August 02, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम प्रशासन की सफाई और नियमो का पालन करवाने के लिए की जा रही कार्यवाही से शहर की जनता में ये विश्वास जगा है कि शहर के आयुक्त और निगम प्रशासन शहर के लिए कुछ अच्छा कर रहे है किन्तु यही विश्वास तब डगमगा जाता है जब इस तरह की शिकायत किसी धनवानों के अतिक्रमण पर की जाती है या जनहित के कार्यो के लिए की जाती है . निगम प्रशासन की ऐसी कार्यवाही क्या कुछ चुनिन्दा वर्ग के लिए है या सीढ़ी साधी जनता में प्रशासनिक दहशत के लिए है जबकि निगम प्रशासन की नजरो के सामने ही ऐसे कई अवैधानिक कार्य हो रहे है जिनकी शिकायत या सुचना के बाद भी निगम प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी मौन रहते है. शिकायतों पर कार्यवाही की तत्परता दिखाने वाले निगम प्रशासन आखिर कई शिकायतों पर ध्यान क्यों नहीं देता जबकि इसकी सुचना कई बार दी जा चुकी है .
    आयुक्त के निर्देश पर 10000 रु0 लगाया गया जुर्माना
    निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार आज आशा नगर क्षेत्र वार्ड 21 में निरजचंद सूर्या को सड़क किनारे कच्च्ी नाली के ऊपर अपना भवन सामग्री रेत, गिट्टी रखने पर निगम स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता द्वारा उनके घर जाकर 10,000 रु0 का जुर्माना काटा ।
    उल्लेखनीय है कि शहर में दो घंटे हुई लगातार बारिश से आशा नगर क्षेत्र से शिकायत मिली की निरजचंद शर्मा द्वारा कच्ची नाली में भवन सामग्री डाल दिया गया है जिससे नाली जाम हो गई है और आस-पास जगहों में बारिश का पानी भर रहा है । जिला कलेक्टर एवं आयुक्त इंद्रजीत बर्मन द्वारा तितुरडीह क्षेत्र का भ्रमण कर पानी भराव की स्थिति का जायजा लिया गया। इस दौरान शिकायत के आधार पर स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा मौका मुआयना किया गया। कच्ची नाली में निरजचंद सूर्या द्वारा भवन सामग्री डाल दिया गया था। जिसके कारण आस-पास क्षेत्र में पानी का भराव हो गया। वार्ड निवासियों की सूचना शिकायत पर तत्काल कार्यवाही कर जुर्माना लगाया गया तथा निकासी से रेती, गिट्टी हटवाया गया।
    किन्तु वही वार्ड नम्बर 43 में बेगम बाई के काम्प्लेक्स के सामने मोड़ पर पेड़ पौधे लगे होने तथा पास ही 20 फीट के नाले को अतिक्रमण कर 3 फीट का नाला कर दिया गया जिसके कारण बरसात में लोगो के घरो में नाले का गन्दा पानी जाता है किन्तु शिकायत के बाद भी निगम प्रशासन मौन रहा वही शहर की बसाहट के बीच मुर्गी फ़ार्म की शिकायत पर निगम प्रशासन द्वारा सिर्फ नोटिस का खेल खेला जा रहा है किन्तु वार्ड पार्षद की शिकायत के बाद भी निगम प्रशासन मौन है वही शहर में ऐसी कई जगह है जहा अवैध अतिक्रमण किया जा रहा है किन्तु शिकायतों के बाद भी निगम प्रशासन मौन है क्या सिर्फ अपने मनपसंद जगह शिकायत पर कार्यवाही करती है निगम प्रशासन या फिर सिर्फ ऐसे नागरिको से जुर्माना वसूल किया जा रहा है जो नियमो और कानून का सम्मान करते है और अनजाने में हुए गलत कार्यो की सज़ा जुर्माने के रूप में चुकाते आ रहे है .
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    निगम प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी लग्न चाहिए बड़ा जुर्माना
    आज निगम प्रशासन ने नाली पर बिल्डिंग मटेरियल रखने वाले पर जुर्माना लगाया जो नियमानुसार ही होगा अगर यह नियमानुसार सही है तो वार्ड नम्बर 43 में 15-20 फीट के नाले की चौड़ाई 3-4 फीट होने पर और इसकी सुचना देने के बाद भी निगम प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं की गयी जिसके कारण आज के बरसात में कई निवासियों के घरो में पानी घुस गया . सूचना के बाद 10 हजार का जुर्माना करने वाला निगम प्रशासन क्या अपने अधिकारियो की इस लापरवाही के लिए कोई जुर्माना लगाएगा या सिर्फ दिखावे की कार्यवाही की जाएगी और सीधी-साधी जनता से ही जुर्माना वसूल करती रहेगी .
    विधायक वोरा भी उठा चुके है कई बार आपत्ति

