January 08, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

 खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उनका उत्साहवर्धन किया

दुर्ग / शौर्यपथ / वॉलीबॉल एसोसिएशन, एस.सी. एवं सी.ए., भिलाई इस्पात संयंत्र के संयुक्त तत्वावधान में स्वर्गीय बीरा सिंह की स्मृति 20वीं सीनियर छत्तीसगढ़ राज्य अंतर-जिला वॉलीबॉल चौंपियनशिप का आयोजन वॉलीबॉल कॉम्पलेक्स पंत स्टेडियम, सेक्टर-1 भिलाई में किया गया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस चार दिवसीय प्रतियोगिता का शुभारंभ 25 दिसंबर को हुआ, जिसमें प्रदेशभर से पुरुष एवं महिला वर्ग की कुल 48 टीमें भाग ले रही हैं। प्रतियोगिता में महिला वर्ग की 17 तथा पुरुष वर्ग की 31 टीमें शामिल हैं।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि दुर्ग की पावन धरा पर आयोजित यह प्रतियोगिता खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी मेहनत और प्रतिभा के बल पर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उनका उत्साहवर्धन किया।
इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 8 खिलाड़ियों को सम्मानित किया, जिनमें महेन्द्र ध्रुव, अब्दुल्ला, पीहू यादव, दीपेश सिन्हा, कोमल मौर्या, संतोष कुमार, रेखा पदम और विनोद नायर शामिल हैं। वहीं वॉलीबॉल खेल में विशेष योगदान देने वाले 6 वरिष्ठजनों कौशल प्रसाद नायक, एस.एन. नेमा, टीकम दास अंडानी, शंकर लाल यादव, नईमुद्दीप हन्फी एवं राजेश्वर सिंहकृको भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट वॉलीबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री महेश गागड़ा, उपाध्यक्ष अकरम खान, सचिव श्री हेम प्रकाश नायक, एसोसिएट सचिव श्री विनोद नायर सहित अनेक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

  दुर्ग / शौर्यपथ /

भिलाई के जयंती स्टेडियम मैदान में चल रही हनुमंत कथा में मंगलवार का दिन आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। बागेश्वर धाम के आचार्य पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा आहूत दिव्य दरबार में सैकड़ों फरियादी अपने कष्टों के निवारण हेतु पहुंचे, जहाँ कथा वाचक ने परंपरागत पर्ची विधि से उनकी समस्याओं को लिखित रूप में बताया और समाधान सुझाया।
सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा और दोपहर तक कथा स्थल खचाखच भर गया। लाखों भक्त मैदान में बैठकर दिव्य दरबार एवं कथा का रसपान करते रहे।

फरियादियों की भीड़, कष्ट निवारण का सिलसिला

दूर-दूर से आये श्रद्धालुओं ने अपनी अर्जी लगाई। प्रेतबाधा, मानसिक व्याधियाँ, अंधविश्वासजन्‍य पीड़ा सहित विविध समस्याओं से ग्रसित लोगों का पंडित शास्त्री ने साधना के माध्यम से निवारण बताया। धमधा क्षेत्र के एक किसान को बेटी के विवाह हेतु हनुमंत कथा संयोजक राकेश पाण्डेय सहित भक्तों द्वारा बड़ी आर्थिक सहयोग राशि भी प्रदान की गई।

धार्मिक महात्माओं की उपस्थिति

कथा के तीसरे दिन अयोध्या हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास तथा बद्रीनाथ धाम के महंत, यज्ञ सम्राट बालक दास भी कथा स्थल पहुँचे और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।

सीएम, विधानसभा अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री हुए उपस्थित

हनुमंत कथा के दर्शन हेतु प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय के साथ पहुँचे। व्यासपीठ पर उन्होंने महाआरती में भाग लिया और पंडित धीरेंद्र शास्त्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पाण्डेय, दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, पूर्व विधायक अरुण वोरा, हनुमंत कथा संयोजक राकेश पाण्डेय, रजक बोर्ड अध्यक्ष प्रहलाद रजक, जिलाध्यक्ष द्वय पुरुषोत्तम देवांगनसुरेंद्र कौशिक सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

