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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
बिलासपुर में होने वाली प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम, बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
भिलाई। आगामी राज्य स्तरीय थाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भाग लेने वाली दुर्ग जिला टीम के चयन हेतु सोमवार, 22 जून 2026 को शाम 5:30 बजे गुंडिचा मंडप डोम शेड, सेक्टर-10 भिलाई नगर में चयन प्रक्रिया का आयोजन किया गया। चयन ट्रायल में दुर्ग जिले के विभिन्न क्षेत्रों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
चयन प्रक्रिया में सब जूनियर (अंडर-14), जूनियर (अंडर-17) एवं सीनियर (19 वर्ष एवं उससे अधिक आयु वर्ग) के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए टीम में स्थान बनाने का प्रयास किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ हनुमान जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर सेक्टर-10 की पार्षद श्रीमती सुभद्रा जी मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे जिले का नाम रोशन करें और अधिक से अधिक पदक जीतकर लौटें।
ज्ञात हो कि राज्य स्तरीय थाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप का आयोजन 10 से 12 जुलाई 2026 तक बिलासपुर के रेलवे स्टेडियम में किया जाएगा। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों में विशेष उत्साह देखा गया।
थाई बॉक्सिंग दुर्ग जिला सचिव जे.पी. राजू ने कहा कि खेलों की नगरी भिलाई में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे खिलाड़ियों से उत्कृष्ट प्रदर्शन की अपेक्षा है। उन्होंने बताया कि चयनित खिलाड़ियों के लिए शीघ्र ही विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा ताकि वे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
कार्यक्रम में कारा-कु-जू-बो-काई-कान कराते डो मार्शल आर्ट्स एंड योग एसोसिएशन के वरिष्ठ छात्र रामकुमार पांडे, गांधी सोनी, भरत लाल साहू, सुभाष सोनी, दीपेश आहूजा, रोहन देवांगन, विपिन दहाते, अक्षत चंद्रा, अरमान देवांगन, वेदांत साहू सहित बड़ी संख्या में जूनियर एवं सीनियर ब्लैक बेल्ट तथा ब्राउन बेल्ट खिलाड़ी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर दुर्ग जिला थाई बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष श्री चिन्ना केशवलु ने भी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें जिले के खिलाड़ियों से उत्कृष्ट प्रदर्शन की पूरी उम्मीद है। उन्होंने भविष्य में थाई बॉक्सिंग खेल के विस्तार और खिलाड़ियों के विकास के लिए हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
चयन प्रक्रिया के सफल आयोजन के साथ अब खिलाड़ियों की निगाहें बिलासपुर में होने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता पर टिकी हैं, जहां दुर्ग जिले की टीम से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
200 टन सैंपल से निकले 5 हीरे, दो जेम क्वालिटी; निवेश, उद्योग और रोजगार की बढ़ीं संभावनाएं
रायपुर/महासमुंद। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा में एक नई उपलब्धि जुड़ गई है। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान हीरों की प्राप्ति ने प्रदेश के खनिज क्षेत्र को नई दिशा देने के संकेत दिए हैं। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा 200 टन बल्क सैंपल के परीक्षण एवं प्रसंस्करण के बाद कुल 5 हीरे प्राप्त हुए हैं, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट है। इनमें दो जेम क्वालिटी तथा तीन अन्य श्रेणी के हीरे शामिल हैं।
यह उपलब्धि क्षेत्र में हीरा खनिजीकरण की संभावनाओं की पुष्टि करती है और भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश, उद्योग स्थापना, रोजगार सृजन तथा राजस्व वृद्धि का आधार बन सकती है।
वैज्ञानिक अन्वेषण से मिली सफलता
एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड के अनुसार बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय अध्ययन और अन्वेषण ड्रिलिंग जैसे वैज्ञानिक तरीकों से सर्वेक्षण किया गया। इसके आधार पर चिन्हित क्षेत्र से लगभग 200 टन खनिज सामग्री एकत्र कर परीक्षण किया गया, जिसके बाद पांच हीरों की प्राप्ति हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक चरण में मिले ये परिणाम क्षेत्र में व्यापक हीरा भंडार की संभावनाओं का संकेत हैं। इससे भविष्य में विस्तृत सर्वेक्षण और भूगर्भीय अध्ययन का मार्ग प्रशस्त होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस सफलता को छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत उत्साहजनक बताते हुए कहा कि यह प्रदेश की आर्थिक क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट तथा चूना पत्थर के उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अब हीरा संभावनाओं की पुष्टि से प्रदेश की खनिज विविधता और अधिक समृद्ध होगी।
