
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ चावल और दूध एक ऐसे इंग्रीडिएंट्स हैं जो खाने और फेस को निखारने के भी काम आते हैं. इसमें पाए जाने वाले गुण स्किन को ग्लोइंग बनाने और स्क्रबिंग के काम आते हैं. लेकिन इन्हें फेस पर अप्लाई करना कैसे है इसी के बारे में आज हम आपको बताएंगे आर्टिकल में ताकि आप अपने चेहरे पर नैचुरल ग्लोपा सकें.
दूध और चावल फेस पैक
आपको 03 चम्मच चावल आटे में दूध मिलाकर पेस्ट तैयार कर लेना है, फिर फेस पर अप्लाई करना है. अब आपको इस पेस्ट को आधे घंटे के लिए लगाकर रखना है. फिर चेहरे को साफ पानी से धो लेना है. इस पैक को आप सप्ताह में 4 बार लगाएं.
इस पैक को लगाने से आपकी स्किन पर जमी गंदगी निकलआएगी और चेहरा अच्छे से मॉइश्चराइज होगा. यह आपकी स्किन को अंदर से निखारेगा. आपको बता दें कि कच्चे दूध में विटामिन ए होता है जो चेहरे से पिंपल के दाग-धब्बे हल्के करने और झाईयां कम करने में मदद करता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /एकबार पेट और जांघ की चर्बी बढ़ जाती है, तो उसे कम करने में महीनो लग जाते हैं. इसके लिए आपको डाइट के साथ-साथ एक्सरसाइज को भी रूटीन में शामिल करना चाहिए. आज हम आपको एक ऐसी एक्सरसाइज बताने वाले हैं जिसे रोजाना करने से आपकी जिद्दी चर्बी कम होने लग जाएगी तो आइए जानते हैं उस एक्सरसाइज के बारे में.
वेट लॉस एक्सरसाइज |
- आपको जंपिंग जैक एक्सरसाइज करना है. इससे आपकी थाइज, बैली, नेक और हाथों का फैट कम करने में मदद मिलेगी. यह एक्सरसाइज आपके पूरे शरीर का वेट मेंटेन रखने में मदद करता है.
- जंपिंग जैक एक्सरसाइज से आपके दिल की भी सेहत अच्छी बनी रहती है. इससे हड्डियां भी मजबूत होती हैं. इससे ब्लड सर्कुलेशन भी शरीर का अच्छा बना रहता है.
- यह एक्सरसाइज आपके मेंटल हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है. क्युंकि इस एक्सरसाइज को करने से सेरोटोनिन और एंडोर्फिन नामक हार्मोन का स्त्राव होता है, जो तनाव कम करने में मददगार है.
- यह एक्सरसाइज नींद की भी परेशानी को दूर करता है. इससे आपका शरीर एक्टिव मूड में रहता है. आप पूरा दिन एनर्जेटिक रखता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /डबल चिन का फैट फेस के लुक को खराब कर देता है. इसको मेकअप से भी नहीं छुपाया जा सकता है. ऐसे में फिर हम यहां पर एक्सपर्ट द्वारा बताए एक्सरसाइज के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आप अपने ठुड्डीके पास जमे फैट को आसानी से कम कर लेंगी. इस एक्सरसाइज से आपके फेस पर 1 हफ्ते में असर दिखाई देने लगेगा. तो आइए जानते हैं उस चिन एक्सरसाइज के बारे में.
चिन फैट एक्सरसाइज
योग एक्सपर्ट डॉक्टर प्रियंका त्रिवेदी वीडियो में बताती हैं कि आपको सबसे पहले अपने दोनों हाथों की इंडेक्स फिंगर और थम्ब को हार्ट शेप में फोल्ड करना है फिर आपको चिन के लेफ्ट और राइट साइज में इनको स्ट्रेच करते हुए चिन को मसाज देना है.
इसके अलावा आपको अपने सिर को पीछे की तरफ ले जाना है जिससे आपके चिन पर स्ट्रेच पड़े. इसके अलावा आपको अपने गर्दन को एक बार लेफ्ट साइड स्ट्रेच करना है फिर राइट साइड. इन दोनों को दस-दस बार करना है. इससे आपका चिन फैट तेजी से कम होगा. आपको बता दें कि यह एक्सरसाइज आपके थायराइड को भी कम करने में मदद करेगा.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /हृदय से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. यह सेहत से जुड़ी सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है. वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन के आकड़ों के अनुसार हर साल 1.79 करोड़ लोगों की मौत का कारण हृदय से जुड़ी बीमारियां होती हैं. लोगों को हृदय रोग के प्रति जागरूक करने के लिए हर वर्ष 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है. आइए जानते हैं हार्ट डिजीज के लक्षण, कारण और बचाव के उपाय ….
हार्ट डिजीज के लक्षण
हृदय रोग के लक्षण हर व्यक्ति में अलग अलग हो सकते हैं. सामान्य लक्षणों में शामिल हैं.
