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May 31, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

 

नई दिल्ली ।
देश में उभरते स्वास्थ्य खतरों, महामारी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन को और मजबूत बनाने की दिशा में नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कर्तव्य भवन-3 में आयोजित वैज्ञानिक संचालन समिति की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय के. सूद ने की।

बैठक में स्वास्थ्य, पशुपालन, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मंत्रालयों और संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इसमें विशेष रूप से पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (Zoonotic Diseases), जलवायु-संवेदनशील स्वास्थ्य चुनौतियों और महामारी तैयारी पर व्यापक चर्चा हुई।

“वन हेल्थ” मॉडल से एकीकृत स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर

बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं, इसलिए किसी भी महामारी या स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए सभी क्षेत्रों के बीच समन्वित रणनीति आवश्यक है। प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि हाल के वैश्विक स्वास्थ्य संकटों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मजबूत अंतर-क्षेत्रीय सहयोग ही भविष्य की चुनौतियों से सुरक्षा का आधार बनेगा।

एक वर्ष में कई बड़ी उपलब्धियां

राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन ने पिछले एक वर्ष में कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। इनमें—

  • राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए मॉडल शासन ढांचे का विकास,
  • जीनोमिक्स और मेटाजीनोमिक्स आधारित निगरानी नेटवर्क की शुरुआत,
  • चिड़ियाघरों, पक्षी अभयारण्यों और बूचड़खानों में निगरानी प्रणाली,
  • जनजागरूकता और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के अभियान शामिल हैं।

बैठक में राज्यों में वन हेल्थ शासन को मजबूत करने के लिए तैयार मॉडल ढांचे पर आधारित एक विशेष वीडियो भी जारी किया गया।

AI आधारित निगरानी और डेटा साझाकरण पर फोकस

विशेषज्ञों ने भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए AI-सक्षम रोगजनक पहचान, एकीकृत निगरानी प्रणाली, डेटा साझाकरण और आधुनिक प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया। बैठक में अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा हुई।

मॉक ड्रिल और तैयारी तंत्र को मजबूत करने पर जोर

समापन संबोधन में प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी है। उन्होंने नियमित मॉक ड्रिल, मजबूत तैयारी तंत्र और समय पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया।

उन्होंने सभी मंत्रालयों और विभागों से राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन के तहत किए जा रहे कार्यों का दस्तावेजीकरण करने और उन्हें व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का आग्रह किया, ताकि भारत भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए और अधिक सक्षम बन सके।

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राजस्थान में अत्याधुनिक भूमिगत खनन और स्मेल्टिंग परियोजनाओं का किया निरीक्षण

नई दिल्ली/राजस्थान, ।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने राजस्थान स्थित हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के राजपुरा-दरीबा परिसर का दौरा करते हुए कहा कि कंपनी का आधुनिक एवं प्रौद्योगिकी आधारित परिचालन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” और “आत्मनिर्भर भारत” के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत उदाहरण है।

दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विश्व की सबसे बड़ी चांदी उत्पादक और तकनीकी रूप से उन्नत भूमिगत खानों में शामिल सिंदेसर खुर्द खदान तथा अत्याधुनिक दरीबा स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि भारत का खनन क्षेत्र अब पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़कर आधुनिक, सुरक्षित, जिम्मेदार और तकनीक-संचालित विकास इंजन में बदल रहा है।

“खनिज सुरक्षा से मजबूत होगा विकसित भारत”

श्री रेड्डी ने कहा कि जस्ता, सीसा और चांदी जैसे खनिज भारत के बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रक्षा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान जिंक जैसे बड़े और तकनीक आधारित उद्योग आयात निर्भरता कम करने और घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार खनन भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

तकनीक और सुरक्षा का आधुनिक मॉडल

केंद्रीय मंत्री ने भूमिगत खदान में जाकर टेली-रिमोट संचालन, पेस्ट फिलिंग, डिजिटल नियंत्रण प्रणाली और सुरक्षा उपायों का अवलोकन किया। उन्होंने भारत की पहली महिला खदान बचाव दल के लाइव प्रदर्शन की भी सराहना की और कहा कि यह खनन क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

