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June 03, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

दुर्ग / शौर्यपथ / कहते है इस दुनिया में जब तक बेवकूफ है होशियार लोग भूखे नहीं मर सकते . धोखाधड़ी ,जालबाजी के नित नए किस्से अखबारों के माध्यम से सामने आते ही रहते है जिसमे कई मामले ऐसे होते है जिसमे जो पहले आरोपी नजर आता है वही बाद में पीडि़त साबित होता है . चेहरों से आदमी की पहचान इस कलयुग में तो लगभग असंभव है . आज ऐसे ही एक मामले की बात करते है जिसमे एक व्यक्ति द्वारा दुसरे व्यक्ति से जालसाजी कर 21 लाख का गबन का मामला सामने आया है .
मामला है उरला निवासी देवेन्द्र सिंह और सूर्या विहार कालोनी निवासी सुखदेव सिंह का . सुखदेव सिंह द्वारा पिछले माह मोहन नगर थाना में एक एफआईआर दर्ज कराई गयी जिसमे उरला निवासी देवेन्द्र सिंह द्वारा 21 लाख के गबन का मामला है . एफआईआर में कहा गया कि देवेन्द्र द्वारा अपनी जमीन का सौदा करना चाहता है और बैंक के ब्याज से परेशान होकर बैंक में पैसे पटा कर दस्तावेज को बंदक मुक्त करने की बात कही गयी और इसी भरोसे 31 लाख के सौदे में 21 लाख 3 माह के अंतराल में दिसम्बर 2017 व फरवरी 2018 को दो भागो में ( 6 लाख व 15 लाख दे दिए ) चुकी सारी रकम आरटीजीएस हुई इसलिए कोई दो मत नहीं की पैसे ट्रांसफर हुए . किसी भी व्यक्ति को इतने पैसे अगर डूबता हुए दिखे तो उसका चिंतित होना स्वाभाविक है .
वही जब इस आरोप के बारे में देवेन्द्र पाल सिंह लूथरा की धर्मपत्नी से जानकारी चाही गयी तो उनका कथन कुछ और ही कहानी बया कर रहा है . श्रीमती लूथरा के अनुसार देवेन्द्र पाल और सुखदेव की कभी मुलाक़ात ही नहीं हुई मुलाक़ात की बात तो दूर जिस समय इस रकम के लेन देन का मामला था उस समय भी मिलना तो दूर कभी एक दुसरे से फोन पर भी बात नहीं हुई ये रकम देवेन्द्र पाल के खाते में आयी ज़रूर है किन्तु देवेन्द्र पाल ने इस रकम को अपने किसी परिचित से ली थी जो की उसने यह रकम आरटीजीएस करवा देने की बात की और जिस परिचित से ये रकम ली गयी उसे इस रकम को नगद रूप में किस्तों में वापस कर दिया गया एवं जिस जमीन के सौदे की बात और बंधक की बात कही गयी है उस जमीन का क्रय ही 2017 के मध्य में हुआ एवं प्रमाणीकरण 8-9 माह में हुई . ऐसे में जमीन बैंक में बंधक रखने का सवाल ही नहीं उठता .
आखिर क्या खेल चल रहा है सुखदेव , देवेन्द्र और एक अज्ञात व्यक्ति के बीच
इस मामले में कुछ ऐसे प्रश्न है जो कई तरह की शंका पैदा करते है है . देवेन्द्र का कहना है कि उसकी सुखदेव से कभी बात नहीं हुई किन्तु पैसा सुखदेव के खाते से देवेन्द्र के खाते में आये . वही सुखदेव सिंह का कहना है कि देवेन्द्र उनके ऑफिस जमीन के कागज़ लेकर आया और जमीन को बंधक मुक्त करने के लिए जमीन का सौदा किया एवं सौदा 31 लाख में तय होने के बाद एडवास की रकम 21 लाख दिसम्बर 2017 में व फरवरी 2018 में दी गयी किन्तु दो साल तक जब रकम या जमीन नहीं मिलती दिखी तब पुलिस की शरण में जाना पडा किन्तु इन दो सालो में एक बार भी देवेन्द्र और सुखदेव के बीच कोई मुलाकात क्यों नहीं हुई कभी फोन पर बात क्यों नहीं हुई मुलाक़ात हुई ना हुई ये जांच का विषय है उसी तरह फोन पर एक बार भी इतने बड़े लेन दें करने वालो के बीइच बात ना होना आश्चर्य की बात है वही जब पहली मुलाक़ात जमीन के सौदे में हुई तो सुखदेव ने आखिर देवेन्द्र के खाते में 5 लाख की रकम 9 माह 2017 में क्यों ट्रांसफर किये और किसके कहने पर ट्रांसफर किये वो भी तब जब दोनों एक दुसरे को जानते तक नहीं थे फिर इस रकम का जिक्र क्यों नहीं . हर सवाल में एक तीसरा व्यक्ति है आखिर वो तीसरा व्यक्ति कौन है क्या पुलिस प्रशासन मामले की गहराई से छानबीन करेगी क्योकि कई ऐसे तथ्य है जो मामले में किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहे है ...

