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नई दिल्ली / शौर्यपथ / बुलंदशहर सुदीक्षा भाटी की हत्या मामला अब उलझता हुआ प्रतीत हो रहा है. पुलिस ने परिजनों के बयानों के आधार पर अंदेशा जताया है कि हादसे को जानबूझकर ट्विस्ट किया जा रहा है. बुलंदशहर के एसएसपी संतोष कुमार ने सुदीक्षा के साथ हुई छेड़छाड़ के दावे पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा अभी तक छेड़खानी के कोई सबूत नहीं है और न ही सुदीक्षा के परिजनों ने इसकी कोई जानकरी अपनी शुरुआती शिकायत में बताई थी. परिजनों के दावों पर सवाल उठाते हुए एसएसपी संतोष कुमार ने कहा कि बयान के अनुसार हादसे के वक्त सुदीक्षा का नाबालिग चचेरा भाई बाइक चला रहा था, घटना के बाद जो तहरीर दी गई है उसमें छेड़खानी की कोई बात नहीं थी.
पुलिस के अनुसार सुदीक्षा के मामा ने जो तहरीर दी है उसमें छेड़खानी की कोई बात नहीं है. इसके बाद अगले दिन सुबह चाचा ने कहा कि मैं बाइक चला रहा था. लेकिन चाचा की लोकेशन समय दादरी थी. पुलिस ने बताया कि चाचा घटना के दो घंटे बाद वहां पहुंचे, उनका पूरा रुट चार्ट पुलिस के पास है. तीसरी तहरीर सुदीक्षा के पिता ने दी उसमें भी छेड़खानी की कोई बात नहीं है. इसके अलावा इस घटना का एक चश्मदीद भी मिला है. उसने भी कहा कि आगे टैंकर था पीछे बुलेट और उसके पीछे सुदीक्षा की बाइक थी. अचानक ब्रेक लगने की वजह से यह हादसा हुआ है.
अधिकारियों ने पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा कि पुलिस ही सुदीक्षा को अस्पताल लेकर गई थी और ये आरोप लगाना गलत की हम छेड़खानी में केस दर्ज नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारी SIT मामले की जांच कर रही है और इससे सब कुछ जल्द ही साफ हो जाएगा. पुलिस के अनुसार सुदीक्षा एक बहुत बड़ी छात्रवृत्ति के जरिए पढ़ाई कर रही थी और लोगों की निगाहें उसकी इंश्योरेंस रकम पर थी. संतोष कुमार सिंह के अनुसार परिजनों द्वारा छेड़छाड़ का दावा इंश्योरेंस की राशि के लिए किय़ा जा रहा है. उन्होंने परिवार द्वारा बार बार बयान बदलने के सवाल पर कहा कि जो लड़का बाइक चला रहा था वो नाबालिग है, उसने अभी ही हाईस्कूल की परीक्षा की है.
नई दिल्ली / एजेंसी / नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने आज सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर जारी विवाद को लेकर कहा कि मैं महाराष्ट्र पुलिस और मुंबई पुलिस को 50 वर्षों से जानता हूं. उन पर पूरा भरोसा रखें. मैं आरोपों में नहीं जाना चाहता, यह इतना महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है. उन्होंने कहा कि जब कोई आत्महत्या करके मर गया तो यह निश्चित रूप से दुखद है, लेकिन मीडिया में जिस तरह से इस मुद्दे पर चर्चा हुई है, इससे मैं आश्चर्यचकित हूं.
शरद पवार ने कहा कि मैं परसों सतारा में था. वहां एक किसान ने आकर मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे कहा कि मीडिया में सुशांत की आत्महत्या की बहुत चर्चा हो रही है, लेकिन मेरे जिले में कम से कम 20 किसानों ने आत्महत्या की है, कोई यहां उनका नाम तक नहीं पूछता है. तब मुझे पता चला कि इस मामले में जनता क्या सोचती है.