सीने में दर्द
सांस लेने में दिक्कत
थकान और आलस महसूस करना
जी मिचलाना
जबड़े, गर्दन और पीठ में दर्द
हृदय रोग के कारण
कुछ लोगों को हृदय रोग का खतरा ज्यादा रहता है. जेनेटिक कारणों के साथ खराब लाइफस्टाइल इसका कारण बन सकती है.
हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल
स्मोकिंग और अल्कोहल की आदत
अधिक वजन और मोटापा
डायबिटिज
डाइट संबंधी गड़बड़ियां
नींद नहीं आने की बीमारी
हृदय रोग से बचाव के उपाय
हृदय रोग से बचने के लिए कुछ उपाय अपनाएं जा सकते हैं
बैलेंस डाइट : हृदय रोग से बचने के लिए फाइबर और प्रोटीन से भरपूर बैलेंस डाइट लेनी चाहिए. डाइट में हरी सब्जियां, ताजे फल और साबुत अनाज को भी शामिल करना चाहिए.
एक्सरसाइज : नियमित एक्सरसाइज से दिल और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है.
वेट कंट्रोल: दिल से जुड़ी बीमारियों से बचने क लिए वेट को कंट्रोल में रखना चाहिए. वेट कंट्रोल रखने से हृदय से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं. इससे डायबिटीज जैसी बीमारियां से भी बचने में मदद मिलती है.
स्मोकिंग और अल्कोहल से दूरी : स्मोकिंग और अल्कोहल हृदय से जुड़ी कई परेशानियां का कारण होते हैं. हृदय रोग से बचने के लिए इनसे दूर रहना चाहिए.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /हर कोई एक अच्छी बॉडी पाना चाहता है. चेस्ट मसल्स को टोन करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप व्यायाम करें और अपने रुटीन में ऐसे व्यायाम शामिल करें जो छाती की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने में मदद करें. ज्यादातर लोग सिर्फ अपनी अपर चेस्ट की मांसपेशियों पर काम करते हैं और लोअर चेस्ट को नजरअंदाज करते हैं जिसे पेक्टोरल मांसपेशियों के रूप में भी जाना जाता है. अपनी लोअर चेस्ट को मजबूत करने से शरीर की कई एक्टिविटीज में सुधार होता है. यहां चेस्ट मसल्स को बेहतर बनाने के लिए कुछ एक्सरसाइज के बारे में जानिए.
चेस्ट मसल्स को टोन करने के व्यायाम | Exercises to tone chest muscles
1. पुशअप्स को इनलाइन करें
पुश-अप्स आपकी छाती को बनाने और अपनी मांसपेशियों को काम करने का एक शानदार तरीका है. पुश-अप्स पूरे ऊपरी शरीर और पीठ में ताकत बढ़ाने में मदद करते हैं. एक झुकी हुई स्थिति से पुश-अप्स करना वास्तव में आपकी छाती को आकार देने में मदद करता है क्योंकि इससे उसके निचले हिस्से पर तनाव बढ़ जाता है. इस अभ्यास को करने के लिए आपको आमतौर पर एक बेंच या प्लेटफॉर्म की जरूरत होती है.
कैसे करें ये एक्सरसाइज?
इस एक्सरसाइज को करने के लिए किसी बेंच के सामने खड़े हो जाएं. अब अपने हाथों को कंधे की चौड़ाई से अलग बेंच पर रखें. अपनी पीठ और पैरों के साथ एक पौधे की स्थिति में सीधे बहुत अंत तक फैले हुए हों. अब धीरे-धीरे अपनी बाहों को मोड़ें जैसे आप सामान्य पुश-अप्स में करते हैं. आपके हाथ आपकी छाती के करीब होने चाहिए और फिर धीरे-धीरे अपने शरीर को ऊपर उठाएं. इस अभ्यास के लिए 10-12 सेट करें, शुरुआती स्टेप में सिर्फ एक सेट करें.
2. डिक्लाइन डंबल प्रेस
यह सामान्य डम्बल प्रेस का एक लेवल ऊपर है. यह डम्बल और बारबेल दोनों के माध्यम से किया जा सकता है. बेंच को उसकी सपाट ऊंचाई से थोड़ा नीचे अपनी छाती की ओर रखें. यह आपकी छाती को हाई स्पीड से टारगेट करेगा. यह आपकी छाती को आकार देने और टोन करने के लिए एक बेहतरीन व्यायाम है. यह बहुत आसान नहीं है और इस अभ्यास को पहली बार करते समय आपको किसी के समर्थन की जरूरत हो सकती है. यह आपकी पीईसी मांसपेशियों को आकार देता है और उन्हें मजबूत बनाता है.
