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June 03, 2026
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शौर्यपथ

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नई दिल्ली / शौर्यपथ /वित्त मंत्रालय ने व्यक्तिगत करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने का फैसला किया है. व्यक्तिगत करदाताओं के लिए वित्त वर्ष 2019-20 का आयकर रिटर्न फाइल करने की समयसीमा को एक महीने और बढ़ाकर 31 दिसंबर 2020 कर दिया गया है. इससे पहले, करदाताओं के लिए आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर थी. वित्त मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी.
मंत्रालय ने कहा कि जिन करदाताओं के खाताओं की ऑडिट करने की जरूरत है, उनके लिये आईटीआर दाखिल करने की समय-सीमा दो महीने बढ़ाकर 31 जनवरी 2021 कर दी गयी है.
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने एक बयान में कहा, ‘‘जिन करदाताओं के लिये आयकर रिटर्न भरने की समय-सीमा विस्तार से पहले 31 जुलाई 2020 थी, उनके लिये समय-सीमा 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दी गयी है.''इसी तरह जिन करदाताओं के खाताओं की ऑडिट किये जाने की जरूरत है और जिनकी समयसीमा पहले 31 अक्टूबर 2020 थी, वे अब 31 जनवरी 2021 तक आईटीआर भर सकते हैं.

सीबीडीटी ने कहा कि करदाताओं को आईटीआर भरने में अधिक समय देने के लिये समय-सीमा बढ़ायी गयी है. इससे पहले, सरकार ने मई में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा को 31 जुलाई से बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 किया था.
2018-19 का आईटीआर दाखिल करने के लिए बढ़ाई गई थी तारीख
हाल ही में आयकर विभाग ने 2018-19 के आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख दो महीने बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी थी. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आदेश में कहा था कि कोरोना वायरस संकट के चलते करदाताओं को पेश आ रही परेशानियों को देखते हुए यह निर्णय किया गया है. आकलन वर्ष 2019-20 के लिए देरी से या संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की तारीख 30 सितंबर 2020 से बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 कर दी गयी है. कोविड-19 संकट के चलते वित्त वर्ष 2018-19 का आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए सरकार की ओर से यह चौथी बार समयसीमा बढ़ाई गई.

नई दिल्ली / शौर्यपथ / मैसूर के मशहूर शाही दशहरा की भव्यता पर भी कोरोना का असर पड़ा है. इस बार हाथियों की सवारी शहर के रास्तों पर नही निकाली जाएगी. इसे देखने के लिए पांच किलोमीटर के रास्ते पर देसी विदेशी लाखों सैलानियों के हुजूम इकठ्ठा होता था.
आय़ोजकों का कहना है कि सदियों पुरानी परंपरा न टूटे इसलिए जंबो सवारी इस बार मैसूर राजमहल परिसर में ही निकाली जाएगी. इसके बाहर जुलूस की इजाजत प्रशासन ने नहीं दी है. पूजा भी पुराने रस्मोरिवाज की तरह राज परिवार मुख्यमंत्री और दूसरे जाने-माने लोगों की मौजूदगी में होगी. हालांकि पहले जैसी भव्यता नहीं होगी. मैसूर राजमहल यानी वाणी विलास पैलेस में शाही दशहरे की तैयारी चल रही है. कोरोना वायरस की वजह से पूरे शहर में होने वाले कार्यक्रम को मैसूर पैलेस में सीमित कर दिया गया है. व्यापारी भी निराश है और स्थानीय लोग भी इस बार मायूस हैं.

750 किलो का सोने का सिंहासन
शुद्ध सोने से बना 750 किलो का ये सिंहासन और इसमे विराजती माता चामुंडेश्वरी की सवारी इस दशहरे की शान कहलाती है. मुख्य पूजा मुख्यमंत्री करेंगे. इसके बाद हाथी और दूसरे घोड़े जानवर पैलेस के अंदर ही परिक्रमा करेंगे और इसी के साथ दशहरा जश्न यहीं खत्म हो जाएगा. लोगों का कहना है कि पिछले 62 सालों से मैं इसे देखता रहा था इस बार नहीं देख पाऊंगा यह हमारी बदनसीबी है.

