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लखनऊ /शौर्यपथ / यूपी में नाबालिग बच्चियों से रेप की वारदात रुकने का नाम नहीं ले रही हैं. बाराबंकी में एक 15 साल की दलित लड़की की लाश खेत में मिली है, जिसके नीचे के कपड़े उतरे हुए थे. बांदा में एक 8 साल की बच्ची से उसके रिश्तेदार ने ही रेप किया जिसकी हालत गंभीर है. वहीं सहारनपुर में खेत में खाना लेकर जा रही महिला से गैंगरेप की वारदात सामने आई है. बाराबंकी के एक गांव में धान के खेतों में 15 साल की बच्ची की हाथ बंधी हुई लाश मिली. उसकी लैगिंग जिस्म से उतरी हुई थी. वो 4 बजे के करीब खेस में काम करने के लिए गई थी. देऱ तक नहीं आई तो ढूंढने पर लाश मिली. लड़की के चाचा ने बताया, "वो धान काटने के लिए गई थी. उसकी लैगिंग नीचे उतरी हुई थी और हाथ बंधे हुए थे. वो तिरछी पड़ी हुई थी."
अब गांव में पुलिस लगी है, मुजरिम की तलाश हो रही है. पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है. प्रभारी पुलिस अधीक्षक आरएस गौतम ने बताया, "डेडबॉडी का पंचनामा कर विधिक कार्रवाई की जा रही है. इशके साथ ही साक्ष्य संकलन हेतु अतिरिक्त टीम का गठन कर दिया गया है. विधिक कार्रवाई की जा रही है."
उधर बांदा में एक सात साल की बच्ची रेप के बाद अस्पताल में भर्ती है. जहां उसकी हालत गंभीर है. बच्ची घर में अकेली थी तभी एक पड़ोसी ने ने घर में घुसकर उसके साथ रेप किया. बच्ची के मां ने बताया, "जब मैं आई बाहर से तो बच्ची रो रही थी, मैंने पूछा तो उसने सारी बात बताई. " बच्ची की हालत के बारे में बताते हुए मां ने कहा, "उसका बल्ड नहीं बंद हो रहा है. बल्ड बहुत जा रहा है."
सहारनपुर में एक महिला ने आरोप लगाया है कि जब वह खेत में अपने बेटों को खाना लेकर जा रही थी, तभी गांव के कुछ दबंगों ने उसके साथ रेप किया और मारा-पीटा.पुलिस ने महिला को अस्पताल में भर्ती करवा दिया है और केस दर्ज कर लिया है. पुलिस का कहना है कि आरोपी के साथ महिला का जमीनी झगड़ा भी है.
सहारनपुर ग्रामीण के एसपी अशोक कुमार मीणा ने बताया, "वादी द्वारा बताया गया है कि इनकी मां के साथ इनके पड़ोसी के द्वारा रेप किया गया. जिसके संबंध में तहरीर दी गई है. तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है."
भोजन में पोष्टिक तत्वों की पूर्ति के साथ कुपोषण मुक्ति में होगी मददगार
कोण्डागांव जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगी योजना
मुख्यमंत्री बघेल ने बजट भाषण में की थी फोर्टिफाईड राईस वितरण योजना शुरू करने की घोषणा
राज्य सरकार ने 5.80 करोड़ रूपए का किया बजट प्रावधान
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भोजन में आवश्यक पोष्टिक तत्वों की पूर्ति और कुपोषण के नियंत्रण के लिए आगामी एक नवंबर राज्य स्थापना दिवस से फोर्टिफाईड राईस वितरण की अभिनव योजना शुरू करने जा रही है। आयरन और विटामिन से युक्त फोर्टिफाईड राईस वितरण की यह योजना राज्य के कोण्डागांव जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने वर्ष 2020-21 के अपने बजट भाषण में इस योजना को प्रारंभ करने की घोषणा की थी। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा 5 करोड़ 80 लाख रूपए का बजट प्रावधान भी किया गया है।
गौरतलब है कि फोर्टिफाईड राईस में लौह तत्व, विटामिन बी-12 तथा फोलिक एसिड युक्त फोर्टिफाईड राईस करनेल (एफआरके) का मिश्रण होता है। जो लोगों को खुराक में आवश्यक पोष्टिक तत्वों की पूर्ति के साथ ही कुपोषण के नियंत्रण में काफी मददगार साबित होगा। इस राईस का वितरण कोण्डागांव जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत किया जाएगा। इस राईस का भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएसएसआई) द्वारा निर्धारित मापदण्ड अनुसार वितरण किया जाएगा।