3. केबल क्रॉसओवर
केबल क्रॉसओवर मशीन की मदद से करना होता है. यह आपकी लोवर चेस्ट और ऊपरी छाती को भी टोन करने में सहायक है. अपने हाथों की थोड़ी सी स्थिति बदलकर आप उस हिस्से को नियंत्रित कर सकते हैं जिस पर आपको दबाव डालना है. हाई पुली सेट करने से आपकी लोअर चेस्ट टोन होगी और लोअर पुली को सेट करने से आपकी अपर चेस्ट बन जाएगी.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /बिजनेस करना हमेशा से कैरियर का सबसे बेस्ट विसल्प माना जाता है. किसी के अंदर रहकर काम करने से अच्छा होता है खुद का कुछ कर लिया जाए. कुछ धार्मिक बातें होती है जिनका किसी भी धंधे को करते समय ध्यान रखना जरूरी होता है. हिन्दू धर्म में नियमों के लिए जरूरी माने जाने वाले पुराणों में से एक विष्णु पुराण व्यापार को लेकर नियम बताता है. इसमें कुछ ऐसी चीजें बताई गई हैं जिनको बेचना सही नहीं माना गया है.
इन चीजों का बिजनेस करने से बचें
गाय का दूध
गाय का दूध बेचना कुछ लोगों के लिए जीवन आधार होता है. ग्वालों के लिए ये पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाला बिजनेस हैं. मगर हिन्दू धर्म में जिस गाय को मां का दर्जा दिया गया है, उनके दूध का व्यापार अपने फायदे के लिए करना गलत माना जाता है. विष्णु पुराण के मुताबिक गाय का दूध केवल उसके बछड़े के लिए होता है. इसको बेचना नहीं चाहिए.
गुड़
गुड़ को शुभ का प्रतिक माना जाता है. यह किसी भी पूजन सामग्री में सबसे जरूरी होता है. मगर हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक और विष्णु पुराण में दी गई जानकारी के अनुसार पैसों के लिए गुड़ बेचना गलत है. गुड़ का व्यापार करना सही नहीं माना गया है. बल्कि अगर किसी को गुड़ की जरूरत हो तो उसे खुद ही खुशी-खुशी दे देना चाहिए.
सरसों का तेल
बाजार में 150 रुपये प्रति लिटर से भी अधिक महंगा मिलने वाला सरसों का तेल (Mustard Oil) व्यापारियों के लिए सबसे अधिक लाभ कमाने का जरिया है. लेकिन इसको भी पैसे कमाने कि लिए बेचना गलत है. पुराण में इसका भी जिक्र मिलता है. अगर किसी को जरूरत हो तो उसे ऐसे ही दे देनी चाहिए.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हिन्दू व्रत-त्योहारों में संतान सप्तमी को एक जरूरी व्रत माना जाता है. इसे हर मां नए संतान प्राप्ति के लिए,उसकी तरक्की और उसकी लंबी उम्र के लिए करती हैं. इस व्रत को हर वर्ष भाद्रपद महीने की शुक्लपक्ष के सप्तमी तिथि के दिन किया जाता है. कई लोग इसे मुक्ताभरण व्रत और ललिता सप्तमी व्रत के नाम से भी जानते हैं. संतान सप्तमी के दिन भगवान सूर्य और शंकर-पार्वती की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन का व्रत करने से संतान की प्राप्ति होती है, संतान दीर्धायु होती हैं और उनके सभी दुखों का नाश होता है. आइए जानते हैं कि इस साल इस व्रत को करने का सही मूहूर्त क्या है.
हर वर्ष भाद्रपद महीने की शुक्लपक्ष के सप्तमी तिथि संतान सप्तमी का व्रत किया जाता है.संतान की सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत को सबसे उत्तम माना जाता है. इस साल संतान सप्तमी से महालक्ष्मी व्रत की भी शुरूआत हो रही हैं. माना जाता है कि आर्थिक तंगीसे छुटकारा पाने के लिए महालक्ष्मी व्रत बहुत लाभदायक होता है.
व्रत का सही मुहूर्त
हिन्दू पंचांगके अनुसार इस साल के भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 21 सितंबर 2023 को दोपहर 2:14 बजे शुरू होकर 22 सितंबर 2023 को दोपहर 1:35 बजे खत्म होगी. इसी बीच महिलाएं व्रत रखेंगी और भगवान शिव के साथ माता गौरी का ध्यान करके व्रत करेंगी.
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:35 से सुबह 5:22 तक
अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:49 से दोपहर 12:38 तक
गोधूलि मुहूर्त : शाम 6:18 से शाम 6:42 तक
अमृत काल : सुबह 6:47 से सुबह 8:23 तक
ग्रहण /शौर्यपथ /इस साल कुल 4 ग्रहण लगने थे जिनमें से पहला सूर्य ग्रहण 20 अप्रैल के दिन और पहला चंद्र ग्रहण 5 मई की रात लगा था. आने वाले अक्टूबर के महीने में 2 और ग्रहण लगने वाले हैं. इस खगोलीय घटना को बेहद खास संयोग भी बताया जा रहा है जो कम ही देखने को मिलता है. अक्टूबर वो महीना होने जा रहा है जिसमें 2 ग्रहण लगेंगे. यह ग्रहण साल का आखिरी सूर्य ग्रहण और साल का आखिरी चंद्र ग्रहण होगा. जानिए इन ग्रहणों की तिथि और समय से लेकर सबकुछ.
