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ओपिनियन / शौर्यपथ / राजनीति में जितने काम जनता के सामने किए जाते हैं, उससे कहीं ज्यादा मेहनत परदे के पीछे की जाती है। अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव इसका अपवाद नहीं है। वहां भारतीय मूल की कमला हैरिस को डेमोक्रेटिक पार्टी ने उप-राष्ट्रपति पद का अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के दौरान अपना दावा पेश करते हुए वह जो बिडेन के खिलाफ आक्रामकता की हद तक मुखर हो चुकी हैं। जाहिर है, डेमोक्रेटिक पार्टी ने जो बिडेन और कमला हैरिस की जोड़ी चुनावी मैदान में उतारकर अमेरिकी मतदाताओं को एक साथ कई संदेश देने की कोशिश की है।
अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव नवंबर में होने जा रहे हैं। कमला हैरिस अधिक से अधिक भारतीय मतदाताओं को डमोके्रटिक उम्मीदवार जो बिडेन के पक्ष में लुभा सकती हैं। साल 2016 के चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, वहां करीब 41 लाख भारतीय मूल के नागरिक हैं, जिनमें से लगभग 18 लाख मतदान के योग्य हैं। माना यही जाता है कि भारतीय मूल के मतदाता पारंपरिक तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में अपना वोट गिराते रहे हैं, लेकिन व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप के प्रवेश के बाद से माहौल कुछ हद तक बदला है। अब कयास यह लगाया जाने लगा है कि डेमोक्रेटिक के ये पारंपरिक वोटर उससे छिटककर रिपब्लिकन पार्टी के पाले में जा सकते हैं। ‘हाउडी मोदी’ जैसे आयोजन के बाद इस फेरबदल के अनुमान में कहीं ज्यादा तेजी आई है।
लिहाजा, ऐसे किसी उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतारने का दबाव डेमोक्रेटिक पर था, जो उसके पारंपरिक गढ़ को मजबूत करते हुए रिपब्लिकन की ‘सपोर्ट बेस’ में सेंध लगा सकें। कमला हैरिस का व्यक्तित्व इसमें पार्टी की मदद करता दिखता है। वह पुराने दिनों में एक चर्चित वकील रह चुकी हैं। सेक्स हिंसा के खिलाफ उनकी टिप्पणी काफी सुर्खियों में रही। बेशक आलोचकों की नजर में वह एक उलझी हुई दावेदार हैं, क्योंकि राष्ट्रपति पद के लिए अपना दावा पेश करते समय वह जिन ‘प्रगतिशील’ नीतियों की हिमायती दिखीं, उनमें से कई को वह वकालत के अपने शुरुआती वर्षों में खारिज कर चुकी हैं। बहरहाल, देर से ही सही, पर अश्वेतों के प्रति पुलिसिया अत्याचार के खिलाफ वह जिस तरह से मुखर हुईं, उससे भी उनकी एक सकारात्मक छवि बनी है। इसी तरह, स्वास्थ्य-सेवा में सुधार, बिना दस्तावेज के रह रहे आप्रवासियों को नागरिकता मुहैया कराने, बंदूकों की खुली बिक्री पर पाबंदी लगाने, तर्कसंगत कर सुधार जैसे मसलों पर भी वह खुलकर अपनी राय रखती रही हैं। इन सबसे उनका अपना एक मतदाता-वर्ग तैयार हुआ है।
कमला हैरिस का मुखर होना भी उनके पक्ष में जाता है। राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के वक्त जो बिडेन पर की गई उनकी टिप्पणी तो अब भी कई लोगों के जेहन में ताजा होगी। उन्होंने जो बिडेन को तब घेरा था, जब उनकी बिडेन के दिवंगत बेटे से खूब बनती थी। इससे यह धारणा बनी है कि कमला चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर हमलावर होने में जो बिडेन की खासा मदद कर सकती हैं। जो बिडेन ने उनकी दावेदारी पेश करते हुए कहा भी कि काम करने के तरीके पर हमारे आपसी मतभेद हो सकते हैं, लेकिन रणनीति पर नहीं।
मगर हमारे लिए अहमियत यह रखती है कि भारत के प्रति वह क्या सोचती हैं? अभी तक यह साफ-साफ नहीं कहा जा सकता कि वह नई दिल्ली से कितनी करीब हैं, लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी को भारत का हितैषी माना जाता है। चूंकि जो बिडेन पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी प्राथमिकता में भारत शीर्ष पर होगा, इसलिए यह उम्मीद की जा सकती है कि कमला हैरिस नई दिल्ली और वाशिंगटन की मित्रता को एक नए मुकाम पर पहुंचाने में मददगार साबित हो सकेंगी। बेशक डोनाल्ड ट्रंंप के अब तक के कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्ते आगे बढ़े हैं, लेकिन एच1-बी वीजा पर उनका सख्त रुख नई दिल्ली के मुफीद नहीं माना गया, जबकि जो बिडेन यह एलान कर चुके हैं कि अगर वह राष्ट्रपति के रूप में चुने गए, तो इस वीजा पर लगी पाबंदी हटा ली जाएगी।
