August 07, 2026
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    PANKAJ CHANDRAKAR

    PANKAJ CHANDRAKAR

    सरगुजा /शौर्यपथ/

    मैनपाट इलाके के पर्यटन स्थल जलजली में आने वाले पर्यटक यहां की जमीन को खोद रहे हैं, जिससे पानी निकलने से यहां की सुंदरता नष्ट हो रही है। वहीं हिलती-डुलती जमीन का लाेग आनंद नहीं ले पा रहे हैं। यहां उछलने पर जमीन हिलती है और यही यहां का आकर्षण का केंद्र है। नए साल के पहले दिन से यहां पर्यटकों की भीड़ जुट रही है।

    कुछ लोग यह पता लगाने जमीन को नुकीली चीजों से खोदा जा रहा है कि जमीन के भीतर आखिर क्या है, जिससे जमीन उछलती है। वन विभाग द्वारा पर्यटकों के हिसाब से यहां सुविधाएं बढ़ाई गई हैं, लेकिन संकेतक बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं कि जमीन को न खोदें। जहां जमीन उछलती है, वहां खोद देने से चारों तरफ कीचड़ हो गया है।


    उत्खनन करने से इस प्राकृतिक स्थान की सुंदरता नष्ट होगी 

    भू-गर्भ शास्त्री विमान मुखर्जी के अनुसार जलजली की उत्पत्ति ज्वालामुखी के उद्गार कुंड में हुई है। क्रिटेशिएस काल के बाद बड़े पैमाने पर ज्वालामुखी की घटना हुई, जिसमें मैनपाट भी है। इस क्रिया के बाद कुंड में जलभराव हुआ। कालांतर में यह सूखा भी और उसमें वनस्पति भी उग आई। यह करोड़ों वर्ष पुरानी घटना है। वनस्पति की जड़ और पानी के कारण यह स्थान जलजली लगता है। इस क्षेत्र में उत्खनन करने से इस प्राकृतिक स्थान की सुंदरता नष्ट होगी

     

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

    रायपुर में फिलहाल रात 10 बजे के बाद से नाइट कर्फ्यू की सख्ती देखने को मिल रही है। मगर दिन का जो वक्त है वो दुकानदार ग्राहकों को लूटने में लगा रहे हैं। अचानक रायपुर की बस्तियों में गुटखे के सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांड महंगे हो चुके हैं। कई जगहों पर तो दुकानदार यहां तक कह रहे हैं कि सप्लाई ही नहीं है। रोजमर्रा की कई चीजों के दाम 10 रुपए से लेकर 50 रुपए तक बढ़ चुके हैं। इन सबके पीछे की वजह है लॉकडाउन का हल्ला। हालांकि आधिकारिक तौर पर लॉकडाउन को लेकर कोई एलान सरकार या प्रशासन ने नहीं किया है।

    व्यापारियों के साथ बैठक के बाद 4 दिन पहले प्रदेश के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने स्पष्ट किया था कि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाने जैसी कोई बात नहीं है। सभी कारखाने और व्यावसायिक काम-काज होते रहेंगे। उन्होंने लॉकडाउन के सवाल पर कह दिया था कि लॉकडाउन की चर्चा ही नहीं है, हम इस वक्त लॉकडाउन की स्थिति में नहीं हैं। बावजूद इसके बाजार में महंगाई आम आदमी को परेशान किए हुए है।

    शहर की बस्तियों का हाल

    रायपुर के संजय नगर इलाके में किराने की दुकान चलाने वाले सिराज ने बताया कि सबसे ज्यादा बिकने वाला गुटखे का पाउच नहीं मिल रहा। कुछ दुकानों पर इसे 10 से 15 रुपए बढ़ाकर बेचा जा रहा है, फुटकर में 5 रुपए का गुटखा अब 7 रुपए में बिक रहा है। 

    बोरियाखुर्द में किराने की दुकान चलाने वाले रितेंद्र पांडे ने बताया कि होलसेल में खाने के तेल के दाम बीते दो-तीन दिनों में अचानक बढ़ गए हैं। जो तेल का टीपा 2020 रुपए में मिल रहा था, अब 2100, 2200 के करीब मिल रहा है, होलसेल में ही रेट बढ़ गए हैं तो चिल्हर रेट पर इसका असर पड़ा है। 

    संतोषी नगर इलाके के दुकानदार रोशन साहू ने बताया कि गुड़ाखू (एक नशीला मंजन) भी मनमाने दाम पर बिक रहा है। इसका रेट भी बढ़ गया है। 7 रुपए में आने वाली छोटी डिबिया 15 से 20 रुपए में बेची जा रही है। आस पास के जिले, धमतरी और महासमुंद में भी इसी तरह के हालत बने हुए हैं।
    कालाबाजारी की तैयारी 