अक्टूबर में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण |
साल के दूसरे सूर्य ग्रहण की बात करें तो सूर्य ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आ जाता है. 14 अक्टूबर, शनिवार के दिन लगने वाला है दूसरा सूर्य ग्रहण जोकि वलयाकार पूर्ण सूर्य ग्रहण होने वाला है और इसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जा सकता है.
यह वलयाकार सूर्य ग्रहण कई हिस्सों से देखा जा सकता है जिनमें नॉर्थवेस्टर्न यूनाइटेड स्टेट्स, मेक्सिको, सेंट्रल अमेरिका और साउथ अमेरिका, पेसिफिक, अटलांटिक और आर्कटिक रीजन शामिल हैं. इसके अलावा, अन्य वेस्टर्न कंटीज से पूर्ण ना सही लेकिन सूर्य ग्रहण का कुछ हिस्सा नजर आ सकता है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने इस सूर्य ग्रहण को देखने के लिए स्पेशल आई प्रोटेक्शन ग्लासेस वगैरह पहनने की सलाह दी है.
बता दें कि भारत से इस सूर्य ग्रहण को नहीं देखा जा सकेगा. क्योंकि भारत में ग्रहण नहीं नजर आएगा इसीलिए धार्मिक आधार पर भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा.
साल 2023 का दूसरा चंद्र ग्रहण और आखिरी ग्रहण 28-29 अक्टूबर की रात लगने वाला है. इस ग्रहण को यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया समेत संसार के कई हिस्सों से देखा जा सकेगा. यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा जिसमें चंद्रमा के कुछ हिस्से पर ही ग्रहण लगता है. ऐसा तब होता है जब पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के बीच से गुजरती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है. यह ग्रहण 29 अक्टूबर, शुक्रवार 1:06 एएम पर दिखेगा और 2:22 एएम पर समाप्त हो जाएगा. इस ग्रहण में चंद्रमा का रंग संतरी जैसा दिखता है.
साल के दूसरे चंद्र ग्रहण को भारत से देखा जा सकता है इसीलिए धार्मिक आधार पर इसका सूतक काल मान्य होगा. नई दिल्ली में 29 अक्टूबर 01:44:05 एएम पर अधिकतम ग्रहण देखने को मिलेगा.
टिप्स /ट्रिक्स /शौर्यपथ / भारतीय किचन में आपको करी पत्ता आसानी से नजर आ जाएगा. इसका इस्तेमाल अलग-अलग व्यंजनों में किया जाता है. इससे खाने का स्वाद दोगुना हो जाता है. इसलिए लोग इसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. लेकिन कभी-कभी ये आसानी से नहीं मिलता. इसके लिए लोगों को लंबे समय तक बाजार घूमना पड़ता है. अगर आप भी करी पत्ते के शौकीन है और अपने खाने को स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो अब आपको बाजार जाने की जरूरत नहीं है. बस इन आसान टिप्स को फॉलो करें और अपने घर में ही करी के पौधे को उगाएं.
घर पर करी पत्ते ऐसे उगाएं
एक पॉट यानि गमले में मिट्टी भर लें और उसके अंदर करी के पत्ते के एक बीज को डाल दें.
मिट्टी को भरपूर पानी देते रहें, लेकिन ध्यान रखें पानी की मात्रा ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
हर दिन कम से कम 6 घंटे तक उस पॉट को धूप मिलनी चाहिए.
बढ़ते हुए पौधे के अच्छे विकास के लिए बीच- बीच में उसकी छंटाई करते रहें.
करीब 1 साल बाद उस गमले को बदल दें. याद रखें इस बार गमले का साइज पौधे के अनुसार बड़ा होना चाहिए.
एक-दो साल तक पौधे से करी के पत्ते को ना तोड़े जब तक वो पूरी तरह तैयार ना हो जाए.
जब करी के पौधे में पूरे पत्ते आ जाएं तो उसे गमले से जड़ से निकाल कर जमीन में लगा लें.
इस तरह कड़ी का पत्ता अब इस्तेमाल के लिए तैयार है.