दशहरे का इतिहास 400 पुराना
मैसूर दशहरा का इतिहास तक़रीबन 400 पुराना है. विजयनगर साम्राज्य के वक्त 16वी सदी में श्रीरंगापट्टनम में विजयनगर साम्राज्य के प्रतापी राजा कृष्ण देव राय ने की थी. जब सत्ता विजयनगर साम्राज्य से वोडेयार घराने के पास आई और राजधानी मैसूर बनाई गई तो दशहरा मैसूर पहुंच गया.

 

पटना / शौर्यपथ / बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सभा में विरोध करने वालों को अमूमन नज़रअंदाज़ करते हैं, क्योंकि उन्हें इस बात का आभास होता हैं कि ऐसे लोगों को मीडिया में खूब जगह मिलती हैं .लेकिन शनिवार को तेघडा विधानसभा में अपनी पार्टी के प्रत्याशी वीरेंद्र कुमार के समर्थन में जब वो प्रचार करने के बाद माला पहनाने की औपचारिकता पूरी कर रहे थे, तभी कुछ लोगों ने नौकरी के सवाल पर उनका विरोध किया. इस पर नीतीश कुमार अचानक आपा खो बैठे और उन्होंने कहा, "मत देना तुम लोग, पंद्रह-बीस लोग हो, यहां हज़ारों लोग हैं."
उन्होंने अपने समर्थकों को फिर से हाथ उठाने के लिए कहा और विरोधियों को कहा, "देख लो, देख लो, अरे देखो ना, पीछे अग़ल-बग़ल देखो ना, देख लो...तुम लोगों को समझ में आ जाएगा. जिसके लिए कर रहे हो, ये सब लोग तुम लोगों का पूरा जवाब दे देंगे और उन लोगों का हाल ठीक-ठाक कर देंगे, बुरा हाल कर देंगे."
नीतीश ने फिर इतना कहने के बाद लोगों के ताली बजने पर कहा, "आप लोगों ने स्वस्पष्ट किया है, तो आप क्या जीत का माला पहना दें?" फिर उन्होंने प्रत्याशी आनंद कुमार को माला पहनाई और मंच पर मौजूद अन्य ज़िले के प्रत्याशियों का नाम लिया और फिर जनता की इजाज़त लेकर अन्य उम्मीदवारों को भी जीत की माला पहनाई. लेकिन नीतीश की प्रतिक्रिया से मंच पर उनके समर्थक भी हैरान थे.
दरअसल जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशी वीरेंद्र कुमार जो नीतीश के कॉलेज के ज़माने के मित्र रहे हैं, उनके पिछले बार राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर विधायक बनने के बाद इलाक़े से नदारद रहने की काफ़ी शिकायत आती थी. इसलिए इस बार उनकी उम्मीदवारी को लेकर जेडीयू के कार्यकर्ता ही बहुत ज़्यादा उत्साह नहीं है और इसी पृष्ठभूमि में नीतीश कुमार ने शनिवार को वहां पर सभा संबोधित करने का कार्यक्रम रखा था. लेकिन उन्हें भी इस बात का अंदाज़ा हो गया कि उनकी जीत इतनी आसान नहीं हैं .

