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नई दिल्ली / शौर्यपथ / कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में भारत को एक बड़ी उपलब्धि हासिल होने का जिक्र करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि गत दो महीनों में पहली बार देश में कोरोना वायरस से संक्रमित उपचाराधीन मरीजों की संख्या सात लाख से कम हुई है. वहीं ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 69 लाख के पार हो गई है. मंत्रालय ने कहा कि अब भारत में उपचाराधीन मरीजों के मुकाबले ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 10 गुना अधिक है. मंत्रालय ने बताया कि दो महीनों (63 दिनों) में पहली बार भारत में उपचाराधीन मरीजों की संख्या सात लाख से कम है. इससे पहले 22 अगस्त को इलाजरत मरीजों की संख्या 6,97,330 थी.
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को सुबह आठ बजे अद्यतन किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस समय देश में 6,95,509 उपचाराधीन मरीज हैं जो देश में अबतक संक्रमित पाए गए कुल मरीजों की संख्या का करीब 8.96 प्रतिशत हैं. मंत्रालय ने रेखांकित किया, ‘‘ कोविड-19 मरीजों के रोजाना ठीक होने की उच्च दर होने और मृत्युदर में तेज गिरावट की वजह से भारत में उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटने का सिलसिला जारी है.''
देश में कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर 69,48,497 हो गई है जो उपचाराधीन मरीजों के मुकाबले 62,52,988 अधिक है. आंकड़ों के मुताबिक, गत 24 घंटे में देश में 73,979 कोविड-19 मरीज ठीक हुए जबकि इसी अवधि में संक्रमण के 54,366 नये मामलों की पुष्टि हुई. देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के ठीक होने की दर में और सुधार हुआ है और यह अब 89.53 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गयी है.
मंत्रालय ने कहा कि देश में चिकित्सा अवसंरचना में विस्तार, केंद्र द्वारा इलाज के लिए जारी मानक उपचार नियमावली का राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अनुपालन, डॉक्टरों और बीमारी के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर लड़ रहे स्वास्थ्य कर्मियों की प्रतिबद्धता से कोविड-19 मरीजों के ठीक होने की दर बढ़ी है और मृत्युदर में गिरावट आई है. मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 मरीजों की मृत्युदर गिरकर आज 1.51 प्रतिशत पर आ गई है.
मंत्रालय ने रेखांकित किया , ‘‘इन दोनों का नतीजा है कि उपचाराधीन मरीजों की संख्या में लगातार कमी आ रही है.''
आंकड़ों के मुताबिक, देश के 24 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जहां पर उपचाराधीन मरीजों की संख्या 20 हजार से कम हैं.
मंत्रालय ने बताया कि कोविड-19 से ठीक होने वाले 81 प्रतिशत मरीज 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के हैं. ये राज्य और केंद्र शासित प्रदेश महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश हैं. आंकड़ों के मुताबिक, एक दिन में सबसे अधिक 16 हजार से अधिक मरीज महाराष्ट्र में ठीक हुए हैं जबकि कर्नाटक संक्रमण मुक्त होने वाले 13 हजार से अधिक मरीजों के साथ दूसरे स्थान पर है.
मंत्रालय ने बताया कि गत 24 घंटे में सामने आए 54,366 नये मामलों में 78 प्रतिशत मामले महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और ओडिशा से हैं. महाराष्ट्र और केरल में सबसे अधिक 7,000 से अधिक नये मामले सामने आए हैं जबकि कर्नाटक में 5,000 से अधिक नये मामले दर्ज किए गए हैं.
मंत्रालय ने बताया कि गत 24 घंटे में कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से 690 लोगों की मौत हुई जिनमें से 81 प्रतिशत मौतें 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीमित हैं. ये राज्य हैं महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, केरल, आंध्र प्रदेश और ओडिशा. मंत्रालय ने बताया कि महाराष्ट्र में एक दिन में सबसे अधिक 198 लोगों की मौत दर्ज की गई है.
मुंबई / एजेंसी / कोरोना के संक्रमण के आंकड़ों के हॉटस्पॉट महाराष्ट्र-मुंबई में इस साल मां दुर्गा के ऑनलाइन दर्शन हो रहे हैं, पूजा,आरती से लेकर पुष्पांजलि तक सब ऑनलाइन है. कोरोना के चलते पंडालों में लोगों की भीड़ इकट्ठा ना हो इसको लेकर सख़्त दिशा निर्देश हैं, जिसका आयोजक पालन कर रहे हैं. इसलिए इस कोरोना काल में मां दुर्गा के ऑनलाइन दर्शन हो रहे हैं.