कमला अमेरिकी समाज में गहरा रहे विभाजन को थामने में भी सहायक हो सकेंगी। वह अश्वेत डोनाल्ड हैरिस और श्यामला गोपालन की संतान हैं। अमेरिका में, और खासतौर से अश्वेतों में जिस तरह से बेरोजगारी बढ़ी है, उससे रिपब्लिकन सरकार के प्रति उनमें नाराजगी तेज हुई है। रही-सही कसर कोरोना महामारी ने पूरी कर दी है। कोविड-19 से जान-माल की भारी कीमत चुका रहे अमेरिका में अश्वेत इस बीमारी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। और माना जाता है कि श्वेतों-अश्वेतों के बीच का सामाजिक भेद इसकी एक बड़ी वजह है। कमला हैरिस को चुनाव मैदान में उतारकर डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी समाज को एकजुट करने का संकेत दे रही है। अगर ऐसा होता है, तो यकीनन यह भारत के हित में भी होगा। वहां जिस तरह से भारतीय मूल के आप्रवासियों की आमद बढ़ी है, उसके कारण से भारत सरकार पर यह दबाव भी बढ़ा है कि भारतीय अनिवासी वहां किसी तरह के भेदभाव का शिकार न बनें।
बहरहाल, कमला हैरिस असल अर्थों में भारत के लिए कितनी सहायक हो सकेंगी, इसका जवाब तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इसका अनुमान चुनावी अभियान में पार्टी द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों से जरूर लगाया जा सकेगा। कश्मीर-विवाद, पाकिस्तान में जड़ जमा चुके आतंकवाद, चीन की विस्तारवादी नीति, मध्य एशिया में बढ़ता तनाव जैसे मसलों को लेकर पार्टी की रणनीति का खुलासा चुनावी मैदान में हो सकता है। फिर, परमाणु मसलों पर भी डेमोक्रेटिक पार्टी का रुख भारत के खिलाफ रहा है। ऐसे में, यह देखना होगा कि पार्टी अब इस बारे में क्या सोचती है? सही-सही जवाब के लिए अभी हमें कुछ इंतजार करना होगा, मगर इतना तो तय है कि कमला हैरिस का दांव खेलकर डेमोक्रेटिक ने वहां की चुनावी बिसात को बदल दिया है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) शशांक, पूर्व विदेश सचिव
दुर्ग। शौर्यपथ। केंद्र की मोदी सरकार ने आम जनता की मूलभूत ज़रूरत शुद्ध जल के लिए अमृत मिशन योजना का शुभारंभ किया इस योजना के तहत निकाय क्षेत्र में इन दिनों पुराने पाइप लाइन को बदल कर नए पाइप लाइन बिछाने का कार्य जोरो पर है । वही कार्य इन दिनों दुर्ग निगम क्षेत्र में भी संचालित हो रहा है लगभग 144 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी महाराष्ट्र की कम्पनी लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन को मिला है । शासन की तय सीमा 30 माह में कम्पनी की यह कार्य करना है जिसमे शहर की पाइप लाइन के साथ 6 टंकियों के निर्माण की भी जवाबदारी है । महती और बड़े प्रोजेक्ट में निगम प्रशासन की बारीकी मॉनिटरिंग की अत्यंत आवश्यकता है जिसका अभाव दुर्ग निगम में लगातार नजऱ आ रहा है । नियमत: जनवरी 2018 से शुरू कार्य की सीमा जून 2020 तक खत्म हो जानी थी किन्तु वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि यह कार्य साल भर बाद ही खत्म होगा ।
एक्सटेंशन का भी नही मिला फायदा ...
कम्पनी को निर्धारित समय पर कार्य पूर्ण नही करने से भुगतान में भुगतान राशि का 6 प्रतिशत नुकसान होता है स्थिति को देखते हुए निगम कमिश्नर को यह अधिकार होता है कि वह कार्य सीमा में कुछ महीनों का एक्सटेंशन दे सकते है दुर्ग निगम में भी यही हुआ कोरोना आपदा के कारण कार्य मे 4 से 8 महीने का एक्सटेंशन दे दिया गया । जबकि लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन द्वारा मात्र दो महीने का कार्य ही नही हो सका किन्तु 4 से 8 महीने का एक्सटेंशन देने से कंपनी के करीबन 10 लाख सूखे बच गए । अब लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है इतनी तेजी से कि गुणवत्ता को भी दरकिनार किया जा रहा है और निगम प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी / इंजीनियर मौन है । वैसे भी अगर गुणवत्ता हीन कार्य की सूचना भी दी जाती है तो जि़म्मेदार निगम अधिकारी भीम राव द्वारा तुरंत संज्ञान ना लेकर ठेकेदारों से बात करने की सलाह दी जाती है । निगम द्वारा प्रदत्त आलीशान चेम्बर में बैठकर ही कागजो में गुणवत्ता की बात की जा रही है निगम अधिकारियों द्वारा । स्थिति तो यहां तक है कि प्रमाण देने के बाद भी निगम आयुक्त जांच की बात तो कहते है किंतु जांच कब होगी यह नही बताते ।
दिखावटी कार्यवाही का आश्वाशन ..