कोण्डागांव जिले मेें पीडीएस एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत समस्त चावल को फोर्टिफाईड कर वितरित किया जाएगा। फोर्टिफाईड राईस तैयार करने लिए दो राईस मिल को राईस ब्लेडिंग कार्य सौंपा गया है। कोण्डागंाव जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत एक लाख 11 हजार 217 राशनकार्ड तथा राज्य योजना के तहत 23 हजार 204 राशनकार्ड इस तरह कुल एक लाख 34 हजार 421 राशनकार्ड प्रचलित है। इस जिले में चांवल का कुल वार्षिक आबंटन 60 हजार 188 टन है जिसमें पीडीएस चांवल का 55 हजार 068 टन है और कल्याणकारी योजना, मध्यान्ह भोजन, पूरक पोषण आहार आदि योजनाओं का वार्षिक आबंटन 5 हजार 120 टन है।
दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के प्रभारी सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज पाटन विकासखंड के विभिन्न ग्रामों का दौरा कर यहां कराए जा रहे विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्राम सिकोला में बनाए गए गौठानों का अवलोकन कर किसानों से गोबर की खरीदी, वर्मी कम्पोस्ट की जानकारी ली। गौठान में पानी की व्यवस्था से भी अवगत हुए। यहां नलजल योजनांतर्गत उच्चस्तरीय पानी टंकी का निर्माण किया जा रहा है। पाइप लाइन बिछाने के कार्य सहित ग्राम के सभी घरों में नल के माध्यम से पेयजल आपूर्ति करने के लिए किए जा रहे कार्यों की भी जानकारी ली।
उन्होंने योजनांतर्गत कार्य को निर्धारित समयावधि में गुणवत्तापूर्वक पूर्ण करने को कहा। इसी तरह ग्राम फुंडा, ग्राम पंदर में पहुंचकर नलजल योजना के क्रियान्वयन की भी जानकारी ली। प्रभारी सचिव ने ग्राम देवादा में जिम का निरीक्षण किया। जिम में पहुंचकर उन्होंने इसकी सराहना किया। लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्य का अवलोकन करने के साथ ही सड़क के किनारे नाली निर्माण में बहाव पर विशेष ध्यान रखने कहा। जिससे नाली से पानी की निकासी सुगमता पूर्वक हो सके।
'त्योहारों के मौसम में कोरोना संक्रमण से कैसे बचें' : चिकित्सक से ली गई विशेष भेंटवार्ता आज आकाशवाणी रायपुर से प्रसारित
रायपुर / शौर्यपथ / आकाशवाणी केंद्र, रायपुर द्वारा आज एक विशेष कार्यक्रम- 'त्योहारों के मौसम में कोरोना संक्रमण से कैसे बचें' प्रसारित किया जाएगा। इसके अंतर्गत रायपुर मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर ओ. पी. सुंदरानी से ली गयी विशेष भेंटवार्ता प्रसारित की जाएगी। प्रादेशिक समाचार एकांश द्वारा तैयार किया गया यह कार्यक्रम सुबह साढ़े दस बजे प्रसारित होगा, जिसे छत्तीसगढ़ स्थित आकाशवाणी के सभी केंद्र रिले करेंगे।
दुर्ग / शौर्यपथ / स्वसहायता समूहों द्वारा गोबर से बने हुए डिजाइनर दीये लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं और देश-विदेश से इनकी माँग आ रही है। इन हुनरमंद लोगों द्वारा बनाये गए उत्पादों से जिले के नागरिक भी पूरी तरह से रूबरू हों इसके लिए मुकम्मल तैयारी जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने निगम अधिकारियों को निर्देशित किया है कि दीपावली के अवसर पर बड़ा बाजार सजेगा, इसमें स्थानीय उत्पादों का काफी बड़ा बाजार होगा। दीपावली में परंपरागत रूप से दीयों के द्वारा रौशनी की परंपरा है। हमारी स्वसहायता समूहों की महिलाओं ने बीते महीने इस संबंध में बहुत अच्छा कार्य किया है।