नई दिल्ली / शौर्यपथ / दिल्ली पुलिस ने 150 से ज्यादा वारदात करने वाले शातिर सेंधमार हंसराज को गिरफ्तार किया है. उसने दिल्ली ,यूपी गुजरात, हरियाणा, उत्तराखण्ड समेत राजस्थान में इन वारदातों को अंजाम दिया था.
दक्षिणी दिल्ली पुलिस के अनुसार, हंसराज और उसके साथी पनीर सेल्वम राज्यों में घूम-घूम कर चोरी और सेंधमारी करते थे. हंसराज ने कबूल किया है कि अब तक दिल्ली ,यूपी गुजरात, हरियाणा,उत्तराखण्ड और राजस्थान में सेंधमारी की 150 से ज्यादा वारदात को अंजाम दिया है. पुलिस जब उसे पकड़ने गई तो वो छत पर पानी की टंकी में छिपकर बैठ गया था.
दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अतुल ठाकुर के मुताबिक, 20 अक्टूबर की रात ग्रेटर कैलाश की एम ब्लॉक मार्किट में सुबह तड़के दो दुकानों का शटर तोड़कर चोरी कर ली गई थी. इसमें कुछ मेकअप का सामान, कुछ इलेक्ट्रॉनिक आइटम और कुछ महंगे शॉल शामिल थे. दुकानों के आसपास की सीसीटीवी फुटेज को देखा गया. इसमें एक संदिग्ध स्कूटी आते-जाते दिखी, जिसकी रजिस्ट्रेशन प्लेट मुड़ी हुई थी. इस मामले में मैदानगढ़ी थाने की पुलिस ने जांच के बाद वारदात में शामिल लोगों की पहचान कर ली. जांच में खुलासा हुआ कि वारदात को अंजाम देने वाला शातिर सेंधमार हंसराज है.
इसके बाद पुलिस ने उसके कृष्णा नगर के घर में छापेमारी की. पुलिस से बचने के लिए वो छत पर पानी की टंकी में घुस गया, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया. उसकी निशानदेही पर उसका दूसरा साथी पनीर सेल्वम भी पकड़ा गया. पुलिस के मुताबिक हंसराज एक शातिर सेंधमार है,जो 150 से ज्यादा अपराधों को अंजाम दे चुका है. उस पर दक्षिणी दिल्ली पुलिस पहले ही मकोका लगा चुकी है.

राजनांदगांव। शौर्यपथ । ( मृनेन्द्र चौबे की रिपोर्ट ) इंडियन प्रिमियर लीग (आईपीएल) में सट्टेबाजी पर कोई लगाम नहीं लग पा रही है. शहर में कई बुकी, खाईवाल सक्रिय हैं. लगभग हर वर्ग इस सट्टेबाजी का हिस्सा बन चुका है. इस सट्टेबाजी के खेल में कई हैं जो अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं. बुकी के तौर पर किसी *एमएस* का नाम सामने आ रहा है जो कि महाराष्ट्र के खाईवालों से मिलकर यहां आईपीएल पर दांव लगवा रहा है. बताया जाता है कि सट्टे में नफा-नुकसान की दर मोबाईल एप्प से तय की जा रही है. उक्त बुकी संस्कारधानी में रोज़ाना लाखों के सौदे ले रहा है. प्रतिष्ठित व्यवसायी भी उसके संपर्क में हैं और शहर के कुछ नामी परिवारों के युवा भी उसके ही सहारे सट्टेबाजी में हाथ आजमा रहे हैं. खबर है कि पुलिस ने पिछले दिनों बुकी राजा गिड़िया को गिरफ्तार किया था उसने भी कई औरों के नाम उगले हैं. इसके अलावा उसके पास से जब्त किए गए मोबाईल से भी पुलिस के हाथ बड़ी जानकारी लगी है. बताया जा रहा है कि पुलिस इस *एमएस* की तलाश में जुटी है.

राजनांदगांव में दबी जुबान में चर्चा यह भी है कि इस मामले में पुलिस विभाग के किसी व्यक्ति की भी मिली भगत है और इस सहयोग के बदले नए चार पहिया वाहन उपहार के लेनदेन की भी बात हो रही है । जिसकी जानकारी शायद उच्च अधिकारियों के पाश नही है । पुलिस विभाग अगर मामले की तह तक जाए तो कई चौकाने वाले खुलासे हो सकते है । कोरोना आपदा में इस तरह के सट्टा व्यपार पर लगाम लगाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है । 