हिंदुस्तान जिंक में वर्तमान में लगभग 26.3 प्रतिशत महिला कार्यबल कार्यरत है, जिसे मंत्री ने समावेशी कार्य संस्कृति की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

कर्मचारियों और महिला इंजीनियरों से संवाद

दौरे के दौरान श्री रेड्डी ने खदान की कैंटीन में संविदा कर्मचारियों, महिला खनन इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों के साथ भोजन कर संवाद किया। उन्होंने कर्मचारियों की मेहनत, सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और भारत के खनन विकास में उनके योगदान की सराहना की।

सतत विकास और हरित भविष्य पर जोर

केंद्रीय मंत्री को कंपनी द्वारा जल संरक्षण, ऊर्जा परिवर्तन, कम कार्बन उत्सर्जन, संसाधन दक्षता और सतत खनन से जुड़े प्रयासों की जानकारी भी दी गई। चर्चा में भारत की खनिज सुरक्षा, घरेलू विनिर्माण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास में भारतीय खनन कंपनियों की भूमिका पर विशेष फोकस रहा।

इस अवसर पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ श्री अरुण मिश्रा, खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री विवेक बाजपेई और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया गया

ओस्लो/नई दिल्ली, 
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम द्वारा ओस्लो में आयोजित एक विशेष समारोह में ‘द रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट के ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया गया। यह विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को दिया जाने वाला नॉर्वे का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है।

यह प्रतिष्ठित सम्मान नॉर्वे तथा मानवता के हित में उत्कृष्ट सेवाओं और वैश्विक स्तर पर विशेष योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान भारत-नॉर्वे संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने में उनकी भूमिका के लिए दिया गया।

सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम और वहां की जनता के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि भारत और नॉर्वे के बीच दशकों पुरानी ऐतिहासिक मित्रता, विश्वास और पारस्परिक स्नेह का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान को दोनों देशों की जनता के बीच साझा की गई गर्मजोशी और मजबूत संबंधों को समर्पित करते हुए कहा कि यह भविष्य में भारत और नॉर्वे के बीच सहयोग, साझेदारी और मित्रता को और अधिक सशक्त बनाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सम्मान वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रधानमंत्री मोदी की अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व क्षमता का एक और महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।

शिवराज सिंह चौहान का ऐलान — लाइसेंस, उर्वरक पंजीकरण और आयात प्रक्रियाएं होंगी आसान, किसानों को मिलेगा तकनीक का बड़ा सहारा

नई दिल्ली, 18 मई 2026।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में चल रही “रिफॉर्म एक्सप्रेस” को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और कृषि कारोबार से जुड़े लोगों के लिए कई बड़े सुधारों का ऐलान किया है। नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कृषि मंत्रालय ने लाइसेंसिंग, उर्वरक पंजीकरण, आयात-निर्यात प्रक्रिया और AI आधारित कृषि सेवाओं को सरल एवं डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसलों की समीक्षा की।

बैठक में मंत्रालय के सचिव श्री अतीश चंद्रा ने बताया कि घरेलू उपयोग के कीटनाशकों की बिक्री एवं भंडारण हेतु लाइसेंस प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया गया है। अब आवेदन पत्र को तीन पन्नों से घटाकर केवल एक पृष्ठ का कर दिया गया है। साथ ही पारंपरिक फिजिकल लीफलेट की जगह अब उत्पादों पर सीधे QR Code उपलब्ध कराया जाएगा। इस फैसले से देशभर के 40 लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं और किराना दुकानदारों को सीधा लाभ मिलेगा।

नए उर्वरकों की मंजूरी प्रक्रिया होगी तेज

सरकार ने उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO), 1985 के तहत नए उर्वरकों के पंजीकरण की प्रक्रिया को भी सरल बना दिया है। पहले जहां दो अलग-अलग समितियों की मंजूरी आवश्यक थी, अब केवल केंद्रीय उर्वरक समिति को अधिकृत किया गया है। इससे नई तकनीक वाले उर्वरकों को बाजार तक पहुंचाने में तेजी आएगी। सरकार भविष्य में गुणवत्ता मानकों को पूरा करने वाले अकार्बनिक उर्वरकों को अनिवार्य फील्ड ट्रायल से छूट देने पर भी विचार कर रही है।