उन्होंने गोबर के डिजाइनर दीये, धूपबत्ती आदि बनाये हैं। इसके साथ ही वे स्थानीय उत्पाद भी काफी गुणवत्तापूर्वक तैयार कर रही हैं। दीपावली के मौके पर वे बाजार के आर्थिक लाभ की संभावनाओं का पूरा दोहन कर सकें, इसके लिए जरूरी है कि उन्हें प्राइम लोकेशन पर अपने उत्पादों के विक्रय और डिस्प्ले के लिए जगह दी जाए। कलेक्टर ने कहा कि इसके साथ ही स्वसहायता समूहों की महिलाओं का नियमित प्रशिक्षण भी जरूरी है ताकि वे बाजार की डिमांड को समझकर उसके अनुरूप उत्पाद तैयार कर सकें। इसके लिए गुणवत्ता, मूल्य निर्धारण, बाजार तक पहुंच आदि चीजें बहुत जरूरी हैं। इस संबंध में इन्हें पूरा मार्गदर्शन दें। बैठक में जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक ने इन गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर भिलाई निगम कमिश्नर श्री ऋतुराज रघुवंशी, रिसाली निगम कमिश्नर श्री प्रकाश सर्वे, अपर कलेक्टर बीबी पंचभाई, सहायक कलेक्टर जितेंद्र यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
लिफ्ट इरीगेशन की संभावनाओं पर होगा काम- कलेक्टर ने कहा कि जिले में लिफ्ट इरीगेशन की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इसका पूरा दोहन करना है। इसके लिए उन्होंने विद्युत कंपनी के अधिकारियों के साथ संयुक्त दौरा करने के निर्देश क्रेडा अधिकारियों को दिये। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को कहा कि जहां कहीं भी नहरों में झाड़ी, गाद आदि जमा होता है वहां ठीक करा लें ताकि ज्यादा से ज्यादा बूंद सिंचित की जा सके। उन्होंने कहा कि आने वाले हफ्ते वे इस कार्य का अवलोकन करेंगे।
धान खरीदी केंद्रों में मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित करें- कलेक्टर ने कहा कि आने वाले दिनों में धान खरीदी आरंभ होगी। धान खरीदी केंद्रों में सारी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करा लें। जिन 7 अतिरिक्त केंद्रों में धान खरीदी इस साल से शुरू होनी है वहां भी धान खरीदी की तैयारियों की मुकम्मल व्यवस्था करा लें। हर समिति में चबूतरों की उपलब्धता सुनिश्चित करा लें। 30 अक्टूबर तक सभी चबूतरे पूरे होने चाहिए। उन्होंने कहा कि बारदानों की उपलब्धता तथा कैप कवर की व्यवस्था मुकम्मल कर लें।
कलेक्ट्रेट भवन का रिनोवेशन होगा लेकिन मूल स्वरूप कायम रहेगा- कलेक्टर ने कहा कि कलेक्ट्रेट भवन का रिनोवेशन किया जाएगा लेकिन भवन का मूल स्वरूप इसी तरह से कायम रहेगा। अन्य निर्माण कार्यों के संबंध में उन्होंने कहा कि एजेंसियों के निर्माण कार्य कोरोना की वजह से होने वाले लाकडाउन की वजह से प्रभावित हुए हैं। अब इन्हें गति देने की जरूरत है। अधिकारी लगातार मानिटर करें और इन्हें जल्द से जल्द पूरा करें।
सुबह और शाम के दौरों के माध्यम से प्रभावी रूप से हो साफ सफाई की मानिटरिंग- कलेक्टर ने कहा कि निगम अधिकारी सुबह और शाम दोनों समय सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करें। सफाई पुख्ता होनी चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा कि टीकाकरण और मातृ स्वास्थ्य के जो कार्यक्रम चल रहे हैं उन पर लगातार मानिटरिंग रहें।
-‘धमधा के किसान श्री विश्राम सिंह पटेल की कहानी’, जिन्हें दूध से ज्यादा आय गोबर बेचकर हुई
- दो किस्तों को मिलाकर अब तक करीब 16 हजार रुपए कमाए, वहीं इस दौरान दूध बेचकर हुई करीब 11 हजार 300 रुपए की आमदनी
-सोच रहे थे अपने मवेशी बेच दें मगर ‘गोधन न्याय योजना’ ने बदल दिया इरादा
-गौपालन को मिला सहारा और जैविक खेती को मिल रहा बढ़ावा पशुपालकों और किसानों के लिए फायदे की योजना है गोधन न्याय योजना
दुर्ग / शौर्यपथ / जनहित में लिया गया एक सही निर्णय किस तरह कारगर साबित होता है इसका साक्षात उदाहरण है धमधा के किसान श्री विश्राम सिंह पटेल। वे बताते हैं कि कुछ महीनों पहले रखरखाव में हो रहे खर्च के कारण उन्होंने इरादा कर लिया था कि वह अपने सारे मवेशी बेच बेच देंगे लेकिन उनका इरादा बदल दिया राज्य शासन की गोधन न्याय योजना ने। जब उनको पता चला कि सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों और पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने से गोबर खरीदने की योजना शुरू की है तो उन्होंने भी सोचा क्यों न वो भी इस योजना का फायदा उठाएं।