    वर्तमान में कोरोना आपदा के कारण आम जन की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गयी है किन्तु छोटी बड़ी गलती की सजा के तौर पर भारीभरकम जुर्माने की आम जानो से मिलने वाली शिकायत आम जन अपने जनप्रतिनिधि विधायक वोरा से कर चुके है जिस पर विधायक एवं महापौर ने निगम प्रशासन से कहा भी है की कोरोना आपदा में आम जानो से छोटी छोटी बात पर बड़ा जुर्माना ना ले किन्तु निगम प्रशासन अपनी चाल पर चल रहा है और नियमो का हवाला दे कर / व्यवस्था सुधरने की बात कह रहा है . अगर निगम प्रशासन सही है तो क्यों नहीं हर शिकायतों पर कार्यवाही हो रही है

    भिलाई / शौर्यपथ / आचार्य नरेंद्र देव स्मृति जन अधिकार अभियान समिति रूआबांधा भिलाई ने एचएससीएल भिलाई के वर्तमान जनरल मैनेजर एसके सिन्हा पर भिलाई…

    दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य के 6500 प्राईवेट विद्यालयों में लगभग 2,97,000 बच्चे शिक्षा के अधिकार के अतर्गत पढ़ रहे है। यह बच्चें गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों से आते है जिनके पालको के पास की-पैड वाला परंपरागत मोबाइल होता है, जबकि ऑनलाईन क्लासेस हेतु महंगे स्मार्ट फोन की जरूरत है, इतना ही नहीं बच्चों को मंहगे-मंहगे कॉपी-किताब स्वयं खरीदने पड़ रहे है, क्योंकि सरकार के द्वारा आरटीई की प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान विगत दो वर्षो का रूका हुआ है।
    छत्तीसगढ़ पैरेट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण गरीब तबका ऐसे की मंदी की मार झेल रहा है और जैसे तैसे अपना जीवन यापन कर रहा है। प्राईवेट स्कूलों में नर्सरी से लेकर कक्षा बारहवीं तक के बच्चों के लिए ऑनलाईन क्लासेस 15 जून से आरंभ हो चुका है और इस ऑनलाईन क्लासेस से आरटीई के बच्चे प्रभावित हो रहे है और उनके पालक परेशान हो रहे है, क्योंकि कई बच्चे जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं और जिन बच्चों ने कॉपी-किताब नहीं खरीदा है, वे शिक्षा से वंचित हो रहे है। ऑनलाईन क्लासेस आरंभ होने से आरटीई के बच्चों के साथ भेदभाव हो रहा है जो उचित नहीं है।
    छत्तीसगढ़ सरकार के पास आरटीई के प्रवेशित बच्चों को कैसे ऑनलाईन पढ़ाई कराए जाएगा, इस संबंध में कोई ठोस कार्य योजना नहीं है और ना अब तक कोई इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया गया है।
    पॉल ने इस मामले को लेकर अध्यक्ष-राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, दिल्ली को पत्र लिखकर तत्काल उचित कार्यवाही करने की मांग किया गया है, ताकि प्रदेश में आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित 2,97,000 बच्चो को भी नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का लाभ मिले चाहे पढ़ाई ऑनलाईन या वर्चुवल क्लासेस के माध्यम से कराया जा रहा हो।

