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March 19, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

  दुर्ग। देव बलौदा मेला स्थल पर कपड़ा बेच रहे एक व्यापारी से गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के मामले में थाना पुरानी भिलाई पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार प्रार्थी मोहम्मद इस्माइल (44 वर्ष), निवासी कैम्प-02 पावर हाउस भिलाई, थाना छावनी, जिला दुर्ग, घूम-घूमकर कपड़ा बेचने का कार्य करता है। 16 फरवरी को दोपहर करीब 2:30 बजे वह देव बलौदा मेला स्थल पर कपड़ों की दुकान लगाकर बिक्री कर रहा था।
इसी दौरान बजरंग दल के नेता प्रदीप सिन्हा एवं उनके साथियों ने कथित तौर पर मंदिर परिसर का हवाला देते हुए दुकान हटाने को कहा। इस बात को लेकर विवाद बढ़ गया। प्रार्थी का आरोप है कि आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।
व्यापारी ने पुलिस को बताया कि वह विवाद से दूर रहने वाला व्यक्ति है, लेकिन धमकी के बाद वह भयभीत हो गया। उसने घटना का वीडियो रिकॉर्ड होने की बात भी कही है, जिसे जांच के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।
थाना पुरानी भिलाई पुलिस ने प्रार्थी की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 351(3) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच जारी

छत्तीसगढ़ के अद्यतन सर्कुलरों संग ‘भू-अभिलेख नियमावली’ का विमोचन

  रायपुर / राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने आज निवास कार्यालय में भू-अभिलेख नियमावली भाग 1 से 4 पुस्तक का विमोचन किया।श्री उमेश पटेल और श्री श्रीकांत वर्मा द्वारा लिखित इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग के सर्कुलर और आदेशों का संकलन है। अभी तक मार्केट में जो पुस्तक थी, उसके लेखक और प्रकाशक मध्य प्रदेश के हैं। इसके कारण मध्यप्रदेश के सर्कुलर और आदेश उस पुस्तक में मिलते हैं, परंतु छत्तीसगढ़ के नहीं।
अब इस पुस्तक में, वर्ष 2000 के बाद मध्य प्रदेश शासन द्वारा जारी सर्कुलर जो छत्तीसगढ़ राज्य में लागू नहीं है, उन्हें नहीं दिया गया है। छत्तीसगढ़ द्वारा जारी अद्यतन सर्कुलर को अध्याय-वार दिया गया है। परिशिष्ट के रूप में सर्वे, राजस्व वन भूमि के अभिलेख, गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे आदि महत्वपूर्ण विषयों पर जारी लेटेस्ट सर्कुलर शामिल किए गए हैं। विषय से संबंधित प्रश्न, इकाई परिवर्तन, शब्दार्थ आदि का भी समावेश किया गया है।
छत्तीसगढ़ विशेष के लिए नियमावली की यह पुस्तक बाजार के साथ-साथ अमेजन और जेम पोर्टल पर उपलब्ध होगा

गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने की ग्रामीण ने पहल

रायपुर, 18 फरवरी 2026/ ग्रामीण विकास और जल संरक्षण एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं, जो सतत आजीविका, बेहतर स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता के लिए अनिवार्य हैं। वर्षा जल संचयन, तालाब गहरीकरण, और जल शक्ति अभियान जैसी पहल भू-जल स्तर में सुधार और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक हैं। शक्तिगत कूप के निर्माण ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं।

ग्रामीण विकास और जल संरक्षण की दिशा में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत चिड़ौला से एक सशक्त और प्रेरणादायी सफलता की कहानी सामने आई है। यहां शक्तिगत कूप निर्माण कार्य जयबहादुर सिंह के लिए स्वीकृत किया गया, जिसके लिए शासन द्वारा 1.80 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराकर खेती-किसानी को सुदृढ़ बनाना तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देना रहा।

