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July 02, 2026
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बस्तर

बस्तर (1105)

 

हिंसा का त्याग कर लोकतंत्र व विकास की मुख्यधारा में लौटे 18 महिलाएं और 45 पुरुष
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश— “बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान”

रायपुर ।
बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। दंतेवाड़ा जिले में राज्य सरकार की “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों— जिनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं — ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया। यह कदम केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य को नई दिशा देने वाला निर्णायक परिवर्तन है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की स्पष्ट, बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने दो टूक कहा— “हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है, स्थायी शांति का रास्ता संवाद और विकास से होकर ही जाता है।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति, सटीक सुरक्षा रणनीति और सुशासन आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण नक्सलवाद अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है। माओवादी नेटवर्क का लगातार विघटन हो रहा है और बस्तर के सुदूर अंचलों तक अब तेज़ी से सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी युवाओं को सरकार द्वारा सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार एवं आजीविका के अवसर तथा सामाजिक पुनर्स्थापन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर नागरिक बनकर समाज में स्थायी रूप से स्थापित हो सकें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर अब भय की पहचान से बाहर निकलकर संभावनाओं और प्रगति की भूमि बन रहा है, जहां शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक सुरक्षित और स्वर्णिम भविष्य की नींव रख रहे हैं।

फॉलो अप

जगदलपुर से नरेश देवांगन की रिपोर्ट 

जगदलपुर, शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार यह संदेश दे रही है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और जनता के प्रति संवेदनशीलता सर्वोपरि है। साय सरकार की कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही को अहम बताया जा रहा है। लेकिन जगदलपुर शहर में PWD द्वारा किए जा रहे बी.टी. पैच रिपेयर कार्य की मौजूदा स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या विभाग ज़मीन पर सरकार की सोच को सही मायनों में लागू कर पा रहा है?

PWD द्वारा शहर में करोड़ों की लागत से चल रहे पैच रिपेयर कार्य को लेकर प्रकाशित खबर को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन जमीनी हालात में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा। शहर में कई स्थानों पर मरम्मत कार्य अब भी अधूरा है, और फिलहाल कहीं भी सक्रिय कार्य होता दिखाई नहीं देता। इससे यह आभास बन रहा है कि काम की रफ्तार सरकार की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है।

शहर के अनेक इलाकों में आज भी ऐसे गड्ढे मौजूद हैं, जहाँ तत्काल पैच वर्क की आवश्यकता है। हैरानी की बात यह है कि VIP रोड जैसी महत्वपूर्ण सड़कों पर भी मरम्मत अधूरी दिखाई देती है, जबकि सरकार बार-बार यह स्पष्ट कर चुकी है कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में किसी तरह की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब साय सरकार सुशासन और जनहित को प्राथमिकता दे रही है, तब PWD की यह स्थिति सरकारी मंशा पर सवाल नहीं, बल्कि विभागीय कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। पहले पैच रिपेयर की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे, और अब काम का ठप पड़ जाना विभागीय निगरानी की कमी की ओर इशारा करता है।

लोक निर्माण विभाग क्र- 01 के जिम्मेदार अधिकारी कार्यपालन अभियंता श्री बत्रा से जब पहले स्थिति को लेकर सवाल पूछे गए थे, तो व्यस्तता का हवाला दिया गया। एक सप्ताह बाद भी हालात में कोई ठोस सुधार न दिखना, यह संकेत देता है कि बैठकें तो हो रही हैं, लेकिन फील्ड स्तर पर उनकी असरदार निगरानी दिखाई नहीं दे रही।

शहर में यह चर्चा आम है कि यदि विभागीय स्तर पर नियमित निरीक्षण और समीक्षा होती, तो न केवल अधूरे कार्य सामने आते, बल्कि समय रहते उन्हें पूरा भी किया जा सकता था। लोग पूछ रहे हैं— क्या विभाग सरकार द्वारा तय किए गए गुणवत्ता मानकों के अनुरूप काम कर रहा है?