    रायपुर / शौर्यपथ / हर साल नेशनल डॉक्टर डे एक थीम पर मनाया जाता है। डॉक्टर को भगवान का दर्जा देने वाले देश में डाक्टर्स के योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है।
    केंद्र सरकार ने 1991 में इस दिन को 1 जुलाई को डॉक्टर्स डे मनाने की शुरुआत की थी। इसी दिन यानी 1 जुलाई को देश के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉक्टर बिधानचंद्र रॉय का जन्मदिन और पुण्यतिथि है। उनके सम्मान में हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। उनके सम्मान में इसी दिन पूरी चिकित्सा बिरादरी का सम्मान कर श्रद्धांजलि दी जाती है।
    कोरोना महामारी में योद्वाओं की तरह फ्रंट लाइन में आकर इस वायरस के खिलाफ लड़ाई में एम्स रायपुर की भूमिका अग्रणी माना जा रहा है। नेशनल डॉक्टर डे पर एम्स रायपुर के चिकित्सा अधीक्षक एवं प्रोफेसर न्यूक्लीयर मेडिसिन , रेडियोलॉजीस्ट डॉ. करण पीपरे से चिकीत्सकीय प्रोफेशन को लेकर बीतचीत की । डॉ. पीपरे का मानना है किसी भी डॉक्टर के लिए सम्मान का पल तब होता है जब मरीज के ठीक होने पर मरीज व उनके परिजन प्यार के साथ आदर का भाव रखते हुए मिलते हैं। चिकित्सकों को सभी से मित्रता पूर्ण व्यवहार करना चाहिए । उन्होंने यह भी कहा मरीजों की सेवा करना डॉक्टर का मानव व चिकित्सकीय धर्म का पालन होता है।
    कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज को लेकर रायपुर एम्स के चिकित्सकीय टीम और अस्पताल प्रबंधन द्वारा केंद्र व राज्य सरकार के निर्देश पर जनवरी व फरवरी महीने में ही तैयारी शुरु कर कोरोना वार्ड बनाया लिया था। फरवरी महीने में एम्स के नेफ्रोलॉजी वार्ड में 12 बेड सहित दो वेंटिलेटर एवमं मॉनिटर्ज की सुविधाओं के साथ आइशोलेशन वार्ड तैयार कर लिया गया था। उन्होंने बताया राजधानी से एम्स अस्पताल में प्रदेश का पहला केस कोरोना पॉजेटिव 17 मार्च को लंदन रिटर्न लड़की का मिली थी जिसके इलाज के साथ ही एम्स अस्पताल प्रबंधन ने कोरोना से लडऩे कमर कस कर तैयार हो गया था। लैब में स्वाब जांच से लेकर इलाज के लिए दवाईयां, टीम को प्रशिक्षत करते हुए चुनौतियों को स्वीकार किया । उसके बाद आयुष भवन में 85 बेड का कोविड -19 आइशोलेशन वार्ड बनाए गए और सभी नमूनों की जांच व इलाज कर सभी की उपचार कर स्वसथ्य कर घर भेजा जा रहा है।
    डॉ. पीपरे ने महामारी का जिक्र करते हुए अपने अनुभव बताया अविभाजीत मध्यप्रदेश में वर्ष 1991 के अप्रैल माह में बस्तर के जंगलों से घिरे दंतेवाड़ा, बचेली, फरसपाल भैरमगढ़, नीलेशनार, घोटपाल इलाकों में खूनी पेचिस, उल्टी-दस्त, चेचक, मलेरिया जैसे महामारी फैली थी जिसमें लगभग 650 लोगों की मौत हो गई थी। ऐसे समय में मध्यप्रदेश सरकार ने उन्हें बस्तर भेजा था। तब मोबाइल, टीवी, समाचार माध्यम, वाट्सअप जैसे सोशल मीडिया भी नहीं थे। तब किसी महामारी के फैलने के प्रति लोगों को जागरुक करने में समस्याएं होती थी और वायरस का प्रकोप समुदाय के तीसरे चरण में संक्रमण कर पूरे गांव को चपेट में ले लेता था। उन्होंने कहा, कोरोना महामारी पहले के बीमारियों से फैलने वाले महामारियों से कम चुनौतियां है। आज लोग मोबाइल, टीवी और इंटरनेट की वजह से स्वास्थ्य के प्रति जागरुक हो गए हैं। कोरोना महामारी को हराने के लिए डॉ. पीपरे ने कहा, रोज सुबह मॉनिंग वॉक, योग करें, नशा से दूर रहकर , पोषण आहार भोजन में जरुर लें। इससे हमारा इम्युनीटी सिस्टम मजबूत होगा।
    डॉ. पीपरे ने बताया, उनकी पढाई व शिक्षा जबलपुर में हुई 1970 में उनके परिवार से 6 भाईयों का एक साथ मेडिकल की पढाई के लिए सलेक्शन हुआ था। उनके ताउ के लड़के का डॉक्टर की पढाई के लिए चयन होने के बाद उनका भी सपना डॉक्टर बनने का रहा है। उन्होने बताया, वर्ष 1974-75 में जबलपुर मेडिकल कॉलेज में उनके सहपाठी प्रदेश के जाने में चिकित्सक डॉ. अशोक चंद्राकर, डॉ. अशोक भट्टर, डॉ. अनुप वर्मा और एमडी की पढाई मेकाहारा के पूर्व अधीक्षक डॉ. विवेक चौधरी थे। इंदौर मेडिकल कॉलेज से रेडियोलॉजिस्ट में एमडी की पढाई कर गोल्ड मेडल के साथ डिग्री प्राप्त की। और मुंबई से न्यूक्लीयर मेडिसीन में पोस्ट ग्रेजूएशन किया। वर्ष 2002 से वर्ष 2027 तक गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल में सुलतानिया महिला चिकित्सालय , हामिदिया चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक एवंम वाइस डीन के रुप में कार्य किया। वर्ष 1981 में मंडला जिले में उनकी पहली सरकारी अस्पताल में नौकरी लगी। वर्ष 1992 में भोपाल मेडिकल कॉलेज में असिसटेंट प्रोफेसर न्यूक्लीयर मेडिसीन के रुप में पीएससी से चयनित हुए। इसके बाद अब वे रायपुर एम्स में एडिशनल मेडिकल अधीक्षक नियुक्ति होकर अब वे 2 साल से मेडिकल अधीक्षक का पद संभालते हुए संस्थान में 6 सालों से सेवारत हैं।

