
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
खाना खजाना / शौर्यपथ /हमेशा से ही शिमला मिर्च अपने गहरे हरे रंग के कारण आकर्षण का केंद्र रही है। यह सिर्फ दिखने और स्वाद में ही मजेदार नहीं है, बल्कि इसके सेहत लाभ भी कमाल के हैं। खाने की डिशेज में इसका कई तरह से प्रयोग किया जाता है और खाने का स्वाद बढ़ाया जाता है। शिमला मिर्च बाजार में अलग-अलग रंग जैसे- लाल, पीली, बैंगनी, नारंगी और हरी आदि रंगों में पाई जाती है। इसे अंग्रेजी में कैप्सिकम (Capsicum) और बेल पेपर (Bell Pepper) कहा जाता है। इसकी तासीर गर्म होती है अत: लोग सर्दियों में इसका सेवन ज्यादा करते है।
आप यहां जानिए शिमला मिर्च की 5 लाजबाब डिशेज और 10 कमाल के फायदे-
1. रोस्टेड बेल पेपर सूप
सामग्री :250 ग्राम पीली शिमला मिर्च, 1 लीटर वेजिटेबल स्टॉक,30 मिली. व्हाइट वाइन, 250 ग्राम लाल और 100 ग्राम प्याज, 50 ग्राम सेलरी, 50 ग्राम लीक, 25 ग्राम लहसुन, 50 ग्राम गाजर, 15 मिली. ऑलिव ऑयल, शिमला मिर्च स्टॉक, काली मिर्च पावडर स्वादानुसार, नमक आवश्यकतानुसार।
विधि :सबसे पहले माइक्रोवेव अवन (ओवन) को 180 डिग्री सेंटीग्रेड पर गर्म कर लें। अब शिमला मिर्च पर ऑलिव ऑयल लगाकर 10-12 मिनट तक रोस्ट करें। तत्पश्चात फूड पैन में इसे ढ़क्कन लगाकर कुछ देर के लिए रख दें। अब शिमला मिर्च का छिलका उतारकर बीज निकाल दें। एक तरफ रखें।
कटी हुई लीक सेलरी, प्याज व लहसुन को एक साथ भूनें। फिर शिमला मिर्च डालकर 5-10 मिनट तक दोबारा भूनें। पैन में व्हाइट वाइन डालें। फूड प्रोसेसर में सभी सब्जियां डालकर प्यूरी बनाएं। अब शिमला मिर्च स्टॉक को सूप पॉट में डालकर गर्म करें। फिर इसमें सब्जियों की प्यूरी डालकर मिलाएं। 10-15 मिनट तक पकाएं। अब सूप को गाढ़ा करने के लिए मिलाएं। नमक व कालीमिर्च डालकर चलाएं। लगातार चलाएं ताकि गुठली न बनने पाए। तैयार सूप बाउल में डालकर गरमा-गरम सर्व करें।
2. टेस्टी रवा उपमा
सामग्री :1 कप रवा, 1 बड़ी शिमला मिर्च बारीक कटी हुई, 1 चम्मच सोया आटा, 1 चम्मच मक्के का आटा, 1 चम्मच उड़द दाल, 1 कप गाजर (बारीक कटे हुए), आधा कप मटर के दाने, आधा कप अंकुरित मोठ व चने, नमक, कालीमिर्च स्वादानुसार, तेल 2 चम्मच, राई, हरी मिर्च, मीठा नीम (छौंक के लिए), गार्निश के लिए- हरा धनिया, नारियल का बूरा, 1 चम्मच नींबू का रस, 2 कटे प्याज व 2 कटे टमाटर।
विधि :उड़द दाल को साफ करके एक घंटे के लिए भिगो दें। फिर एक पैन में तेल गरम करें और छौंक की सामग्री डालकर दाल भूनें। तत्पश्चात शिमला मिर्च, गाजर, मटर व मोठ डालकर पकाएं। इसमें रवा, सोया आटा व मक्के का आटा डालकर अच्छी तरह भूनें। अब चने उबाल कर डालें।
साथ ही नमक, कालीमिर्च व नींबू का रस डालें। 5-6 कप गर्म पानी डालकर तब तक चलाएं, जब तक कड़ाही न छोड़ने लगे। अब रवा उपमा पर हरा धनिया, नारियल का बूरा, प्याज, टमाटर डालें और गरमा-गरम रवा उपमा सर्व करें।
3. शिमला मिर्च विद पनीर
सामग्री :250 ग्राम पनीर, 3 बड़ी शिमला मिर्च, 2 बड़े चम्मच गाढ़ा दही, एक चम्मच लहसुन-अदरक का तैयार पेस्ट, 1 से डेढ़ चम्मच लाल मिर्च पावडर, पाव चम्मच काली मिर्च, तेल व नमक स्वादानुसार।
विधि :पनीर लेकर तिकोने आकार में काट कर बड़े-बड़े पीसेस कर लें। अब शिमला मिर्च को लंबी काटकर रख लें। तत्पश्चात दही में सारा मसाला डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब इसमें पनीर डालकर आधा घंटा रख छोड़े। अब एक कड़ाही में थोड़ा-सा तेल गरम करके शिमला मिर्च को भूनकर मसाला मिला पनीर मिलाएं। इसे धीमी आंच पर पकाएं और गरमा-गरम रोटी के साथ सर्व करें।