नवी मुंबई के मुलुंड के बंगाल क्लब के अनुसार, "मुंबई के प्रमुख पूजा पंडालों में इस बार सामान्य सजावट हैं,और फ़ोकस सिर्फ़ मां की मूर्ति पर है. पूजा, आरती, पुष्पांजलि इन सबकी लाइव स्ट्रीमिंग हो रही है."
99 साल पुराने बंगाल क्लब का मशहूर दुर्गोत्सोव इस साल 85वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, पारंपरिक आयोजन की तैयारी बड़ी थी, लेकिन इस बार भव्य पूजा की जगह, आयोजकों ने ब्लड डोनेशन और मेडिकल कैम्प्स लगाए.
बंगाल क्लब के सदस्य प्रसून रक्षित ने कहास, "दुर्गा पंडाल में लोगों की भीड़ ना जुटे इसको लेकर महाराष्ट्र सरकार ने इस साल कई सख़्त दिशा निर्देश जारी किए हैं,दर्शन के लिए गिने चुने लोग ही नियमों के पालन के साथ माँ के दरबार में दिख रहे हैं, लेकिन ज़्यादातर लोग डिजिटल माध्यम से ही जुड़ रहे हैं."वहीं श्रद्धालुओं का भी कहना है, "मोबाइल पर दर्शन कर रहे हैं, पंडाल में नहीं जा सकते, कोई बात नहीं अगले साल अच्छे से होगा..."
वहीं श्रद्धालुओं का भी कहना है, "मोबाइल पर दर्शन कर रहे हैं, पंडाल में नहीं जा सकते, कोई बात नहीं अगले साल अच्छे से होगा..."
दुर्गा पूजा आयोजकों ने बताया कि हम पंडाल में बहुत कम लोगों को आने दे रहे हैं, उन्हें मास्क दे रहे हैं. पुलिस ने कहा है कि 4-5 लोग से ज़्यादा आरती में नहीं आने हैं तो हम तो सोशल मीडिया पर ही लाइव जा रहे हैं. नो मास्क नो एंट्री का ये संदेश हो, मूर्ति के साथ और आसपास रखे सैनेटाइज़र, या ऐसे पोस्टर...एक और त्योहार पर कोविड ही पूरी तरह से छाया रहा.
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / सोशल मीडिया भारत की खूबसूरती को दिखाने वाले कई वीडियो वायरल होते रहते हैं। लॉकडाउन के दौरान प्रदूषण में भारी कमी देखने को मिली थी, जिसके बाद पहाड़ी इलाकों से सटे कई शहरों से पहाड़ दिख रहे थे। वहीं, सड़कों पर कई जंगली जानवरों की चहल-कदमी के वीडियो भी सामने आए थे। हाल ही में एक और वीडियो ने यूजर्स का दिल जीत लिया है। दरअसल, सोशल मीडिया पर केदारनाथ के अनुपम सौंदर्य का वीडियो वायरल हुआ है। जिसमें केदारनाथ मंदिर के पीछे साफतौर पर हिमालय पर्वत का सुंदर नजारा दिख रहा है।
बादलों से घिरे पर्वत की खूबसूरती देखकर सोशल मीडिया यूजर्स इसे महादेव की कृपा बता रहे हैं। हिमालय के इस अलौकिक सौंदर्य को देखकर ट्विटर पर यूजर्स हर हर महादेव के साथ इस वीडियो को रिट्वीट कर रहे हैं। इस वीडियो को देखने से पता चलता है कि इसे किसी ने मोबाइल से रिकॉर्ड किया है। ट्विटर पर अब तक लाखों यूजर्स इसे देख चुके हैं। केदारनाथ के इस वीडियो को इंडियन फॉरेस्ट सर्विस ऑफिसर परवीन कासवान ने भी अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। केदारनाथ के इस अनुपम सौंदर्य वाले वीडियो को देखकर किसी का मन भी खुश हो जाएगा।
फिलहाल यह वीडियो कब और किसने बनाया इसके बारे में साफतौर तक नहीं कहा जा सकता और ‘लाइव हिन्दुस्तान’ इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि भी नहीं करता।
मनोरंजन / शौर्यपथ / इन डायलॉग्स की वजह से टाइट है 'मिर्जापुर 2' का भौकाल
वेब सीरीज मिर्जापुर 2 अमेजन प्राइम पर 22 अक्टूबर को रिलीज कर दी गई है। पिछले सीजन की तरह इस सीजन को भी दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। सीरीज के पहले सीजन में किरदारों के डायलॉग्स काफी पॉप्युलर हुए थे, जो आज भी लोगों को याद हैं। उसी तरह दूसरे सीजन में ऐसे कई डायलॉग्स हैं जो फैन्स को काफी पसंद आ रहे हैं। 'मिर्जापुर 2' के इन डायलॉग्स की वजह से सीरीज का भौकाल टाइट है।
-कुछ लोग बाहूबली पैदा होते हैं और कुछ को बनाना पड़ता है, इनको बाहुबली बनाएंगे।
-औरत चाहे चंबल की हो या पूर्वांचल की, जब गन उठाई है तो इसका मतलब है कि दिक्कत में है।
-जब कुर्बानी देने का टाइम आए तो सिपाही की दी जाती है। राजा और राजकुमार जिंदा रहते हैं गद्दी पर बैठने के लिए।
