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उप मुख्यमंत्री शर्मा पहुंचे नक्सलियों की मांद कहलाने वाले ग्राम किसकोड़ो, ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं
आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा किसकोड़ो - उप मुख्यमंत्री शर्मा
रायपुर / कभी नक्सल संगठन का मजबूत गढ़ और बस्तर में नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम किसकोड़ो में शुक्रवार 26 जून को ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जिस स्थान पर कभी नक्सलियों की चौपाल लगती थी, वहीं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने देर शाम को ग्रामीणों के बीच जनचौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं। वर्षों तक भय और हिंसा का दंश झेल रहा यह गांव अब लोकतंत्र, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है।
गांव पहुंचने पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद किया और एक-एक व्यक्ति की समस्याएं, मांग एवं सुझाव गंभीरता से सुनी। इस दौरान ग्राम किसकोड़ो सहित आसपास की आठ पंचायतों के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
ग्रामीणों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, विद्युत व्यवस्था, बंडापाल में सब-स्टेशन निर्माण, खाद भंडारण केंद्र, स्कूल की बाउंड्रीवाल तथा मातला मार्ग पर पाइप पुलिया निर्माण जैसी अनेक मांगें रखीं। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश देते हुए अस्पताल तक मरीजों के आवागमन के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने तथा विद्युत व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसकोड़ो को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। यहां पहुंचे ग्रामीणों में अपने क्षेत्र के विकास के लिए उत्साह देखकर उप मुख्यमंत्री ने कहा वर्षों तक डर के साए में रहने के बाद जल्द से जल्द विकास करने की जो ललक आज ग्रामीणों में दिख रही है वह अविश्वसनीय है।
उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 तक किसकोड़ो एरिया कमेटी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र थी, जिसे अब नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया जा चुका है। हाल ही में गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए बोर खनन कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किसकोड़ो का निरीक्षण भी किया।
जनचौपाल में ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि पहले यहां नक्सलियों की चौपाल लगती थी, आज पहली बार शासन के उप मुख्यमंत्री की चौपाल लगी है। यह किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि पहले शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। बच्चों को जबरन नक्सली संगठन में शामिल करने का प्रयास किया जाता था और सरकारी कर्मचारी भी यहां पदस्थापना होने के बावजूद कार्यभार ग्रहण करने से कतराते थे। आज वही गांव विकास, सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से कहा कि कभी भय और बंदूक की पहचान रखने वाला किसकोड़ो अब विकास, विश्वास और लोकतंत्र का नया प्रतीक बनकर उभर रहा है। यहां गूंज रहे "भारत माता की जय" के उद्घोष इस बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को जैविक कृषि के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बेहतर प्रशिक्षण के साथ उनका सर्टिफिकेशन करने की भी आवश्यकता है, आसपास की सभी पंचायतों को मिलाकर ब्रांडिंग का कार्य किया जाए। उन्होंने लघु वनोपज प्रसंस्करण के लिए व्यवस्था निर्माण के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर कांकेर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एएसपी आकाश श्रीश्रीमाल, जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी, एडीएम एएस पैकरा, एसडीएम अंतागढ़ राहुल रजक सहित अन्य अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। बोधघाट थाना क्षेत्र से हाटकचोरा एवं करकापाल जाने वाले मार्ग के दोनों ओर संबंधित विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर "कचरा फेंकना मना है" संबंधी सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की प्रवृत्ति को रोकना और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया जाता है।
हालांकि, मार्ग से गुजरने वाले कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं, उनमें से कई स्थानों के आसपास कचरा दिखाई देता है। इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि केवल सूचना बोर्ड लगाने से अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो रहे हैं या नहीं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूकता के साथ-साथ नियमित निगरानी, कचरा संग्रहण की पर्याप्त व्यवस्था तथा नियमों के प्रभावी पालन की भी आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि प्रतिबंध संबंधी सूचनाओं के साथ व्यवहारिक प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत हो, तो सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की समस्या में कमी लाई जा सकती है।
क्षेत्र के कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सूचना बोर्ड लगाने पर सार्वजनिक धन खर्च किया गया है, इसलिए समय-समय पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि अभियान अपने उद्देश्य की पूर्ति कर रहा है या नहीं।
स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर कार्य करने वाले जानकारों का मानना है कि किसी भी जागरूकता अभियान की सफलता केवल संदेश प्रसारित करने से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से तय होती है। ऐसे में संबंधित क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था की नियमित समीक्षा किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने किया योगाभ्यास, स्वस्थ जीवन के लिए नियमित योग अपनाने का दिया संदेश