सुशांत सिह राजपूत की मौत के मामले में आदित्य ठाकरे का नाम आने और इसको लेकर बीजेपी के हमलों पर शरद पवार ने कहा कि अगर कोई जांच करना चाहता है तो मुझे इसकी जानकारी नहीं है. यह राज्य सरकार और सीबीआई के बीच का मुद्दा है. मैं विवरण में नहीं जाना चाहता. लेकिन मुझे महाराष्ट्र की पुलिस पर पूरा भरोसा है. अगर इस मामले में कोई CBI या अन्य एजेंसियों से विस्तृत जांच चाहता है तो मैं इसका विरोध नहीं करूंगा.
नई दिल्ली । शौर्यपथ । जम्मू -कश्मीर में सेना द्वारा चलाये जा रहे आतंक क्लीन मुहिम के दौरान आज बुधवार को पुलवामा सेक्टर में आतंकियों द्वारा भारतीय जवानों के साथ मुठभेड़ में सेना ने एक आतंकी को मार गिराया l वहीं यूपी के जौनपुर जिले का जवान जिलाजीत यादव शहीद हो गया। सेना चारों तरफ से आतंकी को घेर लिया हैl 26 वर्षीय जिलाजीत जौनपुर जिले जलालपुर थाना क्षेत्र के धौरहरा इजरी बहादुरपुर पास स्थित सिरकोनी गांव के निवासी थे। पुलवामा में बुधवार की भोर में शुरू हुए मुठभेड़ में एक आतंकी को भी मार गिराया गया है। फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। सुरक्षा बलों को खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि पुलवामा के कमराज़ीपोरा में एक बाग में आतंकी छिपे हैं। सूचना मिलते ही सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान चलाया। खुद को घिरा देख आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी। सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान जिलाजीत शहीद हो गए। मारे गए एक आतंकी के पास से एक-47, ग्रेनेड के साथ ही अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद हुआ है। जिलाजीत के पिता कांता प्रसाद यादव का दो वर्ष पहले निधन हो चुका है। घर पर मां उर्मिला और पत्नी पूनम अपने सात माह के बेटे के साथ चाचा राम इकबाल यादव, जवाहर यादव के साथ रहती हैं। जिलाजीत की दो बहनें हैं। जिलाजीत ने सरस्वती निकेतन इंटर कॉलेज बैरीपुर सिरकोनी से इंटर मीडिएट करने के बाद सेना में भर्ती हो गए थे। इकलौती संतान के शहीद होने की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गयाl गुरुवार को पार्थिव शरीर आने की संभावना जताई जा रही है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / एक शोध की मानें तो बगैर लक्षण वाले मरीजों की भूमिका कोरोना पर नियंत्रण पाने में मददगार हो सकती है। ऐसे मरीजों की उच्च दर समाज के लिए अच्छी बात है। दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमित ऐसे मरीज बड़ी संख्या में हैं, जिनमें इस बीमारी के कोई भी लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं।
हॉपकिंस विश्वविद्यालय के अनुसार, पिछले सात महीनों में कोविड-19 जैसी महामारी ने विश्व स्तर पर दो करोड़ से अधिक लोगों को संक्रमित किया है, जबकि सात लाख से अधिक लोगों की इस वासरस से मौत हो चुकी है। सैन फ्रांसिस्को में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ मोनिका गांधी द्वारा हाल ही में एक शोध किया गया।