-शादीशुदा मर्द को अपनी स्त्री से भय न हो तो इसका मतलब है कि शादी में कुछ गड़बड़ है।
-शर्मा से क्या शर्माना, दिस इज ए कॉमन डिजीज।
-दिखाते समय कॉन्फिडेंस हो तो पब्लिक पूछती नहीं कि फाइल में क्या है।
-बातें ज्यादा हुई नहीं, बस आहट लेकर आ गए
तय समय से पहले रिलीज हुई मिर्जापुर 2
वेब सीरीज मिर्जापुर 2 ओटीटी प्लैटफॉर्म अमेजन प्राइम पर तय समय और तारीख से पहले ही रिलीज कर दी गई है। दरअसल, यह 23 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी, लेकिन स्ट्रीमिंग प्लैटफॉर्म ने इसे तीन घंटे पहले ही रिलीज कर दिया। अमेजन प्राइम पर यह सीरीज 22 अक्टूबर को रात 8 बजे रिलीज की गई।
बता दें कि पिछले सीजन की तरह इस सीजन में भी पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु शर्मा, अली फजल, रसीका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी और हर्षिता गौर मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं लेकिन सीजन में कुछ किरदारों को जोड़ा गया है जिनकी भूमिका विजय वर्मा, ईशा तलवार और प्रियांशु पैनयुली निभा रहे हैं। मिर्जापुर 2 का निर्देशन करण अंशुमन और पुनीत कृष्णा ने किया है।
मिर्जापुर 2 समीक्षा
स्टारकास्ट: पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा, श्वेता त्रिपाठी, रसिका दुग्गल, विजय वर्मा
डायरेक्टर: गुरमीत सिंह और मिहिर देसाई
रेटिंग: 3 स्टार
अमेजन प्राइम वीडियो की पॉप्युलर वेब सीरीज मिर्जापुर का दूसरा सीजन 22 अक्टूबर को रिलीज हो चुका है। सीरीज में पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु शर्मा, श्वेता त्रिपाठी, अली फजल जैसे सितारों ने काम किया है। हालांकि, कहानी को दिलचस्प बनाने के लिए इस बार कुछ नए सितारों को भी सीजन 2 से जोड़ा गया है। पिछले सीजन की तरह इस बार भी कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) का भौकाल बरकरार नजर आया।
मिर्जापुर 2 में पहले सीजन के आगे की कहानी को दिखाया गया है। पहले सीजन के लास्ट एपिसोड में मुन्ना त्रिपाठी (दिव्येंदु शर्मा), बबलू पंडित (विक्रांत मैसी) और स्वीटी (श्रिया पिलगांवकर) का मार देता है। लेकिन गुड्डू पंडित (अली फजल) और गोलू (श्वेता त्रिपाठी) बच जाते हैं। इसके बाद अब बदला लेने और मिर्जापुर पर राज करने की कहानी शुरू होती है। गुड्डू पंडित भाई और अपनी पत्नी की मौत का बदला, मुन्ना व उसके पिता कालीन भैया से लेना चाहता है। और इस काम में साथ देती है गोलू।
इस सीजन में शुरू के दो एपिसोड गुड्डू पंडित और गोलू के सर्वाइवल पर हैं। दूसरे सीजन की शुरुआत से लेकर अंत तक कहानी परेशान नहीं करती है। बीच-बीच में कॉमेडी, शानदार डायलॉग और सस्पेंस ने जबरदस्त तड़का लगाया गया है। सीरीज में जो बड़े बदलाव होते हैं वह है गोलू का बंदूक उठा लेना और गुड्डू भइया का लंगड़ा हो जाना। कालीन भैया की पत्नी (रसिका दुग्गल) का किरदार आगे-आगे निखर कर आता है।
इस बार कहानी मिर्जापुर से निकलकर लखनऊ तक जा पहुंचती है। गुड्डू पंडित के बदलने की आग और मुन्ना भइया का गद्दी से जुड़ा लालच पूरी सीरीज में स्वाद जमाए रहता है। गुड्डू पंडित अपनी पूरी ताकत के साथ वापसी करता है। लखनऊ में इन्वेस्टमेंट का बिजनेस चलाने वाला रॉबिन (विजय वर्मा) और जौनपुर का बाहुबली रति शंकर शुक्ला का बेटा शरद (अंजुम शर्मा) ने सीरीज को और रोचक बना दिया है। कहानी बढ़ने के साथ-साथ इन किरदारों की अहमियत समझ आती। अब मिर्जापुर की गद्दी पर कौन बैठता है, यह जानने के लिए आपको वेब सीरीज देखनी पडे़गी।
मिर्जापुर के पहले सीजन के बाद सीरीज के डायरेक्टर गुरमीत सिंह और मिहिर देसाई के लिए इस बार पहले से ज्यादा बड़ी चुनौती थी। इस बार भी वह दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब हुए हैं। सीरीज का पहला एक एपिसोड खत्म होने के बाद आपको इसका दूसरा एपिसोड देखने पर मजबूर कर देगा।
