भागीदारी रही, जिन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए सांत्वना पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया जाएगा। वन विभाग की इस पहल ने मकर संक्रांति के पर्व को शहरवासियों, पर्यटकों और बच्चों के लिए स्मरणीय बना दिया।

कोंडागांव में साय सरकार के ‘सुशासन’ को पलीता लगा रहे लापरवाह अफसर; बायपास के नाम पर बच्चों के फेफड़ों में भरा जा रहा डामर का जहर?

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। कहते हैं विकास की राह सुनहरी होती है, लेकिन कोंडागांव में यह राह 'धूल' और 'धुएं' से भरी है। नए बस स्टैंड के पीछे संचालित डामर फैक्ट्री ने इलाके में ऐसा तांडव मचाया है कि लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। हैरानी की बात यह है कि जहाँ सूबे के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी जनता को 'रामराज्य' और 'सुशासन' का अहसास कराने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं, वहीं कोंडागांव के कुछ गैर-जिम्मेदार नुमाइंदे अपनी कार्यशैली से इस सुशासन को 'कुशासन' की ओर धकेलने की सुपारी लिए बैठे हैं।

 

​अफसरों का अजीब तर्क: ‘सड़क बनने तक जहर पीना मजबूरी है’

इलाके के लोग जब धूल से बिलबिलाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के पास गुहार लगाने पहुँचते हैं, तो उन्हें जवाब मिलता है— "सड़क निर्माण तक कुछ दिन तो सहना पड़ेगा।" सवाल यह है कि क्या "कुछ दिन" के नाम पर प्रदूषण के नियमों को सूली पर चढ़ाया जा सकता है? क्या विकास की परिभाषा में आम आदमी की सेहत का कोई मोल नहीं है? इन अफसरों के तर्क सुनकर ऐसा लगता है मानो कोंडागांव की जनता की सेहत की कीमत इन सड़कों से भी कम आंकी गई है।

 

​सुशासन के नाम पर 'कागजी' छिड़काव

स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में धूल नियंत्रण के उपाय सिर्फ कागजों पर 'लहलहा' रहे हैं। जमीन पर न तो पानी का छिड़काव दिख रहा है और न ही सामग्री की कवरिंग। साय सरकार की मंशा अपनी जनता को हर सुख-सुविधा देने की है, लेकिन ग्राउंड जीरो पर बैठे कुछ लोग सरकार की साख को धूल में मिलाने का काम कर रहे हैं। घरों में रखे खाने पर धूल की परत जम रही है और स्कूलों में डस्ट का सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

 

​चर्चा आम है: 'साहब' का बंगला होता तो क्या यही होता?

शहर के चौक-चौराहों पर यह तंज आम है कि यदि यह डस्ट का गुबार किसी रसूखदार 'साहब' के बंगले की ओर मुड़ जाता, तो अब तक फैक्ट्री पर नोटिसों और जुर्मानों की झड़ी लग चुकी होती। लेकिन यहाँ मामला 'आम आदमी' का है, जिसके हिस्से में शायद सिर्फ धूल फांकना ही लिखा है। ​अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'धूलबाज' रवैये को कब तक संरक्षण देता है या फिर सुशासन के संकल्प को दोहराते हुए जनता को इस नरक से मुक्ति दिलाता है।

 

हिंसा का त्याग कर लोकतंत्र व विकास की मुख्यधारा में लौटे 18 महिलाएं और 45 पुरुष
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश— “बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान”

रायपुर ।
बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। दंतेवाड़ा जिले में राज्य सरकार की “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों— जिनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं — ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया। यह कदम केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य को नई दिशा देने वाला निर्णायक परिवर्तन है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की स्पष्ट, बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने दो टूक कहा— “हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है, स्थायी शांति का रास्ता संवाद और विकास से होकर ही जाता है।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति, सटीक सुरक्षा रणनीति और सुशासन आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण नक्सलवाद अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है। माओवादी नेटवर्क का लगातार विघटन हो रहा है और बस्तर के सुदूर अंचलों तक अब तेज़ी से सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी युवाओं को सरकार द्वारा सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार एवं आजीविका के अवसर तथा सामाजिक पुनर्स्थापन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर नागरिक बनकर समाज में स्थायी रूप से स्थापित हो सकें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर अब भय की पहचान से बाहर निकलकर संभावनाओं और प्रगति की भूमि बन रहा है, जहां शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक सुरक्षित और स्वर्णिम भविष्य की नींव रख रहे हैं।

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जगदलपुर से नरेश देवांगन की रिपोर्ट 

जगदलपुर, शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार यह संदेश दे रही है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और जनता के प्रति संवेदनशीलता सर्वोपरि है। साय सरकार की कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही को अहम बताया जा रहा है। लेकिन जगदलपुर शहर में PWD द्वारा किए जा रहे बी.टी. पैच रिपेयर कार्य की मौजूदा स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या विभाग ज़मीन पर सरकार की सोच को सही मायनों में लागू कर पा रहा है?