4. स्वादिष्ट मिक्स पुलाव विद भाजी मसाला
सामग्री :1 कटोरी बासमती चावल, 2 गाजर, 2 शिमला मिर्च, 1 टमाटर, 2 प्याज, 2 उबले आलू, थोड़ी सी मटर, 2 चम्मच पावभाजी मसाला, हल्दी, नमक, मिर्च सभी आवश्यकतानुसार, थोड़ा तेल।
विधि :सर्वप्रथम चावल पकाने के बाद उसे एक थाली में फैला दें। पैन में थोड़ा तेल डालकर उसमें प्याज, टमाटर, आलू, शिमला मिर्च, गाजर-मटर (उबले) के छोटे-छोटे टुकड़े कर, डालकर पका लें। उसमें पावभाजी मसाला व आवश्यकतानुसार नमक, हल्दी, मिर्च डाल लें। इसमें पके चावल मिलाएं। एक अच्छी भाप आने के बाद उतारें और परोसें।
5. टेस्टी वेज नूडल्स विद शिमला टेस्ट
सामग्री :1 कप नूडल्स, 2 बड़ी शिमला मिर्च, 1 चम्मच सिरका, 1 टी चम्मच सोया सॉस, 1 चम्मच तेल, 1/2 कप बारीक कटी लंबी सब्जियां- शिमला मिर्च, पत्ता गोभी, गाजर, प्याज और हरा प्याज, 1/2 चम्मच लहसुन बारीक कटी, चुटकी भर अजिनोमोटो, नमक स्वादानुसार।
विधि :सबसे पहले नूडल्स को उबाल कर अलग रख लें। अब एक पैन में तेल गर्म करें। लहसुन, प्याज डालें और 2 मिनिट के लिए भूनें। अब हरी कटी प्याज को छोड़कर सभी सब्जियां डालें। 1 मिनट इन्हें भी भूनें और फिर उबले नूडल्स डालें। ऊपर से अजिनोमोटो, सिरका, सोया सॉस, नमक डालें। सभी को मिक्स करें और हरी कटी प्याज से सजाकर टेस्टी वेज नूडल्स पेश करें।
शिमला मिर्च के 10 फायदे :
1 ताजी हरी शिमला मिर्च में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के, फाइबर, कैरोटीनॉइड्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है।
2 शिमला मिर्च में पाए जाने वाले पोषक तत्व, एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करते है। इसलिए कहा जा सकता है कि त्वचा को स्वस्थ, सुंदर बनाए रखने के लिए शिमला मिर्च का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है।
3 शिमला मिर्च में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी तत्व एवं सल्फर, कैरोटीनॉइड लाइकोपीन की मात्रा भी भरपूर होती है, जिसके कारण यह कैंसर जैसी बीमारी से बचने में भी लाभकारी है।
4 अगर आपके शरीर में आयरन की कमी है, तो इसका सेवन बेहद फायदेमंद है। इसमें मौजूद विटामिन सी आयरन को सोखने में मददगार है। यह आपको एनीमिया से बचाने में भी सहायक होगा।
5 डाइबिटीज कंट्रोल करना चाहते हैं, तब भी शिमला मिर्च आपके लिए मददगार साबित होगी। यह ब्लड शुगर के लिए आवश्यक सही स्तर को बनाए रखती है और डाइबिटीज से आपकी रक्षा करती है।
6. अगर आपके घुटनों व जोड़ों में समस्या है, तो शिमला मिर्च का सेवन करना आपके लिए बेहद लाभकारी होगा। इसके प्रयोग से आर्थराइटिस की समस्या में भी लाभ पाया जा सकता है।
7. शिमला मिर्च एंटी-एजिंग गुण पाए जाते हैं इसीलिए त्वचा में निखार के लिए इसका उपयोग सभी सौंदर्य उत्पाद में एंटी-एजिंग के तौर पर उपयोग किया जाता है।
8. शिमला मिर्च का सेवन रजोनिवृत्ति महिलाओं (महिलाओं में मासिक धर्म का बंद होना) के लिए भी लाभदायक माना जाता है, क्योंकि इसमें मौजूद फ्लेवोनोइड, रजोनिवृत्ति के दौरान होने वाली परेशानियों और उसके लक्षणों को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
9. शिमला मिर्च में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण पाए जाते है, जो गठिया रोग में होने वाले दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते है। अत: गठिया रोगियों को शिमला मिर्च का सेवन लाभदायक है।