उन्होंने अपने इस अध्ययन में यह खुलासा किया कि एसिम्प्टोमैटिक यानी बगैर लक्षण वाले मरीज कोविड-19 के खात्मे में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के बगैर लक्षण वाले मरीजों की उच्च दर अच्छी बात है। यह निजी तौर पर और समाज के लिए एक अच्छा संकेत है।
जर्नल ऑफ इंटरनल मेडिसिन में इस महीने प्रकाशित एक लेख में मोनिका गांधी ने बताया कि महामारी की शुरुआत में जब लोगों ने मास्क पहनना शुरू नहीं किया था, तब 15 फीसदी लोग एसिम्प्टोमैटिक(बगैर लक्षण वाले) थे, लेकिन बाद में जब लोगों ने मास्क पहनना शुरू किया तो आंकड़ा बढ़ गया। इसके 40 से 45 फीसदी लोग बगैर लक्षण वाले हो गए।
कोरोना पर जारी रिसर्च के बीच यह भी सामने आया है कि इसका असर बच्चों पर कम है। ज्यादातर मरीजों में या तो कोई लक्षण नहीं है या फिर सामान्य लक्षण हैं। अमेरिका की शोधकर्ता मोनिका के मुताबिक दुनिया में अब 40 फीसदी कोरोना मरीज बगैर लक्षण वाले हैं, जिन्हें उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा सकता है।
फिलहाल यह भी पता लगाया जा रहा है कि उम्र और शरीर के जीन भी क्या यह तय करते हैं कि वायरस कितना हमला करेगा। यह भी देखा जा रहा है कि क्या मास्क लगाने की वजह से ही लोगों में मामूली या बिना लक्षण वाला कोरोना हो रहा है।
शौर्यपथ लेख । स्त्रियों की सहनशक्ति पुरुषों से कई गुनी ज्यादा है। पुरुष की सहनशक्ति न के बराबर है। लेकिन पुरुष एक ही शक्ति का हिसाब लगाता रहता है, वह है मसल्स की। क्योंकि वह बड़ा पत्थर उठा लेता है, इसलिए वह सोचता रहा है कि मैं शक्तिशाली हूं। लेकिन बड़ा पत्थर अकेला आयाम अगर शक्ति का होता तो ठीक है, सहनशीलता भी बड़ी शक्ति है- जीवन के दुखों को झेल जाना। स्त्रियां लड़कियां पहले बोलना शुरू करती हैं। बुद्धिमत्ता लड़कियों में पहले प्रकट होती है। लड़कियां ज्यादा तेज होती हैं। विश्वविद्यालयों में भी प्रतिस्पर्धा में लड़कियां आगे होती हैं। जो भी स्त्री आक्रामक होती है वह आकर्षक नहीं होती है। अगर कोई स्त्री तुम्हारे पीछे पड़ जाए और प्रेम का निवेदन करने लगे तो तुम घबरा जाओगे तुम भागोगे। क्योंकि वह स्त्री पुरुष जैसा व्यवहार कर रही है, स्त्रैण नहीं है। स्त्री का स्त्रैण होना, उसका माधुर्य इसी में है कि वह सिर्फ प्रतीक्षा करती है। वह तुम्हें सब तरफ से घेर लेती, लेकिन तुम्हें पता भी नहीं चलता। उसकी जंजीरें बहुत सूक्ष्म हैं, वे दिखाई भी नहीं पड़तीं। वह बड़े पतले धागों से, सूक्ष्म धागों से तुम्हें सब तरफ से बांध लेती है, लेकिन उसका बंधन कहीं दिखाई भी नहीं पड़ता। स्त्री अपने को नीचे रखती है। लोग गलत सोचते हैं कि पुरुषों ने स्त्रियों को दासी बना लिया। नहीं, स्त्री दासी बनने की कला है। मगर तुम्हें पता नहीं, उसकी कला बड़ी महत्वपूर्ण है। और लाओत्से उसी कला का उद्घाटन कर रहा है। कोई पुरुष किसी स्त्री को दासी नहीं बनाता। दुनिया के किसी भी कोने में जब भी कोई स्त्री किसी पुरुष के प्रेम में पड़ती है,तत्क्षण अपने को दासी बना लेती है, क्योंकि दासी होना ही गहरी मालकियत है। वह जीवन का राज समझती है। स्त्री अपने को नीचे रखती है, चरणों में रखती है। और तुमने देखा है कि जब भी कोई स्त्री अपने को तुम्हारे चरणों में रख देती है, तब अचानक तुम्हारे सिर पर ताज की तरह बैठ जाती है। रखती चरणों में