40 मवेशियों से मिलता है करीब ढाई से तीन क्विंटल गोबर, दो किस्तों को मिलाकर अब तक करीब 16 हजार रुपए कमाए, वहीं इस दौरान दूध बेचकर हुई करीब 11 हजार 300 रुपए की आमदनी - श्री विश्राम सिंह पटेल बताते हैं शुरुआत में तो केवल आजमाने के लिए उन्होंने गोबर इकट्ठा किया तो देखा 40 मवेशियों से करीब ढाई से 3 क्विंटल गोबर इकट्ठा हो जाता है। उनके पास 10 गायें गिर नस्ल की, 15 देसी नस्ल की हैं और 15 बछड़े और बछिया है। उन्होंने बताया कि एक गाय साल भर दूध नहीं देती जब उसके बछड़े होते तभी दूध देती है। इस लिहाज से एक समय मे 25 में 8 से 10 गायें ही दूध देती हैं । उनके यहाँ देसी गाय एक दिन में डेढ़ से दो लीटर दूध देती है और गिर गाय 7 से 8 लीटर। वर्तमान में 4 देसी और 3 गिर गायें दूध दे रही हैं। जिनसे प्राकृतिक रूप से एक दिन में करीब 15 से 20 लीटर दूध मिलता है। वहीं 40 मवेशियों से करीब ढाई से तीन क्विंटल गोबर मिला जिसे बेचकर पहली किस्त में 6470 और दूसरी किस्त 9450 दोनों को मिलाकर करीब 16 हजार रुपए मिले। वहीं दूध बेचकर इसी अवधि में उनको 11 हजार 300 रुपए की आमदनी हुई। श्री विश्राम सिंह पटेल बताते हैं कि एक दिन उन्होंने करीब 700 रुपए का गोबर बेचा और उसी दिन 500 रुपए का दूध। ये देखकर उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि गोबर से भी उनको इतनी आय हो सकती।
गौपालन को मिला सहारा और जैविक खेती को मिल रहा बढ़ावा पशुपालकों के लिए फायदे की योजना है गोधन न्याय योजना - श्री पटेल ने बताया कि 40 मवेशियों के पालन पोषण रख-रखाव बहुत महंगा पड़ रहा था। हरा चारा तो अपने खेतों से मिल जाता था मगर बाजार से चारा, मवेशियों के टीकाकरण, श्रमिकों की मजदूरी मिलाकर काफी खर्च हो जाता था। एक समय ऐसा आया कि उन्होंने तो गौपालन बंद करने का सोच लिया था लेकिन, ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत हो रही गोबर खरीदी से उनके गौपालन को सहारा मिला और उन्होंने अपना इरादा बदल दिया। अतिरिक्त आमदनी होने से उनको मवेशियों के रख-रखाव में मदद मिलेगी।
रायपुर / शौर्यपथ / कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए चिकित्सको द्वारा समय पर अनेक परामर्श जारी किए जा रहे हैं। जिनमें से एक है कि यदि एंटीजेन टेस्ट निगेटिव आया और फिर भी सर्दी,खांसी,बुखार आदि लक्षण नजर आ रहे हैं तो आरटीपीसीआर टेस्ट अवश्य कराएं।
राज्य में 5 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक संचालित सघन सामुदायिक सर्वेक्षण में 42हजार 889 ऐसे व्यक्तियों का आर टी पी सी आर /टुªनाट टेस्ट कराया गया, जिनका एंटीजेन निगेटिव आया था लेकिन जिनमें सर्दी,खांसी,बुखार आदि लक्षण थे। इनमें से 1277 व्यक्तियों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि इस मामले में लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतते हुए आरटी पीसी आर या टुनाट टेस्ट जरूर कराएं और कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने में सहायक बनें।
मुख्यमंत्री ने जेईई मेन्स में छू लो आसमान के सफल 17 विद्यार्थियों को दी उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं
बीजापुर और सुकमा के आदिवासी बच्चों के लिए अगले सत्र से 40 सीटें बढ़ाने और चयनित विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा
आने वाले वर्षो में विकासखण्ड स्तर पर खोले जाएंगे इंग्लिस मीडियम स्कूल