नेताओं के वक्तव्य

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा—
“छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम की ननिहाल है। ऐसे पवित्र प्रदेश में पंडित धीरेंद्र शास्त्री जैसे संत सनातन धर्म का ध्वज उठाकर समाज को एकजुट करने का जो संकल्प लिए हैं, उसमें प्रत्येक सनातनी को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।”
उन्होंने आयोजन के लिए सेवा समर्पण समिति व संयोजक राकेश पाण्डेय को बधाई दी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा—
“पंडित धीरेंद्र शास्त्री का प्रत्येक शब्द मानव जीवन को दिशा देने वाला है। वह केवल कथा वाचक ही नहीं, बल्कि सनातन धर्म के प्रखर प्रचारक हैं। उनके मार्गदर्शन में समाज का कल्याण सुनिश्चित है।”

सांध्यकालीन कथा में हनुमान चालीसा का दिव्य पाठ

दिव्य दरबार के पश्चात शाम 5 बजे से देर रात तक पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमान चालीसा की चौपाइयों का दिव्य पाठ कर प्रत्येक पंक्ति का महत्व समझाया। हजारों श्रद्धालु भक्ति के उल्लास में झूमते रहे और “जय हनुमान” के घोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।

शहीद गैंद सिंह नायक ने किया स्वाधीनता आंदोलन का सर्वप्रथम शंखनाद
हल्बा-हल्बी समाज के शक्ति दिवस पर्व में शामिल हुए मुख्यमंत्री
समाज के नवनिर्मित कार्यालय भवन के लोकार्पण सहित कई घोषणाएं

रायपुर / शौर्यपथ / स्वाधीनता आंदोलन के साथ-साथ राष्ट्र व समाज के नवनिर्माण में आदिवासी नायकों एवं महापुरूषों का अद्वितीय योगदान है। हल्बा, हल्बी एवं आदिवासी समाज सहित संपूर्ण भारतवर्ष के गौरव शहीद गैंद सिंह नायक ने हमारे देश में आजादी का आंदोलन का सर्वप्रथम शंखनाद किया था। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज जिला मुख्यालय दुर्ग के गोकुल नगर स्थित हल्बा शक्ति स्थल में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी समाज द्वारा आयोजित 35वां मिलन समारोह एवं शक्ति दिवस पर्व को सम्बोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर हल्बा-हल्बी समाज के नवनिर्मित कार्यालय का लोकार्पण भी किया। श्री साय ने शक्ति स्थल में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हल्बा समाज के युवा-युवतियों को आवासीय कोचिंग सुविधा प्रदान करने हेतु 50 लाख रूपए तथा पुलगांव दुर्ग स्थित कंवर समाज के सामाजिक भवन में बाउण्ड्रीवॉल निर्माण हेतु 25 लाख रूपए की स्वीकृत किए जाने की घोषणा भी की। इस अवसर पर उन्होंने हल्बा-हल्बी समाज के सामाजिक पत्रिका ’समाज’ का भी विमोचन किया।
मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य सहित पूरे देश में आजादी के आंदोलन का सूत्रपात सर्वप्रथम जनजातीय समाज के नायको ने किया था। शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गैंद सिंह नायक सहित जनजाति नायकों एवं देशभक्तों ने अंग्रेजों के खिलाफ कुल 14 क्रांतियों का शंखनाद किया था। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी ने जनजाति वर्ग के उत्थान एवं विकास के लिए सर्वप्रथम केन्द्रीय जनजाति कार्यालय मंत्रालय का गठन भी किया गया था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर राजधानी रायपुर में जनजाति समाज के नायकों एवं वीर सपूतों के योगदान तथा अमर गाथाओं को नई पीढ़ी को परिचित कराने साथ-साथ उसके संरक्षण और संवर्धन हेतु विशाल आदिवासी संग्रहालय का निर्माण किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने दो वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी की अधिकांश गारंटियों को प्राथमिकता से पूरा किया है। राज्य की लगभग 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ, तेंदूपत्ता संग्राहकों को 5500 रूपए प्रति मानक बोरा के हिसाब से पारिश्रमिक तथा किसानों को धान का मूल्य 3100 रूपए प्रति क्विंटल दिया जा रहा है। 26 लाख से अधिक परिवारों को प्रधानमंत्री आवास की मंजूरी दी गई है। राज्य में भी नक्सलवाद अपने अंतिम सांस गिन रहा है। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से 400 से अधिक गांवों में विकास के काम तेजी से हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण कर पूरे देश में अग्रणी राज्य बनाने हेतु निरंतर कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम को सांसद विजय बघेल और पूर्व मंत्री श्री महेश गागड़ा, हल्बा-हल्बी समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री खलेन्द्र ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रदेश राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष ललित चन्द्राकर, अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।

