Google Analytics —— Meta Pixel
June 02, 2026
Hindi Hindi
शौर्यपथ

शौर्यपथ

मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड के दिग्गत अभिनेता संजय दत्त को लेकर बीते दिनों खबर आई कि वो फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित हैं। मालूम हो कि कल (11 अगस्त) ही संजय दत्‍त ने सोशल मीडिया के जरिए फैंस को यह जानकारी दी थी कि वो अपने मेडिकल ट्रीटमेंट के चलते कुछ समय के लिए काम से ब्रेक ले रहे हैं। उस ट्वीट के बाद फैंस की चिंता बढ़ गई थी। अब इसके बाद संजय दत्त की पत्नी मान्यता दत्त ने उनकी हेल्थ को लेकर आधिकारिक बयान जारी किया है। मान्यता ने कहा कि हमें फैंस की दुआओं की जरूरत है। साथ ही साथ मान्यता दत्त ने अपील की है कि एक्टर को लेकर कोई अफवाह ना फैलायी जाए। मालूम हो कि संजय दत्त और मान्यता दत्त ने साल 2008 में गोवा में हिंदू रीति- रिवाज से शादी की थी। दोनों के दो जुड़वां बच्चे हैं। इनके बेटे का नाम शहरान और बेटी इकरा दत्त है।

मान्यता दत्त ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि मैं सभी को धन्यवाद देती हूं जिन्होंने संजू के शीघ्र स्वस्थ होने की शुभकामनाएं व्यक्त की हैं। हमें इस वक़्त को पार करने के लिए ताकत और प्रार्थना की जरूरत है। पिछले वर्षों में परिवार बहुत कठिन समय से गुजरा है, लेकिन मुझे विश्वास है, यह भी गुजर जाएगा। साथ ही, यह संजू के प्रशंसकों से मेरा दिल से अनुरोध है कि वे अटकलों और अनुचित अफवाहों पर विश्वास न करे, बल्कि अपने प्यार, गर्मजोशी और समर्थन से मदद करें। संजू हमेशा एक फाइटर रहे हैं और इसी तरह हमारा परिवार भी रहा है। आगे की चुनौतियों से उबरने के लिए भगवान ने हमें फिर से परीक्षण करने के लिए चुना है। हम आप सभी से आपकी प्रार्थना और आशीर्वाद चाहते हैं, और हम जानते हैं कि हम हमेशा की तरह फिर से विजेता बनकर उभरेंगे। आइए हम इस अवसर का उपयोग प्रकाश और सकारात्मकता फैलाने के लिए करें।

आपको बता दें कि संजय दत्त का पहली बार कैंसर से पाला नहीं पड़ा है। उनके सबसे करीबी लोग इस घातक बीमारी के शिकार हुए हैं। उनकी मां नर्गिस और वाइफ ऋचा शर्मा को भी ये बीमारी हुई थी। 39 साल पहले मां नर्गिस दत्त का इस बीमारी से निधन हुआ था। नरगिस दत्त राज्य सभा के सेशन के दौरान गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं थीं। वो तारीख थी 2 अगस्त 1980 । पहले लगा की उन्हें जॉन्डिस है। मुंबई के ब्रीचकैंडी हॉस्पिटल में 15 दिनों तक इलाज चला लेकिन तबियत संभलने के बजाय बिगड़ती चली गई। डॉक्टरों में उनकी दोबारा जांच की तो पता चला कि उन्हें कैंसर है। नर्गिस पैंक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित थीं।

मुंबई ब्लास्ट में दोषी होने की वजह से इलाज के लिए अमेरिका नहीं जा पाएंगे संजय दत्त?
बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त को लंग्स कैंसर होने की खबर सामने के बाद उनके परिवार में तनाव का माहौल है। बताया जा रहा था कि वह अपने इलाज के लिए अमेरिका जा सकते हैं, लेकिन अब ऐसी बात सामने आई है जिससे संजय दत्त का अमेरिका जाना मुश्किल हो सकता है। एबीपी न्यूज की मानें तो संजय के पास अमेरिका का वीजा नहीं है। हालांकि, यह भी बताया जा रहा है कि वह वीजा हासिल करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

एबीपी न्यूज ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि संजय दत्त इलाज के लिए अमेरिका के मेमोरियल स्लोआन केटरिंग कैंसर अस्पताल में इलाज के लिए जा सकते हैं, लेकिन पेंच यह है कि संजय दत्त के पास अमेरिका का वीजा नहीं है और वह मुम्बई ब्लास्ट में दोषियों और सजायाफ्ता मुजरिमों में शामिल हैं।

ऐसे में संजय दत्त मेडिकल ग्राउंड पर अमेरिका का वीजा पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अगर उन्हें अमेरिका में इलाज कराने की अनुमति नहीं मिलती है तो वह फिर दूसरे विकल्प के रूप में इलाज के लिए सिंगापुर जा सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर परिवार ने कोई पुष्टि नहीं की है।

बताते चलें कि संजय दत्त को फेफड़ों का कैंसर होने की खबर मिलते ही उनकी पत्नी मान्यता दत्त अपने दोनों बच्चों के साथ एक विशेष विमान से दुबई से सीधे मुम्बई पहुंच गई हैं। वह मार्च महीने से ही देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और लॉकडाउन के कारण दुबई में फंसी हुई थीं, लेकिन अब वह मुंबई लौट आई हैं।

 