शौर्यपथ / व्रत में खाए जाने वाली चीजों में साबूदाना सबसे ज्यादा खाया जाता है व्रत के बिना भी कुछ लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में खाए जाने वाले यह आहार आखिर कैसे बनता है? आइए, जानते हैं इससे जुड़े फायदे-
इस पेड़ के तने से बनता है साबूदाना
साबूदाना किसी अनाज से नहीं बनता है, बल्कि यह सागो पाम नामक पेड़ के तने के गूदे से बनता है। सागो, ताड़ की तरह का एक पेड़ होता है। ये मूलरूप से पूर्वी अफ्रीका का पौधा है। इस पेड़ का तना मोटा हो जाता है और इसके बीच के हिस्से को पीसकर पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद इस पाउडर को छानकर गर्म किया जाता है जिससे दाने बन सके। साबूदाना के निर्माण के लिए एक ही कच्चा माल है ‘टैपिओका रूट’ जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘कसावा’ के रूप में जाना जाता है। कसावा स्टार्च को टैपिओका कहा जाता है।
ऐसे बनता है साबूदाना
भारत में साबूदाना टैपिओका स्टार्च से बनाया जाता है। Tapioca स्टार्च को बनाने के लिए कसावा नामक कंद का इस्तेमाल किया जाता है जो बहुत हद तक शकरकंद जैसा होता है। इस गूदे को बड़े-बड़े बर्तनों में निकालकर आठ-दस दिन के लिए रखा जाता है और रोजाना इसमें पानी डाला जाता है। इस प्रक्रिया को 4-6 महीने तक बार-बार दोहराया जाता है। उसके बाद बनने वाले गूदे को निकालकर मशीनों में डाल दिया जाता है और इस तरह साबूदाना प्राप्त होता है, जिसे सुखाकर ग्लूकोज और स्टार्च से बने पाउडर की पॉलिश की जाती है और इस तरह सफेद मोतियों से दिखने वाले साबूदाने बाजार में आने के लिए तैयार हो जाते हैं।
इन गुणों से भरा है साबूदाना
इसमें कार्बोहाइड्रेट काफी मात्रा में पाया जाता है और कैल्शियम और विटामिन-सी की कुछ मात्रा भी मौजूद होती है। इसी कारण व्रत में इससे बनी चीजें खाने का चलन बढ़ता गया है। इससे खिचड़ी, हलवा, चाट आदि व्रत वाली रेसिपीज बनाई जाती है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / मां दुर्गा का नौ दिनों का पावन पर्व कन्या पूजन के साथ ही समाप्त होता है। कुछ लोग अष्टमी को तो कुछ लोग अपने नवमी को अपनी परंपराओं के अनुसार कन्या पूजन करते हैं। ऐसे में मां कन्या पूजन को शुभ मुहूर्त में सही विधि विधान से किया जाना चाहिए। इस बार अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर सभी कंफ्यूज हैं ,तो हम आपको बता दें कि शुक्रवार को सप्तमी का व्रत है, जो लोग अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं, वे लोग सप्तमी शुक्रवार को व्रत रखेंगे और शनिवार को अष्टमी का कन्या पूजन करेंगे। इसके अलावा जो लोग नवमी को कन्या पूजन करते हैं, वे लोग शनिवार को अष्टमी का व्रत रखेंगे और रविवार को कन्या पूजन करेंगे।
कन्या पूजन विधि
इस बार किसी भी नवरात्रि व्रत का क्षय नहीं हुआ है। नवरात्रि के नौ दिनों के व्रत हैं। इस बार दशहरा और नवमी एक ही दिन हैं। कन्या पूजन के लिए नौ कन्याओं का पूजन किया जाता है। इनके लिए हलवा पूड़ी और चने प्रसाद के रूप में बनाए जाे हैं। इसके साथ ही कन्याओं को नारियल, फल और दक्षिणा और कहीं, कहीं चूड़िया और बिंदी भी दी जाती है। कन्याओं को सबसे पहले एक साथ बैठाकर उनके पैर एक थाली में धोए जाते हैं। इसके बाद उन्हें कलावा बांधकर तिलक लगाया जाता है, फिर भरपेट भोजन कराया जाता है।
शौर्यपथ /ग्रीन-टी न सिर्फ दिल, बल्कि दिमाग की सेहत के लिए भी फायदेमंद है। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के हालिया शोध की मानें तो इसमें मौजूद कैफीन 'एडिनोसिनÓ का उत्पादन बाधित करती है। 'एडिनोसिनÓ एक अहम न्यूरोट्रांसमिटर है, जो यह निर्धारित करता है कि व्यक्ति कब सुस्त या तरोताजा महसूस करेगा। इसकी अधिकता से तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने और अल्जाइमर पनपने के संकेत मिले हैं।