10. जिस किसी व्यक्ति के शरीर में खून की कमी हो तो उसे पूरा करने के लिए भी शिमला मिर्च का सेवन लाभदायक होता है। एनीमिया रोग से बचाव में शिमला मिर्च में मौजूद आयरन और विटामिन-सी सहायक होता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ /महाशिवरात्रि व्रत की कथा-- पूर्व काल में चित्रभानु नामक एक शिकारी था। जानवरों की हत्या करके वह अपने परिवार को पालता था। वह एक साहूकार का कर्जदार था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधित साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी। शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव-संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा। चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनी।
शाम होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की। शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया। अपनी दिनचर्या की भाँति वह जंगल में शिकार के लिए निकला। लेकिन दिनभर बंदी गृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार खोजता हुआ वह बहुत दूर निकल गया। जब अंधकार हो गया तो उसने विचार किया कि रात जंगल में ही बितानी पड़ेगी। वह वन एक तालाब के किनारे एक बेल के पेड़ पर चढ़ कर रात बीतने का इंतजार करने लगा।
बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बिल्वपत्रों से ढंका हुआ था। शिकारी को उसका पता न चला। पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियां तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरती चली गई। इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बिल्वपत्र भी चढ़ गए। एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भिणी हिरणी तालाब पर पानी पीने पहुंची।
शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, हिरणी बोली, 'मैं गर्भिणी हूं। शीघ्र ही प्रसव करूंगी। तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत हो जाऊंगी, तब मार लेना।' शिकारी ने प्रत्यंचा ढीली कर दी और हिरणी जंगली झाड़ियों में लुप्त हो गई। प्रत्यंचा चढ़ाने तथा ढीली करने के वक्त कुछ बिल्व पत्र अनायास ही टूट कर शिवलिंग पर गिर गए। इस प्रकार उससे अनजाने में ही प्रथम प्रहर का पूजन भी सम्पन्न हो गया।
कुछ ही देर बाद एक और हिरणी उधर से निकली। शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसे देख हिरणी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया, 'हे शिकारी! मैं थोड़ी देर पहले ऋतु से निवृत्त हुई हूं। कामातुर विरहिणी हूं। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूं। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊंगी।' शिकारी ने उसे भी जाने दिया। दो बार शिकार को खोकर उसका माथा ठनका। वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। इस बार भी धनुष से लग कर कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर जा गिरे तथा दूसरे प्रहर की पूजन भी सम्पन्न हो गई।
तभी एक अन्य हिरणी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली। शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था। उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर नहीं लगाई। वह तीर छोड़ने ही वाला था कि हिरणी बोली, 'हे शिकारी!' मैं इन बच्चों को इनके पिता के हवाले करके लौट आऊंगी। इस समय मुझे मत मारो। शिकारी हँसा और बोला, सामने आए शिकार को छोड़ दूं, मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूं। मेरे बच्चे भूख-प्यास से व्यग्र हो रहे होंगे। उत्तर में हिरणी ने फिर कहा, जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी। हे शिकारी! मेरा विश्वास करों, मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूं।
