September 05, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    शौर्यपथ /कोरोनाकाल में आज फेस मास्क हर किसी की पहली जरूरत बन गया है। लोगों को कोविड-19 के संक्रमण से दूर रखने के लिए डब्ल्यूएचओ…
    खाना खजाना /शौर्यपथ / शाम का नाश्ता बनाना हो या मेहमानों को अपनी पाक कला से करना हो इंप्रेस, आपके दोनों ही काम को आसान…

    खेल /शौर्यपथ / भारतीय क्रिकेट टीम और ऑस्ट्रेलिया ए के बीच गुलाबी गेंद से खेला गया दूसरा तीन दिवसीय अभ्यास मैच रविवार को यहां ड्रॉ रहा जिसमें कई चीजें मेहमान टीम के लिए सकारात्मक रहीं। भारतीय टीम इसलिए भी खुश होगी क्योंकि उसके पास चयन के लिए काफी दावेदार मौजूद होंगे जिससे वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले दिन-रात्रि टेस्ट में काफी सकारात्मक होकर मैदान में उतरेगी। 4 टेस्ट मैचों की श्रृंखला 17 दिसंबर से एडीलेड में शुरू होगी।
    ऑस्ट्रेलिया ए ने तीसरे दिन 25 रन पर 3 विकेट गंवा दिए थे लेकिन बेन मैकडर्मोट और जैक विल्डरमुथ के शतकों की बदौलत उसने 4 विकेट पर 305 रन बना लिए थे। दोनों बल्लेबाजों ने दूधिया रोशनी में भारतीय तेज गेंदबाजों के बाउंसर का डटकर सामना किया। मैकडर्मोट (167 गेंद में 107 रन) ने अपने कप्तान एलेक्स कैरी (58 रन, 111 गेंद) के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 117 रन की भागीदारी निभाकर मैच को बचाने में अहम भूमिका अदा की।
    वहीं विल्डरमुथ (119 गेंद में 111 रन) ने भी अपना शतक पूरा करने के अलावा मैकडर्मोट के साथ 165 रन जोड़े लेकिन डग आउट में बैठकर मैच देख रहे विराट कोहली और रवि शास्त्री इस बात से खुश होंगे कि मैच ने उन्हें चयन के लिए कई विकल्प दे दिए हैं।
    पहले घंटे में ही पहले टेस्ट के लिए जो बर्न्स (01) और मार्कस हैरिस (05) की संभावित सलामी बल्लेबाजी जोड़ी को मोहम्मद शमी ने पैवेलियन भेज दिया। शमी ने 13 ओवर में 58 रन देकर दो विकेट चटकाए। दोनों सलामी बल्लेबाजों के रन नहीं जुटाने से ऑस्ट्रेलियाई टीम की चिंता निश्चित रूप से बढ़ जाएगी।
    जहां तक भारतीय टीम की बात की जाए तो पृथ्वी साव की मैच में दो पारियों के दौरान ढीली बल्लेबाजी की तुलना में शुभमन गिल का संयम और पारी का आगाज करने की तकनीक ने ध्यान आकर्षित किया। इसी तरह हनुमा विहारी ने भी संयम से खेले गए शतक से खुद को दावेदारी में मजबूत रखा है। वे ऑफ ब्रेक गेंदबाजी कर सकते हैं, उनकी इसी गेंद ने कैरी को आउट किया जिससे वे टीम में छठे विशेषज्ञ बल्लेबाज के स्थान के लिए अच्छा विकल्प हो सकते हैं।
    लेकिन फिर लोकेश राहुल भी मौजूद हैं जो अपने कप्तान के सामने पसीना बहा रहे हैं। राहुल सलामी बल्लेबाज और मध्यक्रम बल्लेबाज के तौर पर कई विकल्प देते हैं। उन्हें 36 टेस्ट मैचों का अनुभव है तो जब एडीलेड के लिए अंतिम एकादश का चयन किया जायेगा तो उनके अनुभव की अनदेखी नहीं की जा सकती।
    अगर दिन-रात्रि अभ्यास मैच से कुछ संकेत मिले हैं तो ऋषभ पंत 73 गेंद में शतकीय पारी खेलने के बाद विकेटकीपिंग के लिये मुख्य दावेदार हैं। चयन पूर्ण रूप से पंत की अपनी बल्लेबाजी से एक सत्र में मैच का रुख बदलने की काबिलियत पर होगा जिसमें दुर्भाग्य से उनके सीनियर विकेटकीपर रिद्धिमान साहा सक्षम नहीं हैं। जहां तक गेंदबाजी का संबंध है तो जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, उमेश यादव और आर अश्विन टेस्ट मैच में शुरुआत करने को तैयार हैं।