शोध दल में शामिल डॉ. मेलिंडा रिंग के मुताबिक ग्रीन-टी में 'एल-थियानिनÓ नाम का एक यौगिक भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। स्ट्रेस हार्मोन 'कॉर्टिसोलÓ का स्तर घटाने और फील गुड हार्मोन 'सेरोटोनिनÓ का स्त्राव बढ़ाने में इसे खासा असरदार पाया गया है। यह भी देखा गया है कि कैफीन और 'एल-थियानिनÓ मिलकर याददाश्त, तर्क शक्ति व एकाग्रता में इजाफा कर सकते हैं। चूंकि, ग्रीन-टी में कॉफी के मुकाबले कैफीन का स्तर काफी कम होता है, इसलिए इसका सेवन उसके साइडइफेक्ट को भी दूर रखता है।
रक्तचाप घटाने में कारगर
रिंग ने ग्रीन-टी को रक्तचाप घटाने में भी बेहद असरदार करार दिया। उन्होंने 2016 में प्रकाशित एक अमेरिकी अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें हफ्ते में कम से कम छह कप ग्रीन-टी पीने वालों के हाइपरटेंशन का शिकार होने का खतरा 33 फीसदी कम मिला था।
कोलेस्ट्रॉल काबू में रहेगा
शोधकर्ताओं ने बताया कि ग्रीन-टी में 'कैटेचिनÓ नाम का एंटीऑक्सीडेंट भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह खाने में मौजूद कोलेस्ट्रॉल को सोखने की शरीर की क्षमता घटाता है। यही वजह है कि जो लोग दिन में दो कप ग्रीन-टी पीते हैं, उनमें हार्ट अटैक का खतरा आधा हो जाता है।
हड्डियां-मांसपेशियां मजबूत होंगी
-ग्रीन-टी हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए भी अहम है। इसमें मौजूद फ्लैवेनॉयड जहां हड्डियों-मांसपेशियों में क्षरण की शिकायत दूर रखते हैं, वहीं फाइटोएस्ट्रोजन ऊतकों को नुकसान नहीं पहुंचने देते। मांसपेशियों का विकास सुनिश्चित करने में भी उनकी अहम भूमिका है।
सेहत / शौर्यपथ / कोरोना काल में कई महीने से घर के अंदर रहने के कारण बच्चों को नजर कमजोर हो रही है। उनको दूर की चीजें देखने में दिक्कत महसूस हो रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना काल में बच्चे घरों में मोबाइल-कम्प्यूटर स्क्रीन पर घंटों काम कर रहे हैं। इससे उन्हें निकट दृष्टि रोग (मायोपिया) हो सकता है, जिसमें दूर की चीजें धुंधली दिखाई देती हैं। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल शर्मा के मुताबिक कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच फिलहाल घर से ही पढ़ाई हो रही है। कई घंटों तक चलने वाली ऑनलाइन क्लास के दौरान बरती गईं छोटी-छोटी लापरवाही आंखों में खुजली, लालिमा, रुखापन और सिरदर्द को बढ़ा रही हैं। लम्बे समय तक ऐसी स्थिति रही तो इससे मायोपिया हो सकता है। बच्चों में मोबाइल व टीवी के बढ़ते इस्तेमाल, आउटडोर खेलों से दूरी व लगातार पढ़ते रहने से यह बीमारी तेजी से फैल रही है। बच्चों को एक घंटे से ज्यादा मोबाइल या टीवी न इस्तेमाल करने दें।
धुंधलापन और रूखापन की समस्या
स्क्रीन पर आंखों की पलकें नहीं झपकती हैं। जिसकी वजह से बच्चों की आंख में चुभन, दर्द, जलन और सूखने की दिक्कतें आ रही हैं। काफी देर बाद स्क्रीन से आंख हटाने पर दूर की चीजें धुंधली दिखने के साथ आंखों में तनाव और थकान लगती है। सिरदर्द, ज्यादा पलक झपकाना, आंख रगडऩा और बच्चों में थकान महसूस करना, देखने में परेशानी के संकेत हो सकते हैं। अगर मायोपिया का इलाज नहीं किया जाता है तो यह भविष्य में मायोपिक मैक्युलर डीजनरेशन, रेटिनल डिटैचमेंट, कैटेरेक्ट्स और ग्लुकोमा जैसी गंभीर बीमारियों की प्रवृत्ति का कारण बन सकती है। पढ़ाई के बीच एक घंटे के अंतराल पर आंखों को आराम देना चाहिए। रोजाना खिड़की से दूर की चीजें दिखाएं।
दिल्ली और आसपास के 13.1 फीसदी बच्चे मायोपिया के शिकार
एम्स में कुछ साल पहले हुए अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली और इसके आसपास के शहरों में करीब 13.1 फीसदी बच्चे मायोपिया से पीडि़त हैं। ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना काल में अभिभावकों को बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