हिरणी का दीन स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के अभाव में तथा भूख-प्यास से व्याकुल शिकारी अनजाने में ही बेल-वृक्ष पर बैठा बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था। पौ फटने को हुई तो एक हृष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्य करेगा। शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृग विनीत स्वर में बोला, हे शिकारी! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है, तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि मुझे उनके वियोग में एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े। मैं उन हिरणियों का पति हूं। यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण का जीवन देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे समक्ष उपस्थित हो जाऊंगा।
मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटनाचक्र घूम गया, उसने सारी कथा मृग को सुना दी। तब मृग ने कहा, 'मेरी तीनों पत्नियां
जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएंगी। अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूं।'
शिकारी ने उसे भी जाने दिया। इस प्रकार प्रात: हो आई। उपवास, रात्रि-जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ने से अनजाने में ही पर शिवरात्रि की पूजा पूर्ण हो गई। पर अनजाने में ही की हुई पूजन का परिणाम उसे तत्काल मिला। शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया। उसमें भगवद्शक्ति का वास हो गया।
थोड़ी ही देर बाद वह मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके।, किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसने मृग परिवार को जीवनदान दे दिया।
अनजाने में शिवरात्रि के व्रत का पालन करने पर भी शिकारी को मोक्ष की प्राप्ति हुई। जब मृत्यु काल में यमदूत उसके जीव को ले जाने आए तो शिवगणों ने उन्हें वापस भेज दिया तथा शिकारी को शिवलोक ले गए। शिव जी की कृपा से ही अपने इस जन्म में राजा चित्रभानु अपने पिछले जन्म को याद रख पाए तथा महाशिवरात्रि के महत्व को जान कर उसका अगले जन्म में भी पालन कर पाए।
क्या है महाशिवरात्रि की कथा का संदेश
शिकारी की कथानुसार महादेव तो अनजाने में किए गए व्रत का भी फल दे देते हैं। पर वास्तव में महादेव शिकारी की दया भाव से प्रसन्न हुए। अपने परिवार के कष्ट का ध्यान होते हुए भी शिकारी ने मृग परिवार को जाने दिया। यह करुणा ही वस्तुत: उस शिकारी को उन पण्डित एवं पूजारियों से उत्कृष्ट बना देती है जो कि सिर्फ रात्रि जागरण, उपवास एव दूध, दही, एवं बेल-पत्र आदि द्वारा शिव को प्रसन्न कर लेना चाहते हैं। इस कथा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कथा में 'अनजाने में हुए पूजन' पर विशेष बल दिया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि शिव किसी भी प्रकार से किए गए पूजन को स्वीकार कर लेते हैं अथवा भोलेनाथ जाने या अनजाने में हुए पूजन में भेद नहीं कर सकते हैं।