    उमेश और अश्विन हालांकि दूसरे अभ्यास मैच में नहीं खेले थे, लेकिन ऐसा अन्य तेज गेंदबाजों को देखने तथा बुमराह और शमी को अभ्यास देने के लिए किया गया। तीसरे दिन दोनों ने 13-13 ओवर गेंदबाजी की जबकि बैकअप तेज गेंदबाज नवदीप सैनी (16 ओवर में 87 रन) और मोहम्मद सिराज (17 ओवर में 54 रन देकर एक विकेट) ने लंबे स्पैल डाले।

    मनोरंजन /शौर्यपथ / बीते कुछ समय से अभिनेता आर माधवन के बिजनेसमैन रतन टाटा की बायोपिक में काम करने की खबरें आ रही थी। लेकिन अब माधवन ने इन खबरों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। अभिनेता ने एक ऑनलाइन इंटरैक्टिव सेशन के दौरान इन अफवाहों को स्पष्ट कर दिया है।
    माधवन के रतन टाटा की भूमिका को निभाने की अटकलें एक फैन के बनाए पोस्टर से शुरू हुईं, जो इंटरनेट पर वायरल हो गया। पोस्टर में अभिनेता की तस्वीर को रतन टाटा की तस्वीर के साथ देखा जा सकता है। अभिनेता ने पुष्टि की कि यह खबर गलत है और सिर्फ फैंस की भावना के चलते ऐसी चर्चा हो रही है।
    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी कोई परियोजना पाइपलाइन या बातचीत के दौर में नहीं है। एक फैन ने पूछा, माधवन क्या यह सच है कि आप रतन टाटा की बायोपिक में मुख्य भूमिका निभाने जा रहे हैं? अगर ऐसा होता है, तो यह बहुत लोगों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा होगी।
    इसका उत्तर देते हुए, आर माधवन ने लिखा, 'दुर्भाग्य से यह सच नहीं है। यह सिर्फ एक इच्छा थी और कुछ फैंस ने पोस्टर बनाया था। ऐसी कोई परियोजना पाइपलाइन में भी नहीं है या इस पर चर्चा नहीं की जा रही है।'
    एक यूजर ने यह भी पूछा कि अभिनेता ने थ्रिलर निशब्दम् क्यों साइन की क्योंकि फिल्म ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। इसका जवाब देते हुए माधवन ने कहा, 'अच्छा आप कुछ जीतते हैं। आप कुछ खो देते हैं.. मैं क्या कह सकता हूं.. हम अपनी पूरी कोशिश करते हैं।'
    वर्कफ्रंट की बात करें तो आर माधवन इन दिनों अपने तमिल प्रोजेक्ट पर फोकस कर रहे हैं। उनकी आखिरी हिन्दी रिलीज फिल्म 'साला खडूस' को चार साल पूरे हो चुके हैं, जिसमें उन्होंने एक बॉक्सिंग कोच की भूमिका निभाई थी। अब वह 'मारा' में दिखाई देंगे, जो मलयालम फिल्म 'चार्ली' की रीमेक है।

    मनोरंजन /शौर्यपथ / अक्षय कुमार की फिल्म 'बच्चन पांडे' के लिए लगातार कलाकारों का चयन हो रहा है। पिछले दिनों कई कलाकार इस फिल्म से जुड़े और अब एक और स्टार कलाकार फिल्म से जुड़ गया है। प्रतिभाशाली पंकज त्रिपाठी भी अब इस फिल्म में नजर आएंगे। निर्माता साजिद नाडियाडवाला के साथ पंकज की यह तीसरी फिल्म है। इसके पहले वे साजिद की 'सुपर 30' और '83' कर चुके हैं। अक्षय और पंकज पहली बार साथ फिल्म करेंगे।
    फिल्म से जुड़े एक सूत्र ने बताया 'फिल्म की हीरोइन कृति सेनन और पंकज 'लुका छुपी' फिल्म पहले कर चुके हैं, लेकिन अक्षय के साथ पंकज का यह पहला अवसर होगा। दोनों ही कलाकार अपनी कॉमिक टाइमिंग के लिए जाने जाते हैं और दोनों को एक साथ देखना एक अनोखा अनुभव होगा। अक्षय, कृति, जैकलीन और अरशद वारसी के साथ पंकज जनवरी में जैसलमैर में शूटिंग करेंगे।'