    होलसेल दुकानदारों का ग्रुप ऐसे मौके की तलाश में ही रहता है। लॉकडाउन की खबरों के बीच मार्केट से अचानक कुछ चीजों को गायब कर दिया जाता है। लोग जब मनमाने दाम पर खरीदने को राजी हों तो 5 रुपए की चीज 50 में बेची जाती है। इस बार भी कुछ ऐसी की तैयारी में कारोबारी नजर आ रहे हैं।

    ये होनी चाहिए व्यवस्था 

    YMS यूथ फाउंडेशन के महेंद्र सिंह होरा ने बताया कि लॉकडाउन की अफवाह के बीच चीजों के दाम बढ़ाने की वजह से पिछले साल कलेक्टर ने नगर निगम, नापतौल और खाद्य विभाग के अफसरों की एक टीम बनाई थी, ऐसी शिकायतों पर ये टीम जिले में कार्रवाई कर रही थी। रायपुर में 20 से अधिक दुकानों को सील करने की कार्रवाई भी की गई थी। इस बार अब तक ऐसी व्यवस्था लागू नहीं की गई है इसे जल्द शुरू किया जाना चाहिए।

    दुर्ग /शौर्यपथ/

    दुर्ग पुलिस ने फेसबुक पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ अश्लील पोस्ट करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। सुपेला थाना पुलिस ने आरोपी संतोष कुमार ठाकुर (48) के खिलाफ धारा 292 और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। तब से आरोपी फरार था।

    सुपेला थाना प्रभारी सुरेश ध्रुव ने बताया कि मॉडल टाउन सुपेला निवासी संतोष कुमार ठाकुर के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत 6 जनवरी की रात मामला दर्ज किया गया था। उसने अपने मोबाइल फोन से सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ अश्लील शब्दों का इस्तेमाल करते हुए एक पोस्ट डाला था। आरोपी ने पोस्ट में मुख्यमंत्री के खिलाफ कई अनर्गल आरोप भी लगाए थे।

    आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार करने के लिए तलाश जारी की गई थी। इसके बाद 9 जनवरी की सुबह उसे गिरफ्तार कर उसके पास से वह मोबाइल फोन जब्त किया गया, जिससे उसने वह पोस्ट किया था। पुलिस आरोपी को न्यायिक रिमांड में भेज दिया है।

    पुलिस को छकाता रहा आरोपी

    आरोपी इतना शातिर था कि पुलिस जब भी उसे गिरफ्तार करने जाती वह मौका देखकर भाग जाता। सुपेला टीआई सुरेश ध्रुव को मुखबिर से सूचना मिली की आरोपी 7 जनवरी की शाम अपने घर पर है। जैसे ही उन्होंने अपनी टीम को भेजा वह कुछ मिनट पहले ही वहां से भाग गया। इसके बाद पुलिस ने एक टीम को उसके पीछे लगा दिया। 9 जनवरी की सुबह आरोपी जैसे ही अपने परिवार वालों से मिलने घर पहुंचा पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

     

    अन्य खबर /शौर्यपथ/ 

     ई-श्रमिक योजना से जुड़ने पर ई-श्रम कार्ड दिया जाता है. इसके तहत व्यक्ति को अपनी कौशलता के अनुसार रोजगार मिलता है. अगर अभी तक आपका ई-श्रमिक कार्ड नहीं बना है तो आइए आपको इसके फायदे के साथ अप्लाई करने का पूरा प्रोसेस बताते हैं...

     देशभर के सभी गरीब मजदूर परिवारों  के लिए सरकार ने ई-श्रमिक योजना  को शुरू किया है।

    जिसके तहत गरीब मजदूर परिवार को ई-श्रम कार्ड  दिया जाता है।

    यहां उन्हें अपने कौशल के आधार पर रोजगार  भी दिया जाता है। साथ ही सरकार की अन्य सरकारी लाभों का भी फायदा मिलता है। जब से इस योजना की शुरुआत की गई है तब से ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ रहे हैं तो जुड़ने के लिए तैयार हैं।

    श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने ई-श्रम योजना 2022 का भी शुभारंभ कर दिया है।

    ऐसे में जो लोग अब तक इस योजना से जुड़कर लाभ नहीं उठा सके हैं, उनके लिए एक बेहतरीन मौका है। अगर आप भी ई- श्रम कार्ड बनवाना चाहते हैं तो आप सेल्फ रजिस्ट्रेशन भी कर सकते हैं। आज हम आपको ई-श्रमिक योजना में रजिस्ट्रेशन करने का तरीका बताने के साथ इससे संबंधित अन्य जानकारी भी बताने जा रहे हैं, आइए इसके बारे में विस्तार से बताते हैं..