रोजगार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल खनिजों के उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज आधारित उद्योगों, मूल्य संवर्धन इकाइयों और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की नीति पर कार्य कर रही है। हीरा क्षेत्र में संभावनाएं विकसित होने से निवेश आकर्षित होगा और स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर पैदा होंगे।
राष्ट्रीय स्तर पर बनेगी नई पहचान
सरकार का मानना है कि बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में मिली यह सफलता छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकती है। आगामी वैज्ञानिक सर्वेक्षणों और परीक्षणों से क्षेत्र की वास्तविक संसाधन क्षमता का अधिक सटीक आकलन किया जाएगा।
वर्तमान में प्राप्त सभी हीरों को सुरक्षित अभिरक्षा में एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रांग रूम में रखा गया है। आगे की प्रक्रिया नियमानुसार और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप पूरी की जाएगी।
मुख्य तथ्य
स्थान: बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक, सरायपाली (महासमुंद)
परीक्षण सामग्री: 200 टन बल्क सैंपल
प्राप्त हीरे: 5
कुल वजन: 1.22 कैरेट
जेम क्वालिटी हीरे: 2
अन्य श्रेणी के हीरे: 3
परीक्षण एजेंसी: एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड
यह खोज छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है और प्रदेश को खनिज आधारित औद्योगिक विकास के नए युग में प्रवेश कराने का आधार बन सकती है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई बैठक, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा को मिलेगा नया बल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में ग्रामीण रोजगार, आजीविका संवर्धन और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने ‘विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़’, ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ तथा ‘छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026’ के प्रारूप को मंजूरी प्रदान की।
ग्रामीण परिवारों को मिलेगी 125 दिन रोजगार की गारंटी
कैबिनेट ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, सशक्तीकरण और डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़ को मंजूरी दी है। भारत सरकार के अधिनियम 2025 के अनुरूप लागू की जा रही इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिवस अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी।
योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण, आजीविकामूलक परिसंपत्तियों का विकास तथा टिकाऊ रोजगार सृजन पर विशेष जोर रहेगा। ग्राम पंचायत आधारित समेकित विकास, विभागीय योजनाओं के अभिसरण और पीएम गति शक्ति से समन्वय भी सुनिश्चित किया जाएगा।
इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में व्यय किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ से गांवों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए कैबिनेट ने ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया है।
योजना के तहत स्थापित किए जाएंगे—
सृजन केंद्र (हथकरघा, बुनाई-सिलाई, हस्तशिल्प आदि)
प्रसंस्करण इकाइयां (दलहन, तिलहन, राइस मिल, डेयरी आदि)
सेवा केंद्र (कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत, अटल डिजिटल केंद्र)
विपणन केंद्र
आपूर्ति केंद्र
योजना का उद्देश्य उपलब्ध अधोसंरचना और मशीनरी का बेहतर उपयोग करते हुए स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण, सेवा एवं विपणन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।
इस योजना के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को नोडल एजेंसी तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
नई CBG नीति से अपशिष्ट बनेगा स्वच्छ ईंधन
कैबिनेट ने ‘छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026’ को भी मंजूरी प्रदान की है। नीति का उद्देश्य कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट तथा अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उन्हें कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) में परिवर्तित करना है।
इस नीति से—
अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा
पर्यावरण संरक्षण होगा
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी
जैव उर्वरकों का उत्पादन बढ़ेगा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी
छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के अनुसार राज्य में लगभग 5 लाख टन प्रतिवर्ष CBG उत्पादन की संभावना आंकी गई है।
नीति के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाया गया है, जबकि ऊर्जा विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासनिक आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
मुख्य फैसले एक नजर में
