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June 24, 2026
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बस्तर

बस्तर (1102)

संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक के समापन में भारतीय फुटबॉल के महानतम खिलाड़ी की प्रेरणा से बस्तरिया नौजवान खिलाड़ियों का बढ़ा जोश

जगदलपुर, शौर्यपथ। संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक का भव्य समापन समारोह इस बार एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। इस अवसर पर भारतीय फुटबॉल के महानतम खिलाड़ियों में से एक, बाईचुंग भूटिया ने कार्यक्रम में शिरकत की, जिनकी उपस्थिति ने पूरे माहौल में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। अपने चहेते खिलाड़ी को अपने बीच पाकर बस्तर के नौजवान खिलाड़ी अत्यधिक उत्साहित और रोमांचित हो उठे।

      बाईचुंग भूटिया, जिन्हें भारतीय फुटबॉल में सिक्किमी स्निपर के नाम से जाना जाता है, विशेष रूप से संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक के समापन अवसर पर जगदलपुर पहुँचे थे। उन्होंने केवल अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि खिलाड़ियों के बीच पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से उनका उत्साह बढ़ाया और खेल के प्रति उनके समर्पण तथा जुनून की सराहना की।

      बाईचुंग भूटिया का नाम भारतीय फुटबॉल के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। वह यूरोपियन क्लब (इंग्लैंड के बरी फुटबॉल क्लब) के लिए खेलने वाले पहले भारतीय फुटबॉलर बने थे, जिसने भारतीय प्रतिभा के लिए वैश्विक द्वार खोले। लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करने और 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का उनका रिकॉर्ड आज भी प्रेरणास्रोत है। खेल में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार और देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया है।

     एक ऐसे खिलाड़ी, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया, उनके प्रेरक शब्द और सहज उपस्थिति ने बस्तर के खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाया कि वे भी बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। स्थानीय युवा खिलाड़ियों की आँखों में एक चमक और अपने सपनों को साकार करने का एक नया जोश साफ दिखाई दिया। बस्तर ओलम्पिक का यह समापन समारोह अब बाईचुंग भूटिया की यादगार यात्रा के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा, जिसने बस्तर की खेल प्रतिभाओं को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की है।

जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर ओलम्पिक का समापन समारोह स्थानीय इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में आयोजित किया गया, जहाँ नारायणपुर के मलखम्भ खिलाड़ियों ने अपने अविश्वसनीय प्रदर्शन से पूरे स्टेडियम को स्तब्ध कर दिया। इस प्राचीन भारतीय कला और खेल के महारथियों ने अपनी अद्भुत साहस और उत्कृष्ट सन्तुलन का ऐसा नजारा पेश किया कि दर्शक अपनी सीटों से हिल नहीं पाए और दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो गए।

       खिलाड़ियों ने ऊँचे, चिकने लकड़ी के खंभे और लोहे के पतले खंभे पर जिस सहजता और नियंत्रण के साथ जोखिम भरे आसन किए, वह उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण को दर्शाता है। गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती उनकी कलाबाजियाँ और शारीरिक लचीलापन हर किसी के लिए प्रेरणादायक था। यह प्रदर्शन केवल खेल का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि देश के इस पारंपरिक खेल की गरिमा और सुंदरता का एक जीवंत प्रमाण था। नारायणपुर के इन युवा खिलाड़ियों के हैरतअंगेज प्रदर्शन ने बस्तर ओलम्पिक के समापन अवसर को न केवल यादगार बना दिया, बल्कि इस क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं की उत्कृष्टता को भी राष्ट्रीय पटल पर स्थापित कर दिया।

केंद्रीय मंत्री तोखन साहू की गरिमामयी उपस्थिति में गूंजेगी कलम के सिपाहियों की आवाज