कूप निर्माण से पूर्व संबंधित हितग्राही सहित आसपास के किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थे, जिससे खेती करना अनिश्चित बना रहता था और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। लेकिन शक्तिगत कूप के निर्माण के बाद खेतों तक नियमित रूप से पानी पहुंचने लगा है, जिससे फसलों की समय पर सिंचाई संभव हुई। इसका सीधा लाभ कृषि उत्पादन में वृद्धि के रूप में सामने आया है, वहीं किसानों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। अब किसान समय पर बुवाई कर पा रहे हैं और खेती अधिक लाभकारी एवं सुरक्षित बन गई है। यह कूप केवल एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गया है। जल उपलब्धता सुनिश्चित होने से क्षेत्र में दोहरी फसल लेने की संभावनाएं बढ़ी हैं, खेती की लागत में कमी आई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। साथ ही भूजल स्तर के संरक्षण और जल के समुचित उपयोग को भी बढ़ावा मिला है, जो दीर्घकालीन विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ग्रामीणों ने शासन की इस जनहितकारी पहल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएं गांवों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखती हैं। 1.80 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुआ। यह शक्तिगत कूप निर्माण कार्य ग्राम पंचायत चिड़ौला में जल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम होने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सफल, प्रेरक और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है

  रायपुर / राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत हर्बल गुलाल बनाने के लिए सब्जियों के प्राकृतिक रंगों से रंगकर और उसमें गुलाब गेंदा, पलाश के फूलों की पंखुड़ियों, गुलाब जल, इत्र आदि मिलाकर हर्बल गुलाल बनाया जा रहा है। पलाश के फूलों से केसरिया गुलाल, पालक भाजी से हरे रंग का गुलाल तथा लाल भाजी से लाल रंग का गुलाल तैयार किया जा रहा है। इस गुलाल में रासायनिक पदार्थों का उपयोग नहीं होने से यह गुलाल त्वचा, आंख, बाल आदि के लिये हानिकारक नहीं है। मानव अनुकूल होने से इस हर्बल गुलाल को बिना किसी चिंता के होली के त्योहार में उपयोग किया जा सकता है।

बस्तर जिले में इस बार होली का त्यौहार न केवल रंगों भरा होगा, बल्कि सेहत और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित रहेगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक सराहनीय पहल की गई है। इसके अंतर्गत जिले के विभिन्न विकासखंडों के 9 स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को हर्बल गुलाल बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। क्रांतिकारी डेबरीधूर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर में आयोजित इस दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में महिलाएं आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर गुलाल तैयार करना सीख रही हैं।

इस अनूठी पहल की सबसे खास बात यह है कि महिलाएं अपनी रसोई और बाड़ी में मिलने वाली प्राकृतिक वस्तुओं जैसे पालक, लाल भाजी, चुकंदर और फूलों का उपयोग कर सतरंगी गुलाल तैयार करेंगी। बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों और गुलाल में अक्सर हानिकारक रसायनों का मिश्रण होता है, जो त्वचा में जलन, एलर्जी और आंखों को नुकसान पहुँचाते हैं। इन समस्याओं को देखते हुए बिहान की दीदियां कॉर्न फ्लावर के आधार (बेस) में चुकंदर और भाजी के अर्क को मिलाकर पूरी तरह चर्म-रोग मुक्त और इको-फ्रेंडली गुलाल का उत्पादन करेंगी।

प्रशिक्षण के उपरांत महिलाओं ने इस वर्ष 500 किलो से लेकर एक हजार किलो तक हर्बल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य रखा है। उत्पादित गुलाल की पहुंच जन-जन तक बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसके तहत जगदलपुर शहर के प्रमुख स्थानों और विभिन्न शासकीय कार्यालयों में विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। साथ ही जनपद स्तर के स्थानीय बाजारों में भी इस शुद्ध देशी गुलाल का विक्रय किया जाएगा। बिहान से जुड़ी इन महिलाओं के लिए यह केवल रंग बनाने का काम नहीं है, बल्कि यह उन्हें स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है। इस प्रयास से न केवल बस्तर की महिलाओं की आय में वृद्धि होगी, बल्कि आम नागरिकों को भी रसायनों के खतरे से दूर एक सुरक्षित और खुशहाल होली मनाने का विकल्प मिलेगा।