     क्या है ई-श्रम कार्ड का मुख्य उद्देश्य?

    ई-श्रम कार्ड को प्रवासी श्रमिक, निर्माण श्रमिक, स्ट्रीट वेंडर, घरेलू श्रमिक, प्लेटफार्म श्रमिक और कृषि श्रमिक आदि सभी असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक पहुंचना है। इस पोर्टल के जरिए केंद्रीकृत डेटाबेस का निर्माण किया जा सकेगा। इसका उद्देश सामजिक सुरक्षा योजनाओं के कार्यान्वयन में सुधार करना है। ई-श्रम पोर्टल में जुड़े श्रमिकों को उनके कौशल के आधार पर काम दिया जाता है। ई-श्रम कार्ड होने पर मिलेंगे ये लाभ? 2 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा मिलेगा। सभी श्रमिक योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा। पेंशन योजना का भी लाभ मिल सकता है। हेल्थ ट्रीटमेंट में आर्थिक मदद मिलेगी। मकान बनाने के लिए आर्थिक मदद मिलेगी।

     पढ़ाई कर रहे बच्चों की आर्थिक मदद की जाएगी। सभी तरह की कल्याणकारी सरकारी योजनाओं का फायदा मिलेगा। गर्भवती महिलाओं को बच्चों के भरण-पोषण के लिए सहायता दी जाएगी

     

     

    मुख्यमंत्री ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में ...

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में मंत्री अमरजीत भगत के विभागों खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, संस्कृति विभाग की बजट तैयारियों की समीक्षा की।

    बैठक में खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी  गौरव द्विवेदी, वित्त विभाग की सचिव  अलरमेलमंगई डी., सचिव खाद्य टोपेश्वर वर्मा, संस्कृति विभाग के सचिव अंबलगन पी. सहित सम्बंधित अधिकारी उपस्थित थे।

    सुनो भई कहानी /शौर्यपथ/ 

    इस कहानी में एक पहेली है। साथ ही हैं कुछ ऐसे शब्द जो बोलचाल में कम इस्तेमाल होते हैं। बच्चों को कहानी सुनाते समय नए शब्दों से परिचित भी कराते चलें, तो कहानी का आनंद दूना हो जाएगा और सीखने का मज़ा भी आएगा।
    इस कहानी को छोटे नाटक के रूप में खेला भी जा सकता है।