है, पहुंच जाती है बहुत गहरे, बहुत ऊपर। तुम चौबीस घंटे उसी का चिंतन करने लगते हो। छोड़ देती है अपने को तुम्हारे चरणों में, तुम्हारी छाया बन जाती है। और तुम्हें पता भी नहीं चलता कि छाया तुम्हें चलाने लगती है, छाया के इशारे से तुम चलने लगते हो। स्त्री कभी यह भी नहीं कहती सीधा कि यह करो, लेकिन वह जो चाहती है करवा लेती है। वह कभी नहीं कहती कि यह ऐसा ही हो, लेकिन वह जैसा चाहती है वैसा करवा लेती है। लाओत्से यह कह रहा है कि उसकी शक्ति बड़ी है। और उसकी शक्ति क्या है? क्योंकि वह दासी है। शक्ति उसकी यह है कि वह छाया हो गई है। बड़े से बड़े शक्तिशाली पुरुष स्त्री के प्रेम में पड़ जाते हैं, और एकदम अशक्त हो जाते हैं। (साभार फेसबुक वाल से )
सेहत / शौर्यपथ / भारतीय मूल के एक शोधकर्ता सहित वैज्ञानिकों के दल ने एक अध्ययन में दावा किया है कि एन-95 मास्क को 50 मिनट तक इलेक्ट्रिक कुकर में बिना पानी गर्म कर रोगाणु मुक्त किया जा सकता है और इससे मास्क की वायरस से बचाव करने की क्षमता में भी कोई कमी नहीं आती है।
इनवायरमेंटल साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी लेटर नामक जर्नल में प्रकाशित शोध के नतीजों के मुताबिक सीमित आपूर्ति होने पर मास्क को सुरक्षित तरीके से बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है जबकि मौजूदा समय में इनका एक बार ही इस्तेमाल किया जाता है।
हवा में मौजूद वायरस से युक्त वाष्प की बूंदों और कण से बचाव के लिए एन-95 मास्क सबसे प्रभावी है। इन्हीं से कोविड-19 होने का खतरा होता है। अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय अर्बारना-शैम्पेन में प्रोफेसर थान्ह न्गुयेन ने कहा, 'Ó कपड़े का मास्क या सर्जिकल मास्क पहनने वाले के मुंह से निकलने वाली बूंदों से अन्य लोगों का बचाव करता है लेकिन एन-95 मास्क उन बूंदों को फिल्टर कर पहनने वाले को बचाता है, जिसमें वायरस हो सकते हैं।
इलिनॉय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विशाल वर्मा ने कहा, 'Ó रोगाणु मुक्त करने के कई अलग-अलग तरीके हैं लेकिन अधिकतर में एन-95 मास्क के विषाणु युक्त वाष्प कणों को छानने की क्षमता नष्ट हो जाती है। उन्होंने कहा, 'Ó रोगाणु मुक्त करने की किसी भी प्रक्रिया में मास्क को पूरी सतह को संक्रमण मुक्त करने की जरूरत होती है लेकिन साथ ही यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि उसके फिल्टर करने की क्षमता बनी रहे और इसे पहनने वाले के लिए सुरक्षित रहे। अन्यथा इससे सही सुरक्षा नहीं होगी।
शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रिक कुकर पद्धति में मास्क को रोगाणु मुक्त करने की संभावना देखी जो स्वास्थ्य कर्मियों के लिए लाभदायक हो सकती है, खासतौर पर छोटे क्लीनिक और अस्पतालों के लिए जहां पर ऊष्मा आधारित रोगाणु मुक्त करने के बड़े उपकरण मौजूद नहीं है।
शोधकर्ताओं ने ऐसी पद्धति की परिकल्पना की जो तीनों मानकों- रोगाणुमुक्त, फिल्ट्रेशन (छानने की क्षमता), फिट (इस्तेमाल करने योग्य)- को बिना किसी विशेष प्रक्रिया अथवा रसायन को छोड़े पूरा करे। वह ऐसी पद्धति की खोज करना चाहते थे जिसका इस्तेमाल लोग अपने घर में कर सकें। इसके मद्देनजर शोध दल ने इलेक्ट्रिक कुकर को लेकर परीक्षण किया, जो लोगों के रसोई घर में उपलब्ध रहता है।