    अपनी बात आगे बढ़ाते हुए सूत्र ने कहा 'पंकज को फिल्म में लेने का आइडिया साजिद सर और फरहाद सर का था। यह रोल बेहद महत्वपूर्ण है और इसमें जबरदस्त ह्यूमर है। फिल्म की स्टारकास्ट अब शानदार हो गई है और यह सभी 90 दिनों तक साथ में शूटिंग करेंगे।'
    बच्चन पांडे में अक्षय कुमार एक गैंगस्टर के रोल में हैं, जबकि कृति एक पत्रकार की भूमिका अदा कर रही हैं। ये दोनों किरदार मिलते हैं और दोनों का सिनेमा के प्रति जुनून नजदीक ले आता है। बच्चन पांडे 2021 में रिलीज होगी।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / भगवान श्रीकृष्ण की आठ पत्नियां थीं। सभी से उन्होंने विशेष परिस्थिति में विवाह किया था। इन आठ पत्नियों के नाम…

    सभी आयु वर्ग लोगों ने बड़े उत्साह और जोश के साथ लिया भाग
    सवेरे 6 बजे से ही फोटो और वीडियो अपलोड होना शुरू

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में नई सरकार के दो साल पूरा होने पर 13 दिसम्बर को राज्य के कोने-कोने में वर्चुअल मैराथन का आयोजन हुआ। प्रदेश में वर्चुअल मैराथन के दौरान उत्सव जैसे माहौल देखा गया। छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित होने वाले इस वर्चुअल मैराथन में लोगों ने बड़े उत्साह और जोश के साथ भाग लिया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज्य सरकार के मंत्री, संसदीय सचिव, विधायक सहित छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से लाखों की संख्या में लोग इस वर्चुअल मैराथन में शामिल हुए।
    इस वर्चुअल मैराथन दौड़ में प्रतिभागियों ने अपने घरों के आस-पास, उद्यान, मैदान, सड़क में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मैराथन में शामिल हुए। सभी आयु वर्ग के लोग मास्क लगा रखे थे। उनके चेहरे में खुशी का भाव था, बच्चे दौड़ते हुए वीडियो बनवाने का आनन्द ले रहे थे, बुजुर्गों ने भी बड़े सबेरे से दौड़ लगाकर वीडियो बनवाया और हैशटैग किया।

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के मुख्यालय बलरामपुर में आयोजित कार्यक्रम में 247 करोड़ 61 लाख रूपये के 95 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि पूजन किया। उन्होंने कार्यक्रम में 87 करोड़ 32 लाख रूपये की लागत के विकास कार्यो का लोकार्पण तथा 160 करोड़ 29 लाख रूपये की लागत के निर्माण कार्यो का शिलान्यास किया। इन कार्यो में सड़क, पुल-पुलिया निर्माण, सिंचाई, शासकीय भवनों के निर्माण, पेयजल और विद्युत सुविधा विस्तार के कार्य शामिल हैं।
    कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च शिक्षा मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री उमेश पटेल ने की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंह देव, आदिम जाति कल्याण एवं स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री अमरजीत भगत, विधायक रामानुजगंज एवं उपाध्यक्ष, सरगुजा विकास प्राधिकरण श्री बृहस्पत सिंह, विधायक सामरी एवं संसदीय सचिव चिन्तामणि महाराज, जिला पंचायत बलरामपुर-रामानुजगंज की अध्यक्ष सुश्री निशा नेताम, नगरपालिका परिष्द बलरामपुर के अध्यक्ष श्री गोविन्द राम उपस्थित थे।