    एक बादशाह संध्या के समय वेश बदलकर घूमने निकले। उनके साथ कुछ सिपाही थे, जो दूर रहकर उनकी रक्षा करते थे। एक स्थान पर एक इमारत का निर्माण-कार्य* चल रहा था। मज़दूर क़तार में मज़दूरी लेने के लिए खड़े थे। एक मज़दूर ने अपनी मज़दूरी ली, जेब में रखी और गुनगुनाता हुआ चला। बादशाह ने उसे रोक लिया, पूछा, ‘मुझसे कुछ बातें करोगे?’ ‘क्यों नहीं?’ मज़दूर रुककर बोला, ‘कहो, क्या कहना चाहते हो?’ ‘आओ, उधर पेड़ के नीचे बैठ जाएं। मैं तुम्हारा अधिक समय न लूंगा। मुझे मालूम है पूरा दिन काम करके तुम थक चुके होंगे, बस थोड़ी देर के लिए मेरे साथ बातें करो।’ ‘ऐसी कोई बात नहीं।’ मज़दूर हंसकर बोला। ‘मैं अभी आठ घंटे और काम कर सकता हूं।’ दोनों पेड़ के नीचे जाकर बैठ गए। ‘तुम्हें जो मज़दूरी मिलती है, क्या वो तुम्हारे लिए पर्याप्त* है?’ बादशाह ने पूछा। ‘हां, काफ़ी है।’ मज़दूर ने कहा। ‘कितना कमा लेते हो?’ ‘चार रुपए प्रतिदिन।’ ‘उन्हें ख़र्च कैसे करते हो?’ मज़दूर हंसकर बोला, ‘बड़ी आसानी से ख़र्च करता हूं। सीधा हिसाब है। एक रुपया मैं खाता हूं, एक रुपया क़र्ज देता हूं, एक रुपया क़र्ज लौटाता हूं और एक रुपया फेंक देता हूं। ये सीधा हिसाब है।’ बादशाह उलझ कर बोले, ‘मेरी समझ में कुछ नहीं आया।’ मज़दूर ठठाकर हंस पड़ा। बोला, ‘मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूं भाई! बस पहेलियों में बात करने का शौक़ है, सो बात बना दी।’ ‘पहेली है तो पहेली का जवाब बता दो।’ बादशाह ने आग्रह किया। मज़दूर ने स्पष्टीकरण किया, ‘एक रुपया खाता हूं अर्थात अपने परिवार के भोजन के लिए ख़र्च करता हूं। एक रुपया कर्ज़ देता हूं अर्थात अपने बच्चों पर ख़र्च करता हूं, ताकि वृद्धावस्था में वो हमारा ख़्याल रखें। एक रुपया कर्ज़ लौटाता हूं अर्थात अपने बूढ़े माता-पिता पर ख़र्च करता हूं, क्योंकि उन्होंने मेरा पालन-पोषण किया है। एक रुपया फेंक देता हूं, अर्थात दान कर देता हूं।’ बादशाह मज़दूर की प्रतिभा से बहुत प्रभावित हुए, बोले, ‘तुमने अभी जो मुझे बताया है वो और किसी को न बताना।’ ‘कोई पूछेगा तो अवश्य बताऊंगा।’ मज़दूर हंस कर बोला। ‘इसमें छिपाने की क्या बात है! तुम कोई हमारे बादशाह हो कि तुमने आज्ञा दी और मैंने मानी।’ ‘हां, हम बादशाह ही हैं।’ बादशाह ने अपना परिचय कराया, ‘हम दरबार में ये पहेली पेश करेंगे और फिर देखेंगे कि कौन इस पहेली को सुलझाता है? थोड़ा आनंद लेंगें। लो, ये अशर्फ़ियां रखो। तुम्हारा इनाम है।’ मज़दूर घबराकर खड़ा हो गया बोला, ‘इनाम की ज़रूरत नहीं, मैं आपकी आज्ञा का पालन करूंगा।’ ‘ये अशर्फ़ियां तुम्हारी अक़्लमंदी का इनाम हैं। अब तुम हमसे वादा करो कि तुम जब तक सौ बार हमारा चेहरा नहीं देख लोगे, किसी को पहेली का हल नहीं बताओगे।’ मज़दूर ने इनाम लेकर वादा कर लिया। दूसरे रोज़ बादशाह ने दरबार में पहेली पेश की, ‘एक मज़दूर है। उसे प्रतिदिन चार रुपए मज़दूरी मिलती है। इनमें एक रुपया वो खाता है, एक कर्ज़ देता है। एक रुपया क़र्ज़ चुकाता है और एक रुपया फेंक देता है। बताओ कि वे चार रुपए कैसे और कहां ख़र्च करता है?’ दरबार में मौन छा गया। बादशाह बहुत निराश हुए। कहा, ‘इसका अर्थ ये हुआ कि हमारे दरबार में कोई बुद्धिमान व्यक्ति नहीं है। हम कल तक का समय देते हैं। हमें पहेली का हल चाहिए।’ एक मंत्री बहुत होशियार था। उसने बादशाह के सुरक्षा-कर्मियों से मिलकर पता लगाया कि बीते दिनों में बादशाह कहां-कहां गए थे। उसने न केवल मज़दूर को तलाश कर लिया बल्कि पहेली का हल भी जान लिया। दूसरे दिन मंत्री ने दरबार में पहेली का हल पेश कर दिया। बादशाह के क्रोध की सीमा न रही। उन्होंने सिपाही भेजकर मज़दूर को पकड़कर बुलवाया। पूछा, ‘तुमने इन्हें पहेली का हल बताया है?’ ‘जी हां, बताया है।’ मज़दूर ने स्वीकार किया। ‘हमने तुमसे वादा लिया था। कि किसी को हल नहीं बताओगे। तुमने वादा क्यों तोड़ा?’ बादशाह क्रोधित होकर बोले। ‘मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। आपने कहा था न कि जब तक सौ बार आपका चेहरा न देख लूं, किसी को पहेली का उत्तर न बताऊं? तो मैंने सौ बार आपका चेहरा देखा और वज़ीर जी को उत्तर बता दिया।’ ‘क्या कहते हो? तुमने हमारा चेहरा कहां देखा? उस दिन के बाद आज अभी तुम हमारे सामने आए हो।’ मज़दूर ने भयभीत हुए बिना कहा, ‘जहांपनाह, मैं आपको पूरी बात बताता हूं। आपके ये मंत्री मुझ तक पहुंचे। दस अशर्फ़िंयां मेरे सामने रखीं और पहेली का उत्तर मांगा, मैंने इंकार कर दिया।’ ‘फिर?’ ‘इन्होंने फिर दस अशर्फ़ियां रखीं। मैंने इंकार कर दिया।’ ‘फिर??’ ‘मैंने पहेली का उत्तर बताने से इंकार कर दिया।’ ‘फिर...?’ ‘ये दस-दस अशर्फ़ियां बढ़ाते गए। जब सौ अशर्फ़ियां मेरे सामने आ गईं तो मैंने उत्तर बता दिया।’ ‘सौ अशर्फ़ियां लेकर तुमने वादा तोड़ दिया।’ बादशाह ने ग़ुस्से से कहा, ‘यही है तुम्हारा वादा?’ ‘नहीं, मैंने बेईमानी नहीं की। अशर्फ़ियों पर आपका चेहरा है, सौ बार आपका चेहरा देखा और फिर उत्तर बताया। ये वादा तोड़ना तो नहीं हुआ जहांपनाह।’ मज़दूर ने कहा। बादशाह चकित रह गए। उन्होंने तो ये बात सोची ही नहीं थी। मज़दूर ने अपनी बुद्धि के बल पर सौ अशर्फ़ियां और कमा ली थीं। बादशाह ने मुक्त हृदय से मज़दूर की प्रशंसा की तथा उसे अपने दरबार में रख लिया। *अशर्फ़ियां- सिक्के, निर्माण-कार्य- बनाने का काम, पर्याप्त- काफ़ी (पुस्तक- पहेलियों वाली लोक कहानियां)

