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अम्बेडकर चौक से रूद्री चौक तक फोरलेन, गौरवपथ और पेयजल इंटेकवेल निर्माण की बड़ी घोषणाएं
सुशासन तिहार बना जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण और संवेदनशील प्रशासन का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री
धमतरी / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज धमतरी में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने जिलेवासियों को 465 करोड़ रुपये की लागत के 102 विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री साय ने 423 करोड़ 52 लाख 56 हजार रुपये लागत के 52 कार्यों का भूमिपूजन तथा 41 करोड़ 50 लाख 48 हजार रुपये से अधिक लागत के 50 कार्यों का लोकार्पण किया। इन विकास कार्यों के माध्यम से जिले में सड़क, पेयजल, नगरीय अधोसंरचना और जनसुविधाओं का विस्तार होगा तथा आमजन को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और त्वरित समाधान की कार्यसंस्कृति के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि 1 मई से 10 जून तक आयोजित सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव में क्लस्टरवार शिविर लगाकर आम नागरिकों की समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जा रहा है। राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाया गया है, जिससे हजारों लोगों को राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीब परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार अंत्योदय की भावना के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रशासनिक पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रारंभ की जाएगी, जिसके माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और समय-सीमा में उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना एवं बिजली बिल भुगतान समाधान योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार जरूरतमंद परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील भी की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर संभाग में सुशासन तिहार के साथ “बस्तर मुन्ने” और “नियद नेल्लानार 2.0” अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं, जिनसे दूरस्थ क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। उन्होंने “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं तथा जरूरतमंदों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में जनसहभागिता का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने आयुष्मान कार्ड एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को चाबी सौंपकर लाभान्वित किया। मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर “ड्रीम कॉरिडोर” वीडियो एवं “मां अभियान” की कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर जिला प्रशासन धमतरी एवं लर्निंग जॉय बेंगलुरु के मध्य एमओयू किया गया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धमतरीवासियों को कई महत्वपूर्ण सौगातें दीं। उन्होंने अम्बेडकर चौक धमतरी से रूद्री चौक तक फोरलेन सड़क निर्माण, धमतरी में पेयजल हेतु इंटेकवेल निर्माण, रानी दुर्गावती चौक से बिलाईमाता मंदिर तक गौरवपथ निर्माण, कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुरूद भवन के लिए डेढ़ करोड़ रुपये तथा पीएमश्री स्वामी आत्मानंद स्कूल के लिए राशि स्वीकृत करने की घोषणा की।
कार्यक्रम में सांसद महासमुंद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायक कुरूद अजय चन्द्राकर, विधायक धमतरी ओंकार साहू, महापौर रामू रोहरा, छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष नेहरू निषाद, रायपुर संभाग के कमिश्नर श्याम धावड़े, पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
अहमदाबाद । केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान (एनआईडी) में नवाचार एवं उद्यम संवर्धन केंद्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल तथा कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में श्री अमित शाह ने कहा कि डिज़ाइन केवल एक विधा नहीं, बल्कि रचनात्मकता, कला और प्रस्तुति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि एनआईडी का उद्देश्य देश में डिज़ाइन संस्कृति को बढ़ावा देना तथा इसकी व्यावसायिक संभावनाओं को शत-प्रतिशत विकसित करना है।
गृह मंत्री ने कहा कि भारत में डिज़ाइन की परंपरा सदियों पुरानी है, आवश्यकता केवल उसे पहचानने और नए स्वरूप में विकसित करने की है। उन्होंने पाटन के प्रसिद्ध पटोला शिल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय कला और डिज़ाइन में वैज्ञानिक सोच और बारीकी पहले से मौजूद है।