649 कस्टम पोर्ट्स का डिजिटल एकीकरण

कृषि जिंसों के आयात को आसान बनाने के लिए देश के सभी 649 कस्टम पोर्ट्स को डिजिटल रूप से इंटीग्रेट कर दिया गया है। अब PQMS और ICEGATE के बीच एंड-टू-एंड डिजिटल कनेक्टिविटी स्थापित हो चुकी है। इससे आयातकों को केवल एक बार आवेदन करना होगा और Import Release Order सीधे उनके लॉगिन पर उपलब्ध हो जाएगा।

बीज आयात-निर्यात में भी बड़ी राहत

सरकार ने बीज एवं रोपण सामग्री के आयात-निर्यात से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को खत्म करते हुए EXIM Committee को समाप्त कर दिया है। साथ ही “Prior Recommendation” की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है, जिससे व्यापार प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी होगी।

किसानों के लिए AI आधारित ‘भारत-विस्तार’ प्लेटफॉर्म

बैठक में “भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) – AI in Agriculture” प्लेटफॉर्म की भी समीक्षा की गई। यह AI आधारित डिजिटल मंच किसानों को खेती-किसानी से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा रहा है। 17 फरवरी 2026 को लॉन्च हुए इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 44 लाख से अधिक प्रश्न प्राप्त हो चुके हैं।

पहले किसानों को जानकारी के लिए अलग-अलग 15 प्लेटफॉर्म्स पर जाना पड़ता था, लेकिन अब वे एक ही स्थान पर 24x7 सभी जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

बैठक के अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और सुशासन को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों, व्यापारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल, तेज और प्रभावी बनाना है।

 

नई दिल्ली, ।
भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा नई दिल्ली स्थित ए.पी. शिंदे संगोष्ठी हॉल, NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा में एक दिवसीय “अखिल भारतीय राजभाषा समारोह-2026” का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में राजभाषा हिंदी के संवर्धन, प्रचार-प्रसार और कार्यालयीन कार्यों में उसके प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन महानिदेशक (एनएसएस) सुश्री गीता सिंह राठौर ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं की सहज एवं प्रभावी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से दैनिक शासकीय कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया।

समारोह में महानिदेशक (सीएस), अपर सचिव, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय सहित मंत्रालय और क्षेत्र संकार्य प्रभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत कनिष्ठ अनुवाद अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित परिचर्चा सत्र में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के निदेशक श्री श्याम सुंदर कथूरिया ने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के सहज, सरल और प्रभावी उपयोग के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए। साथ ही देश के तीनों राजभाषा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे पैनल सदस्यों ने विभिन्न चुनौतियों और उनसे जुड़े समाधान प्रस्तुत किए।

समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों को यह संदेश दिया गया कि राजभाषा हिंदी देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। जिन कर्मचारियों को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त नहीं है, उन्हें हिंदी प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को अपने अधीनस्थ उप-क्षेत्रीय कार्यालयों में हिंदी में कार्य बढ़ाने तथा राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया गया।

 

नई दिल्ली ।
न्यायमूर्ति श्री यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की जांच कर रही न्यायाधीश जांच समिति ने सोमवार को अपनी महत्वपूर्ण रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला को सौंप दी। यह रिपोर्ट संसद भवन में औपचारिक रूप से प्रस्तुत की गई। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए तैयार की गई इस रिपोर्ट को जल्द ही संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाएगा।

समिति के पीठासीन अधिकारी एवं सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने यह रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी। इस दौरान समिति के अन्य सदस्य — बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर तथा कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बी.वी. आचार्य — भी उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि इस जांच समिति का गठन लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला द्वारा 12 अगस्त 2025 को किया गया था। समिति को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

अब इस रिपोर्ट के संसद में पेश होने के बाद राजनीतिक और न्यायिक गलियारों में इसकी व्यापक चर्चा तेज होने की संभावना है। रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आए हैं, इस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।