धर्म संसार /शौर्यपथ / या देवी सर्वभू‍तेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
अर्थ : हे मां! सर्वत्र विराजमान और मां सिद्धिदात्री के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं। हे मां, मुझे अपनी कृपा का पात्र बनाओ।
मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्रि-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियां होती हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है।
इनके नाम इस प्रकार हैं -
1. अणिमा 2. लघिमा 3. प्राप्ति 4. प्राकाम्य 5. महिमा 6. ईशित्व,वाशित्व 7. सर्वकामावसायिता 8. सर्वज्ञत्व 9. दूरश्रवण 10. परकायप्रवेशन 11. वाक्‌सिद्धि 12. कल्पवृक्षत्व 13. सृष्टि 14. संहारकरणसामर्थ्य 15. अमरत्व 16. सर्वन्यायकत्व 17. भावना 18. सिद्धि
मां सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं। देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वे लोक में 'अर्द्धनारीश्वर' नाम से प्रसिद्ध हुए।
मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है। प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह मां सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न करें। उनकी आराधना की ओर अग्रसर हो। इनकी कृपा से अनंत दुख रूप संसार से निर्लिप्त रहकर सारे सुखों का भोग करता हुआ वह मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।
नवदुर्गाओं में मां सिद्धिदात्री अंतिम हैं। अन्य आठ दुर्गाओं की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी उपासना में प्रवत्त होते हैं। इन सिद्धिदात्री मां की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।
सिद्धिदात्री मां के कृपापात्र भक्त के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बचती ही नहीं है, जिसे वह पूर्ण करना चाहे। वह सभी सांसारिक इच्छाओं, आवश्यकताओं और स्पृहाओं से ऊपर उठकर मानसिक रूप से मां भगवती के दिव्य लोकों में विचरण करता हुआ उनके कृपा-रस-पीयूष का निरंतर पान करता हुआ, विषय-भोग-शून्य हो जाता है। मां भगवती का परम सान्निध्य ही उसका सर्वस्व हो जाता है। इस परम पद को पाने के बाद उसे अन्य किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं रह जाती।
मां के चरणों का यह सान्निध्य प्राप्त करने के लिए हमें निरंतर नियमनिष्ठ रहकर उनकी उपासना करनी चाहिए। मां भगवती का स्मरण, ध्यान, पूजन, हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हुए वास्तविक परम शांतिदायक अमृत पद की ओर ले जाने वाला है।
इनकी आराधना से जातक को अणिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, सर्वकामावसायिता, दूर श्रवण, परकामा प्रवेश, वाकसिद्ध, अमरत्व भावना सिद्धि आदि समस्त सिद्धियों नव निधियों की प्राप्ति होती है। आज के युग में इतना कठिन तप तो कोई नहीं कर सकता लेकिन अपनी शक्तिनुसार जप, तप, पूजा-अर्चना कर कुछ तो मां की कृपा का पात्र बनता ही है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में नवमी के दिन इसका जाप करना चाहिए।
नवरात्रि के अंतिम दिन पूजी जाती हैं मां सिद्धिदात्री, शिव भी करते हैं उपासना
नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। यह मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं। कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली मां सिद्धिदात्री लाल साड़ी में विराजित हैं।

इनके चारों हाथों में सुदर्शन चक्र, शंख, गदा और कमल रहता है। सिर पर ऊंचा सा मुकूट और चेहरे पर मंद मुस्कान ही मां सिद्धिदात्री की पहचान है। इस दिन भी कई भक्त अपने घरों में कुंजिकाओं को बिठाते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं।
कैसे करें सिद्धिदात्री की पूजा
घी का दीपक जलाने के साथ-साथ मां सिद्धिदात्री को कमल का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
इसके अलावा जो भी फल या भोजन मां को अर्पित करें वो लाल वस्त्र में लपेट कर दें।
निर्धनों को भोजन कराने के बाद ही खुद खाएं।
कौन हैं मां सिद्धिदात्री?
भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही 8 सिद्धियों को प्राप्त किया था। इन सिद्धियों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व शामिल हैं। इन्हीं माता की वजह से भगवान शिव को अर्द्धनारीश्वर नाम मिला, क्योंकि सिद्धिदात्री के कारण ही शिव जी का आधा शरीर देवी का बना। हिमाचल का नंदा पर्वत इनका प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।
मान्यता है कि जिस प्रकार इस देवी की कृपा से भगवान शिव को आठ सिद्धियों की प्राप्ति हुई ठीक उसी तरह इनकी उपासना करने से अष्ट सिद्धि और नव निधि, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है।