     

    टेक्नोलॉजी /शौर्यपथ/ 

    देश के पांच राज्यों में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। इससे पहले चुनाव आयोग ये साफ कर चुका है कि चुनाव के दौरान लोग सी-विजिल (cVIGIL) ऐप का इस्तेमाल करें। अगर चुनाव में धांधली हो रही है तो लोग इसके जरिए शिकायत करें और हम एक्शन लेंगे। इस ऐप को आयोग ने 3 साल पहले 2019 में लॉन्च किया था। आइए इस ऐप के बारे में जानते हैं


    क्या है

    सी-विजिल ऐप?

    चुनाव आयोग ने सी-विजिल ऐप को चुनावों में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए तैयार किया है। इस ऐप की मदद से वोटर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन की जानकारी दे सकते हैं। इस ऐप को सभी एंड्रॉयड और iOS यूजर्स के लिए तैयार किया गया है। ऐप पर शिकायत करने के लिए यूजर को स्मार्टफोन के कैमरे और GPS एक्सेस की जरूरत होती है। चुनाव आयोग पिछले 3 सालों से इस ऐप का इस्तेमाल सभी तरह के चुनावों में कर रहा है


    ऐसे चुनाव को पारदर्शी बनाएगा सी-विजिल

    जिस राज्य में चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू हो जाती है। वहां के लोग इस ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं।

    चुनाव आयोग के मुताबिक चुनाव तारीखों का ऐलान होने के बाद से वोटिंग खत्म होने तक, कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत सी-विजिल ऐप के जरिए चुनाव आयोग को भेज सकता है।

    आचार संहिता के दौरान नेताओं की तरफ से किसी भी तरह के कोई गैरकानूनी दस्तावेज बांटने, भ्रष्टाचार और विवादित बयानों की शिकायत इस ऐप के जरिए कर सकते हैं।

    सी-विजिल ऐप पर शिकायतकर्ता जो भी वीडियो या फोटो अपलोड करेंगे वो 5 मिनट के अंदर स्थानीय चुनाव अधिकारी के पास चला जाएगा।

    शिकायत सही है तब 100 मिनट के अंदर ही उस समस्या का समाधान किया जाएगा।

    मई 2019 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान इस ऐप का इस्तेमाल पहली बार किया गया था। उसके बाद से लगातार ऐप का इस्तेमाल चुनावों में किया जा रहा है।

     

    जो लोग सी-विजिल ऐप से किसी की शिकायत करना चाहते हैं, उन्हें इस ऐप को इन्स्टॉल करना होगा। ऐप इन्स्टॉल होने के बाद आपको रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके लिए शिकायतकर्ता को नाम, पता, राज्य, जिला, विधानसभा और पिनकोड की जानकारी देनी होगी। एक OTP की मदद से इसका वैरिफिकेशन किया जाएगा। अब शिकायत करने के लिए फोटो या कैमरे को सिलेक्ट करें। शिकायतकर्ता 2 मिनट तक का वीडियो ऐप पर अपलोड कर सकता है। फोटो और वीडियो से जुड़ी डिटेल के लिए एक बॉक्स भी मिलता है, जहां उसके बारे में लिखा जा सकता है।

