September 27, 2026
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    रायपुर

    रायपुर (6110)

    रायपुर /शौर्यपथ/

    राजधानी रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान में चल रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव 2021 के तीसरे दिन झारखण्ड के जनजातीय के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत छाऊ नृत्य लोगों के दिलो-दिमाग पर छाया रहा। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के दौरान दर्शकों को पूरी तरह से बांधे रखा। छाऊ नृत्य के दौरान पंडाल में मौजूद लोग मंच पर कलाकारों के नृत्य करतब और उनके पद चपलता को टकटकी लगाए देखते रहे। छाऊ नृत्य दल के कलाकारों की साज-सज्जा उनके परिधान, मुखौटे लोगों के लिए आकर्षण बने रहे। कलाकरों की शानदार प्रस्तुति से रामायण, महाभारत काल से लेकर पौराणिक काल की कथाएं जीवन्त हो उठी। जिसे दर्शकों ने खूब सराहा और कार्यक्रम की प्रस्तुति के दौरान तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।

    छाऊ नृत्य भारतवर्ष के तीन पूर्वी राज्यों में लोक और जनजातीय कलाकारों द्वारा किया जाने वाला एक लोकप्रिय नृत्यरूप है जिसमें मार्शल आर्ट और करतबों की भरमार रहा करती है। इस तीन राज्यों में छाऊ नृत्य संबंधित क्षेत्रों के आधार पर तीन नामों से जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल में पुरुलिया छाऊ, झारखंड में सराइकेला छाऊ, और उड़ीसा में मयूरभंज छाऊ, इसमें से पहले दो प्रकार के छाऊ नृत्यों में प्रस्तुति के अवसर पर मुखौटों का उपयोग किया जाता है जबकि तीसरे प्रकार में मुखौटे का प्रयोग नहीं होता।

    छाऊ नृत्य में रामायण महाभारत और पुराण की कथाओं को कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। छाऊ अपनी ओजस्विता और शक्ति की परिपूर्णता के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है जिसमें नर्तकों द्वारा मार्शल आर्ट्स का बखूबी इस्तेमाल करते हुए अपने शरीर में विविध तरह की मुद्राओं और भंगिमाओं से दर्शकों को सम्मोहित करने में सफल रहता है। छाऊ नृत्य केवल पुरुष कलाकारों द्वारा ही किया जाता है। छाऊ ने अपने कथावस्तु कलाकारों की ओजस्विता और चपलता और संगीत के आधार पर न सिर्फ भारतवर्ष वरन विदेश में भी अपनी खास पहचान बनाई है।

     

    रायपुर./ शौर्यपथ/

    राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का तीसरा और अंतिम दिन भी आज सुबह से शाम तक मांदर की थाप, घुंघरूओं की खनक, मधुर स्वर लहरियों और रंग-बिरंगे परिधानों से गुलजार रहा। विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी नर्तकों ने साइंस कॉलेज मैदान के भव्य मंच पर दिन भर अपने-अपने राज्यों की संस्कृति की छटा बिखेरी। ओड़िशा के कलाकारों ने धाप, लद्दाख के कलाकारों ने हाहानु, असम के कलाकारों ने बोडो और तमिलनाडू के कलाकारों ने इरूला नृत्य की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्र-मुग्ध किया।

     ओड़िशा के कलाकारों ने वहां के पश्चिमी जिलों संबलपुर, सुंदरगढ़, कालाहांडी और बलांगीर क्षेत्र में लोकप्रिय धाप नृत्य प्रस्तुत किया। केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के नर्तकों ने विवाह के अवसर पर किए जाने वाले हाहानु नृत्य की प्रस्तुति दी। परंपरागत परिधान और सिर पर फूलों से सजी-धजी आकर्षक पगड़ी में युवा कलाकारों ने गीत और नृत्य के माध्यम से वहां की संस्कृति से रू-ब-रू कराया। असम के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत बोडो नृत्य के दौरान उनके परिधानों में पीला, लाल और हरा रंग का गजब का संयोजन देखने को मिला। परंपरागत वाद्ययंत्रों मांदर, झांझ और बांसुरी की मधुर स्वर लहरियों के बीच 12 युवतियों ने इस आकर्षक नृत्य की प्रस्तुति दी। परंपरागत रूप से बोडो नृत्य मौसम के बदलने पर आपस में सुख-दुख साझा करने के लिए ग्राम प्रधान के घर किया जाता है। तमिलनाडू के कलाकारों ने प्रकृति के संरक्षण का संदेश देता इरूला नृत्य प्रस्तुत किया। वहां के आदिवासी जंगल से वनोपज एकत्र कर लाने के बाद अपनी खुशियों का इजहार करने के लिए यह नृत्य करते हैं।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में आज तीसरे दिन सुबह से पारम्परिक त्यौहार अनुष्ठान, फसल कटाई एवं अन्य पारम्परिक विधाओं पर आधारित प्रतियोगिता को आगे बढाया गया।राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में आज तीसरे दिन सुबह से पारम्परिक त्यौहार अनुष्ठान, फसल कटाई एवं अन्य पारम्परिक विधाओं पर आधारित प्रतियोगिता को आगे बढाया गया।छाऊ नृत्य भारतवर्ष के तीन पूर्वी राज्यों में लोक और जनजातीय कलाकारों द्वारा किया जाने वाला लोकप्रिय नृत्य है। जिसमें मार्शल आर्ट और करतबों की भरमार रहती है

    राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में आज तीसरे दिन सुबह से पारम्परिक त्यौहार अनुष्ठान, फसल कटाई एवं अन्य पारम्परिक विधाओं पर आधारित प्रतियोगिता को आगे बढाया गया। इस श्रेणी के प्रतियोगिता की शुरूआत तमिलनाडु की कोथा लोक नृत्य के साथ हुई। इस दौरान कलाकारों की लयबद्ध प्रस्तुति ताल, थाप और संगीत से दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। दूसरे क्रम में महाराष्ट्र के द्वारा लिंगों, दमनदीव एवं नागरहवेली-तारपा, मेघालय द्वारा बंगला और छत्तीसगढ़ द्वारा कर्मा, कर्नाटक-लंबाड़ी, लक्ष्यद्वीप-बंदिया, अण्डमान निकोबार-निकोबार नृत्य, राजस्थान-सहरिया स्वांग, झारखण्ड- छाऊ और गुजरात-वासवा होली नृत्य, पश्चिम बंगाल-संथाली, मणिपुर-खरिंग खरग फेचक, ओड़िशा-डालखाई, नागालैण्ड-माकू हे निची, मध्यप्रदेश द्वारा दंडार एवं अन्य राज्यों द्वारा लोक नृत्य की प्रस्तुति की हुई। इस दौरान छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य झारखण्ड के कलाकारों द्वारा छाऊ नृत्य ने दर्शकों की खूब तालियां बंटोरी।

    छाऊ नृत्य भारतवर्ष के तीन पूर्वी राज्यों में लोक और जनजातीय कलाकारों द्वारा किया जाने वाला लोकप्रिय नृत्य है। जिसमें मार्शल आर्ट और करतबों की भरमार रहती है। इस तीन राज्यों में छाऊ नृत्य संबंधित क्षेत्रों के आधार पर तीन नामों से जाना जाता है। पश्चिम बंगाल में पुरुलिया छाऊ, झारखंड में सराइकेला छाऊ, और उड़ीसा में मयूरभंज छाऊ, इसमें से पहले दो प्रकार के छाऊ नृत्यों में प्रस्तुति के अवसर पर मुखौटों का उपयोग किया जाता है, जबकि तीसरे प्रकार में मुखौटे का प्रयोग नहीं होता। इस नृत्य में रामायण महाभारत और पुराण की कथाओं को कलाकारों द्वारा मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। इसमें गायन और संगीत का प्रमुख स्थान है, किन्तु प्रस्तुति के समय लगातार चल रही वाद्य संगीत की विशेषता प्रधान रहती है। नृत्य में प्रत्येक विषय की शुरुआत नृत्य एक छोटे से गीत से होती है, जिसमें उस विषय वस्तु का परिचय होता है। नृत्य के विषय वस्तु में सम्मिलित होने वाले सभी पात्रों का परिचय एक छोटे से गायन के आधार पर दिया जाता है, जो अगले विषय के शुरू होने तक लगातार चलते रहता है। फिर दूसरा पात्र आता है उसका परिचय दिया जाता है। छाऊ अपनी ओजस्विता और शक्ति की परिपूर्णता के लिए विशेष प्रसिद्ध है। जिसमें नर्तकों द्वारा मार्शल आर्ट्स का बखूबी इस्तेमाल करते हुए अपने शरीर में विविध तरह की मुद्राओं और भंगिमाओं उद्भूत करते हुए दर्शकों को सम्मोहित करने का गुण रहता है। छाऊ नृत्य केवल पुरुष कलाकारों द्वारा ही किया जाता है। छाऊ ने अपने कथावस्तु, कलाकारों की ओजस्विता और चपलता और संगीत के आधार पर न सिर्फ भारत देश समेत विदेशों में भी अपनी खास पहचान बनाई है।