कोंडागांव, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ प्रखर पत्रकार महासंघ' के प्रदेश अध्यक्ष विनय मिश्रा ने जानकारी दिए की आगामी 21 दिसंबर को आयोजित होने वाले विशाल 'पत्रकार महासम्मेलन' की रूपरेखा पूरी तरह से तैयार कर ली गई है। संगठन के पदाधिकारियों द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में इस महासम्मेलन के सफल क्रियान्वयन के लिए अंतिम मुहर लगा दी गई है, जिसके बाद से तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है।

 

लखीराम ऑडिटोरियम में होगा भव्य समागम

प्रदेश महासचिव पंकज खंडेलवाल ने बताया है की महासम्मेलन के लिए बिलासपुर के प्रतिष्ठित लखीराम ऑडिटोरियम का चयन किया गया है। 21 दिसंबर को यह ऑडिटोरियम प्रदेश भर से जुटने वाले पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और समाज के प्रबुद्ध जनों से खचाखच भरा रहेगा। कार्यक्रम की भव्यता को देखते हुए तैयारियों को युद्ध स्तर पर अंजाम दिया जा रहा है। मंच सज्जा से लेकर अतिथियों  के स्वागत और भोजन तक की व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है, ताकि कार्यक्रम में शामिल होने वाले किसी भी पत्रकार साथी को असुविधा का सामना न करना पड़े।

 

केंद्रीय मंत्री तोखन साहू होंगे मुख्य अतिथि

प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष उमाकांत मिश्रा के द्वारा बताया गया कि इस महासम्मेलन की गरिमा बढ़ाने के लिए भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनकी स्वीकृति प्राप्त होने के बाद संगठन में उत्साह का माहौल है। केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति न केवल इस आयोजन को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की भूमिका को सशक्त बनाने के लिए शासन और प्रशासन भी गंभीर है। उम्मीद की जा रही है कि श्री तोखन साहू पत्रकारों के हितों, उनकी सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं पर अपने महत्वपूर्ण विचार रखेंगे और संगठन का मार्गदर्शन करेंगे।

 

पत्रकारिता के सरोकार और भविष्य पर मंथन

छ.ग. प्रखर पत्रकार महासंघ' के प्रदेश कोषाध्यक्ष  अध्यक्ष राजेंद्र कश्यप ने कहा यह आयोजन केवल एक मिलन समारोह नहीं, बल्कि पत्रकारिता के गिरते स्तर को संभालने और पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक वैचारिक महाकुंभ होगा। महासम्मेलन के दौरान पत्रकार सुरक्षा कानून, फील्ड रिपोर्टिंग में आने वाली चुनौतियां और डिजिटल युग में मीडिया की भूमिका जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। संगठन का उद्देश्य प्रदेश के सुदूर वनांचलों से लेकर शहरों तक काम करने वाले पत्रकारों को एक मंच पर लाना है, ताकि वे अपनी आवाज बुलंदी से उठा सकें।

 

संपन्न हुई रूपरेखा बैठक

जिला अध्यक्ष कमल दुसेजा ने बताया की हाल ही में संपन्न हुई संगठन की उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश भर के जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में कार्यक्रम की मिनट-टू-मिनट रूपरेखा तय की गई। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि 21 दिसंबर का यह आयोजन छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

 

आयोजन में शामिल होने की अपील

संघ के जिला उपाध्यक्ष एवं जिला महासचिव गौतम बाल बोंदरे  और कोर कमेटी ने छत्तीसगढ़ के समस्त पत्रकार साथियों, छायाकारों और मीडिया कर्मियों से अपील की है कि वे 21 दिसंबर को बिलासपुर के लखीराम ऑडिटोरियम में भारी संख्या में पहुंचकर अपनी एकता का परिचय दें। यह आयोजन संगठन की शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ आपसी भाईचारे को मजबूत करने का एक स्वर्णिम अवसर है।

