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रायपुर /शौर्यपथ /
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एक नवम्बर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राज्य के किसान भाईयों के खाते में 1500 करोड़ रूपए की राशि जारी करेंगे। यह राशि राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तीसरी किश्त के रूप में दी जाएगी। दीवाली पर्व के ठीक पहले राज्य के 21 लाख किसानों को 1500 करोड़ रूपए मिलने से उनकी दीवाली की खुशियां दोगुनी हो जाएंगी। एक नवम्बर को कृषकों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत तीसरी किश्त की राशि जारी करने की सभी तैयारियां पूरी हो गई है। इसको मिलाकर राज्य के कृषकों को कुल 4548 करोड़ रूपए की राशि मिल जाएगी।
यहां यह उल्लेखनीय है कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत राज्य में फसल उत्पादकता एवं फसल विविधिकरण को बढ़ावा देने के लिए आदान सहायता राशि दिए जाने का प्रावधान खरीफ वर्ष 2019 से लागू किया गया है। वर्ष 2019 में धान एवं गन्ना के उत्पाद 19 लाख किसानों को 5702 करोड़ 13 लाख रूपए की राशि जारी की गई थी। वर्ष 2020 में धान एवं गन्ना के उत्पादक कृषकों को योजना के तहत चार किश्तों में आदान सहायता राशि प्रदान की जा रही है। धान एवं गन्ना उत्पादक कृषकों को प्रथम किश्त की राशि 1525 करोड़ 97 लाख रूपए का भुगतान 21 मई 2021 को तथा द्वितीय किश्त की राशि 1522 करोड़ 03 लाख रूपए का भुगतान 20 अगस्त 2021 को किया जा चुका है। तीसरी किश्त के रूप में धान उत्पादक कृषकों को 1500 करोड़ रूपए का भुगतान एक नवम्बर 2021 को किया जाएगा।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना के जरिए राज्य के किसानों को दी जा रही आदान सहायता के चलते खेती किसानी समृद्ध हुई है। राज्य में खेती-किसानी का रकबा और किसानों की संख्या में वृद्धि हुई है। खेती छोड़ चुके लोगों का भी रूझान खेती की ओर बढ़ा है। इसकों देखते हुए राज्य सरकार द्वारा राजीव गांधी किसान न्याय योजना के दायरे का विस्तार किया गया है। अब इस योजना में खरीफ की समस्त फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को भी शामिल किया गया हैं। खरीफ फसलों और उद्यानिकी फसलों के उत्पादक कृषकों को भी अब आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। धान के बदले अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ के मान से 10 हजार रूपए की आदान सहायता तथा वृक्षारोपण करने वाले किसानों को आगामी तीन वर्ष तक प्रति एकड़ के मान से 10 हजार रूपए देने का प्रावधान किया गया है।
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 31 अक्टूबर को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्य तिथि के अवसर पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री बघेल ने इंदिरा गांधी के भारत के विकास में दिए अतुल्य योगदान को याद करते हुए कहा है कि गांधी ने दूर-दृष्टि और पक्के इरादे के साथ देश को नई दिशा प्रदान की। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश का कुशलतापूर्वक नेतृत्व करते हुए अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत को प्रतिष्ठापूर्ण स्थान दिलाया। उनके हरित क्रांति कार्यक्रम की सफलता ने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया। इंदिरा गांधी ने आजीवन गरीबों और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए प्रयास किया और देश की एकता और अखण्डता की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया।
बघेल ने कहा कि गांधी बचपन से ही देश के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहीं। उन्होंने बाल चरखा संघ की स्थापना की और असहयोग आंदोलन के दौरान बच्चों की वानर सेना बनायी। प्रधानमंत्री के रुप में उन्होंने बैंकों के राष्ट्रीयकरण, राजाओं के प्रिवीपर्स की समाप्ति जैसे कठोर निर्णय लिए। बांग्लादेश का उदय, भारत का परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनना उनकी प्रमुख उपलब्धियां थी। उनके कार्यकाल में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की स्थापना हुई और प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट अंतरिक्ष में छोड़ा गया। भारत के नवनिर्माण में इंदिरा गांधी का योगदान भुलाया नहीं जा सकता।