    महासमुंद /शौर्यपथ/

    महासमुन्द के शिक्षित बेरोजगार युवा श्री जितेन्द्र पहले अपने लिए नौकरी की तलाश कर रहे थे। किंतु इसमें सफलता नहीं मिल पाने के कारण उसने अपना व्यवसाय करने की सोची। लेकिन व्यवसाय हेतु आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण इसमें दिक्कत आ रही थी। उन्हें राज्य और केन्द्र सरकार की शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए खुद के व्यवसाय के लिए ऋण योजनाओं की जानकारी मिली। उन्होंने तत्काल प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में अपने स्वयं के व्यवसाय हेतु आवेदन दाखिल किया। खुद का व्यवसाय कम्प्यूटर ऑनलाईन सेंटर हेतु बैंक से 5 लाख रुपए का ऋण लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने गूगल कम्प्यूटर सेंटर नाम से बीटीआई रोड, महासमुंद में शुरू किया। इसमें उन्हें सफलता मिली। पिछले ढाई-तीन वर्षों से वे कॉमन सर्विस सेंटर, सीएससी/च्वाइस सेंटर का सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं। शुरूआत में उन्होंने अपने दोस्तों की मदद लेकर एक सेट कम्प्यूटर, प्रिंटर लेकर काम की शुरूआत की। शुरूआत में उन्हें थोड़ी दिक्कतों के साथ धीरे-धीरे सफलता मिलने लगी।

    जितेन्द्र बताते है कि जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के अधिकारियों का भरपूर का सहयोग मिला। ऋण फॉर्म भरने से लेकर आवेदन का निराकरण होने तक पूरा सहयोग किया। अब वे अपने ऑनलाईन दुकान से एडमिशन फॉर्म, परीक्षा फॉर्म, बिल पेमेंट, रोजगार से संबंधित फॉर्म, रिचार्ज बैंकिंग से जुड़े कार्य, बैंक खाता खोलना, पैसा निकालना, पैसा जमा करना, पैसा ट्रांसफर करना, हवाई जहाज टिकट बुकिंग, आधार कार्ड प्रिंट, पैन कार्ड बनाना, फोटो कॉपी करना, कलर प्रिंट करना आदि कार्य वे अपने दुकान से कर रहें हैं। वे बताते है कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के बारें में भी जानकारी लेने लोग उनके दुकान पर आते है। श्री जितेन्द्र ने बताया कि किसी भी काम में उतार चढ़ाव आम बात है। हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति प्रबल होनी चाहिए। शुरूआत में किसी भी काम में थोड़ी बहुत कठिनाई और दिक्कत अवश्य आती है। लेकिन सभी के सहयोग और मागदर्शन से उससे बाहर निकलकर आगे बढ़ना चाहिए। वे अपने शिक्षित युवा साथियों से भी कहना चाहते है कि वे राज्य और केन्द्र सरकार की योजनाओं का फायदा उठाकर अपना स्वयं का रोजगार स्थापित कर सकते है और दूसरों को भी रोजगार देने में मदद कर सकते है।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर एक नवम्बर 2021 दिन सोमवार को राज्य के समस्त शासकीय कार्यालयों, संस्थाओं के लिए स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 30 अक्टूबर को आदेश जारी कर दिया गया है।

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

    जनसम्पर्क संचालनालय रायपुर में पदस्थ भृत्य श्री भगवानदीन ने लगभग 34 साल 10 महीने की सेवा शासकीय सेवा अवधि पूर्ण करने के बाद आज सेवानिवृत्त हुए।  भगवानदीन ने परिवहन विभाग में 01 जनवरी 1987 से भृत्य के पद से अपनी सेवाएं प्रारंभ की। उन्होंने जनसंपर्क विभाग में कुल 12 वर्षों तक सेवाएं दी। इस मौके पर रायपुर छोटापारा स्थित जनसम्पर्क संचालनालय में आयोजित समारोह में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके सुदीर्घ और स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।

    अपर संचालक  जवाहर लाल दरियो ने  भगवानदीन के सेवाभाव की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने दायित्वों का भलीभांति निर्वहन किया। इस अवसर पर अपर संचालक  उमेश मिश्रा, संयुक्त संचालक सर्वश्री संजीव तिवारी, आलोक देव, संतोष मौर्य, पवन गुप्ता, उप संचालक सर्वश्री हीरा देवांगन, ललित चतुर्वेदी, सहायक संचालक सर्वश्री नसीम अहमद खान, घनश्याम केशरवानी, प्रेमलाल पटेल, सहायक जनसंपर्क अधिकारी  लिबनुस किस्पोट्टा, अधीक्षक  कमल मेहर सहित जनसम्पर्क संचालनालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