कार्यक्रम में उपस्थित थे प्रदेश अध्यक्ष विनय मिश्रा प्रदेश महासचिव पंकज खंडेलवाल प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष उमाकांत मिश्रा प्रदेश कोषाध्यक्ष राजेंद्र कश्यप प्रदेश सचिव सुधीर तिवारी प्रदेश सचिव अजय द्विवेदी प्रदेश सचिव उमा साहू जिला अध्यक्ष कमल दुसेजा जिला उपाध्यक्ष भूषण प्रसाद श्रीवास जिला महासचिव गौतम बाल बोदंरे जिला सचिव उमाशंकर शुक्ला मीडिया प्रभारी यू मुरली राव बिल्हा ब्लॉक अध्यक्ष रूपचंद अग्रवाल जिला सदस्य पवन वर्मा रमेश यादव रमेश गोयल संजय ठाकुर जितेन्द्र पोर्तें रंजीत खनूजा दुर्गेश मरावी दिव्यांग सोनी मोहन मदवानी अजय साहू अनिल यादव अरविन्द परिहार रोहिणी अग्रवाल गीता सोंचे पुष्पा साहू लता गुप्ता रेशमा लहरे आदि उपस्थित थे।

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर में सालों तक सड़कें तब टूटती थीं जब नक्सली IED फोड़ते थे। पुल-पुलिया उड़ जाते थे, रास्ते गायब हो जाते थे, और लोग समझते थे यह यहां की मजबूरी है, हालात हैं। लेकिन आज दिल को जो चीर देने वाली तस्वीर सामने है, वह किसी विस्फोट की नहीं… यह भ्रष्टाचार के फटने की तस्वीर है। और यही डर भी है कि कहीं यह बस्तर में आने वाले समय की “नई सामान्य घटना” न बन जाए।

तोकापाल ब्लॉक की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना वाली Nh -16 KM 476.60 से पटेलपारा लम्बाई 5.20 किलोमीटर लगभग 72 लाख रुपए की सड़क, जो गांव की एकमात्र जीवन-रेखा थी, आज मौत के गड्ढे में बदल चुकी है। जहां कभी रास्ता था, वहां अब सड़क हवा में झूलती और नीचे मिट्टी पूरी तरह धंसी हुई दिखती है। गांव वाले रोज़ इसी टूटे हुए खड्डे के किनारे से गुजरने को मजबूर हैं। कई बार बड़ा हादसा टल चुका है, लेकिन जिम्मेदारों की तरफ से अब तक ना चेतावनी बोर्ड, ना मरम्मत, ना निरीक्षण, सिर्फ खामोशी।

 

यह हाल देखकर यही लगता है—

यहां डामर नहीं बहा… जिम्मेदारी बह गई।

यहां मिट्टी नहीं धंसी… ईमानदारी धंस गई।

यहां सड़क नहीं टूटी… सिस्टम की आत्मा टूट गई।

 

और सबसे ज्यादा चुभने वाली बात यह कि

जनप्रतिनिधि-विशेषकर विधायक साहब—इस खाई के सामने भी खामोश बैठे हैं। मंचों से विकास की गूंज, पोस्टरों में चमकते वादे, फोटोशूट में मुस्कान… पर इस सड़क पर विकास का चेहरा घावों से भरा दिखाई देता है।

 

विधायक क्षेत्र के इस हालत पर लोगों ने यह भी कहा कि

“अगर यह सड़क विधायक के घर तक जाती, तो क्या इतने दिन चुप्पी रहती?” यह सवाल किसी की भावना नहीं, बल्कि असल दर्द है।

विभागीय अधिकारी और कर्मचारी भी जनता के निशाने पर हैं।

जिन्हें निर्माण की गुणवत्ता देखनी थी, निरीक्षण करना था, उसी सड़क की हालत आज उनके हस्ताक्षरों और स्वीकृति पर सबसे भीषण सवाल खड़ा कर रही है।

गांव में चर्चा साफ-साफ है—

“सड़क नहीं टूटी… अधिकारियों की नीयत टूटी है।” 72 लाख की सड़क पहली बरसात भी नहीं झेल पाई।अगर यह भ्रष्टाचार नहीं, तो फिर क्या है? अगर यह लापरवाही नहीं, तो फिर किसे कहेंगे? और कार्रवाई के इंतजार में जनता पूछ रही है—क्या किसी की मौत का इंतज़ार किया जा रहा है, साहब?

ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच, घटिया निर्माण की जिम्मेदारी, और ठेकेदार से लेकर फाइल पास करने वाले अधिकारी तक हर स्तर पर कार्रवाई की जाए। क्योंकि जनता का सब्र अब अंतिम सीमा पर है, और गांव की आवाज़ पहले से कहीं ज्यादा तीखी— “सड़क कट गई तो क्या हुआ… अब जिम्मेदारों की कुर्सी कटनी चाहिए, साहब!”

 

छत्तीसगढ़ ग्राम सड़क विकास अभिकरण विभाग के SDO धनंजय देवांगन ने इस मामले पर कुछ भी कहने से साफ मना कर दिया।

PWD की आंखें बंद—ठेकेदार की हिम्मत बुलंद, सड़कें बनते ही उखड़ रहीं!

 

By- नरेश देवांगन

जगदलपुर, शौर्यपथ। नगर निगम क्षेत्र में PWD विभाग द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से चल रहा बी.टी. पैच रिपेयर कार्य अब जगदलपुर शहर की सड़कों से ज्यादा विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा है। काम अभी पूरा भी नहीं हुआ, लेकिन जहाँ-जहाँ नया डामर डाला जा रहा है, वहाँ कुछ ही घंटों में डामर उखड़कर सड़क की असली सूरत सामने आने लगी है। मानो करोड़ों का यह प्रोजेक्ट सड़क सुधार का नहीं, बल्कि सड़क उजाड़ने का ठेका लेकर किया जा रहा हो। शहर में चर्चा है—“डामर से ज़्यादा कमीशन की परत चढ़ाई गई है!”

सबसे बड़ी हैरानी यह है कि इतनी बड़ी परियोजना की निगरानी जिस अधिकारी को करनी चाहिए वही मौके से नदारद बताए जा रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी की गैरमौजूदगी और सुस्त देखरेख ने ठेकेदार को इतना बेलगाम कर दिया है कि वह खुलेआम घटिया काम कर रहा है, जैसे शहर उसकी निजी जागीर हो? लोग तंज कस रहे हैं—“जब साहब आंखें मूंदे बैठे हैं, तो ठेकेदार क्यों न काम में आंख मारे!”

यह भी कम चौंकाने वाली बात नहीं कि शहर के कई ऐसे सड़क है जिससे रोज शहर के VIP गुजरते हैं। लेकिन फिर भी घटिया गुणवत्ता वाला पैच रिपेयर ऐसे डाला जा रहा है जैसे सड़क पर गड्ढे नहीं, बल्कि जनता की समझदारी और धैर्य पैच किए जा रहे हों। शहरवासियों का गुस्सा इस बात पर और भड़क रहा है कि VIP एक्सेस वाली इस सड़क पर जब इतनी बड़ी लापरवाही हो सकती है, तो बाकी शहर का क्या हाल किया जाएगा? साफ संदेश मिल रहा है “जिम्मेदारों की चुप्पी ही ठेकेदार की ताकत है।”

लोग सवाल उठा रहे हैं—क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कार्यपालन अभियंता श्री बत्रा ने गुणवत्ता देखने की जिम्मेदारी ठेकेदार के भरोसे छोड़ दी है? क्या इस पैच रिपेयर में डामर से ज्यादा कुछ और बह रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं कि निरीक्षण की फाइलों में सब कुछ सही है, और जमीन पर सिर्फ दुकानदारों और आम जनता के पैसे बह रहे हैं? यह भी चर्चा गर्म है कि कुछ “चार पैसे” की चमक ने विभागीय आंखों पर ताला लगा दिया है, और उसी का फायदा उठाकर ठेकेदार शहर की सड़कों को प्रयोगशाला समझकर खेल खेल रहा है?