नई दिल्ली / 

दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल गौतम अडानी पर वर्ष 2024 में आरोप लगा था कि उन्होंने एक बड़े सौर ऊर्जा परियोजना को सफल बनाने के लिए भारी रिश्वत दी। उन पर साजिश, सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड जैसे आरोप लगाए गए थे। यह मामला अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और एक अन्य कंपनी द्वारा भारत सरकार को 12 गीगावॉट सौर ऊर्जा बेचने के समझौते से जुड़ा था, जिसका उद्देश्य लाखों घरों और व्यवसायों तक बिजली पहुंचाना था।

उस समय अडानी समूह ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया था। अडानी को इस मामले में कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और न ही उन्हें मुकदमे का सामना करने के लिए अमेरिका लाया गया। भारत में कई लोगों को पहले से उम्मीद थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (Foreign Corrupt Practices Act - FCPA) के प्रवर्तन को निलंबित किए जाने के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। यह कानून विदेशों में व्यापारिक रिश्वतखोरी पर रोक लगाता है।

आरोप वापस लेने का यह फैसला ऐसे समय आया जब अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने अडानी से जुड़े एक अन्य मुकदमे के निपटारे की जानकारी दी।

गौतम अडानी ने 1990 के दशक में कोयला कारोबार से अपनी संपत्ति बनाई थी। समय के साथ अडानी समूह ने नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में निवेश कर अपना कारोबार विविध बनाया। कंपनी ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा पोर्टफोलियो तैयार किया, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों में से एक भी शामिल है। समूह ने वर्ष 2030 तक देश की सबसे बड़ी स्वच्छ ऊर्जा कंपनी बनने का लक्ष्य रखा था। अडानी के भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीबी संबंध भी बताए जाते रहे हैं।

अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में दायर दस्तावेज में कहा,
“न्याय विभाग ने इस मामले की समीक्षा की है और अभियोजन संबंधी अपने विवेकाधिकार का उपयोग करते हुए व्यक्तिगत आरोपियों के खिलाफ इन आपराधिक मामलों पर आगे संसाधन खर्च न करने का निर्णय लिया है।”

हालांकि, इस अनुरोध को अभी न्यायाधीश निकोलस गारौफिस की मंजूरी मिलना बाकी है।

अभियोजकों के अनुसार, अडानी और उनके सह-आरोपियों के वकीलों ने भी इस अनुरोध पर सहमति जताई है। अडानी के वकील रॉबर्ट जियुफ्रा ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

दूसरी ओर, अडानी समूह के आलोचक भी लगातार सक्रिय रहे हैं। अमेरिकी वित्तीय शोध संस्था हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर “खुलेआम शेयर मूल्य में हेरफेर” और “लेखा धोखाधड़ी” के आरोप लगाए थे। अडानी समूह ने इन दावों को “चयनित गलत सूचनाओं और पुराने, निराधार तथा बदनाम आरोपों का दुर्भावनापूर्ण मिश्रण” बताया था।

जब 2024 में अमेरिकी अभियोजकों ने अडानी पर आरोप लगाए थे, तब उनका कहना था कि अडानी और अन्य लोगों ने सौर ऊर्जा सौदे में दोहरी रणनीति अपनाई। एक ओर उन्होंने वॉल स्ट्रीट निवेशकों को परियोजना की आकर्षक तस्वीर दिखाकर अरबों डॉलर का निवेश हासिल किया, वहीं दूसरी ओर भारतीय सरकारी अधिकारियों को लाभकारी अनुबंध पाने के लिए लगभग 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने का आरोप भी लगाया गया।

मामला सामने आने के बाद केन्या के राष्ट्रपति ने अडानी समूह से जुड़े करोड़ों डॉलर के एयरपोर्ट विस्तार और ऊर्जा समझौतों को रद्द कर दिया था। वहीं, श्रीलंका द्वारा कीमतों पर पुनर्विचार की मांग के बाद अडानी ग्रीन एनर्जी ने वहां की पवन ऊर्जा परियोजनाओं से खुद को अलग कर लिया। एक फ्रांसीसी तेल कंपनी ने भी समूह में नए निवेश अस्थायी रूप से रोक दिए थे।

