August 09, 2026
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      खाना खजाना /शौर्यपथ / अलसी के बीजों को पोषक तत्वों का भंडार कहा जाता है. असली के बीज को डाइट में हम कई तरह से शामिल कर सकते हैं और करते आए हैं. क्योंकि अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड, हाई फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट जैसे गुण पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी अलसी की रोटी खाई है. जी हां आपने बिल्कुल सही सुना. अलसी की रोटी   के सेवन से शरीर को कई तरह की समस्याओं से बचाने में मदद मिल सकती है. तो चलिए बिना किसी देरी के जानते हैं इसे बनाने की आसान रेसिपी.
    कैसे बनाएं अलसी की रोटी-
    सामग्री-
        गेहूं का आटा
        अलसी के बीज
        नमक स्वादानुसार
        घी
    विधि-
        अलसी की रोटी बनाने के लिए सबसे पहले अलसी के बीजों को पीसकर पाउडर बना लें.
        इसके बाद एक बाउल में साबुत गेहूं का आटा, पिसी हुई अलसी, नमक और घी डालें और आटा गूंथ लें.
        आटे को कुछ मिनट के लिए रख दें.
        इसके बाद रेगुलर रोटी की तरह रोटियां बना लें.
        रोटियों को नॉन-स्टिक तवे पर दोनों तरफ से अच्छी तरह पकाएं.
        प्लेट में निकाल कर घी लगाएं और किसी भी सब्जी के साथ खाएं.
    अलसी की रोटी खाने के फायदे-
    1. अलसी की रोटी डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद मानी जाती है. क्योंकि फाइबर रिच अलसी में हेल्दी फैट पाए जाते हैं, जो शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं.
    2. अलसी की रोटी को हार्ट के लिए फायदेमंद माना जाता है. अलसी में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो हार्ट को हेल्दी रखने में मददगार है.
    3. कब्ज से राहत दिलाने में मददगार है असली की रोटी. अलसी की रोटी में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कब्ज को दूर करने में मदद कर सकते हैं.
    4. अगर आप वजन को कम करना चाहते हैं तो अपनी डाइट में अलसी की रोटी को शामिल कर सकते हैं. रेगुलर रोटी की तुलना में इसे ज्यादा हेल्दी माना जाता है.

       सेहत टिप्स /शौर्यपथ /सुबह का समय हम सभी के लिए व्यस्त समय होता है. डेली कामकाज, बच्चों को स्कूल छोड़ने और काम की ज़िम्मेदारियों से निपटने के बीच, ब्रेकफास्ट बनाना एक वास्तविक चुनौती हो सकती है. हममें से कुछ लोग ब्रेड और बटर के एक सिंपल पीसेस का भी सहारा लेते हैं क्योंकि हम बहुत जल्दी में होते हैं. लेकिन आइए इसे फेस करें, हर दिन एक ही चीज़ खानाबहुत उबाऊ हो सकता है.तभी हम क्विक और टेस्टी ऑप्शन की तलाश शुरू करते हैं. जबकि उपमा, पोहा, सैंडविच और चीला जैसे ऑप्शन उपलब्ध हैं, यदि आप अपने ब्रेकफास्ट रूटिन में कुछ एक्साइटमेंट एड करना चाहते हैं, तो हमारे पास दही टोस्ट की एक शानदार रेसिपी है जो निश्चित रूप से पसंद आएगी.
    भारतीय व्यंजनों में दही एक किचन सुपरहीरो है. हम इसका उपयोग हर चीज़ के लिए करते हैं, क्रीमी रायता बनाने से लेकर मीट को मैरीनेट करने और ग्रेवी बढ़ाने तक.यह डिप्स और सैंडविच स्प्रेड के लिए भी एक अच्छा ऑप्शन है. लेकिन आज हम आपको कुछ खास चीज़ से परिचित करा रहे हैं: दही टोस्ट. यह एक लाइफसेवर है क्योंकि यह स्पीडी, सिंपल है और इसके लिए सब्जियों की लंबी लिस्ट की आवश्यकता नहीं होती है. उस एक्स्ट्रा फ्लेवर के लिए आपको बस रोस्टेड बेसन, मुट्ठी भर मसाले, पानी और कुछ तिल चाहिए. आइए रेसिपी पर चलते हैं.