    चुनाव आयोग के मुताबिक जो फोटो या वीडियो अपलोड किया जाता है, उससे उस जगह की लोकेशन भी पता चल जाती है। फोटा या वीडियो अपलोड होने के बाद यूजर को एक यूनीक ID मिलेगी। इसके जरिए वे मोबाइल पर ही फॉलोअप ट्रैक कर सकते हैं। शिकायतकर्ता की पहचान को गोपनीय रखा जाता है। हालांकि, ऐप पर पहले से रिकॉर्ड वीडियो या फोटो अपलोड नहीं कर सकते। इतना ही नहीं, ऐप से रिकॉर्ड किए गए वीडियो या फोटो फोन गैलरी में सेव नहीं होंगे

     

     

     

    पीएम मोदी की यह समीक्षा बैठक ऐसे वक्त हुई है, जब दिल्ली, मुंबई के साथ तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में कोरोना के मामले पिछले 15 दिनों में बेहद तेजी से बढ़े हैं. चुनाव आयोग ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का ऐलान भी कर दिया है.

    नई दिल्ली /शौर्यपथ/

      प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश में कोरोनावायरस से उपजे मौजूदा हालातों की समीक्षा की. पीएम मोदी ने स्वास्थ्य मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बारे में जानकारी ली. इससे पहले प्रधानमंत्री ने 24 दिसंबर को भी ऐसी ही बैठक की थी. पीएम मोदी ने लोगों से सतर्क और सावधान रहने की अपील की है. पीएम मोदी ने कोरोना की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की. यह समीक्षा बैठक ऐसे वक्त हुई है, जब दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े महानगरों और तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में कोरोना के मामले पिछले 15 दिनों में बेहद तेजी से बढ़े हैं.

     इस बीच चुनाव आयोग ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का ऐलान भी कर दिया है. देश में रविवार को कोरोना वायरस के करीब 1.6 लाख नए मरीज सामने आए हैं, जो पिछले 224 दिन में रोजाना के सबसे ज्यादा मामले हैं. जबकि सक्रिय मरीजों की संख्या 6 लाख के करीब पहुंच गई है, जो करीब 197 दिन में सर्वाधिक है. सरकारी सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री ने वीडियो कांफ्रेस के माध्यम से हुई इस बैठक में कोविड-19 की ताजा स्थिति की समीक्षा की.रविवार को कोविड-19 के नये वैरिएंट ओमिक्रॉन के 552 नए मामले सामने आए हैं. इससे संक्रमित मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 3,623 हो गई है.

      
    देश में पिछले 24 घंटे में 327 लोगों की मौत होने के बाद मृतकों की तादाद 4,83,790 हो गई है. ओमिक्रॉन के 3623 मरीजों में से 1409 या तो देश से बाहर चले गए हैं या स्वस्थ हो गए हैं. महाराष्ट्र में ओमिक्रोन के सर्वाधिक 1,009 मामले सामने आए हैं. दिल्ली में 513, कर्नाटक में 441, राजस्थान में 373, केरल में 333 और गुजरात में 204 मामले मिले हैं.

     

     

     

    सहायक आरक्षकों को आरक्षक के समकक्ष पद पर पदोन्नति एवं वेतन भत्ते प्रदाय किये जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत करने के दिये निर्देश

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को किया प्रेषित

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ पुलिस में कार्यरत सहायक आरक्षकों को नववर्ष की सौगात देते हुए आरक्षक के समकक्ष पद पर पदोन्नति एवं वेतन भत्ते प्रदाय किये जाने के संबंध में प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को प्रेषित करने हेतु पुलिस मुख्यालय को निर्देशित किया गया है । इससे सहायक आरक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी होगी और वे अन्य भत्तों एवं सुविधाओं के भी पात्र होंगे। मुख्यमंत्री  बघेल की इस घोषणा से सहायक आरक्षकों में हर्ष का माहौल है।

    मुख्यमंत्री  बघेल के निर्देशों का तत्काल पालन करने हेतु गृह मंत्री  ताम्रध्वज साहू द्वारा पुलिस मुख्यालय को निर्देशित किया गया। मुख्यमंत्री के निर्देश के पालन में पुलिस महानिदेशक  अशोक जुनेजा द्वारा विस्तृत प्रस्ताव शासन की और प्रेषित किया गया है

    सकारात्मक आदतें /शौर्यपथ/ 

    दिनचर्या में जितने अधिक काम आदतों के रूप में होंगे, ज़िंदगी उतनी ही सुचारु, व्यवस्थित और सेहत भरी होगी।