श्री शाह ने कहा कि अब एनआईडी को अर्धचालक चिप, उच्च तकनीकी डिज़ाइन और आधुनिक औद्योगिक परियोजनाओं जैसे क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा कि नवाचार एवं उद्यम संवर्धन केंद्र युवाओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा को करियर में बदलने का सशक्त मंच प्रदान करेगा।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि डिज़ाइन से जुड़े युवाओं को केवल रचनात्मकता ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक समझ और बाज़ार से जोड़ने की दिशा में भी काम करना होगा, ताकि देश में डिज़ाइन क्षेत्र की पूरी क्षमता का लाभ मिल सके।
गृह मंत्री ने कहा कि संगीत, कला, लेखन या डिज़ाइन— किसी भी प्रतिभा को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए उसे पेशे के रूप में अपनाना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि एनआईडी आने वाले समय में भारत को वैश्विक डिज़ाइन और नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।
हेग/नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति में एक नए अध्याय के रूप में उभरी है। हेग स्थित डच प्रधानमंत्री आवास कैटश्यूस में प्रधानमंत्री मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री महामहिम श्री रोब जेटेन के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” (Strategic Partnership) के स्तर तक पहुंचाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
यह केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, जल प्रबंधन और हरित ऊर्जा में साझा नेतृत्व की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।
दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), शिक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक व्यापक “सामरिक साझेदारी रोडमैप” पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की तीव्र विकास यात्रा डच कंपनियों और निवेशकों के लिए अपार अवसर लेकर आई है, जबकि प्रधानमंत्री जेटेन ने भारत को यूरोप का विश्वसनीय और भविष्य-केंद्रित साझेदार बताया।
वार्ता के दौरान दोनों देशों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) को वैश्विक व्यापार के लिए “परिवर्तनकारी कदम” बताते हुए जल्द हस्ताक्षर और क्रियान्वयन का समर्थन किया।
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह समझौता भारत और यूरोप के आर्थिक संबंधों को नई गति देगा।
दोनों नेताओं ने जल प्रबंधन, कृषि और स्वास्थ्य (WAH) को सहयोग का प्रमुख आधार बताते हुए बड़े पैमाने की जल परियोजनाओं पर संयुक्त कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।
इसके साथ ही डिजिटल हेल्थ, स्वास्थ्य अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा और आधुनिक कृषि तकनीकों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
भविष्य की तकनीकों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने AI, सेमीकंडक्टर और उभरती डिजिटल तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने का फैसला किया।
युवाओं के बीच तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए संयुक्त हैकाथॉन आयोजित करने पर भी सहमति बनी।
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री जेटेन ने हरित हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, ग्रीन शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स में सहयोग को भविष्य की आवश्यकता बताया।
दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए साझा प्रयास तेज करने का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने 11वीं शताब्दी की चोलकालीन ताम्रपत्रों की वापसी में सहयोग के लिए डच सरकार का विशेष आभार व्यक्त किया।
साथ ही लीडेन विश्वविद्यालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के बीच हुए सहयोग को ऐतिहासिक विरासत संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
आधिकारिक वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, व्यापार, मोबिलिटी, शिक्षा और संस्कृति समेत विभिन्न क्षेत्रों में कुल 14 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए।
नालंदा विश्वविद्यालय और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के बीच हुए समझौते को शिक्षा और अकादमिक सहयोग की नई शुरुआत माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डच प्रधानमंत्री रोब जेटेन को भारत यात्रा का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा स्पष्ट संकेत देती है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि तकनीक, अर्थव्यवस्था और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का एक निर्णायक केंद्र बनकर उभर रहा है।
दुर्ग, ।
न्यू आदर्श नगर, जोन-3 मार्ग क्रमांक 8 में शुक्रवार को वट सावित्री व्रत श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। क्षेत्र की बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं ने वट (बरगद) वृक्ष की पूजा-अर्चना कर अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण और भारतीय संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में विधि-विधान से पूजा संपन्न की तथा वट वृक्ष पर जल अर्पित कर रोली, अक्षत, फल एवं पूजा सामग्री चढ़ाई।