करोड़ों का यह काम यदि ऐसे ही चलता रहा तो शहर के गड्ढे तो भरेंगे नहीं, पर PWD की जवाबदेही के गड्ढे जरूर और गहरे होते जाएंगे। जनता ने स्पष्ट कहा है—यह सिर्फ खराब सड़क का मामला नहीं, बल्कि विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से होने वाले सफेदपोश भ्रष्टाचार की बू है, जिसे अब छुपाना मुश्किल हो रहा है। लोगो का कहना है की जरूरत इस बात की है कि पूरे काम की तत्काल उच्च स्तरीय जांच हो, ठेकेदार को रोका जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।

 

और अब बात PWD के ‘भाग्य-विधाता’ श्री बत्रा साहब की…

इस विषय पे कार्यालय पहुँच, मुँह खोलकर सवाल रखने से पहले हि साहब बिना कुछ सुने ही अपने आप बोलने लगे— “अभी टाइम नहीं है… मीटिंग में जाना है… बाद में बात करेंगे…” लग ही नहीं रहा था कि कोई अधिकारी जनता के सवालों का सामना कर रहा है; बल्कि ऐसा लगा जैसे सवाल सुनने की ज़िम्मेदारी भी किसी और विभाग को ठेके पर दे दी गई हो!

साहब का व्यवहार बिल्कुल ऐसा—जवाबदेही नहीं, बल्कि सवाल पूछना ही अपराध हो गया हो। काम की गुणवत्ता सड़क पर लोटपोट है, पर साहब का एटीट्यूड?

जिम्मेदारी से भागने का रफ्तार VIP स्पीड साहब!

शहीदों को नमन करने सहित पूर्व सैनिकों का किया गया सम्मान

​जगदलपुर, शौर्यपथ। देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों के पुण्य स्मरण और उनके परिवारों के कल्याण के लिए बस्तर जिले में रविवार 07 दिसंबर को सशस्त्र सेना झण्डा दिवस पूरे सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया। ​रविवार 07 दिसंबर को प्रातः 11 बजे जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर कलेक्टर और जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हरिस एस, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक के प्रभारी अधिकारी कर्नल एके कर, सर्जन कमाण्डर जॉनसन एवं दंत चिकित्सक डॉ. अभिषेक सिंह पठानिया को जिला सैनिक कल्याण अधिकारी द्वारा ध्वज प्रतीक (फ्लैग प्रतीक) लगाकर किया गया।

           ​इस मौके पर जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में द्वितीय विश्व युद्ध की नान पेंशनर श्रीमति महेश्वरी वानखड़े एवं श्रीमति वानो बाई को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें विशेष निधि से 10 हजार रुपए का धनादेश भी सौंपा गया। ​पूरे बस्तर संभाग से पूर्व सैनिक एवं पूर्व सैनिकों के परिजनों ने इस कार्यक्रम में भा​ग लिया।

​कार्यक्रम के अध्यक्ष कलेक्टर हरिस एस ने सभी नागरिकों से सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष में उदारतापूर्वक योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा यह कोष हमें अपने बहादुर शहीदों के आश्रितों, भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्वास और कल्याण को सुनिश्चित करने का अवसर देता है। राष्ट्र के इन सच्चे नायकों के प्रति आभार व्यक्त करने का यह हमारा कर्तव्य है।

         ​इस दिन का मुख्य उद्देश्य सशस्त्र सेनाओं के कर्मचारियों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए धन एकत्र करना है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिन्होंने देश की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यह दिन हमें सेना के प्रति सम्मान व्यक्त करने और उनकी वीरता को याद करने की प्रेरणा देता है।हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वे इस पुण्य कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लें और राष्ट्र के इन सच्चे सेवकों के परिवारों के लिए अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित वन मंत्री श्री केदार कश्यप एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल बैठक में हुए शामिल
05 जनवरी-05 फरवरी 2026 तक ‘बस्तर पंडुम 2026’ का होगा आयोजन