यदि मामले को निगम आयुक्त के संज्ञान में भी लाया जाता है तो एक सख्त अधिकारी की तरह अधिनस्त कर्मचारियों को तुरंत कॉल कर जांच की बात कहते है किंतु यह बात भी दिखावटी ही प्रतीति होती है । ऐसे ही एक मामले में शौर्यपथ समाचार ने कुछ जगहों पर स्तरहीन कार्य की मय प्रमाण सहित बात की तो आयुक्त द्वारा तुरंत संज्ञान लेकर जांच कराने का आदेश तो दे दिया किन्तु आदेश का पालन अधिनस्त कर्मचारी वर्तमान समय तक नही कर पाए । क्या इसका यह अर्थ नही निकलता कि या तो निगम आयुक्त के अधिनस्त निगम आयुक्त के आदेश को हल्के में लेते है या फिर अधिनस्त कर्मचारी और निगम आयुक्त शिकायत कर्ता के साथ सिर्फ दिखावे का कार्य कर रहे है ।
लेबर कांट्रेक्ट की आड़ में पेटी कांट्रेक्ट...
वर्तमान में दुर्ग निगम क्षेत्र में पाइप फिटिंग के बाद फिलिंग का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है जिसमे कार्य एजेंसी द्वारा शहर के ठेकेदारों को पेटी कांट्रेक्ट में कार्य देने का मामला सामने आ रहा है किंतु इसे चतुराई से लेबर कांट्रेक्ट का रूप देकर मामले को दबाया जा रहा है । कागजो में मजबूत अमृत मिशन के कार्य मे गुणवत्ताहीन कार्य के कई मामले उजागर हुई किन्तु निगम आयुक्त मौन , ईई मौन , इंजीनियर मौन और दुर्ग शहर की जनता परेशान ..


मरवाही /शौर्यपथ / गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले के मुख्यालय पेन्ड्रा में कलेक्टर कार्यालय में गृह (पुलिस) विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर कानून व्यवस्था की समीक्षा की। मंत्री साहू ने कहा कि पुलिस विभाग की कार्य शैली ऐसी होनी चाहिए कि जनता के मन में पुलिस के लिए सम्मान हो और अपराधियों के मन में पुलिस के लिए भय हो। उन्होंने अपराधों पर नियंत्रण के लिए पुलिसबल को सजग होकर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस त्वरित कार्रवाई में जुट जाए तो अपराधों की गुत्थी आसानी से सुलझायी जा सकती है। इसके साथ ही जनता में पुलिस के प्रति विश्वास भी बढ़ता है। पुलिस का व्यवहार आम नागरिकों से सम्मानजनक और सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिले में कोरोना संक्रमण की रोकथाम में पुलिस विभाग की बेहद अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस थानों में बलवृद्धि एवं बलों की क्षमता के विकास हेतु शासन द्वारा प्रयास किया जा रहा है। गृह मंत्री ने जिले में सड़क दुर्घटनाओ को रोकने के लिए यातायात नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। बैठक में विधायक श्रीमती रेणु जोगी, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष थानेश्वर साहू, कलेक्टर डोमन सिंह, पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / सृष्टि निर्माता ने छत्तीसगढ़ को अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य से नवाजा है। दक्षिण कौशल का यह क्षेत्र रामायणकालीन संस्कृति का परिचायक रहा है। ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक महत्व की यह स्थली रामगढ़ की पहाड़ी के नाम से जाना जाता है। यह स्थल जिला मुख्यालय अम्बिकापुर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर उदयपुर विकासखण्ड के समीप स्थित है। समुद्र तल से इसकी ऊॅचाई लगभग 3 हजार 202 फीट है।
महाकवि कालिदास की अनुपम रचना ‘‘ मेघदूतम’’ की रचना स्थली और विश्व की सर्वाधिक प्राचीनतम् शैल नाट्यशाला के रूप में विख्यात ‘‘रामगढ़’’ पर्वत के साये में इस ऐतिहासिक धरोहर को संजोए रखने और इसके संवर्धन के लिए हर साल आषाढ़ के पहले दिन यहां रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है। रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित ‘‘सीताबेंगरा’’ और ‘‘जोगीमारा’’ की गुफाएं प्राचीनतम शैल नाट्यशाला के रूप में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। ये गुफाएं तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व मौर्यकाल के समय की मानी जाती हैं। जोगीमारा गुफा में मौर्य कालीन ब्राह्मी लिपि में अभिलेख तथा सीताबेंगरा गुफा में गुप्तकालीन ब्राह्मी लिपि में अभिलेख के प्रमाण मिलते है। जोगीमारा गुफा की एक और विशेषता है कि यहां भारतीय भित्ति चित्रों के सबसे प्राचीन नमूने अंकित हैं।
