January 30, 2026
Hindi Hindi
Uncategorised

Uncategorised (35061)

अन्य ख़बर

अन्य ख़बर (5908)

धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

       रायपुर / शौर्यपथ / धुन के पक्के लोग जब ठान लेते हैं, तो परिस्थितियां भी रास्ता दे देती हैं। राजनांदगांव के वैशाली नगर निवासी श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने अपने दृढ़ संकल्प और परिश्रम से यह साबित कर दिया है कि सही योजना और निरंतर मेहनत से आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखी जा सकती है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) उनके लिए न केवल आर्थिक संबल बनी, बल्कि एक नई पहचान और स्थायी आजीविका का माध्यम भी बनी।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना भारत सरकार की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों को सशक्त बनाना, उन्हें औपचारिक स्वरूप देना और प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस योजना के अंतर्गत नए एवं मौजूदा उद्यमों को 35 प्रतिशत तक ऋण आधारित सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख रुपये), ब्रांडिंग, मार्केटिंग सहायता, प्रशिक्षण एवं बुनियादी ढांचे का सहयोग प्रदान किया जाता है, जिससे वे आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल की भावना के अनुरूप आगे बढ़ सकें।
इसी योजना के अंतर्गत श्री प्रदीप देशपांडे ने स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपना लघुवनोपज आधारित प्रोसेसिंग उद्योग प्रारंभ किया। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध चिरौंजी, हर्रा एवं बहेरा जैसे लघुवनोपज की संभावनाओं को पहचानते हुए इन पर आधारित प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की। इस उद्योग के लिए मशीन एवं शेड निर्माण हेतु कुल 5 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें से 2 लाख 13 हजार 500 रुपये का अनुदान प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत प्राप्त हुआ।
उद्योग की स्थापना के साथ ही श्री देशपांडे ने कौरिनभाठा स्थित संस्कारधानी महिला कृषक अभिरुचि स्वसहायता समूह की महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। इससे महिलाओं को स्थायी आय का साधन मिला और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हुईं, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा।
योजना से प्राप्त सहायता राशि से उन्होंने आईटीआई मुंबई निर्मित चिरौंजी डिकॉल्डीकेटर मशीन क्रय की। इस आधुनिक मशीन के माध्यम से चिरौंजी का छिलका अलग कर गिरी निकाली जाती है, जबकि छिलकों से चारकोल का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा चिरौंजी, हर्रा एवं बहेरा की गिरी से तेल निष्कर्षण तथा हर्रा-बहेरा डिकॉल्डीकेटर मशीन द्वारा छाल पृथक्करण का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे मूल्य संवर्धन और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
ग्रामीण और वनीय क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की चुनौतियों को देखते हुए श्री देशपांडे ने अपनी प्रोसेसिंग यूनिट को सोलर ऊर्जा से संचालित किया है। सोलर प्लांट के उपयोग से उनका बिजली खर्च शून्य हो गया है और उत्पादन कार्य बिना रुकावट जारी है, जिससे लागत में भी भारी कमी आई है।
चिरौंजी, हर्रा और बहेरा उत्पादों की लगातार बढ़ती मांग के चलते उनका व्यवसाय अब छत्तीसगढ़ तक सीमित न रहकर महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा तक विस्तारित हो चुका है। इस उद्योग से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख रुपये की आय हो रही है, जिससे उनका जीवनस्तर बेहतर हुआ है।
यह पहल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बनी है, बल्कि वनों के संरक्षण, लघुवनोपज के सतत संग्रहण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी सहायक सिद्ध हो रही है। स्वसहायता समूह से जुड़ी महिलाएं आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।
श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना को स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली अत्यंत प्रभावी योजना बताते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल ने उनके सपनों को नई उड़ान दी है और आत्मनिर्भर बनने का रास्ता प्रशस्त किया है।

 रायपुर / शौर्यपथ / सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षित यातायात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा माह 2026 के अंतर्गत व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तथा मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन में अंतर्विभागीय लीड एजेंसी सड़क सुरक्षा द्वारा प्रदेशभर में प्रतिदिन विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में लीड एजेंसी द्वारा सड़क सुरक्षा से संबंधित पोस्टर एवं फ्लैक्स जारी किए गए हैं। वहीं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने प्रदेश के समस्त सरपंचों एवं पंचगणों से पंचायत स्तर पर सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सक्रिय पहल करने की अपील की है।