रायपुर, / नारायणपुर जिले के कोटमहर गार्डन में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता करते हुए सामूहिक योगाभ्यास किया तथा जिलेवासियों को स्वस्थ जीवन के लिए नियमित योग अपनाने का संदेश दिया।
मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि योग भारत की प्राचीन एवं अमूल्य धरोहर है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज विश्व के अनेक देशों में लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है। योग तनाव को कम करने, कार्यक्षमता बढ़ाने और सकारात्मक जीवनशैली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सभी नागरिकों से प्रतिदिन योग करने तथा अपने परिवार और समाज को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की।
सामूहिक योगाभ्यास में बड़ी संख्या में शामिल हुए नागरिक
योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास किया। साथ ही योग के स्वास्थ्य लाभों और उसके महत्व की विस्तृत जानकारी भी दी गई।
जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारिता लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नारायण मरकाम, नगर पालिका अध्यक्ष श्री इंद्रप्रसाद बघेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री प्रताप सिंह मंडावी, पुलिस अधीक्षक श्री रॉबिंसन गुड़िया, जिला पंचायत सीईओ सुश्री आकांक्षा शिक्षा खलखो, डीएफओ डॉ. वेंकटेशा एम.जी., अपर कलेक्टर श्री बीरेंद्र बहादुर पंचभाई तथा एसडीएम श्री अभयजीत मंडावी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी एवं नागरिक उपस्थित रहे।
योग को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प
योग दिवस के इस आयोजन ने जिलेवासियों को स्वास्थ्य, सकारात्मकता और अनुशासित जीवनशैली का संदेश दिया। उपस्थित सभी लोगों ने योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने तथा स्वस्थ एवं निरोग समाज के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रहित एवं जनकल्याण की कामना के साथ हुआ।
मुख्यमंत्री ने 86.75 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुए 46 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 516.70 करोड़ रुपये की लागत वाले 30 नए विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से जिले के विकास को नई गति मिलेगी और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों, महिलाओं, युवाओं, आदिवासियों और गरीब परिवारों के कल्याण के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के तहत लगभग 757 करोड़ रुपये के बकाया बिजली बिलों में राहत दी जा रही है। वहीं प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के माध्यम से सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक 26 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हो चुके हैं, जिनमें से लगभग 19.70 लाख आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 18,165 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हितग्राहियों के खातों में अंतरित की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर रही है। कृषक उन्नति योजना के तहत अंतर की राशि भी दी जा रही है। उन्होंने किसानों को आधुनिक खेती अपनाने और नैनो यूरिया के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक को 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया है, जिससे लाखों वनवासियों की आय बढ़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान सुपेबेड़ा क्षेत्र की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या के समाधान के लिए तेल नदी पर 7 करोड़ रुपये की लागत से एनीकट निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिससे क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गरियाबंद आदिवासी बहुल जिला है, जहां कमार और भुंजिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियां निवास करती हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आवास और आजीविका के क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने गरियाबंद की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि राजिम, राजीव लोचन मंदिर और कुलेश्वर महादेव मंदिर जैसे आस्था केंद्रों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
कार्यक्रम में खाद्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दयालदास बघेल, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, राजिम विधायक रोहित साहू, छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष चंदूलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे।
कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिला मुख्यालय में इन दिनों पेट्रोल और डीजल की अचानक कमी से आम जनता और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने की स्थिति बन गई है, वहीं कुछ पंपों को अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से ही कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कई उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इस स्थिति ने परिवहन व्यवस्था के साथ-साथ कृषि कार्यों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
मामले की पड़ताल के लिए आसपास के जिलों—कांकेर, नारायणपुर और जगदलपुर—में संपर्क किया गया, जहां से जानकारी मिली कि वहां पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सामान्य रूप से आपूर्ति जारी है। ऐसे में कोंडागांव में ही इस तरह की किल्लत सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब आसपास के जिलों में पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है, तो कोंडागांव में कमी क्यों? क्या यह कृत्रिम संकट पैदा कर कीमत बढ़ने की आशंका में ईंधन का भंडारण (डंपिंग) किया जा रहा है? या फिर कालाबाजारी के लिए आपूर्ति को जानबूझकर रोका जा रहा है?