    दुर्ग / शौर्यपथ / ग्रीन लाइम्स फिल्म एंड इंटरटेंमेंट और मित्रों प्रोडक्शन प्रा. लि. के बेनर तले बनने वाली भोजपूरी फिल्म सपना के निर्माण कार्य की तैयारी जोर शोर से चल रही है। फिल्म के निर्माता रचित शर्मा ने इसके निर्देशन की जिम्मेदारी यूपी के फाजिल नगर क्षेत्र के दो युवा निर्देशक
    बिभांशु तिवारी और चांद अख्तर को दी है। फिल्म के हिरो और हिराईन का भी चयन कर लिया है। इसके हिरों के रोल के लिए राघव नैय्यर और हिरोइन की भूमिका के लिनए प्रियांशु सिंह को लिया गया है। इसके अलावा बाकी अन्य कलाकारों का चयन जारी है। इस फिल्म का दो पोस्टर हाल ही में लांच किया गया है। पोस्टर भी बहुत आकर्षक है । इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब पोस्टर इतना बढिया बनाया गया है तो फिल्म कितनी अच्छी बनेगी।
    निर्देशक बिभांशु तिवारी और चांद अख्तर ने संयुक्त रूप से बताया कि इस फिल्म की शूटिंग अक्टूबर महीने से शुरू होगी। उन्होंने बताया कि भोजपुरी फिल्म 'सपनाÓ बेहद खास है। इसकी पटकथा बेहद महत्वपूर्ण है। फिल्म दर्शकों को बेहद पसंद आयेगी। वहीं फिल्म के निर्माता रचित शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन के वक्त इस फिल्म की पटकथा पर हमने खूब मेहनत की। साथ ही हमने इसके गीत संगीत पर भी बखूबी ध्यान दिया। फिल्म में गीत और संगीत छोटे बाबा (बसही) का है। फिल्म में लीड रोल में राघव नैय्यर और प्रियांशु सिंह नजर आने वाले हैं। बांकी कास्टिंग जोर – शोर से चल रही है। फिल्म के निर्माता रचित शर्मा ने बताया कि इस फि़ल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश में अक्टूबर से शुरू की जाएगी। वो अपनी इस फि़ल्म को लेकर बहुत ही उत्साहित है। फि़ल्म के लेखक - बिभांशु तिवारी और चाँद अख़्तर है, एसोसिएट डायरेक्टर सुब्रत गौतम और प्रोजेक्ट मैनेजर हरीओम सरन गुप्ता हैं।