          नजरिया / शौर्यपथ / राजस्थान विधानसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी ने जब अशोक गहलोत और सचिन पायलट को जिम्मेदारी सौंपी थी, तब उन्होंने दोनों नेताओं को अपने साथ खड़ा करके एक खुशनुमा तस्वीर ट्वीट की थी। इस तस्वीर को उन्होंने राजस्थान का मिला-जुला रंग करार दिया था। पर इस तस्वीर कोे बरकरार रखने के लिए पौने दो साल बाद भी पहले दिन की तरह उन्हें दोनों नेताओं की लड़ाई में बीच-बचाव करना पड़ रहा है। एक माह तक चली रस्साकशी के बाद राजस्थान सरकार का संकट फिलहाल टल गया है, पर अशोक गहलोत व सचिन पायलट के बीच टकराव अभी भी बरकरार है। गहलोत की तमाम कोशिशों के बावजूद पार्टी में पायलट की वापसी से साफ है कि कांग्रेस अपने नेताओं को खोने का जोखिम नहीं उठाना चाहती। इससे गहलोत को भी एहसास हो गया कि संगठन से जुड़े मामलों में उनका निर्णय अंतिम नहीं है।
करीब एक माह तक चली इस लड़ाई में सचिन पायलट को भी वह सब हासिल नहीं हुआ, जिसके लिए उन्होंने बगावत का झंडा बुलंद किया था। पायलट को अपने साथ 30 विधायक होने का भरोसा था, पर बगावत के ऐलान के साथ ही कई भरोसेमंद विधायकों ने उनका साथ छोड़ दिया। आखिर में सिर्फ 19 विधायक उनके साथ गुरुग्राम के होटल पहुंचे। इनमें से भी कई विधायक मुख्यमंत्री के संपर्क में थे। गहलोत ने संख्या कम होने के बावजूद करीब 102 विधायक जुटा लिए थे। बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय का मामला अदालत में है और कई विधायकों पर उन्हें पूरा भरोसा नहीं था। दो-तीन विधायक भी इधर-उधर हुए, तो खेल पलट सकता था। उनकी रणनीति भाजपा पर टिकी थी। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के रुख को गहलोत अपने लिए फायदेमंद मान रहे थे, पर वह आश्वस्त नहीं थे। यही वजह है कि पार्टी अपने विधायकों को कभी एक होटल, तो कभी दूसरे होटल में घेराबंदी कर रोकने की कोशिश करती रही।
इस पूरे मामले में अशोक गहलोत ने सरकार गिराने की साजिश करने वाले लोगों को मात देकर कांग्रेस को रणनीतिक बढ़त दिलाई है। मध्य प्रदेश के बाद पार्टी के हौसले पस्त थे। शुरुआत में तो लगा था कि राजस्थान भी हाथ से फिसल गया, पर गहलोत ने जिस तरह रणनीति को अंजाम दिया, उससे पार्टी की ताकत बढ़ गई है।
पायलट को भी पता था कि गहलोत ने एक बार बहुमत साबित कर दिया, तो उनके लिए पार्टी में वापसी मुश्किल हो जाएगी। इसके साथ विधायकों की सदस्यता भी खत्म हो सकती है। पूरी कवायद में कांग्रेस एक विजेता के तौर पर उभरी है। पार्टी जहां राजस्थान में अपनी सरकार बचाने में सफल रही, वहीं टूट से भी बच गई। कांग्रेस लगातार कहती रही कि पायलट और उनके समर्थकों के लिए दरवाजे खुले हैं। गहलोत ने पायलट पर सीधा हमला बोला, तो सफाई देने में भी देर नहीं की।
सचिन पायलट अब वापस आ चुके हैं। पार्टी ने उनकी शिकायतों पर विचार करने के लिए तीन सदस्यीय समिति के गठन के अलावा कोई वादा नहीं किया है। समिति पायलट और गहलोत के साथ विधायकों से चर्चा करके अपनी रिपोर्ट देगी। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर कदम उठाए जाएंगे। पायलट समर्थक विधायकों को सरकार में पहले के मुकाबले ज्यादा लालबत्ती मिल सकती है। शुरुआती तौर पर ऐसा लगा कि पायलट ने राजनीतिक गलती की है, पर उन्होंने शुरू में जो बात कही, उसी पर कायम रहे। उन्होंने अपने हमले को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक सीमित रखा। यही सावधानी उनकी वापसी की वजह बनी। हो सकता है, पायलट कुछ दिन कमजोर नजर आएं, पर पार्टी में उनका कद बढे़गा।
गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है। कुछ हद तक यह बात सही भी है, क्योंकि अभी तक वह अपने सभी विरोधियों को मात देते हुए आगे बढ़ते रहे हैं। हरिदेव जोशी, परसराम मदेरणा, नवल किशोर शर्मा, शीशराम ओला और रामनिवास मिर्धा जैसे नेताओं को प्रदेश की राजनीति में दरकिनार कर गहलोत आगे बढे़ हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि पार्टी हाईकमान के निर्णय उनके लिए अंतिम हैं। ऐसे में, यह मामला उनके लिए इम्तिहान से कम नहीं है। गहलोत किस तरह पायलट के साथ अपनी अदावत भुलाकर उन्हें सम्मान देते हैं, यह राजस्थान में कांग्रेस सरकार की स्थिरता का पैमाना होगा और सचिन को अब एक नई शुरुआत करनी होगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) सुहैल हामिद, विशेष संवाददाता, हिन्दुस्तान

 

सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / देश के दस राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अपनी कल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिक से अधिक जांच की बात पर जिस तरह से जोर दिया, वह महामारी से निपटने में इस कदम की अहमियत को स्पष्ट कर देता है। उन्होंने उन राज्यों से खास तौर से अपील की कि वे अपने यहां जांच की रफ्तार और दायरा बढ़ाएं, जहां संक्रमण-दर और मृत्यु-दर अधिक हैं। बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके बाकायदा बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना सरकारों से इस काम में तेजी लाने को कहा। इसमें कोई दोराय नहीं कि जांच की संख्या और दायरे के विस्तार के साथ संक्रमण के आंकडे़ बढ़ेंगे, लेकिन संक्रमितों को वक्त पर उपचार मुहैया कराकर ही मृत्यु-दर को कम किया जा सकता है। अब यह वैश्विक स्तर पर स्थापित तथ्य है कि जिन देशों ने बचाव के अन्य उपायों के साथ शुरुआती दौर में ही ज्यादा से ज्यादा जांच का रास्ता अपनाया, वे आज बेहतर स्थिति में हैं।
हमारे लिए राहत की एक बात यह है कि मृत्यु-दर दो फीसदी के नीचे आ गई है। जाहिर है, रिकवरी रेट बढ़ रहा है। लेकिन महामारी से हमारी लड़ाई अभी काफी कठिन मोड़ पर है। चूंकि संक्रमण के मामले अब ग्रामीण इलाकों से भी काफी मिल रहे हैं, इसलिए हमें पहले से अधिक चिकित्सकों, अस्पतालों और अन्य संसाधनों की जरूरत पड़ेगी, जबकि हम अब तक इस जंग में तकरीबन 200 डॉक्टरों की शहादत दे चुके हैं और पहली कतार के कोरोना वॉरियर्स व अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। यही नहीं, लंबे लॉकडाउन और आर्थिक सुस्ती के कारण आम लोगों पर भी एक अलग किस्म का दबाव है। खुद प्रधानमंत्री ने कल की बैठक में इसका संकेत किया था। ऐसे में, एक राष्ट्र के तौर पर यह हमारे धैर्य की परीक्षा की घड़ी है। और महामारी को परास्त करने के लिए हमें इस परीक्षा में पास होना ही होगा।
कल की बैठक में कुछ मुख्यमंत्रियों ने राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) से कैप हटाने की भी मांग की, ताकि वे अपने सूबे में महामारी की चुनौतियों का मुकाबला अच्छे तरीके से कर सकें। अभी इस कोष से अधिकतम खर्च-सीमा 35 फीसदी है। पंजाब, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों ने केंद्र से इससे अधिक राशि निकालने की इजाजत मांगी है। राज्यों की यह मांग जायज लगती है, क्योंकि पिछले छह महीनों से उनकी राजस्व-उगाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, और फिर बिहार व केरल जैसे राज्य तो बाढ़ की आपदा का भी सामना कर रहे हैं। स्वाभाविक है, उन्हें इस कैप की वजह से दुश्वारियां पेश आ रही हैं। बहरहाल, केंद्र और राज्यों ने जिस समन्वय के साथ अब तक इस महामारी का मुकाबला किया है, उसकी यकीनन सराहना की जानी चाहिए। तब तो और, जब अमेरिका जैसा मजबूत संघीय ढांचा इस महामारी में चरमराता हुआ दिखा और राष्ट्रपति ट्रंप व विपक्ष शासित राज्यों की तनातनी की कीमत हजारों अमेरिकियों को जान देकर चुकानी पड़ी। भारत में राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ प्रधानमंत्री शुरुआत से ही लगातार बैठकें करते रहे हैं और इससे समस्याओं के मूल तक पहुंचने की एक समझ बनी है। यह एक मुश्किल लड़ाई है और विभिन्न शासकीय इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल, अधिकतम जांच एवं व्यापक जन-जागरूकता से ही इसमें फतह मिल सकती है।

 

मेलबॉक्स / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल 15 अगस्त को दिए गए अपने भाषण में जनसंख्या नियंत्रण को आज की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बताया था, बावजूद इसके आज तक सरकार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा सकी है। यह समझने की जरूरत है कि किसी भी देश के संसाधन बहुत सीमित होते हैं, इसलिए असीमित रूप से बढ़ती जनसंख्या उस संसाधन को समय-पूर्व खत्म कर सकती है। जनसंख्या वृद्धि के कारण देश का विकास भी अवरुद्ध हो जाता है। इसलिए सरकार से गुजारिश है कि आगामी संसद सत्र में जनसंख्या नियंत्रण विधेयक पेश किया जाए, क्योंकि देश में लगातार बढ़ती आबादी को थामना बहुत जरूरी है। इसी से योजनाएं सही तरह धरातल पर कामयाब हो सकेंगी। इस दिशा में आगे बढ़ना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि अब देश बढ़ती आबादी के बोझ तले हांफने लगा है।
प्रमोद अग्रवाल गोल्डी, हल्द्वानी

भीड़ में अकेला
परदे पर अमूमन हर कहानी के जरिए जिंदगी और उसकी सार्थकता का पैगाम देने वाली फिल्मी और टीवी दुनिया में आखिर क्या हो गया है कि लगातार चमकते सितारों की खुदकुशी की खबरें आने लगी हैं? बीते एक हफ्ते में समीर शर्मा और अनुपमा पाठक की आत्महत्या ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि परदे की चकाचौंध के पीछे या तो सब कुछ ठीक नहीं है या फिर वहां हालात से लड़ते कलाकारों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है, जो वक्त पर उन्हें थाम सके। विडंबना यह है कि शायद हमारा समाज अभी इस स्तर तक संवेदनशील नहीं हुआ है या फिर भावनात्मक स्तर पर उसमें सामूहिकता का इतना विकास नहीं हुआ है कि वह अपने-अपने दायरे और पहुंच के लोगों पर गौर कर सके और वक्त पर उनके लिए सहारा बन जाए। वरना समीर शर्मा और अनुपमा पाठक, दोनों ने अपने सोशल मीडिया पर जिस तरह की तस्वीरों और वीडियो के जरिए अपनी मन:स्थिति का इजहार किया था, उससे साफ लग रहा था कि वे किसी भावनात्मक द्वंद्व से गुजर रहे हैं और खुद को अकेला पा रहे हैं।
अरविंद पाराशर, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश

तिरंगे वाले मास्क
कई कंपनियां पैसा कमाने के उद्देश्य से बगैर सोचे-समझे कोई भी उत्पाद बाजार में ले आती हैं। उनका एकमात्र मकसद पैसा कमाना होता है। उनकी यह लालसा देश की अवमानना करने से भी नहीं चूकती। जैसे, स्वतंत्रता दिवस निकट आने पर मास्क बनाने वाली कंपनियों ने तिरंगे के चित्र वाले मास्क को बेचना शुरू कर दिया है। इस तरह के मास्क बनाना गलत है, क्योंकि इसे अपने मुंह पर लगाने के बाद व्यक्ति खांसता व छींकता भी है। फिर, अनुपयोगी होने पर उसे कूड़े में भी फेंक देता है। इस तरह तिरंगे वाले मास्क से हमारी राष्ट्रीयता के प्रतीक का अपमान होगा। इसलिए इन्हें खरीदना और बेचना प्रतिबंधित होना चाहिए। सरकार और स्थानीय प्रशासन के लोग इस पर अविलंब गौर करें।
आशीष सकलेचा, जावरा

बेखौफ अपराधी
देश में आए दिन बलात्कार की घटनाएं घटित हो रही हैं। कोई भी राज्य इन घटनाओं से अछूता नहीं है। अभी हाल ही में दिल्ली में 12 वर्षीया बालिका के साथ जिस तरीके की र्दंरदगी की गई, उसे देखकर निर्भया कांड की यादें ताजा हो गईं। आखिर कब तक नारी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ती रहेगी? यह हमारे सरकारी तंत्र की विफलता का परिणाम है कि निर्भया के दोषियों को इतने वर्षों के बाद सजा मिली। असल में, अपराधियों में खौफ इसीलिए नहीं होता, क्योंकि कहीं न कहीं हमारा सरकारी तंत्र गुनहगारों की मदद करता है! इसी कारण आज महिलाओं के प्रति अपराध की दर बढ़ रही है। इसे रोकने के लिए कड़े कानून के साथ सरकारी तंत्र में भी व्यापक बदलाव लाने की जरूरत है।
शुभम वैष्णव, राजस्थान

 