✅ ग्रामीण परिवारों को 125 दिन रोजगार की गारंटी
✅ वीबी-जी राम जी योजना के लिए 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान
✅ ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ से गांवों में उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा
✅ नई CBG नीति से स्वच्छ ऊर्जा और जैविक अपशिष्ट प्रबंधन को मिलेगी गति
✅ ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और हरित विकास पर सरकार का विशेष फोकस
कैबिनेट के इन निर्णयों को ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय सतत विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया पौधारोपण, खिलाड़ियों को किया सम्मानित
रायपुर । अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को नवा रायपुर के ग्राम पलोद में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ द्वारा आयोजित वृक्षारोपण एवं खिलाड़ी सम्मान समारोह में रुद्राक्ष का पौधा रोपित किया। कार्यक्रम के तहत 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भारत के दावे के समर्थन में 2036 पौधों का रोपण किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल वृक्षारोपण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित कर रही है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ को खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स की सफल मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ है, वहीं बस्तर ओलंपिक ने दूरस्थ अंचलों की प्रतिभाओं को नई पहचान दी है। सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष बजट और सम्मानजनक प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध करा रही है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और वन विभाग के खिलाड़ियों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिंह सिसोदिया, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय, बीएसएफ के आईजी संजय पंत सहित अनेक जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने बलिदान दिवस पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में प्रख्यात शिक्षाविद्,भारत के प्रथम उद्योग मंत्री, राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रहरी थे। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपना संपूर्ण जीवन देश सेवा के लिए समर्पित किया। उनके विचार, संघर्ष और त्याग भारतीय लोकतंत्र एवं राष्ट्रवादी चिंतन की अमूल्य धरोहर हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की राजनीति को वैचारिक आधार प्रदान किया तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्र की अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणास्रोत है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते समय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्श और सिद्धांत हमें निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उनके विचारों को आत्मसात कर ही हम राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकते हैं।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, राम गर्ग सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और बहुमूल्य आभूषणों के कथित गबन एवं चोरी का मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर के दान पात्रों से करोड़ों रुपये की नकदी तथा सोना, चांदी और हीरे के आभूषणों में कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर 140 पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर ली है।
मीडिया रिपोर्टों और शिकायतों के आधार पर इस कथित घोटाले का आकार ₹200 करोड़ से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है, हालांकि इस राशि की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब कुछ कर्मचारियों की आय और संपत्ति के बीच भारी अंतर सामने आने के दावे किए गए। आरोप है कि 14 से 15 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों ने कुछ ही महीनों में लाखों रुपये की संपत्ति अर्जित कर ली। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने कई कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल शुरू की।
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन समेत कुछ दानदाताओं ने आरोप लगाया है कि मंदिर निर्माण और धार्मिक उपयोग के लिए भेजी गई लगभग 60 किलो चांदी तथा कई बहुमूल्य हार, चरण पादुकाएं और अन्य आभूषणों का समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई दान वस्तुओं की रसीद और आधिकारिक अभिलेख भी नहीं मिल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था। जांच के दौरान दान राशि की गिनती से जुड़े कर्मचारी लवकुश मिश्रा को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार उसके घर से अलमारी और उपलों के ढेर के नीचे छिपाकर रखी गई लगभग 10 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई है। मामले में कुछ अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ और कार्रवाई की गई है।