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज दंतेवाड़ा जिले के ’छू लो आसमान’ कार्यक्रम के तहत अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में (जेईई) मेन्स में सफल 17 छात्र-छात्राओं से बातचीत की और उन्हें सफलता के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। इन छात्र-छात्राओं ने एनआईटी में प्रवेश के लिए मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त किया है। वर्ष 2011 में जिला प्रशासन दंतेवाड़ा और एनएमडीसी के सहयोग से प्रारंभ किए गए इस कार्यक्रम की मदद से अब तक 845 छात्र-छात्राओं का चयन विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने अपने निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रंेसिंग के जरिए विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे जीवन के हर क्षेत्र में नई ऊंचाईयां हासिल की जा रही है। आप लोग दूरस्थ अंचलों से हैं और विपरित परिस्थितियों में अपने दृढ़ संकल्प से ’छू लो आसमान’ कार्यक्रम के माध्यम से यह सफलता प्राप्त की है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ’छू लो आसमान’ कार्यक्रम में बीजापुर और सुकमा के आदिवासी बच्चों के लिए अगले सत्र से 40 सीटें बढ़ाने, चयनित विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और एक छात्र हेमंत कुमार आर्य की ऑखों का पूरा इलाज कराने की घोषणा की। श्री बघेल ने कहा कि प्रदेश में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना के अंतर्गत जिलों में 53 स्कूल प्रारंभ किए गए हैं। आने वाले वर्षो में विकासखण्ड स्तर पर इंग्लिस मीडियम स्कूल प्रारंभ किए जाएंगे।
इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, विधायक अनूप नाग, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, एनएमडीसी के सलाहकार दिनेश श्रीवास्तव उपस्थित थे। वीडियो कॉन्फ्रंेसिंग के माध्यम से कलेक्टर दंतेवाड़ा दीपक सोनी और एनएमडीसी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक सुमित देव शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ’छू लो आसमान’ कार्यक्रम से जुड़ें बच्चों की सफलता ने यह साबित कर दिखाया है कि हमारे बस्तर इलाके में प्रतिभा की कमी नही है। यदि अवसर मिले तो हमारे बच्चे महानगरों के बच्चों को भी मात दे सकते हैं। अभी तक बस्तर की पहचान उसकी प्राकृतिक छटा, वहां की अनोखी जीवन शैली और खनिजों से भरपूर खदानों से होती थी। अब शिक्षा के नाम से भी बस्तर को जाना जाएगा। श्री बघेल ने इस अवसर पर सफल विद्यार्थियों दंतेवाड़ा चेरपाल के संतकुमार कंुजाम, सुकमा की उपासना नेगी और कल्याणी नेताम और दंतेवाड़ा टेकनार के मनोज कुमार तथा छू लो आसमान की शिक्षिका सुकृति शर्मा से बात कर उनके अनुभव जाने। बच्चों ने गुरूजनांे, मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन, दंतेवाड़ा और अपने माता-पिता को अपनी सफलता का श्रेय दिया।
’छू लो आसमान’ कार्यक्रम में इस वर्ष कुल 17 छात्र-छात्राएं (15 छात्र, 2 छात्राएं) जेईई मेन्स की प्रवेश परीक्षा (एन.आई.टी. हेतु ) में मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त किया है, जिसमें दंतेवाड़ा के 11, बीजापुर के 2, सुकमा के 3 एवं बस्तर जिले से 1 छात्र, छात्राएं शामिल हैं, जिनमें 16 विद्यार्थी आदिवासी एवं 1 अन्य पिछड़ा वर्ग से है। पिछले वर्ष भी 21 छात्र-छात्राओं ने आईआईटी, एनआईटी में प्रवेश पाया था।
दंतेवाड़ा क्षेत्र के आदिवासी बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं में तैयार करने के उद्देश्य से वर्ष 2011 में ’छू लो आसमान’ की स्थापना की गई। इस संस्था में मूल रूप से दंतेवाड़ा एवं आसपास के छात्र-छात्राओं को कक्षा 9वीं से हॉस्टल में रखकर पीईटी एवं पीएमटी की तैयारी करायी जाती है, साथ ही उनकी पढ़ाई को जारी रखने हेतु दंतेवाड़ा के विभिन्न स्कूलों में प्रवेश भी दिलाया जाता है। संस्था मंे प्रत्येक वर्ष 80 छात्र एवं छात्राओं को प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। कुल सीटों में 76 प्रतिशत आदिवासी, 4 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 14 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग तथा 6 प्रतिशत सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं हेतु सुरक्षित रहती है। एक समय में कक्षा में कुल 600 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत रहते है।