ओपिनियन / शौर्यपथ / भारत और भारतीय कलाओं से भगवान श्रीकृष्ण का बहुत गहरा सरोकार है। यह पवित्र कलात्मक सरोकार या संबंध आध्यात्मिक भी है और व्यावहारिक भी। वाद्य यंत्रों की बात करें, तो भी श्रीकृष्ण ही आधार हैं। अगर बांसुरी की एक वाद्य के रूप में शुरुआत हुई, तो उन्हीं से हुई। 64 कलाओं के देवता कहलाने वाले कृष्ण की बांसुरी से खूब संगीत प्रवाहित-प्रसारित हुआ। संगीत के साथ ही नृत्य से भी वह गहरे जुड़े थे। यह सुविदित है कि उनके प्रेम-भक्ति पूर्ण महारास में संगीत और नृत्य, दोनों की प्रधानता थी। शास्त्र बताते हैं कि कृष्ण के सौजन्य से ही पूरे ब्रज में संगीत-नृत्य की गूंज उठती थी और आज भी उठती है।
ब्रज के कन्हैया का संबंध भारतीय कलाओं से बहुत लंबे समय से चला आ रहा है और ऋषि-मुनियों ने भी इसे पूरे भक्ति भाव से आगे बढ़ाया। ऋषि-मुनि जब श्रीकृष्ण का ध्यान करते थे, तब गाने-नाचने को स्वत: प्रेरित हो जाते थे। श्रीकृष्ण की प्रेमपगी छाया में ही संगीत, नृत्य के अनेक पद-ग्रंथ रचे गए। बाद में सूरदास जैसे कवि हुए, जिन्होंने कृष्ण की महिमा में एक से एक पद लिखे। उनकी रचनाओं में कृष्ण के मोहक बालरूप और वृंदावन की कुंज गलियन की चर्चा बड़ी खूबसूरती से होती है। सूरदास अपनी रचनाओं में श्रीकृष्ण के प्रेरक स्वरूप को साकार कर देते हैं।
सर्वज्ञात है कि हमारी परंपरा में या तो श्रीकृष्ण ने नृत्य किया या महादेव शिव ने। पुराणों के समय से इन दोनों देवताओं को नर्तक नाम से भी पुकारा जाता है। यह संभव है कि श्रीकृष्ण को शिवजी से ही संगीत-नृत्य का ज्ञान मिला हो। श्रीकृष्ण ने आम जनमानस को लुभाने के लिए बहुत सहजता से अपने कला ज्ञान का प्रयोग किया।
कला जगत कृष्ण के बिना अधूरा है और विशेष रूप से कथक नृत्य और कृष्ण का प्रगाढ़ संबंध है। हमारे इष्टदेव कृष्ण ही हैं। बहुत पुराने समय से हम लोग उनकी पूजा करते आ रहे हैं। पूजा की यह विधि आज भी वही है। हम आज भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे भक्ति भाव से उनकी पूजा करते हैं। समय बदल गया, पहले लखनऊ में, मुझे याद है, मेरे यहां बहुत धूमधाम से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का आयोजन होता था। आज जन्माष्टमी को भले एक दिन तक समेट लिया गया हो, लेकिन पहले मेरे शहर लखनऊ में ही आयोजन छह दिन तक निरंतर चलता था। रोज पंडित जी के साथ मिलकर हम बहुत भावपूर्ण पूजा करते थे। आयोजन में बड़े-बड़े कलाकार, संगीतकार, नर्तक आते थे और अपनी प्रस्तुति भी देते थे। श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम दर्शाने के लिए ही वह कार्यक्रम होता था। मेरे पिता, दादा की खूब व्यस्तता हो जाती थी, छह दिन तक केवल श्रीकृष्ण उत्सव की धूम रहती थी। जो भी आयोजन में आता, खाली हाथ नहीं जाता, साथ में चावल, आटा, दाल, घी इत्यादि ले जाता था। बाहर से जो कलाकार देखने आते थे, उन्हें भी वहां गाना-बजाना करना पड़ता था। याद है, बड़े-बड़े कलाकार आते थे, लेकिन अब वह आयोजन नहीं रहा। तब हम कलाकारों को श्रीकृष्ण ही परस्पर जोड़ने का काम करते थे। बाबा उस आयोजन में खुद ही सबकी सेवा करते थे, बर्तन तक मांजते थे। भाव ऐसा होता था, मानो सचमुच भगवान ने बाल रूप में अवतार ले लिया हो। लखनऊ छूट गया। दिल्ली रहने लगा। मेरी बड़ी इच्छा है कि फिर से लखनऊ में कुछ कर सकूं।
कथक नृत्य ही नहीं, भारत में जो अन्य शास्त्रीय नृत्य शैलियां हैं, उनमें भी कृष्ण के महत्व को माना गया है। हम कलाकार दक्षिण के हों या उत्तर के या पूरब के, कृष्ण की गाथाओं का प्रदर्शन और गायन हरेक ने किया है। अपनी-अपनी भाषा में सब गाते रहे हैं, लेकिन कृष्ण को कोई भुला नहीं पाया। कृष्ण की चर्चा और उनके प्रसंग पूरे कला जगत में विद्यमान हैं। त्यागराज जी ने भी कृष्ण को देखा, मीरा ने भी देखा, सूरदास ने देखा, हर किसी ने अपनी दृष्टि से कृष्ण प्रेम को समृद्ध किया। यहां तक कि मुसलमान भक्तों-कवियों ने भी कृष्ण के प्रेम में बड़े सुंदर पद कहे। अपने देश में गंगा-जमुनी तहजीब रही है और सब इसमें समान रूप से भागीदार रहे हैं।
पहले जिस तरह से जन्माष्टमी मनाई जाती थी, उसमें फर्क आया है। अब आयोजन छोटे होते हैं, लेकिन पूजा की विधियां वही हैं, जो सदियों पहले थीं। हम लोग अभी भी मानते हैं, छठी के दिन तो विशेष आयोजन रहता है। पकवान बनते हैं, सौंठ के लड्डू भी बनते हैं। पहले ये लड्डू खूब बनते और बंटते थे, लेकिन अब सगुन भर के लिए थोड़े बना लिए जाते हैं। पुराने लखनऊ में कृष्ण की मान्यता आज भी बहुत है। पहले के दौर में भी मथुरा, वृंदावन में खूब कार्यक्रम होते थे और आज भी होते हैं। वहां कृष्ण को समर्पित अनेक कलाकार मंडलियां हैं। भारतीय विद्याओं और भारत को श्रीकृष्ण से अलग करके नहीं देखा जा सकता। वह हर जगह हैं।
श्रीकृष्ण को निहारते, उनसे सीखते, उनको अपने अभिनय-नृत्य में उतारने की कोशिश करते मुझे इतना समय हो गया। अक्सर मैं तैयार होकर जब खड़ा होता हूं, तो सोचता हूं, हे भगवान, अब मुझे नचाओ। उनसे सीखने को अभी कितना कुछ है। आज लोगों और विशेष रूप से युवाओं को मेरा यही संदेश है कि कृष्ण का जो पूरा जीवन बीता है, उसका अवश्य ध्यान करें। भगवान ने अपने जीवन में बहुत छोटी उम्र में ही कितने बड़े-बड़े कार्य किए थे। जीवन में निरंतर संघर्ष करते रहे, जूझते रहे, लेकिन सदा मुस्कराते रहे। अपने माता-पिता को कैद से सुरक्षित छुड़ा लिया। सबको सुख दिया। सबके दुख को काटा। कालिया नाग सहित न जाने कितने असुरों को मार्ग से हटाया, ब्रज के लोगों को सुरक्षित किया। कृष्ण को अपने ध्यान में जरूर लाना चाहिए। हमारे बीच कृष्ण की ऐसी मनमोहक मूर्ति है कि उन्हें देखने मात्र से ही सबको सुख मिलता है। उनका आनंद लेना हो, तो शांत भाव से उनके सामने बैठ जाओ और उनकी महिमा व चरित्र को याद करो। उन्हें पढ़ो, समझो, तो शक्ति मिलेगी और सुख होगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) पंडित बिरजू महाराज, प्रसिद्ध नृत्य गुरु

 

