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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से माहरा समाज के प्रतिनिधि मंडल ने की मुलाकात
प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक वाद्य मोहरी भेंट की
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आज यहां उनके निवास कार्यालय में उद्योग मंत्री कवासी लखमा के नेतृत्व में बस्तर संभाग के माहरा समाज के प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात की। इस अवसर पर नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, लोकसभा सांसद दीपक बैज, विधायक श्री राजमन बेंजाम और मुख्य सचिव अमिताभ जैन भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री बघेल ने माहरा समाज की मांग पर बस्तर हाई स्कूल का नामकरण जगतू माहरा के नाम पर और धरमपुरा पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम धरमु माहरा के नाम पर करने की घोषणा की। उन्होंने जगदलपुर में माहरा समाज के सामुदायिक भवन निर्माण तथा इस भवन का नामकरण जगतू माहरा के नाम पर करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सर्वसुविधायुक्त भवन का निर्माण किया जाएगा जिसका उपयोग माहरा समाज के साथ अन्य सामूहिक कार्यक्रमों के लिए भी किया जा सकेगा। प्रतिनिधि मंडल ने माहरा समाज की विभिन्न मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा। मुख्यमंत्री बघेल ने इसके लिए उचित पहल का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधि मंडल में माहरा समाज के संभागीय संरक्षक सामू कश्यप, सुंदर सोढ़ी सहित समाज के अनेक पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के ग्रामीणों से गांव में निर्मित गौठानों को पशुधन के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ स्वावलंबन एवं आय उत्पादक गतिविधियों के प्रमुख केन्द्र के रूप में विकसित कर उसे अपने गांव की पहचान बनाने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के नाम जारी अपनी अपील में कहा है कि दीपावली के बाद हम गोवर्धन पूजा को गौठान दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। इसका कारण यह है कि गांव में गोधन को हम लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं। गोवर्धन पूजा के दिन गोबर की पूजा करते हैं। गोबर हम सब के लिए दूध से ज्यादा महत्वपूर्ण है। गोबर से बनी खाद से हमारे खेत लहलहाते हैं और फसल उत्पादन बेहतर होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि गांव के विकास से ही राज्य का विकास होगा। छत्तीसगढ़ राज्य ने गांव-गांव में गोधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए गौठानों का निर्माण होने से पशुधन अब हमारे लिए गोधन हो गए हैं। गौठान हमारे लिए समृद्धि और लक्ष्मी माता का मंदिर स्वरूप है। उन्होंने कहा है कि गौठानों का रख-रखाव, उसकी साफ-सफाई की जिम्मेदारी हम सबकी है। उन्होंने ग्रामीणों से गोधन के चारे की व्यवस्था के लिए गौठानों को पैरा दान करने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि गौठानों में गोबर खरीदी की जा रही है। इससे वर्मी खाद का उत्पादन करके जैविक खेती को बढ़ावा देना और खेती की स्थिति में सुधार लाना है। गोबर से राज्य में बिजली बनाने का प्रयोग भी सफल हो चुका है। गौ माता की कृपा से अब रौशनी भी होगी। गौठानों में आय मूलक गतिविधियों और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वहां रूलर इण्डस्ट्रियल पार्क स्थापित किया जा रहा है। गौ-माता के आशीर्वाद से गौठानों में अब ग्रामीणों को वहां रोजगार मिलेगा। उन्होंने सभी लोगों से गौठानों को अपने गांव की पहचान बनाने, वहां चारागाह का निर्माण कर गांव को समृद्धि की ओर ले जाने की अपील की है।
धनतेरस और दीवाली से पहले राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तीसरी किश्त और
गोधन न्याय योजना के तहत ग्रामीणों और किसानों को 1510 करोड़ 81 लाख रूपए की सौगात
किसान हितैषी योजनाओं से राज्य में समृद्ध हुई खेती-किसानी