आप इसके पत्ते को फ्रिज में स्टोर करके रख सकते हैं और चाहे तो इसका पाउडर बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / आजकल लोग अपनी स्किन को जवां रखने के लिए कई तरह के ट्रीटमेंट लेते हैं जिसमें से एक बोटॉक्स भी है. लेकिन यह ब्यूटी ट्रीटमेंट महंगा होता है जिसका खर्चा हर कोई नहीं उठा सकता है. लेकिन आप अपने फेस को घर पर तैयार फेस पैक से भी बोटॉक्स कर सकते हैं. इसको बनाने के लिए आपको किन-किन चीजों की जरूरत पड़ेगी इस आर्टिकल में बताने वाले हैं. तो आइए जानते हैं.
बोटॉक्स फेस पैक सामग्री
01 चम्मच चिया सीड
03 टेबल स्पून दूध
01 चम्मच एलोवेरा जैल
आधा चम्मच शहद
कैसे बनाएं
सबसे पहले आप चिया और दूध, दोनों को मिलाकर एक बाउल में आधे घंटे के लिए रख दीजिए. फिर आप ब्लेंडर में अच्छे से मिक्स कर लीजिए. इसके बाद इस मिश्रण में आधा चम्मच शहद और 01 चम्मच एलोवेरा जैल मिला लीजिए.
अब आप इस पैक को चेहरे पर अच्छे से लगा लीजिए. फिर इसे सूखने के लिए छोड़ दीजिए चेहरे पर. अब आप इसे अच्छे से साफ कर लीजिए. इसको अप्लाई करने के बाद आपको अपने चेहरे पर खुद ही बदलाव महसूस होगा. तो आज ही आप इस रेमेडी को घर पर तैयार कर लीजिए.
शौर्यपथ /लंदन, 21 सितंबर (द कन्वरसेशन) अल्जाइमर रोग से दुनियाभर में 5 करोड़ 50 लाख लोगों को प्रभावित हैं. इसके बावजूद अल्जाइमर रोग का अभी भी कोई इलाज नहीं है. यह बात निराशाजनक हो सकती है, लेकिन इस क्षेत्र में हाल की प्रगति में कई आशाजनक दवाएं देखी गई हैं जो बीमारी की प्रगति को धीमा कर सकती हैं और अंतिम चरण के क्लिनिकल टेस्ट में पास हो सकती हैं. इस तरह की दवाओं के साथ मुख्य बात यह है कि लक्षण शुरू होने के तुरंत बाद लिए जाने पर वे सबसे अधिक प्रभावी होती हैं.
दुख की बात यह है कि फिलहाल डाइग्नोज तकनीकें अल्जाइमर को इतनी जल्दी नहीं पकड़ पाती हैं. यही वजह है कि इलाज और दवाओं पर इसका फायदेमंद असर नहीं हो पाता. साक्ष्य बताते हैं कि अल्जाइमर रोग के लक्षण (symptoms) शुरू होने से 20 साल पहले तक रक्त में पाए जा सकते हैं. बीमारी को इतनी जल्दी पकड़ने से रोगियों के उपचा के नतीजों पर बड़ा असर पड़ सकता है.
कुछ अमेरिकी कंपनियों ने अब अल्जाइमर रक्त परीक्षण विकसित किया है जो उपभोक्ताओं के लिए सीधे आपूर्तिकर्ता से या रोगी के डॉक्टर के अनुरोध पर खरीदने के लिए उपलब्ध है. लेकिन हालाँकि ये परीक्षण बीमारी के लक्षणों का पता लगा सकते हैं, फिर भी उनके परिणामों की सावधानी से व्याख्या की जानी चाहिए.
अल्जाइमर रोग का निदान |
अल्जाइमर रोग का निदान परीक्षणों के संयोजन का उपयोग करके किया जाता है. संज्ञानात्मक परीक्षण किसी व्यक्ति की याददाश्त और सोचने की क्षमता को देखते हैं. बायोमार्कर परीक्षण किसी व्यक्ति के शरीर में मस्तिष्क इमेजिंग स्कैन या सेरेब्रोस्पाइनल तरल पदार्थ (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर परत बनाने वाला तरल पदार्थ) के नमूने में बीमारी के लक्षणों की तलाश करते हैं. ये बायोमार्कर अल्जाइमर रोग के तीन प्रमुख लक्षणों से संबंधित पाए गए हैं:
मस्तिष्क कोशिकाओं के बाहर अमाइलॉइड-बीटा प्लाक जमा हो जाता है.
तौ प्रोटीन मस्तिष्क की कोशिकाओं के अंदर उलझ जाता है
मस्तिष्क कोशिका मृत्यु (न्यूरोडीजेनेरेशन के रूप में जाना जाता है).
किसी व्यक्ति में अल्जाइमर रोग का निदान करने के लिए इन सभी लक्षणों का मौजूद होना जरूरी नहीं है, हालांकि मस्तिष्क में एमाइलॉइड-बीटा प्लाक और/या तौ उलझनों की उपस्थिति आवश्यक है.
इसके विपरीत, कुछ लोगों में बायोमार्कर परिवर्तन हो सकते हैं लेकिन कभी भी अल्जाइमर रोग के लक्षण विकसित नहीं हो सकते हैं.