नई दिल्ली / शौर्यपथ / जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को रिहा करने के आदेश जारी कर दिया गया है. जम्मू कश्मीर सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने यह जानकारी दी है कि पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को रिहा किया जा रहा है. महबूबा मुफ्ती को पिछले साल 4 अगस्त को उस समय नजरबंद कर दिया गया था, जब केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर राज्य को दो भागों में बांटने के साथ ही उसका विशेष दर्जा छीन लिया था.
बताते चले कि पिछले महीने के अंत में महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती की जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत अपनी मां को बंदी बनाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से पूछा था कि महबूबा को कब तक हिरासत में रखा जा सकता है? कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अपने रुख की जानकारी देने के लिए कहा था.
विशेष दर्जे की लड़ाई के लिए दशकों पुरानी दुश्मनी भूल एकजुट हुए जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दल
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला, जो पिछले साल अगस्त से नजरबंद थे, पहले ही रिहा हो चुके हैं. मुफ्ती को उनके घर पर हिरासत में लिया गया था, जिसे सरकार द्वारा "सहायक जेल" घोषित किया गया था. पब्लिक सेफ्टी एक्ट या पीएसए के तहत किसी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के कई बार हिरासत में रखा जा सकता है.

जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत, सांसद गुहाराम अजगल्ले और जिले के विधायकों ने विधानसभा निर्वाचन विकास योजना एवं स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत कोविड उपचार के लिए कुल 95.5 लाख रूपये की अनुशंसा की है।
जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी से जारी प्रेस नोट के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष डॉ महंत ने विधानसभा निर्वाचन विकास योजना के तहत टाटा एंबुलेंस, पोर्टेबल एक्सरे मशीन, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के लिए कुल 30 लाख रूपये की अनुशंसा की है। इसी प्रकार जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री अजगल्ले ने स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत पीपीई कीट, एन 95 मास्क, ट्रिपल लेयर मास्क, सैनिटाइजर के लिए कुल 5 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।
पामगढ़ विधायक श्रीमती इंदू बंजारे ने एंबुलेंस के लिए 18.5 लाख रुपए की अनुशंसा की है। चंद्रपुर विधायक श्री राम कुमार यादव ने एंबुलेंस, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के लिए 10 लाख रुपए, जांजगीर-चांपा विधायक श्री नारायण प्रसाद चंदेल ने पीपीई कीट व्हीटीएम कीट, स्ट्रेराईल स्वाब सहित सर्जिकल मास्क, सैनिटाइजर, थर्मल स्कैनर एवं सर्जिकल ग्लब्स के लिए 11 लाख रूपये, अकलतरा विधायक श्री सौरभ सिंह ने पीपीई कीट, एड 95 मास्क, ट्रिपल लेयर मास्क, पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर के लिए 11 लाख रूपये, जैजैपुर विधायक श्री केशव प्रसाद चन्द्रा ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, स्ट्रेचर, ट्राली, ऑक्सीजन सिलेंडर, नेबुलाइजर, नेबुलाइजर मास्क, आईव्ही स्टैंड, ऑक्सीजन ट्रॉली, फ्लो मीटर और ऑक्सीजन मास्क के लिए कुल 10 लाख रूपये की अनुशंसा की है। जनप्रतिनिधियों द्वारा राशि की अनुसंशा से जिले में कोरोना संक्रमित लोगों के बेहतर उपचार में सहायता मिलेगी।

