
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
रायपुर | शौर्यपथ संवाददाता
छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने शनिवार को अपने बस्तर संभाग प्रवास के दौरान नारायणपुर जिले के सुदूर और संवेदनशील वनांचल ग्राम कच्चापाल का दौरा किया।
यह क्षेत्र पहले नक्सल गतिविधियों से प्रभावित था, परंतु अब यहां विकास और स्थिरता की नई कहानी लिखी जा रही है।
श्री शर्मा ने कच्चापाल स्थित सीआरपीएफ कैम्प का निरीक्षण किया और जवानों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि –
“कठिन परिस्थितियों में भी आप सबने जिस साहस और समर्पण से क्षेत्र में शांति कायम की है, वह प्रेरणादायक है।”
उन्होंने जवानों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि शासन आपके योगदान को सम्मान की दृष्टि से देखता है और क्षेत्र में विकास की गति तेज़ करने के लिए प्रशासन निरंतर कार्यरत है।
इसके बाद उप मुख्यमंत्री ने जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों से संवाद किया।
ग्राम पंचायत कच्चापाल की सरपंच श्रीमती रजमा नूरेटी ने जानकारी दी कि पंचायत में कुल नौ गांव सम्मिलित हैं, जिनकी कुल जनसंख्या 1235 है।
उन्होंने बताया कि “नियद नेल्ला नार योजना” के अंतर्गत कच्चापाल तक पक्की सड़क पहुँच चुकी है, जिससे जिला मुख्यालय तक आवागमन सुगम हुआ है।
श्री शर्मा ने कहा कि गांव में सुरक्षा कैम्प खुलने के बाद बिजली, पानी, सड़क और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं में बड़ा सुधार आया है।
“जो क्षेत्र कभी भय और हिंसा से ग्रस्त था, वहां अब शांति, समृद्धि और आत्मविश्वास लौट आया है। आदिवासी समाज अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।”
— विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री
श्री शर्मा ने कहा कि यदि कोई युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहता है, तो शासन उसकी हरसंभव सहायता करेगा।
उन्होंने बताया कि सरकार ने संवेदनशील पुनर्वास नीति बनाई है ताकि भटके हुए युवाओं को सुरक्षित भविष्य मिल सके।
उप मुख्यमंत्री ने ग्राम कच्चापाल में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन मकानों का भी निरीक्षण किया।
उन्होंने हितग्राहियों चंद्रिका वडडे और सोनाय बाई से चर्चा कर योजनांतर्गत प्राप्त राशि और निर्माण की प्रगति की जानकारी ली।
दोनों लाभार्थियों ने बताया कि उन्हें पीएम आवास के साथ स्वच्छ भारत मिशन से शौचालय निर्माण की सहायता भी प्राप्त हुई है।
निरीक्षण के पश्चात उन्होंने स्थानीय उद्यमी श्रीमती यशोदा के होटल का दौरा किया, वहां ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के साथ भोजन कर स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया।
उन्होंने ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड भी वितरित किए।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, उपाध्यक्ष प्रताप सिंह मंडावी, एडीजी विवेकानंद सिन्हा, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी, कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं, एसपी रॉबिंसन गुड़िया सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।
उप मुख्यमंत्री ने सीआरपीएफ कैम्प का निरीक्षण कर जवानों का मनोबल बढ़ाया
कच्चापाल में जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों से संवाद किया
पीएम आवास और शौचालय निर्माण कार्यों का निरीक्षण
हिंसा छोड़ने वाले युवाओं के लिए पुनर्वास नीति का उल्लेख
विकास योजनाओं की समीक्षा और आयुष्मान कार्ड का वितरण
? रिपोर्ट: शौर्यपथ संवाददाता
? स्थान: नारायणपुर, छत्तीसगढ़
पूजा-अर्चना कर क्षेत्र के सुख-शांति की कामना, बच्चों से संवाद में झलकी आत्मीयता
बोले – “हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, यही हमारी सरकार की प्राथमिकता है”
रायपुर | शौर्यपथ संवाददाता
छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने शनिवार को अपने नारायणपुर प्रवास के दौरान कच्चापाल स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम पहुंचकर पूजा-अर्चना की और क्षेत्र की सुख-शांति की कामना की।
उन्होंने आश्रम के प्राचार्य स्वामी वसुदानंद महाराज से मुलाकात कर क्षेत्रीय विकास और आश्रम की शैक्षणिक सुविधाओं पर चर्चा की।
श्री शर्मा ने आश्रम परिसर में पूजा-अर्चना के बाद कहा कि “रामकृष्ण मिशन जैसे संस्थान समाज में शिक्षा, सेवा और संस्कार के अद्भुत प्रतीक हैं।”
उन्होंने बताया कि शासन की प्राथमिकता शिक्षा और संस्कार को साथ लेकर चलने की है ताकि आने वाली पीढ़ी सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बन सके।
आश्रम में अध्ययनरत बच्चों से मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री ने उनसे बातचीत की और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए।
बच्चों की तत्परता और समझदारी देखकर उन्होंने प्रशंसा व्यक्त की।
?️ “आप सबकी जिज्ञासा और आत्मविश्वास देखकर खुशी हुई। अच्छे से पढ़िए, आगे बढ़िए और देश के विकास में योगदान दीजिए।”
— विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
उन्होंने बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया — यह दृश्य आत्मीयता और संवेदनशीलता का प्रतीक रहा।
बच्चों ने भी राज्य के उप मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर प्रसन्नता व्यक्त की।
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है।
उन्होंने बच्चों को बताया कि शासन द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा –
“यदि किसी भी बच्चे को शिक्षा में कोई कठिनाई होती है तो तुरंत जिला प्रशासन को अवगत कराएं। शासन आपके साथ है।”
उप मुख्यमंत्री ने कच्चापाल स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम का दौरा किया
पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-शांति की प्रार्थना की
बच्चों से आत्मीय संवाद और उनके साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया
आश्रम प्राचार्य स्वामी वसुदानंद महाराज से विकास और शिक्षा पर चर्चा
बच्चों को शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रेरित किया
? रिपोर्ट: शौर्यपथ संवाददाता
? स्थान: नारायणपुर, छत्तीसगढ़
जगदलपुर, शौर्यपथ। राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और शांति, संवाद एवं विकास पर केंद्रित सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग में आज नक्सल विरोधी मुहिम को ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ कार्यक्रम के अंतर्गत दण्डकारण्य क्षेत्र के 210 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
यह आत्मसमर्पण विश्वास, सुरक्षा और विकास की दिशा में बस्तर की नई सुबह का संकेत है। लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर क्षेत्र में यह ऐतिहासिक घटनाक्रम नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा अपनाई गई व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति ने क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव रखी है। पुलिस, सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और सजग नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हिंसा की संस्कृति को संवाद और विकास की संस्कृति में परिवर्तित किया जा सका है।
यह पहली बार है जब नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य सहित अनेक वरिष्ठ माओवादी नेता शामिल हैं। इन कैडरों ने कुल 153 अत्याधुनिक हथियार—जिनमें AK-47, SLR, INSAS रायफल और LMG शामिल हैं—समर्पित किए हैं। यह केवल हथियारों का समर्पण नहीं, बल्कि हिंसा और भय के युग का प्रतीकात्मक अंत है—एक ऐसी घोषणा, जो बस्तर में शांति और भरोसे के युग की शुरुआत का संकेत देती है।
मुख्यधारा में लौटने वाले प्रमुख माओवादी नेताओं में सीसीएम रूपेश उर्फ सतीश, डीकेएसजेडसी सदस्य भास्कर उर्फ राजमन मांडवी, रनीता, राजू सलाम, धन्नू वेत्ती उर्फ संतू, आरसीएम रतन एलम सहित कई वांछित और इनामी कैडर शामिल हैं। इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया।