    मुख्यमंत्री ने जिन कार्यो का लोकार्पण किया, उनमें छत्तीसगढ़ पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा 11 करोड़ 14 लाख की लागत से 12वीं वाहिनी रामानुजगंज में निर्मित आवासीय परिसर का निर्माण, 2 करोड़ 50 लाख की लागत से जरहाडीह खास से चिरकोमा सड़क के बेसना नदी पर नवनिर्मित पुल, 2 करोड़ 58 लाख की लागत से पचावल से कोटपाली सड़क पर स्थित बांकी नदी पर पुल निर्माण, 85 लाख की लागत से इन्द्रपुर रोड से नीलकंठपुर यादवपारा सड़क स्थित खरबोर नाला पर पुल निर्माण, 1 करोड़ 71 लाख की लागत से बलंगी नवाटोला से झापर गोड़पारा स्थित वरन नदी पर पुल निर्माण, 1 करोड़ 64 लाख की लागत से कमलपुर से पटेवाखास सड़क स्थित चिकरा नदी पर पुल निर्माण, 1 करोड़ 42 लाख की लागत से पण्डरी खास से पण्डरी पहाड़डीह सड़क स्थित वहेरा नाला पर पुल निर्माण, 3 करोड़ 10 लाख की लागत से अम्बिकापुर रामानुजगंज रोड से महुआडांड नावापरा सड़क स्थित सांसू नदी पर पुल निर्माण, 2 करोड़ 69 लाख की लागत से शारदापुर अमण्डा से सरहूलखास सड़क स्थित इरिया नदी पर पुल निर्माण, जल संसाधन विभाग द्वारा 8 करोड़ 80 लाख की लागत से निर्मित ककनेश जलाशय, 7 करोड़ 54 लाख की लागत कोटराही जलाशय निर्माण एवं 5 करोड़ 53 लाख की लागत से मानीकपुर जलाशय, 69 लाख की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन मनोहरपुर, छ.ग. स्टेट वेयर हाउसिंग कॉपोरेशन द्वारा 3 करोड़ 40 लाख की लागत से राजपुर में 5400 मेट्रिक टन गोदाम निर्माण एवं 2 करोड़ 17 लाख की लागत से प्रेमनगर में 3600 मेट्रिक टन गोदाम निर्माण, क्रेडा द्वारा 2 करोड़ 15 लाख रूपये की लागत से 21 नग 16 ड्यूल पंप की स्थापना का कार्य, 9 करोड़ 39 लाख रूपये की लागत से प्रकाश व्यवस्था हेतु 2298 नग सोलर होमलाईट की स्थापना तथा 1 करोड़ 20 लाख की रूपये की लागत से गौठान और चारागाह में पेयजल व सिंचाई हेतु 45 सोलर पंप की स्थापना के कार्य शामिल हैं।

     रायपुर / शौर्यपथ /  ‘बात हे अभिमान के, छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान के’ स्लोगन को धरातल पर उतारते हुए नाॅर्थ अमेरिका में छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के संगठन नाॅर्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन ( North America Chhattisgarh Association-NACHA ) के सदस्यों ने भी बड़े ही जोश और उमंग के साथ ‘रन विथ छत्तीसगढ़ वर्चुअल मैराथन’ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर आज प्रदेश भर में वर्चुअल मैराथन आयोजित की गई। इस मैराथन में न सिर्फ छत्तीसगढ़ के लाखों बुजुर्ग, युवा और बच्चों ने एकजुटता दर्शाने के लिए भारी संख्या में अपनी सहभागिता की अपितु ‘रन विथ छत्तीसगढ़ की सतरंगी छटा’ सात समंदर पार शिकागो नाॅर्थ अमेरिका में भी खिलकर सामने आई।

    भिलाई में भसीन या शंकरलाल देवांगन तो दुर्ग में दिनेश देवांगन या देवेन्द्र चंदेल के नामों पर लग सकती है मुहर या अरुण सिंह पर संगठन खेलेगा दाव