शहरवासियों का मानना है कि यह मुद्दा सरकार की नीयत का नहीं, बल्कि PWD की कार्यप्रणाली और जवाबदेही का है। यदि विभाग सरकार की मंशा के अनुरूप काम करे, तो सड़कों की हालत और जनता का भरोसा—दोनों बेहतर हो सकते हैं। अब सवाल केवल सड़कों तक सीमित नहीं रह गया है।

सवाल यह है कि साय सरकार जिस सुशासन की बात कर रही है, क्या PWD भी उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है? क्योंकि ज़मीन पर सड़कें अब भी जवाब मांग रही हैं, और जनता को उम्मीद है कि सरकार की संवेदनशीलता विभाग तक भी उतनी ही सख्ती से पहुँचेगी।

जगदलपुर, शौर्यपथ। अवंतिका कॉलोनी, जगदलपुर में छत्तीसगढ़ के महान संत, सतनाम धर्म के प्रवर्तक एवं “मानव-मानव एक समान” का संदेश देने वाले परमपूज्य गुरु घासीदास बाबा जी की 269वीं जयंती श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सतनाम समाज के लोगों ने गुरु घासीदास बाबा के विचारों को स्मरण करते हुए सत्य, अहिंसा, शांति, समानता एवं भाईचारे के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का आयोजन अवंतिका कॉलोनी बोधघाट चौक, लामनी पार्क रोड जगदलपुर में किया गया, जहां बस्तर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से सतनाम समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, ग्रामीणजन, युवा वर्ग, महिलाएं एवं बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक पंथी नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। पंथी दलों ने देवड़ा, भैंजरीपदर, मोंगरापाल एवं मुंडापाल जैसे क्षेत्रों से पहुंचकर प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा। संपूर्ण आयोजन शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। अंत में समाज की एकता, शिक्षा, जागरूकता एवं सामाजिक उत्थान के लिए मिल-जुलकर कार्य करने का आह्वान किया गया।

इस अवसर पर समिति पदाधिकारी पंडित सुंदरलाल शर्मा वार्ड के पार्षद योगेंद्र पांडे, सतनामी समाज जिला अध्यक्ष संतु बांधे, जिला उपाध्यक्ष लाला लहरे, छोटू मारकंडे, राजेंद्र बांधे, श्रीमती ममता कूरे , सचिव दिनेश बंजारे, संरक्षक गंगू कूर्रे, मयाराम कूर्रे, कोषाध्यक्ष अजय लहरे, प्रवक्ता रमेश लहरे, मीडिया प्रभारी मोनू सोनवानी, सांस्कृतिक प्रभारी शिवप्रसाद जांगड़े, भगचंद चतुर्वेदी एवं समस्त संगठन प्रभारी धनिराम चतुर्वेदी, विदेश नाग, कृष्ण कन्हया नाह, तारन कोशले, श्री करसनदास गोरे, हेमराज जांगड़े, राकेश महिलांगे, विजय कुर्रे, सीताराम रात्रे, श्याम दास बंजारे, दुर्योधन कोसरे, मुन्ना जांगड़े, श्रीमती तुलसा लहरे, श्रीमती बबिता खिलाड़ी, श्रीमती संगीता बघेल सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक एवं सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं एवं महिलाओं की सक्रिय सहभागिता रही और अंत में गुरु घासीदास बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

जगदलपुर से नरेश देवांगन की रिपोर्ट 

जगदलपुर, शौर्यपथ। साय सरकार भले ही प्रदेश में सुशासन का ढोल पीट रही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत जगदलपुर के हाटगुड़ा क्षेत्र में उस ढोल की पोल खोलती साफ दिखाई दे रही है। लालबाग से गणपति रिसोर्ट होते हुए बस्तर सांसद के गृहग्राम जाने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों विकास नहीं, बल्कि धूल और लापरवाही की मिसाल बन चुका है।

PMGSY विभाग द्वारा चलाए जा रहे सड़क मरम्मत कार्य में निर्माण कम और “धूल का आतंक” ज़्यादा नजर आ रहा है। सड़क को उधेड़कर छोड़ दिया गया है, लेकिन डस्ट कंट्रोल के नाम पर न पानी का छिड़काव हो रहा है, न ही डामरीकरण का काम शुरू किया जा रहा है। नतीजा—दिनभर गुजरने वाले वाहनों से उड़ती घनी धूल ने हाटगुड़ा के दुकानदारों और रहवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। कुछ ही घंटों में दुकानों, घरों और सामानों पर धूल की मोटी परत जम जा रही है। स्थिति ऐसी है मानो यह कोई सड़क निर्माण स्थल नहीं, बल्कि धूल उत्पादन केंद्र बन गया हो। सांस लेना मुश्किल हो रहा है, आंखों में जलन, खांसी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।