    जांजगीर - चांपा / शौर्यपथ / आमनदुला के नाली निर्माण में गैर-तकनीकी एवं घटिया निर्माण की शिकायत पर सीईओ ने 2 सदस्यों का जांच दल गठन किया है तथा जांच प्रतिवेदन 7 दिवस के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिए है। इस मामले को गंभीरता लेते हुए एस.एन वर्मा सीईओ मालखरौदा ने सुक्ष्म जांच के निर्देश दिए है। ग्राम पंचायत आमनदुला में महात्मा गांधी रोजगार ग्रारंटी योजना के अंतर्गत मंडी से शासकीय प्राथमिक शाला ओर 10 लाख का नाली का निर्माण कराया गया है। जिसमें घटिया मटेरियल की जांच किए जाने हेतु निम्नानुसार दो सदस्यों का जांच दल गठन किया गया है। जिसमें ग्रामीणों का आरोप है की 10 लाखों की लागत के नाली निर्माण कार्य में गैर तकनीकी एवं घटिया स्तर का निर्माण कार्य किया गया है। लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता का विरोध करते हुए जनपद सीईओं एस एन वर्मा मालखरौदा अधिकारी को इस संबंध में अवगत कराते हुए कार्रवाई की मांग की है। वार्ड में लाखों की लागत से बनाई जा रही नाली निर्माण में ठेकेदार द्वारा बड़े स्तर पर गड़बड़ी किए जाने की आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। आक्रोशितों ने उक्त के अनुसार निर्माण को गैरतकनीकी एवं घटिया स्तर की सामग्री का उपयोग कर निर्माण कार्य को अंजाम दिया गया है। आरोप है नाली का स्टीमेट के अनुसार घटिया समाग्री का उपयोग किया गया है। जिसके चलते कुछ सालों में नाली टूट जाने की आशंकाए बनी हुई है। साथ ही नाली को ऐसे स्थान से बनाया जा रहा है जहां से 2 से 3 घरों का पानी ही जाएगा। जबकि वार्ड के दर्जनों घरों को इस निर्माण से कोई फायदा नहीं मिलेगा. जिसके चलते लाखों रुपए का यह निर्माण अनुपयोगी साबित हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण के समय इंजीनियर द्वारा घटिया निर्माण एवं गैर-तकनीकी निर्माण की बात कहने पर उनके द्वारा कार्य के गुणवत्ता में सुधार के बजाए वार्डवासियों को गुणवत्ता सहित ही कार्य कराए जाने की बात कहते रहे। तथा निर्माण में सुधार के किसी प्रकार के निर्देश ठेकेदार को नहीं दिए गए जिसके चलते यह संदेह जताया जा रहा है कि ठेकेदार द्वारा इंजीनियर से मिलीभगत कर उक्त निर्माण में गड़बड़ी की गई है।
    - जनपद में 6त्न देकर लाते है काम,तो कमाएंगे क्यों नही..
    वही एक ओर ठेकेदार और संबंधितों का कहना है की जनपद में इंजिनियर सहित अधिकारियों को कामों के लिए 6त्न देते है,तभी तो काम की मंजूरी करतें है. कहना है की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठती है तो उठने दो अधिकारियों को जब काम के लिए 6त्न दिए है तो इन शिकायतों से क्या होने वाला है। यहा तक अधिकारीयों द्वारा इस मामले को रफादफा करने की बात कही गई है।
    - विधायक के आदमी होने का धौंस
    संबंधित ठेकेदार तथा पंचायत के कामों को देखरेख करने वाले संबंधितों का कहना है की विधायक हमारे है हम उनके करीबी है ऐसी छोटी मोटी शिकायतों से कुछ भी नही होने वाला है। हम चुनाव लडऩे में विधायक के सहयोग किए है . चाहे कोई एडी-छोटी लगा ले। जबतक कांग्रेस सत्ता पक्ष विधायक की छत्र छाया है तबतक ऐसे शिकायतों से कुछ भी नही हो सकता है।
    - मामला रफा-दफा करने में जुटे अधिकारी
    बेशक मालखरौदा जनपद के अधिकारी अनेकों नियम बनाकर गुणवत्ता की जांच करता हो लेकिन कुछ अधिकारियों द्वारा इससे दबाने के प्रयास में नियम, कानूनों को ताक पर रख दिया जाता है. जानकारी में यह बात स्पष्ट हो रही है कि मालखरौदा जनपद के जांच अधिकारियों द्वारा नियमों को तोड़कर जमकर गोलमाल किया जा रहा है। इस संबंध मे जब जांचकर्ता अधिकारीयों को बात की जा रही है तो गोलमाल जवाब आने लगी है। जिसको समझा जा सकता है. जांच अधिकारी जांच में गोलमाल जांच प्रतिवेदन दर्शाने की तैयारी में है। यानी के इससे प्रभाव का नतीजा कहें या फिर कुछ ओर लेकिन कारण जो भी हो आखिरकार विभाग का खामियाजा आम लोगों को जरूर झेलना पड़ेगा। लेकिन जांच अधिकारी इस मामले में अपने को केवल जांच तक ही सीमित बताकर पल्ला झाडऩे की कोशिश कर रहे हैं। वहीं कहा जा रहा कि रिकवरी डालने व छोडऩे का काम अधिकारी का है। हां, इससे एक बात जरूर स्पष्ट नजर आ रही कि मालखरौदा जनपद क्षेत्र के आमनदुला में हुए 10 लाख के गुणवत्ताहिन् नाली निर्माण कार्य के गोलमाल में अधिकारियों की मंशा इस मामले को रफा-दफा करने की लगती है।
    ,, *इस संबंध में उक्त मामले की जांचकर उचित करवाई की जाएगी।*
    एस. एन वर्मा जनपद सीईओं मालखरौदा।