’’छू लो आसमान’’ की स्थापना से ही एनएमडीसी इस संस्था में अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का व्यय जैसे कि शिक्षकों का वेतनमान, छात्र-छात्राओं की कापी, किताब, शिक्षण सामग्री, गणवेश, भोजन, दैनिक उपयोग की समस्त वस्तुओं एवं प्रतियोगी परीक्षाओं का व्यय एनएमडीसी सीएसआर अंतर्गत व्यय किया जाता है। ’’छू लो आसमान’’ के छात्र-छात्रओं की इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एनएमडीसी द्वारा तीन करोड़ रूपए प्रतिवर्ष व्यय किए जाते हैं। संस्था की मॉनिटरिंग जिला प्रशासन एवं एनएमडीसी द्वारा की जाती है।
शौर्यपथ / समझिए मूड और फूड का कनैक्शन
हम कैसा अनुभव कर रहे हैं कि हमारे शरीर के रासायनिक पदार्थ, हार्मोन्स एवं न्यूरोट्रांसमिटर्स यह सब तय करते हैं। जिससे हमारी भावनाएं गहराई तक प्रभावित होती हैं। हार्मोन्स हमारे पूरे शरीर पर प्रभाव डालते हैं। जब हम अपने मानसिक स्वास्थ्य यानी मेंटल हेल्थ की बात करते हैं, तो तीन मुख्य न्यूरोट्रांसमीटर्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है- सेरोटोनिन, एंडोर्फिन और डोपामाइन।
सेरोटोनिन मूड बूस्टर का काम करता है और मस्तिष्क को रिलेक्स रखता है। इसे हैप्पी हार्मोन के नाम से भी जाना जाता है। डोपामाइन प्लेज़र हार्मोन्स का काम करता है और एंडोर्फिन हमें खुश रखने, चिड़चिड़ापन व डिप्रेशन से बचाने में मदद करता है।
खानपान की आदतों से जन्मी हैं लाइफस्टाइल डिजीज
जिस तरह से लोगो की जीवनशैली बदल रही है, उसने लोगों की खानपान की आदतों को भी बदल दिया है। लोग आजकल फास्ट फूड्स, जंक फूड्स की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं। उन्हे घर में बना भोजन पसंद नहीं आता। कभी-कभी समय के अभाव में भी लोग बाहर स्ट्रीट फूड्स या रेस्तरां मे खाना ज्यादा पसंद करते है या बाहर से खाना घर पर ऑर्डर कर लेते हैं। भोजन समय पर न करना, मील स्किप करना, भोजन मे अनियमितता ये सब लाइफस्टाइल डिजीज का कारण हैं।
हमारी फूड हैबिट्स और चॉइसेस हमारे शारीरिक स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ये हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। हम जैसा आहार ग्रहण करते हैं हमारा मानसिक स्वास्थ्य या मूड भी वैसा ही होता है। इसलिए कहा जाता है कि यदि हम अच्छा और पौष्टिक भोजन खाएंगे, तो हम अच्छा सोचेंगे, खुश रहेंगे।
स्वास्थ्य पर होता है इनका खतरनाक प्रभाव
अनहेल्थी फूड्स खाने से लोगों को पेट संबंधी समस्या तो होती ही है। साथ ही ये ब्लड शुगर मे उतार- चढ़ाव और हार्मोन्स असंतुलन जैसी समस्याओं का भी कारण होते हैं।
रोड के किनारे मिलने वाले फास्ट फूड्स, आमतौर पर अनहाईजेनिक और अनहेल्थी होते हैं। इन्हें खाने से हमें स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं होती हैं और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर होता है। इन फूड्स में रिफाइंड प्रोडक्ट्स, खराब क्वालिटी का तेल, प्रतिबंधित फूड कलर्स आदि का इस्तेमाल किया जाता है। जो कि सस्ते दामों में आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होते हैं। बार-बार एक ही तेल को लंबे समय तक इस्तेमाल करना भी सेहत के लिए हानिकारक होता है।