इस मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आम नागरिकों और किसानों ने जिला प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करने और ईंधन की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्दी करता है और जनता को राहत कब तक मिल पाती है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बदली तस्वीर, ग्रामीणों को मिली आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा
रायपुर, / बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के अतिसंवेदनशील और पूर्व नक्सल प्रभावित अबुझमाड़ क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण कार्य ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। वर्षों तक विकास से दूर रहे मयूरीपारा तक अब सड़क पहुंचने से लोगों को बेहतर आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलने लगा है।
16 किलोमीटर सड़क निर्माण से जुड़ रहा दूरस्थ क्षेत्र
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बैल से मयूरीपारा तक 16 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना में अब तक 13 किलोमीटर मिट्टीकृत सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। साथ ही मुरूमीकरण और छह पुलियों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शेष कार्य जून माह में पूरा कर लिया जाएगा।
दुर्गम रास्तों से मिल रही राहत
ग्राम बैल की सरपंच श्रीमती जुग्गी अठामी ने बताया कि लंबे समय तक सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य कार्यों के लिए घने जंगलों से होकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। बरसात के मौसम में नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था, जिससे समय और परेशानी दोनों बढ़ जाते थे। उन्होंने बताया कि आजादी के 78 वर्षों बाद भी यह क्षेत्र नक्सल प्रभाव और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर था। अब सड़क निर्माण से हालात तेजी से बदल रहे हैं और लोगों को बड़ी राहत मिली है।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मिला नया आधार
सड़क बनने से स्कूली बच्चों का आवागमन आसान हुआ है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर हुई है। अब जरूरत पड़ने पर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना संभव हो रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी सुविधा मिल रही है।
विकास और समृद्धि की नई उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद है। बैल से मयूरीपारा मार्ग के पूर्ण होने के बाद क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से अबुझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।
बस्तर / शौर्यपथ / सुकमा के जंगलों के बीच मैदान में युवाओं को क्रिकेट खेलते देख उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव खुद को रोक न सके। उन्होंने गाड़ी रुकवाई, खिलाडिय़ों के बीच मैदान में पहुंचे और क्रीज पर जाकर बैट थाम लिया। टूर्नामेंट खेल रहे कुशल गेंदबाजों की गेंदों पर कुछ करारे शॉट भी लगाए। यह बदलते बस्तर की खुशनुमा तस्वीर है।
किरंदुल से सुकमा के रास्ते का यह मुनगा गांव था जहां श्री साव ने मैदान में बल्ला भांजा। सुकमा जिले के ग्राम पंचायत कोर्रा का आश्रित गांव है यह। मैदान पर खेलने के लिए जुटे युवाओं से पता चला कि यहां 7 जून से क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा है जिसमें आसपास के गांवों की 16 टीमों ने भाग लिया है। मैदान के एक छोर पर खिलाडिय़ों का झुंड तो दूसरे छोर पर दर्शकों का झुंड था।