जांच के दौरान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव, रामशंकर यादव (टिन्नू) सहित कई पुजारियों और बैंक अधिकारियों से बंद कमरे में विस्तृत पूछताछ की गई। SIT ने अयोध्या के ग्रीन हाउस में छह दिनों तक डेरा डालकर दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और दान प्रबंधन प्रणाली की जांच की।
जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी बाधा मंदिर परिसर के CCTV सिस्टम को लेकर सामने आई है। परिसर में लगभग 1,000 हाई-डेफिनिशन कैमरे लगे होने के बावजूद फुटेज का बैकअप केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रखा जाता है, जिसके बाद डेटा स्वतः नष्ट हो जाता है। जांच एजेंसियों को कुछ डिजिटल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं। डेटा रिकवरी और फोरेंसिक विश्लेषण के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
SIT अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर लखनऊ रवाना हो चुकी है। रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई, संभावित अभियोजन और विस्तृत वित्तीय ऑडिट पर निर्णय लिया जा सकता है।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि मामले की जांच अभी जारी है। ₹200 करोड़ की कथित हेराफेरी, आभूषणों की चोरी और अन्य आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने तथा आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और किसी भी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी न्यायिक एवं जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही तय होगी।
कोलकाता।
12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। लाखों लोगों की उपस्थिति और विश्व के अनेक देशों की सहभागिता के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक ऐसी कला है जिसे प्रत्येक व्यक्ति, परिवार और आने वाली पीढ़ियों की दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में योग को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया इसे स्वास्थ्य, संतुलन और शांति के माध्यम के रूप में स्वीकार कर रही है। उन्होंने योग को मानवता के लिए भारत का अमूल्य उपहार बताते हुए इसके वैश्विक विस्तार पर प्रसन्नता व्यक्त की।
प्रधानमंत्री ने "हेल्दी एजिंग" अर्थात स्वस्थ बुढ़ापे की अवधारणा पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि योग को नियमित जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो 70 वर्ष की आयु में भी व्यक्ति स्वयं को 50 वर्ष जैसा स्वस्थ, ऊर्जावान और सक्रिय महसूस कर सकता है। योग शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
योग को दैनिक जीवन से जोड़ने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने ‘योग 365’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके तहत 100 दिनों का एक ऑनलाइन अभियान प्रारंभ किया गया है, जिसमें अब तक 130 देशों के लोगों ने सहभागिता दर्ज कराई है। यह पहल योग को एक दिन के कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर वर्ष के 365 दिनों की जीवनशैली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि योग का महत्व केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह समाज में सकारात्मकता, राष्ट्रों के बीच सद्भाव और विश्व शांति का आधार बन सकता है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया अनेक चुनौतियों से जूझ रही है, तब योग मानवता को संतुलन, संयम और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखा रहा है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने उन करोड़ों लोगों का आभार व्यक्त किया जो दुनिया के विभिन्न देशों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को उत्साहपूर्वक मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है और यह दिखाता है कि योग की शक्ति सीमाओं से परे मानवता को जोड़ने का कार्य कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं लोगों के बीच जाकर विभिन्न योग मुद्राओं का अभ्यास कराया और प्रतिभागियों को सुरक्षित तथा वैज्ञानिक तरीके से योग करने के लिए प्रेरित किया। रेड रोड पर आयोजित यह विशाल योगाभ्यास कार्यक्रम अनुशासन, ऊर्जा और सामूहिक चेतना का अद्भुत उदाहरण बन गया।
कोलकाता के रेड रोड से प्रधानमंत्री मोदी का संदेश केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए था—
“योग को एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन की दिनचर्या बनाइए। स्वस्थ शरीर, शांत मन और बेहतर भविष्य का यही सबसे सरल मार्ग है।”
रायपुर:
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर राज्य में एक बड़ा राजनीतिक बवंडर खड़ा हो गया है। सत्ताधारी दल भाजपा के नेताओं द्वारा राहुल गांधी पर की गई बेहद निजी और तल्ख टिप्पणियों के बाद दोनों पार्टियों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जहां भाजपा विधायकों और मंत्रियों ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर तंज कसे हैं, वहीं कांग्रेस ने भी इस पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए करारा जवाब दिया है।