यह ऐतिहासिक आयोजन जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में हुआ, जहाँ आत्मसमर्पित कैडरों का स्वागत पारंपरिक मांझी-चालकी विधि से किया गया। उन्हें संविधान की प्रति और शांति, प्रेम एवं नए जीवन का प्रतीक लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम ने कहा कि “पूना मारगेम केवल नक्सलवाद से दूरी बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने का अवसर है। जो आज लौटे हैं, वे बस्तर में शांति, विकास और विश्वास के दूत बनेंगे।” उन्होंने आत्मसमर्पित कैडरों से समाज निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर एडीजी (नक्सल ऑपरेशन्स) विवेकानंद सिन्हा, सीआरपीएफ बस्तर रेंज प्रभारी, कमिश्नर डोमन सिंह, बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी., कलेक्टर हरिस एस., बस्तर संभाग के सभी पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास सहायता राशि, आवास और आजीविका योजनाओं की जानकारी दी गई। राज्य शासन इन युवाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें।
मांझी-चालकी प्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर की परंपरा सदैव प्रेम, सहअस्तित्व और शांति का संदेश देती रही है। जो साथी अब लौटे हैं, वे इस परंपरा को नई शक्ति देंगे और समाज में विश्वास की नींव को और मजबूत करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में सभी आत्मसमर्पित कैडरों ने संविधान की शपथ लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि वे अब हिंसा के बजाय विकास और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में योगदान देंगे।
‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह क्षण केवल 210 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण का नहीं, बल्कि बस्तर में विश्वास, विकास और शांति के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन गया।
कोंडागांव। शौर्यपथ।
जिले के मछली विकासखंड बडेराजपुर (विश्रामपुरी ) जिला कोंडागांव में संयुक्त संचालक (मगर चौक बस्तर संभाग) द्वारा शिक्षकों के साथ किए गए अमानवीय व्यवहार को लेकर शिक्षक साझा मंच ने गंभीर आपत्ति जताई है। मंगलवार को मंच ने क्षेत्रीय विधायक नीलकंठ टेकाम को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि दिनांक 7 अक्टूबर को अधिकारी राकेश पांडे द्वारा एक शिक्षक को सिर्फ जीन्स पहनने के आधार पर कार्यालय से बाहर निकाल दिया गया।
ज्ञापन में कहा गया कि यह व्यवहार न केवल अपमानजनक है बल्कि शिक्षकों के आत्मसम्मान पर सीधा आघात करता है।शिक्षक प्रतिनिधियों ने ज्ञापन में दर्शाया कि विभाग के अन्य कर्मचारी भी कार्यालय में जीन्स पहनकर आते हैं, लेकिन एक विशेष शिक्षक को लक्षित कर अनुचित व्यवहार किया गया, जिससे शिक्षकों का मनोबल गिरा है। साथ ही आरोप लगाया गया कि ऐसी घटनाएं निजी द्वेष और अहंकार को दर्शाती हैं।
शिक्षक मंच एवं सर्व शिक्षा संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस अमानवीय कृत्य पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।ज्ञापन में यह भी उल्लेख है कि शिक्षकों का ड्रेस कोड लागू करते समय समानता और व्यवहार में पारदर्शिता रखना आवश्यक है। पीड़ित शिक्षक के साथ अन्याय को लेकर वायरल हुई तस्वीरें मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना रही हैं, जिससे विभागीय नियमों की निष्पक्षता सवालों के घेरे में है।
शिक्षक मंच ने प्रदेश के नवनियुक्त शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से अनुरोध किया है कि वे इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेकर आरोपित अधिकारी पर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस मामले से जुड़े सभी शिक्षक प्रतिनिधियों ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर अपने समर्थन की घोषणा की है।मुख्य बिंदु:जीन्स पहनने पर कार्यालय से बाहर निकालने की घटना।अधिकारी का शिक्षकों से अमानवीय व्यवहार।ज्ञापन में ड्रेस कोड को लेकर भेदभाव की शिकायत।शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से ठोस कार्रवाई की मांग।
कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी
यह घटनाक्रम जिले के शिक्षा विभाग में कर्मचारियों के अधिकार और सम्मान का बड़ा सवाल बनकर उभरा है, जिस पर अब प्रदेश सरकार और शिक्षा मंत्री की त्वरित प्रतिक्रिया और कार्रवाई की प्रतीक्षा है।
हर घर पहुंचा शुद्ध जल, 1495 लोगों ने पाया पानी का सुख
By - नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर जिले के जगदलपुर ब्लॉक का बुरुंदवाड़ा सेमरा गांव जल जीवन मिशन की बदौलत अब हर घर जल वाला गांव घोषित हो गया है। इस गांव के 1495 निवासियों को अब नल के माध्यम से घर बैठे शुद्ध पेयजल मिल रहा है।
समस्या से मुक्ति, जीवन में खुशी
बुरुंदवाड़ा सेमरा में पहले लोगों को पानी के लिए बोरिंग पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे पानी लाने में बहुत समय और मेहनत बर्बाद होती थी। गांव की सरपंच श्रीमती बुधरी बघेल और सचिव श्रीमती राधा नाग ने बताया कि पानी की जद्दोजहद के कारण लोग अक्सर थके रहते थे और बच्चे स्कूल भी नहीं जा पाते थे। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत गांव के सभी 209 घरों में नल कनेक्शन दिए गए हैं। इसके लिए गांव में 50 किलोलीटर क्षमता की टंकी और पाइपलाइन बिछाई गई। पानी पहुंचते ही गांव वालों की खुशी दुगुनी हुई है।
बढ़े स्वास्थ्य और शिक्षा
पानी की समस्या दूर होने से लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है, और सबसे बड़ी बात यह है कि अब स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है। अब महिलाओं का समय पानी लाने में बर्बाद नहीं होता, जिससे वे अपने और बच्चों पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं। साथ ही घर-परिवार के कार्य सहित खेती-किसानी के कार्य को भी आसानी के साथ कर रही हैं।
पानी का सही उपयोग
सरपंच और सचिव ने मिलकर गांव में जागरूकता फैलाई है। वे लोगों को समझा रहे हैं कि पानी का उपयोग उतनी ही मात्रा में करें जितनी जरूरत है, ताकि जलस्रोत का स्तर बना रहे। साथ ही भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए हर घर और सार्वजनिक स्थानों पर सोख्ता गड्ढा (भूजल रिचार्ज पिट) बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जल बढ़ेगा स्तर, तब बढ़ेगा जीवन स्तर के संकल्प के साथ बुरुंदवाड़ा सेमरा गांव एक मिसाल बन गया है कि सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन से कैसे एक समुदाय की तकदीर बदल सकती है।
By - नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौयपथ। हमने पूर्व में राजमहल परिसर में लगे मीना बाजार की सुरक्षा नियमों की अनदेखी और अव्यवस्थाओं पर समाचार प्रकाशित किया था, लेकिन विभाग के जिम्मेदारों ने आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। शहर के मीना बाजार में सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। "शौर्यपथ" ने बिना सेफ्टी बेल्ट, बिना जूते-हेलमेट के मजदूरों से ऊँचाई पर झूले लगवाए, झूले की अनुमति व फिटनेस जाँच , कटे तार ,मौत के कुएँ में 30 साल से अधिक पुरानी गाड़ियाँ बिना फिटनेस जाँच के चलवाई गईं। प्रवेश टिकट दरों पर न तो जीएसटी का उल्लेख है, न ही कोई अधिकृत दर सूची प्रदर्शित की गई और महिलाओं के लिए शौचालय की कोई सुसज्जित व्यवस्था भी नहीं की गई।
हम लगातार जिम्मेदारों को समाचार के माध्यम से अवगत कराते रहे, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय आदेशों में स्पष्ट लिखा है कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में संचालक जिम्मेदार होगा, फिर भी झूला संचालकों ने खुलेआम पोस्टर चिपकाकर लिखा — “दुर्घटना होने पर कंपनी जिम्मेदार नहीं।” यह सीधे-सीधे विभागीय आदेशों की अवहेलना है और जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़।