सड़क सुरक्षा माह का शुभारंभ 01 जनवरी 2026 को बेमेतरा में माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री अभय मनोहर सप्रे द्वारा हेलमेट रैली को हरी झंडी दिखाकर किया गया। इसके पश्चात 03 जनवरी को दुर्ग में संभाग स्तरीय अधिकारियों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, सात जिलों के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सहित परिवहन, लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन, शिक्षा, आबकारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

इसी क्रम में 05 जनवरी 2026 को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की उपस्थिति में संबंधित विभागीय सचिवों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए समन्वित कार्ययोजना के तहत कार्य करने के निर्देश दिए गए। विशेष रूप से सर्वाधिक दुर्घटनाओं वाले जिलों रायपुर, बिलासपुर एवं दुर्ग के लिए वर्ष 2026 में दुर्घटनाओं में कमी लाने हेतु विशेष रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान गत वर्ष की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। यातायात नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध लगभग 45 प्रतिशत अधिक कार्रवाई करते हुए करीब 9 लाख प्रकरण दर्ज किए गए तथा लगभग 39 करोड़ रुपये का परिशमन शुल्क संकलित किया गया। जन-जागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप लगभग 3 प्रतिशत मृत्यु दर में कमी परिलक्षित हुई है। प्रदेश के 20 जिलों में मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि रायपुर सहित 13 अन्य जिलों में इसे कम करने के लिए सतत प्रयास जारी हैं।

सड़क सुरक्षा माह 2026 के दौरान यातायात पुलिस द्वारा प्रतिदिन विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, मोबाइल पर बात करते हुए, नशे की हालत में अथवा तेज गति से वाहन चलाने वालों को समझाइश दी जा रही है। साथ ही यातायात नियमों का पालन करने वाले नागरिकों को सम्मानित कर सकारात्मक संदेश भी दिया जा रहा है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2026 में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु दर में न्यूनतम 10 प्रतिशत की कमी लाने, दुर्घटनाजन्य सड़कों में त्वरित सुधार तथा आपातकालीन उपचार के लिए त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को सुदृढ़ करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

  रायपुर / शौर्यपथ। बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक सफलता दर्ज की गई है। सुकमा जिले में ₹64 लाख के इनामी 26 हार्डकोर माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में लौटकर आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 7 महिलाएं भी शामिल हैं, जो इस बदलाव को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस घटनाक्रम को केवल सुरक्षा बलों की सफलता नहीं, बल्कि मानवीय विश्वास, संवाद और संवेदनशील शासन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि “बस्तर अब बदल रहा है। यहां अब डर नहीं, बल्कि भरोसे की आवाज़ गूंज रही है। यह नया बस्तर शांति, विश्वास और विकास की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।”

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के स्पष्ट संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में अपनाई गई संतुलित सुरक्षा रणनीति और संवेदनशील पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणाम अब ज़मीन पर दिखाई दे रहे हैं। “पूना मार्गेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान ने उन युवाओं के जीवन में नई उम्मीद जगाई है, जो कभी नक्सलवाद के भ्रमजाल में फंस गए थे।

उन्होंने कहा कि बस्तर में लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा शिविर, सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तथा सुदूर अंचलों तक शासन की सीधी पहुँच ने क्षेत्र की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। आज बस्तर में भय का स्थान विश्वास ने ले लिया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंसा का मार्ग त्यागने वालों के लिए सरकार के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। उन्हें सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के सभी अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने दोहराया कि नक्सल समस्या का स्थायी समाधान सुरक्षा, विकास और विश्वास की त्रयी में ही निहित है। उन्होंने शेष माओवादी साथियों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हुए कहा कि वे शांति, परिवार और प्रगति का मार्ग चुनें। राज्य सरकार उनके पुनर्वास और पुनर्स्थापन में हर संभव सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर आज शांति की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है और हर आत्मसमर्पण के साथ नक्सल-मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प और अधिक सशक्त होता जा रहा है।

  रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत पदोन्नत प्राध्यापकों की अंतिम संशोधित वरिष्ठता सूची जारी कर दी है। यह सूची उच्च न्यायालय बिलासपुर के निर्णयों तथा शासन द्वारा जारी पदोन्नति आदेशों के परिपालन में प्रकाशित की गई है।

उच्च शिक्षा संचालनालय, इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार पदोन्नत प्राध्यापकों की वरिष्ठता का निर्धारण 01 अप्रैल 2017 एवं 01 अप्रैल 2023 की स्थिति के आधार पर किया गया है। वरिष्ठता निर्धारण के लिए लोक सेवा आयोग से चयन, विषयवार नियुक्ति, कार्यभार ग्रहण की तिथि, संविलियन तथा नियमितीकरण की तिथि जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों को शामिल किया गया है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि समान आदेश तिथि की स्थिति में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि को वरिष्ठता का आधार माना गया है। वहीं संविलियन अथवा नियमित नियुक्ति वाले प्राध्यापकों की वरिष्ठता शासन द्वारा निर्धारित नियमानुसार तिथि के आधार पर तय की गई है।

जारी आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि किसी पदोन्नत प्राध्यापक को अंतिम वरिष्ठता सूची पर आपत्ति हो, तो वे 20 जनवरी 2026 तक निर्धारित प्रारूप में अपनी आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं। निर्धारित समय-सीमा के बाद प्राप्त आपत्तियों पर किसी प्रकार का विचार नहीं किया जाएगा।

उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे वर्ष 2017 एवं 2023 की अंतिम वरिष्ठता सूची का विधिवत प्रकाशन सुनिश्चित करें तथा संबंधित प्राध्यापकों को इसकी जानकारी अवगत कराएं।

साहू समाज का सामूहिक विवाह कार्यक्रम सामाजिक उत्थान की मिसाल — मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव में हुए शामिल

रायपुर / शौर्यपथ / राजिम भक्तिन माता एवं माता कर्मा के बताए संदेश मानव समाज के लिए कल्याणकारी है, हमें उनके संदेशों का अनुसरण करना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजिम के त्रिवेणी संगम में आयोजित भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव को सम्बोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने भगवान श्री राजीव लोचन एवं भक्त माता राजिम की पूजा अर्चना कर प्रदेश और समाज की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने साहू सृजन पत्रिका का विमोचन किया। साहू समाज द्वारा मुख्यमंत्री का गजमाला पहनाकर स्वागत किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने राजिम माता भक्ति जयंती की बधाई देते हुए कहा कि साहू समाज समृद्ध और शिक्षित समाज है जो हर दृष्टिकोण से समृद्ध रहा है। साहू समाज का इतिहास भी समृद्ध रहा है। हम सबको दानवीर भामाशाह,बाबा सत्यनारायण जी का आशीर्वाद मिल रहा है। यह समाज निरंतर विकास करें। यही कामना है। जब समाज एक जुट होगा तो केवल समाज ही नहीं प्रदेश और देश भी शक्तिशाली और समृद्ध बनता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने साहू समाज के सामूहिक विवाह को अनुकरणीय पहल बताते हुए कहा कि राजिम माता ने जिस साहू समाज को अपनी मेहनत और त्याग से संगठित किया, आज वह समाज शिक्षा, कृषि व व्यवसाय सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम राजिम माता के आशीर्वाद से हर गारंटी को पूरा कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ खनिज, वन, उर्वरा से भरपूर है। अब नक्सलवाद से जवान पूरी ताकत से लड़ रहे हैं। हम सबका संकल्प है कि 31 मार्च तक बस्तर को नक्सल मुक्त कर देंगे। राज्य के विकास में बाधक नक्सलवाद अब खत्मा की ओर है। राज्य को हम सब समृद्धि की दिशा में लेकर जाएंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज सिरकट्टी आश्रम में भव्य राम जानकी मंदिर में धर्म ध्वजा की स्थापना की गई। इस पुण्य अवसर पर हमें शामिल होने का सौभाग्य मिला। जैसे अयोध्या धाम में धर्म ध्वजा स्थापना किए हैं, उसी तर्ज पर यहां कुटेना में भी धर्म ध्वजा स्थापित किया गया है। मेरा सौभाग्य है कि एक साल पहले भी इस अवसर पर शामिल होने का अवसर मिला था।
उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव ने कहा कि साहू समाज एक संगठित समाज के रूप में जाना जाता है। आज हम सभी राजिम माता की जयंती मनाने आये हैं। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी संगम के इस पावन धरती से प्रेरणा लेकर जाएंगे और मिलकर समाज के विकास के लिए काम करेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि माता राजिम भक्तीन की महिमा का बखान करते हुए कहा कि राजिम त्याग, भूमि तपस्या, साधना और श्रम की भूमि है। भगवान को खिचड़ी खिलाने वाले समाज से हमारा समाज का नाता है। हम अपने पुरखों के योगदान को याद करके समाज को आगे ले जा सकते हैं। शिक्षा और संस्कार भी जरूरी है।
इस अवसर पर साहू समाज के प्रतिनिधिगण सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