हाटगुड़ा के दुकानदारों का कहना हैं कि धूल के कारण न सिर्फ उनका सामान खराब हो रहा है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। बावजूद इसके, PMGSY विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ज़मीनी हालात से पूरी तरह बेखबर बने हुए हैं।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि यह वही मार्ग है, जिससे होकर बस्तर सांसद अपने गृहग्राम आते-जाते हैं, फिर भी PMGSY विभाग में कोई संवेदनशीलता नजर नहीं आ रही। जनता पूछ रही है—जब सांसद के मार्ग की यह हालत है, तो बाकी इलाकों का क्या हाल होगा?

काम के दौरान पानी तक न डालना, और डामर का काम शुरू न करना किसी तकनीकी कारण का नहीं, बल्कि सीधी लापरवाही और उदासीनता का संकेत है। हैरानी की बात यह है कि सब कुछ सामने होते हुए भी न विभाग हरकत में है, न जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया दिखाई दे रही है। काम के नाम पर धूल उड़ रही है, और जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठकर सुशासन की फाइलें झाड़ रहे हैं।

PMGSY विभाग के साथ-साथ बस्तर सांसद की चुप्पी भी अब सवालों के घेरे में है। क्या जनता की सेहत, रोज़मर्रा की परेशानी और नुकसान अब प्राथमिकता की सूची से बाहर हो चुके हैं? हाटगुड़ा के लोग अब सिर्फ सड़क नहीं, जवाब और जिम्मेदारी भी मांग रहे हैं।

BEO तोकापाल ने भेजी ‘तस्वीर’, पर ज़मीनी हकीकत पर सवाल बरकरार

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। शासकीय प्राथमिक शाला बुरूंगपाल, पटेलपारा में मध्यान भोजन की गुणवत्ता को लेकर प्रकाशित खबर के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आता दिखाई दिया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) तोकापाल ने मामले में प्रतिक्रिया देते हुए समूह की बैठक लेकर बच्चों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने की जानकारी दी है। बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी बताई गई है।

BEO तोकापाल द्वारा भेजे गए संदेश में कहा गया है कि मध्यान भोजन व्यवस्था को सुधारने के लिए संबंधित स्व-सहायता समूह को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों को अच्छा, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही पंचायत स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है।

 

राशि पंचायत की, निगरानी किसकी?

MDM राशि और समूह की नियुक्ति को लेकर दी गई यह सफाई अपने आप में कई सवाल छोड़ जाती है। यदि पैसा समूह को और नियुक्ति पंचायत की जिम्मेदारी है, तो फिर बच्चों की थाली में कमी आने पर जिम्मेदार कौन है?और सबसे अहम—अब तक निगरानी व्यवस्था कहां थी?

 

तस्वीर में सब सही, ज़मीनी हकीकत?

मामले में BEO तोकापाल की ओर से एक तस्वीर भी भेजी गई है, जिसमें मूली, बैंगन, पत्तागोभी की सब्ज़ी, दाल और चावल बना हुआ दिख रहा है। तस्वीर में भोजन भरपूर और संतुलित नजर आता है, लेकिन सवाल यह नहीं कि आज क्या बना—सवाल यह है कि हर दिन क्या बनेगा। क्या यही भोजन अब तोकापाल ब्लॉक की प्रत्येक शाला में बच्चों को प्रतिदिन दिया जाएगा?क्या सभी स्कूलों में तय मेनू चार्ट का सख्ती से पालन होगा, या तस्वीरें सिर्फ जवाब देने का माध्यम बनेंगी?

 

खबर से पहले क्यों नहीं जागा सिस्टम?

जानकारों का मानना है कि यदि नियमित निरीक्षण, अचानक जांच और जवाबदेही पहले से तय होती, तो बच्चों के भोजन को लेकर शिकायतें सामने ही क्यों आतीं? खबर आने के बाद बैठक और तस्वीरें भेजना आसान है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह व्यवस्था स्थायी होगी?

