January 25, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

कोंडागांव में साय सरकार के ‘सुशासन’ को पलीता लगा रहे लापरवाह अफसर; बायपास के नाम पर बच्चों के फेफड़ों में भरा जा रहा डामर का जहर?

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। कहते हैं विकास की राह सुनहरी होती है, लेकिन कोंडागांव में यह राह 'धूल' और 'धुएं' से भरी है। नए बस स्टैंड के पीछे संचालित डामर फैक्ट्री ने इलाके में ऐसा तांडव मचाया है कि लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। हैरानी की बात यह है कि जहाँ सूबे के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी जनता को 'रामराज्य' और 'सुशासन' का अहसास कराने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं, वहीं कोंडागांव के कुछ गैर-जिम्मेदार नुमाइंदे अपनी कार्यशैली से इस सुशासन को 'कुशासन' की ओर धकेलने की सुपारी लिए बैठे हैं।

 

​अफसरों का अजीब तर्क: ‘सड़क बनने तक जहर पीना मजबूरी है’

इलाके के लोग जब धूल से बिलबिलाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के पास गुहार लगाने पहुँचते हैं, तो उन्हें जवाब मिलता है— "सड़क निर्माण तक कुछ दिन तो सहना पड़ेगा।" सवाल यह है कि क्या "कुछ दिन" के नाम पर प्रदूषण के नियमों को सूली पर चढ़ाया जा सकता है? क्या विकास की परिभाषा में आम आदमी की सेहत का कोई मोल नहीं है? इन अफसरों के तर्क सुनकर ऐसा लगता है मानो कोंडागांव की जनता की सेहत की कीमत इन सड़कों से भी कम आंकी गई है।

 

​सुशासन के नाम पर 'कागजी' छिड़काव

स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में धूल नियंत्रण के उपाय सिर्फ कागजों पर 'लहलहा' रहे हैं। जमीन पर न तो पानी का छिड़काव दिख रहा है और न ही सामग्री की कवरिंग। साय सरकार की मंशा अपनी जनता को हर सुख-सुविधा देने की है, लेकिन ग्राउंड जीरो पर बैठे कुछ लोग सरकार की साख को धूल में मिलाने का काम कर रहे हैं। घरों में रखे खाने पर धूल की परत जम रही है और स्कूलों में डस्ट का सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

 

​चर्चा आम है: 'साहब' का बंगला होता तो क्या यही होता?

शहर के चौक-चौराहों पर यह तंज आम है कि यदि यह डस्ट का गुबार किसी रसूखदार 'साहब' के बंगले की ओर मुड़ जाता, तो अब तक फैक्ट्री पर नोटिसों और जुर्मानों की झड़ी लग चुकी होती। लेकिन यहाँ मामला 'आम आदमी' का है, जिसके हिस्से में शायद सिर्फ धूल फांकना ही लिखा है। ​अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'धूलबाज' रवैये को कब तक संरक्षण देता है या फिर सुशासन के संकल्प को दोहराते हुए जनता को इस नरक से मुक्ति दिलाता है।

कांकेर में घटिया डामरीकरण उजागर, SDO व उप अभियंता निलंबित, EE को कारण बताओ नोटिस

  रायपुर / शौर्यपथ / लोक निर्माण विभाग में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं—इस संदेश के साथ राज्य सरकार ने अमानक कार्यों पर कड़ी कार्रवाई जारी रखी है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद कांकेर जिले के दमकसा–पेटेचुआ मार्ग में गुणवत्ताहीन डामरीकरण पाए जाने पर विभाग ने दो अभियंताओं को निलंबित कर दिया है, वहीं कार्यपालन अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
यह कार्रवाई लोक निर्माण विभाग, बस्तर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर की गई। जांच में पाया गया कि 6.80 किमी लंबाई में किया गया संपूर्ण डामरीकरण कार्य अमानक स्तर का है। पुनः डामरीकरण के दौरान आवश्यक सर्वेक्षण नहीं किया गया और तकनीकी मानकों की घोर अनदेखी हुई।

जांच प्रतिवेदन के अनुसार—
लगभग 70 प्रतिशत एम.एस.एस. परत उखड़ चुकी थी,
डामरीकरण में बी.एम. की मोटाई असमान पाई गई,
कोर सैंपल लेने पर टुकड़े-टुकड़े होकर निकलना,
डामर बिछाते समय उचित कम्पैक्शन का अभाव,
तथा बिटुमिन कंटेंट के मानकों का पालन नहीं किया गया।