रायपुर / शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के रंगा-रंग समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि - आदिवासी संस्कृति, आदि दर्शन है। इसको आत्मसात करना होगा। इसको साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। इसके बिना हमारा अस्तित्व पूरा नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया है, परन्तु यह आयोजन आप सबके प्यार और सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप ले लिया है। गीत-संगीत, नृत्य, वाद्य और वादन के जरिए एक नया समाज आकार लेता दिखाई पड़ रहा है। यह वह समाज है जो हाशिए पर रहा है। मुख्यमंत्री ने इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के सफल आयोजन के लिए प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से भागीदार रहे सभी लोगों का धन्यवाद और आभार जताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केन्द्रीय मंत्री भक्त चरणदास ने की।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत किसानों के पंजीयन की तिथि को 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 10 नवम्बर किए जाने तथा राज्य में एक दिसम्बर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस आयोजन के जरिए हम सबने जनजातीय समाज की विविधता के दर्शन किए और साथ ही यह भी देखा और महसूस किया कि इनकी विविधता में भी कितनी समानता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इनकी कलाओं में एकरूपता है, क्योंकि यह प्रकृति से प्रेरणा लेते हैं। चाहे छत्तीसगढ़ का आदिवासी हो, या देश दुनिया के किसी कोने का, हमने यह देखा कि फसल कटाई और विवाह के अवसर पर यह उत्सव मनाते हैं और नृत्य करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन के जरिए हमने सबको जोड़ने की कोशिश की है। लोगों को छत्तीसगढ़ आमंत्रित किया है कि वह छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, पुरातन और समृद्ध संस्कृति, यहां के नैसर्गिक सौन्दर्य और परंपरा के बारे में जाने और उसे समझें। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ की पहचान नक्सलगढ़ के रूप में थी, जो अब सुख-शांति के गढ़ के रूप में दिखाई दे रही है। इसका कोई जोड़ नहीं है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति को एक नई पहचान देने की कोशिश हुई है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर ‘पाड़ामुंतोम बस्तर’, ‘ऐतिहासिक जीत को सलाम’, राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव 2019 पर ‘कॉफी-टेबल बुक’ और ‘हमर संस्कृति, हमर तिहार’ पुस्तकों का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के तहत विवाह संस्कार एवं अन्य पारंपरिक त्यौहार श्रेणी में आयोजित नृत्य प्रतियोगिता के विजेता नर्तक दलों को पुरस्कार राशि एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। विवाह संस्कार श्रेणी में प्रथम पुरस्कार झारखण्ड के करसा नर्तक दल को, द्वितीय पुरस्कार ओड़िशा के धप नर्तक दल को तथा तृतीय पुरस्कार असम के कारबी तिवा नर्तक दल को मिला। इसी तरह अन्य पारंपरिक त्यौहार में भी झारखण्ड के छाऊ नृत्य दल ने प्रथम, ओडिशा के बाजसल नर्तक को द्वितीय तथा छत्तीसगढ़ के गौरसिंग नर्तक दल तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले नर्तक दलों को क्रमशः 5 लाख, 3 लाख और 2 लाख रूपए की पुरस्कार राशि एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के तहत आयोजित प्रतियोगिता के जूरी के सदस्यों को भी सम्मानित किया।
समारोह में पूर्व केन्द्रीय मंत्री भक्त चरणदास ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सम्पदा से भरपूर राज्य है। यहां के लोग सहज, सरल और मेहनतकश हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश और दुनिया में अपने प्राकृतिक संसाधनों एवं मानव संसाधनों की बदौलत महत्वपूर्ण है। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य में जन-जन के कल्याण के लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास और यहां के लोगों की खुशहाली के लिए असंभव कार्यों को भी सरकार ने संभव कर दिखाया है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और आदिवासी जनजीवन को सहेजने और संवारने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।