    इस सच को हम सब जानते हैं, इसलिए अच्छी आदतें बनाने की कोशिश भी करते हैं।

    दिक़्क़त यह होती है कि अच्छी आदत जल्दी पड़ती नहीं है। रोज़-रोज़ वही काम करके मन ऊब जाता है।

    घड़ी में सुबह के दस बजे हैं। इतने में बेटी अपनी मां से कहती है कि वह परिसर में स्थित पार्क में 15 मिनट टहलकर आए। मां आनाकानी करती है, बताती है कि अभी रोज़मर्रा के बहुत से काम बाक़ी हैं। दो घड़ी दम लेने की भी फ़ुरसत नहीं है। कल चली जाऊंगी। बेटी कुछ सुनना नहीं चाहती। वह ज़िद पकड़ लेती है। ‘तुम्हें जाना ही होगा, यही नियम है। भले ही पांच मिनट के लिए जाओ, लेकिन जाओ!’ अंतत: मां को सारे काम छोड़कर टहलने जाना ही पड़ता है।

    किसी भी घर की अत्यंत साधारण लगने वाली इस घटना में एक महत्वपूर्ण सूत्र छिपा है : कोई भी नई गतिविधि शुरू करने और उसे अपनी आदत बनाने के लिए किसी साथी या रिमाइंडर की मदद लेना उपयोगी होता है।

    महिलाओं के जि़म्मे बहुत सारे काम होते हैं, इसलिए उन्हें रुटीन में ख़ुद के लिए कोई गतिविधि जोड़ना मुश्किल लगता है। यदि वे कुछ नया शुरू करना भी चाहती हैं- सैर, वर्जिश, शौक़ या कुछ सीखना- तो नियमितता क़ायम नहीं रख पातीं और उसे बीच में ही छोड़ देती हैं। लेकिन अपनी सेहत के लिए, अपनी ख़ुशी के लिए और संतुष्टि व रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए जीवन में कुछ नया, कुछ अच्छा जुड़ते रहना चाहिए।

    हम ऐसी कोशिश करते भी हैं, किंतु कुछ समय बाद ही सबकुछ पुराने ढर्रे पर लौट आता है। दैनंदिनी में कोई नई गतिविधि जुड़े और जुड़कर आदत में बदल जाए, इसके लिए पहले कुछ बातें जान लेना ज़रूरी है।

    शुरुआत छोटी...

    ब्लॉगर लिओ बबूटा कहते हैं— ‘इसे इतना आसान बनाइए कि आप न कह ही न सकें!’ नई गतिविधि या कार्य को छोटा रखिए। आधे घंटे की सैर के बजाय आरंभ में दस मिनट तय कीजिए। रोज़ दस पन्ने लिखने की जगह एक पैराग्राफ़ का लक्ष्य बनाइए। पूरे खानपान को बदल डालने के बजाय सुबह स्वास्थ्यवर्धक नाश्ते का नियम बनाइए। हमेशा ध्यान रहे कि आपको संख्या या मात्रा नहीं, उस काम की आदत डालनी है।

    कभी कोई अतिरिक्त ज़िम्मेदारी आ जाएगी, कभी स्वास्थ्य ठीक नहीं लगेगा, कभी मूड। लेकिन जब लक्ष्य छोटा होगा, कम समय में पूरा हो जाने वाला होगा तो आप ख़ुद से कोई बहाना नहीं बना पाएंगी। कभी सफ़र में होंगी तो पांच पन्ने लिखना मुश्किल होगा, पर पांच-दस लाइनें तो चलती गाड़ी में भी लिख लेंगी। पार्क न मिले तो दस मिनट फुटपाथ पर ही टहल लेंगी।

    — आपका फोकस काम शुरू करने पर रहे, न कि ख़त्म करने पर।

    रफ़्तार धीमी...

    आरंभ में काफ़ी उत्साह रहता है, हम जल्दी-जल्दी छलांगें लगाना चाहते हैं। गतिविधि नई होती है तो मन भी लगता है। हालांकि समय के साथ उत्साह कम होने लगता है और एकरसता भी आने लगती है। कोई आश्चर्य नहीं कि इस वक़्त नई गतिविधि छूट जाती है। इससे बचने के लिए आवश्यक है कि संख्या, समय या मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जाए। आख़िरकार आप पूरी ज़िंदगी के लिए आदत बना रही हैं, इसलिए हड़बड़ाहट की ज़रूरत ही नहीं है।

    अगर संभव हो तो उस काम को कई हिस्सों में करें। मसलन, सैर का समय 15 से बढ़ाकर 30 मिनट करना है तो सुबह ही आधा घंटा निकालने के बजाय सुबह और शाम 15-15 मिनट टहलने जाएं। इससे बाक़ी काम प्रभावित नहीं होंगे।

    — निरंतरता और धैर्य से चमत्कारिक परिवर्तन होते हैं।

    बदलाव..