चूँकि मस्तिष्क में अन्य लक्षण प्रकट होने से वर्षों पहले रक्त में इन बायोमार्कर परिवर्तनों का पता लगाया जा सकता है, यह अल्जाइमर रोग का निदान करने का एक तेज़ और कम आक्रामक तरीका प्रदान कर सकता है.
रक्त परीक्षण |
वर्तमान में खरीद के लिए उपलब्ध अधिकांश रक्त परीक्षण रक्त में दो अलग-अलग प्रकार के अमाइलॉइड-बीटा को मापते हैं:
अमाइलॉइड-बीटा 42 और अमाइलॉइड-बीटा 40 . फिर इन दो प्रोटीनों के बीच अनुपात की गणना की जाती है. यह अनुपात जितना कम होगा, व्यक्ति में अमाइलॉइड प्लाक और इसलिए अल्जाइमर रोग होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी.
ऐसा ही एक परीक्षण, प्रीसीविटीएडी, डॉक्टरों द्वारा अमेरिका में अल्जाइमर के लक्षण प्रदर्शित करने वाले लोगों में उपयोग करने के लिए अनुमोदित किया गया है, और इसे यूरोपीय संघ में उपयोग के लिए सुरक्षित माना गया है. संज्ञानात्मक लक्षणों वाले रोगियों में, डॉक्टर कंपनी को रक्त का नमूना भेजेंगे जो अमाइलॉइड-बीटा अनुपात को मापता है. कंपनी अल्जाइमर के रोगी के आनुवंशिक जोखिम की जांच करने के लिए एपोलिपोप्रोटीन ई नामक एक अन्य प्रोटीन की भी तलाश कर रही है.
इसके बाद एक एल्गोरिदम बायोमार्कर स्तर और रोगी की उम्र का हिसाब लगाता है, और एक संभाव्यता स्कोर प्रदान करता है. उच्च स्कोर का मतलब है कि मरीज को संभवतः अल्जाइमर रोग है. परिणाम कुछ ही दिनों में उपलब्ध हो जाते हैं.
प्रीसिविटीएडी परीक्षण का उपयोग कई अध्ययनों में किया गया है और अल्जाइमर रोग के लक्षणों के साथ उच्च सहसंबंध दिखाया गया है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह हर समय 100% सटीक है, और न ही यह भविष्यवाणी कर सकता है कि उस व्यक्ति में बीमारी कैसे बढ़ेगी.
जिन अध्ययनों में इस परीक्षण का उपयोग किया गया है, उन्होंने परीक्षण के परिणामों की व्याख्या को प्रभावित करने से बचने के लिए कुछ प्रतिभागियों (जैसे कि पुरानी स्वास्थ्य स्थितियों वाले) को भी बाहर कर दिया है. प्रतिभागियों में भी अधिकांश श्वेत थे. इससे यह अनिश्चित हो जाता है कि विभिन्न पृष्ठभूमि वाले लोगों या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों के लिए ये परीक्षण कितने सटीक होंगे.
क्वेस्ट द्वारा निर्मित एक अन्य परीक्षण, समान अमाइलॉइड-बीटा अनुपात को मापता है. यह परीक्षण डॉक्टर के रेफरल के बिना उपभोक्ता द्वारा सीधे खरीदा जा सकता है - हालाँकि आपको अपना रक्त नमूना एकत्र करने के लिए समय बुक करना होगा.
इस परीक्षण को अभी तक अमेरिका या यूरोपीय संघ में अनुमोदित नहीं किया गया है, न ही यह प्रीसिविटीएडी के व्यापक परीक्षण से गुजरा है. इसके अलावा, डॉक्टर की मदद के बिना औसत व्यक्ति के लिए परिणामों की व्याख्या करना जटिल हो सकता है.
सटीक परिणाम
कुछ कारणों से इन परीक्षणों से अपने परिणामों की सावधानीपूर्वक व्याख्या करना महत्वपूर्ण है.
फिलहाल, ये परीक्षण केवल अल्जाइमर रोग के बायोमार्कर में से एक की तलाश करते हैं. इसका मतलब यह है कि यह मनोभ्रंश के अन्य रूपों के लक्षणों का पता नहीं लगा सकता है - और केवल अल्जाइमर रोग के एक पहलू पर ही जानकारी प्रदान करता है. इसलिए भले ही किसी व्यक्ति का परीक्षण अल्जाइमर के लिए नकारात्मक आता है, यदि वे अन्य संबंधित लक्षणों (जैसे स्मृति हानि) का अनुभव कर रहे हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि वे डाक्टर से मिलें क्योंकि उनमें मनोभ्रंश का कोई और रूप हो सकता है - या पूरी तरह से एक और स्थिति हो सकती है.