नवागढ़ / शौर्यपथ / नवगठित भारतीय जनता पार्टी बेमेतरा जिला कार्यकारणी में विकास धर दीवान लगातार तीसरी बार जिला महामंत्री नियुक्त किया गया ही। नियुक्ति के बाद से उनके निवास पर जिला से लेकर मण्डल एवं नवागढ़ नगर के भाजपा नेता, कार्यकर्ता एवं वरिष्ठजन बधाई देने हेतु पहुँच रहे है। कोई फूल माला, गुलदस्ता, शॉल एवं मिठाई इत्यादि भेंट कर अपना अपना स्नेह प्रर्दशित कर रहे है। भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश जोशी ने जिला कार्यकारणी की जबसे घोषणा की तभी नवागढ़ के कार्यकर्ताओं ने फटाखे फोड़कर एवं मिठाई बाँटकर खुशी का इज़हार किया था। इसके साथ ही नवनियुक्त जिला उपाध्यक्ष फिरतुराम साहू व अजय तिवारी एवं जिला मंत्री सुरेंद्र ठाकुर को भी कार्यकर्ताओं ने शुभकामनाएं दी।
उल्लेखनीय है कि जब से बेमेतरा जिला सन्गठन का गठन हुआ है दीवान तब से महामंत्री का कार्यभार संभाल रहे है। पहले कार्यकाल में उन्होंने तत्कालीन जिलाध्यक्ष राजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में संगठन को इस कदर मजबूत किया था कि पहली बार बेमेतरा जिले के तीनों विधानसभा में भाजपा के विधायक जीत कर आये थे। इन दोनों दिग्गज नेताओं की कुशल कार्यशैली का ही परिणाम रहा कि पार्टी ने इन्हें दूसरे कार्यकाल में उन पदों पर दोहराया था। दूसरे कार्यकाल में हालांकि भाजपा को जिले में विधानसभा चुनाव में हार मिली लेकिन जिलाध्यक्ष शर्मा एवं महामंत्री दीवान पुन: कार्यकर्ताओं में जोश भरा और लोकसभा चुनाव में पार्टी ने विधानसभा की खाई को पाटते हुए भारी बहुमत प्राप्त किया।
भाजपा नेता दीवान के दोनों कार्यकाल के आधार पर इनके जिलाध्यक्ष बनने के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन पार्टी ने वरिष्ठ ओमप्रकाश जोशी को मौका दिया। जोशी के साथ इन्होंने तालमेल बैठाकर मजबूत भूमिका निभाई और बेमेतरा जिला पंचायत में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनाकर लाये। जिसके बाद पार्टी ने जिला संगठन में दीवान की कार्यशैली को देखते हुए पुन: महामंत्री बनाया है। अब देखना होगा दीवान संगठन को और कितनी मजबूती देते है।
नियुक्ति पर भाजपा जिला महामंत्री विकास दीवान ने कहा कि मेरी भाजपा में राजनीतिक शुरुआत राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय के मार्गदर्शन में हुई है। आज उनके ही आशीर्वाद से मुझे पुन: जिला महामंत्री का दायित्व मिला है। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, पूर्व जिलाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा एवं जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश जोशी का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे योग्य समझते हुए पुन: यह जवाबदारी दिया है। मैं विश्वाश दिलाना चाहता हूँ कि वर्तमान में भाजपा जिले में कांग्रेस की अपेक्षा काफी मजबूत है और हम आगे भी संगठन की जड़ो को मजबूत करने के लिए कार्य करेंगे।