विश्लेषकों का मानना है कि अडानी समूह की तेज़ी से बढ़ती सफलता का एक प्रमुख कारण उसकी कारोबारी प्राथमिकताओं का मोदी सरकार की नीतियों के अनुरूप होना रहा है। हालांकि, आलोचक अडानी पर “क्रोनी कैपिटलिज्म” यानी सत्ता से निकटता के जरिए लाभ लेने और सरकारी अनुबंधों में विशेष रियायत मिलने के आरोप लगाते रहे हैं, जिन्हें अडानी समूह लगातार खारिज करता आया है।

 

जगदलपुर/बस्तर ।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने रविवार को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के नेतानार गांव में “शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केन्द्र” का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि दशकों तक हिंसा और भय से जूझते बस्तर में विकास, विश्वास और नई शुरुआत का प्रतीक बनकर सामने आया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, केंद्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन, इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक श्री तपन डेका सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।


“वीर गुण्डाधुर की भूमि हर भारतीय के लिए तीर्थ”

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि बस्तर की यह धरती केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव और प्रेरणा का केंद्र है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1910 में वीर गुण्डाधुर ने भूमकाल विद्रोह के माध्यम से अंग्रेजी शासन के खिलाफ आदिवासी अस्मिता और स्वतंत्रता की लड़ाई छेड़ी थी।

शाह ने कहा—

“शहीद वीर गुण्डाधुर की जन्मभूमि और कर्मभूमि हर भारतीय के लिए तीर्थ समान है। उन्हीं की प्रेरणा से आज सुरक्षा कैंप को सेवा कैंप में बदला जा रहा है।”


जहां 6 जवान शहीद हुए, वहीं अब बनेगा जनसेवा का केंद्र

अमित शाह ने भावुक स्वर में कहा कि यही वह क्षेत्र है जहां नक्सल हिंसा में 6 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या हुई थी। स्कूल, अस्पताल और विकास कार्यों को नष्ट किया गया, आदिवासियों को शिक्षा, रोजगार और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से दूर रखा गया।

उन्होंने कहा—

“आज उसी स्थान पर गरीब आदिवासियों की सेवा का तीर्थ बनाया जा रहा है। यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक परिवर्तन है।”


“नक्सलवाद खत्म करने का मतलब केवल हथियार खत्म करना नहीं”

केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल नक्सलियों का सफाया करना नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासियों तक शहरों जैसी सुविधाएं पहुंचाना है।

उन्होंने बताया कि अब गांवों में—

  • सस्ते राशन की दुकानें,
  • प्राथमिक विद्यालय,
  • PSC एवं CSC केंद्र,
  • आधार कार्ड और राशन कार्ड सुविधा,
  • हर घर पेयजल योजना,
  • प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख तक मुफ्त इलाज

जैसी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं।


“नक्सलवाद ने विकास रोका, विकास की कमी ने नहीं”

अमित शाह ने नक्सलवाद को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा—

“नक्सलियों ने वर्षों तक यह भ्रम फैलाया कि विकास न होने के कारण उन्होंने हथियार उठाए। सच्चाई यह है कि विकास इसलिए नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने हथियार उठा रखे थे।”

उन्होंने कहा कि रायपुर जैसे शहरों में जो विकास हुआ है, वही सुविधाएं अब एक-एक गांव तक पहुंचाई जाएंगी।


70 सुरक्षा कैंप बनेंगे जनसेवा केंद्र

गृह मंत्री ने घोषणा की कि बस्तर क्षेत्र में मौजूद लगभग 200 कैंपों में से 70 कैंपों को अगले डेढ़ वर्षों में इसी प्रकार के आधुनिक जनसेवा केंद्रों में बदला जाएगा।

इन केंद्रों में उपलब्ध होंगी—

  • बैंकिंग सेवाएं,
  • आधार एवं राशन कार्ड निर्माण,
  • सरकारी योजनाओं की राशि वितरण,
  • कॉमन सर्विस सेंटर,
  • केंद्र और राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ

एक ही स्थान पर।


“1947 में देश आजाद हुआ, बस्तर में 2026 में”