ऐसे करें बचाव
20/20/20 नियम का पालन करें
गंगाराम अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ग्रोवर अभिभावकों को 20/20/20 रूल को फॉलो करने की सलाह देते हैं। इसके तहत हर 20 मिनट में बच्चों को 20 फीट की दूरी पर कम से कम 20 सेकंड के लिए कुछ देखना चाहिए। इससे आपकी आंखों को आराम मिलता है और वे अपने नेचुरल पोज में आ जाती हैं।
मोबाइल की जगह कंप्यूटर या लैपटॉप इस्तेमाल करें। स्क्रीन की तेज रोशनी से बचाव करने वाले एंटीग्लेयर चश्मे का इस्तेमाल करें। योग को जीवन शैली का हिस्सा बनाएं। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के वक्त खुले कमरे या प्राकृतिक रोशनी में बैठाना चाहिए। क्योंकि मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन की लाइट आंखों पर पड़ती है, जो नुकसानदायक है।
ये व्यायाम भी करें
हाथ योग
अपने दोनों हाथों को तब तक रगड़ें, जब तक की वो गर्म न हो जाएं। अब अपने हाथों को अपनी आंखों पर रख लें। इससे आंखों के आस-पास की नसों को आराम मिलेगा और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा।
आंखों की पुतलियों को क्लॉकवाइस और एंटी-क्लॉकवाइस घुमाएं। ऐसा अपनी आंखें बंद कर के करें। इसे दिन में दो बार करें। हालांकि, इसे आप दिन में दो से अधिक बार भी कर सकते हैं।
क्या है मायोपिया या निकट दृष्टि रोग
मायोपिया या निकट दृष्टि रोग में आंख की पुतली (आई बॉल) का आकार बढऩे से प्रतिबिंब रेटिना पर बनने के बजाय थोड़ा आगे बनता है। इससे दूर की वस्तुएं धुंधली और अस्पष्ट दिखाई देती हैं, लेकिन पास की वस्तुएं देखने में कोई परेशानी नहीं होती है।
कोरोना काल में बच्चों और वयस्कों को घर पर घंटों ऑनलाइन काम करना पड़ रहा है। इससे उनकी आंखों की रोशनी प्रभावित हो रही है। अस्पतालों में आंखों में जलन, ड्राइनेस और धुंधलापन के काफी मामले आ रहे हैं। लोग एहतियात रखेंगे तो वे इन परेशानियों को नियंत्रित कर सकते हैं।
सेहत / शौर्यपथ /शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक औषधियों की रानी कही जाने वाली तुलसी की मांग वैश्विक महामारी कोरोना काल में बढ़ गयी है। आयुष अस्पताल एवं रिसर्च सेन्टर के आयुवेर्दाचार्य नरेन्द्र नाथ का कहना है कि तुलसी कई बीमारियों का रक्षा कवच है। यह हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में अहम् भूमिका का निर्वहन करती है।
इसकी पत्तियों में विटमिन सी, कैल्शियम, जिंक और आयरन के साथ ही सिट्रिक टारटरिक एवं मैलिक एसिड भी प्राप्त होता है। इनमें एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभ दायक होते हैं। आयुवेर्दिक कंपनियां दवाइयां बनाने में इसका इस्तेमाल करती हैं।
उन्होने बताया कि आयुवेर्द में तुलसी को रोग नाशक जुडी-बूटी माना जाता है। इसे सौ बीमारियों की 'एक दवाÓ कहें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। यह सदीर्-जुकाम और गले में खरास से राहत दिलाने के लिए इसकी पत्तियों और कालीमिर्च का काढ़ा रामबाण साबित होता है। वहीं कोरोना वायरस से बचाव के दौरान लोगों के काढ़ा तैयार कर उपयोग में लाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी सहायक हुई है।
आयुवेर्दाचार्य नरेन्द्र नाथ ने बताया कि आयुवेर्द मे इसे रोग नाशक जड़ी-बूटियों की रानी कहा गया है।Óतुलसी पंचाग (जूस) वैज्ञानिक दृष्टकोण से 90 फीसदी क्षारीय (एल्काइन) होता है। यह प्रतिरोधक क्षमता के लिए श्वेत रक्त कणिकाओं (डब्ल्यूबीसी) का निमार्ण करते हैं जिसे ही हम इम्यून या प्रतिरोधकता कहते हैं। उन्होने बताया कि जब शरीर अधिक लवणीय हो जाती है तब डब्ल्यूबीसी का निमार्ण होना कम हो हो जाता है जिसे समस्त बीमारियों की जननी कहते हैं।