उप मुख्यमंत्री साव ने कुछ गेंदे खेलने के बाद पिच पर ही खिलाडिय़ों से अपने सहज-सरल अंदाज में बातचीत शुरू की, जिससे इस टूर्नामेंट की जानकारी मिली। उन्होंने खिलाडिय़ों के मांगे बिना ही सभी 16 टीमों को क्रिकेट किट देने का वादा किया, जिससे वे पूरे साजो-सामान के साथ अपने खेल का आनंद ले सकें। श्री साव से चर्चा के बीच खिलाडिय़ों ने खेल मैदान की कमी की बात रखी, जिस पर उन्होंने कलेक्टर को निर्देशित कर समुचित व्यवस्था का आश्वासन दिया।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव इन दिनों चार दिनों के बस्तर प्रवास पर हैं। वे रोज दिनभर निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं का निरीक्षण कर रहे हैं। साथ ही अधिकारियों की बैठक लेकर इनकी प्रगति की समीक्षा भी कर रहे हैं। बस्तर संभाग के प्रगतिरत काम जल्दी कैसे पूरे हों... अप्रारंभ कार्यों को तत्काल शुरू कर कैसे तेजी से अंजाम तक पहुंचाएं, इन पर बैठकों में मंथन भी कर रहे हैं।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन पर लगाम कसने के लिए खनिज विभाग द्वारा लगातार सख्त और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। संचालक खनिज एवं बस्तर कलेक्टर के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जिला खनिज जांच उड़नदस्ता दल ने विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर अवैध कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 36 वाहनों को जब्त किया है।
खनिज विभाग की इस सक्रियता को जिले में प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभागीय टीम ने उपनपाल, देवड़ा, कोडेनार, बड़ेआमाबाल, कोरपाल, बेलगांव, धरमपुरा, जगदलपुर, कुम्हरावंड, पिपलावंड, बजावंड, बडांजी, तारापुर और बनियागांव सहित कई क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण किया। जांच के दौरान अवैध रूप से रेत एवं चुना पत्थर का उत्खनन, परिवहन और भंडारण करते पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए सभी वाहनों को पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया गया है, वहीं चार भंडारणकर्ताओं के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनिज गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमावली 2015 एवं खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1967 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
खनिज विभाग की इस मुहिम से अवैध खनिज कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं आम लोगों में प्रशासन की सक्रियता को लेकर सकारात्मक संदेश गया है। विभागीय अधिकारियों की सतर्कता और मैदान स्तर पर लगातार निगरानी से यह साफ संकेत मिला है कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस अभियान में खनि अधिकारी शिखर चेरपा, सहायक खनि अधिकारी जागृत गायकवाड, खनि निरीक्षक अंकित पुरी, अनि सिपाही डिकेश्वर खरे, नगर सैनिक विजय कश्यप, कृष्णा बघेल एवं सहदेव बघेल सहित जिला खनिज जांच उड़नदस्ता दल के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कोंडागांव, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद कोंडागांव जिला 2012 से जिला घोषित हो गया था जिसके बाद से अब तक जिले में सभी जिलेवासियों को शासन की सभी योजनाओं को पूरा किया जा रहा है । मगर एक तरफ ध्यान दिया जाए तो एक बड़ी बात सामने आती है देश एक कठनाई से गुजर रहा है जहाँ पेट्रोल व डीजल की किल्लत देखा जा रहा है।
वही अगर बात करे कोंडागांव की तो
न्यायालय कैदियों को जगदलपुर या नारायणपुर जेल भेजती है जो कोंडागांव मुख्यालय से 60 से 50 किलोमीटर दूर पड़ता है जहाँ रोजना कैदियों को लाने में मशक्कत की जाती है अगर कोंडागांव जिला मुख्यालय में भी एक जेल या उप जेल बन जाए तो पुलिस को राहत मिलेगी।
समस्या क्या है?
कोंडागांव को 2012 में जिला घोषित किया गया था
इसके बावजूद यहां अभी तक जिला जेल/उप-जेल नहीं है
कोर्ट (न्यायालय) से कैदियों को जगदलपुर या नारायणपुर भेजा जाता है
यह दूरी लगभग 50–60 किलोमीटर है
इससे क्या दिक्कतें हो रही हैं?
पुलिस को रोज कैदियों को ले जाने में अधिक मेहनत और संसाधन खर्च
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच आर्थिक बोझ
सुरक्षा जोखिम भी बढ़ता है (लंबी दूरी पर ट्रांजिट)
कैदियों और उनके परिजनों को असुविधा
अब देखने वाली बात होगी कि शौर्यपथ की इस खबर से जिला प्रशासन व शासन क्या कदम उठाएगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