कार्यक्रम को संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने भी सम्बोधित करते हुए कहा कि तीन दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के आयोजन और इसकी सफलता का पूरा श्रेय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को समर्पित करते हुए कहा कि आप छत्तीसगढ़ का मान, अभिमान और स्वभिमान है। उन्होंने कहा कि कला का उद्देश्य पूर्णता की तलाश है। इस आयोजन में देश-विदेश से भाग लेने आए कलाकारों ने अपनी प्रकृति के माध्यम से प्रेम, सद्भावना और भाईचारे का संदेश दिया है। उन्होंने सभी कलाकारों का आभार जताया। कार्यक्रम के प्रारंभ में नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने स्वागत भाषण दिया।
इस अवसर पर गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, आदिमजाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरू रूद्रकुमार, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, राजस्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री उमेश पटेल, लोकसभा सांसद श्री दीपक बैज, राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम और छाया वर्मा, युगाण्डा की हेड ऑफ मिशन मिस ग्रेस अकेलो और नाईजीरिया के इकॉनामिक ट्रेड एवं इंवेस्टमेंट मिनिस्टर युसुफ सदाउके कबीरो, संसदीय सचिवगण और विधायकगण, मुख्य सचिव अमिताभ जैन सहित निगमों मण्डलों के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी, अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
आदिवासी नर्तक दलों की प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध हुए श्री भूपेश बघेल और श्री हेमन्त सोरेन
साइंस कॉलेज मैदान में प्रदर्शनी के उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मुख्य मंच की दर्शक दीर्घा में बैठ कर नर्तक दलों की मनमोहक प्रस्तुति का अवलोकन किया। उनकी आकर्षक प्रस्तुति से दोनों मुख्यमंत्री सहित दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। इस दौरान नाइजीरिया, फिलिस्तीन, झारखंड और छत्तीसगढ़ के नर्तक दलों ने प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ के माड़िया जनजाति के दल ने गौर सिंग नृत्य पर प्रस्तुत किया। दोनों मुख्यमंत्री ने नर्तक दलों की कला की सराहना की।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में विभिन्न नर्तक दलों की प्रस्तुतियां देख रहे थे, तब फिलिस्तीन के काउंसलर डॉ. अबू जजेरा और नर्तक दल के कलाकारों ने अपने देश के पाराम्परिक गमछे से उनका अभिनन्दन किया और इस आयोजन में उनके देश के दल को दिए गए आमंत्रण के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
रायपुर /शौर्यपथ/
राजधानी रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान पर चल रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के दौरान दो आदवासी बाहुल्य राज्यों छत्तीसगढ़ और झारखण्ड के मुख्यमंत्रियों ने भी पारंपरिक वाद्य ठोड़का और तुरही बजाकर जुगलबंदी की-1
राजधानी रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान पर चल रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के दौरान दो आदवासी बाहुल्य राज्यों छत्तीसगढ़ और झारखण्ड के मुख्यमंत्रियों ने भी पारंपरिक वाद्य ठोड़का और तुरही बजाकर जुगलबंदी की
राजधानी रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान पर चल रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के दौरान दो आदवासी बाहुल्य राज्यों छत्तीसगढ़ और झारखण्ड के मुख्यमंत्रियों ने भी पारंपरिक वाद्य ठोड़का और तुरही बजाकर जुगलबंदी की। झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जब ठोड़का बजाना शुरू किया तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने तुरही बजाकर उनका साथ दिया। यह दिलचस्प नजारा जनसंपर्क विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल पर नजर आया। इस स्टॉल में जनजातीय समुदायों में प्रचलित पारंपरिक वाद्य यंत्रों को प्रदर्शित किया गया है।