उन्होने बताया कि इसमें इसेंसियल ऑयल, वोलेटाइल ऑयल पाया जाता है जो एंटीवैक्टीरीअल, एंटीवायरल, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक गुण पाया जाता है जो शरीर के समस्त धातुओं के विषैलापन को दूर करता है और शरीर के मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है। तुलसी की चाय का सेवन किया जाए तो इससे कैंसर होने की संभावना काफी कम हो जाती है क्योंकि तुलसी कैंसर को जन्म देने वाली अनियंत्रित कोशिकाओं को बढ़कर विभाजित होने से रोकता है और कैंसर से शरीर की रक्षा करता है।
तुलसी का प्रयोग आयुवेर्द, यूनानी, होम्योपैथी एवं एलोपैथी दवाओं में होता है। इसकी जड़, तना, पत्तियों समेत सभी भाग उपयोगी हैं। तुलसी में विटामिन व खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह सभी रोगों में लाभप्रद मानी जाती है। वह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ कफ, वात दोष, पाचन शक्ति बढ़ाने बुखार, पेटदर्द, बैक्टीरियल संक्रमण खत्म करने में काम आती है। श्वांस लेने में हो रही परेशानी को राहत दिलाने में सहायक होती है।
आयुवेर्दाचार्य का कहना है कि जिन लोगों का इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होता है उन्हें कोरोना का खतरा ज्यादा होता हैण। ऐसे में इम्यूनिटी सिस्टम मजबत रहना आवश्यक है। इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए वैसे तो कई तरीके हैं लेकिन इसे नेचुरल तरीके से बढ़ाया जा सकता है। नेचुरल तरीके से इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए काढ़ा सबसे अच्छा ऑप्शन है। तुलसी और काली मिर्च का काढ़े से इम्युनिटी मजबूत होगी और शरीर कोरोना से लडऩे में बेहतर रूप से सक्षम हो पाएगा।
नरेन्द्र नाथ ने बताया कि श्वास संबंधित रोग, बुखार, जुकाम को ठीक करती है। किडनियों को स्वस्थ रखती है। इसकी पत्तियों में चमकीला वाष्पशील तेल पाया जाता है जो कीड़ों एवं वैक्टीरिया के खिलाफ काफी कारगर साबित होता है। तुलसी को संजीवनी बूटी की संज्ञा भी दी गयी है। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होने बताया कि यह स्ट्रेस और डिप्रेसन को भी दूर भागने में सहायक होता है। पारंपरिक तुलसी का उपयोग कंजक्टीवाइटिस (आंख आना) की समस्या से राहत पहुंचाता है। किसी भी प्रकार के श्वसन संबंधी रोग के दौरान इसका उपयोग गुणकारी है।
नैनी क्षेत्र के फूलमंडी में तुलसी विक्रेता रोशन ने बताया कि कोरोना काल में लोगों का विश्वास आयुवेर्द के प्रति बढ़ा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने वाली औषधियों में तुलसी की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। कोरोना से पहले तुलसी की पत्तियों की कीमत 50 रुपये प्रति किलो थी, जो कि अब 100 किलो से अधिक तक पहुंच गई है। फुटकर बाजार में तो यह और भी महंगी बिक रही है। इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर गिलोय और अश्वगंधा के मूल्यों में भी मांग के कारण उछाल आया है।
शौर्यपथ विशेष / बिहार में विधान सभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही नौकरियों का अम्बार लग गया तो कही शराबबंदी हटाने के वादे किये जा रहे तो कही दल बदलुओ को सबक सिखाने की बात हो रही है जिस के मन में जो आये वादे पर वादे किये जा रहा है . खैर चुनावी वादों का पिटारा कितना भरा होता है और कितना खाली अब आम जनता भी समझने लगी है और सोंचने पर विवश भी हो रही है . बिहार के चुनाव में तेजस्वनी यादव 10 लाख की नौकरी देने का वादा कर रहे है किन्तु इन नौकरी के वादे में करोडो का भुगतान कैसे होगा इसका कोई जवाब नहीं दे पा रहे है वही भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष देश में लगभग 300 आतंकी के प्रवेश की आशंका जता कर भाजपा को जिताने की अपील कर रहे है अब अचानक ये आतंकी कहा से आगये इसका जवाब भाजपा राष्ट्रिय अध्यक्ष ही दे सकते है .