रायपुर / shouryapath / छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को जीवंत बनाने के लिए ‘बस्तर पंडुम 2026' के आयोजन के लिए शनिवार को उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के रायपुर स्थित निवास पर उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल बैठक में शामिल हुए। इस महोत्सव में बस्तर संभाग की अनूठी लोककला, संस्कृति, रीति-रिवाज और पारंपरिक जीवनशैली को मंच देने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर पंडुम का आयोजन न केवल बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास है, बल्कि इस क्षेत्र के प्रतिभाशाली कलाकारों को मंच देने और उनकी कला को प्रोत्साहन प्रदान करने का सुनहरा अवसर भी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में इसका सफल आयोजन हेतु सभी विभागों को मिलकर समन्वय के साथ कार्य करना है। वनमंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर पंडुम अपने आप में अनूठा अवसर है जो बस्तर के युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विविधता और उसकी खूबसूरती एक बड़े मंच पर दिखाने का मौका प्रदान करती है।
संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर पंडुम का आयोजन राज्य की संस्कृति का परिचायक है। इसके लिए राज्य शासन के द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां तय समय सीमा में पूर्ण करनी होंगी।
05 जनवरी-05 फरवरी 2026 तक होने वाले ‘बस्तर पंडुम 2026’ में 12 प्रमुख विधाओं में बस्तर के पारंपरिक नृत्य-गीत, रीति-रिवाज, जनजातीय नृत्य, वाद्ययंत्र, शिल्प, पारंपरिक व्यंजन, जनजातीय गीत, वेशभूषा, चित्रकला, आंचलिक साहित्य, जनजातीय नाट्य, जनजातीय आभूषण, पेय पदार्थ एवं वन-औषधी के प्रदर्शन पर आधारित प्रतियोगिताएं होंगी। ये प्रतियोगिताओं क्रमशः जनपद, जिला और संभाग स्तर पर आयोजित की जाएंगी।
प्रतियोगिता का पहला चरण 05 से 15 जनवरी 2026 तक जनपद स्तर पर होगा, दूसरा चरण 20 से 25 जनवरी 2026 तक जिला स्तर पर और अंतिम चरण 01 से 05 फरवरी 2026 तक संभाग स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन होगा। प्रत्येक चरण के विजेताओं को पुरस्कार राशि और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बस्तर पण्डुम में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित किये जाने हेतु जनजातीय बाहुल्य राज्यों के जनप्रतिनिधियों, केन्द्रीय मंत्री, विदेशी राजनयिकों, राजदूतों एवं बस्तर क्षेत्र के स्थानीय विषय विशेषज्ञ, पद्म विभूषित गणमान्य नागरिकों, बस्तर क्षेत्र के विभिन्न कार्य क्षेत्रों उपलब्धि प्राप्त विशिष्ट जनों को बस्तर की विशिष्ट संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए आमंत्रित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही बस्तर के समस्त समाज प्रमुख, सिरहा, मांझी, चालकी को भी आमंत्रित करने को कहा।
सभी ने एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार करते हुये देश के समस्त राज्यों के कलाकारों को जनजातीय लोक कला नृत्यों के प्रदर्शन एवं प्रस्तुति हेतु आमंत्रित करने के निर्देश दिए। बस्तर पंडुम में संभाग के 07 जिलों के 1885 ग्राम पंचायत, 32 जनपद पंचायत, 08 नगर पालिका, 12 नगर पंचायत तथा 01 नगर निगम क्षेत्र के प्रतिभागी शामिल होंगे। इस अवसर पर संस्कृति विभाग के सचिव श्री रोहित यादव, संचालक श्री विवेक आचार्य, बस्तर पंडुम के नोडल अधिकारी श्री युगल किशोर एवं मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के ओएसडी श्री जितेंद्र सिंह उपस्थित रहे।