पुरातात्विक दस्तावेजों के रूप में मूर्तियों, शिलालेखों एवं ताम्रपत्रों का बड़ा महत्व माना जाता है। रामगढ़ मंे ऐसे महत्व की वस्तुएं उपलब्ध है। जोगीमारा गुफा में लगभग 8 मूर्तियां संग्रहित हैं। यह मूर्तियां लगभग 2 हजार वर्ष पुरानी हैं।
रामगढ़ पहाड़ी के ऊर्ध्व भाग में दो शिलालेख मौजूद हैं। प्रस्तर पर नुकीले छेनी से काटकर लिखे गए इस लेख की लिपि पाली और कुछ-कुछ खरोष्टी से मिलती जुलती है। लिपि विशेषज्ञों ने इसे एक मत से पाली लिपि माना है। इस पर निर्मित कमलाकृति रहस्यमय प्रतीत होती है। यह आकृति कम बीजक ज्यादा महसूस होता है।
रामगढ़ के निकट स्थित महेशपुर वनस्थली महर्षि की तपोभूमि थी। रामगढ़ को महाकवि कालीदास की अमरकृति मेघदूतम् की रचनास्थली मानी जाती है। इस स्थल पर ही लगभग 10 फीट ऊपर ’’कालीदासम’’ खुदा हुआ मिला है।
सीताबेंगरा के ही पार्श्व एक सुगम सुरंग मार्ग है, जिसे हाथी पोल कहते हैं। इसकी लम्बाई लगभग 180 फीट है। इसका प्रवेश द्वार लगभग 55 फीट ऊंचा है। इसके अंदर से ही इस पार से उस पार तक एक नाला बहता है। इस सुरंग में हाथी आसानी से आ-जा सकता है। इसलिए इसे हाथी पोल कहा जाता है। सुरंग के भीतर ही पहाड़ से रिसकर एवं अन्य भौगोलिक प्रभाव के कारण एक शीतल जल का कुण्ड बना हुआ है। कवि कालीदास ने मेघदूत के प्रथम श्लोक में जिस ’’यक्षश्चक्रे जनकतनया स्नान पुण्योदकेषु’’ का वर्णन किया है वह सीता कुण्ड यही है। इस कुण्ड का जल अत्यन्त निर्मल एवं शीतल है।
कालिदास युगीन नाट्यशाला और शिलालेख, मेघदूतम् के प्राकृतिक चित्र, वाल्मीकी रामायण के संकेत तथा मेघदूत की आधार कथा के रूप में वर्णित तुम्वुरू वृतांत और श्री राम की वनपथ रेखा रामगढ़ को माना जा रहा है। मान्यता यह है कि भगवान राम ने अपने वनवास का कुछ समय रामगढ़ में व्यतीत किया था। भगवान राम के वनवास के दौरान सीताजी ने जिस गुफा में आश्रय लिया था वह ”सीताबेंगरा“ के नाम से प्रसिद्ध हुई। यही गुफाएँ रंगशाला के रूप में कला-प्रेमियों के लिए तीर्थ स्थल है। यह गुफा 44.5 फुट लंबी ओर 15 फुट चौड़ी है।
सीताबेंगरा के बगल में ही एक दूसरी गुफा है, जिसे जोगीमारा गुफा कहते हैं। इस गुफा की लम्बाई 15 फीट, चौड़ाई 12 फीट एवं ऊंचाई 9 फीट हैं। इसकी भीतरी दीवारे बहुत चिकनी वज्रलेप से प्लास्टर की हुई हैं। गुफा की छत पर आकर्षक रंगबिरंगे चित्र बने हुए हैं। इन चित्रों में तोरण, पत्र-पुष्प, पशु-पक्षी, नर-देव-दानव, योद्धा तथा हाथी आदि के चित्र हैं। इस गुफा में चारों ओर चित्रकारी के मध्य में पांच युवतियों के चित्र हैं, जो बैठी हुई हैं। इस गुफा में ब्रह्मी लिपी में कुछ पंक्तियां उत्कीर्ण हैं।
सरगुजा अपने अतीत के गौरव और पुरातात्विक अवशेषों के कारण अपना एक ऐतिहासिक महत्व रखता है। यहां आने वाले पर्यटकों को रामायणकालीन युग का अहसास होता है।
// मनरेगा अभिसरण से पशुधन, डेयरी एवं चारागाह विकास के कार्य, केन्द्रीय ग्रामीण विकास तथा पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग ने जारी किए संयुक्त दिशा-निर्देश
// राज्य मनरेगा आयुक्त कार्यालय ने कलेक्टरों को जारी किया परिपत्र, मनरेगा कार्यों में पशुधन, डेयरी एवं चारागाह विकास के कार्यों को प्राथमिकता से शामिल करने के निर्देश
रायपुर / शौर्यपथ / गांवों में चारागाह विकसित करने ग्रामीण विकास और पशुधन विकास विभाग मिलकर काम करेंगे। मनरेगा तथा पशुपालन एवं डेयरी विभाग की योजनाओं के अभिसरण से ये कार्य किए जाएंगे। केन्द्रीय ग्रामीण विकास तथा पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा इसके लिए संयुक्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य मनरेगा आयुक्त कार्यालय ने सभी कलेक्टरों को परिपत्र जारी कर मनरेगा के अंतर्गत चारागाह, पशुधन और डेयरी विकास के कार्यों को प्राथमिकता से शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
मनरेगा से अधोसंरचनागत व्यवस्था और हरे चारे का उत्पादन