    दही टोस्ट रेसिपी कैसे बनाएं-
    1. सबसे पहले एक बाउल में एक कप दही लें. 1 से 1.5 बड़े चम्मच भुना हुआ बेसन, थोड़ी सी लाल मिर्च, काली मिर्च, जीरा और एक चुटकी हल्दी डालें.
    2. सभी चीजों को तब तक मिलाएं जब तक आपको गाढ़ा बैटर न मिल जाए, आवश्यकतानुसार थोड़ा सा पानी मिलाएं.
    3. ब्रेड का एक पीस लें और बैटर को एक तरफ फैला दें.
    4. थोडे से घी के साथ पैन को गर्म करें.
    5. पैन में ब्रेड का पीस, बैटर वाला पार्ट नीचे की ओर रखें. दूसरी तरफ और बैटर फैलाएं और थोड़ा बारीक कटा हरा धनिया और तिल छिड़कें. दोनों तरफ से क्रंची और गोल्डन ब्राउन होने तक पकाएं.
    6. चटनी के साथ या अपने चाय के कम्फर्टिंग कप के साथ गरमागरम दही टोस्ट का आनंद लें.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /साल 2023 के 10वें महीने अक्टूबर में कई व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं. इस महीने में शारदीय नवरात्रि, प्रदोष व्रत, पूर्णिमा, अमावस्या, दशहरा और एकादशी के व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे. इन व्रत और त्योहारों   की विशेष धार्मिक मान्यता है. सालभर के सबसे बड़े व्रत में इस महीने के व्रत गिने जाते हैं. इस माह शारदीय नवरात्रि की भी खास धूम देखने को मिलती है. वहीं, दशहरा  साल के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है. जानिए अक्टूबर में कौन-कौनसे व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं, इनकी तारीख क्या है और इनके महत्व के बारे में.
    अक्टूबर के व्रत-त्योहार |
    जीवितपुत्रिका व्रत
       6 अक्टूबर के दिन जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाएगा. इस व्रत को जितिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है. इस व्रत में मां अपने बच्चों की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं और भगवान सूर्यनारायण की पूजा करती हैं. यह निर्जला व्रत होता है और इसकी विशेष मान्यता है.
    इंदिरा एकादशी
       आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है. इस एकादशी के दिन पितरों की पूजा का खास विधान है. इस साल इस एकादशी का व्रत 10 अक्टूबर के दिन रखा जा रहा है.
    बुध प्रदोष व्रत
      अक्टूबर माह का पहला प्रदोष व्रत 11 अक्टूबर, बुधवार के दिन पड़ रहा है. प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा की जाती है. भक्त भोलेनाथ के लिए व्रत रखते हैं और शाम के समय प्रदोष काल में शिव पूजा करते हैं.
    श्राद्ध
      श्राद्ध के दिन पितरों की पूजा और तर्पण किया जाता है. इस साल महालय श्राद्ध 14 अक्टूबर के दिन पड़ रहा है. पितृ पक्ष में महालय अमावस्या का भी विशेष महत्व है.
    शारदीय नवरात्रि
      नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों का पूजन किया जाता है और बहुत से भक्त पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं. इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरूआत 15 अक्टूबर से हो रही है.
    दुर्गाष्टमी
      नवरात्रि के आठवें दिन दुर्गाष्टमी मनाई जाती है. दुर्गाष्टमी की तिथि इस साल 22 अक्टूबर है. इस दिन कन्यापूजन किया जाता है और घर में कंजक बैठाई जाती है.
    महानवमी
      दुर्गाष्टमी के अगले दिन यानी 23 अक्टूबर के दिन महानवमी मनाई जा रही है. महानवमी नवरात्रि का अंतिम दिन भी है जिसके साथ ही नवरात्रि पर्व की समाप्ति हो जाती है.
    दशहरा
      दशहरा या विजयादशमी इस साल 24 अक्टूबर के दिन पड़ रहा है. पौराणिक कथाओं के अनुसार दशहरा के दिन ही श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था.
    पापांकुशा एकादशी
     हर माह 2 एकादशी पड़ती हैं. अक्टूबर की दूसरी एकादशी 25 अक्टूबर के दिन है. इस एकादशी पर व्रत और पूजा-पाठ करने से मान्यतानुसार सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है.