दंतेवाड़ा / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य  राज्य की माननीया राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके ने ट्विटर के माध्यम से कहा कि जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र के जिला प्रशासन की यह पहल सराहनीय है इस तरह वे पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा रहे हैं तथा लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी कर रहे हैं ऐसे कार्यों को बढ़ावा देने के लिए वह जिला प्रशासन तथा किसानों को शुभकामनाएं दे रही हैं इन से प्रेरणा लेते हुए जिले के अन्य किसानों द्वारा जैविक खेती से अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए। जिले के किसानों के द्वारा रसायनिक खाद का उपयोग किए बगैर जैविक पद्धति से खेती की जा रही है। जिसके फलस्वरूप अब दंतेवाड़ा जिले में कृषि करने के लिए जैविक फसलों का उत्पादन हो रहा है। अब रासायनिक खादों जहरीले कीटनाशकों के उपयोग के स्थान पर जैविक खादों एवं दवाइयों का उपयोग कर अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। दन्तेवाड़ा के कलेक्टर श्री दीपक सोनी के द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्य योजना बनायी गयी है। जिसे क्रियान्वित कर यहां कि जैविक फसलों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। जिससे भूमि जल एवं वातावरण शुद्ध रहेगा और मनुष्य एवं प्रत्येक जीवधारी स्वस्थ रहेंगे जिले के किसानों ने जैविक खाद का उपयोग कर तरह-तरह के सब्जियों की खेती कर रहे हैं जिससे उनकी अर्थव्यवस्था सुधरने लगी है वर्मी कंपोस्ट खाद का उपयोग करके किसानों ने पैदावार अधिक से अधिक करके अपनी रोजमर्रा के जीवन को एक नया आयाम दिया है संपूर्ण विश्व में बढ़ती हुई जनसंख्या एक गंभीर समस्या है बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ भोजन की आपूर्ति के लिए मानव द्वारा खाद की होड़ में अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए तरह-तरह की रासायनिक खादों, जहरीले कीटनाशकों का उपयोग, प्रकृति के जैविक और अजैविक पदार्थों के बीच आदान-प्रदान के चक्र को( इकोलॉजी सिस्टम) प्रभावित करता है। जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति खराब हो जाती है साथ ही वातावरण प्रदूषित होता है तथा मनुष्य के स्वास्थ्य में गिरावट आती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और कृषकों की आय का साधन खेती है।

 दंतेवाड़ा / शौर्यपथ / दंतेवाड़ा के स्थानीय निवासी के द्वारा जे.एम.डी.गरम मसाला एवं मिर्च में मिलावट तथा खराब गुणवत्ता की शिकायत की गई थी। जिस पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुष्मित देवांगन ने त्वरित कार्यवाही की। शिकायत में कहा गया है कि मैंने बस स्टैंड दंतेवाड़ा की दुकान से जे.एम.डी. ब्रांड का मिर्च और गरम मसाला खरीदा था जिसमें मिर्च का रंग सामान्य मिर्च से फीका था और डल्ला बना हुआ था और गरम मसाला का स्वाद भी अलग आ रहा था और सफेद दाने भी दिख रहे थे। जिसकी शिकायत दुकान से करने पर बोला कि वह कंपनी की गलती है हम नहीं बनाते। इस शिकायत के आधार पर दंतेवाड़ा नगर के विभिन्न किराना दुकानों में निरीक्षण एवं नमूना संकलन की कार्यवाही की गई इस दौरान सभी किराना दुकानों से पुराने जे.एम.डी. गरम मसाला तथा मिर्च में पुराने स्टॉक की संबंध में जानकारी दी गई बिल वाउचर की जांच के उपरांत पुराने स्टॉक के संबंध में जानकारी ली गई, बिल वाउचर के जांच के उपरांत पुराने स्टाफ को सीज कर उनसे लैब टेस्ट हेतु नमूना का संकलन भी कराया गयाद्य कार्यवाही के दौरान पुराने स्टॉक को सीलबंद कर व्यापारियों को निर्देश दिया गया है कि सैंपल कि रिपोर्ट आने तक सील बंद स्टॉक से छेड़छाड़ ना करें एवं सीलबंद स्टॉक को व्यापारियों की अभिरक्षा में में छोड़ा गया है। इस दौरान सभी किराना दुकानों में लगभग एक लाख मूल्य के गरम मसालों और मिर्च को सील बंद कर व्यापारियों की अभिरक्षा मैं उनके पास यह सैंपल रिपोर्ट आने तक छोड़ा गया है। रिपोर्ट के आधार पर यदि सैंपल फेल होता है तो नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही की जावेगी।