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता विकास तिवारी ने खुलासा करते हुए कहा कि कल आत्महत्या का प्रयास करने वाले धमतरी निवासी हरदेव सिन्हा ने दिनांक 29/03/2017 को तत्कालीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को भृत्य पद की नियुक्ति हेतु आवेदन जनदर्शन कार्यक्रम में सौंपा था जिसका की क्रमांक-2017/848 था।
    पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने ट्विटर में लिखा है कि हरदेव सिन्हा के आत्महत्या के प्रयास को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का सफलता समझे या विफलता अब जब सारे तथ्य सामने आ चुके हैं और यह स्पष्ट हो चुका है कि धमतरी निवासी हरदेव सिन्हा तत्कालीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह को लिखित में पत्र सौंपकर सरकारी नौकरी की मांग की थी उस पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने अपने डेढ़ साल के अंतिम कार्यकाल में पहल क्यों नहीं किया?
    कांग्रेस पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह कर आरोप लगाते हुए कह रही है की भाजपा शासनकाल में 25 लाख बेरोजगार पंजीकृत और 25 लाख बेरोजगार अपंजीकृत थे और जिस युवक ने आत्मदाह का प्रयास किया वह भी पूर्ववर्ती भाजपा से ही प्रताडि़त था इस सवाल का जवाब भारतीय जनता पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को जनता के समक्ष आ कर देना चाहिए।

    धमतरी ब्यूरो /शौर्य पथ

    हरिहर छत्तीसगढ़ के उद्देश्य से नगर पंचायत नगरी के प्रांगण में व हाई स्कूल नगरी के मैदान के किनारे में पौधारोपण किया गया जिसमें पीपल, कटहल, आम का पौधा लगाया गया है जिसकी सुरक्षा के लिए लोहे की जाली भी बनवाई जा रही है व नगर पंचायत द्वारा 15 वार्ड के सभी पार्षदों को पांच-पांच पौधे दिए जाएंगे जो अपने वार्ड में उचित स्थान देखकर वृक्षारोपण करेंगे कार्यक्रम में उपाध्यक्ष अजय नाहटा सभापति सुनील निर्मलकर भूपेंद्र साहू प्रकाश पुजारी पार्षद पूनम बलजीत छाबड़ा अश्वनी निषाद सोहन चतुर्वेदी सुनीता निर्मलकर जितेंद्र ध्रुव एल्डरमैन भरत निंबालकर नरेश छे दया पूर्व पार्षद बलजीत छाबड़ा सीएमओ बर्मन इंजीनियर उईके राजस्व अधिकारी कमल नारायण सिंह नीलकंठ साहू ईश्वरदास भूपेंद्र कौशल हरीश साहू अखिलेश साहू नरेंद्र साहू नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे

    धमतरी ब्यूरो/ शौर्य पथ

    कोविड १९ विषाणु के संक्रमण के कारण लागू लॉक डाऊन का असर सामान्य जन जीवन पर प्रभावी है। ऐसे में इस समय आर्थिक रूप से गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों की स्तिथी सामान्य दिनों की अपेक्षा बेहतर नही है।

    इस समय गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों को परिवार चलाने व अन्य कार्यों हेतु भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।