    प्रदोष व्रत
      हर महीने दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं. अक्टूबर का दूसरा प्रदोष व्रत 26 अक्टूबर, गुरुवार के दिन पड़ेगा. पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि में प्रदोष व्रत  रखा जाता है और शिव पूजा होती है.
    शरद पूर्णिमा
      शरद पूर्णिमा के साथ ही अक्टूबर माह के सभी बड़े व्रत-त्योहार खत्म हो जाएंगे. इस महीने शरद पूर्णिमा 28 अक्टूबर, शनिवार के दिन पड़ रही है. इस पूर्णिमा की विशेष धार्मिक मान्यता है और कहते हैं इस दिन पूजा करने पर मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है.

        व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / अनंत चतुर्दशी की विशेष धार्मिक मान्यता होती है. इस दिन भक्त भगवान विष्णु  के लिए व्रत रखकर पूजा करते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा जाता है. अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है. माना जाता है कि अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने पर भक्तों के जीवन से आर्थिक, मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं. इसके अतिरिक्त मुक्ति पाने के लिए भी इस व्रत को रखा जा सकता है. भक्त आशा करते हैं कि भगवान विष्णु उनके जीवन को सुखमय बना देंगे.
    अनंत चतुर्दशी व्रत और पूजा |
      मान्यतानुसार अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा-अर्चना की जाती है. इस साल पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 28 सितंबर के दिन पड़ रही है और इसका समापन 28 सितंबर की ही शाम 6 बजकर 49 मिनट पर हो जाएगा. अनंत चतुर्दशी पर पूजा   का सुबह मुहूर्त 28 सितंबर के दिन सुबह 6 बजकर 12 मिनट से शाम 6 बजकर 49 मिनट तक कहा जा रहा है.
        अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत रखने वाले भक्त मान्यतानुसार भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करते हैं. सुबह-सवेरे उठकर स्नान किया जाता है और स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं. इसके बाद भक्त व्रत का संकल्प लेते हैं. फिर बारी आती है कलश स्थापना करने की. भगवान विष्णु की प्रतिमा को साफ किया जाता है और पूजा के लिए केसर, कुमकुम, हल्दी, फूल, अक्षत, फल और भोग आदि श्रीहरि के समक्ष अर्पित किए जाते हैं. हल्दी, कुमकुम या केसर से रंगी कच्ची डोरी पर चौदह गाठें बांधकर उसपर अनंत लिखा जाता है. अनंत चतुर्दशी की पूजा करते हुए विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना भी बेहद शुभ होता है. इस घर में विशेषकर आटे की रोटियां या फिर पूड़ी बनाई जाती हैं और पूजा के पश्चात प्रसाद में बांटी जाती हैं.
      अनंत चतुर्दशी के दिन बहुत से भक्त घर में सत्यनारायण का पाठ भी करवाते हैं. सत्यनारायण व्रत और कथा इस दिन करने पर विशेष लाभ मिलता है. इस अवसर पर अनंत देव   की कथा भी सुनी जाती है.

         शिक्षा /शौर्यपथ /बेटे छोटी उम्र से ही अपने पिता को देखकर उनकी तरह बनने का ख्वाब मन में लिए बड़े होते हैं. वे अपने पिता की गैर-मौजूदगी में उनकी जगह को भरने का प्रयास भी करते हैं. आमतौर पर देखा भी जाता है कि अगर पिता में कुछ अच्छी आदतें हैं तो बेटे में भी उनका संचार हो जाता है, और अगर पिता की कुछ बुरी आदतें   हैं तो बेटा भी उन्हीं को अपनाने लगता है. ऐसे में पिता को इस बात का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है कि वे अपने बेटे को किस तरह का इंसान बना रहे हैं. अगर आप चाहते हैं कि आपका बेटा केयर करने वाला, मन में सद्भावना रखने वाला और सम्मान देने वाला व्यक्ति बने तो आपकी आदतें भी इसी तरह की होनी जरूरी हैं.
    पिता की आदतों से सीखता है बेटा
    गलती स्वीकारना
       अक्सर देखा जाता है कि पिता ही घर का मुखिया होता है. उससे पूरा घर डरता है और अपनी गलतियों की माफी मांगता है. लेकिन, पिता को कम ही किसी से माफी मांगते देखा जाता है. आप ऐसे पिता ना बनें. आप अपनी गलतियों की माफी मांगने वाले व्यक्ति बनें ताकि आपके बेटे को भी यह समझ आ सके कि माफी मांगने से कोई छोटा-बड़ा नहीं हो जाता, यह बेहद सामान्य चीज है.