दुर्ग / शौर्यपथ / पटरी पार औद्योगिक नगर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही नशाखोरी और आपराधिक गतिविधियों को लेकर नगर पालिका निगम दुर्ग के पार्षद देवनारायण चंद्राकर ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने क्षेत्र में सघन पुलिस गश्त बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आवेदन सौंपा।
लोक कर्म विभाग प्रभारी देवनारायण चंद्राकर ने बताया कि मोहन नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पटरी पार के शक्ति नगर, शांति नगर, सिकोला भाटा, सिकोला बस्ती, कैलाश नगर चरला सहित कई वार्डों में गांजा, नशीली दवाओं और अवैध शराब का कारोबार बढ़ता जा रहा है। इससे युवा वर्ग और स्कूल जाने वाले बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शक्ति नगर तालाब के आसपास शाम से देर रात तक नशाखोरी और जुआ का जमावड़ा लगा रहता है। नियमित पुलिस गश्त नहीं होने से असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं, जिससे क्षेत्र में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल के दिनों में शक्ति नगर और शांति नगर में हुई गंभीर वारदातों के कारण आम नागरिकों में दहशत और असुरक्षा का माहौल है।
पार्षद ने एसएसपी से मांग की है कि क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर अवैध नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई की जाए और नियमित गश्त सुनिश्चित कर आम जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाया जाए।

पवित्र जैतखाम की पूजा-अर्चना और गुरु घासीदास बाबा का पुण्य स्मरण कर प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की

  रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के मोवा स्थित सतनाम भवन परिसर से "विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा" का शुभारंभ किया। उन्होंने धार्मिक विधि-विधान के साथ पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर पावन गिरौदपुरी धाम के लिए रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पवित्र जैतखाम की पूजा-अर्चना कर गुरु घासीदास बाबा का पुण्य स्मरण किया तथा प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं और सामाजिक बंधुओं से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि गुरु घासीदास बाबा का "मनखे-मनखे एक समान" का संदेश संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पदयात्रा समाज में सद्भावना, समरसता और भाईचारे को और सुदृढ़ करेगी। श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामाजिक हितों को गति देने हेतु विशेष प्राधिकरण का गठन भी किया गया है। पदयात्रा के उपरांत विशाल मेले के आयोजन की जानकारी भी उन्होंने दी।
कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि यह पदयात्रा सामाजिक समरसता, मानव कल्याण और एकता के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। उन्होंने सभी से सामाजिक भेदभाव और द्वेष से ऊपर उठकर राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढऩे का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा गुरु घासीदास बाबा के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाएगी।
कार्यक्रम में धर्मगुरु गुरु श्री बालदास साहेब, विधायक श्री ललित चंद्राकर, विधायक श्री मोतीलाल साहू, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रहलाद रजक, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, संत समाज के प्रतिनिधि एवं सर्व समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि रायपुर से गिरौदपुरी धाम तक प्रस्तावित "विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा" का आयोजन 18 से 22 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। पदयात्रा का उद्देश्य सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारा और सद्भाव का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। इस दौरान गिरौदपुरी धाम मेले में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए

युवाओं को लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा—मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
सीडीएस में ऑल इंडिया चौथी रैंक, मुंगेली की सुप्रिया बनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट

रायपुर / शौर्यपथ /
छत्तीसगढ़ के लिए गौरव के क्षण में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन स्थित अपने कार्यालय में सीडीएस परीक्षा में ऑल इंडिया चौथी रैंक प्राप्त करने वाली मुंगेली की सुश्री सुप्रिया सिंह श्रीनेत को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सुप्रिया एवं उनके परिजनों को पुष्पगुच्छ भेंट कर बधाई दी, मुँह मीठा कराया और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस अवसर पर मुंगेली कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुप्रिया की सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदार हों, तो साधारण परिवेश से आने वाला युवा भी असाधारण उपलब्धि हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण सुप्रिया को विशिष्ट बनाता है और राज्य के युवाओं को उनसे प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर आगे बढऩा चाहिए।

ग्रामीण अंचल की बेटी ने रचा राष्ट्रीय सफलता का इतिहास

उल्लेखनीय है कि ग्राम टेढ़ाधौंरा, जिला मुंगेली की 23 वर्षीय सुप्रिया सिंह श्रीनेत ने सीडीएस परीक्षा में देशभर में चौथा स्थान प्राप्त कर न केवल अपने जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर हुआ है।