durg  / shouryapath / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जयंती स्टेडियम मैदान भिलाई में आयोजित 5 दिवसीय दिव्य श्री हनुमंत कथा समारोह में आज सपत्निक सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हम सभी के लिए बड़े सौभाग्य की बात है। पंडित श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री महाराज जी का आशीर्वाद छत्तीसगढ़ को हमेशा मिलता रहा है। उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम ने अपने वनवासकाल का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में बिताए है। छत्तीसगढ़ माता शबरी का भी यह जगह है। इस दौरान उन्होंने भक्त माता ने जूठे भोजन को खिलाई थी।

मुख्यमंत्री ने श्रीराम लला अयोध्या धाम योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 38 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के दर्शन करा चुके हैं और लगातार भक्तों को दर्शन करा रहे हैं। मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा दर्शन योजना का जिक्र करते हुए कहा कि विगत 5 वर्षों से बंद यह योजना पुनः प्रारम्भ की गई। अभी तक 5000 बुजुर्ग लाभान्वित हो चुके है। इस योजना के अंतर्गत राज्य के वृद्ध श्रद्धालुओं को देश के 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन कराए जा रहे है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना शुरू कर एक हजार रूपए प्रतिमाह दिया जा रहा है। इस योजना से लगभग 70 लाख महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि सारंगढ जिले के ग्राम दानसरा की महिलाओं ने महतारी वंदन योजना की राशि का चंदा करके प्रभु श्री राम मंदिर का निर्माण कर रही हैं।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी ने अखंड भारत की जो कल्पना की है, वह एक दिन जरूर पूरा होगा। देश-दुनिया में जागृति का यह समय आ चुका है और आप सब जिस भाव के साथ शामिल हुए हैं, उससे ऐसा लगता है कि भारत को विश्व गुरू बनाने का समय आ चुका है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सपत्निक आरती में शामिल हुए और उन्होंने प्रदेश की सुख- समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दिव्य श्री हनुमंत कथा का आयोजन 25 दिसम्बर से 29 दिसम्बर 2025 तक सेवा समर्पण समिति द्वारा किया जा रहा है।

इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग अन्य विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, विधायक श्री ललित चंद्राकर, छत्तीसगढ़ खादी बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश पाण्डेय, पूर्व सांसद सुश्री सरोज पाण्डे, पूर्व विधायक श्री लाभचंद बाफना, श्री अरूण वोरा एवं आयोजन समिति के पदाधिकारी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, नगर के गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुशाभाऊ ठाकरे जी की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रख्यात राजनेता कुशाभाऊ ठाकरे जी की पुण्यतिथि (28 दिसम्बर) पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा को समर्पित रहा। वे सत्ता के माध्यम से नहीं, बल्कि मूल्य और संस्कार के माध्यम से राजनीति में सकारात्मक परिवर्तन लाने के पक्षधर थे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे जी की सादगी, अनुशासन, निष्ठा और आत्मीयता उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। उन्होंने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने और जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ से कुशाभाऊ ठाकरे जी का विशेष संबंध रहा है। उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि राजनीति का मूल उद्देश्य सेवा, राष्ट्रहित और समाज कल्याण होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे जी की पावन स्मृतियाँ हम सभी को राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित भाव से कार्य करने की निरंतर प्रेरणा देती रहती है।

शौर्यपथ धर्म विशेष
क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया की सबसे मंहगी ज़मीन मात्र 4 वर्ग मीटर की हो सकती है? यह कोई साधारण जगह नहीं, बल्कि पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद में स्थित वह पावन भूमि है, जहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के छोटे साहिबजादों—साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी का अंतिम संस्कार हुआ था। यह ज़मीन न केवल सोने की मोहरों से सजी, बल्कि सिख इतिहास की अमर गाथा का प्रतीक है।
आइए, इस रहस्यमयी घटना को वाहेगुरु की कृपा से समझें, जो हर भक्त के मन में श्रद्धा जगाएगी।