    रायपुर /शौर्यपथ/


    मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने आज शाम राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद सरोवर बूढ़ातालाब स्थित बेहद आकर्षक और रोशनी से जगमगाते छत्तीसगढ़ लोक माटी शिल्प परिसर पहुंचे और वहां ‘छत्तीसगढ़ लोक कला शिल्प संसार‘ विक्रय सह-प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने परिसर में छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना तथा आजीविका मिशन के तहत महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉल में गोबर तथा माटी के दीया सहित दीवाली की अन्य पूजन सामग्री खरीद कर उन्हें प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस दौरान लोगों से अपील भी की कि स्थानीय विक्रेताओं और कुम्हारों से ही दीया खरीदे और सदियों से परंपरागत विधियों और भरपूर उत्साह के साथ मनाते आ रहे दीवाली त्यौहार की सार्थकता को साकार करें।

    मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने इस अवसर पर दीपदान महोत्सव के तहत एक लाख दीये के निःशुल्क वितरण के पुनीत कार्य की शुरूआत भी की। उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक कला शिल्प संसार में भ्रमण के दौरान महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से बातचीत की और उनसे गोबर से बने दीये आदि पूजन सामग्रियों की खरीददारी भी की। परिसर में छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना तथा आजीविका मिशन के तहत महिला समूहों द्वारा छह स्टॉल लगाए गए है। उल्लेखनीय है कि समूह की ये महिलाएं न केवल मिट्टी और गोबर से बने आकर्षक दीये, मूर्तियां और पूजन सामग्रियां बना रही हैं, बल्कि वे विभिन्न प्रकार के साबुन, बेकरी, कुकीज, आचार जैसी दर्जनों अन्य सामग्री भी बना रही हैं। इन सामग्रियों को बनाने में गोधन न्याय योजना भी बेहद सार्थक साबित हो रही है।

    बेहद आकर्षित और रोशनी से जगमगाते परिसर का पैदल भ्रमण करने के उपरांत मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने नागरिकों से अपील की कि हमारे यहां दीपावली के अवसर पर पारंपरिक रूप से मिट्टी के दीये बनाने की गौरवमयी परंपरा रही है। मेहनतकश लोग पारंपरिक के साथ आधुनिक तरीके से भी अब मिट्टी और गोबर के दीये और पूजन सामग्री बना रहे हैं। नागरिक इनसे खरीददारी करें और ऐसी गौरवमयी परंपराओं को निरंतर बढ़ावा दें। जिससे हमारे परंपरागत व्यवसाय से जुड़े लोगों को रोजगार के अच्छे अवसर मिलते रहे और उनकी आमदनी अच्छी हो। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों के साथ परिसर में आकाशदीप को आसमान में उड़ाया और दीपावली के लिए पूरे प्रदेश की जनता को अपनी शुभकामनाएं दी।

    इस अवसर पर नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, रायपुर महापौर  एजाज ढेबर, संसदीय सचिव द्वय  विकास उपाध्याय एवं  चन्द्रदेव राय, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष  कुलदीप जुनेजा, विधायक  अनीता योगेन्द्र शर्मा, विधायक  संगीता सिन्हा, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष  गिरीश देवांगन, सभापति नगर पालिक निगम  प्रमोद दूबे सहित नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से राजभवन में समाजसेवी एवं मनोहर गौशाला खैरागढ़ के मैनेजिंग ट्रस्टी  पदम डाकलिया ने भेंट कर उन्हें अपने गौशाला की गतिविधियों के संबंध में जानकारी दी। सुश्री उइके ने निःस्वार्थ भाव से गौसेवा करने के लिए बधाई दी और कहा कि गौमाता की सेवा सबसे बड़ी सेवा मानी जाती है।  डाकलिया ने बताया कि उनकी गौशाला में रह रहीं कामधेनु गाय को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में सबसे लंबी पूंछ वाली गाय का सम्मान मिला है। उन्होंने बताया कि उनकी गौशाला से गौमुत्र के अर्क का निःशुल्क वितरण किया जाता है। इसके अलावा दीवाली के लिए गोबर के दीये निःशुल्क वितरित किए जा रहे है। उनकी गौशाला में गोबर की माला और खाद बनाने का काम भी होता है। इस अवसर पर  प्रवीण पारख और सुश्री तुषी जैन भी उपस्थित थे।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने 31 अक्टूबर को देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री स्वर्गीय सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री ने सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा है कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अग्रणी भूमिका थी। देश के एकीकरण और अखण्ड भारत के निर्माण में उन्होंने अविस्मरणीय योगदान दिया। स्वतंत्र भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को कभी नहीं भुलाया जा सकता।

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