अब नया मोड़:
समाचार प्रकाशित होने के बाद RTO विभाग ने जांच के नाम पर महज़ खानापूर्ति की। जांच का उद्देश्य यह होना चाहिए था कि मौत के कुएँ के संचालन की अनुमति दी गई है या नहीं, और यदि दी गई है, तो किस नियम के तहत। लेकिन विभाग ने उस मुख्य सवाल से बचते हुए सिर्फ इतना बताया कि सभी गाड़ियों के दस्तावेज वैध हैं। प्रश्न यह उठता है कि क्या वैध दस्तावेज ही मौत के कुएँ में दौड़ने की अनुमति दे देते हैं? क्या विभाग ने यह परखा कि ये गाड़ियाँ तकनीकी रूप से ऐसे खतरनाक खेल के लिए फिट हैं या नहीं? क्या वाहन चालकों के द्वारा सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा है यां नहीं? और तो और, जिस अधिकारी को जिले के बड़े अधिकारी ने इसकी जाँच के लिए कहा था , उनके बारे में चर्चा है कि उन्हें मीना बाजार की व्यवस्था से ज़्यादा वहाँ के जीने और खाने की चिंता रहती है। ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना जनता के साथ मज़ाक है।
बाबा साहेब ने कहा था — “संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, अगर उसे चलाने वाले बुरे हैं तो वह बुरा साबित होगा।” आज यही सच मैदान में दिख रहा है। कानून है, आदेश हैं, लेकिन उन्हें लागू करने वाले जिम्मेदारों की नीयत सो चुकी है। अब सवाल यह नहीं कि नियम क्या हैं, बल्कि यह है कि नियमों को तोड़ने वाले और आँख बंद करने वाले कौन हैं?
जनता के जीवन से खेलने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं —
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक बेईमानी और संवेदनहीनता की चरम सीमा है।
अब सवाल सीधा है —
क्या विभाग जनता की सुरक्षा करेगा, या मीना बाजार की मौज में डूबे अधिकारी?
जगदलपुर, शौर्यपथ। नगरपालिक निगम जगदलपुर ने दीपावली पर्व के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। हर साल की तरह इस बार भी दीपावली के अवसर पर शहर में लाई, बताशा, दिया, फल-फूल और पूजा सामग्री बेचने वाले चिल्हर विक्रेताओं की भीड़ सड़कों पर देखने को मिलती थी, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न होती थी और लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था।
इस समस्या को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने इस वर्ष सभी चिल्हर विक्रेताओं के लिए “हाता ग्राउंड” को निर्धारित विक्रय स्थल के रूप में चयनित किया है। निगम आयुक्त ने सभी विक्रेताओं से अपील की है कि वे दीपावली पर्व से संबंधित सामग्री का विक्रय हाता ग्राउंड में ही करें।
नगर निगम का कहना है कि इस निर्णय से एक ओर जहां शहर में यातायात व्यवस्था दुरुस्त रहेगी, वहीं दूसरी ओर विक्रेताओं को भी एक व्यवस्थित स्थान पर अपने सामान की बिक्री का अवसर मिलेगा। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुख्य सड़कों, चौक-चौराहों या बाजार क्षेत्र में अतिक्रमण कर बिक्री करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
निगम प्रशासन ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है ताकि शहर में दीपावली का पर्व शांति, सौहार्द और स्वच्छ वातावरण में मनाया जा सके।
दीपक वैष्णव की ख़ास रिपोर्ट
कोंडागांव / शौर्यपथ /
माकड़ी ब्लॉक के कांटागांव स्थित आदिवासी कन्या छात्रावास में शनिवार सुबह एक 11 वर्षीय छात्रा ने टाई से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बच्ची पांचवीं कक्षा की छात्रा थी और पहली कक्षा से ही इस छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही थी। घटना सुबह करीब 10 बजे भोजन के समय की बताई जा रही है।
हादसा तब सामने आया जब एक अन्य छात्रा हॉस्टल के कमरे में गई और उसने छात्रा को खिड़की से टाई के सहारे लटकते देखा। उसने तत्काल शिक्षकों को सूचना दी। टाई को कैंची से काटकर छात्रा को नीचे उतारा गया और तुरंत माकड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सूचना में देरी और संदिग्ध रवैया