1. विधायक पुरंदर मिश्रा का बयान: "दिल्ली से आ रहा जोकर"
छत्तीसगढ़ के रायपुर उत्तर से भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने राहुल गांधी के दौरे पर टिप्पणी करते हुए विवादित बयान दिया है।
क्या कहा भाजपा विधायक ने: राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ आगमन के संदर्भ में पुरंदर मिश्रा ने तंज कसते हुए कहा, "दिल्ली से जोकर आ रहा है और 10 दिन तक सर्कस चलेगा।"
कांग्रेस का पलटवार: विधायक मिश्रा के इस बयान पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा विधायक का 'मानसिक दिवालियापन' करार दिया। कांग्रेस ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि भाजपा विधायक का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, तो कांग्रेस उनके इलाज का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार है।
2. वन मंत्री केदार कश्यप का तंज: "दारू से धोएं राहुल के चरण"
विवाद को और हवा तब मिली जब छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने राहुल गांधी के दौरे से ठीक पहले एक प्रेस वार्ता में कांग्रेस पर सीधा हमला बोला।
क्या कहा वन मंत्री ने: कांग्रेस के स्वागत कार्यक्रमों पर कटाक्ष करते हुए केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपने पिछले 5 साल के शासनकाल में केवल शराब घोटाला किया है। उन्होंने आगे कहा, "इसलिए जब राहुल गांधी छत्तीसगढ़ आएं, तो कांग्रेसियों को (गंगाजल या पानी के बजाय) उनके चरण 'दारू' से धोने चाहिए।"
कांग्रेस का पलटवार: वन मंत्री के इस बयान पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज ने मोर्चा संभाला। बैज ने कहा कि यह बयान भाजपा के 'निचले स्तर के चरित्र' को उजागर करता है। उन्होंने राज्य की संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में अतिथियों का स्वागत हमेशा 'धान' (अक्षत) से किया जाता है, लेकिन भाजपा ने अपने बयानों और नीतियों से राज्य को शराब का गढ़ बना दिया है।
सियासी गलियारों में चर्चा:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी के दौरे से पहले इस तरह की बयानबाजी यह दर्शाती है कि राज्य में आगामी दिनों में राजनीतिक मुकाबला और भी दिलचस्प और आक्रामक होने वाला है। जहां भाजपा कांग्रेस को उसके पिछले कार्यकाल के मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अपमान और भाजपा की हताशा के रूप में पेश कर रही है।
कारण बताओ नोटिस, अयोग्यता की मांग और कार्यकर्ताओं को संभालने की कवायद; महा विकास अघाड़ी के सामने भी नई चुनौती
राजनीतिक विश्लेषण
2022 में पार्टी का संगठन और चुनाव चिन्ह खोने के बाद उद्धव ठाकरे ने लोकसभा चुनावों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता साबित की थी।
अब यदि 9 में से 6 सांसद अलग राह चुनते हैं, तो यह केवल संख्या का नुकसान नहीं बल्कि नेतृत्व पर विश्वास के संकट का संकेत माना जाएगा।
संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत UBT गुट लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता की मांग कर रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय संसदीय प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्यों पर निर्भर करेगा।
महाराष्ट्र की राजनीति में इसका सीधा असर महा विकास अघाड़ी (MVA) की एकजुटता और भविष्य की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, यदि ये सांसद एनडीए के साथ जाते हैं तो महाराष्ट्र में भाजपा-शिंदे गठबंधन की राजनीतिक ताकत और बढ़ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल
उद्धव ठाकरे के सामने अब चुनौती केवल बागी सांसदों पर कार्रवाई की नहीं, बल्कि यह साबित करने की है कि चुनाव चिन्ह, संगठन और लगातार हो रही टूट-फूट के बावजूद उनकी पार्टी अभी भी महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रभावशाली शक्ति बनी हुई है।
तीखा राजनीतिक निष्कर्ष
"पहले धनुष-बाण गया, फिर संगठन का बड़ा हिस्सा गया, और अब यदि सांसद भी साथ छोड़ते हैं तो उद्धव ठाकरे के सामने लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व बचाने की होगी।
नई दिल्ली / शंघाई में होने वाले आगामी वर्ल्डस्किल्स कॉम्पिटिशन के लिए भारत अपनी तैयारियों को तेज़ कर रहा है, इसी क्रम में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने आज ऑस्ट्रेलिया में होने वाले ग्लोबल स्किल्स चैलेंज (GSC) 2026 के लिए टीम इंडिया को रवाना किया। 30 सदस्यों वाले भारतीय दल में 15 प्रतियोगी और 15 विशेषज्ञ शामिल हैं, जो 23 से 29 जून 2026 तक आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय स्किल्स सिमुलेशन इवेंट में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