साधारण परिवेश, असाधारण संकल्प

सुप्रिया एक किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता श्री वैदेही शरण सिंह एवं माता श्रीमती संतोषी सिंह श्रीनेत ने उन्हें शिक्षा और संस्कारों का मजबूत आधार प्रदान किया। सुप्रिया ने प्रारंभिक शिक्षा सेंट जोसेफ हायर सेकेंडरी स्कूल से प्राप्त की। उन्होंने कक्षा 10वीं में 71 प्रतिशत तथा 12वीं में 58 प्रतिशत अंक अर्जित किए। इसके पश्चात उन्होंने बी.टेक (इलेक्ट्रॉनिक एंड टेलीकम्युनिकेशन) में स्नातक की डिग्री हासिल की।

इंजीनियरिंग अध्ययन के दौरान ही सुप्रिया ने एनसीसी से जुड़कर नेतृत्व, अनुशासन और साहस के गुण विकसित किए तथा जूनियर अंडर ऑफिसर के पद तक पहुँचीं। यहीं से उनके भीतर भारतीय सेना में अधिकारी बनने का संकल्प दृढ़ हुआ।

कठिन परिश्रम का सुनहरा परिणाम

वर्ष 2023 में इंजीनियरिंग पूर्ण करने के बाद सुप्रिया ने पूरी एकाग्रता और अनुशासन के साथ सीडीएस परीक्षा की तैयारी की। निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमिशन के अंतर्गत आयोजित एसएसबी साक्षात्कार में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया चौथी रैंक प्राप्त की।

उनकी यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण अंचल की बेटियों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है। पढ़ाई और सैन्य उपलब्धियों के साथ-साथ सुप्रिया सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रही हैं। नृत्य उनकी विशेष रुचि है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलन और ऊर्जा प्रदान करता है।

प्रदेश के लिए गर्व की उपलब्धि

सुप्रिया सिंह श्रीनेत की यह उपलब्धि मुंगेली जिले के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और मेहनत से किसी भी सपने को साकार किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय दायित्व को पूरी गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का किया आह्वान

छत्तीसगढ़ राज्य व संभाग स्तरीय अधिकारियों का प्रशिक्षण सम्मेलन आयोजित

रायपुर /भारत की जनगणना-2027 के सफल संचालन के लिए आयोजित राज्य एवं संभाग स्तरीय अधिकारियों के प्रशिक्षण सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व को पूरी गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। जनगणना प्रशासन की विश्वसनीयता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आंकड़े अधूरे या त्रुटिपूर्ण होंगे तो विकास योजनाओं का लक्ष्य प्रभावित होगा। एक भी व्यक्ति या परिवार छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे विकास की प्रक्रिया अधूरी रह सकती है। उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी होगी। छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। यह कार्य प्रदेश के 33 जिलों, 252 तहसीलों और 19,978 गाँवों में संपन्न किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-गणना की सुविधा से जनभागीदारी बढ़ेगी और जनता का विश्वास ही जनगणना की सफलता का आधार है। यह कार्य विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत-2047 की नींव रखने वाला सिद्ध होगा। प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें तथ्यों का व्यवस्थित एवं प्रमाणिक संकलन किया जाता है। उन्होंने अधिकारियों से सभी निर्धारित कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने प्रगणकों के प्रशिक्षण में सपोर्टिव सुपरविजन की तकनीक अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों को निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग मिलना चाहिए, जिससे त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो। उन्होंने नई भवन अनुज्ञाओं को पूर्व से ही ट्रेस करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मकान सूचीकरण के दौरान कोई संरचना छूट न जाए। साथ ही सीमावर्ती जिलों के संदर्भ में उन्होंने स्वयं के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा की अन्य राज्यों में चले गए व्यक्तियों की गणना में दोहराव से बचने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना की सफलता सूक्ष्म योजना, समन्वय और सटीक क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, इसलिए सभी अधिकारी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ इस राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करे।