इस तरह के फूड्स का लगातार सेवन करने से हमारे शरीर का हॉर्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है और हमारा मस्तिष्क भी रिलेक्स नहीं रह पता। ऐसे फूड्स को खाने के बाद चिड़चिड़ापन, आलस, थकान, मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
इसके साथ ही शरीर मे इंफ्लेमेशन, नींद न आना भी आम बात है, क्योंकि इनमें पौष्टिक तत्व न के बराबर पाया जाता है।
वहीं पौष्टिक तत्वों से भरपूर भोजन हमारे शरीर एवं मस्तिष्क में हैप्पी हार्मोन्स एवम न्यूरोट्रांसमीटर्स को बनाने एवं उनको स्रावित करने मे मदद करता है। ये हार्मोन्स भरपूर नींद लेने में और इनफ्लेमेशन को कम करने मे मदद करते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखना है, तो इन बातों का रखें ध्यान
स्वस्थ आहार लें
अपनी डाइट में साबुत अनाज, दालें, दूध एवं उससे बने पदार्थ, प्रोबायोटिक्स, प्रीबायोटिक्स, ताजे फल एवं सब्जी जैसे- केला, बेरीज़, पालक, शिमला मिर्च, फैटी फिश, अंडा, नट्स एवं सीड्स जैसे- अखरोट, बादाम, पीनट्स, पंपकिन सीड्स, सूरजमुखी के बीज, फ्लैक्सीड्स इत्यादि का सेवन करना चाहिए।
आदतों में सुधार लाएं
डार्क चॉकलेट भी मूड और ब्रेन को रिलेक्स करने मे मदद करती है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में लेना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा रखने के लिए उत्तम एवं पौष्टिक आहार लें, भरपूर नींद लें, अपने परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा वक़्त बिताएं, रिलेक्सिंग म्यूज़िक सुनें। जिससे आपका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहे।
चलते-चलते
नियमित रूप से व्यायाम, योगा या मेडिटेशन करें, क्योंकि व्यायाम के दौरान हमारे मस्तिष्क में एंडोर्फिन और सेरोटोनिन हार्मोन रिलीज़ होते हैं। शोध में भी यह पाया गया है कि जो लोग नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, उनका मानसिक स्वास्थ्य उन लोगों की तुलना में ज्यादा संतुलित और अच्छा होता है, जो लोग व्यायाम नहीं करते। स्ट्रीट फूड्स और बाहर का अनहेल्थी खाना खाने से बचें।
सेहत / शौर्यपथ / अगर आप धूम्रपान से तौबा करने का मन बना रहे हैं तो यह सोचकर कदम पीछे मत खींचिए कि अब बहुत देर हो चुकी है। वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन की मानें तो आखिरी सिगरेट सुलगाने के 20 मिनट के भीतर ही मानव शरीर तंबाकू के दुष्प्रभावों से उबरने की प्रक्रिया शुरू कर देता है। 15 साल बीतते-बीतते व्यक्ति में हार्ट अटैक से मौत का खतरा उन्हीं लोगों के बराबर हो जाता है, जिन्होंने जीवन में कभी सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया।
मुख्य शोधकर्ता रेशल बी हायेस के मुताबिक व्यक्ति कितनी लंबी अवधि से सिगरेट की लत का शिकार है, यह मायने नहीं रखता। जैसे ही वह धूम्रपान से तौबा कर लेता है, हृदय से लेकर फेफड़ों तक पर उसका सकारात्मक असर दिखना शुरू हो जाता है।
हायेस ने दावा किया कि आखिरी सिगरेट के सेवन के 20 मिनट बाद ही रक्तचाप और हृदयगति सामान्य होने लगती है। दोनों ही चीजों का बढ़ना हार्ट अटैक और स्ट्रोक से असामयिक मौत का सबब बन सकता है। उन्होंने बताया कि सिगरेट छोड़ने पर स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ के स्तर में भी कमी आने लगती है। इससे व्यक्ति को न सिर्फ डिप्रेशन, बल्कि अनिद्रा की समस्या पर भी काबू पाने में मदद मिलती है।
कब क्या असर
दो घंटे बाद
-सिगरेट का धुआं नसों में सिकुड़न का सबब बनता है, इससे हाथ-पैर में पर्याप्त मात्रा में खून का प्रवाह नहीं होता और वे ठंडे या सुन्न पड़े रहते हैं।
-हायेस के अनुसार धूम्रपान छोड़ने के दो घंटे बाद शरीर के विभिन्न अंगों में खून का बहाव सुचारु हो जाता है और वे सामान्य रूप से काम करने लगते हैं।
12 घंटे बाद