सेठ टोडर मल जी की अपार भक्ति: सोने की वर्षा से खरीदी पावन भूमि  -जब मुगल क्रूरता के चरम पर थी, तब सेठ दीवान टोडर मल जी, जो मुगल दरबार के प्रभावशाली व्यक्ति थे, ने इस छोटी सी ज़मीन को खरीदने का संकल्प लिया। सरहिंद के तत्कालीन मुस्लिम शासक वज़ीर खान ने इसकी कीमत मांगी—78,000 सोने की मोहरें! सेठ जी ने न केवल मोहरे चढ़ाए, बल्कि पूरी ज़मीन पर सोने की चादर बिछा दी। आज की कीमत से आंका जाए तो यह लगभग 25 अरब रुपये (या उससे अधिक, मुद्रास्फीति अनुसार) के बराबर है! यह दुनिया का सबसे महंगा ज़मीन अधिग्रहण है, जो सिख धर्म के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
वाहेगुरु की महिमा देखिए—यह ज़मीन आज गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब के रूप में भक्तों का तीर्थस्थल है, जहां हर अरदास में छोटे साहिबजादों की शहादत की याद ताज़ा होती है। सेठ टोडर मल जी की यह भक्ति हमें सिखाती है कि सच्चा वैभव धन में नहीं, गुरु महाराज के चरणों में समर्पण में है।


चमकौर का चमत्कार: 42 शूरवीरों ने हिला दी 10 लाख की विशाल फ़ौज!
अब सुनिए वह युद्ध, जो मानव इतिहास की सबसे प्रेरणादायी गाथा है—चमकौर का युद्ध (6 दिसंबर 1704)! मुगल सेनापति वज़ीर खान की 10 लाख सैनिकों वाली विशाल फ़ौज का मुकाबला किया महज 42 सिख शूरवीरों ने, जिनकी अगुवाई श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने की। क्या आप विश्वास कर सकते हैं? वाहेगुरु के बल से उन 42 वीरों ने मुगलों को धूल चटा दी!यह युद्ध मुगल साम्राज्य की नींव हिला गया।
गुरु महाराज ने स्वयं कहा:
"ਰਚੁ ਪਾਖੁਰਾਂ ਜੋ ਬਜ ਰਚੁ ਖਗਾਂ ਤੀਰ ਭਵਾਨੀ ਰਚੁ ਖੰਡਾ ਮੇਰੈ ਨਾਮੁ ਖਿਲਾਵਣਿ ਰਚੁ ਬੇੜ ਜਲ੍ਹੀ ਬੇੜ ਬੇੜ ਬੇੜ ਜਲਾਵਣਿ।"
(हिंदी अनुवाद: चीलों के पंख तैयार करो, बाज़ों के लिए तीर बनाओ, मेरे नाम की खंजर तैयार करो, नौकाओं को जलाने के लिए आग तैयार करो।)और वह अमर उद्घोषणा:
"ਚਿੜੀਆਂ ਤੋਂ ਬਾਜ਼ ਲੜਾਵਾਂ ਗੀਦੜਾਂ ਕਰੂੰ ਸ਼ੇਰ ਬਨਾਵਾਂ, ਸਵਾ ਲੱਖ ਸੇ ਏਕ ਲੜਾਵਾਂ ਤਬ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਨਾਮ ਕਹਾਵਾਂ!"
(हिंदी अनुवाद: चिड़ियों से बाज़ लड़ाऊंगा, गीदड़ों को शेर बनाऊंगा, सवा लाख से एक लड़ाऊंगा तब गोबिंद सिंह नाम कहाऊंगा!)
इस चमत्कार ने औरंगज़ेब को भी गुरु महाराज के समक्ष सिर झुकाने पर मजबूर कर दिया। मुगल हुकूमत का अंत यहीं से प्रारंभ हुआ, और भारत को स्वतंत्रता की प्रेरणा मिली। वाहेगुरु की कृपा से साधारण मनुष्य शेर बन जाते हैं!