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां राज्योत्सव के अवसर पर अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना के अंतर्गत राज्य के ग्रामीण किसान भाइयों को 1510 करोड़ 81 लाख रुपए की राशि का ऑनलाइन भुगतान किया। इस राशि में राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तीसरी किस्त की राशि 1500 करोड़ रुपए तथा गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं ,गौठान समितियों एवं महिला स्व सहायता समूहों को दी जाने वाली लाभांश की राशि 10 करोड़ 81 लाख रुपए शामिल है। दीपावली और धनतेरस पर्व से ठीक पहले राज्य के 21 लाख ग्रामीण किसान भाइयों के खाते में राशि पहुंचने से उनके त्यौहार की खुशियां दोगुनी हो गई है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम छत्तीसगढ़ियों के लिए आज सबसे बड़ा त्यौहार है, आज ही के दिन छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण का सपना पूरा हुआ था। उन्होंने कहा कि हमने राज्य के किसान भाईयों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तीसरी किश्त की राशि 1500 करोड़ रूपए का भुगतान कर अपना वायदा पूरा किया है। गोधन न्याय योजना के अंतर्गत खरीदी गए गोबर की राशि, स्व-सहायता और गौठान समितियों को 10 करोड़ 21 लाख रूपए की लाभांश राशि का भुगतान भी किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो सालों को कोरोना संकट के बावजूद भी हमारे गांव में त्यौहारों के समय पैसे की कोई कमी नहीं आने दी गई। इस साल भी हमारे किसान भाई भरपूर उत्साह के साथ दीवाली मनाएंगे।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनकी सरकार की किसान हितैषी नीतियों से बीते तीन सालों में छत्तीसगढ़ राज्य में खेती-किसानी खूब फली-फूली और समृद्ध हुई है। किसान भाईयों ने धान का भरपूर उत्पादन किया है और सरकार ने भी भरपूर धान की खरीदी की है। तीन सालों में हर साल धान खरीदी का रिकार्ड टूटा है। इस साल एक करोड़ 5 लाख मेट्रिक टन धान की खरीदी की उम्मीद है। एक दिसम्बर से राज्य में धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू हो जाएगी। मंत्रीगणों, जनप्रतिनिधियों, किसान संगठनों की मांग को देखते हुए हमने राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों की सुविधा के लिए पंजीयन की तिथि को बढ़ाकर 10 नवम्बर तक कर दिया है। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी से लेकर उद्योग, व्यापार तक छत्तीसगढ़ राज्य में तीन सालों में बहुत से कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इन तीन सालों में समाज के सभी वर्गाें तक हमने न्याय पहुंचाने का काम किया है। गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का सपना साकार हो रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों को राज्योत्सव, धनतेरस, दीपावली पर्व की बधाई और शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण तथा स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम, वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, खाद्य एवं संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरु रुद्र कुमार, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने भी अपने उद्बोधन में प्रदेशवासियों को राज्योत्सव और दीपावली की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गांव, ग्रामीणों और किसानों की बेहतरी के लिए जो योजनाएं शुरू की है। उसका लाभ लोगों को मिला है। गांव और ग्रामीण स्वावलंबन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सरकार अपने एक-एक वायदे को पूरा कर रही है। आज छत्तीसगढ़ मॉडल की चर्चा पूरे देश में हो रही है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना से ग्रामीणों और किसानों को मिल रही राशि की वजह से खुशहाली का माहौल है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना की प्रगति की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के प्रोत्साहन से राज्य में उतेरा और रबी फसलों की खेती की ओर किसानों का रूझान बढ़ा है। इस साल रबी सीजन में 2 लाख 80 हजार हेक्टेयर में रबी फसलों की बुआई का लक्ष्य है। रबी फसलों की बोनी शुरू हो चुकी है। राज्य में रबी फसलों बीज और खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
इस अवसर पर बस्तर सांसद दीपक बैज, राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलो देवी नेताम, राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, अपेक्स बैंक के अध्यक्ष बैजनाथ चंद्राकर, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ कमलप्रीत सिंह, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव डीडी सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. एस. भारती दासन एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
*हजारों रुपए की सट्टा पट्टी, नगदी रकम 1740/-रूपये बरामद*
*सूचना पर थाना कोतवाली पुलिस की त्वरित कार्यवाही*