    अहंकार को ना दें बढ़ावा
       एक पिता होने के नाते यह बेहद जरूरी है कि आप अपने बेटे को अहंकारी ना बनाएं. आपको खुद भी अपने अहं को दूर रखना होगा जिससे आपके बेटे की भी इस तरह की आदतें ना बनें.
    प्यार जताना
       जब पिता अपने परिवार और अपने बेटे के प्रति खासकर प्यार की भावना रखते हैं और उस प्यार को जताते हैं तो बेटा भी प्यार जताने वाला इंसान बनता है. वह अपनी भावनाओं  से कुंठित होने वाला व्यक्ति नहीं बनता.
    सम्मान करना
       घर में कोई छोटा हो या फिर बड़ा, सम्मान का हकदार है. पिता  से बच्चे जो कुछ सीखते हैं उसमें सम्मान करना सीखना भी जरूरी है. जब पिता अपने बेटे का, अपनी बेटी का, अपनी पत्नी का, अपने माता और पिता का सम्मान करते हैं तो यह गुण बेटे में भी आता है.
    बात सुनने वाला बनना
       अपनी बात कह देना बहुत से लोगों को आता है लेकिन बात सुनने वाले कम ही होते हैं. आप अगर खुद बैठकर सबकी बातें सुनेंगे और समझेंगे तो बच्चों की भी यही आदत पड़ेगी. वे भी अपनी बात थोपने की जगह सबकी बात सुनने की कोशिश करेंगे.

     ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / लंबे और घने बाल आखिर किसे अच्छे नहीं लगते हैं. बालों पर तेल भी इसीलिए लगाए जाते हैं जिनसे बालों को जरूरी पोषक तत्व मिल सकें और बाल लंबे होने लगें. यहां जिन तेलों की बात की जा रही है वो बालों के लिए सबसे अच्छे साबित होने वाले तेलों की गिनती में आते हैं. इनसे स्कैल्प पर बिलड-अप नहीं जमता, ये बालों को घना   बनाते हैं और बालों को रूखे नहीं होने देते. हफ्ते में एक से दो बार सिर पर इन तेलों से मालिश की जा सकती है. इनसे बालों को जरूरी नमी भी मिल जाती है. जानिए कौनसे हैं ये तेल  जिनके इस्तेमाल से बाल बनते हैं घने और मोटे.
    बालों के लिए सबसे अच्छे तेल |  
    भृंगराज तेल
        आयुर्वेदिक तेलों में भृंगराज तेलभी शामिल है. इसे सबसे अच्छे तेलों में गिना जाता है और यह बालों को जड़ों से सिरों तक पोषण देता है. भृंगराज तेल से बालों को एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मिलते हैं और यह एंटी-ऑक्सीडेंट्स का भी अच्छा स्त्रोत है.
    प्याज का तेल
       प्याज का रस बालों के लिए बेहद अच्छा होता है. इसी तरह प्याज के तेल का भी असर सिर पर देखने को मिलता है. आप घर पर भी प्याज का तेल बनाकर लगा सकते है. प्याज का तेल बनाने के लिए छोटे टुकड़ों में प्याज काट लें. इसे नारियल के तेल में डालकर पकाएं और जब यह अच्छी तरह पक जाए तो तेल को छानकर अलग कर लें. बस तैयार है आपका प्याज का तेल.
    नारियल का तेल
       रूखे-सूखे बालों पर नारियल के तेल का सबसे अच्छा असर नजर आता है. यह तेल बालों के टूटने और झड़ने की दिक्कत को कम करता है और इससे बालों को बढ़ने में भी मदद मिलती है. नारियल के तेल   को सिर धोने से एक घंटा पहले हल्का गर्म करके बालों पर लगाया जा सकता है.
    बादाम का तेल
         विटामिन ई से भरपूर बादाम का तेल बालों को पोषण देता है, मजबूत बनाता है और बालों को आसानी से टूटने से रोकता है. बालों पर बादाम के तेल को भी हल्का गर्म करके लगाया जा सकता है.