राजधानी रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव-राज्योत्सव 2021 के मुख्य अतिथि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ आयोजन स्थल में छत्तीसगढ़ शासन के विभिन्न विभागों द्वारा लगायी गई विकास प्रदर्शनी का शुभारंभ कर उसका अवलोकन किया। मुख्यमंत्री द्वय ने जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण विभाग, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, आजीविका गुड़ी (आरआईपीए) के स्टालों का निरीक्षण कर उनके कार्य प्रणाली से अवगत हुए।
आजीविका गुड़ी (आरआईपीए) में लघु वनोपज प्रसंस्करण इकाइयों के निरीक्षण के दौरान उन्होंने मिनी ऑयल मिल, मिनी दाल मिल और मुर्रा, चना, लाई, पॉपकार्न फोड़ने जैसे अन्य लघु इकाइयों की कार्य प्रणाली का अवलोकन किया। इस दौरान सोरेन ने छत्तीसगढ़ी मुर्रा का स्वाद भी चखा।
मुख्यमंत्री बघेल ने मुख्य अतिथि सोरेन को कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा सुराजी गांव योजना के तहत निर्मित गौठान का मॉडल दिखाकर वहाँ संचालित होने वाली आजीविका सम्बंधित गतिविधियों से अवगत कराया। इसके साथ ही इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने विश्वविद्यालय में उत्पादित किये जा रहे रागी आटा, कोदो, चावल, हर्बल गुलाल एवं चावल की विभिन्न प्रजातियों के बारे में बताया।
रायपुर / शौर्यपथ/
राज्य साक्षरता मिशन के संचालक राजेश सिंह राणा ने कहा है कि असाक्षरों के लिए तैयारी की जाने वाली प्रवेशिका में उनकी जरूरतों का ध्यान रखा जाए। इसमें वित्तीय संबंधी प्रक्रिया और लेनदेन की विस्तृत जानकारी के साथ ही राज्य के क्षेत्रीय भाषाओं के फैक्टर को भी जोड़ा जाए। इसके अलावा प्रवेशिका में जल संग्रहण, खेती बाड़ी एवं बाजार से संबंधित गतिविधियां और व्यवसायिक शिक्षा को असाक्षरों की रूची और आवश्यकता के अनुसार शामिल किया जाए। राणा आज एससीईआरटी में आयोजित राज्य स्तरीय प्रवेशिका निर्माण कार्यशाला में उपस्थित प्रवेशिका निर्माण करने वाले शिक्षाविदो को सम्बोधित कर रहे थे।
प्रवेशिका का निर्माण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत किया जाएगा। प्रवेशिका शिक्षा के क्षेत्र में विशेष दक्षता रखने वाले राज्य भर के शिक्षाविदों की टीम द्वारा तैयार की जाएगी। राज्य स्तरीय प्रवेशिका निर्माण की कार्यशाला का यह तृतीय चरण है। इसके पहले एवं दूसरे चरण में किये गए कार्य पर विश्लेषण कर मूर्त रूप दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में पहली बार प्रौढ़ों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रौढ़ शिक्षा शामिल किया गया है। जिसको पूर्ण करने न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम के तहत संचालित किया जाएगा जिसके लिए प्रवेशिका निर्माण की जिम्मेदारी राज्य को दिया गया है। जिस पर राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण छत्तीसगढ़ ने तत्परता दिखाते हुए कार्य शुरू कर दिया है।
राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सहायक संचालक प्रशांत कुमार पाण्डेय ने कहा हमने साक्षरता की प्रवेशिका पहले भी बनाई है। अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रौढ़ असाक्षरों के लिए प्रवेशिका तैयार करना है। इसे शिक्षाशास्त्री की टीम तैयार कर रही हैं। प्रवेशिका पांचों संभागों की आवश्यकता का आंकलन और समझ के आधार पर तैयार की जा रही है। प्रवेशिका एन.सी.एफ. के 13 थीम्स के आधार पर तैयार हो रही है। इस कार्यक्रम को दिसम्बर तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।
एससीएल प्रकोष्ठ प्रभारी प्रीति सिंह ने कहा हमने पिछले कार्यशाला में चैप्टर बना लिए हैं। पाठ्यक्रम असाक्षरों की आवश्यकता के अनुरूप तैयार करने की रणनीति बनायी गई है। जिला परियोजना अधिकारी कोरिया श्री यू.