पुलिस अधीक्षक श्री प्रफुल्ल कुमार ठाकुर द्वारा सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने सभी थाना व चौकी प्रभारियों को आसूचना तंत्र मजबूत करते हुए संदिग्ध व्यक्तियों एवं निगरानी बदमाशों की जांच, सतत पेट्रोलिंग व गस्त सुदृढ़ करते हुए अपराधों पर अंकुश लगाने निर्देशित किया गया है।
इसी दरमियान कोतवाली पुलिस ने पेट्रोलिंग के दौरान रत्नाबांधा स्तंभ चौक धमतरी के पास मुखबिर सूचना पर घेराबंदी कर अंको के आधार पर सट्टा नामक जुआ खिलाते हुए *सटोरिया कुतुब खान पिता स्वर्गीय अहमद खान उम्र 52 वर्ष साकिन रत्नाबांधा धमतरी, जिला धमतरी को रंगे हाथ पकड़कर उसके कब्जे से नगदी रकम 1740/-रुपये, हजारों रुपए की सट्टा पट्टी, डॉट पेन* बरामद कर धारा 4क जुआ एक्ट के तहत वैधानिक कार्यवाही की गई है।
अनुसूचित जनजाति के पुरूष अभ्यर्थियों को राज्य शासन ने ऊंचाई एवं सीना माप में दी छूट
ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 11 नवंबर तक बढ़ाई गई
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्योत्सव के अवसर पर सूबेदार/एसआई/ प्लाटून कमांडर भर्ती हेतु अनूसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों को बड़ा तोहफा दिया है। राज्य शासन द्वारा अनुसूचित जनजातियों के अभ्यर्थियों के हित में निर्णय लेते हुए ऊंचाई एवं सीना माप में छूट प्रदान की गई है।
उपरोक्त के साथ ही सभी अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 नवंबर 2021 तक बढ़ाई गई है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ पुलिस के सूबेदार/उपनिरीक्षक/ प्लाटून कमांडर के रिक्त पदों पर भर्ती हेतु विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित किये गए थे। उक्त विज्ञापन में आवेदन करने की अंतिम तिथि 31.10.2021 निर्धारित थी।
राज्य शासन द्वारा अनुसूचित जनजाति के पुरुष उम्मीदवारों के लिए ऊंचाई एवं सीना माप में छूट दी गयी है।
अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए शारीरिक अहर्ता में न्यूनतम ऊंचाई 163 सेमी. एवं न्यूनतम सीना माप अहर्ता में छूट देते हुए सीना बिना फुलाये 78 सेमी. एवं फुलाने पर 83 सेमी. किया गया है।शेष अहर्ताएं पूर्व में जारी विज्ञापन अनुसार होंगी।
अब सभी वर्ग के उम्मीदवार दिनांक 11.11.2021 (सायंकाल 05:30 बजे तक) तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
रायपुर /शौर्यपथ/
स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री एवं उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्मदिवस पर चौथी बटालियन माना में आयोजित ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए गृह मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि अखण्ड भारत के निर्माण और राष्ट्रीय एकीकरण में सरदार वल्लभ भाई पटेल का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ भारत को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। आज हम जिस विशाल और संगठित भारत को मूर्त रूप में देखते हैं, लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की दृढ़ इच्छा शक्ति और उनके कुशल नेतृत्व के बिना पूरी नहीं हो पाती। सरदार पटेल ने देश के छोटे-छोटे राजवाड़ों, राजघरानों को भारत में सम्मिलित किया। साहू ने कहा कि सरदार पटेल के दृढ़ इच्छा शक्ति एवं कुशल नेतृत्व का परिणाम है कि देशी रियासतों का भी भारतीय संघ में विलय हुआ। वल्लभ भाई पटेल ने आजाद भारत को एक विशाल राष्ट्र बनाने में उल्लेखनीय कार्य किया है। मंत्री साहू ने इस मौके पर सद्भावना परेड की सलामी ली और राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के प्रति निष्ठापूर्वक कार्य करने की शपथ दिलाई। उन्होंने इस दौरान शहीदों के छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
गृह मंत्री साहू ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल आदर्श व्यक्तित्व के साथ ही निडर, साहसी एवं प्रखर व्यक्तित्व के धनी थे। देश के एकीकरण में अहम भूमिका निभाने के लिए वर्ष 1991 में उन्हें देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। साहू ने कहा कि हमारे देश में कई धर्मों एवं जातियों के लोग निवास करते हैं, जिनके रहन-सहन, खान-पान, वेश-भूषा मान्यताएं तथा उनकी भाषाएं अलग-अलग है। इन सबके बावजूद पूरे देश के लोग राष्ट्रीयता के भावना से ओत-प्रोत रहते हैं, जो राष्ट्रीय एकता की सर्वोच्च मिशाल है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी देश के कुछ हिस्सों में हमारे सुरक्षा बल आज भी आतंकवाद और नक्सलवाद जैसे आंतरिक एवं बाह्य विध्वंषक शक्तियों से सुरक्षा के अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं और करते रहेंगे। मंत्री साहू ने कहा कि देश को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए हम सबको सरदार वल्लभ भाई पटेल के बताए हुए रास्तों और उनकी नीतियों पर चलना होगा। इस मौके पर संसदीय सचिव विकास उपाध्याय, पुलिस महानिदेशक डी.