मनरेगा आयुक्त कार्यालय ने कलेक्टरों को ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देश तथा केन्द्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के साथ अभिसरण संबंधी संयुक्त दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए कहा है कि पशुधन, डेयरी और चारागाह विकास को बढ़ावा देने के लिए मनरेगा के अंतर्गत अनुमेय व्यक्तिमूलक एवं सामुदायिक कार्य लिए जाएंगे। इसके तहत व्यक्तिगत एवं सामुदायिक पशु शेड, बकरी शेड, सुअर शेड और मुर्गीपालन शेड बनाए जा सकेंगे। स्वसहायता समूहों के लिए कृषि उत्पादों तथा सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारगृह एवं ग्रामीण हाट निर्माण के काम भी इसमें लिए जा सकते हैं। व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वर्मी कंपोस्ट पिट तथा नाडेप व बर्कली कंपोस्ट पिट भी बनाए जा सकते हैं।
पशुपालन केंद्रों (स्पअमेजवबा थ्ंतउे) और मवेशी आश्रयगृहों को बढ़ावा देने वहां मनरेगा से सिंचाई के लिए अधोसंरचना तैयार किए जा सकते हैं। पर इन कार्यों में जलापूर्ति के लिए पाइपलाइन नेटवर्क, बोरवेल या ट्यूबवेल के काम मनरेगा से नहीं किए जा सकेंगे। संबंधित तकनीकी विभाग से परामर्श लेकर हितग्राही के या सार्वजनिक जमीन पर चराई-भूमि विकास, चारा वाले वृक्षों या उद्यानिकी पौधों के रोपण, साल भर उगने वाले घास जैसे अजोला, नैपियर, अंजन और फॉक्स-टेल ग्रास तथा पशुओं के खाने योग्य फली वाले पौधे उगाने के काम मनरेगा के तहत लिए जा सकते हैं। इस तरह की गतिविधि एक जमीन पर केवल एक बार ही ली जा सकती है। इनकी खेती के लिए एक बार बीज या थरहा पर खर्च की अनुमति चारागाह भूमि विकास के अंतर्गत दी जा सकेगी।
मवेशी संवर्धन का जिम्मा पशुधन विकास विभाग का, आकांक्षी जिलों में चारागाह विकास के लिए त्रिवर्षीय योजना
पशुपालन को बढ़ावा देने पशुधन उत्पादन, डेयरी विकास, पशुओं की बीमारियों से सुरक्षा व संरक्षण तथा पशुधन व चारा विकास में सुधार से संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी पशुधन विकास विभाग की होगी। विभाग जिला स्तरीय अधिकारियों, दुग्ध संघों, स्वसहायता समूहों तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से चर्चा व समन्वय कर मनरेगा के तहत अनुमेय कार्यों के चयन में सहायता करेगी। साथ ही चारागाह विकास को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी। पशुपालन और डेयरी विकास के लिए मनरेगा के अंतर्गत निर्मित संसाधनों के सफल उपयोग के लिए पशुधन विकास विभाग पशुपालकों को लिंकेज व वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। व्यक्तिमूलक और सामुदायिक चारागाह के विकास के लिए पंचायतों का चयन कर उनकी सूची राज्य सरकार और केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को भेजेगी।
पशुधन विकास विभाग ऐसे हितग्राही किसानों और पशुपालकों की भी पहचान करेगी जो हरे चारे या अजोला की खेती में रुचि रखते हों, किसी दुग्ध संघ के सदस्य हों या जिन्हें पशु शेड की जरूरत हो। वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने के लिए यह सूची संबंधित ग्रामसभा को उपलब्ध कराई जाएगी। ग्रामसभा में ही हितग्राहियों का चयन किया जाएगा। सभी आकांक्षी जिलों में से हर वर्ष चारे की कमी वाले 100 ग्राम पंचायतों का चयन कर अगले तीन वर्ष तक के लिए चारागाह विकास के कार्य लिए जाएंगे। गैर-आकांक्षी जिलों के लिए राज्य शासन का पशुधन विकास और ग्रामीण विकास विभाग मिलकर सामुदायिक व व्यक्तिमूलक चारागाहों के विकास की रूपरेखा बनाएंगी।
मनरेगा अभिसरण से होने वाले चारागाह, पशुधन और डेयरी विकास कार्यों का समन्वय एवं मॉनिटरिंग अभिसरण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पहले से ही गठित राज्य स्तरीय समन्वय समिति तथा जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में कार्यरत जिला स्तरीय समन्वय समिति द्वारा की जाएगी। मनरेगा आयुक्त कार्यालय ने सभी कलेक्टरों को यह सुनिश्चित करने कहा है कि अभिसरण से लिए जाने वाले कार्य मनरेगा के अंतर्गत अनुमेय हों और उनकी स्वीकृति में सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया जाए।