एक सिख परिवार की त्याग गाथा: वंश का लोप, गुरु के चरणों में समर्पण - कुछ समय बाद, यह पावन ज़मीन एक सिख परिवार ने खरीदी। जब उन्हें इसका महात्म्य पता चला—कि यहीं छोटे साहिबजादों की शहादत हुई—तो उन्होंने इसे गुरुद्वारा साहिब के लिए दान करने का निश्चय किया। अरदास के समय जब पूछा गया कि गुरु जी से क्या विनती करें, तो उस भक्त ने कहा: "हे गुरु जी, मेरे घर कोई औलाद न हो, ताकि कोई न कहे कि यह ज़मीन मेरे बाप-दादा ने दी।"वाहेगुरु ने उनकी अरदास स्वीकार की—उस परिवार में कोई संतान नहीं हुई। आज हम 50-100 रुपये दान कर स्वार्थी कामनाएं करते हैं, लेकिन यह भक्त ने वंश त्याग कर दिया! वाहेगुरु... वाहेगुरु!
यह是我们 भारतीय विरासत का अनमोल रत्न है।सत्य जानने को गूगल करें: 'Battle of Chamkaur' या 'Fatehgarh Sahib History'।
यदि यह गाथा आपके हृदय को छू गई, तो भारतीय गौरव से भरा यह संदेश शेयर करें। हर शेयर से इतिहास जागेगा, भक्ति बढ़ेगी। वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह!

रातभर खुले पंडाल में ज़मीन पर बैठे श्रद्धालु बनाम खाली VIP-VVIP पंडाल—चित्र खुद बता रहे हैं श्रद्धा, समर्पण और अनुयायित्व की सच्ची परिभाषा

SHOURYAPATH NEWS 

श्रद्धा की असली परीक्षा : बागेश्वर धाम की कथा और उसके सच्चे श्रोता
बागेश्वर धाम महाराज पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और तपस्या की जीवंत परीक्षा है। आपके द्वारा भेजे गए तीनों चित्र किसी भी प्रचार, मंच या भाषण से अधिक स्पष्टता के साथ यह प्रश्न खड़ा करते हैं कि “कथा के असली अधिकारी और सच्चे भक्त आखिर हैं कौन?”

पहला चित्र : ठंड में जागती श्रद्धा
पहला चित्र उस खुले पंडाल का है, जहाँ कथा समाप्त होने के बाद भी आम श्रद्धालु अपने परिवार, बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ रातभर ठंड में बैठे हैं। उनके पास न कोई वीआईपी पास है, न आरामदायक कुर्सियाँ, न ही सुरक्षा का घेरा। जमीन पर बिछी चादरें, ओढ़े हुए कंबल और आँखों में अगली कथा के इंतजार की चमक—यही वह दृश्य है जहाँ श्रद्धा सांस लेती दिखाई देती है।

इन लोगों के लिए कथा समय की सुविधा नहीं, बल्कि जीवन का संबल है। अगली कथा दोपहर 2 बजे है, फिर भी वे रात यहीं गुजारते हैं, क्योंकि उनके लिए कथा “पास” से नहीं, “प्रेम” से मिलती है।

दूसरा चित्र : सुविधा के बाद सन्नाटा
दूसरा चित्र वीआईपी कैटेगरी के पंडाल का है। कथा समाप्त होते ही यहाँ सन्नाटा है—सजी-संवरी कुर्सियाँ खाली पड़ी हैं। यह वह वर्ग है, जो सुविधा के साथ आता है और सुविधा के साथ ही चला जाता है। अगली कथा के लिए अब फिर से पास और व्यवस्था की तैयारी होगी।
यहाँ श्रद्धा है, इसमें संदेह नहीं—लेकिन यह श्रद्धा समयबद्ध है, आराम-आधारित है। कथा यहाँ साधना नहीं, एक कार्यक्रम बनकर रह जाती है।

तीसरा चित्र : पहुंच की श्रद्धा
तीसरा चित्र वीवीआईपी कैटेगरी का है—लाल कालीन, आरामदायक सोफे और अलग व्यवस्था। यह वे लोग हैं जो अपनी सामाजिक, राजनीतिक या प्रशासनिक पहुंच के सहारे समय पर आएंगे, कथा सुनेंगे और सम्मान के साथ लौट जाएंगे।
यह श्रद्धा भी है, पर यह संघर्ष से मुक्त है। यहाँ कथा प्रतीक्षा नहीं मांगती, त्याग नहीं मांगती—बस उपस्थिति पर्याप्त है।