राजनांदगांव / शौर्यपथ / सिविल हॉस्पिटल खैरागढ़ में डॉक्टर की टीम ने विचारपुर नवागांव निवासी कोरोना पॉजिटिव महिला का प्रसव सफलतापूर्वक कराया। बीएमओ सिविल हॉस्पिटल डॉ. विवेक ने बताया कि जच्चा एवं बच्चा दोनों स्वस्थ है। डॉक्टर की पूरी टीम ने अपना फर्ज निभाते हुए कठिन एवं चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया। डॉक्टर की टीम में सिविल अस्पताल खैरागढ़ में चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रीति वैष्णव, स्टाफ नर्स पूर्णिमा ठाकुर और स्टाफ नर्स धनेश्वरी कुम्हार शामिल रहे। बच्चे के टीकाकरण का कार्य स्टाफ नर्स मंजु कामड़े और स्टाफ नर्स निशा कपूर के द्वारा किया गया।

बालोद / शौर्यपथ / कलेक्टर एंव जिला दण्डाधिकारी जनमेजय महोबे ने आदेश जारी कर कहा है कि नोवल कोरोना वायरस संक्रमण के नियंत्रण एवं रोकथाम को दृष्टिगत रखते हुए तथा वर्तमान में लगातार कोरोना पॉजिटिव प्रकरण पाए जाने के कारण कार्यालय के द्वारा 22 सितम्बर 2020 को नवरात्र पर्व के अवसर पर देवी मूर्ति की स्थापना एवं विसर्जन के संबंध में निर्देश प्रसारित किए गए थे। नवरात्र पर्व पर देवी मंदिरों में लगने वाली भीड़ एवं जिले के विभिन्न स्थानों में इस अवसर पर आयोजित होने वाले मेला आदि से कोरोना वायरस के संक्रमण के व्यापक संभाव्य को देखते हुए निम्नानुसार आदेश दिया गया है:- क्ॅवार नवरात्र 2020 के दौरान बालोद जिले अंतर्गत किसी भी धार्मिक एवं अन्य स्थलों पर मेला आदि के आयोजन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। मंदिर परिक्षेत्र में दर्शनार्थियों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। मंदिर प्रांगण के भीतर नियत स्थान पर ज्योत का प्रज्वलन मंदिर प्रबंधन द्वारा किया जा सकता है।
ज्योत प्रज्वलन की जिम्मेदारी केवल मंदिर समिति प्रबंधन की होगी। श्रद्धालु ज्योत जलवा सकेंगे, लेकिन ज्योत दर्शन हेतु दर्शनार्थियों एवं अन्य व्यक्तियों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। धार्मिक स्थलों के आसपास किसी भी प्रकार के दुकान/ठेला-आदि /व्यवसाय संचालन की अनुमति नहीं होगी। मंदिरों में पुजारी एवं मंदिर संचालक समिति पूजा-पाठ कर सकेंगे। नवरात्र पर्व के दौरान प्रसाद वितरण भोज, भण्डारा, जगराता अथवा सांस्कृतिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं होगी। किसी भी प्रकार के वाद्य यंत्र, ध्वनि विस्तार यंत्र, डीजे बजाने की अनुमति नहीं होगी। यथासंभव लोगों को घरों में रहकर नवरात्र पर्व के दौरान पूजा-पाठ के लिए प्रोत्साहित किए जाए। यह निर्देश तत्काल प्रभावशील होगा और कोविड-19 के रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु भारत सरकार एवं राज्य शासन द्वारा जारी समस्त दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा और निर्देशों का उल्लंघन करना पाया जाता है तो जिम्मेदारी मंदिर प्रबंधन समिति की होगी तथा उल्लंघन करने वाले के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 188 तथा एपीडेमिक डिसीज एक्ट एवं अन्य सुसंगत विधि के अनुसार कार्यवाही की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।