शौर्यपथ / कई लोगों को हद से ज्यादा पसीना आता है। अगर पसीने को साफ नहीं किया गया और ये लंबे समय तक शरीर पर रहा तो इससे दुर्गंध तो आती ही है, साथ ही ये कीटाणुओं को जन्म देता है। ऐसी स्थिती से बचने के लिए आपको कुछ बातों पर ध्यान देना होगा। आइए, हम आपको बताते हैं
1. शरीर के जिन हिस्सों से आपको ज्यादा दुर्गंध आने की समस्या हो, ऐसे में घर से बाहर निकलने से पहले कुछ मिनटों तक उन जगहों पर बर्फ लगाकर रखें। इससे ज्यादा पसीना नहीं आएगा।
2. यदि आपके पैरों के तलवों में ज्यादा पसीना आता है, तो एक टब में पानी भरें और उसमें दो चम्मच फिटकरी पाउडर डाल दें। अब इस टब में दो से पांच मिनट अपने पैरों को डुबोकर बैठें।
3. जो कपड़े आप पूरा दिन पहनकर बाहर गए हों वे कपड़े धोने के बाद ही अलमारी में रखें।
4. ज्यादा समय पहने और बिना धुले कपड़े अलमारी में रखने से उनमें दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं और यह दुर्गंध दूसरे साफ कपड़ों में भी पहुंच जाती है और आप समझ ही नहीं पाते हैं कि साफ-धुले कपड़ों से अजीब सी गंध क्यों आ रही है?
5. इस मौसम में सिंथेटिक कपड़े न पहनें, बल्कि सूती कपड़े ही पहनें। ऐसे कपड़े पहनें जो शरीर से चिपके हुए न हों, क्योंकि तंग कपड़ों में ज्यादा पसीना आता है और इससे हवा पास नहीं हो पाती, जिससे दुर्गंध आती है।
6. शरीर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, जरुरत पड़े तो दिन में दो बार भी नहा लें।
7. नहाने के लिए नीम या एंटी-बैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करें।
8. तली-भुनी व मसालायुक्त चीजें इस मौसम में खाने से बचें।
9. बॉथ टब में नहाने से एक घंटा पहले संतरे का छिलका डालकर छोड़ दें।
इस पानी से नहाने से शरीर में ताजगी महसूस होगी।
10. शरीर को रगड़कर ताजे पानी से नहाने से शरीर से गंदगी का सफाया हो जाता है। और शरीर से दुर्गेंध नहीं आती है।