पूजन के पश्चात महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसके तने पर कच्चा सूत लपेटा। यह परंपरा पति-पत्नी के अटूट रिश्ते, विश्वास और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।
पूरे कार्यक्रम में श्रद्धा और भक्ति का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
व्रत के दौरान महिलाओं ने माता सावित्री एवं सत्यवान की कथा का श्रवण और वाचन किया। कथा में माता सावित्री के अदम्य साहस, तप और अपने पति के प्रति अटूट प्रेम का उल्लेख किया गया, जिन्होंने यमराज से भी अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार वट सावित्री व्रत वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि, सौभाग्य और परिवार की खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
इस अवसर पर सरिता ठाकुर, स्वेता बक्शी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं। पूरे क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना रहा तथा महिलाओं ने एक-दूसरे को व्रत की शुभकामनाएं भी दीं।
राजनांदगांव।
आगामी नगर पंचायत चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक तैयारियों को तेज करते हुए घुमका नगर पंचायत के लिए 15 पार्षद प्रत्याशियों की अधिकृत सूची जारी कर दी है।
यह सूची भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री किरण सिंह देव, संगठन महामंत्री पवन साय तथा जिला भाजपा अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत की सहमति से चुनाव संचालन समिति द्वारा घोषित की गई।
भाजपा जिला मीडिया सेल के अनुसार प्रत्याशियों के चयन में संगठन ने कार्यकर्ताओं की सक्रियता, जनाधार, सामाजिक समीकरण और स्थानीय स्वीकार्यता को प्रमुख आधार बनाया है।
जिला भाजपा अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत एवं चुनाव संयोजक मधुसूदन यादव ने कहा कि सभी घोषित प्रत्याशी पार्टी के समर्पित और सक्रिय कार्यकर्ता हैं, जो जनता के बीच मजबूत पकड़ रखते हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा सभी 15 वार्डों में जीत दर्ज कर घुमका नगर पंचायत में “ट्रिपल इंजन सरकार” बनाएगी और विकास की नई गाथा लिखेगी।
भाजपा की सूची जारी होने के बाद घुमका नगर पंचायत चुनाव में राजनीतिक सरगर्मियां और तेज हो गई हैं।
राजनांदगांव, ।
जिले में अवैध खनन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने एक अनोखी और सराहनीय पहल की है। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देश पर खनिज विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने ऑक्सीजोन क्षेत्र में अवैध रूप से जमा की गई लगभग 54 ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत को पुनः शिवनाथ नदी में डालकर प्राकृतिक संतुलन बहाल करने की कार्रवाई की।
यह कार्रवाई ग्राम पंचायत भंवरमारा के सरपंच, वार्ड क्रमांक 51 हरदी के पार्षद तथा स्थानीय ग्राम प्रमुखों की मौजूदगी में की गई। प्रशासन की इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत संदेश माना जा रहा है।
कुछ दिन पूर्व खनिज एवं राजस्व विभाग ने ऑक्सीजोन स्थित शिवनाथ नदी क्षेत्र में अवैध रूप से भंडारित रेत के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो ट्रैक्टर-ट्रॉली और एक लोडर वाहन जप्त किया था। जांच में सामने आया कि भंवरमारा निवासी अविनाश सोनी द्वारा शिवनाथ नदी से अवैध उत्खनन कर रेत का भंडारण किया गया था।
प्रशासन ने अब उस अवैध रेत को वापस नदी में डालकर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासन के अनुसार ऑक्सीजोन क्षेत्र जिले के महत्वपूर्ण पर्यावरणीय स्थलों में शामिल है। अवैध रेत भंडारण से वहां की प्राकृतिक सुंदरता प्रभावित हो रही थी। रेत को हटाकर क्षेत्र को पुनः सुरक्षित और स्वच्छ बनाने का प्रयास किया गया है।
जिला प्रशासन ने कहा है कि
“प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। अवैध खनन, परिवहन और भंडारण में संलिप्त लोगों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।”
जहां आमतौर पर जप्त रेत को नीलामी या अन्य प्रक्रिया में उपयोग किया जाता है, वहीं राजनांदगांव प्रशासन ने उसे पुनः नदी में डालकर एक अभिनव उदाहरण पेश किया है। इस कदम को पर्यावरण संरक्षण और जनहित के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कभी-कभी कुछ आवाज़ें सिर्फ गीत नहीं गातीं, वे इंसानियत, हौसले और जीवन के सबसे गहरे दर्द को महसूस करा जाती हैं।
असम के तिनसुकिया जिले के रहने वाले 17 वर्षीय युवा गायक ऋषभ दत्ता की आवाज़ भी ऐसी ही थी, जो आज उनके जाने के वर्षों बाद भी लोगों की आंखें नम कर रही है।
इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ऋषभ अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए हाथ में गिटार थामे बेहद शांत और भावुक अंदाज़ में सदाबहार गीत “लग जा गले” और “चन्ना मेरेया” गाते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में उनके चेहरे पर दर्द साफ दिखाई देता है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा दिखाई देता है — संगीत के प्रति उनका जुनून और जिंदगी से आखिरी पल तक लड़ने का साहस।
ऋषभ दत्ता एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी “अप्लास्टिक एनीमिया” (Aplastic Anemia) से पीड़ित थे।
इस बीमारी में शरीर नई रक्त कोशिकाएं बनाना बंद कर देता है, जिससे मरीज की हालत लगातार कमजोर होती चली जाती है।
परिवार ने उन्हें बचाने के लिए हर संभव कोशिश की। बेंगलुरु के एक अस्पताल में उनका महंगा बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी कराया गया। डॉक्टरों और परिवार को उम्मीद थी कि ऋषभ फिर से सामान्य जिंदगी जी पाएंगे, लेकिन लंबी लड़ाई के बाद 8 जुलाई 2020 को यह युवा कलाकार जिंदगी की जंग हार गया।
अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान ऋषभ ने डॉक्टरों और नर्सों के सामने गिटार बजाते हुए जो गीत गाए, वही वीडियो आज फिर इंटरनेट पर लोगों को भावुक कर रहा है।
मौत से कुछ कदम दूर खड़ा एक लड़का… लेकिन चेहरे पर शिकन नहीं, बल्कि मुस्कान…
कमजोर शरीर… लेकिन सुरों में वही आत्मविश्वास…
यही दृश्य लाखों लोगों के दिलों को छू रहा है।
सोशल मीडिया पर लोग उन्हें
“रियल फाइटर”,
“म्यूजिक वॉरियर”
और
“हौसले की मिसाल”
बताकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
ऋषभ अपनी मधुर आवाज और सादगी की वजह से वर्ष 2019 के अंत में ही इंटरनेट पर लोकप्रिय हो चुके थे। उनके गाए गीतों को हजारों लोगों ने पसंद किया था।
लेकिन किसी ने शायद यह नहीं सोचा था कि इतनी छोटी उम्र में यह प्रतिभाशाली गायक दुनिया को अलविदा कह देगा।
ऋषभ दत्ता अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज आज भी सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंच रही है।
उनका वायरल वीडियो सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि जिंदगी के आखिरी पल तक उम्मीद, साहस और मुस्कान बनाए रखने का संदेश बन चुका है।
जब भी कोई “लग जा गले…” की वह धीमी और कांपती हुई आवाज सुनता है, तो एहसास होता है कि कुछ कलाकार शरीर से चले जाते हैं, लेकिन उनकी आत्मा उनकी कला में हमेशा जिंदा रहती है।
क्या 5 जजों की संविधान पीठ को सौंपा जाएगा मामला? केंद्र के हलफनामे पर भी होगी तीखी बहस
नई दिल्ली। देश की चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में अब 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति से जुड़े नए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच — Justice Dipankar Datta और Justice Satish Chandra Sharma — मामले की अगली सुनवाई करेगी।
यह मामला केवल नियुक्ति प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था Election Commission of India की निष्पक्षता, स्वायत्तता और लोकतंत्र की पारदर्शिता से भी सीधे जुड़ा माना जा रहा है।
संविधान पीठ को भेजे जाने पर बड़ा फैसला संभव
14 मई की सुनवाई के दौरान अदालत में तीखी बहस देखने को मिली थी। अब 19 मई को यह तय हो सकता है कि क्या इस मामले को 5 जजों की संविधान पीठ (Constitutional Bench) के पास भेजा जाएगा।
यदि मामला संविधान पीठ को सौंपा जाता है, तो यह आने वाले समय में चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर ऐतिहासिक संवैधानिक व्याख्या तय कर सकता है।
केंद्र सरकार के हलफनामे पर उठेंगे सवाल
केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करना कोई संवैधानिक अनिवार्यता नहीं है।
इसी बिंदु को लेकर याचिकाकर्ताओं की ओर से कड़ी आपत्ति जताई जा रही है। विपक्षी पक्ष का तर्क है कि यदि चयन प्रक्रिया में न्यायपालिका की भूमिका कम होती है, तो चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
अतिरिक्त दस्तावेज और दलीलें पेश होंगी
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे 19 मई को अपने अतिरिक्त दस्तावेज, लिखित तर्क और बची हुई दलीलें अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुनवाई आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों की निष्पक्षता से जुड़े व्यापक सवालों को भी प्रभावित कर सकती है।
लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा
देशभर की निगाहें अब 19 मई की सुनवाई पर टिकी हैं। यह मामला केवल एक कानून की वैधता का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और जनता के भरोसे का भी प्रतीक बन चुका है।
यदि सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर संविधान पीठ गठित करता है, तो यह भारतीय संवैधानिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में शामिल हो सकता है।
दुर्ग/शौर्यपथ।
दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी की मासिक बैठक शुक्रवार को राजीव भवन में आयोजित हुई, जिसमें संगठनात्मक गतिविधियों के साथ-साथ आगामी 18 मई को प्रस्तावित दुर्ग नगर पालिका निगम घेराव को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। बैठक में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नगर निगम की कार्यप्रणाली, कथित भ्रष्टाचार, जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और प्रशासनिक मनमानी को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया।
बैठक में यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया गया कि कांग्रेस अब “सड़क से सदन तक” नगर निगम की कार्यप्रणाली के खिलाफ संघर्ष छेड़ने के मूड में है। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि दुर्ग की शहरी सरकार के कार्यकाल में विकास के दावे जितने बड़े दिखाई देते हैं, जमीनी स्तर पर उतनी ही गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं।
बैठक में मौजूद नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है और आम नागरिक मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं। पेयजल, सफाई, सड़क, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, ठेकेदारी व्यवस्था और योजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने निगम प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया।
कांग्रेस पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि शहर में विकास कार्यों का संतुलन बिगड़ चुका है तथा कई क्षेत्रों में राजनीतिक भेदभाव के आधार पर काम किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
बैठक में कई वक्ताओं ने महापौर अलका बागमार की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लगाए। कांग्रेस नेताओं का आरोप रहा कि निगम में निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी नहीं दिखाई देती और कई मामलों में जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया जाता।
कांग्रेस का दावा है कि निगम की वर्तमान व्यवस्था में जनहित से अधिक “प्रशासनिक दबाव और राजनीतिक संरक्षण” प्रभावी नजर आ रहा है। पूर्व में भी नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर विभिन्न विवाद और आरोप सामने आते रहे हैं, जिनका उल्लेख करते हुए नेताओं ने कहा कि जनता अब जवाब चाहती है।
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में 18 मई को प्रस्तावित निगम घेराव को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया। बैठक में बड़ी संख्या में उपस्थित कांग्रेसजनों को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि आज की उपस्थिति यह संकेत दे रही है कि कांग्रेस संगठन लगातार मजबूत हो रहा है और जनता का समर्थन भी पार्टी को मिल रहा है।
“जनता की आवाज बुलंद करती रहेगी कांग्रेस”
बैठक के अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी जनहित के मुद्दों पर लगातार संघर्ष करती रहेगी और यदि नगर निगम प्रशासन ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया तो आंदोलन और व्यापक होगा।
अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि 18 मई का प्रस्तावित निगम घेराव दुर्ग की राजनीति में बड़ा शक्ति प्रदर्शन साबित हो सकता है। वहीं, नगर निगम और महापौर पक्ष की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
दुर्ग। शौर्यपथ । दुर्ग नगर पालिक निगम के इतिहास में 'शहर सरकार' का ऐसा रंग-ढंग शायद ही कभी देखा गया हो। जिस कुर्सी पर कभी समन्वय और विकास की राजनीति हुआ करती थी, आज वहां केवल विवादों का 'हाई-वोल्टेज ड्रामा' चल रहा है। निगम गलियारों से लेकर चाय के ठेलों तक अब बस एक ही सुगबुगाहट है—क्या महापौर अलका बाघमार के खिलाफ 'महाभियोग/ अविश्वास प्रस्ताव ' आएगा?
नाराजगी सिर्फ विपक्ष (कांग्रेस) को नहीं है; सत्ता पक्ष के अपने ही पार्षद सामान्य सभा में भेदभाव और वार्डों की उपेक्षा का आरोप लगाकर अपनी ही मुखिया को आईना दिखा चुके हैं। लेकिन हाल ही में जो वाकया हुआ, उसने तो नगर निगम को किसी 'थ्रिलर फिल्म' का सेट बना दिया।
जब बिना किसी विरोध-प्रदर्शन के निगम पहुंच गई 'पुलिस की फौज'
निगम परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बिना किसी धरने, प्रदर्शन या हंगामे के अचानक दो थानों के प्रभारी और सीएसपी दुर्ग लाव-लश्कर के साथ धमक पड़े। चर्चा है कि महापौर ने अन्य विभागों के कार्यपालन अभियंताओं को प्रोटोकॉल का पाठ पढ़ाने के लिए अपने केबिन में बुलाया था।
अधिकारी शांति से चर्चा कर ही रहे थे कि पुलिस की इस 'सरप्राइज एंट्री' ने कई सवाल खड़े कर दिए:
आखिर बिना किसी विवाद के पुलिस प्रशासन को किसने और क्यों फोन घुमाया?
क्या अब शहर सरकार को अपने ही अधिकारियों से संवाद करने के लिए 'खाकी' के साए की जरूरत पड़ रही है?या फिर अधिकारियो को महापौर के व्यवहार पर विश्वास नहीं है ?