रायपुर / शौर्यपथ / वनांचल के आदिवासी किसानों के लिए रेशम कीट पालन अतिरिक्त आय का जरिया बन गया है। जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखण्ड के ग्राम जोरण्डाझरिया के लगभग 10-12 श्रमिकों ने टसर ककून का उत्पादन से रोजगार के संबंध में अपनी रुचि दिखाई। इनकी रुचि और इच्छाशक्ति को देखते हुए रेशम विभाग ने इनका एक समूह बनाया और इन्हें कुशल कीटपालन का प्रशिक्षण दिया गया। इस समूह को कृमिपालन के लिए टसर कीट के रोगमुक्त अण्डे भी निःशुल्क दिए गए। इस समूह के द्वारा वर्ष 2016-17 में पहली बार एक लाख 38 हजार 926 टसर कोकून का उत्पादन किया गया और उससे एक लाख 10 हजार 214 रुपये की आय अर्जित की गई। पहले महात्मा गांधी नरेगा से मजदूरी और उसके बाद कोसाफल उत्पादन के रुप में सहायक रोजगार ने समूह के सदस्यों को इस कार्य में उत्साही बना दिया है। समूह ने वर्ष 2016-17 से 2019-20 तक कुल 2 लाख 75 हजार 454 कोसाफलों का उत्पादन कर दो लाख 88 हजार रुपयों की आमदनी प्राप्त की है। यह आय उन्हें मजदूरी के रुप में विभाग के द्वारा स्थापित ककून बैंक के माध्यम से प्राप्त हुई।
जशपुर जिला मुख्यालय से 125 किलोमीटर दूर फरसाबहार विकासखण्ड में ग्राम जोरण्डाझरिया में अर्जुन पौधा रोपण और संधारण कार्य में लगभग 161 लोगों को 7 हजार 143 मानव दिवस का रोजगार मिला है। मनरेगा के माध्यम से कराए जा रहे इन कार्यों में 9 लाख 68 हजार रूपए का मजदूरी भुगतान किया गया है। जोरण्डाझरिया में रेशम विभाग द्वारा 59 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग दो लाख 61 हजार अर्जुन के पौधे लगाए गए हैं। जो अब हरे-भरे पेड़ के रूप में हरियाली बिखेर रहे हैं। जोरण्डाझरिया गाँव में हुए इस टसर पौधरोपण ने हरियाली से विकास की एक नई दास्तां लिख दी है। इसके साथ ही गाँव का 59 हेक्टेयर क्षेत्र संरक्षित होकर अब दूर से ही हरा-भरा नजर आता है। इस गाँव में टसर खाद्य पौधरोपण एवं कोसाफल उत्पादन से आदिवासी परिवारों को रोजगार देने का काम हो रहा है। करीब एक दशक पहले इस गाँव में रेशम विभाग ने विभागीय मद से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में 2 लाख 5 हजार अर्जुन पौधे टसर खाद्य पौधरोपण के अंतर्गत रोपे थे।

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा व्यवहार न्यायाधीश (मुख्य) परीक्षा 2019 के लिखित परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। लिखित परीक्षा परिणाम आयोग की वेबसाइट www.psc.cg.gov.in पर अपलोड कर दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक से प्राप्त जानकारी के अनुसार विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत व्यवहार न्यायाधीश (प्रवेश स्तर) के 39 पद विज्ञापित किए गए थे। व्यवहार न्यायाधीश (प्रवेश स्तर) परीक्षा 2019 का आयोजन 7 मई 2019 को किया गया। परीक्षा के परिणाम के आधार पर आयोग द्वारा कुल 427 अभ्यर्थियों का व्यवहार न्यायाधीश (मुख्य) परीक्षा 2019 के लिए प्रावधिक आधार पर चिन्हांकन किया गया था।
आयोग द्वारा 21 सितंबर 2020 को व्यवहार न्यायाधीश (मुख्य) परीक्षा 2020 का आयोजन किया गया। इस परीक्षा के विज्ञापित पदों का तीन गुणा अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए चिन्हांकन किया जाना था, परंतु वर्गवार/उप वर्गवार चिन्हांकित अंतिम अभ्यर्थी के समान प्राप्त अंकों की पुनरावृत्ति होने के कारण कुल 127 अभ्यर्थी साक्षात्कार हेतु चिन्हांकित हुए हैं। व्यवहार न्यायाधीश परीक्षा 2019 के लिए साक्षात्कार की तिथि पृथक से घोषित की जाएगी।