शौर्यपथ / गूगल ने एंड्रायड के लिए एक नया फीचर लॉन्च किया है जो बधिर उपयोगकर्ताओं को कई परिस्थितियों में अलर्ट भेजेगा। बधिर लोग अलार्म या चेतावनी वाली आवाजें न सुन पाने के कारण हमेशा मुश्किल में पड़ जाते हैं। ऐसे में गूगल ने उनके लिए एक ऐसा फीचर लॉन्च किया है जो बुरी परिस्थितियों के दौरान बजने वाले अलार्म या आवाजों की जानकारी बधिर उपयोगकर्ताओं को फोन को वाइब्रेट कर, फ्लैशलाइट जलाकर या पुश नोटिफिकेशन भेजकर देगा। यह फीचर बच्चे के रोने, फायर अलार्म के बजने, कुत्ते भौंकने जैसे दस आवाजों की पहचान करने में सक्षम है।
हेडफोन लगाए लोगों को भी मिलेगी चेतावनी
गूगल ने कहा कि साउंड नोटिफिकेशन को दुनियाभर में मौजूद 46.6 करोड़ बधिर लोगों के लिए बनाया गया है। लेकिन, यह फीचर उन लोगों की भी मदद कर सकता है जो हेडफोन लगाए बैठे हो या किसी कारणवश उनका ध्यान भटका हुआ हो। कई बार हेडफोन लगाए रहने के कारण भी लोग कई आवाजें नहीं सुन पाते और कई हादसे हो जाते हैं।
दस तरह के आवाजों की करेगा पहचान
मशीन लर्निंग तकनीक से विकसित किए गए साउंड नोटिफिकेशन के फीचर के लिए स्मार्टफोन के माइक्रोफोन का उपयोग किया जाता है। यह दस तरह की आवाजों की पहचान करने में सक्षम है। इसमें बच्चों का रोना, चिल्लाना, नल से पानी टपकने, स्मोक और फायर अलार्म, साइरन, उपकरणों की बीप, दरवाजे की डोरबेल और लैंडलाइन फोन की घंटी शामिल है।
नाम पुकारे जाने की जानकारी देगा
पिछले साल गूगल ने दो नए एसेसबिलिटी विकल्प प्रदान किए थे। साउंड एंपलीफायर लाइव ट्रांसक्राइब कही हुई बात को टेक्स्ट में रियल टाइम में बदल देता है और लोगों का नाम पुकारे जाने पर भी उन्हें अलर्ट भेजता है। एंड्रायड फोन के अलावा यह गूगल वीयर ओएस स्मार्टवॉच में भी काम करता है। किसी महत्वपूर्ण आवाज की पहचान करने पर यह वाइब्रेट करता है।
बधिर उपयोगकर्ताओं के लिए अहम
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोडक्ट मैनेजर सागर सावला और एसेसबिलिटी प्रोडक्ट मैनेजर शार्लेन युआन ने कहा, कम सुन पाने वाले और बधिर लोग हमेशा इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि सोये रहने के दौरान उन्हें किसी आपात परिस्थिति के बारे में पता नहीं चल पाता इसलिए हमने यह फीचर बनाया है जो सोते वक्त भी ऐसे लोगों को अलर्ट भेजेगा।
उपयोगकर्ता टाइमलाइन व्यू को स्क्रॉल कर पिछले कुछ घंटों में भेजे गए नोटिफिकेशन को देख पाएंगे और जान पाएंगे कि किस समय क्या हुआ था। इसके लिए एंड्रायड के एसेसिबिलिटी मेन्यू में जाकर साउंड नोटिफिकेशन को सक्रिय करना पड़ेगा। इसे सीधे गूगल प्ले से डाउनलोड भी किया जा सकता है।
बधिर उपयोगकर्ता थे नाराज
गूगल का यह फीचर एप्पल के साउंड डिटेक्शन फीचर जैसा ही है। पिछले महीने गूगल ने यूट्यूब के वीबडियो से क्राउडसोर्स कैप्शन के विकल्प को हटा दिया था। इसके खिलाफ पांच लाख बधिर उपयोगकर्ताओं ने चेंज डॉट ओआरजी पीटिशन पर हस्ताक्षर किया था।
बधिर उपयोगकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए ही गूगल ने यह नया साउंड नोटिफिकेशन लॉन्च किया है। बधिर समुदाय ने गूगल के इस कदम की सराहना की है और कहा है कि इससे उनकी जिंदगी आसान होगी।

सेहत / शौर्यपथ / मौसम बदलने के साथ ही मच्छरों का आतंक भी शुरू हो जाता है। ऐसे में मच्छर भगाने के लिए कितने ही उपाय क्यों न कर लें लेकिन मच्छर काट ही लेते हैं। नींद खराब करने वाले मच्छर कभी-कभी इतने खतरनाक होते हैं कि उनके काटने से एलर्जी तक हो जाती है। खासतौर पर मच्छरों के काटने से कई बार लाल रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं। चेहरे पर ये लाल रंग के निशान और भी बेकार लगते हैं। कभी-कभी इन चकत्तों से छुटकारा पाने में 6-7 दिनों से ज्यादा का वक्त लग जाता है। ऐसे में अगर आपके चेहरे पर मच्छरों के काटने के बाद अगर लाल रंग के निशान पड़ जाएं, तो आप कुछ घरेलू उपायों का इस्तेमाल करके इनसे छुटकारा पा सकते हैं।
सेब का सिरका
सेब का सिरका स्किन और हेयर के लिए इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही वजन घटाने के लिए भी सेब का सिरका पानी में मिलाकर पिया जाता है। आपके चेहरे पर अगर मच्छर काटने से निशान पड़ जाएं, तो आप तीन चम्मच पानी में आधा चम्मच सेब का सिरका मिलाकर लगा लें। निशान गायब हो जाएंगे।
नींबू का छिलका
अगर मच्छर के काटने से चकत्ते बन गए हैं तो उस जगह पर नींबू का छिलका लगाएं। इससे आपके चकत्ते के निशान गायब हो जाएंगे। खुजली भी नहीं होगी।
प्याज का टुकड़ा
मच्छर के काटने से बनने वाले चकत्ते के निशान पर प्याज का टुकड़ा लगाएं। इससे निशान दूर हो जाएंगे और खुजली भी खत्म हो जाएंगी।
बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडे में पानी मिलाकर पहले से ही घोल बना लें। जब भी मच्छर काटें तो काटे वाले स्थान पर लगा लें। इससे चकत्ते के निशान दूर हो जाएंगे और खुजली भी कम हो जाएंगी।
एलोवेरा जेल
आपकी स्किन पर मच्छर काटने की परेशानी को दूर करेगा। साथ ही स्किन पर ठंडकता भी प्रदान करेगा। अगर मच्छर काटने के स्थान से खून निकल रहा है, तो यह उसे भी ठीक कर देगा और स्किन पर जलन और खुजली की परेशानी को दूर करेगा।