वास्तव में वह शिकारी शिव पूजन नहीं कर रहा था। इसका अर्थ यह भी हुआ कि वह किसी तरह के किसी फल की कामना भी नहीं कर रहा था। उसने मृग परिवार को समय एवं जीवन दान दिया जो कि शिव पूजन के समान है। शिव का अर्थ ही कल्याण होता है। उन निरीह प्राणियों का कल्याण करने के कारण ही वह शिव तत्व को जान पाया तथा उसका शिव से साक्षात्कार हुआ।
परोपकार करने के लिए महाशिवरात्रि का दिवस होना भी आवश्यक नहीं है। पुराण में चार प्रकार के शिवरात्रि पूजन का वर्णन है।मासिक शिवरात्रि, प्रथम आदि शिवरात्रि, तथा महाशिवरात्रि। पुराण वर्णित अंतिम शिवरात्रि है-नित्य शिवरात्रि। वस्तुत: प्रत्येक रात्रि ही 'शिवरात्रि' है अगर हम उन परम कल्याणकारी आशुतोष भगवान में स्वयं को लीन कर दें तथा कल्याण मार्ग का अनुसरण करें, वही शिवरात्रि का सच्चा व्रत है।
आस्था / शौर्यपथ /श्रावण माह की शिवरात्रि का बड़ा महत्व है। सावन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि व्रत रखा जाता है। इस बार अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार सावन शिवरात्रि व्रत 6 अगस्त 2021, शुक्रवार को है। आओ जानते हैं कि पूजा मुहूर्त, महत्व, मंत्र, कथा, पूजा विधि, पारण का समय।
1. पूजा का मुहूर्त : अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से दोपहर 12 बजकर 53:36 तक रहेगा।
2. चतुर्दशी तिथि 6 अगस्त 2021, शुक्रवार को शाम 6 बजकर 28 मिनट से शुरू होगी और 7 अगस्त 2021 की शाम 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगी।
3. शिवरात्रि व्रत पारण मुहूर्त- 7 अगस्त की सुबह 5 बजकर 46 मिनट से दोपहर 3 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।
4. महत्व : चतुर्दशी (चौदस) के देवता हैं शंकर। इस तिथि में भगवान शंकर की पूजा करने से मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों को प्राप्त कर बहुत से पुत्रों एवं प्रभूत धन से संपन्न हो जाता है।
5. मंत्र : ॐ नम: शिवाय नम: या ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।
प्रहर के 4 मंत्र- 'ॐ हीं ईशानाय नम:' 'ॐ हीं अधोराय नम:' 'ॐ हीं वामदेवाय नम:' और 'ॐ हीं सद्योजाताय नम:' मंत्र का जाप करना करें।
6. पूजा सामग्री : भगगवान शिव की पूजा के लिए साफ बर्तन, देसी घी, फूल, पांच प्रकार के फल, पंचमेवा, जल, पंचरस,चंदन, मौली, जनेऊ, पंचमेवा, शहद, पांच तरह की मिठाई, बेलपत्र, धतूरा, भांग के पत्ते, गाय का दूध, चंदन, धूप, कपूर, मां पार्वती की श्रृंगार सामग्री, दीपक, बेर, आदि लेना चाहिए.।
पूजा की विधि :
*शिवरात्रि के व्रत में भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है।
*शिवरात्रि के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें।
*उसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति स्थापित कर उनका जलाभिषेक करें।
*फिर शिवलिंग पर दूध, फूल, धतूरा आदि चढ़ाएं। मंत्रोच्चार सहित शिव को सुपारी, पंच अमृत, नारियल एवं बेल की पत्तियां चढ़ाएं। माता पार्वती जी को सोलह श्रृंगार की चीजें चढ़ाएं।
*इसके बाद उनके समक्ष धूप, तिल के तेल का दीप और अगरबत्ती जलाएं।
*इसके बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
*पूजा के अंत में शिव चालीसा और शिव आरती का पाठ करें।
*पूजा समाप्त होते ही प्रसाद का वितरण करें।
*शिव पूजा के बाद शिवरात्रि व्रत की कथा सुननी आवश्यक है।
*व्रत करने वाले को दिन में एक बार भोजन करना चाहिए।
*दिन में दो बार (सुबह और सायं) भगवान शिव की प्रार्थना करें।
*संध्याकाल में पूजा समाप्ति के बाद व्रत खोलें और सामान्य भोजन करें।