सच्ची श्रद्धा किसकी?
तीनों चित्रों को गहराई से देखने पर एक बात स्पष्ट होती है—
सच्ची श्रद्धा वही है जो असुविधा में भी डगमगाए नहीं।
जो ठंड, थकान और इंतजार के बावजूद कथा के लिए वहीं ठहरा रहे।
जो जमीन पर बैठकर भी उतनी ही भक्ति से कथा सुने, जितनी कोई सोफे पर बैठकर सुनता है।
बागेश्वर धाम महाराज की कथा जिन मूल्यों—धैर्य, विश्वास, तप और समर्पण—की शिक्षा देती है, उनका वास्तविक प्रतिबिंब पहले चित्र में बैठे आम श्रद्धालुओं में दिखाई देता है। वही असली अनुयायी हैं, वही कथा के असली अधिकारी हैं, क्योंकि उनकी श्रद्धा किसी पास, पद या पहचान की मोहताज नहीं है।

कथा मंच पर सुनाई जाती है, लेकिन उसकी असली परीक्षा पंडाल में होती है।जहाँ कोई देख नहीं रहा, कोई पहचान नहीं रहा—वहीं श्रद्धा सबसे शुद्ध रूप में प्रकट होती है। बागेश्वर धाम के असली भक्त वही हैं, जो रातभर ठंड में जागकर अगली कथा का इंतजार करते हैं—क्योंकि उनके लिए कथा एक आयोजन नहीं, आस्था का उत्सव है।

उपभोक्ता 2.94 लाख बढ़े, अधिकतम मांग में 1,605 मेगावाट उछाल

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज ने विगत दो वर्षों में विद्युत अधोसंरचना के विस्तार में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। इस दौरान 5 अति उच्चदाब और 28,715 निम्नदाब उपकेंद्र स्थापित हुए। कुल 34,239 सर्किट किलोमीटर लाइनें बिछाई गईं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर तेजी से पूरा हुआ यह कार्य प्रदेश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्रदान कर रहा है। प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या 2,94,318 बढ़कर 65,35,373 हो गई। विद्युतीकृत पंपों की संख्या 3,04,786 बढ़कर 8,39,992 पहुंची। अधिकतम मांग में 1,605 मेगावाट की वृद्धि दर्ज की गई।

**उपकेंद्र क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि:**
- 400 केवी उपकेंद्र: 3 से 5, क्षमता 3,150 से 4,410 एमवीए
- 220 केवी उपकेंद्र: 26 से 27, क्षमता 10,160 से 11,280 एमवीए
- 132 केवी उपकेंद्र: 102 से 105, क्षमता 10,917 से 12,130 एमवीए
- 33 केवी उपकेंद्र: 1,352 से 1,474, क्षमता 9,075 से 10,295 एमवीए
- 11 केवी उपकेंद्र: 2,23,131 से 2,51,724, क्षमता 12,507 से 14,595 एमवीए

मुंगेली जिले के धरदेही में 400 केवी का 5वां उपकेंद्र चालू किया गया। कंपनी के अध्यक्ष (ट्रांसमिशन) सुबोध कुमार सिंह, अध्यक्ष (डिस्ट्रिब्यूशन) डॉ. रोहित यादव तथा प्रबंध निदेशक आर.के. शुक्ला और भीमसिंह कंवर के नेतृत्व में यह उपलब्धि संभव हुई।

श्रीरामजी के बिना हनुमानजी अधूरे, चौपाई वार महत्व बताया पंडित धीरेंद्र शास्त्रीजी ने... आज दोपहर 1 बजे लगेगा दिव्य दरबार

भिलाई / शौर्यपथ / औद्योगिक नगरी भिलाई में सेवा समर्पण संस्था के संयोजक राकेश पाण्डेयजी के नेतृत्व में चल रही **दिव्य हनुमंत कथा** के द्वितीय दिवस पंडित धीरेंद्र शास्त्रीजी (बागेश्वर धाम) ने हनुमान चालीसा के षष्ठ चौपाई **"हाथ बज्र व ध्वजा विराजे"** का दिव्य भाष्य करते हुए कहा—जैसे बांग्लादेश में निर्दोष हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं, वैसे ही आज के काल में सनातन धर्म की रक्षा एवं हिंदू भक्तों की सुरक्षा हेतु **ध्वज, माला एवं भाला** तीनों सदा धारण करना अत्यावश्यक है। हे भक्तगण! अधर्म के विरुद्ध यह त्रिशूल हनुमानजी का प्रतीक है।
कथा स्थल पर भक्तों की भारी वर्षा हुई। दुर्ग-भिलाई, रायपुर, राजनांदगांव सहित छत्तीसगढ़ एवं अन्य प्रांतों से सैकड़ों भक्तगण पधारे। इनमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव सायजी की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय , भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पाण्डेय , सांसद विजय बघेल एवं धर्मपत्नी श्रीमती रजनी बघेल , अहिवारा विधायक डोमन लाल कोसेवाड़ा, प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष सुष्री विभा अवस्थी, दुर्ग-महापौर श्रीमती अल्का बाघमार, जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती बंजारे, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव की माता पुष्पा देवी यादव, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर, सांवला राम डाहरे, बस्तर राजा कमल सिंह भंजदेव सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने कथा श्रवण कर पंडित शास्त्रीजी के चरणों में आशीर्वाद ग्रहण किया।