 

अब सिर्फ वादे नहीं, परिणाम चाहिए

फिलहाल विभाग की यह सक्रियता कागज और मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई दे रही है। असली परीक्षा अब ज़मीनी स्तर पर होगी—जहां बच्चों की थाली रोज भरेगी या फिर कुछ दिनों बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आएंगे।

जगदलपुर, शौर्यपथ। विजय दिवस के पावन अवसर पर बस्तर संभाग पूर्व सैनिक सेवा परिषद के तत्वावधान में मंगलवार को एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 1971 के भारत–पाक युद्ध में देश की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया तथा पूर्व सैनिकों के शौर्य, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उनके अमूल्य योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम में विंग कमांडर जे.पी. पात्रो, समाजसेवी ज्ञानेश मिश्रा तथा नगर निगम के पार्षद एवं MIC सदस्य सुरेश गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने विजय दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन भारतीय सेना के अदम्य साहस, रणनीतिक कौशल और अटूट देशभक्ति का प्रतीक है।

बस्तर संभाग पूर्व सैनिक सेवा परिषद के संरक्षक घासीराम बघेल, अध्यक्ष विजय झा, उपाध्यक्ष अर्जुन पांडेय, सचिव अजय शुक्ला, उप सचिव सोनू सिंह, उप सचिव मनोज शुक्ला सहित सौरव यादव, सुभाष जॉन एवं तोप सिंह ने आयोजन की सफलता में सक्रिय भूमिका निभाई। परिषद के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की अनुशासित सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

वक्ताओं ने युवाओं से राष्ट्र सेवा, अनुशासन और देशभक्ति के मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान करते हुए कहा कि पूर्व सैनिकों का जीवन आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

परिषद द्वारा सामाजिक दायित्वों के निर्वहन की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज रात्रि में जरूरतमंदों के लिए कंबल वितरण कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे शीत ऋतु में गरीब एवं असहाय लोगों को राहत प्रदान की जा सके।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया, जिससे पूरा वातावरण राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत हो गया।

तोकापाल ब्लॉक की शालाओं में “पोषण” नहीं, सिर्फ पेट भरने का औपचारिकता?

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। विकासखंड तोकापाल अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला बुरूंगपाल, पटेलपारा में बच्चों को मिलने वाले मध्यान भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। शासन द्वारा निर्धारित मेनू चार्ट के अनुरूप भोजन नहीं दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे योजना के उद्देश्य पर ही प्रश्नचिह्न लग रहा है।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, बच्चों की थाली में परोसा जा रहा भोजन न तो स्वाद में संतोषजनक है और न ही पोषण की कसौटी पर खरा उतरता दिखाई देता है। भोजन की स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि यह समझना मुश्किल हो जाता है कि परोसी गई सब्ज़ी है या पानी में उबली सब्ज़ी की परछाईं।

स्वाद की बात छोड़ भी दी जाए, तो पोषण का अभाव साफ नजर आता है। बच्चों और स्थानीय लोगों के अनुसार सब्ज़ियाँ अक्सर अधपकी होती हैं, मेनू चार्ट के अनुसार अचार-पापड़ जैसे निर्धारित घटक नहीं दिए जाते और भोजन लगभग प्रतिदिन एक जैसा, फीका व बेस्वाद रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार का भोजन बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है।

 

निगरानी व्यवस्था पर उठते सवाल

इस पूरे मामले में निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मध्यान भोजन योजना की नियमित जांच और निरीक्षण की जिम्मेदारी प्रशासनिक स्तर पर तय है, लेकिन बुरूंगपाल की स्थिति यह संकेत देती है कि जमीनी निरीक्षण प्रभावी रूप से नहीं हो पा रहे हैं।

इसी क्रम में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), तोकापाल की भूमिका पर भी प्रश्न उठ रहे हैं। यदि निरीक्षण नियमित रूप से हो रहे होते, तो भोजन की गुणवत्ता को लेकर उठ रही ये शिकायतें सामने नहीं आतीं—या समय रहते सुधारी जा सकती थीं।

 

योजना का उद्देश्य और ज़मीनी हकीकत

मध्यान भोजन योजना का उद्देश्य केवल बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि उन्हें पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना है। लेकिन बुरूंगपाल की स्थिति यह सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं यह योजना सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित तो नहीं रह गई है। सरकार इस योजना पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, इसके बावजूद यदि बच्चों की थाली में पोषण नहीं पहुँच पा रहा है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।