इन गंभीर अनियमितताओं के लिए लोक निर्माण विभाग, चारामा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री के.एस. कंवर एवं उप अभियंता श्री एम.के. खरे को निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय नवा रायपुर स्थित प्रमुख अभियंता कार्यालय निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
वहीं, कांकेर संभाग के कार्यपालन अभियंता के.के. सरल को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, उदासीनता, स्वेच्छाचारिता एवं कदाचार मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्हें नोटिस प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर लिखित प्रतिवाद प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
लोक निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन से होने वाले कार्यों में गुणवत्ता सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या अमानक निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

  बालोद / शौर्यपथ / राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम दुधली में प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का आज भव्य शुभारंभ हुआ। राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि जंबूरी केवल एक शिविर ही नहीं बल्कि एकता, विविधता, भाईचारा और साझा उद्देश्यों का उत्सव है। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जैन, मुख्य राज्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा, राष्ट्रीय व राज्य स्तर के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में देश के विभिन्न राज्यों से आए रोवर-रेंजर उपस्थित थे।
राज्यपाल डेका एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं आसमान में गुब्बारा छोड़कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। समारोह में राज्यपाल एवं अतिथियों द्वारा जंबूरी पत्रिका एवं नए बैज का विमोचन भी किया गया। राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि स्काउट-गाइड युवाओं को नेतृत्व कौशल, अनुशासन और सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज के लिए कम से कम एक सकारात्मक कार्य अवश्य करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। देश में पहली बार आयोजित हो रही यह राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि स्काउट-गाइड युवाओं को जीवन मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक दायित्वों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि रोवर-रेंजर देश के वे युवा हैं, जो समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए कुछ अच्छा करने का जज्बा रखते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए इस आयोजन को छत्तीसगढ़ और देश के युवाओं के लिए सौभाग्यपूर्ण अवसर बताया।
इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन करते हुए भारत स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. केके खण्डेलवाल ने ग्राम दुधली में इस प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी आयोजन को एतिहासिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मुख्य राज्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा ने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ के स्वर्णिम अध्याय में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
विभिन्न राज्यों से उपस्थित रोवर एवं रेंजरों द्वारा आकर्षक मार्चपास्ट कर राज्यपाल श्री डेका एवं अतिथियों को सलामी दी गई। इस प्रथम नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न राज्यों से उपस्थित रोवर रेंजरों ने नैनाभिराम सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति से भारतीय संस्कृति की बहुरंगी छटा बिखेरी। उल्लेखनीय है कि इस 5 दिवसीय आयोजन में देश के सभी राज्यों के अलावा रेल्वे, नवोदय विद्यालय सहित कुल 33 राज्यों के प्रतिभागी रोवर रेंजर शामिल हो रहे हैं। भारत स्काउट्स गाइड्स के अधिकारी, रोवर रेंजर के अलावा अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आम नागरिकगण उपस्थित थे

  रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ का बालोद जिला आज देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा और गौरव का नया केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जिला बालोद के ग्राम दुधली में 9 से 13 जनवरी तक आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी में देश-विदेश से आए लगभग 15 हजार रोवर-रेंजर अपनी सेवा भावना, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का जीवंत प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह ऐतिहासिक जंबूरी छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति को राष्ट्रीय मंच पर लाने का सुनहरा अवसर है। राष्ट्रीय स्तर के कैंपिंग, रोवर-रेंजर प्रशिक्षण, सांस्कृतिक संध्याओं और सामुदायिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से युवा प्रतिभागी अनुशासन, सेवा और नेतृत्व के मूल्यों के साथ राष्ट्र निर्माण की भावना को सशक्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बालोद की धरती पर उमड़ा यह उत्साह भारत की भावी पीढ़ी की ऊर्जा, समर्पण और संकल्प को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के खेल, कौशल विकास और नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अनुशासित, प्रशिक्षित और आत्मविश्वासी युवा शक्ति ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगी। उन्होंने जंबूरी में भाग ले रहे सभी रोवर-रेंजरों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनका उत्साह और सेवा भाव छत्तीसगढ़ का परचम देश-दुनिया में और ऊँचाई तक ले जाएगा।