दूसरी ओर, यदि परीक्षण का उपयोग किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिसमें कोई लक्षण नहीं है लेकिन जिसके पास असामान्य बायोमार्कर हैं, तो इससे अनावश्यक परेशानी हो सकती है - जिससे उन्हें लगता है कि उन्हें अल्जाइमर है, या विकसित होगा.
हालाँकि ये परीक्षण अल्जाइमर रोग होने की संभावना की जांच करने में उपयोगी हैं, फिर भी इनका अलग से उपयोग करना अभी भी उतना सटीक नहीं है जितना कि वर्तमान में योग्य डॉक्टरों द्वारा उपयोग किए जाने वाले परीक्षण हैं. लेकिन यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और, किसी दिन, ये परीक्षण उतने ही अच्छे हो सकते हैं.
शोधकर्ता अब यह देख रहे हैं कि किसी मरीज के रक्त में तौ प्रोटीन की सांद्रता को देखने वाले परीक्षण कितने सटीक हैं. रोगी के मस्तिष्क में प्लाक और उलझन दोनों का पता लगाने में तौ अमाइलॉइड-बीटा से अधिक सटीक हो सकता है.
विकास में कुछ और परीक्षण भी हैं जो तौ और अमाइलॉइड-बीटा दोनों को देखते हैं - जिसमें प्रीसिविटीएडी का एक नया संस्करण, अर्थात् प्रीसिविटीएडी2 भी शामिल है. विकास में अन्य परीक्षण अतिरिक्त बायोमार्कर को देखते हैं, जिसमें एक बहुत ही आशाजनक उंगली-चुभन परीक्षण भी शामिल है, जिसने अब तक मस्तिष्क स्कैन और मस्तिष्कमेरु द्रव परिणामों के साथ एक अच्छा संबंध दिखाया है.
यह स्पष्ट है कि अल्जाइमर रोग के निदान को अधिक सुलभ और सटीक बनाने के क्षेत्र में रोमांचक प्रगति हो रही है. एक बार जब इन परीक्षणों को सटीकता में सुधार करने के लिए परिष्कृत किया जाता है, तो वे रोगियों को नई आशा प्रदान कर सकते हैं - जिससे उन्हें बीमारी के प्रारंभिक चरण में निदान और इलाज करने में सहायता मिल सके.
आस्था /शौर्यपथ /गणेशजी को पान बेहद प्रिय है और उनकी पूजा में पान अर्पित करना बहुत ही शुभफलदायी माना जाता है। शास्त्रों में पान को पुंगी फल कहा जाता है और भगवान को पान अर्पित करने से आपके घर में धन वृद्धि होती है और आपको सुख समृद्धि प्राप्त होती है। आज हम आपको बताने ता रहे हैं पान के कुछ खास उपाय। इन उपायों को करने से आपके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे और बप्पा आपके जीवन में शुभ लाभ प्रदान करेंगे। आइए देखें कौन से हैं ये उपाय।
नए काम में सफलता के लिए
अगर आप कोई भी नया कार्य करने जा रहे हैं। कोई नया कारोबार शुरू करना चाहते हैं या फिर कहीं इंटरव्यू देने जा रहे हैं तो गणेशजी को पान के पत्ते पर लौंग और सुपारी अर्पित करके काम पर जाएं। ऐसा करने से आपको उस कार्य में सफलता मिलेगी। नई नौकरी में पद और वेतन आपको अपने मन के मुताबिक मिलेगा। लौटकर जब घर आएं तो इस पान सुपारी को प्रसाद के रूप में परिवार के सभी सदस्यों के बीच में बांट दें।
पान के पत्तों से शिवजी को करें प्रसन्न
गणेशजी के साथ ही भगवान शिव भी पान के पत्ते अर्पित करने से बहुत प्रसन्न होते हैं। पान के पत्ते में गुलकंद, कत्था, सुपारी, लौंग और इलाइची रखकर भगवान शिव को अर्पित करने से वह जल्द ही प्रसन्न होकर जातकों के मन की हर इच्छा पूर्ण करते हैं।
पान के पत्तों से दूर करें नजर दोष
पान के पत्तों से दूर करें नजर दोष
वास्तु में पान के पत्तों का महत्व बहुत ही खास माना गया है। कहते हैं पान के अंदर नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने की क्षमता होती है। अगर परिवार में किसी के ऊपर नजर दोष होने का शक है तो उस व्यक्ति को पान के पत्ते के साथ गुलाब की 7 पंखुड़ियां रखकर खिला दें। ऐसा करने से नजर का दोष दूर होता है और व्यक्ति स्वस्थ खुशहाल होता है।
धन की प्राप्ति के लिए पान का उपाय
अगर काफी मेहनत के बाद भी आपको धन कमाने में सफलता नहीं मिल रही है तो पान का यह उपाय आप करके देख सकते हैं। शुक्रवार के दिन पान के पत्ते पर सफेद बर्फी रखकर मां लक्ष्मी को अर्पित करें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी आपसे प्रसन्न होंगी और आपके घर को धन से भर देंगी।
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /बालों को लेकर आज के समय में अमूमन लोग जूझ रहे हैं. बालों के तेजी से झड़ने के साथ उनके सफेद और बेजान होना. अगर आप भी ऐसी ही किसी समस्या से जूझ रहे हैं और अपने बालों को हेल्दी, काला, लंबा और घना बनाना चाहते हो वो भी बिना एक पैसा खर्च किए तो आज हमारे पास आपके लिए एक देसी नुस्खा है जो आपके बालों को हेल्दी रखने में आपकी मदद करेगा. इसके साथ ही यह बालों का झड़ना कम करने के साथ उनको काला करने और लंबा करने में भी मदद करेगा. यह होम रेमेडि एक बार आजमाने के बाद आप दूसरों को भी अपना ये सीक्रेट शेयर जरूर करेंगे.