शोधकर्ताओं ने इसकी पुष्टि की कि कुकर में 50 मिनट तक 100 डिग्री सेल्सियस पर मास्क को गर्म करने से कोरोना वायरस सहित चार तरह के वायरस नष्ट हो जाते हैं। यह पैराबैंगनी रोशनी से रोगाणु मुक्त करने की पद्धति से भी अधिक प्रभावी है।
वर्मा ने बताया, 'Óएयरोसोल (हवा में मौजूद वाष्प कण) जांच प्रयोगशाला में चैम्बर बनाया और उसमें एन-95 मास्क से गुजरने वाले कणों की गणना की। हमने पाया कि 20 बार इलेक्ट्रिक कुकर में रोगाणु मुक्त करने की प्रक्रिया किए जाने के बावजूद मास्क ठीक से काम कर रहा था। शोधकर्ताओं ने कहा कि मास्क को बिना पानी कुकर में गर्म किया जाना चाहिए न कि पानी में। कुकर के तल पर एक छोटी तौलिया रखनी चाहिए ताकि मास्क सीधे गर्म धातु के संपर्क में नहीं आए।
मोटापे के शिकार लोगों में कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। अब एक अमेरिकी अध्ययन में आशंका जताई गई है कि सार्स-कोव-2 वायरस से लडऩे वाला टीका उन लोगों की सुरक्षा में ज्यादा असरदार नहीं साबित होगा, जिनके शरीर में भारी मात्रा में चर्बी जमी हुई है।
फ्लू, हैपेटाइटिस की वैक्सीन भी कम कारगर-
अलबामा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने फ्लू और हैपेटाइटिस-बी के टीके का हवाला दिया, जो 2017 में हुए शोध में सामान्य से अधिक वजन वाले लोगों में संबंधित संक्रमण का मुकाबला करने में सक्षम एंटीबॉडी पैदा करने में कुछ ज्यादा कारगर नहीं मिले थे। यही कारण है कि मोटे लोग न सिर्फ दोनों संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, बल्कि उनके गंभीर अवस्था में पहुंचने के साथ ही अंग खराब होने और जान जाने का खतरा भी ज्यादा रहता है। कोविड-19 से बचाव में कारगर टीके के मामले में भी कुछ ऐसी ही स्थितियां पनप सकती हैं।
टी-कोशिकाओं और मैक्रोफेज की कमी जिम्मेदार-
मुख्य शोधकर्ता डॉ. चाड पेटिट के मुताबिक मोटापे से जूझ रहे लोगों में संक्रमण रोधी टीके के कम असरदार होने के दो मुख्य कारण हैं। पहला, टी-कोशिकाओं का ठीक तरह से काम नहीं करना। प्रतिरोधक तंत्र को एंटीबॉडी पैदा करने का संदेश टी-कोशिकाएं ही देती हैं। दूसरा, प्रतिरोक्षक क्षमता के सक्रिय होने से शरीर में सूजन बढऩा। इससे 'मैक्रोफेजÓ नाम की विशेषज्ञ कोशिकाओं का उत्पादन घट जाता है, जो खतरनाक तत्वों को नष्ट करने के लिए अहम मानी जाती हैं। फ्लू और हैपेटाइटिस-बी के टीके का प्रभाव भी इन्हीं वजहों से घट जाता है।
सुई का आकार अहम-
-वैंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. विलियम शैफनर ने कहा कि मोटे लोगों में टीकाकरण के समय सुई का आकार काफी मायने रखता है। पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होने वाली एक इंच लंबी सुई से टीका लगाने पर मोटे लोगों में मजबूत प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने की संभावना बेहद कम हो जाती है। ऐसे में डॉक्टरों को थोड़ी बड़े आकार की सुई से टीकाकरण करना चाहिए, ताकि दवा मांसपेशियों तक पहुंच सके।
टीकाकरण बेहद जरूरी-