एम. अवस्थी, स्पेशल पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा, एस.आर.पी. कल्लूरी, आनंद छाबड़ा सहित पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके उरांव आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ रायपुर द्वारा पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित राज्य स्तरीय करम नृत्य प्रतियोगिता के कार्यक्रम एवं सम्मान समारोह में शामिल हुई। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, विधायक डॉ. प्रीतम राम, विधायक श्री मोहित केरकेट्टा, राज्यपाल के सचिव अमृत खलखो सहित बड़ी संख्या में उरांव आदिवासी समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
राज्यपाल ने करम नृत्य आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से सामाजिक मेल-जोल और सद्भाव और बढ़ता है। उन्होंने 28 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक हुए राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री एवं संस्कृति मंत्री एव उनकी पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नृत्य-संगीत, आदिवासियों के जीवन का अभिन्न अंग है। इसके जरिए ना केवल उनका मनोरंजन होता है बल्कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में कला, संस्कृति भी हस्तांतरित की जाती है। जिस तरह नृत्य में लय और अनुशासन जरूरी रहता है उसी प्रकार जीवन में भी इसका महत्व है। आज के आपा धापी के इस युग में अपने आप को मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए नृत्य और संगीत बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी सरल स्वभाव के होने के साथ ही स्वाभिमानी भी होते हैं। उन्होंने समाज के लोगों को अपने अधिकारों के लिए जागरूक होने और संगठित होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वे अपनी आजीविका के लिए जल, जंगल और जमीन पर निर्भर रहते हैं, जो कि उनका स्वाभाविक अधिकार है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून का क्रियान्वयन शीघ्र ही होगा, इसके लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं। आदिवासी कल्याण के लिए राज्य शासन की सोच भी सकारात्मक है। शासन द्वारा उनके कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बाहुल्य राज्य के लिए गौरव की बात है कि केन्द्र शासन द्वारा आदिवासी समुदाय के ही व्यक्ति को संवैधानिक मुखिया बनाकर भेजा गया है और मेरे लिए भी यह गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए और अपनी बोली, भाषा, लोक कला को जीवित रखने के लिए प्रचार के आधुनिक माध्यमों का भी उपयोग करना चाहिए। समाज को शिक्षा विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा, अपने आसपास के वातावरण की साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि कोरोना महामारी से हमने बहुत कुछ सीखा है। आदिवासी समुदाय को खेती-किसानी के अलावा युवाओं के कौशल बढ़ाने पर भी विचार करना चाहिए, जिससे उन्हें अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार मिल सके।
संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने इस अवसर पर कहा कि कल समाप्त हुए राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में देश-विदेश से कलाकार आए थे। सभी आदिवासी समुदायों से मिलने का और उनकी संस्कृति को जानने का अवसर मिला और यह बात सामने आई कि सभी आदिवासियों में काफी समानता होती है। आदिवासी दिल से काम करते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को अपनी भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर भी ध्यान देना होगा और शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए भी उपाय करने होंगे। उन्होंने लोकगीत की कुछ पंक्तियों का भी सुमधुर गायन किया।
राज्यपाल ने इस अवसर पर करमा नृत्य प्रतियोगिता के विजेता दलों को पुरस्कृत किया। राज्यपाल ने आयोजन समिति को स्वेच्छा अनुदान से प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। समारोह स्थल पर पहुंचने पर राज्यपाल एवं अतिथियों का करम नृत्य से स्वागत किया गया। समारोह का शुभारंभ आदिवासियों के जननायक बिरसा मुण्डा एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण से किया गया। कार्यक्रम में डी. आर. भगत, आनंद टोप्पो, यू.के. कच्छप, डी.डी. तिग्गा भी उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 01 नवम्बर को गोधन न्याय योजना के तहत पशुपालकों, गोबर विक्रेताओं, गौठान समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को कुल 10 करोड़ 81 लाख रूपए का ऑनलाईन भुगतान करेंगे। इस राशि में गोबर खरीदी के एवज में पशुपालक गोबर विक्रेताओं को 5 करोड़ 9 लाख रूपए, गौठान समितियों को 3 करोड़ 56 लाख तथा स्व-सहायता समूहों को दी जाने वाली लाभांश राशि 2 करोड़ 16 लाख रूपए शामिल हैं।