आज हम बात कर रहे हैं एलोवेरा की. यह बात तो हम सभी जानते हैं कि यह हमारे बालों के लिए कितना फायदेमंद होता है. अगर आप इसका इस्तेमाल सही तरीके से करते हैं तो यह आपके बालों से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है. तो आइए जानते हैं बालों पर एलोवेरा लगाने का सही तरीका जिससे आपके बालों से जुड़ी तमाम परेशानियां दूर हो जाएं.
बालों पर एलोवेरा कैसे लगाएं |
एलोवेरा हेयर मास्क आपके बालों के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इस मास्क को बनाने के लिए सबसे पहले एलोवेरा का जेल को एक बर्तन में निकाल लें. अब इसमें ग्लिसरीन को मिला लें. इन दोनों चीजों को मिक्सर में डालकर एक फाइन पेस्ट बना लें. अब इस पेस्ट को कटोरी में निकाल लें और कॉटन की मदद से अपने स्कैल्प और बालों के सिरों तक अच्छे से लगा लें. इस मास्क को बाल धोने से आधा घंटा पहले अपना बालों पर लगाएं और फिर बालों को माइल्ड शैंपू से धोलें. हफ्ते में दो बार इस हेयर मास्क का इस्तेमाल आपको बालों को मजबूत, काला और घना बनाने में मदद कर सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /सर्दी-खासी होने पर गले में तेज दर्द और जलन होती हैं. खासकर बारिश के मौसम में ये समस्या बढ़ जाती है. कई बार भीगने के चलते, या ठंडा-गर्म खाने के चलते, या शरीर के तापमान में असंतुलन से जुखाम, खराश और खांसी हो जाती हैं. इससे गले में जलन
होने लगती हैं जिसकी वजह से खाने-पीने में भी दिक्कत आती है. दवाइयों से इसे ठीक किया जा सकता हैं लेकिन इससे राहत के लिए आप कुछ घरेलू उपाय भी अपना कर देख सकते हैं.
इन 4 उपायों से दूर करें गले की जलन
हल्दी पानी
हल्दी में सबसे ज्यादा औषथिय गुण मिलते हैं. ये एंटी ऑक्सीडेंट (Anti Oxidant) का सबसे महत्तवपूर्ण स्रोत है. गले की जलन (Throat Burning) से राहत पाने के लिए आप हल्दी पानी (Haldi Water) से गरारा कर सकते हैं. इसके लिए 1 ग्लास पानी में आधा चम्मच हल्दी और आधा चम्मच नमक मिलाएं. अब इस पानी से हर 2-3 घंटे में गरारा करें.
अदरक पानी
अदरक (Ginger) गले के लिए काफी अच्छा माना जाता हैं. सर्दी-खासी (Cough and Cold) में अकसर लोग इसे चाय में मिलाकर पीते हैं. लेकिन अगर अदरक पानी (Ginger Water) को सीधा पिया जाएं तो इससे गले के जलन से राहत मिल सकती हैं. इसे बनाने के लिए 1 कप पानी में थोड़ा अदरक, नींबू का रस और आधा चम्मच शहद मिलाकर उबाल लें और पिए.
तुलसी पानी
आयुर्वेद में तुलसी को बहुत जरूरी औषधि माना जाता है. इसे पूजा-पाठ से लेकर दवाइयों तक हर जगह इस्तेमाल किया जाता है. अदरक की तरह ये भी गले के लिए काफी अच्छा होता है. गले की जलन से आराम पाने के लिए आप तुलसी के कुछ पत्तों को पानी में उबाल कर पीएं. दिन में दो बार पीने से आपको इसका असर जल्दी दिखने लगेगा.
नमक पानी
कभी-कभी गले में बलगम जम जाने के चलते भी जलन और खराश होती हैं. इसके लिए नमक पानी से गरारा करना फायदेमंद हो सकता है. गर्म पानी में नमक डालकर और अगर मन हो तो मेथी के कुछ दाने डालकर अच्छी तरह उबाल लें और गुनगुना करके गरारा करें.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