// नवाचार के माध्यम से बच्चों को शिक्षा जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय: मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम
// जशपुर जिले की समीक्षा बैठक में दिए निर्माणाधीन कार्यों को तेजी से पूर्ण करने के निर्देश
जशपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के नगर पालिका क्षेत्र जशपुर में नवाचार करते हुए सोशल डिस्टेंश के साथ केबल टीव्ही के द्वारा 1100 घरों के लगभग 2200 बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया है। नगर पालिका क्षेत्र के 2600 घरों में केबल कनेक्शन का उपयोग किया जा रहा है। इससे यहां के 6000 बच्चों को नवाचार माध्यम से शिक्षा प्रदान की जाएगी। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम को यह जानकारी आज जिला मुख्यालय जशपुर के कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में दी गई। डॉ. टेकाम ने बच्चों को शिक्षा देने के लिए किए जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए इसे अन्य विकासखंडो में भी संचालित करने के निर्देश दिए। डॉ. टेकाम आज उन्होंने आदिमजाति विभाग द्वारा निर्माणाधीन भवनों को शीघ्र पूर्ण करने और वन अधिकार प्राप्त पट्टों के हितग्राहियों को भूमि में लाख की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करने के भी निर्देश दिए।
मंत्री डॉ. टेकाम को स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कोई भी बच्चा कोरोना महामारी के दौरान अपनी शिक्षा से वंचित न हो, इसके लिए जिले में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने एवं उनकी नियमित पढ़ाई जारी रखने के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से विभिन्न माध्यम, केबल टी.व्ही., मोटर सायकिल गुरूजी, मोहल्ला क्लास, लाउडस्पीकर शिक्षा तथा राज्य शासन की पढ़ई तुहर दुआर योजना के तहत् वर्चुअल कक्षा का संचालन किया जा रहा है। मोटर सायकिल गुरूजी के माध्यम से शिक्षक गांव-गांव पहुंचकर मोटरसायकल पर ही बोर्ड रखकर किसी सुरक्षित स्थान पर निश्चित संख्या में बच्चों की कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। बगीचा विकासखंड में भी पहाड़ी कोरवा परिवार के बच्चों को गिटार, हारमोनियम एवं अन्य वाद्य यंत्र का भी उपयोग कर शिक्षा दी जा रही है।
मंत्री टेकाम ने आदिम जाति विकास विभाग की समीक्षा करते हुए छात्र-छात्राओं के लिए निर्मित किए जा रहे समस्त आश्रम-छात्रावास भवनों एवं अन्य निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूर्ण कराने के निर्देश दिए। पोस्ट-मैट्रिक एवं प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के संबंध में बच्चों के खातों को बैंक से पुष्टि कराकर छात्र-छात्राओं के खातों में सीधे छात्रवृत्ति प्रदान करने की बात कही। उन्होंने अल्पसंख्यक एवं अंतर्राज्यीय छात्रवृत्ति का भी समय पर भुगतान करने, वन अधिकार मान्यता पत्र के संबंध में पात्र हितग्राहियों की जांच कराकर उन्हें योजना से लाभांवित करने के निर्देश दिए। डॉ. टेकाम ने कहा कि जिन हितग्राही को वन अधिकार पत्र प्राप्त हो गया है उनकी आय बढ़ाने के लिए लाख की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने सरगुजा विकास प्राधिकरण एवं मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण के तहत् स्वीकृत कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए।
मंत्री डॉ. टेकाम ने खाद-बीज, ऋण वितरण, धान उठाव, चबुतरा निर्माण, गोधन न्याय योजना की समीक्षा करते हुए सोसायटी के लिए स्थान का चिन्हांकन कर चबुतरा निर्माण कार्य शीघता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। सहकारिता विभाग के अधिकारी ने बताया कि जिले में 8907 किसानों को 7776 मीट्रिक टन खाद का वितरण कर दिया गया है। 11,123 क्विंटल धान बीज का वितरण किया गया है। जिले में खरीफ फसल के लिए 20 करोड़ 21 लाख 67 हजार ऋण वितरण वितरण किया गया है। उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों से धान उठाव का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि जिले में वर्तमान में 17 सोसायटी संचालित है और 7 नए सोसायटी के प्रस्ताव भेजे गए हैं। गोधन न्याय योजना के तहत् ग्रामीण क्षेत्रों के 64 गौठान एवं 5 नगरीय क्षेत्र में 5 अगस्त तक 849 क्विंटल गोबर खरीदी की गई जिसके एवज में हितग्राहियो ंको 1 लाख 69 हजार का भुगतान उनके खाते में किया गया है।