गोवा में लोकोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जनजातीय नायकों को किया नमन

रायपुर / शौर्यपथ /
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गोवा के आदर्श ग्राम अमोन, पोंगुइनिम में आयोजित आदि लोकोत्सव पर्व–2025 में शामिल हुए। उन्होंने लोकोत्सव को लोकसंस्कृति, जनजातीय गौरव और राष्ट्रबोध का सशक्त संगम बताते हुए आयोजन की सराहना की। इस अवसर पर गोवा के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. रमेश तावड़कर भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत गांवों का देश है और गांवों की लोकसंस्कृति ही देश की आत्मा है। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्र और परंपराएं हमारी सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखती हैं। उन्होंने कहा कि गोवा सरकार द्वारा पिछले 25 वर्षों से आदि लोकोत्सव का आयोजन इस सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का सराहनीय प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि जनजातीय इतिहास गौरवशाली रहा है। अल्पायु में अंग्रेजों को चुनौती देने वाले बिरसा मुंडा सहित अनेक जनजातीय सेनानियों को आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशव्यापी सम्मान और पहचान मिल रही है। उन्होंने रानी दुर्गावती के बलिदान का स्मरण करते हुए जबलपुर में निर्मित संग्रहालय का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय सेनानियों—शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधुर, गेंद सिंह—के योगदान को रेखांकित किया और बताया कि राज्य में लगभग 32 प्रतिशत जनजातीय आबादी निवास करती है। उन्होंने कहा कि इन नायकों की स्मृति को संरक्षित करने के लिए नया रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह डिजिटल संग्रहालय का निर्माण किया गया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री मोदी ने किया। उन्होंने सभी को छत्तीसगढ़ आकर संग्रहालय देखने का आमंत्रण दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जनजातीय समाज का गौरव है कि आज देश के सर्वोच्च पद पर भी जनजातीय समाज की बेटी विराजमान हैं। उन्होंने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना का उल्लेख करते हुए जनजातीय विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान अब नक्सल प्रभावित राज्य से बदलकर शांति, विकास और निवेश के नए केंद्र के रूप में बन रही है। नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो राज्य के उज्ज्वल भविष्य का संकेत हैं।

रायपुर / शौर्यपथ /
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में शुक्रवार को 21वाँ स्थापना दिवस एवं सांस्कृतिक संगीत कार्यक्रम ‘श्रुति 2025’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों, नवाचार, शोध, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का उत्सवपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव रहे। उनके साथ डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) डॉ. मनोज चोपकर, हेड, करियर डेवलपमेंट सेल डॉ. समीर बाज़पाई, सभी विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, कर्मचारी, पूर्व छात्र, विद्यार्थी एवं उनके परिवारजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

समारोह का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन में डॉ. मनोज चोपकर ने एनआईटी रायपुर की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थान ने एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज से आगे बढ़कर आज स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रमों में उत्कृष्टता हासिल करने वाला अग्रणी तकनीकी संस्थान बनने का गौरव प्राप्त किया है। उन्होंने शिक्षण, शोध, नवाचार और इनोवेशन सेल जैसी पहलों के माध्यम से छात्रों के रचनात्मक विचारों को प्रोत्साहित करने की बात कही।

डॉ. समीर बाज़पाई ने कहा कि एनआईटी रायपुर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों को क्लबों और समितियों द्वारा आयोजित सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि डॉ. एन. वी. रमना राव ने अपने संबोधन में संस्थान की गौरवशाली परंपरा, तकनीकी उन्नति और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में संकाय सदस्यों एवं छात्रों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनआईटी रायपुर तकनीकी कौशल के साथ-साथ शोध, सांस्कृतिक गतिविधियों और खेलकूद को समान महत्व देता है। उन्होंने नए विचार अपनाने, कड़ी मेहनत करने और बड़े सपने देखने का संदेश देते हुए संकाय, विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।

इसके पश्चात पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।

डिस्टिंग्यूश्ड एल्युमिनस अवार्ड केमिकल इंजीनियरिंग (1990 बैच) के पूर्व छात्र प्रो. अनुराग प्रभाकर मैरल को प्रदान किया गया।

लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड सिविल इंजीनियरिंग (1975 बैच) के पूर्व छात्र श्री संतोष कुमार अग्रवाल तथा केमिकल इंजीनियरिंग (1975 बैच) के पूर्व छात्र श्री सुधीर वर्मा को प्रदान किया गया।

श्री एस. के. अग्रवाल ने सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को संस्थान की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही छात्रों एवं संकाय सदस्यों को शैक्षणिक और खेलकूद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुवेंदु रूप, फैकल्टी इन-चार्ज, कल्चरल कमेटी द्वारा प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में नृत्यम – द डांस क्लब द्वारा मनमोहक नृत्य प्रस्तुति दी गई, वहीं ‘श्रुति 2025’ के अंतर्गत रागा – द म्यूजिक क्लब ने विविध संगीत शैलियों में शानदार गायन प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति गीतों से लेकर रेट्रो, रॉक, 90 के दशक के लोकप्रिय गीतों और आधुनिक माशअप तक की प्रस्तुतियों ने भारत की “एकता में विविधता” की सांस्कृतिक भावना को सशक्त रूप से दर्शाया। परेशान, मेरे ढोलना, जाने जान, कायदे से जैसे गीतों पर सभागार तालियों से गूंज उठा।

एनआईटी रायपुर का 21वाँ स्थापना दिवस न केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव बना, बल्कि संस्कृति, नवाचार और सामूहिक गौरव का यादगार प्रतीक भी सिद्ध हुआ।

“अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलें और दुनिया को अपनी आवाज़ सुनने दें” —जेन-ज़ी के लिए श्री ओ. पी. चौधरी का संदेश

रायपुर / शौर्यपथ /
हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय , रायपुर ने स्वामी विवेकानंद के जीवन और दर्शन को समर्पित '5वें स्वामी विवेकानंद स्मृति वार्षिक व्याख्यान' का भव्य आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रदेश के माननीय वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी उपस्थित रहे, जिन्होंने "जेन-ज़ी (Gen Z) के लिए स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएँ" विषय पर प्रेरक उद्बोधन दिया। विश्वविद्यालय द्वारा यह आयोजन स्वामी विवेकानंद के रायपुर से गहरे ऐतिहासिक संबंधों और राष्ट्रीय युवा दिवस की स्मृति में प्रतिवर्ष किया जाता है।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एचएनएलयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन ने श्री ओ. पी. चौधरी के सार्वजनिक जीवन और सेवा भाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहाँ सफलता का पैमाना सोशल मीडिया 'फॉलोअर्स' बन गए हैं, वहीं श्री चौधरी जैसे व्यक्तित्व हमें याद दिलाते हैं कि नेतृत्व की असली पहचान सेवा और समर्पण है। कुलपति ने जोर दिया कि स्वामीजी के देहावसान के 123 वर्ष बाद भी उनके विचार आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) के लिए एक प्रकाश स्तंभ की तरह हैं।

अपने मुख्य व्याख्यान में वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने स्वामी विवेकानंद के 1893 के शिकागो संबोधन का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को संचार और नेतृत्व के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि किसी भी विचार को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने से पहले लोगों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ना अनिवार्य है। उन्होंने स्वामीजी को भारतीय संस्कृति का 'वैश्विक राजदूत' बताते हुए विद्यार्थियों से 'सादा जीवन और उच्च विचार' के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।मंत्री महोदय ने विद्यार्थियों से अपने 'कम्फर्ट ज़ोन' से बाहर निकलने और साहस के साथ अपने जुनून का पीछा करने का आग्रह किया। उन्होंने अनुशासन और ईमानदारी को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य ही वास्तविक संपदा है। उन्होंने अपने स्वयं के संघर्षों को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक सरकारी स्कूल से पढ़कर देश के सबसे युवा आईएएस अधिकारियों में शामिल होने और फिर जनसेवा के लिए राजनीति में आने का निर्णय उनके साहसिक कदम थे। उन्होंने संदेश दिया कि चुनौतीपूर्ण रास्ते ही व्यक्ति को वास्तविक और सार्थक सफलता तक ले जाते हैं।