    दुर्ग / शौर्यपथ / भाजपा संगठन में भिलाई-दुर्ग के भाजपा का जिलाध्यक्ष बनाने को लेकर राजनीति में उबाल आ गया है। इसके लिए लोकसभा सांसद विजय बघेल और राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय अपने-अपने समर्थकों के माध्यम से आमने-सामने आ गए हैं। करीबी की ताजपोशी के लिए दोनों नेताओं के बीच गुटीय संघर्ष के हालातों पर जिले भर की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई है।
    प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय के भिलाई व दुर्ग जिला संगठन के अध्यक्षों की नियुक्ति 15 दिसंबर से पहले कर दिए जाने का संकेत देने के बाद भाजपा की स्थानीय राजनीति में मौसम की ठंडकता के बावजूद गरमाहट भर आई है। अब तक जो सियासी चर्चा सरगर्म है उसके मुताबिक संगठन में अपने समर्थक को जिला अध्यक्ष की कुर्सी पर बिठाने लोकसभा सांसद विजय बघेल और राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। इसके साथ ही दोनों नेताओं के समर्थकों की निगाह प्रदेश भाजपा कार्यालय से होने वाली अधिकृत घोषणा पर टिकी हुई है। हालांकि इस बार के हालात के अनुसार वैशाली नगर विधायक विद्यारतन भसीन को भिलाई भाजपा की कमान मिल सकती है। राजनीति के जानकारों की मानें तो पिछले निगम चुनाव में जिस तरह से भसीन को महापौर प्रत्याशी बनाकर भाजपा के प्रदेश संगठन ने स्थानीय नताओं के गुटीय संघर्ष पर विराम लगाया था। वैसा ही निणय भिलाई जिलाध्यक्ष बनाने में भी लिया जा सकता है। वैसे देखा जाये तो बसीं के लिए जिलाध्यक्ष की खुर्सी इतनी आसान ही नहीं है निष्क्रियता का आरोप हमेशा से भसीन पर लगता रहा है जबकि भाजपा को इस समय ऐसे जिलाध्यक्ष की जरुरत है जो सक्रीय रहे और जमीनी स्तर से कार्यकर्ताओ के साथ समन्वय बना कर चले किन्तु भसीन के जिलाध्यक्ष बन्ने से जमीनी कार्यकर्ताओ में कही ना कही हताशा हो सकती है किन्तु किस्मत के धनी माने जाने वाले भसीन पर भी संगठन अपना दाव लगा सकती है . वैसे अभी तक भिलाई भाजपा जिलाध्यक्ष के लिए सरोज गुट से खिलावन सिंह साहू और विजय खेमे से शंकरलाल देवांगन की दावेदारी चर्चे में है। इसी तरह दुर्ग जिला अध्यक्ष के लिए सरोज खेमा दिनेश देवांगन के नाम को सहमति दिलाने का प्रयास कर रहा है। जबकि विजय बघेल की ओर से देवेन्द्र सिंह चंदेल का नाम आगे किए जाने की चर्चा है। इस बीच यह भी चर्चा सरगर्म है कि प्रदेश संगठन भाजपा के दोनों दिग्गजों के बीच एक-एक जिला अध्यक्ष का बंटवारा कर सकता है। ऐसी स्थिति में भिलाई संगठन विजय बघेल को देकर दुर्ग में सरोज पांडेय की पसंद पर अध्यक्ष बनाए जाने की संभावनाओं को लेकर चर्चा सरगर्म है।
    वही दुर्ग जिलाध्यक्ष के लिए भाजपा के कई कार्यकर्ता वार्ड न. 21 के पार्षद अरुण सिंह को भी देखना चाहते है वैसे तो अरुण सिंह निर्दलीय पार्षद के रूप में विजयी हुए है कीनू वर्तमान समय में भी भाजपा के सक्रीय कार्यकत्र्ता है और विजय गुट से सम्बन्ध रखते है . युवाओं में अरुण सिंह को ज्यादा पसंद किया जाता है हिन्दू युवा मंच के द्वारा कई मौको पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर चुके अरुण सिंह धमधा टोल नाका के आन्दोलन के लिए जाने जाते है संगठन चलाने की कला में माहिर अरुण सिंह युवा जोश से भरपूर है और युवाओं की बहुत बड़ी