बैठक में जशपुर विधायक विनय भगत, माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड के सदस्य पवन अग्रवाल, कलेक्टर महादेव कावरे, पुलिस अधीक्षक बालाजी राव, जिला पंचायत सीईओ के.एस. मण्डावी सहित अन्य विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित थे।
// 7 मेडिकल कॉलेजों में आरटीपीसीआर, 16 केंद्रों में ट्रू-नाट मशीनों तथा सभी जिलों में रैपिड एंटीजन किट से जांच
// प्रदेश में अब तक 3.89 लाख सैंपलों की जांच: 176 कोविड केयर सेंटर्स में अभी 20,750 बिस्तर उपलब्ध
रायपुर / शौर्यपथ / कोविड-19 पर नियंत्रण के लिए शासन द्वारा सैंपल जांच की सुविधा लगातार बढ़ाए जाने के फलस्वरूप अब प्रदेश में रोजाना सैंपल जांच की क्षमता 11 हजार के करीब पहुंच गई है। अभी एम्स रायपुर के साथ ही प्रदेश के सभी छह शासकीय मेडिकल कॉलेजों में आरटीपीसीआर, 16 केंद्रों में ट्रू-नाट मशीनों से और सभी जिलों में रैपिड एंटीजन किट से सैंपलों की जांच की जा रही है। कोविड-19 की पहचान के लिए प्रदेश में 11 अगस्त तक कुल तीन लाख 88 हजार 852 सैंपलों की जांच की जा चुकी है। इनमें से तीन लाख एक हजार 29 सैंपलों की जांच आरटीपीसीआर तकनीक से, 29 हजार 797 की जांच ट्रू-नाट विधि से और 58 हजार 206 सैंपलों की जांच रैपिड एंटीजन किट से किए गए हैं।
प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेजों में स्थापित बीएसएल-2 लैब में रोजाना आरटीपीसीआर जांच की कुल क्षमता 4500 है। वहीं विभिन्न जिलों के 16 केंद्रों में स्थापित ट्रू-नाट मशीनों से रोज 2040 सैंपलों की जांच की जा सकती है। रैपिड एंडीजन किट से भी सभी 28 जिलों में प्रतिदिन 4450 सैंपलों की जांच की जा सकती है। आगामी 8-10 दिनों में सभी जिलों में ट्रू-नाट विधि से सैंपल जांच शुरू हो जाएगी। इसके लिए लैबों में मशीन स्थापना का काम तेजी से जारी है। प्रदेश के तीन निजी लैबों द्वारा भी सैंपलों की आरटीपीसीआर जांच की जा रही है। वहीं दो अस्पतालों में ट्रू-नाट विधि से कोरोना संक्रमण की पुष्टि के लिए सैंपल जांच की अनुमति दी गई है।
कोरोना वायरस संक्रमितों की पहचान के लिए जांच का दायरा बढ़ाने के साथ ही प्रभावितों के इलाज के लिए विशेषीकृत कोविड अस्पतालों और कोविड केयर सेंटर्स में सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। कोविड-19 के लक्षणरहित और हल्के लक्षण वाले मरीजों के इलाज के लिए प्रदेश भर के 176 कोविड केयर सेंटर्स में 20 हजार 750 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। प्रदेश के सभी जिलों में अभी कुल लगभग 25 हजार बिस्तरों के लक्ष्य के साथ इनकी संख्या बढ़ाई जा रही है। प्रदेश के 30 विशेषीकृत कोविड अस्पतालों में 3384 मरीजों के इलाज की व्यवस्था है। गंभीर मरीजों के लिए यहां 479 वेंटिलेटर्स के साथ 445 आईसीयू और 296 एचडीयू (High Dependency Unit) बिस्तर हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित 166 क्वारेंटाइन सेंटर्स में भी 4261 बिस्तर हैं। रायपुर और बिलासपुर के कुछ निजी अस्पतालों को भी कोविड-19 के इलाज की अनुमति दी गई है।
कबीरधाम / शौर्यपथ /बरसात के दिनों में स्थानीय नाले की उफान की वजह से बानो गांव में निर्मित होने वाली बाढ़ की स्थिति से अब ग्रामीणों को निजात मिल गई है। बानो गांव बाढ़ की चपेट में आने से पूरी तरह सुरक्षित हो गया है। यह संभव हुआ है क्षेत्रीय विधायक एवं वन मंत्री मोहम्मद अकबर की विशेष पहल से। वर्षों से बाढ़ की समस्या से जूझ रहे बानो गांव के ग्रामीणों को इससे उबारने के लिए गांव के बीच से बहने वाले नाले से जल निकासी को बेहतर बनाने के लिए इसका गहरीकरण कराए जाने के साथ ही नाले को पक्का बना दिया गया है।