    कैस्टर ऑयल
       बाल बढ़ाने  वाले तेलों में कैस्टर ऑयल भी शामिल है. इस तेल में विटामिन ई, खनिज और प्रोटीन की भी अच्छी मात्रा होती है. इसे सिर पर लगाने से स्कैल्प का पीएच बैलेंस्ड होता है. यह स्कैल्प के नैचुरल ऑयल्स को भी बनाए रखता है और बालों को पोषण देता है.

       ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /चेहरे पर बाल होना सामान्य है, लेकिन कभी-कभी हार्मोनल इंबैलेंस के कारण महिलाओं के चेहरे पर कुछ ज्यादा ही हेयर ग्रो करने लगते हैं खासकर अपर लिप्स के ऊपर. इन बालों को हटाने के लिए उन्हें बार-बार पार्लर के चक्कर लगाने पड़ते हैं. हालांकि, कुछ ऐसे घरेलू उपाय भी हैं जिनकी मदद से आसानी से इन बालों को हटाया जा सकता है. आइए जानते हैं अपर लिप्स के बालों   को हटाने के आसान घरेलू उपाय.
    अपर लिप्स के बाल हटाने के घरेलू उपाय
    बेसन और दूध
       एक चम्मच बेसन और दूध को मिलाकर पेस्ट बनाएं और अपर लिप्स के बालों पर लगा दें. सूख जाने पर हल्के हाथों से स्क्रब करें. इससे अनचाहे बालों   से छुटकारा मिल जाएगा.
    नींबू चीनी
      अपर लिप्स के बालों को रिमूव करने के लिए नींबू और चीनी का घोल बनाकर लगाएं. सूख जाने पर स्क्रब करते हुए निकालें. इससे आसानी से अपर लिप्स के अनचाहे बाल हट जाएंगे.
    दूध हल्दी
      बालों को नेचुरली रिमूव करने में दूध और हल्दी सबसे पहले आते हैं. इसके लिए एक चम्मच दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसे होंठों के ऊपर के बालों पर लगा लें. अच्छी तरह सूखने के बाद अंगुलियों को गीला कर रगड़-रगड़ कर छुड़ाएं.
    शहद हल्दी
     एक चम्मच दही में एक चम्मच शहद और चुटकीभर हल्दी मिलाएं और उसे इसे होंठों के ऊपर के बालों पर लगा लें. थोड़ी देर बाद अंगुलियों को गीला कर रगड़-रगड़ कर छुड़ाएं. पेस्ट के साथ बाल भी साफ हो जाएंगे.
    नींबू शहद
      अपर लिप्स के ऊपर के बालों को रिमूव करने के लिए एक चम्मच शहद में आधे नींबू का रस   मिलाएं और इसे होंठों के ऊपर लगाएं. थोड़ी देर बाद अंगुलियों को गीला कर रगड़-रगड़ कर छुड़ाएं. पेस्ट के साथ बाल भी साफ हो जाएंगे.

      ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / महिलाएं अपने चेहरे के साथ हाथों और पैरों की खूबसूरती में भी चार-चांद लगाना चाहती हैं. हाथों की खूबसूरती में नाखूनों का बहुत महत्व होता है. नेल्स को सुंदर दिखाने के लिए तरह-तरह के नेल पेंट से लेकर नेल आर्ट तक का सहारा लिया जाता है. इन दिनों नेल्स को बड़ा दिखाने के लिए नेल एक्सटेंशन   का भी काफी ट्रेंड है. लेकिन, नेल एक्सटेंशन के कई साइड इफेक्ट्स भी होते हैं. आइए जानते हैं क्या है नेल एक्सटेंशन और कौनसे हैं इसके खतरे जिनसे बचे रहने की जरूरत होती है.
    नेल एक्सटेंशन के साइड इफेक्ट्स |  
      नेल्स की खूबसूरती बढ़ाने के लिए नेल एक्सटेंशन करवाया जाता है. इसमें असली नेल्स के ऊपर एक्रेलिक नेल्स लगाए जाते हैं. इसके बाद उन्हें मनचाहा शेप दिया जाता है. असली नेल्स पर एक्रेलिक नेल्स चिकपाएं जाते हैं और उन पर जेल कोटिंग करके उन्हें शाइनी बनाया जाता है. इस तरह नेल एक्सटेंशन कराने के कुछ नुकसान भी हैं.