-शैफनर ने स्पष्ट किया कि फ्लू और हैपेटाइटिस-बी की तरह ही कोरोना का टीका भले ही मोटे लोगों में संक्रमण रोकने में ज्यादा मददगार न हो, लेकिन उनमें कुछ हद तक सुरक्षा कवच तो जरूर विकसित होता है। यानी अगर वे वायरस की जद में आते हैं तो उनके गंभीर अवस्था में पहुंचने या फिर काल के गाल में समाने का जोखिम घट जाता है। ऐसे में टीका कोविड-19 से बचाव में मदद करेगा या नहीं, इस बारे में सोचे बगैर टीकाकरण जरूर करवाना चाहिए।
महामारी बनता मोटापा-
-1.9 अरब से ज्यादा वयस्कों का वजन सामान्य से अधिक
-65 करोड़ लोग इनमें से गंभीर रूप से मोटापे से जूझ रहे हैं
-3.8 करोड़ बच्चे (पांच वर्ष तक के) भी अधिक वजनी या मोटे
-34 करोड़ के करीब आंकी गई है किशोर उम्र के लोगों में यह संख्या
जानलेवा बीमारियों को दावत-
-28 लाख लोग औसतन हर साल मोटापे और उससे होने वाली बीमारियों के चलते दम तोड़ देते हैं।
-44त्न डायबिटीज, 41त्न कैंसर, 23त्न हृदयरोग के मामलों के लिए मोटापे को ठहराया जाता जिम्मेदार।
शौर्यपथ / हर साल भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह अष्टमी तिथि 11 अगस्त सुबह 09:06 बजे से शुरू होकर 12 अगस्त सुबह 11:16 बजे समाप्त हो रही है। यानी अष्टमी तिथि मंगलवार की सुबह से बुधवार 11 बजे तक है। जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण को 56 भोग का प्रसाद लगाने का विधान है। लेकिन इनमें सबसे खास है धनिए की पंजीरी का भोग। माना जाता है कि कान्हा को प्रसाद में धनिए की पंजीरी सबसे अधिक प्रिय है। कृष्ण जन्माष्टमी पर धनिया पंजीरी के बिना प्रसाद अधूरा माना जाता है। धनिया पंजीरी को जन्माष्टमी के अवसर पर फलाहार के रूप में व्रत खोलने के लिए बनाया जाता है। यह पंजीरी खाने में जितनी स्वादिष्ट होती है, बनाने में उतनी ही आसान है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है यह स्वादिष्ट पंजीरी।
धनिए की पंजीरी बनाने के पीछे धार्मिक मान्यता-
जन्माष्टमी पर धनिए की पंजीरी बनाने के पीछे ऐसी मान्यता है की कान्हा जी को माखन-मिश्री बहुत पसंद था। माखन-मिश्री का अधिक सेवन कान्हा को किसी तरह की हानि न पहुंचाएं इसके लिए मां यशोदा उन्हें प्रसाद में धनिए की पंजीरी बनाकर खिलाती थीं। तभी से जन्माष्टमी के दिन धनिए की पंजीरी का भोग जन्माष्टमी पर कान्हा को लगाने की परंपरा शुरू हो गई। आयुर्वेद में भी धनिया की पंजीरी का सेवन करने के कई फायदे बताए गए हैं। धनिए की पंजीरी त्रिदोष यानी वात, पित्त कफ के दोषों से बचाने का काम करती है।
धनिए की पंजीरी बनाने का तरीका-
धनिया की पंजीरी बनाने के लिए कढ़ाई में 1 चम्मच घी गर्म कर इसमें धनिया पाउडर डालें। इसे अच्छी तरह से भूनें और इसके बाद इसमें कटे हुए मखाने डाल दें। आप चाहें तो को मखाने को दरदरा पीस कर भी धनिया पाउडर में डाल सकते हैं। अब इसमें काजू और बादाम के छोटे-छोटे टुकड़े डालकर मिला दें। धनिया की पंजीरी बनाने के बाद कान्हा जी को भोग लगाकर उसे प्रसाद के रूप में घर में मौजूद लोगों को भी बांट दें।