घटना की सूचना पर एसडीएम अजय उरांव, सहायक आयुक्त कृपेंद्र तिवारी, तहसीलदार, बीईओ और अन्य शिक्षा अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया।
हालाँकि, सूचना देने में देरी को लेकर छात्रावास प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
गांव के सरपंच मोतीराम मरकाम ने बताया कि उन्हें सुबह लगभग 10:45 बजे कॉल आया कि छात्रा बेहोश हो गई है। लेकिन बाद में पता चला कि छात्रा की मृत्यु हो चुकी थी। सरपंच के अनुसार, “घटना भोजन के समय की थी। उस वक्त कोई बच्चा अनुपस्थित था, तो स्टाफ को तुरंत पता चलना चाहिए था। सूचना में हुई देरी चिंताजनक है।”
वहीं, छात्रा के गांव के सरपंच लक्ष्मण नेताम ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “छात्रा को मंगलवार को ही आश्रम में छोड़ा गया था। वह पूरी तरह स्वस्थ थी। घटना सुबह 10 बजे की थी, पर परिजनों को दोपहर 12 बजे के बाद सूचना दी गई। हॉस्टल वार्डन या स्टाफ ने तत्परता नहीं दिखाई, जिससे संदेह पैदा होता है।”
कई सवालों के घेरे में छात्रावास व्यवस्था
यह घटना न केवल एक मासूम जीवन के असमय समाप्त होने की त्रासदी है, बल्कि छात्रावासों की देखरेख, निगरानी और मनोवैज्ञानिक समर्थन प्रणाली पर भी प्रश्न उठाती है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और परिजनों का कहना है कि यह जानना जरूरी है कि इतनी कम उम्र की छात्रा ने ऐसा कदम क्यों उठाया — क्या वह किसी मानसिक दबाव में थी, या फिर यह किसी लापरवाही का नतीजा है।
प्रशासन ने कहा – जांच के बाद होगी कार्रवाई
अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच के बाद कहा कि घटना अत्यंत संवेदनशील है और विस्तृत जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्र के लिए पीड़ा और चिंता का विषय
11 वर्ष की एक छात्रा का इस तरह असमय जाना पूरे क्षेत्र के लिए पीड़ा और चिंता का विषय बन गया है।परिजन और ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि आखिर उस बच्ची के मन में ऐसा क्या चल रहा था जिसने उसे यह कदम उठाने पर विवश किया — क्या यह मासूम मन का मौन दर्द था या किसी और की चूक का परिणाम? जवाब अब जांच से ही मिल सकेगा।
पूर्व सैनिकों ने बच्चों को बताया भारतीय वायुसेना का गौरवशाली इतिहास, बढ़ाई देशभक्ति की भावना
जगदलपुर, शौर्यपथ। 93वें भारतीय वायुसेना दिवस के अवसर पर बस्तर के जिला सैनिक कल्याण कार्यालय, जगदलपुर परिसर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर बस्तर के पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों ने स्कूली बच्चों के साथ भारतीय वायुसेना के शौर्य, पराक्रम और गौरव का उत्सव मनाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देने के साथ किया गया। तत्पश्चात विंग कमांडर जे. पी. पात्रो (सेवानिवृत्त), जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ने बच्चों को भारतीय वायुसेना के गौरवशाली इतिहास, उसकी भूमिका और राष्ट्र की सुरक्षा में उसके अद्वितीय योगदान के बारे में विस्तार से बताया।
कल्याण आयोजक सूबेदार अरविंद कुमार ने बच्चों को सशस्त्र बलों में शामिल होकर देशसेवा के लिए प्रेरित किया। वहीं सूबेदार भानु प्रताप द्विवेदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सहित विभिन्न अभियानों में वायुसेना की वीरता की झलकियां साझा कीं। समारोह का संचालन हवलदार तोप सिंह द्वारा किया गया।
बच्चों के साथ उपस्थित शिक्षकों ने भी इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में देशभक्ति और अनुशासन की भावना का विकास होता है।
कार्यक्रम के अंत में पूर्व सैनिकों ने संकल्प लिया कि वे भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को प्रेरित करते रहेंगे, ताकि बस्तर के बच्चे भी एक दिन नीली वर्दी पहनकर आसमान में देश का गौरव बढ़ाएं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