बिहार विधानसभा चुनाव में हो रही रैली को देख कर ऐसा नहीं लगता कि ये वही भारत है जहां अभी कोरोना के मरीज सबसे ज्यादा पाए जा रहे है और लगातार संख्या में बढ़ोतरी हो रही है . सोशल डिस्टेंस का ज्ञान देने वाले नेता सिर्फ टीवी में ही ज्ञान दे रहे है उन्हें पुरे देश में इसका पालन करवाने की अपील की जा रही है किन्तु बिहार और मध्यप्रदेश के उपचुनाव में ये सोशल डिस्टेंस सिर्फ किवदंती बनकर रह गयी है . खैर ये चुनावी वादे है राजनैतिक पार्टी कितना सिद्धांत पर चलती है और कितने वादे पुरे करती है ये भविष्य की गर्त में है क्योकि यहाँ यह भी देखा गया है कि सत्ता के लिए सारे सिद्धांत ताक पर रख दिए जाते है एक दुसरे पर आरोप की छड़ी लगाने वाले नेता सत्ता के लालच में देशभक्त और देशद्रोही की श्रेणी में एक दुसरे को तौलने और पाला बदलने से भी नहीं चुकते ये चलता रहा है और भविष्य में भी चलता रहेगा .
किन्तु इन वादों के बीच देश की वित्त मंत्री ने जो ब्यान दिया उससे देश की जनता को काफी आहात हुई है . बिहार चुनाव के देश की वित्त मंत्री ने अपने चुनावी वादे में कोरोना आपदा की तकलीफ को भी भुनाने में देर नहीं की कुछ समय पहले यही वित्त मंत्री जी ने प्याज की बढ़ती कीमत पर कहा था कि प्याज की कीमत बढऩे पर मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योकि हम प्याज नहीं खाते तब भी उनके इस तरह के ब्यान की काफी आलोचना हुई थी अब एक बार फिर वित्त मंत्री ने भारत के आम जनता के जिन्दगी में तूफ़ान मचने वाले कोरोना बिमारी पर एक ब्यान दे दिया वित्त मंत्री ने कहा कि अगर बिहार में भाजपा की जीत होगी तो बिहार की जनता को मुफ्त में कोरोना वेक्सिन दी जाएगी . वित्त मंत्री जी क्या भारत के सभी नागरिक और बिहार के नागरिक एक ही देश के निवासी नहीं है फिर ये कैसा सत्ता का नशा और कैसी सत्ता की ताकत आप वित्त मंत्री है जनता के द्वारा चुनी जनप्रतिनिधि है देश के लोकतंत्र में एक बड़े पद में विराजमान है आपने पद ग्रहण करते समय कसम खाई थी कि बिना भेदभाव के देश की सेवा करुँगी कहा गयी अब वो कसम .क्या आम जनो की जान की कीमत लगाना सही है . सिर्फ भारत ही नहीं पूरा विश्व कोरोना वेक्सिन का इंतज़ार कर रहा है और आप है कि सत्ता में जीत के बदले वेक्सिन की कीमत भी तय कर दी कि मुफ्त लगेगा या पैसे से लगाया जायेगा खैर आपकी गलती भी नहीं है भारत की विशाल जनसँख्या में अभी भी ऐसे कई लोग है जो आपके इस फैसले को देशभक्ति के रूप में प्रचारित करेंगे चलिए आपकी बात सही हो और बिहार में आपकी सत्ता आ जाये फिर कम से कम एक प्रदेश में तो मुफ्त में वेक्सिन लगवा दीजियेगा बस ये बता दीजिये कि वेक्सिन कब आएगी , क्या अच्छे दिन जैसे इंतज़ार करना पड़ेगा , क्या जिस तरह सालाना 2 करोड़ नौकरी के वादा पूरा होने का इंतज़ार कर रहे उस तरह इन्तजार करना पड़ेगा या सिर्फ जुमलेबाजी है जो भी हो एक बार तो सच बोल दीजिये कि हमारी जिन्दगी बचेगी कि नहीं हम भी उस देश के निवासी है जिस देश में आप वित्त मन्त्री है ...( शरद पंसारी की कलम से )
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