    नैचुरल ग्लो में कमी
      नेल एक्सटेंशन के लिए असली नेल्स को रगड़कर पतला किया जाता है जिससे उनकी नैचुरल चमक कम हो जाती है. बार-बार नेल एक्सटेंशन के कारण नाखुनों की चमक हमेशा के लिए खराब हो सकती है.
    हाथ से काम करने में परेशानी
       नेल एक्सटेंशन के कारण हाथों से काम करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है. भले ही इससे हाथ खूबसूरत दिखें लेकिन रूटीन कामों जैसे कंप्यूटर या मोबाइल चलाने से लेकर घर के कामों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
    काफी खर्चीला
       नेल एक्सटेंशन काफी महंगा भी होता है. इसकी फीस 1000 रुपए से लेकर 6000 तक हो सकती है. इसके साथ ही एक्सटेंशन के बाद नेल्स की देखभाल के लिए भी कई प्रोडक्ट्स खरीदने पड़ते हैं. इतने खर्च के बाद एक बार करवाया गया नेल एक्सटेंशन 5 से 6 सप्ताह तक ही रहता है.

      खाना खजाना /शौर्यपथ /जब बात इंडियन स्ट्रीट फूड की आती है, तो आप कचौरी को मिस नहीं कर सकते हैं. आटे के अंदर भरे हुए मसाले और तेल में फ्राई की गई कचौरियाँ किसी लाजवाब से कम नहीं हैं! इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि आपके पास इसे बनाने के कई तरह के ऑप्शन मौजूद होते हैं. डो आपके मूड और टेस्ट पर डिपेंड करते हैं. आपने सही पढ़ा! भारत भर में ही आपको कई कचौरी रेसिपी मिल जाएंगी. मीठी और नमकीन दोनों, जिनमें से सभी की फिलिंग बिल्कुल अलग और लाजवाब होती है. आज हम बात कर रहे हैं क्लासिक काठियावाड़ी कचौरी की. ये गुजरात की फेमस डिश है. इसमें मटर की फिलिंग की जाती है और गर्म चाय के साथ इसका आनंद लिया जाता है. शाम का नाश्ता होने के साथ ही यह वहां रहने वाले लोगों के नाश्ते की थाली में जरूर मिल जाती है.
    काठियावाड़ी कचौड़ी में खास क्या है?
            जो लोग सोचते थे कि गुजराती खाने में केवल ढोकला, खाखरा और फाफड़ा ही है, तो हम पर विश्वास करें, इस एरिया में और भी बहुत कुछ है - काठियावाड़ी खाना इसका एक उदाहरण है. गुजरात में काठियावाड़ (जिसमें राजकोट, जामनगर, जूनागढ़, भावनगर, सुरेंद्रनगर और पोरबंदर शामिल हैं) यहां के खाने में विशेष तौर पर दाल, अनाज और जीरा, मिर्च और हल्दी जैसे कई मसालों को शामिल किया जाता है. सबसे जरूरी बात यह है कि गुजराती खाने से बिल्कुल अलग काठियावाड़ी खाना गर्म और मसालेदार होता है और यह कचौरी इसे सर्वश्रेष्ठ बनाती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बनाना बेहद आसान है. तो आइए जानते हैं इसे बनाने की रेसिपी.
    काठियावाड़ी कचौड़ी रेसिपी:
            कचौड़ी बनाने के लिए सबसे पहले आटा (मैदा) लीजिए और उसमें अजवाइन, नमक, तेल और पानी डालकर आटा गूंध लीजिए. अब उबले और मसले हुए हरे मटर के साथ जीरा, अदरक, हल्दी और भी कुछ मसाले मिलाकर फिलिंग तैयार करेंगे. शेफ ने इसमें कुरकुरापन बढ़ाने के लिए भुनी हुई कुचली हुई मूंगफली मिलाई हैं.
    अब आटे से एक गोला काट लें, इसमें स्टफिंग डालकर इसे चपटा बेल लें और सुनहरा और कुरकुरा होने तक डीप फ्राई करें.  बस आपकी स्वादिष्ट काठियावाड़ी कचौड़ी बनकर तैयार है.