    इस समय आमजनता पर टैक्स के रूप में पड़ रही अतिरिक्त आर्थिक मार को कम करने शिवसेना की युवा इकाई युवासेना के राज्य सचिव अरुण पाण्डेय् के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं सहित मुख्यमंत्री के नाम बस्तर ज़िला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग किया है कि बस्तर संभाग के किसी भी जिलों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की जनता के मकानकर, जलकर, विद्युतकर सहित अन्य निकायी करों को माफ़ करके आमजनता को राहत देवें।

    शौर्यपथ लेख / आजकल एक पोस्ट वायरल हो रही है कि पेशेंट नही बचा तो Dr को पैसे मत दो या कोरोना काल मे हॉस्पिटल फ्री कर दो। हालांकि कोरोना काल में Dr का योगदान देखते हुए थोड़ी कमी भी आई। पर ऐसी मानसिकता क्यों? क्या Dr साहब ने गलत दवा ,इलाज दिया? फिर भी परिणाम के आधार पर उनको मेहनताना नही देना चाहते। अच्छा एक बात बताइए,जब मूवी जाते हैं पसंद नही आती तो क्या पैसे वापस होते हैं? जब इंडियन टीम हारती है तो क्या खिलाड़ियों का खाना पीना बन्द हो जाता है? मैच टिकिट वापस हो जाएगी या होटल में समोसा खाकर क्या टेस्ट के हिसाब से पेमेंट कर सकते हैं? गलवान वेली में शहीद जवानो के परिजन क्या आर्थिक मदद के हकदार नही? क्योकि बच्चा युद्ध मे मारा गया और मरकर युद्ध जीते नही जाते? या हम उनकी कुर्बानी, उनके जस्बे ,उनकी कोशिश को महत्व देते हैं??
    तो सारा इंसानियत का ठीकरा अकेले Dr का ही क्यो है? एक कपड़ा व्यापारी भी बिका माल नही लेता वो ठीक है पर Dr की कब्र खोदना देशहित में है। अगर परिवार को उनके फेवर में रिजल्ट नही मिलता तो वो हॉस्पिटल जलाने को तैयार हो जाते हैं। क्या इंडियन क्रिकेट प्लेयर्स के साथ हारने पर ऐसा सरकार होने देगी? दारू पी पी के लिवर सड़ा चुका व्यक्ति भी Dr के इलाज को ही दोष देता है चाहे चेकअप और इलाज का विचार मरने के 2 दिन पहले देवयोग से आया होगा। अगर किसी ज्योतिष की गणना गलत निकली तो क्या फाँसी दे दोगे?
    क्या ये मानव स्वभाव है कि जब ऑस्ट्रेलिया बांग्लादेश टकराते थे और कांटे का मैच गलती से हो गया तो सब बांग्लादेश की जीत चाहते थे। क्योकि जब व्यक्ति टॉप पर होता है तब सब जयजयकार करते है पर जब वो ऊंचाई से गिरता है नाकामयाब होता है तब भी लोगो को मजा आता है।अभी पतंजलि पर जोक मारे जा रहे हैं। असल मे हमारे अंदर का ईगो हमे ये करने पाए मजवूर करता है।
    एक बच्चा कठोर मेहनत करके माँ बाप की आर्थिक मानसिक मदद से Dr बनता है। उसके बाद कड़ी मेहनत से जॉब करता है या महंगे उपकरण खरीदकर क्लिनिक लगाता है। तब भी उसे काम करके ही कमाना होता है। जिन परिस्थितियो में आम आदमी का दिमाग बन्द हो जाये वो अपना कैरियर अपनी प्रतिष्ठा अपना नाम दाव पर लगाकर जटिल परिस्थितियों में आपरेशन कर एक व्यक्ति की जान बचाता है। क्या बाहर तलवार लिए लोगो की कल्पना के बाद वो बिना हाथ कंपकपाये वो जटिल काम कर पायेगा? लोग हर काम गलती कर सीखते हैं क्या Dr के पेशे में गलती जायज है? खुद को उस जगह रखकर देखिए। तो उस व्यक्ति को धन्यवाद देने के बजाय हम चाहते है कि उसे सजा हो अगर परिणाम हमारे हक में नही आया।