जगदलपुर, शौर्यपथ। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा 2025 के अंतर्गत संपूर्ण बस्तर जिले में चलाए जा रहे यातायात जागरूकता अभियान के तहत मंगलवार को दंतेश्वरी फ़ार्मेसी कॉलेज, बोरपदर (जगदलपुर) में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक बस्तर शलभ सिन्हा के मार्गदर्शन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग के पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के दौरान उप पुलिस अधीक्षक (यातायात) जगदलपुर संतोष जैन, यातायात प्रभारी मधुसूदन नाग एवं प्रकाश देवांगन ने कॉलेज के लगभग 100 छात्र-छात्राओं, अध्यापक एवं स्टाफ को सड़क सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं। इनमें ट्रैफिक नियमों का पालन, सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण, रोकथाम के उपाय, गुड सेमेरिटन लॉ तथा बस्तर क्षेत्र में पूर्व में हुई दुर्घटनाओं के उदाहरण शामिल थे।

छात्रों एवं स्टाफ ने गम्भीरता से जानकारी को सुना तथा भविष्य में यातायात नियमों का पालन करने का संकल्प व्यक्त किया।

कॉलेज प्राचार्य ने भी सभी छात्रों से दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट अनिवार्य रूप से पहनने की अपील की और स्पष्ट कहा कि बिना हेलमेट किसी भी विद्यार्थी को कॉलेज गेट से प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्राचार्य की इस पहल पर सभी छात्रों ने सहमति जताई।

कार्यक्रम में कॉलेज के अध्यापक, स्टाफ तथा यातायात विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में यह कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ।

राशन दुकान व आंगनबाड़ी तक पहुंचा कचरे का कहर, प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा गंदगी का कारोबार!

By - नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ । शहर में स्वच्छता का नारा बुलंद करने वाले अधिकारी और जनप्रतिनिधि अगर सच्चाई देखना चाहते हैं तो एक बार सिविल लाइन वार्ड क्रमांक 07 लालबाग स्थित SLRM सेंटर का हाल जरूर देखें। यहां शहर भर का कचरा लाकर डंप किया जाता है, जिसे महिला समूह के माध्यम से छांटा जाता है, लेकिन सफाई के नाम पर यह केंद्र अब दुर्गंध, मक्खियों और बीमारी का गढ़ बन चुका है।

बदबू से त्रस्त जनता, और वहीं पास में चल रहा राशन दुकान व बच्चों की आंगनबाड़ी केंद्र, दोनों ही इस कचरे के दुष्प्रभाव झेल रहे हैं। बच्चों को पोषण देने के बजाय यहां संक्रमण और प्रदूषण का ज़हर परोसा जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि सेंटर से उठने वाली सड़ी दुर्गंध पूरे इलाके में फैल चुकी है। “सुबह से शाम तक बदबू से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। बच्चों को बाहर खेलना तो दूर, आंगनबाड़ी भेजना भी खतरे से खाली नहीं,” लोगों ने नाराज़गी जताई।

शिकायतों के बावजूद नगर निगम और स्वच्छता मिशन अधिकारी बेखबर हैं, जैसे किसी को जनता की सेहत की कोई परवाह ही नहीं। हर साल “स्वच्छता रैंकिंग” में नंबर बढ़ाने की होड़ में लगे अधिकारी, ज़मीनी गंदगी और जनता की परेशानी को पूरी तरह अनदेखा कर रहे हैं।

स्वच्छ भारत मिशन का असली चेहरा लालबाग में साफ दिखाई दे रहा है — जहां मिशन सिर्फ पोस्टर और भाषणों तक सीमित रह गया है, जबकि हकीकत में नागरिक बदबू, मच्छर और बीमारी के बीच जीने को मजबूर हैं।

वार्डवासियों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे या तो SLRM सेंटर को आबादी से दूर हटाया जाए, या फिर वहां दुर्गंध नियंत्रण, कीटाणुनाशक छिड़काव और सफाई की स्थायी व्यवस्था की जाए। अन्यथा वार्ड के लोग आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, क्योंकि अब यह मामला सिर्फ बदबू का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और प्रशासनिक लापरवाही का बन चुका है।

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