सोशल मीडिया पर महापौर का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह भरे मंच से अधिकारियों को तल्ख अंदाज में 'प्रोटोकॉल' की नसीहत देती नजर आ रही हैं। राजनीति के जानकार चुटकी ले रहे हैं कि जनता के बुनियादी मुद्दों पर इतनी सख्ती दिखाई जाती, तो आज शहर की सूरत कुछ और होती।
विकास का 'वन-मैन शो': मंत्री गजेंद्र यादव की सक्रियता से बढ़ीं दूरियां?
एक तरफ जहां महापौर अपनी घटती लोकप्रियता और अंतर्कलह से जूझ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के शिक्षा मंत्री और दुर्ग शहर के विधायक गजेंद्र यादव के जमीनी प्रयासों ने विकास कार्यों की झड़ी लगा दी है। शहर में जो भी बड़े और ऐतिहासिक काम दिख रहे हैं, वे सीधे मंत्री जी के खाते में जा रहे हैं:
स्टेडियम परिसर भव्य बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण
पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर अत्याधुनिक स्विमिंग पूल की सौगात
शहरी कनेक्टिविटी केनाल रोड का निर्माण और जेल चौक से पुलगांव चौक तक फोर लेन सड़क की शुरुआत
सौंदर्यीकरण एवं जन-सुविधा राजेंद्र पार्क चौक का कायाकल्प,
गया नगर में सांस्कृतिक भवन, और समृद्धि बाजार में सब्जी मंडी का संधारण
इन सभी बड़े प्रोजेक्ट्स का क्रेडिट (श्रेय) सीधे मंत्री गजेंद्र यादव और उनके समर्थकों को मिल रहा है। इस 'क्रेडिट वॉर' ने महापौर की बेचैनी को और बढ़ा दिया है। लेकिन सवाल यह है कि जनता महापौर को क्रेडिट दे भी तो क्यों?
बदहाली का शिकार दुर्ग: बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती जनता
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन के संकल्प और उपमुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव द्वारा राशि की कोई कमी न रखने के बावजूद, दुर्ग नगर निगम बदहाली के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है।
निगम की नाकामियों की लंबी फेहरिस्त:
इंदिरा मार्केट की दुर्दशा: व्यापार का मुख्य केंद्र आज पूरी तरह बदहाल है।
सुराना कॉलेज के सामने नरक: गंदगी और बदबूदार वातावरण से छात्र और राहगीर हलाकान हैं।
गुमठी आवंटन में भ्रष्टाचार: आरोप हैं कि इस पूरे खेल में शहरी सरकार की मौन सहमति है।
अवैध कब्जों को संरक्षण: चतुर्भुज राठी जैसे अवैध कब्जाधारियों के साथ मंच साझा करने से भाजपा के 'जीरो टॉलरेंस' के दावे पर सवाल उठ रहे हैं।
सड़क पर अवैध बाजार: शनिवार को चर्चगेट पर लगने वाला अवैध बाजार यातायात और व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहा है।
क्या 'साय सरकार' के सुशासन को आईना दिखा रही हैं महापौर?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जहां एक ओर प्रदेश को पारदर्शिता और विकास की पटरी पर दौड़ा रहे हैं, वहीं दुर्ग निगम की यह कार्यप्रणाली सरकार की छवि को बट्टा लगा रही है। हालात ये हैं कि अपनी ही पार्टी के पार्षद अब वार्डों में जनता का सामना करने से कतराने लगे हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह तीखा कटाक्ष भी चल रहा है कि महापौर अलका बाघमार के ऐसे आचरण को देखकर लगता है मानो वह खुद कांग्रेस के साथ मिलकर आगामी चुनावों में भाजपा प्रत्याशी की विदाई की स्क्रिप्ट लिख रही हों।
निगम के भीतर कल हुई 'पुलिसिया ड्रामे' की गूंज अब दुर्ग से निकलकर रायपुर में संगठन के बड़े नेताओं के कानों तक पहुंच चुकी है। देखना दिलचस्प होगा कि सुशासन का दम भरने वाला भाजपा संगठन इस 'स्वघोषित प्रोटोकॉल सरकार' पर कब और क्या एक्शन लेता है, या फिर पार्षदों का बढ़ता असंतोष सीधे 'महाभियोग/ अविश्वास प्रस्ताव ' का रास्ता साफ करेगा!
दुर्ग निगम की इस प्रशासनिक खींचतान और संगठन के भीतर चल रहे इस शीतयुद्ध को लेकर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि समन्वय की कमी विकास कार्यों को पूरी तरह प्रभावित कर रही है?
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