-धूम्रपान से दूरी बनाने के 12 घंटे के बाद खून में कॉर्बन मोनोऑक्साइड के स्तर में कमी आने लगती है, यह गैस हृदय सहित अन्य अंगों में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित करती है।
-व्यक्ति को सिरदर्द, मिचली, एकाग्रता में कमी, झुंझलाहट और आंखों के सामने धुंधलापन छाने की शिकायत भी सता सकती है, अंगों के खराब होने का जोखिम भी बना रहता है।
24 घंटे बाद
-रक्त प्रवाह, हृदयगति, ब्लड प्रेशर का स्तर सुधरने से हृदय सामान्य रूप से काम करने लगता है और हार्ट अटैक से मौत के खतरे में आने लगती है।
-हालांकि, इस दौरान खांसी की समस्या बढ़ सकती है क्योंकि शरीर फेफड़ों में जमे कफ को बाहर निकालने की प्रक्रिया को तेज कर देता है।
48 घंटे बाद
-नाक और मुंह की निष्क्रिय नसों के एक बार फिर सक्रिय हो जाने से व्यक्ति की स्वाद और गंध महसूस करने की क्षमता लौट आती है।
-हालांकि, यह समय संयम बनाए रखने के लिहाज से बेहद अहम है क्योंकि खून में निकोटीन का स्तर गिरने से सिगरेट की तलब बढ़ जाती है।
72 घंटे बाद
-फेफड़ों में सूजन घटने से श्वासगति में सुधार आता है, श्वासनली भी खुलना शुरू हो जाती है।
-कफ और कीटाणुओं को श्वासनली में जमने से रोकने वाले ‘सीलिया’ भी दोबारा पनपने लगते हैं।
एक हफ्ते बाद
-निकोटीन की तलब शांत होने लगती है, कफ का उत्पादन घटने और ‘सीलिया’ के सक्रिय होने से खांसी की समस्या से भी निजात मिलती है।
एक महीने बाद
-फेफड़ों की कार्य क्षमता में 30 फीसदी तक का सुधार आता है, चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने या कसरत करने के दौरान सांस जल्दी नहीं फूलती।
एक साल बाद
-धूम्रपान करने वाले लोगों के मुकाबले हार्ट अटैक से जान जाने का जोखिम 50 फीसदी तक घट जाता है, सर्दी-जुकाम, खांसी के प्रति संवेदनशीलता भी घटती है।
दस साल बाद
-फेफड़ा रोगों का शिकार होने की आशंका आधी रह जाती है, नसें खुलने के साथ ही खून के खक्के जमने के खतरे में उल्लेखनीय कमी आती है।
15 साल बाद
-हायेस ने बताया कि सिगरेट छोड़ने के 15 साल बाद व्यक्ति के हार्ट अटैक या दिल की बीमारियों से दम तोड़ने का खतरा धूम्रपान करने वालों के बराबर हो जाता है।
खतरनाक
-तंबाकू दुनियाभर में हर साल 81.2 लाख लोगों की जान लेता है।
-70 लाख मौतें इनमें से तंबाकू का सीधे इस्तेमाल करने से होती हैं।
-12 लाख मासूम सिगरेट के धुएं के संपर्क में आकर दम तोड़ देते हैं।
-80% तंबाकू की लत के शिकार लोग गरीब-विकासशील देशों में रहते हैं।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / सर्दी युवाओं के दिल को ज्यादा भाती है। उन्हें गर्मी या बारिश के मुकाबले ठंड की दस्तक का अधिक बेसब्री से इंतजार होता है। अमेरिका में ‘वनपोल’ की ओर से दो हजार युवाओं पर की गई रायशुमारी तो कुछ यही बयां करती है।
सर्वे में शामिल 56 फीसदी प्रतिभागियों ने ठंडी हवा के झोंके से तन-मन में नई ऊर्जा का संचार होने की बात कही। 51 फीसदी ने बताया कि पत्तियों के रंग बदलने से उत्पन्न दिलकश नजारे उन्हें ‘फील गुड’ कराते हैं।
44 प्रतिशत प्रतिभागियों को सर्दियां इसलिए भाती हैं क्योंकि उन्हें चाय-कॉफी और हॉट चॉकलेट के सेवन के बहाने नहीं ढूंढने पड़ते। 42 फीसदी को सूप और तैलीय पकवानों के सेवन का मौसम आने के चलते खुशी महसूस होती है। फीसदी प्रतिभागी क्रिसमस, हैलोविन और थैंक्स-गिविंग जैसे पर्वों के चलते सर्दियों की बाट जोहते हैं। 35 फीसदी को रंग-बिरंगे स्वेटर तो 29 फीसदी को बूट पहनने के लिए ठंड का इंतजार होता है।
हालांकि, सर्वे में यह भी देखा गया कि कोरोना संक्रमण के डर के चलते इस बार 68 फीसदी प्रतिभागी घर में ही सर्दियां बिताने की सोच रहे हैं। 31 फीसदी ने क्रिसमस और हैलोविन के जश्न से दूर रहने का फैसला किया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