इस अवसर पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय कार्यों में से एक है। यह हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है और नीति-निर्माण व विकास योजनाओं की दिशा तय करती है। उन्होंने बताया कि भारत में पहली संगठित जनगणना वर्ष 1872 में प्रारंभ हुई थी और आगामी जनगणना देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी।
उन्होंने कहा कि 150 वर्षों की परंपरा वाली भारतीय जनगणना गाँव, कस्बा और वार्ड स्तर तक प्राथमिक आँकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएँ, परिसंपत्तियाँ, जनसांख्यिकीय विवरण, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति, भाषा, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रव्रजन एवं प्रजनन से संबंधित सूक्ष्म एवं विश्वसनीय आँकड़े संकलित किए जाते हैं।

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ ने कलेक्टरों को जनगणना-2027 से संबंधित कार्य के बारे में विस्तार से दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, छत्तीसगढ़ राज्य जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने जनगणना 2027 के संबंध में आधारभूत जानकारी दी। राज्य स्तरीय संभागायुक्त-कलेक्टर सम्मेलन में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त एवं अन्य अधिकारी व जनगणना निदेशालय के अधिकारी उपस्थित थे।

  रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज महानदी भवन में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन छत्तीसगढ़ स्टेट के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।इस दौरान डॉक्टरों ने 7 व 8 मार्च 2026 राजधानी रायपुर में स्थित श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में "आईएमए सीजीकॉन 2026" 21 वां स्टेट कॉन्फ्रेंस का न्यौता दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

इस अवसर पर आईएमए छत्तीसगढ़ राज्य शाखा अध्यक्ष एवं चेयरमेन डॉ अनूप वर्मा,अध्यक्ष हॉस्पिटल बोर्ड डॉ सुरेंद्र शुक्ला,आईएमए सचिव डॉ संजीव श्रीवास्तव, डॉ गंभीर सिंह उपस्थित थे।

घर में आया जल-जीवन, चौघड़ा गांव में जल क्रांति की कहानी

रायपुर / जल जीवन मिशन के माध्यम से भारत के प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध करना है, ताकि सभी घरों, स्कूलों और आंगनवाडी केन्द्रों तक नल से पानी पहुंच सके।इसी परिप्रक्ष्य में ग्रामीण जीवन में बदलाव की एक प्रेरक और सशक्त कहानी ग्राम पंचायत चौघड़ा के लोहारपारा से सामने आई है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला के विकासखंड मनेन्द्रगढ़ की निवासी दीपा के लिए स्वच्छ पेयजल कभी एक सपना हुआ करता था, जिसे पूरा करने के लिए रोज़ाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। घर से दूर स्थित कुएँ से पानी लाने में उनका काफी समय और मेहनत खर्च हो जाता था, जिससे दैनिक जीवन के अन्य कार्य प्रभावित होते थे।

हर घर नल से जल योजना के लागू होने के बाद दीपा और उनके परिवार का जीवन पूरी तरह बदल गया है। अब उनके घर पर ही शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध है। पानी के लिए भटकने की मजबूरी खत्म हो गई है और समय की बचत होने से दीपा अब परिवार, बच्चों और अन्य घरेलू कार्यों पर बेहतर ध्यान दे पा रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव स्वास्थ्य के क्षेत्र में देखने को मिला है, जहां स्वच्छ पानी के कारण परिवार की सेहत में स्पष्ट सुधार हुआ है। दीपा बताती हैं कि नल से जल मिलने के बाद जीवन में सुविधा, सम्मान और सुरक्षा का एहसास बढ़ा है। उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना केवल पानी नहीं, बल्कि बेहतर जीवन की गारंटी लेकर आई है। उनके शब्दों में यह पहल हमारे जीवन को ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के भविष्य को बदल रही है।

जल जीवन मिशन की यह पहल आज ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सुधार का सशक्त उदाहरण बन चुकी है। चौघड़ा गांव की दीपा की कहानी यह साबित करती है कि जब योजनाएं ज़मीन पर उतरती हैं, तो वे सिर्फ नल से पानी नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगी में खुशहाली और आत्मसम्मान भी पहुंचाती हैं।

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