अपार आईडी के माध्यम से विद्यार्थियों को मिल रही स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान

रायपुर / shouryapath / भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहचान को सुदृढ़ करने हेतु लागू की गई APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) व्यवस्था के अंतर्गत राज्य में अपार-आईडी निर्माण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
दिनांक 7 जनवरी 2026 तक उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, राज्य के 57,045 विद्यालयों में अध्ययनरत 57,10,207 विद्यार्थियों में से 50,60,941 विद्यार्थियों की अपार-आईडी सफलतापूर्वक जनरेट की जा चुकी है, जो कि 88.63 प्रतिशत है तथा बड़े राज्यों में प्रतिशत के आधार पर सर्वाधिक है। यह डिजिटल शैक्षणिक संरचना की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
छत्तीसगढ़ में बेमेतरा (96.40 प्रतिशत) तथा राजनांदगांव (96.38 प्रतिशत) जिले में सर्वाधिक विद्यार्थियों के अपार-आईडी तैयार किए गए हैं, जबकि रायगढ़, कोरिया, रायपुर, कोरबा, धमतरी, दुर्ग तथा बलौदाबाजार जिलों में 93 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों के अपार-आईडी तैयार किए जा चुके हैं। 5 जिले—नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, बलरामपुर तथा दंतेवाड़ा—को छोड़कर शेष जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों के अपार-आईडी तैयार किए जा चुके हैं। सभी जिलों में शेष विद्यार्थियों के अपार-आईडी निर्माण का कार्य प्रगति पर है।
भारत सरकार ने 31 जनवरी 2026 तक सभी विद्यार्थियों के अपार-आईडी तैयार करने के लिए निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि अपार-आईडी प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी को एक स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान प्रदान की जा रही है, जिससे उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों, प्रमाण-पत्रों एवं क्रेडिट्स का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। यह व्यवस्था विद्यार्थियों की शैक्षणिक निरंतरता, पारदर्शिता तथा राष्ट्रीय स्तर पर मोबिलिटी को सशक्त बनाएगी। राज्य शासन के निर्देश पर शिक्षकों के द्वारा शेष विद्यार्थियों की अपार-आईडी निर्माण हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि सभी छात्रों को इस राष्ट्रीय डिजिटल शैक्षणिक पहल का लाभ मिल सके।

  रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज पूरे दिन प्रशासनिक, जनसंपर्क एवं आधिकारिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहेंगे। उनका दिन सुबह रायपुर में शासकीय कार्यक्रमों से शुरू होकर शाम को गोवा प्रवास के साथ संपन्न होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय सुबह 8.45 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर से प्रस्थान करेंगे। इसके पश्चात वे पुलिस ग्राउंड हेलीपैड रायपुर पहुंचेंगे और विभिन्न शासकीय व प्रशिक्षण संबंधी कार्यक्रमों में शामिल होंगे। सुबह के दौरान वे पी.टी.एस. ग्राउंड जोरा तथा एफ.टी.एस. प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।

इसके बाद मुख्यमंत्री अम्बिकापुर प्रवास पर रहेंगे, जहां पुलिस एवं प्रशासनिक गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के उपरांत वे पुनः रायपुर लौटेंगे। पूर्वाह्न 11.45 बजे मुख्यमंत्री निवास पहुंचने के बाद उनका दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक जनदर्शन कार्यक्रम निर्धारित है, जिसमें वे आम नागरिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे।