हनुमान चालीसा का दसवां भाग: श्रीराम भक्ति का सार
पंडित धीरेंद्र शास्त्रीजी ने हनुमान चालीसा के दसवें भाग तक के प्रत्येक चौपाई का निहितार्थ प्रकट करते हुए कहा—**"श्रीरामजी के बिना हनुमानजी अधूरे हैं, हनुमानजी के बिना श्रीरामजी अधूरे!"** यह भक्ति का परम सत्य है। गोस्वामी तुलसीदासजी ने चालीसा में लिखा प्रत्येक शब्द भक्त-भगवान की महिमा ही नहीं, मानव जीवन का सार है। बुरी शक्तियों एवं अधर्मियों के विरुद्ध हनुमान चालीसा **वज्र बाण** है। इसे आचरण में आत्मसात कर धर्ममार्ग पर चलो, तो कल्याण निश्चित। श्रीराम-हनुमान भक्ति के पावन भजनों में समस्त भक्तगण झूम उठे।

आज का दिव्य कार्यक्रम:
शनिवार को तृतीय दिवस दोपहर 1 से 3 बजे तक दिव्य दरबार —पर्ची के माध्यम से दुख-समस्याओं का निवारण। तत्पश्चात 3 से 6 बजे तक पुनः कथा वाचन । हे भक्तो! आइये, हनुमानजी की कृपा पाइये। जय बजरंगबली!

    दुर्ग / शौर्यपथ / राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में सुव्यवस्थित धान खरीदी की नीति से किसानों के जीवन में खुशहाली आयी है। समर्थन मूल्य पर धान की बिक्री और समय पर राशि भुगतान होने पर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। बैंक के पुराने ऋण चुकता करने के बाद बची राशि परिवार की मॉली हालत सुधारने में सहायक रही है। इन्हीं में से ग्राम कातरों के उन्नत लघु कृषक श्री सदाराम भी है, जिन्होंने अपने 4.28 एकड़ की कृषि भूमि पर धान की खेती कर अपने उपज को आसानी से समर्थन मूल्य में बेचने में कामयाबी हासिल की है। सदाराम ने बताया कि सरकार द्वारा इस वर्ष धान खरीदी के लिए तुंहर टोकन एप से उन्हें टोकन प्राप्ति में कोई परेशानी नहीं हुई। पहली बार उन्होंने उपार्जन केन्द्र में 167 कट्टा धान की बिक्री और दूसरी बार 67 कट्टा धान की बिक्री की। अब वह अपने द्वारा उपार्जित धान बेच चुके हैं। धान बिक्री के पश्चात् भुगतान भी उन्हें एक सप्ताह के भीतर प्राप्त हो चुका हैं। प्राप्त राशि से उन्होंने 70 हजार रूपए की बैंक ऋण चुकता किया है, शेष राशि का उपयोग वह रबी फसल की तैयारी और पारिवारिक खर्च में व्यय करने की बातें कहीं। वे कहते हैं कि धान खरीदी की व्यवस्था पहले से कही बेहतर है ऑनलाईन टोकन की व्यवस्था से किसानों को बहुत सुविधा दी गई है। घर बैठे टोकन मिलने से समिति में टोकन के लिए लाइन लगाने की नौबत नहीं है, साथ ही समय की बचत भी हुई है।
श्री सदाराम का कहना है कि 3100 रूपए प्रति क्विंटल दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदने की व्यवस्था किसानों की आर्थिक स्तर को मजबूती प्रदान की है। सरकार की इस पहल के लिए सदाराम मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को दिल से धन्यवाद ज्ञापित किया है। सदाराम जैसे अनेकों कृषक है जिन्‍होंने तुंहर टोकन एप के माध्यम से सुगमतापूर्वक उपार्जन केन्द्रों में अपना उपज को बेचने सफल हुए हैं।

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