PWD द्वारा शहर में करोड़ों की लागत से चल रहे पैच रिपेयर कार्य को लेकर प्रकाशित खबर को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन जमीनी हालात में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा। शहर में कई स्थानों पर मरम्मत कार्य अब भी अधूरा है, और फिलहाल कहीं भी सक्रिय कार्य होता दिखाई नहीं देता। इससे यह आभास बन रहा है कि काम की रफ्तार सरकार की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है।

शहर के अनेक इलाकों में आज भी ऐसे गड्ढे मौजूद हैं, जहाँ तत्काल पैच वर्क की आवश्यकता है। हैरानी की बात यह है कि VIP रोड जैसी महत्वपूर्ण सड़कों पर भी मरम्मत अधूरी दिखाई देती है, जबकि सरकार बार-बार यह स्पष्ट कर चुकी है कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में किसी तरह की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब साय सरकार सुशासन और जनहित को प्राथमिकता दे रही है, तब PWD की यह स्थिति सरकारी मंशा पर सवाल नहीं, बल्कि विभागीय कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। पहले पैच रिपेयर की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे, और अब काम का ठप पड़ जाना विभागीय निगरानी की कमी की ओर इशारा करता है।

लोक निर्माण विभाग क्र- 01 के जिम्मेदार अधिकारी कार्यपालन अभियंता श्री बत्रा से जब पहले स्थिति को लेकर सवाल पूछे गए थे, तो व्यस्तता का हवाला दिया गया। एक सप्ताह बाद भी हालात में कोई ठोस सुधार न दिखना, यह संकेत देता है कि बैठकें तो हो रही हैं, लेकिन फील्ड स्तर पर उनकी असरदार निगरानी दिखाई नहीं दे रही।

शहर में यह चर्चा आम है कि यदि विभागीय स्तर पर नियमित निरीक्षण और समीक्षा होती, तो न केवल अधूरे कार्य सामने आते, बल्कि समय रहते उन्हें पूरा भी किया जा सकता था। लोग पूछ रहे हैं— क्या विभाग सरकार द्वारा तय किए गए गुणवत्ता मानकों के अनुरूप काम कर रहा है?

शहरवासियों का मानना है कि यह मुद्दा सरकार की नीयत का नहीं, बल्कि PWD की कार्यप्रणाली और जवाबदेही का है। यदि विभाग सरकार की मंशा के अनुरूप काम करे, तो सड़कों की हालत और जनता का भरोसा—दोनों बेहतर हो सकते हैं। अब सवाल केवल सड़कों तक सीमित नहीं रह गया है।

सवाल यह है कि साय सरकार जिस सुशासन की बात कर रही है, क्या PWD भी उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है? क्योंकि ज़मीन पर सड़कें अब भी जवाब मांग रही हैं, और जनता को उम्मीद है कि सरकार की संवेदनशीलता विभाग तक भी उतनी ही सख्ती से पहुँचेगी।

जगदलपुर, शौर्यपथ। अवंतिका कॉलोनी, जगदलपुर में छत्तीसगढ़ के महान संत, सतनाम धर्म के प्रवर्तक एवं “मानव-मानव एक समान” का संदेश देने वाले परमपूज्य गुरु घासीदास बाबा जी की 269वीं जयंती श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सतनाम समाज के लोगों ने गुरु घासीदास बाबा के विचारों को स्मरण करते हुए सत्य, अहिंसा, शांति, समानता एवं भाईचारे के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का आयोजन अवंतिका कॉलोनी बोधघाट चौक, लामनी पार्क रोड जगदलपुर में किया गया, जहां बस्तर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से सतनाम समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, ग्रामीणजन, युवा वर्ग, महिलाएं एवं बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक पंथी नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। पंथी दलों ने देवड़ा, भैंजरीपदर, मोंगरापाल एवं मुंडापाल जैसे क्षेत्रों से पहुंचकर प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा। संपूर्ण आयोजन शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। अंत में समाज की एकता, शिक्षा, जागरूकता एवं सामाजिक उत्थान के लिए मिल-जुलकर कार्य करने का आह्वान किया गया।

इस अवसर पर समिति पदाधिकारी पंडित सुंदरलाल शर्मा वार्ड के पार्षद योगेंद्र पांडे, सतनामी समाज जिला अध्यक्ष संतु बांधे, जिला उपाध्यक्ष लाला लहरे, छोटू मारकंडे, राजेंद्र बांधे, श्रीमती ममता कूरे , सचिव दिनेश बंजारे, संरक्षक गंगू कूर्रे, मयाराम कूर्रे, कोषाध्यक्ष अजय लहरे, प्रवक्ता रमेश लहरे, मीडिया प्रभारी मोनू सोनवानी, सांस्कृतिक प्रभारी शिवप्रसाद जांगड़े, भगचंद चतुर्वेदी एवं समस्त संगठन प्रभारी धनिराम चतुर्वेदी, विदेश नाग, कृष्ण कन्हया नाह, तारन कोशले, श्री करसनदास गोरे, हेमराज जांगड़े, राकेश महिलांगे, विजय कुर्रे, सीताराम रात्रे, श्याम दास बंजारे, दुर्योधन कोसरे, मुन्ना जांगड़े, श्रीमती तुलसा लहरे, श्रीमती बबिता खिलाड़ी, श्रीमती संगीता बघेल सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक एवं सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं एवं महिलाओं की सक्रिय सहभागिता रही और अंत में गुरु घासीदास बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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