इस संबंध में ब्लॉक तोकापाल खण्ड शिक्षा अधिकारी पुनम सलाम से फ़ोन मे संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

अब यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पूरे विकासखंड में मध्यान भोजन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि बुरूंगपाल की यह स्थिति है, तो अन्य शालाओं में भोजन की गुणवत्ता कैसी है—यह भी जांच का विषय बनता जा रहा है।

जगदलपुर, शौर्यपथ। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक के समापन की घोषणा के साथ ही जगदलपुर का आसमान एक अविस्मरणीय नजारे का गवाह बना। गृह मंत्री श्री शाह ने जैसे ही समापन की घोषणा की, पूरा वातावरण तालियों और हर्ष ध्वनि से गूंज उठा, और इसके ठीक बाद शुरू हुई शानदार आतिशबाजी ने दर्शकों का मन मोह लिया।

          समापन समारोह का मुख्य आकर्षण वह अद्भुत आतिशबाजी रही, जिसने मानो रात के खुले आसमान को अचानक सतरंगी बादलों से भर दिया। अलग-अलग रंगों और आकार के पटाखों की लड़ियाँ जब एक साथ फूटीं, तो ऐसा प्रतीत हुआ जैसे इंद्रधनुष के सारे रंग नीचे उतर आए हों। पारंपरिक और आधुनिक खेलों के महाकुंभ रहे बस्तर ओलंपिक के सफल आयोजन के बाद, इस भव्य आतिशबाजी ने उत्सव के माहौल को चरम पर पहुँचा दिया। उपस्थित जनसमूह, जिसमें स्थानीय निवासी, खिलाड़ी और गणमान्य व्यक्ति शामिल थे, इस नयनाभिराम दृश्य को अपने कैमरों में कैद करने और खुली आँखों से निहारने में मशगूल रहे। यह आतिशबाजी सिर्फ पटाखों का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि बस्तर की समृद्ध खेल संस्कृति और यहाँ की शांतिपूर्ण प्रगति का एक चमकदार प्रतीक थी।

जगदलपुर, शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर अंचल का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नक्सलवाद के उन्मूलन के साथ-साथ बस्तर में मूलभूत सुविधाओं का विकास तेजी से किया जा रहा है और बस्तर अब विकास की दिशा में सशक्त गति से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय आज जगदलपुर में आयोजित बस्तर ओलम्पिक 2025 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक समृद्ध राज्य है, किंतु माओवाद की समस्या प्रारंभ से ही राज्य के विकास में एक बड़ी बाधा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प के कारण अब माओवाद के अंत की स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। नियद नेल्ला नार योजना के दायरे को 5 किलोमीटर से बढ़ाकर 10 किलोमीटर तक विस्तारित किया गया है, जिसके माध्यम से 403 गांवों में बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचने लगी हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि माओवाद के कारण बंद पड़े स्कूल अब पुनः खुल रहे हैं। सड़कों का व्यापक नेटवर्क विकसित कर अंदरूनी इलाकों को आवागमन की सुविधा से जोड़ा जा रहा है। माओवाद से मुक्त गांवों में जनहितकारी योजनाओं का पूर्ण सेचुरेशन किया जा रहा है। इन सभी सकारात्मक प्रयासों के परिणामस्वरूप विकास के प्रति आमजन का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर ओलम्पिक में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें बधाई दी तथा आगामी वर्ष और बेहतर प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बस्तर देश में एक नया इतिहास रच रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूर्ण रूप से समाप्त होगा और बस्तर पुनः खुशहाल बनेगा। कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव एवं विजय शर्मा ने भी संबोधित किया और बस्तर ओलम्पिक के सफल आयोजन के लिए खिलाड़ियों को बधाई दी। विधायक जगदलपुर किरण देव ने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं खिलाड़ियों का आत्मीय स्वागत किया। समारोह के अंत में सांसद महेश कश्यप ने आभार व्यक्त किया।

इस मौके पर केबिनेट मंत्री केदार कश्यप, सांसद भोजराज नाग, बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सुश्री लता उसेंडी, विधायक सर्वश्री विक्रम उसेंडी, नीलकंठ टेकाम, विनायक गोयल, आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, नगर निगम जगदलपुर के महापौर संजय पांडे सहित अनेक जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में खेलप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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