    अब क्या मौत पर Dr काबू पा सकता है? क्या साइंस वहां तक पहुच चुकी है ?नही न। पर कोशिश तो जरूरी होती है तो उस कोशिश का पार्ट बनने के बजाय हम जज क्यो बन जाते हैं? जहाँ तक भ्रष्टाचार की बात है वो हर फील्ड में है पर मेडिकल भ्रष्टाचार हाईलाइट ज्यादा होता है फिर सभी को उसी नजर से देखा जाने लगता है। समझदारी इसमे है कि गलत सही का फर्क समझा जाए और धारणा बनाने के बजाय बुद्धि की कसौटी पर कसकर फैसला लिया जाए।।
    आप पहले ये बात समझिये की आप पैसे देकर दवा खरीद सकते है जिन्दगी नही। संजीवनी बुटी अगर खोज ली जाये तो अलग बात है। रही बात मरीज के इलाज की,तो 99% केसेस मे इलाज पूरी ईमानदारी से किया जाता है। बिलिंग हर हॉस्पिटल की अलग जरुर हो सकती है। जैसा बाकी होटल, थिएटर सभी मे अलग अलग होता है।
    दिक्कत तब आती है जब व्यक्ति पैसे देकर हॉस्पिटल को अपना ससुराल समझने लगता है और Dr को गुलाम। फिर उसको कोशिश से नही परिणाम से मतलब होता है। इंडियन मैडिकल लॉ बोलता है की कोई भी इलाज शर्तिया नही किया जा सकता न ही ऐसा दावा वैध है। कोरोनिल पर हुआ विरोध का एक कारण ये भी था।।अगर लापरवाही होती है तो उसमे treatment quality चेक की जाती है न की रिजल्ट।
    आप बताओ एक मरीज जो पूरी चिकित्सा पद्धति से अंजान है किस तरह हॉस्पिटल को दोषी घोषित कर सकता है? फिर खुद दण्डाधिकारी बनने लगता है? Dr को पैसा देने मरीज नही जाता अपनी समस्या हल करवाने जाता है। भगवान तब तक है Dr जब तक मरीज के काम आ रहा है। अब तो लोग नारियल चढाकर भगवान को खरीदते है तो Dr क्या चीज है पर मौत बिकती नही। Dr के खिलाफ बढती हिंसा और सोशल मीडिया पर उड़ती कहानियां इसके लिये उतनी ही जिम्मेदार है।
    मैने हमेशा देखा है एक दंत चिकित्सक के तौर पर जो आदमी 50 गुटके डेली खा रहा है अपनी तकलीफ का कारण Dr की दांत सफाई को बताता है। 10 साल बाद भी बोलता है अगर चेकअप नही करवाता तो सब ठीक होता। फिर विमल का पैकेट फाडता है।लोगो को बस हर हाल मे अच्छा रिजल्ट चाहिये होता है। खुद किसी चीज़ की जिम्मेदारी नही उठाते न स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं पर हॉस्पिटल मे पैसा भरकर मौत को खरीदने की इच्छा रखते हैं। जब दिल की धड़कन थम जाती है तो वही Dr जो अभी भगवान्ं का रुप था अचानक यमराज नजर आने लगता है, हॉस्पिटल नर्क का द्वार दिखाई देने लगता है। फिर शुरु होता है गुण्डागर्दी, दंगाई का दौर। शरीफ आदमी रोड,सलिया,मशाल लेकर ट्रको मे भरकर पहुचते है हॉस्पिटल जलाने । तब इनको ख्याल नही आता की अस्पताल मे और मरीज भी है, Dr की फैमिली भी है । वो भी एक इंसान है जो सिर्फ अच्छा करने की कोशिश कर रहा है जैसे हम सब करते हैं।। विश्वास पर दुनिया कायम है हम अपने पिता से पिता होने का सबूत नही मांगते। वैसे ही मरीज और Dr का आपसी विश्वास ही सही इलाज की तरफ पहला कदम है। पर जैसे 1 मछली तालाब को गंदा करती है इस प्रोफेशन में भी कुछ दिक्कतें है पर सोशल मीडिया की अतिवादिता का शिकार होने के बजाय आँख नाक कान खोलकर हॉस्पिटल की सेवाएं लें बिना किसी पूर्वग्रह से ग्रस्त हुए। किसी एक घटना को पूरे सिस्टम की बदनामी का कारण न बनने दें। साथ ही सभी Dr और हॉस्पिटल से भी अनुरोध करूँगा की जीवन की अंधी दौड़ में इस देवतुल्य प्रोफेशन से समझौता ना करें।
    स्वास्थ्य रहें। stay safe ( लेखक - डॉ.सिद्धार्थ शर्मा )

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