इस गरिमामयी अवसर पर एचएनएलयू प्रेस द्वारा प्रकाशित 'एचएनएलयू गज़ट न्यूज़लेटर' (खंड 3, अंक 2) का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव (प्रभारी) डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण दिया, जबकि डीन (छात्र कल्याण) डॉ. अविनाश सामल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का कुशल समन्वय फैकल्टी सलाहकार श्री अभिनव शुक्ला और डॉ. अनीता सिंह द्वारा किया गया। इस व्याख्यान में एचएनएलयू के साथ-साथ कलिंगा विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।

 

हिंसा का त्याग कर लोकतंत्र व विकास की मुख्यधारा में लौटे 18 महिलाएं और 45 पुरुष
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश— “बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान”

रायपुर ।
बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। दंतेवाड़ा जिले में राज्य सरकार की “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों— जिनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं — ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया। यह कदम केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य को नई दिशा देने वाला निर्णायक परिवर्तन है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की स्पष्ट, बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने दो टूक कहा— “हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है, स्थायी शांति का रास्ता संवाद और विकास से होकर ही जाता है।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति, सटीक सुरक्षा रणनीति और सुशासन आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण नक्सलवाद अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है। माओवादी नेटवर्क का लगातार विघटन हो रहा है और बस्तर के सुदूर अंचलों तक अब तेज़ी से सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी युवाओं को सरकार द्वारा सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार एवं आजीविका के अवसर तथा सामाजिक पुनर्स्थापन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर नागरिक बनकर समाज में स्थायी रूप से स्थापित हो सकें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर अब भय की पहचान से बाहर निकलकर संभावनाओं और प्रगति की भूमि बन रहा है, जहां शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक सुरक्षित और स्वर्णिम भविष्य की नींव रख रहे हैं।

  कोलकाता / शौर्यपथ / 8-9 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल में I-PAC (प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित राजनीतिक परामर्श फर्म) के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद राज्य में भारी राजनीतिक उथल-पुथल मच गई है।
इस घटना के बाद की मुख्य घटनाएँ और राजनीतिक हालात निम्नलिखित हैं:

ममता बनर्जी का हस्तक्षेप: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी छापेमारी के दौरान स्वयं साल्ट लेक स्थित I-PAC कार्यालय और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर पहुँच गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि ED उनकी पार्टी के चुनावी दस्तावेजों, उम्मीदवार सूचियों और डेटा को "चुराने" की कोशिश कर रही है।
फाइलों की बरामदगी: मुख्यमंत्री को छापेमारी वाली जगह से हाथ में कुछ हरे रंग की फाइलें और हार्ड डिस्क लेकर निकलते देखा गया, जिसे उन्होंने अपनी पार्टी की संपत्ति बताया।
सड़कों पर विरोध प्रदर्शन: ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को "राजनीतिक प्रतिशोध" बताया और 9 जनवरी 2026 को कोलकाता में एक विशाल विरोध मार्च का नेतृत्व किया। इसके साथ ही TMC सांसदों ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर धरना दिया।
कानूनी कार्रवाई और FIR: पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुख्यमंत्री की शिकायतों के आधार पर ED के खिलाफ दो FIR दर्ज की हैं। वहीं, ED ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है और मुख्यमंत्री पर जाँच में बाधा डालने और साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाते हुए CBI जाँच की मांग की है।
अदालती रुख: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ED की तत्काल सुनवाई की याचिका को खारिज कर दिया और मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी 2026 के लिए तय की है।
BJP की प्रतिक्रिया: भाजपा ने ममता बनर्जी के आचरण को "असंवैधानिक" बताया और आरोप लगाया कि वे भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए कानून की प्रक्रिया में बाधा डाल रही हैं। भाजपा नेताओं ने राज्य में 'जंगलराज' होने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे या राष्ट्रपति शासन की मांग की है।

यह पूरा विवाद 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बड़े राजनीतिक युद्ध में बदल गया है, जहाँ TMC इसे "बंगाल की अस्मिता पर हमला" बता रही है और BJP इसे "भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई" कह रही है।

मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम पर अवैध व्यापार, गरीबों पर बुलडोजर और रसूखदारों पर मौन—क्या यही है सुशासन? दुर्ग / शौर्यपथ विशेष / राम के नाम पर तैरते पत्थर की कथा…

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