वर्ल्डस्किल्स ऑस्ट्रेलिया द्वारा आयोजित ग्लोबल स्किल्स चैलेंज, वर्ल्डस्किल्स कॉम्पिटिशन का ही एक बड़े स्तर का अंतरराष्ट्रीय सिमुलेशन है। यह चीन के शंघाई में होने वाले 48वें वर्ल्डस्किल्स कॉम्पिटिशन से पहले तैयारी के लिए एक अहम मंच का काम करता है। असल अंतरराष्ट्रीय कॉम्पिटिशन जैसे हालात तैयार करने के मकसद से आयोजित यह इवेंट, भाग लेने वाले देशों को एक हाई-इंटेंसिटी वाले ग्लोबल माहौल में अपने प्रदर्शन को मापने, तैयारियों को परखने और कॉम्पिटिशन के लिए अपनी तत्परता को बेहतर बनाने का मौका देता है।
यह प्रतियोगिता चार दिनों तक चलने वाले स्किल कॉन्टेस्ट के ज़रिए WorldSkills जैसा माहौल बनाएगी। इसमें मार्किंग और असेसमेंट के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 'कॉम्पिटिशन इन्फॉर्मेशन सिस्टम' का इस्तेमाल किया जाएगा। वर्ल्ड स्कूल्स के सदस्य देशों से लगभग 600 कॉम्पिटिटर्स, एक्सपर्ट्स, ट्रांसलेटर्स और अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह इवेंट 'टीम इंडिया' को अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड्स, नई टेक्नोलॉजी और दुनिया भर में अपनाए जाने वाले बेहतरीन तरीकों (बेस्ट प्रैक्टिसेज़) को जानने-समझने का शानदार मौका देगा।
इस मौके पर स्किल डेवलपमेंट और एंटरप्रेन्योरशिप मिनिस्ट्री की सेक्रेटरी, सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने कहा, "ग्लोबल स्किल्स चैलेंज 2026 ऑस्ट्रेलिया “ सिर्फ़ एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि 'टीम इंडिया' के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने, अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने और शंघाई में होने वाली वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता के लिए तैयारी करने का एक अहम मौका है। मैं हर कॉम्पिटिटर से कहूँगी कि वे अपने एक्सपर्ट्स की बात ध्यान से सुनें, फोकस और डिसिप्लिन बनाए रखें और सीखने के हर मौके का पूरा फ़ायदा उठाएँ। वे सभी पहले से ही देश के लिए चैंपियन हैं और हमें उनके सफ़र पर बहुत गर्व है। मैं 'टीम इंडिया' को शुभकामनाएँ देती हूँ कि वे पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और ग्लोबल स्टेज पर भारत का नाम रोशन करें।"
इसके अलावा, नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के सीईओ , श्री अरुणकुमार पिल्लई ने कहा, "हमारे हर कैंडिडेट ने भारत में सबसे बेहतरीन लोगों में शामिल होने के लिए एक मुश्किल और बहुत ज़्यादा कॉम्पिटिटिव सफ़र तय करके यहाँ अपनी जगह बनाई है। 'ग्लोबल स्किल्स चैलेंज 2026 ऑस्ट्रेलिया' शंघाई से पहले का आखिरी पड़ाव है, और अब और भी ज़्यादा फ़ोकस, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की ज़रूरत है। मुझे उम्मीद है कि वे हर अनुभव से सीखेंगे, अपनी ट्रेनिंग पर भरोसा करेंगे और सफलता की कल्पना करेंगे। उस पल की कल्पना करें जब वे सितंबर 2026 में देश की उम्मीदों को लेकर पोडियम पर खड़े होंगे। हमारे लिए, वे पहले से ही हीरो हैं। जब वे दुनिया का सामना करने के लिए आगे बढ़ेंगे, तो उन्हें पता होना चाहिए कि पूरा 'स्किल इंडिया' परिवार हमारे हर कैंडिडेट के साथ मज़बूती से खड़ा है और हर कदम पर उनकी सफलता के लिए हौसला बढ़ा रहा है।"
इस मौके पर एमएसडीई की सीनियर इकोनॉमिक एडवाइज़र श्रीमती मनीषा सेनशर्मा, जॉइंट सेक्रेटरी श्रीमती हेना उस्मान के साथ-साथ अन्य सीनियर अधिकारी भी मौजूद थे।
भारत 'ग्लोबल स्किल्स चैलेंज 2026' में 15 स्किल कैटेगरी में हिस्सा लेगा। ये कैटेगरी हैं: 3D डिजिटल गेम आर्ट, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी, ब्यूटी थेरेपी, ब्रिकलेइंग (ईंट-चिनाई), क्लाउड कंप्यूटिंग, फ्लोरिस्ट्री, ग्राफिक डिज़ाइन टेक्नोलॉजी, हेयरड्रेसिंग, हेल्थ और सोशल केयर, इंडस्ट्रियल मैकेनिक्स, पेंटिंग और डेकोरेटिंग, रेस्टोरेंट सर्विस, वॉल और फ्लोर टाइलिंग, और वेब टेक्नोलॉजीज़। ये क्षेत्र एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल टेक्नोलॉजी, क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़, कंस्ट्रक्शन ट्रेड और सर्विस-सेक्टर स्किल्स का एक मिला-जुला रूप हैं, जो भारत के स्किलिंग इकोसिस्टम के विस्तार और उसमें आ रहे आधुनिक बदलावों को दिखाते हैं।
उम्मीद है कि इस अनुभव से तकनीकी तैयारी बेहतर होगी, इंटरनेशनल मूल्यांकन सिस्टम की समझ बढ़ेगी और कॉम्पिटिटर्स को ग्लोबल स्टेज पर जाने से पहले असल कॉम्पिटिशन के माहौल में परफॉर्म करने का मौका मिलेगा।
यह चैलेंज यूरोप, पूर्वी एशिया, ओशिनिया और अन्य भाग लेने वाले क्षेत्रों के प्रमुख प्रतिस्पर्धियों और विशेषज्ञों के साथ जुड़कर बेंचमार्किंग का एक मज़बूत प्लेटफ़ॉर्म भी देता है। एडवांस्ड इक्विपमेंट वाले माहौल, इंडस्ट्री की बदलती उम्मीदों और अलग-अलग तरह के कॉम्पिटिशन के तरीकों से भारत की तैयारी और परफॉर्मेंस की क्षमताएं और मज़बूत होंगी।