बानो कबीरधाम जिले के अंतर्गत सहसपुर लोहारा ब्लाक का गांव है। इस गांव नाले से हर साल बरसात के दिनों में गांव में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो जाती थी। घरों में पानी घुसने की वजह से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। पक्का नाला और गांव में पानी न घुसे, इसका प्रबंध किए जाने की ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी हो गई है।

ग्राम पंचायत बानों में बरसात के मौसम में नाले का पानी बाढ़ के रूप में तब्दील हो जाता था। इस कारण ग्रामीणों के घरों में नाले का पानी घुस जाया करता था। इसके कारण ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता था। बानो निवासियों ने बाढ़ की पुरानी समस्या से कवर्धा विधायक व मंत्री श्री मोहम्मद अकबर को अवगत कराया। मंत्री श्री अकबर की पहल पर जिला प्रशासन द्वारा मनरेगा से 12.22 लाख रूपए की लागत से 267 मीटर लम्बा यह पक्का नाले का निर्माण कराया गया है। पक्का नाला से बहने वाले पानी को गांव के सीमा से बाहर छोड़ने के लिए कच्चा नाला गहरीकरण एवं सफाई कार्य भी कराया जा रहा है। लगभग 1200 मीटर लम्बे बने इस नाले से ढाई सौ की आबादी वाले गांव बानो को अब सीधे लाभ होने लगा है। ग्राम पंचायत बानों की सरपंच श्रीमती भगवंतीन पटेल एवं ग्रामीणों ने वर्षों पुरानी नाले की समस्या के निदान के लिए मंत्री मोहम्मद अकबर सहित जिला प्रशासन का आभार जताया है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी की धर्मपत्नी श्रीमती वीणा सिंह जी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
मुख्यमंत्री बघेल ने डॉ. रमन सिंह और अस्पताल के संचालक संदीप दवे से दूरभाष पर चर्चा कर श्रीमती वीणा सिंह के स्वास्थ्य और उनके उपचार की जानकारी ली।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / गोपालगंज बिहार में एक बार फिर से एक पुल का अप्रोच रोड उद्घाटन से पहले ही टूट गया है. मामला गोपालगंज से जुड़ा है, जहां बंगरा घाट महासेतु का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को उदघाटन करने वाले हैं. इस महासेतु का अप्रोच रोड करीब 50 मीटर के दायरे में ध्वस्त हो गया है. ध्वस्त अप्रोच रोड को उद्घाटन से पहले दोबारा दुरुस्त करने की कवायद की जा रही है.
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के आला पदाधिकारी से लेकर संवेदक मौके पर मौजूद हैं. सैकड़ों की संख्या में मजदूर लगाए गए हैं और दो-दो जीएसबी लगाकर इसे दोबारा चालू करने की कोशिश की जा रही है. जहां यह अप्रोच रोड टूटा है वो इलाका सारण के पानापुर के सतजोड़ा बाजार के समीप पड़ता है. यह इलाका छपरा के पानापुर में पड़ता है. बताया जाता है की गोपालगंज के बैकुंठपुर में 7 जगहों पर सारण बांध टूटा था. इसी बांध के टूटने के बाद बंगरा घाट महासेतु से करीब 5 किलोमीटर दूर अप्रोच रोड पानी के दबाव से अचानक ध्वस्त हो गया.
सबसे बड़ी बात है कि यह अप्रोच रोड 12 दिन पहले टूटा था. इस टूटे अप्रोच पथ को दोबारा गाड़ियों के आने-जाने लायक बनाने का प्रयास किया जा रहा है. इस मामले में जब बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के डिप्टी चीफ इंजिनियर शाकिर अली से सवाल किया गया तो उन्होंने इसे एक सामान्य घटना बताया. उन्होंने कहा कि महासेतु के निर्माण और इसके साथ अप्रोच रोड के निर्माण में किसी भी तरह का घटिया काम नहीं किया गया है. सभी कार्य गुणवत्ता के मानक के अनुरूप किए गए हैं और सीएम के उद्घाटन समारोह से पहले इसे दुरुस्त कर लिया जाएगा.
बता दें कि बंगरा घाट महासेतु के छपरा साइड में करीब 11 किलोमीटर और मुजफ्फरपुर साइड में 8 किलोमीटर लंबे अप्रोच रोड का निर्माण किया गया है, जिस पर करीब 509 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं. अब बड़ा सवाल है कि आखिर 509 करोड़ की लागत से बने महासेतु का अप्रोच रोड उदघाटन के साथ ही क्यों टूटने लगा?
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