गौरतलब है कि गोधन न्याय योजना अंतर्गत गौठानों में दो रूपए किलों में गोबर की खरीदी नियमित रूप से की जा रही है। 30 सितंबर 2021 तक क्रय किए गोबर के एवज में गोबर विक्रेताओं को 104 करोड़ 41 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। इसी तरह स्व-सहायता समूहों को लाभांश के रूप में 24 करोड़ 98 लाख तथा गौठान समितियों को 37 करोड़ 90 लाख रूपए का भुगतान किया गया है। कल 01 नवम्बर को 10 करोड़ 81 लाख रूपए का भुगतान किया जाएगा। इसको मिलाकर अब तक खरीदे गए 54.76 लाख क्विंटल गोबर की कुल राशि 109 करोड़ 50 लाख तथा गौठान समितियों और स्व-सहायता समूहों को लाभांश की राशि 68 करोड़ 64 लाख रूपए हो जाएगी।
राज्य में अब तक 10 हजार 538 गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 7714 गौठान निर्मित एवं सक्रिय रूप से संचालित है। सक्रिय गौठानों से 01 लाख 85 हजार 320 पशुपालक लाभांन्वित हो रहे है। गौठानों में क्रय गोबर से वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट एवं अन्य उत्पाद का निर्माण किया जा रहा है। गौठानों में 31 अक्टूबर की स्थिति में 8.98 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट एवं 4.04 लाख क्विंटल सुपर कम्पोस्ट का उत्पादन किया जा चुका है। जिसमें से 8.50 लाख कम्पोस्ट खाद का विक्रय हो चुका है।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्यपाल अनुसुईया उइके ने राजभवन में कनक तिवारी, पूर्व महाधिवक्ता की पुस्तक ‘‘आदिवासी उपेक्षा की अंतर्कथा: ब्रिटिश हुकुमत से 21वीं सदी तक’’ का विमोचन किया। राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि कनक तिवारी गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित होने के साथ ही प्रखर वक्ता भी हैं। उनकी कानून की समझ के सभी कायल हैं। उनकी इस पुस्तक में आदिवासियों की वर्तमान और पिछले दशकों की स्थिति के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं आदिवासियों के हितों के लिए हमेशा आवाज उठाती रही हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी आदिवासियों के हितों के लिए पेसा अधिनियम लागू करने की दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं। अपने अधिकारों के लिए आदिवासियों को स्वयं भी जागरूक और संगठित होना होगा।
कनक तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासियों का जंगलों पर जो अधिकार है, उसे वह मिलना चाहिए। आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए पांचवीं अनुसूची को संविधान में शामिल किया गया। साथ ही वर्ष 1996 में पेसा अधिनियम लाया गया। उन्होंने कहा कि आदिवासी दर्शन सामूहिकता पर आधारित है। उनका मानना है कि जंगल सबके लिए है। श्री कनक तिवारी का कहना है कि वन और पहाड़ियां, जनजातीय समाज के मुख्य स्रोत हैं। जनजातीय समुदायों को उनकी भूमि, रहवास, जीविका, राजनैतिक व्यवस्था, सांस्कृतिक मूल्यों एवं पहचान से वंचित करके प्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रीय जीवन से ही बेदखल किया जा रहा है। जनजातियों के साथ एक अन्य समस्या यह भी है कि भूमि में एकल अधिकार की जगह वे सामुदायिक अधिकार में विश्वास रखते हैं। इसलिए भूमि संबंधित मामलों में उनके पास स्वामित्व का लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं होता। जनजातियों के दावे अधिकतर मौखिक साक्ष्य पर ही आधारित होते हैं। नतीजतन उनके मालिकी हक स्थापित करने में कठिनाईयां उत्पन्न होती है। कनक तिवारी ने कहा कि ब्रिटिश शासन का, शुरूआत से ही आदिवासियों ने विरोध करना प्रारंभ कर दिया था। बिरसा मुण्डा ने एवं भूमकाल आंदोलन के नायकों ने ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ अनेक संघर्ष किए, किन्तु आजादी के बाद भी आदिवासियों को जो हक मिलना था वो नहीं मिल सका।
इस अवसर पर पूर्व अपर मुख्य सचिव सी.के. खेतान, संजीव बक्शी, एन.जगन्नाथ राव, आलोक शुक्ला, संजय परते, लक्ष्मीशंकर निगम, विकास मरकाम, तेजस तिवारी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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