ग्लोबल स्किल्स चैलेंज में भारत की भागीदारी 'स्किल इंडिया मिशन' के उस बड़े विज़न को और मज़बूत करती है, जिसका मकसद भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स बनाना और ग्लोबल स्किल्स इकोसिस्टम में भारत की स्थिति को मज़बूत करना है। व्यवस्थित ट्रेनिंग, एक्सपर्ट मेंटरिंग और मज़बूत इंडस्ट्री पार्टनरशिप के ज़रिए, टीम इंडिया वर्ल्ड लेवल पर उत्कृष्टता के ऊंचे स्टैंडर्ड हासिल करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।
नई दिल्ली / भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (21 जून, 2026) मध्य प्रदेश स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण किया। उन्होंने राष्ट्रीय उद्यान के चीता प्रबंधन क्षेत्र का अवलोकन किया। उन्हें प्रोजेक्ट चीता के संबंध में वन मंडलाधिकारी द्वारा जानकारी दी गई।
नवंबर 2025 में बोत्सवाना की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति बोत्सवाना द्वारा भारत को आठ चीतों के प्रतीकात्मक हस्तांतरण की साक्षी बनी थीं। ये चीते फरवरी 2026 में कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाए गए थे।
17 सितंबर, 2022 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तत्वावधान में तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के नेतृत्व में प्रारंभ किया गया प्रोजेक्ट चीता जैव-विविधता के पुनर्स्थापन के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस परियोजना का उद्देश्य भारत में विलुप्त हो चुके चीते का पुनर्प्रवेश कराना है। प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत कूनो राष्ट्रीय उद्यान को भारत के प्रथम चीता पुनर्प्रवेश स्थल के रूप में विकसित किया गया है, क्योंकि यहां चीतों के लिए उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार आधार तथा न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप उपलब्ध है।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों का प्रथम दल सितंबर 2022 में नामीबिया से, द्वितीय दल फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से तथा तृतीय दल फरवरी 2026 में बोत्सवाना से लाया गया था।
विश्व को भारत की अमूल्य देन है योग, इसे जन-जन तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर अम्बिकापुर में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने किया सामूहिक योगाभ्यास
रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अम्बिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में हजारों नागरिकों, विद्यार्थियों, महिलाओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ योगाभ्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि योग भारत की सनातन ऋषि परंपरा का अमूल्य उपहार है, जिसने आज संपूर्ण विश्व को स्वस्थ, संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है, जो व्यक्ति को आत्मबल, अनुशासन, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करती है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” वर्तमान समय की आवश्यकता को प्रतिबिंबित करती है। तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग प्रत्येक आयु वर्ग के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को शारीरिक रूप से सक्रिय, मानसिक रूप से सजग और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला होता है, इसलिए योग को केवल एक आयोजन तक सीमित न रखकर जीवन का हिस्सा बनाना होगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और सतत प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा रखे गए प्रस्ताव को रिकॉर्ड समय में व्यापक समर्थन प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि विश्व ने भारतीय ज्ञान परंपरा और योग की उपयोगिता को स्वीकार किया है। आज 21 जून को पूरी दुनिया जिस उत्साह से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही है, वह भारत की सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक नेतृत्व का गौरवशाली उदाहरण है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि योग स्वास्थ्य और आरोग्य की ऐसी विश्वसनीय साधना है, जो जीवन के हर चरण में व्यक्ति का मार्गदर्शन करती है। योग शरीर को निरोग, मन को शांत और विचारों को सकारात्मक बनाता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव, अनिद्रा और मोटापे जैसी जीवनशैली जनित समस्याओं से बचाव में योग अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी आज योग की उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है और इसे बेहतर स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देख रहा है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि पतंजलि ने योग को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया। भगवान शिव को आदियोगी के रूप में स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना में योग सदियों से जीवन का अभिन्न अंग रहा है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग का संदेश देकर संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन का मार्ग प्रशस्त किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार योग के व्यापक विस्तार और संस्थागत विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से योग विषय को समाज कल्याण विभाग से चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि योग आयुष पद्धति का महत्वपूर्ण अंग है और इस निर्णय से योग शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा जनजागरूकता गतिविधियों को नई दिशा और गति मिलेगी। राज्य सरकार का लक्ष्य योग को गांव-गांव, स्कूलों, कॉलेजों और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है ताकि स्वस्थ जीवनशैली को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। विद्यालयों में योग को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि जो लोग अब तक योग से नहीं जुड़ पाए हैं, वे आज से इसकी शुरुआत करें, क्योंकि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कोई भी समय देर नहीं होता।
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेश में योग के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि योग को घर-घर तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ योग आयोग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आयोग प्रदेश में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने जनजातीय युवाओं की शिक्षा और भविष्य को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। हाल ही में जनजातीय वर्ग के 13 युवाओं द्वारा यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें देश और समाज के नेतृत्व के लिए तैयार कर रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ब्रह्ममुहूर्त का विशेष महत्व है और इसी समय योगाभ्यास करना सबसे अधिक लाभकारी माना गया है। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन धरोहर है, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से वैश्विक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है।
इस अवसर पर विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव, राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, सरगुजा संभाग के कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री दीपक झा, आयुष विभाग के संचालक राजेंद्र कुमार कटारा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी और नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर, / अंतर्राराष्ट्रीय योग दिवस केे अवसर पर आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम में सामूहिक योगाभ्यास कराया गया। योगाभ्यास में राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर.प्रसन्ना, विधिक सलाहकार श्रीमती सत्यभामा अजय दुबे, उप सचिव सुश्री निधि साहू सहित लोकभवन के अधिकारी, कर्मचारी शामिल हुए।
ईशा फाउंडेशन के योग प्रशिक्षक श्री रितेश प्रधान ने योग नमस्कार का अभ्यास कराया। वहीं योग आयोग के प्रशिक्षक श्री भोजराज साहू, श्री अशोक साहू, श्री धनश्री साहू, श्री दीनू राम साहू एवं श्री तुषार साहू ने योग के विभिन्न आसनों का अभ्यास कराया।
अंतर्राष्ट्रीय योग शिविर में शामिल हुए राज्यपाल
रायपुर, / राज्यपाल श्री रमेन डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित योग शिविर में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। राज्यपाल ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संदेश का वाचन किया एवं सामूहिक योगाभ्यास में भाग लिया।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने बारहवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी और कहा कि यह हर्ष का विषय है कि पूरा छत्तीसगढ़ इस ऐतिहासिक अवसर पर सामूहिक योगाभ्यास के माध्यम से स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचा रहा है। उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों के स्वस्थ, सुखी और समृद्ध रहने की कामना की।
श्री डेका ने प्रदेशवासियों से कहा कि योग को जीवनशैली में शामिल करें, प्रतिदिन योगाभ्यास की आदत बनाए और बच्चों को भी इसकी आदत डाले जिससे उनका शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और वे भविष्य में देश के अच्छे नागरिक बनेंगे। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को ही नहीं बल्कि मन और भावनाओं को सुदृढ़ बनाकर व्यक्ति के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस अवसर पर श्री डेका ने विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
योगाभ्यास कार्यक्रम में विधायकगण सर्वश्री पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, सुनील सोनी एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण, मुख्य सचिव श्री विकास शील, पुलिस महानिदेशक श्री अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, पुलिस कमिश्नर रायपुर श्री संजीव शुक्ला, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में शामिल हुए।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