के. जायसवाल ने कहा हमें हमारी सोच और प्रौढ़ असाक्षरों के सोच में अंतर पाया जाएगा। हमें आगामी दिनों में बदलती हुई परिस्थिति की अनुरूप उनकी आवश्यकता के अनुरूप प्रवेशिका तैयार करने चाहिए। इसके बाद महानदी, अरपा, इंद्रावती, शिवनाथ के सभी शिक्षाविद्ों को पहले से बनाये गए प्रवेशिका को आवश्यकतानुसार सुधार करने दिया गया। तत्पश्चात सभी चारों समूहों के दुर्गा सिन्हा, सीमांचल त्रिपाठी, पुष्पा सिंह एवं अमित अवस्थी ने ग्रुप कार्य प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम में जिला कोरिया से स्त्रोत व्यक्ति उमेश कुमार जायसवाल, रायपुर से सुधा वर्मा, ज्योति चक्रवर्ती, रविन्द्र यादव, धारा यादव, सरगुजा से पुष्पा सिंह, सूरजपुर से सीमांचल त्रिपाठी, कृष्ण कुमार ध्रुव, जशपुर से उषा किरण तिर्की, महासमुंद से दुर्गा सिन्हा, दुर्ग से सुमन श्रीवास्तव, मोहित कुमार शर्मा, राजनांदगांव से बबिता गिरी, बस्तर से अमित अवस्थी, दंतेवाड़ा से मुकेश रैकवार, रायपुर से कामिनी बावनकर के साथ राज्य स्तरीय प्रवेशिका निर्माण कार्यशाला के समन्वयक निधि अग्रवाल, नेहा शुक्ला, यूनिसेफ से विकास भदौरिया, कविता लिखार, कृष्णा गौर, महेश वर्मा, दीप ध्रुव एवं राज्य केे शिक्षाविद शामिल थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके आज शाम रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुईं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
रायपुर /शौर्यपथ/
भारत निर्वाचन आयोग मतदाता जागरूकता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले मीडिया संस्थानों का चयन कर प्रतिवर्ष राष्ट्रीय मीडिया अवार्ड प्रदान करता है। भारत निवार्चन आयोग ने इच्छुक मीडिया संस्थानों से 30 नवम्बर तक आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक मीडिया संस्थान अपना नामांकन सीधे भारत निर्वाचन आयोग, निर्वाचन सदन अशोका रोड नई दिल्ली में 30 नवम्बर तक जमा कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा मीडिया संस्थानों को राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार देने के संबंध में जारी पत्र के अनुसार राष्ट्रीय मीडिया सम्मान चार श्रेणी में दिए जाएंगे। इसमें प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया(टेलीविजन), इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेडियो और ऑनलाईन (इंटरनेट) सोशल मीडिया शामिल हैं।
रायपुर /शौर्यपथ/
राष्टीय आदिवासी नृत्य महोत्सव एवं राज्योत्सव के अवसर पर स्थानीय साइंस कॉलेज में आयोजित राज्योत्सव जनसम्पर्क विभाग की प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। आज प्रदर्शनी के पहले दिन बड़ी संख्या में लोगों ने इसका अवलोकन किया। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई महिला स्वसहायता समूह की बहनों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन कर सराहना की।
ग्राम केन्द्री के ओमप्रकाश ने कहा कि जनसम्पर्क विभाग की प्रदर्शनी में पारंपरिक वाद्य यंत्रों को जानने का मौका मिला। इसमें मंजीरा, गुजेरी, सारंगी, तम्बूरा, सींग बाजा, मांदर आदि वाद्य यंत्र सामान्य अवसरों पर देखने को नहीं मिलते। इसी प्रकार राजिम-नवापारा से पहुंचे प्रेमलाल सेन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पारम्परिक वाद्य यंत्रों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के पारम्परिक गहनों को भी चित्र के माध्यम से देखने का मौका मिला। इनमें से कई आभूषण वर्तमान प्रचलन में नही है, जिसे इस प्रदर्शनी पर दिखाया गया है, जिसमें पहुंची, एैंठी, नांगमोरी, कंठा, मांगमोती आदि को दिखाया गया है। ग्राम राखी के श्री रामकुमार, संजयनगर रायपुर के रेशमलाल और धरम कुमार ने छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सिरपुर, बस्तर सहित राज्य के भौगोलिक स्थितियों को जानने का अवसर मिला। जनसम्पर्क की प्रदर्शनी में विश्वसनीय और पुष्ट जानकारी मिलती है। वर्ष 2019 में आयोजित प्रदर्शनी में भी आए थे।
जनसम्पर्क विभाग की प्रदर्शनी में 1 नवम्बर 2000 छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की प्रारंभिक जानकारी के अलावा, मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान रामचन्द्र जी के वन गमन मार्ग, आदिवासी बहुल बस्तर की धरोहर, छत्तीसगढ़ का खजुराहों के नाम से प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर, दक्षिण कौशल की राजधानी सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर, पुरातात्विक छत्तीसगढ़ आदिकालीन छत्तीसगढ़-शैलचित्रों की खोज, छत्तीसगढ़ के लोक नृत्य, छत्तीसगढ़ के जलप्रपात, छत्तीसगढ़ के पारंपरिक श्रृंगार को सुरूचिपूर्ण ढंग से प्रदर्शित किया गया है। जनसम्पर्क के स्टॉल में लोक कलाकार रिखी क्षत्रिय द्वारा छत्तीसगढ़ के पारंपरिक वाद्य यंत्रों को प्रदर्शित किया गया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