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर राज्य में वनवासियों की खुशहाली और वनांचल के गांवों को स्वावलंबी बनाने के उद्ेदश्य से इंदिरा वन मितान योजना शुरू किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत राज्य के आदिवासी अंचल के दस हजार गांव में युवाओं के समूह गठित कर उनके माध्यम से वन आधारित समस्त आर्थिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इन समूहों के माध्यम से वनवासियों के स्वरोजगार और उनकी समृद्धि के नए द्वारा खुलेंगे। इस योजना के तहत समूहों के माध्यम से वनोपज की खरीदी, उसका प्रसंस्करण एवं मार्केटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। राज्य के प्रत्येक आदिवासी विकासखण्डों में वनोपज प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना किए जाने का लक्ष्य सरकार ने रखा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों के 10 हजार गांवों में इस योजना के अंतर्गत समूह गठित किए जाएंगे, जिनमें युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रत्येक समूह में 10 से 15 सदस्य होंगे। इंदिरा वन मितान योजना में अनुसूचित क्षेत्रों के 19 लाख परिवारों को जोडऩे का लक्ष्य है। इस योजना के माध्यम से समूहों को वृक्ष प्रबंधन का अधिकार प्रदान किया जाएगा, जिससे वे वन क्षेत्रों के वृक्षों से वनोपज संग्रहण कर आर्थिक लाभ ले सकें। वनोपज की खरीदी की व्यवस्था समूह के माध्यम से की जाएगी, जिससे वनोपज का सही मूल्य मिल सके। समूह के माध्यम से लोगों के लिए स्व-रोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे। वनोपजों की मार्केटिंग की व्यवस्था के साथ अनुसूचित क्षेत्रों के प्रत्येक विकासखण्ड में वनोपज प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी। एक यूनिट की अनुमानित लागत लगभग 10 लाख रूपए होगी। अनुसूचित क्षेत्रों के 85 विकासखण्ड में वनोपज प्रोसेसिंग यूनिट स्थापना के लिए 8 करोड़ 50 लाख रूपए की राशि प्राधिकरण मद से उपलब्ध कराई जाएगी। वनों में इमारती लकड़ी की बजाए फलदार और वनौषधियों के पौधे लगाए जाएंगे। जिससे वनवासियों की आय बढ़ सके।
विश्व आदिवासी दिवस का गरिमामय कार्यक्रम मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मंत्रीगणों, संसदीय सचिवों, विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों तथा आदिवासी समाज के गणमान्य लोगों की मौजूदगी में कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित अतिथियों द्वारा आंगादेव, बूढ़ादेव एवं मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना से हुआ। इस अवसर पर आदिवासी नर्तक दल द्वारा गौर नृत्य की प्रस्तुति दी गयी। इस मौके पर मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, कवासी लखमा, अमरजीत भगत, डॉ. शिव डहरिया, श्रीमती अनिला भेंडिय़ा तथा खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन भी नर्तक दलों के साथ मांदर की थाप पर थिरके और आदिवासी कला संस्कृति को आगे बढ़ाने और उसे जीवंत बनाए रखने की छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। आदिवासी गौर नृत्य में मंत्रीगणों की भागीदारी से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय का पूरा वातावरण उत्साह और उमंग से भर उठा।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने उद्बोधन में आगे कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों का सबसे बड़ा संरक्षक रहा है। प्रकृति से निकटता और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित दोहन भावी पीढ़ी के बेहतर जीवन के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर हमें आदिवासी समाज के हित के सभी पहलुओं पर समग्रता से विचार करना चाहिए। उन्होंने आदिवासी समाज के प्रत्येक सदस्य और संगठन से अपील की कि वे अपने अधिकारों और विकास के अवसरों के बारे में मुखर हो। छत्तीसगढ़ सरकार सदैव आपके साथ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के काम-काज, नीतियों और फैसलों से आदिवासी अंचलों की फिजा में तेजी से बदलाव आ रहा है। जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकार की नई ईबारत लिखी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि हमने राज्य के सभी पात्र वनवासियों को वन अधिकार पट्टा देने का अभियान शुरू किया है। छत्तीसगढ़ राज्य वनवासियों को व्यक्तिगत एवं सामुदायिक पट्टा देने के मामले में देश में अव्वल स्थान पर है। अभी तक राज्य में 4.50 लाख व्यक्तिगत तथा 43 हजार सामुदायिक पट्टे दिए जा चुकें है। वन अधिकार पट्टों के माध्यम से चार लाख 18 हजार हेक्टेयर भूमि आबंटित की गई है, जो देश में सर्वाधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन अधिकार पट्टों को मनरेगा, सिंचाई, खेती-किसानी और खाद्य संरक्षण जैसे अनेक कार्यो से जोड़कर पट्टे की ंभूमि को हमने वनवासियों के खुशहाली और आमदनी का माध्यम बनाने का प्रयास कर रहें है। उन्होंने इस मौके पर राज्य के सभी वन भूमि पट्टाधारियों से अपने अधिकार और अवसर का भरपूर लाभ उठाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य में लघु वनोपज की खरीदी और उनके समर्थन मूल्य में वृद्धि सहित शहीद महेन्द्र कर्मा तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की यह तमाम कोशिशें आदिवासी भाई-बहनों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने तथा उन्हें विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में पहले सात लघु वनोपज की खरीदी होती थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 31 कर दिया है। उन्होंने कहा कि महुआ सहित अन्य लघु वनोपजों के मूल्य में वृद्धि किए जाने से इसका सीधा फायदा संग्राहक परिवारों को हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी अंचलों में विशेषकर बस्तर में सिंचाई का रकबा बहुत कम है। इसे बढ़ाने और बस्तर अंचल के लोगों की हर जरूरत के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने हेतु बोधघाट परियोजना की शुरूआत की है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के डूबान क्षेत्र में आने वाली भूमि का मुआवजा और पुनर्वास पैकेज आदिवासी समाज के लोग खुद तय करेंगे। उन्होंने कहा कि बोधघाट सिंचाई परियोजना की पुनर्वास नीति देश दुनिया की सबसे अच्छी नीति बने यह उनकी मंशा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी भाई-बहनों को सिर्फ जल, जंगल और जमीन की ताकत ही नही बल्कि शासन और प्रशासन की ताकत भी सौंपी है। उन्होंने इस मौके पर आदिवासी समाज के लोगों से पूरी सक्षमता के साथ आगे बढऩे और राज्य के विकास में भागीदारी निभाने की अपील की।
इस अवसर पर मंत्री कवासी लखमा एवं मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने भी अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासियों के हितों का ध्यान रखा है, उनका मान-सम्मान बढ़ाया है। मंत्रीद्वय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति को संरक्षित एवं संवर्धित करने तथा उसे विश्व पटल पर लाने की सराहनीय पहल मुख्यमंत्री ने की है। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर वनांचल क्षेत्र के विकास के लिए मुख्यमंत्री द्वारा दी गई सौगातों के लिए उनका आभार जताया। कार्यक्रम को सर्वआदिवासी समाज के अध्यक्ष बी.पी.एस. नेताम ने भी सम्बोधित किया और आदिवासी समाज से संबंधित मांगों का ज्ञापन सौंपा।
कार्यक्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री अमरजीत भगत, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिय़ा, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल और नगरीय विकास मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, संसदीय सचिव सुश्री शकुंतला साहू, चिंतामणि महाराज और जशपुर विधायक विनय भगत, राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन अनेक जनप्रतिनिधि, मुख्य सचिव आर.पी. मण्डल सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

दुर्ग / शौर्यपथ / ब्लॉक कांग्रेस कमेटी धमधा के अध्यक्ष संतोष राणा का सड़क दुर्घटना के बाद एमएमआई रायपुर में इलाज़ के दौरान निधन हो गया। इनका अंतिम संस्कार शनिवार को गमगीन माहौल में किया गया। इनके निधन पर कैबिनेट मंत्री रविन्द्र चौबे, प्रदीप चौबे भिलाई शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष तुलसी साहू, राजेन्द्र साहू सहित धमधा व जिले के कांग्रेसजनों ने श्रद्धांजलि दी है।
भिलाई शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष तुलसी साहू ने इनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि वे धमधा क्षेत्र में कांग्रेस के आधार स्तम्भ थे। वे दो बार पानी पंचायत के निर्वाचित अध्यक्ष थे। एक बार जिला पंचायत के सदस्य रहे। गोरपा सहकारी समिति के अध्यक्ष भी थे। वर्तमान में वे धमधा ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे। उनके नेतृत्व में पिछले विधानसभा में कांग्रेस को इस क्षेत्र से भारी लीड मिली थी। श्रीमती तुलसी साहू ने कहा उनके निधन से हम कांग्रेस जन स्तब्ध और दु:खी है।
वहीं राजेन्द्र साहू ने कहा कि वे मेरे भी बेहद करीबी थे, हमेशा उनसे मुलाकात होती रहती थी और वे सिर्फ पार्टी को आगे बढाने और अधिक धमधा क्षेत्र में मजबूत कैसे किया जाये इसके बारे में चर्चा करते रहते और उसपर अमल भी करते थे। श्री राणा का यकायत चलेजाना कांग्रेस के लिए बहुत ही क्षतिपूर्तिवाला है।

भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई नगर के महापौर एवं विधायक देवेंद्र यादव के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए ब्लॉक कांग्रेस कमेटी खुर्सीपार के समस्त कार्यकर्ता, युवा कांग्रेस, छात्र संगठन, महिला कांग्रेस, सेवादल सहित सभी प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं ने अपने नेता देवेंद्र यादव के शीघ्र स्वास्थ लाभ की कामना ईश्वर से की है। इसी परिपेक्ष में बालाजी नगर वार्ड &5 श्री राम मंदिर शिवालय में डी कामराजू अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में दुग्ध अभिषेक व पूजन का कार्यक्रम रखा गया सभी कार्यकर्ताओं ने भगवान शिव को दूध से स्नान करवाया एवं प्रार्थना की महापौर जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ लेकर भिलाई वापस आये।
इस कार्यक्रम में भिलाई नगर निगम के पार्षद श्रीमती तुलसी पटेल, काली प्रसाद, मार्तंड सिंह मनहर, एल्डरमैन डी नाग मणि, नरसिंह नाथ, बबीता भैसारे सुनील गोयल मुख्य रूप से पूजन कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
इस कार्यक्रम में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के कन्हैयालाल गौतम, विजय चौधरी, मोतीलाल पटेल, गोपाल राव, कमल वर्मा, हमीद बैग हीरालाल, पी राजा, कमरुल होदा, जितेन्द्र भारती, मुन्नी सिंह, संजय कुमार, कोरमा राम, एसटी नारायण, संगम यादव, बंटी, लोकनाथ, संजीव कुमार बसूला, प्रकाश चंद्र पात्रों अशफाक अंसारी, महेश साहू, एम राजेश राव, सूरज तांदी, जन्मेजय चौधरी, सूर्यकांत चौधरी, पी केशव राव, ई जगदीश राव, प्रतिमा बेहरा, कौशल्या देवी श्रीराम घोरपड़े, नंद कुमार यादव मनोज राम, लखबीर सिंह, उषा मारकर, दमयंती देवी मुरलीधर उपस्तिथ थे।

रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने पूर्व के रमन भाजपा सरकार को आदिवासी जनजाति वर्ग विरोधी करार देते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के शासनकाल में आदिवासी वर्ग दहशत में जिंदगी जी रहे थे उस दौरान उन पर बेइंतिहा अत्याचार हो रहा था और वर्तमान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय मौन थे।रमन सरकार ने भाजपा समर्थित चंद उद्योगपत्तियो को आदिवासियों की जल जंगल जमीन सौपने आदिवासियों को डराया धमकाया उन पर  अत्याचार किये।आदिवासीयो की जल जंगल जमीन पर कब्जा करने की नीयत से उन पर गोलियां लाठियां चलवाई ,झूठे मामलों में फंसाकर बेकसूर निर्दोष आदिवासियों को जेल में बन्द किया ।पांचवी अनुसूची क्षेत्रों को मिले कानूनी अधिकारों से वंचित किया गया।90हजार एकड़ जमीन छीन ली गई।आदिवासी महिलाओं बेटियों के साथ बलात्कार की घटनाएं हुई मासूम बच्चों को फर्जी मुठभेड़ में नक्सली बताकर मार दिया गया।रमन सरकार के अमानवीय यातना से भयभीत सीधे साधे भोले भाले प्राकृतिक से प्रेम करने वाले आदिवासी अपने पुरखों की जमीन को छोड़कर जान माल की सुरक्षा के लिए पलायन करने मजबूर थे।रमन सरकार में हुई झलियामारी बालिका गृह में  बलात्कार की घटना,मीना खलखो, पैदागुल्लुर, सारखीगुड़ा की घटनाएं आदिवासी समाज और छत्तीसगढ़ भुला नही है।आदिवासियों के नाम से योजना बनाकर भारी भ्रष्टाचार कमीशनखोरी किया गया सरकारी खजाने को लूटा गया।भाजपा ने चुनाव में प्रत्येक आदिवासी परिवार को दस लीटर दूध देने वाली जर्सी गाय एवँ एक सदस्य को नोकरी देने का वादा कर वादाखिलाफी किया।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार आदिवासी वर्ग के शिक्षा स्वास्थ्य सुरक्षा रोजगार के विषय पर मजबूती से काम कर रही है उनके कानूनी अधिकार जल जंगल जमीन पर उनका अधिकार ,वनपट्टा का अधिकार,आदिवासी नृत्य महोत्सव,आदिवासीयो के परंपरा तीज त्योहार संस्कार संस्कृति कला,को विश्व मे अलग पहचान देने का काम कर रही है। तेंदूपत्ता का मानक दर 2500 से बढ़ाकर 4000रु प्रति बोरा, 31 वनोपज की खरीदी समर्थन मूल्य में बस्तर में मक्का प्रोसेसिंग प्लांट, रमन सरकार में छीनी हुई 1700 आदिवासी परिवार की 4200 जमीन को वापस लौटना, जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों को जेल से मुक्त कराना, एनएमडीसी की भर्ती स्थानीय स्तर में शुरू करना, मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के माध्यम से बस्तर को कुपोषण मुक्त करने अभियान चलना, मुख्यमंत्री हाट बाजार के लिए के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधा देना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, शहीद महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सुरक्षा योजना,चरणपादुका खरीदने नगद राशि,सहित अनेक जनकल्याणकारी योजना के माध्यम से आदिवासी वर्ग को उन्नतशील बनाने काम कर रही है।

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)