धर्म संसार / शौर्यपथ / भगवान कृष्ण की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है। मान्यताओं के अनुसार इनके बिना पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है। जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण को तुलसी का भी भोग लगाया जाता है। भगवान श्री विष्णु के चरण पर दूध व पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद तुलसी अर्चना की जाती है
दरअसल शास्त्रों में तुलसी जी को देवी कहा जाता है। भगवान विष्णु को ये अत्यंत प्रिय हैं। तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से हुआ था, इसलिए कहा जाता है कि जो तुलसी जी की भक्ति करता है, उसको भगवान की कृपा मिलती है। तुलसी का जिक्र धर्मग्रंथों में भी मिलता है। स्कन्द पुराण के अनुसार जिस घर में तुलसी का पौधा होता है और हर दिन उसकी पूजा होती है तो ऐसे घर में यमदूत प्रवेश नहीं करते।
पुराणों के अनुसार तुलसी की पूजा रोज करनी चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि तुलसी जी की पूजा और सेवा करने वालों पर महालक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। दरअसल कहा जाता है कि विष्णु जी ने तुलसी जी को वरदान दिया था कि मुझे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जाएगा और जो व्यक्ति बिना तुलसी जी मेरी पूजा करेगा, उसका भोग मैं स्वीकार नहीं करुंगा। तब से तुलसी जी की पूजा सभी करने लगे और तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ कार्तिक मास में किया जाता है।
खेल / शौर्यपथ / मुंबई के क्रिकेटर करन तिवारी ने सोमवार रात को मलाड में अपने घर में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। करन मुंबई की प्रोफेशनल क्रिकेट टीम के सदस्य नहीं थे, लेकिन नेट बॉलर के तौर पर जुड़े थे। अभी तक उनकी मौत का कारण पता नहीं चला है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि वो अपने करियर को लेकर डिप्रेशन में थे और इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या कर ली। कोविड-19 महामारी के चलते करियर में आए ब्रेक से वो परेशान थे। करन महज 27 साल के थे। कुरार पुलिस स्टेशन में एक्सिडेंटल डेथ का केस दर्ज किया गया है, कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है।
टाइम्स नाउ में छपी खबर के मुताबिक करन मिडिल क्लास परिवार से थे। पुलिस ने कहा कि करन ने अपने एक करीबी दोस्त को फोन किया था और उनसे मौजूदा स्थिति के बारे में बात की थी। करन इस बात से परेशान थे कि उन्हें अपना टैलेंट दिखाने के लिए मौका नहीं मिल रहा है। करन ने राजस्थान में रह रहे अपने दोस्त से बात की थी। करन के दोस्त ने यह सारी बातें उनकी बहन को बताईं, जो राजस्थान में ही रहती हैं। सोमवार रात करीब 10:30 बजे करन अपने कमरे में गए और दरवाजा बंद कर लिया, जब तक दरवाजा तोड़ा गया वो मर चुके थे।
करन सीनियर टीम में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, उन्होंने काफी बार कोशिश की, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। कोविड-19 के चलते देश में क्रिकेट के तमाम इवेंट्स स्थगित हो गए थे, जिससे करन की मुश्किलें और बढ़ गई थीं। एक्टर जीतू वर्मा करन के करीबी दोस्त थे और उन्होंने बताया कि करन काफी समय से संघर्ष कर रहा था।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