        सेहत टिप्स /शौर्यपथ /मोटापा, बैली फैट, साइड फैट, थाई फैट इस तरह के ना जाने कितने फैट हैं जिनसे आज कम समय में कुछ लोग जूझ रहे हैं. इसकी वजह कई बार उनका खान-पान होता है, कई बार लाइफस्टाइल तो कई बार कुछ बीमारियों की वजह से भी वजन बढ़ने लग जाता है. मोटापा यानि आपको कई बीमारियों की चपेट में भी ला सकता है, इसलिए बेहतरी इसी में होती है कि आप इसको कंट्रोल में रखें. वैसे तो वजन कम करने के लिए डाइट, एक्सरसाइज, योगा और भी बहुत सी चीजें हैं जिनको आप आजमा सकते हैं. इसी के साथ अगर आप सुबह उठते ही अपने खाने-पीने की आदतों को बदल दें. तब भी आपके पेट की चर्बी कम हो सकती है. पेट की चर्बी की बात हम इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि इसको कम करना सबसे मुश्किल होता है. आज हम आपको एक ऐसा नुस्खा बताने वाले हैं जो आपके वजन को कम करने के साथ ही आपकी पेट की चर्बी को भी मक्खन की तरह पिघलाने में मदद कर सकता है.
    सुबह-सुबह खाली पेट हेल्दी ड्रिंक को पीना वजन को कम करने और आपको हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकता है. हम सुबह के समय जो आदतें अपनाते हैं, वे हमारे पूरे स्वास्थ्य पर आसर डालती हैं. इसके अलावा, जब आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो सुबह सबसे पहले क्या खाते-पीते हैं यह और भी बहुत जरूरी हो जाता है. आंवले के रस का सेवन आपका वजन कम करने के साथ ही आपकी सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद हो सकता है. तो आइए जानते हैं सुबह खाली पेट आंवले का जूस पीने के फायदे जिन्हें जानकर आप इसको पीने के लिए मजबूर हो जाएंगे.
    आंवला जूस पीने के फायदे
    1. वेट लॉस
    आंवला में पाए जाने वाले फाइबर शरीर के मल त्याग को कंट्रोल करने में मदद करता है और इरिटेबल बाउल सिंड्रों जैसी बीमारियों से राहत दिलाने में मदद कर सकता है. आंवले में विटामिन सी अधिक मात्रा में पाया जाता है जो आपके शरीर को दूसरे पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करने के साथ वजन कम करने और बैली फैट को कम करने में मदद कर सकता है.
    2. फाइबर से भरपूर
       आंवला फाइबर, विटामिन सी और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है. जो इसे कई बीमारियों से लड़ने, भूख को कम करने में मदद कर पाता है. आंवले में मौजूद विटामिन सी बीमारियों से बचाने में और शरीर को हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. आंवला में विटामिन सी काफी मात्रा में पाया जाता है जो आपके शरीर को अन्य पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है, इसलिए अगर आप आयरन और दूसरे मिनरल्स लेते हैं तो आंवले का सेवन आपके लिए लाभदायी हो सकता है.
    3. स्ट्रांग इम्यूनिटी
       100 ग्राम आंवला (लगभग आधा कप) में 300 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है. विटामिन सी एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है जो शरीर में व्हाइट ब्लड सेल्स को ज्यादा प्रभावी ढंग से काम करने, स्किन को मजबूत करने और घावों को तेजी से ठीक करने में मदद करते हैं और इम्यूनिटी को बू्स्ट करने में मदद कर सकते हैं.
    4. ब्रेन हेल्थ
       आंवले में मौजूद फाइटोन्यूट्रिएंट्स और एंटीऑक्सीडेंट ब्रेन सेल्स पर हमला करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़कर याददाश्त को भी मजबूत बना सकते हैं. आंवले में पाया जाने वाला विटामिन सी शरीर को नॉरपेनेफ्रिन का प्रोडक्शन करने में मदद करती है, एक न्यूरोट्रांसमीटर मनोभ्रंश से जूझ रहे लोगों ब्रेन फंक्शन में सुधार कर सकता है.
    5. कंट्रोल डायबिटीज
       आंवले में सॉल्युबल फाइबर की मौजूदगी ब्लड शुगर के लेवल और डायबिटीज को रोकने के लिए फायदेमंद हो सकती है. आंवले में सॉल्युबल फाइबर शरीर में जल्दी घुल जाता है, जिससे शरीर में शुगर को अवशोषित करने की स्पीड स्लो हो जाती है.

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