सेहत / शौर्यपथ / कोरोना महामारी ने दुनियाभर में लोगों की नींद और चैन छीन लिया है। संक्रमण की वजह से शुरुआत में लगे लॉकडाउन के चलते लोगों की जीवनशैली में अनचाहे बदलाव आए। एक नए शोध के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान लोगों के खान-पान में आए बदलाव के चलते मोटापे से जूझ रहे लोगों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके चलते नींद भी बुरी तरह प्रभावित हुई।
अमेरिकी शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन से यह खुलासा हुआ है। जर्नल ओबेसिटी में प्रकाशित इस अध्ययन ने महामारी के व्यापक प्रतिबंधों के तहत लोगों के स्वास्थ्य व्यवहारों में होने वाले अनजाने परिवर्तनों का मूल्यांकन किया। अमेरिका में लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी (एलएसयू) के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया। उनके अनुसार लॉकडाउन के दौरान लोगों का वजन काफी बढ़ा। परिणामस्वरूप स्वास्थ्य संबंधी तमाम समस्याएं पैदा हो गईं।
लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी से अध्ययन की सह-लेखक लीन रेडमैन ने कहा, लॉकडाउन के दौरान लोगों ने पौष्टिक भोजन का सेवन ज्यादा किया और घर पर रहकर खाने-पीने पर पूरा ध्यान दिया,वहीं, दूसरी तरफ शारीरिक गतिविधियां बहुत कम हो गईं। व्यायाम नहीं किया। घर से काम करने के चलते नींद का पैटर्न बदल गया। रात को देरी से सोने की वजह से नींद में खलल आई और नींद पूरी नहीं हुई। काम के घंटों में बढ़ोतरी और स्क्रीन पर बिताए गए समय ने नींद की खलल में बहुत बड़ी भूमिका अदा की। नींद की आदतें बदलने की वजह से लोगों में चिंता का स्तर काफी बढ़ गया।
मानसिक सेहत पर असर पड़ा
रेडमैन ने कहा, अध्ययन में पाया गया कि मोटापे से ग्रस्त लोगों ने अपनी डाइट में सबसे ज्यादा सुधार किया लेकिन इस बीच उन उनकी मानसिक सेहत पर विपरीत असर पड़ा। वजन बढ़ने का अनुभव करने के साथ-साथ उनका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया। मोटापे से ग्रसित एक तिहाई लोगों ने यह स्वीकार किया कि लॉकडाउन के दौरान उनकी यह बीमारी पहले से ज्यादा बढ़ गई। अध्ययन से पता चलता है कि मोटापे जैसी बीमारी सिर्फ शारीरिक सेहत पर नहीं, बल्कि मन की सेहत पर भी असर डालती है।
अप्रैल माह में हुए इस अध्ययन में 7,754 लोगों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों में से अधिकांश ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिकर के निवासी थे। इनके अलावा इसमें 50 से अधिक अन्य देशों ने भी भाग लिया।

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