शाम को मुख्यमंत्री श्री साय रायपुर से गोवा के लिए रवाना होंगे। वे स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर से इंडिगो की उड़ान द्वारा प्रस्थान कर डाबोलिम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, दक्षिण गोवा पहुंचेंगे। वहां से वे होटल द ललित रिजॉर्ट, राज बागा, पलोलेम (कनाकाना) के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां उनका रात्रि विश्राम रहेगा।

उल्लेखनीय है कि 9 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय गोवा के कनाकाना क्षेत्र में आयोजित “आदि लोकोत्सव 2025” कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रशासनिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत स्काउट-गाइड जंबूरी से पहले सियासी भूचाल रायपुर । शौर्यपथ । प्रदेश भाजपा सरकार के कार्यकाल में बालोद में प्रस्तावित भारत स्काउट एंड गाइड की राष्ट्रीय जंबूरी से पहले संगठन…
दुर्ग / शौर्यपथ समाचार नगर पालिका निगम दुर्ग के अधीन संचालित एक शासकीय विद्यालय परिसर में बिना अनुमति अवैध रूप से चल रही शासकीय राशन दुकान अब केवल नियमों का…

शौर्यपथ लेख।

प्यार को अक्सर उम्र के तराजू पर तौला जाता है—जैसे भावनाएँ केवल जवानी की जागीर हों। लेकिन सच इससे कहीं ज़्यादा गहरा है। बड़ी उम्र की औरत का प्यार कोई क्षणिक आकर्षण नहीं, बल्कि अनुभव, समझ और आत्मिक स्थिरता से उपजा हुआ भाव होता है। यह प्यार दिखावे से दूर, भीतर तक उतरने वाला होता है—जो न सिर्फ़ रिश्ते को, बल्कि इंसान को भी संवार देता है।

अनुभव से उपजा भरोसा

ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव देख चुकी औरत जानती है कि रिश्ते शब्दों से नहीं, व्यवहार से टिकते हैं। वह जल्दबाज़ी नहीं करती, न ही हर बात पर शक का बोझ डालती है। उसका भरोसा आँख मूँदकर नहीं, बल्कि समझदारी से दिया गया होता है—और इसी वजह से वह भरोसा मज़बूत भी होता है।

देखभाल जो दिखती नहीं, महसूस होती है

उसका प्यार बड़े-बड़े वादों में नहीं, रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातों में दिखता है—समय पर पूछा गया हाल, थकान में दिया गया सुकून, और मुश्किल वक्त में बिना शोर किए खड़ा रहना। वह जानती है कि साथ निभाना क्या होता है, इसलिए उसका सहारा दिखावे का नहीं, स्थायी होता है।

भावनात्मक समझ की गहराई

बड़ी उम्र की औरत को हर बात कहने की ज़रूरत नहीं पड़ती। वह आँखों की भाषा, खामोशी की आवाज़ और व्यवहार के उतार-चढ़ाव को पढ़ लेती है। बिना टोके, बिना जज किए—सिर्फ़ समझना और साथ देना—यही उसकी सबसे बड़ी खूबी है।

सम्मान और स्वीकृति

वह सामने वाले को बदलने की कोशिश नहीं करती। न उसे अपने साँचे में ढालना चाहती है, न ही तुलना के बोझ तले दबाती है। जैसा है, वैसा स्वीकार करना—यह उसकी परिपक्वता का सबसे सुंदर रूप है। ऐसे रिश्ते में इंसान को खुद होने की आज़ादी मिलती है।

स्थिरता जो समय के साथ बढ़ती है

उसका प्यार तेज़ हवा का झोंका नहीं, बल्कि धीमी बहती नदी की तरह होता है—जो समय के साथ और गहरी, और शांत होती जाती है। उसमें ड्रामा नहीं, भरोसा होता है; दिखावा नहीं, अपनापन होता है; और डर नहीं, सुरक्षा होती है।

कुल मिलाकर, बड़ी उम्र की औरत का प्यार शोरगुल वाला नहीं होता—वह सुकून देता है। यह ऐसा प्यार है जो रिश्ते को नहीं, इंसान को मज़बूत बनाता है। जो समय के साथ कम नहीं, बल्कि और निखरता जाता है।

ऐसा प्यार मिल जाए, तो उम्र मायने नहीं रखती—क्योंकि वहाँ दिल पूरी ईमानदारी से जुड़ता है।

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)