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे की अध्यक्षा में गोधन न्याय योजना की समीक्षा
गोधन न्याय योजना के तहत अब तक हितग्राहियों को लगभग 30 करोड़ रूपए का हो चुका है भुगतान

रायपुर / शौर्यपथ / कृषि और पशुपालन मंत्री रविन्द्र चौबे की अध्यक्षता में आज गोधन न्याय योजना के तहत गौठान समितियों के माध्यम से खरीदे गए गोबर से जैविक खाद निर्माण सहित उसकी बहुउपयोगिता पर मंथन किया गया। बैठक में जैविक खाद निर्माण की स्थिति, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर विस्तार से चर्चा की गई। गोबर और बायोमास से बायो सीएनजी तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया। श्री चौबे ने छोटी-छोटी परियोजना तैयार कर गोबर को लाभकारी बनाने पर जोर दिया।
मंत्री ने बताया कि 20 जुलाई हरेली पर्व से प्रारंभ हुई गोधन न्याय योजना के अंतर्गत अब तक गौपालकों एवं गोबर विक्रेताओं से प्रदेश के 3247 से अधिक गौठानों में गौठान समितियों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से पशुपालकों और गोबर संग्राहको से लागभग 30 करोड रूपए का गोबर खरीदा जा चुका है। श्री चौबे ने कहा कि गोधन न्याय योजना से जिस प्रकार पशुपालकों और गरीब ग्रामीण गोबर विक्रेताओ को मिल रहा है, इसे और व्यापक बनाते हुए खरीदे गए गोबर से जैविक खाद निर्माण सहित मल्टी उत्पाद और बहुउपयोगी बनाकर ग्रामीणों और महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने सहकारिता विभाग के जरिए किसानों को आसानी से जैविक खाद उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
बैठक में मंत्री चौबे ने बताया कि गौठानों में तैयार की गई वर्मी कम्पोस्ट ‘गोधन वर्मी कम्पोस्ट‘ के नाम से लॉन्च किया गया है इसका प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने योजना से अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए वर्मी कम्पोस्ट के पैकेजिंग का कार्य महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपें जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। गोेबर से मल्टी उत्पाद तैयार करने के लिए शहरी महिलाओं की तरह ग्रामीण क्षेत्रों के महिला समूहों को भी आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने पर बल दिया। उन्होंने नियमित रूप से गौठानों में निरीक्षण कर जैविक खाद निर्माण पैंकेजिंग और मार्केंटिंग पर विशेष ध्यान देने तथा योजनाबद्ध तरीके से काम करने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इस योजना को और अधिक लाभकारी कैसे बनाए जाए इस दिशा में क्या-क्या किया जा सकता है इस पर भी विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि इस योजना के जरिए राज्य में 700 से 800 करोड़ रूपए की वर्मी कम्पोस्ट खाद का कारोबार महिला समूहों एवं सोसायटियों के माध्यम से होगा। इससे ग्रामीणों को रोजगार और सोसायटियों को संबल मिलेगा।
बैठक में मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, कृषि विभाग की सचिव डॉ. एम. गीता, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव श्रीमती अलरमेलमंगई डी., सहकारिता सचिव एवं प्रबंध संचालक मण्डी बोर्ड हिमशिखर गुप्ता, संचालक कृषि नीलेश क्षीरसागर, दाउ वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यायलय के कुलपति डॉ. एन.पी. दक्षिणकर और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. के. पाटिल, उद्योग विभाग के अपर संचालक प्रवीण शुक्ला, छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल अथॉरिटी के अधिकारी सहित संबंधित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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