फौज उनके साथ है वर्तमान समय में दुर्ग जिला भाजपा को जिस तरह का तेज तर्रार अध्यक्ष चाहिए उसके लिए अरुण सिंह से बेहतर कोई नहीं किन्तु दुर्ग में सरोज पाण्डेय के चुने हुए प्रत्याशी ( निगम चुनाव ) संजय सिंह के सामने निर्दलीय मैदान में उतर कर और रिकार्ड मतों से जीत दर्ज कर पार्षद बने अरुण सिंह के लिए इस अध्यक्ष की खुर्सी के लिए सबसे बड़ी दीवार सरोज पाण्डेय के रूप में है अगर अरुण सिंह को सरोज पाण्डेय का समर्थन मिल गया तो दुर्ग जिला अध्यक्ष बनने के सभी रस्ते अरुण सिंह के लिए आसान हो जायेंगे और दुर्ग भाजपा एक बार फिर नए रूप में विपक्ष की मजबूत भूमिका में नजर आएगी किन्तु राजनीती में ये बदलाव आसान नहीं है वही यह भी कह सकते है कि राजनीती में सब संभव है जहां सारी अटकले धराशायी हो जाती है वही एक निष्क्रिय या नया चेहरा भी मैदान में नजर आ जाता है . देखना यह है कि संगठन किस नजरिये से जिलाध्यक्ष के चुनाव में सफलता हांसिल करता है क्योकि गुटीय राजनीती से उबरना वर्तमान समय में प्रदेश की और दुर्ग की राजनीती के लिए संगठन की सबसे बड़ी चुनौती है .
    गौरतलब रहे कि तकरीबन डेढ़ साल से भाजपा के संगठन जिला भिलाई और दुर्ग के नये अध्यक्ष चयन का मामला लंबित है। इसके लिए बड़े नेताओं की अपने करीबी समर्थकों की राजपोशी सुनिश्चित कराने के लिए मची खींचतान को काफी हद तक जिम्मेदार माना जा सकता है। मौजूदा राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाडेंय के वर्ष 2009 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतने के साथ ही भिलाई व दुर्ग के भाजपा संगठन में उनका वर्चस्व कायम रहा है। इस बार भी सरोज समर्थक दोनों संगठन जिलों में अपना अध्यक्ष बनाने कोई कसर छोड़ते नहीं दिख रहे हैं। लेकिन इस बार समीकरण काफी बदल सा गया है। सरोज गुट को लोकसभा सांसद विजय बघेल समर्थकों से कड़ी चुनौती मिलती दिख रही है।
    यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि संगठन चुनाव के तहत बूथ और मंडल अध्यक्षों की चयन सूची सार्वजनिक होते ही लोकसभा सांसद विजय बघेल ने खुलकर विरोध जताया था। विजय बघेल को पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय, श्रीमती रमशीला साहू, विधायक विद्यारतन भसीन और पूर्व विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के साथ-साथ उनके समर्थकों का स्वस्फूर्त समर्थन मिला। विजय बघेल ने सदस्यता अभियान और बूथ व मंडल अध्यक्षों के चयन प्रक्रिया को फर्जी करार देते हुए प्रदेश व राष्ट्रीय संगठन तक शिकायतें की। जिसके बाद भिलाई व दुर्ग जिलाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को टाल दिया गया। लगभग डेढ़ साल से भिलाई और दुर्ग जिला संगठन अपने कार्यकाल खत्म कर चुके अध्यक्षों के नेतृत्व में ही सांगठनिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।
    अब जब 15 दिसंबर तक नये जिलाध्यक्षों की घोषणा हो जाने की चर्चा है तो भाजपा की स्थानीय गुटबाजी को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि आम सहमति बनाना राजधानी के बड़े नेताओं के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

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