अमित शाह का सबसे चर्चित बयान तब सामने आया जब उन्होंने कहा—

“देशभर में आजादी 1947 में आई थी, मगर बस्तर में 31 मार्च 2026 के बाद आजादी का सूर्योदय हुआ है।”

उन्होंने कहा कि दशकों की हिंसा और पिछड़ेपन से हुए नुकसान की भरपाई अगले पांच वर्षों में करने का लक्ष्य सरकार ने तय किया है।


आदिवासी संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी

गृह मंत्री ने कहा कि सरकार केवल सुरक्षा और सड़क तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आदिवासी संस्कृति, खेल और परंपराओं को भी विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का काम करेगी।

इसी उद्देश्य से—

  • बस्तर ओलंपिक
  • बस्तर पंडुम

जैसी पहल शुरू की गई हैं, जिनके माध्यम से आदिवासी खेल, साहित्य, संगीत, भाषा, कला और खानपान को बढ़ावा दिया जा रहा है।


विकास, विश्वास और बदलाव का नया अध्याय

नेतानार में शुरू हुआ यह जन सुविधा केंद्र बस्तर में उस परिवर्तन की तस्वीर बनकर उभरा है, जहां कभी भय और बंदूकें थीं, वहां अब विकास, सेवाएं और लोकतंत्र की पहुंच दिखाई दे रही है।

सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में बस्तर केवल नक्सलवाद से मुक्त क्षेत्र नहीं, बल्कि देश के सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले आदिवासी क्षेत्रों में शामिल होगा।

रायपुर / शौर्यपथ /
कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में सुशासन तिहार के तहत ग्राम पंचायत झापरा में सुशासन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और शासन की विभिन्न योजनाओं तथा प्रशासनिक सेवाओं का लाभ प्राप्त किया।
शिविर में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया। साथ ही लोगों को शासकीय योजनाओं, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी भी दी गई।
सुकमा तहसीलदार श्री गिरीश निम्बालकर, सरपंच श्रीमती मुन्नी मड़कामी और उपसरपंच श्री प्रवीण बारसे की मौजूदगी में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न प्रमाण पत्र वितरित किए गए। शिविर में 8 जाति प्रमाण पत्र, 12 निवास प्रमाण पत्र, 8 किसान किताब तथा 2 नामांतरण आदेश प्रदान किए गए। इससे ग्रामीणों, विद्यार्थियों और किसानों को बड़ी राहत मिली।
शिविर की एक खास उपलब्धि किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ना भी रही। यहां 5 किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन किया गया। इससे किसानों को भविष्य में डिजिटल कृषि सेवाओं और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
ग्रामीणों ने शिविर में त्वरित समाधान और एक ही स्थान पर विभिन्न सेवाएं मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविरों से गांव में ही जरूरी काम पूरे हो रहे हैं, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है।
सुशासन तिहार के तहत आयोजित ये शिविर शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहे हैं।

बस्तर की शांति, सुरक्षा और विकास के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को किया नमन
शहीद जवानों के परिवारों के बीच बैठकर केंद्रीय गृहमंत्री ने बंधाया ढांढस, हरसंभव सहयोग का दिलाया भरोसा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जवानों के अदम्य साहस को किया नमन

   

रायपुर / शौर्यपथ / केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान आज जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचकर माओवाद के विरुद्ध संघर्ष में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले एक हजार से अधिक अमर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय उपस्थित थे ।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर की धरती पर शांति, सुरक्षा और विकास स्थापित करने में हमारे जवानों का बलिदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर जवानों का त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार बस्तर में स्थायी शांति स्थापित करने, विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और माओवाद के समूल उन्मूलन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीजापुर नक्सली हमले में शहीद हुए जवान कालेन्द्र प्रसाद नायक एवं पवन कुमार मंडावी के परिजनों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने परिवारजनों के बीच बैठकर उनका दुख साझा किया, ढांढस बंधाया तथा सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सुरक्षाबलों के जवानों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया और उनके साहस एवं समर्पण की सराहना की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शहीद जवानों का बलिदान छत्तीसगढ़ कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीद परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अब शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसमें सुरक्षाबलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण देव सहित जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

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