    आपके जीवन में तब तक अनुशासन नहीं आ पाएगा, जब तक आप स्वयं को लापरवाह मानती रहेंगी। आप जब तक मानती रहेंगी कि मेरा तो खाने पर कंट्रोल नहीं है, तब तक वज़न कम नहीं कर पाएंगी। निश्चित है कि शुरुआती सफलता के बाद सबकुछ फिर पहले जैसा हो जाएगा। विशेषज्ञ कहते हैं कि अक्सर यह आदत बदलने के बजाय व्यक्तित्व और सोच बदलने का मामला होता है।

    इसलिए पहले अपने मन में अपनी छवि बदलें। फिर क़रीबी लोगों की सकारात्मक टिप्पणियों पर ग़ौर करें। पड़ोसन कहे कि आजकल आप नियमित रूप से सैर के लिए आती हैं तो इसे तारीफ़ के रूप में लें। यह न कहें कि देखें, ऐसा कब तक चल पाता है! छोटी-छोटी जीत से स्वयं का आत्मविश्वास बढ़ने दें।

    — आप फल-सब्ज़ियां ज़्यादा खाने की आदत नहीं बनातीं, दरअसल आप सेहत के प्रति जागरूक व्यक्ति बनती हैं।

    अच्छी होती हैं...बाधाएं...

    जर्नल ऑफ़ एप्लाइड बिहेवियर एनालिसिस में एक दिलचस्प रिसर्च प्रकाशित हुई। एक प्रयोग के तहत शोधकर्ताओं ने लिफ्ट का दरवाज़ा बंद होने में लगने वाला समय 10 सेकंड से बढ़ाकर 30 सेकंड कर दिया। इससे बहुतों को लगा कि इतने इंतज़ार से बेहतर है सीढ़ियां ही चढ़ ली जाएं। ख़ास बात यह कि दरवाज़ा बंद होने का समय पूर्ववत हो जाने के बाद भी वे सीढ़ियों का प्रयोग करते रहे। इस अवलोकन से सूत्र मिलता है कि बुरी आदत छोड़ने के लिए उस तक पहुंचना थोड़ा मुश्किल बना दिया जाए। उदाहरण के लिए, अगर आप सोशल मीडिया का समय कम करना चाहती हैं तो बस एक काम करें। मोबाइल में सोशल मीडिया ऐप्स डिलीट कर दें और हर बार वेबसाइट पर पासवर्ड डालकर लॉग-इन करें। कुछ दिनों में फ़र्क़ महसूस हो जाएगा। जब सोशल मीडिया से वक़्त बचेगा तो वह किसी रचनात्मक कार्य में ही लगेगा।

    टूटने न पाए लय...

    विशेषज्ञों का सुझाव है कि सुबह ऊर्जा सर्वाधिक रहती है, अत: नए कार्य को सुबह के रुटीन में जोड़ें। बाद में दिन के अन्य वक़्त में उसे बढ़ा सकती हैं।
    परिवेश में कुछ ऐसा हो जाे आपको काम की याद दिलाए। यह अलार्म हो सकता है या मंदिर में आरती के दौरान बजने वाली घंटी भी। शुरुआत के उदाहरण में बेटी है जो अपनी मां को सैर के लिए याद दिलाती है।
    नए काम को किसी वर्तमान काम या गतिविधि से जोड़ लें। जैसे- अख़बार पढ़ने के साथ अंकुरित अन्न खाना या चाय पीते हुए कामों की सूची (टू डू लिस्ट) बनाना।
    कभी-कभार की छुट्‌टी चलती है, लेकिन कोशिश करें कि नई आदत में लगातार दो दिन का गैप न हो। अंतराल जितना अधिक होगा, आपके लिए फिर से शुरू करना उतना ही मुश्किल होता जाएगा।
    गतिविधि के साथ पुरस्कार जोड़ें। मसलन, सैर के बाद पसंदीदा नाश्ता लें, कुछ लिखने-पढ़ने के बाद एक सीरियल देख लें या काॅफी पिएं।
    नई आदतें बनाने के लिए कभी भी एक से ज़्यादा काम एक साथ शुरू न करें। एक बार में एक आदत।

    हमारा शौर्य

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