सेहत / शौर्यपथ / केला भारतीय आहार का एक खास हिस्सा है। पूर्व से पश्चिम तक और उत्तर से दक्षिण तक अलग-अलग तरह से केले का सेवन किया जाता है। अगर बात इस मौसम की करें तो हमारी दादी-नानी के जमाने से कच्चे केले की सब्जी, करी और कोफ्ते बरसात के मौसम में बनाने का चलन रहा है। कुछ लोग कच्चे केले को उबाल कर खाते हैं, तो कुछ लोग इसे चिप्स आदि बना कर भी उपवास में खाना पसंद करते हें। पर क्या आप जानती हैं कि कच्चा केला आपको कई स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाता है।
खासतौर से पाचन से जुड़ी समस्याओं से बचाने में कच्चे केले का जवाब नहीं। आज हम कच्चे केले के कुछ स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानेंगे।
पोषण का भंडार है कच्चा केला
कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल,डाइटिशियन अदिति शर्मा के अनुसार एक मीडियम कच्चे केले में लगभग 130 कैलोरी,विटामिन बी6 (दैनिक जरूरत का 42.31%),कार्बोहाइड्रेट (26.35% दैनिक जरूरत का), मैंगनीज (दैनिक जरूरत का17.61%),विटामिन सी (दैनिक जरूरत का14.56%) और कॉपर (दैनिक जरूरत का13.00%) होता है। केले का सेवन बहुत से फायदे देता है।
यहां हैं आहार में कच्चा केला शामिल करने के स्वास्थ्य लाभ
1 फाइबर से भरपूर : कच्चा केला फाइबर से भरपूर होता है और फाइबर आपकी गट हेल्थ और आपके पाचन के लिए बहुत अच्छा होता है। यह आपकी पाचन सेहत को सही रखने के साथ साथ आपके हृदय की सेहत को भी ठीक रखता है। अगर आपको कब्ज या दस्त जैसी समस्या है, तो फाइबर का सेवन करना आपके लिए बहुत आवश्यक हो जाता है। इसलिए कच्चे केले का सेवन करना पाचन से जुड़ी समस्याओं के लिए आवश्यक है।
2 आपके हृदय के लिए लाभदायक : पके हुए केले की तरह ही कच्चे केले भी आपको पोटैशियम की बहुत अच्छी मात्रा प्रदान करते हैं। आपको एक कप कच्चे केले में 531 mg पोटेशियम मिलता है। पोटेशियम किडनी फंक्शन के लिए लाभदायक होता है। इसके साथ ही पोटेशियम आपके ब्लड प्रेशर के लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है जिस कारण आपके हृदय की सेहत बढ़िया बनी रहती है।
3 वजन कम करने में लाभदायक : कच्चे केले में बहुत अधिक मात्रा में डाइट्री फाइबर होते हैं। यह पच पाने में ज्यादा समय लेते है जिस कारण आपको अधिक लंबे समय तक भूख ही नहीं लग पाती है। इस कारण आपकी कुछ चटपटा खाने की क्रेविंग भी शांत हो जाती हैं जिससे आप ओवर ईटिंग से बच जाती हैं और इस कारण आपका वजन नियंत्रित रहता है।
4 विटामिन का स्रोत :कच्चे केले को विटामिन्स का पावर हाउस भी कहा जाता है। यह आपको पोटैशियम से अलग भी बहुत सारे विटामिन, मिनरल प्रदान करता है जिनमें से कुछ पौष्टिक तत्त्व विटामिन सी, बी 6 हैं। यह आपको आयरन और फोलेट जैसे विटामिन भी उपलब्ध करवाता है और इन सब विटामिन के अब्जॉर्ब होने में भी लाभदायक होता है।
5 डायबिटीज में भी है लाभदायक : अगर आपको डायबिटीज है तो कच्चा केला आपके लिए लाभदाई है और आप इसे अपनी डाइट में शामिल जरूर कर सकती हैं। इसमें शुगर लेवल भी कम होता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी 30 होता है। जिन चीजों का जीआई 50 से नीचे होता है वह आसानी से पच जाते हैं, आसानी से अब्सोर्ब हो जाते हैं और इससे आपकी ब्लड शुगर लेवल भी नियंत्रित रहती है।
6 पेट की समस्याओं से पाएं छुटकारा : अगर आप कब्ज और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम का सामना कर रही हैं तो कच्चा केला आपके लिए बहुत लाभदाई रह सकता है। आप इसे उबाल कर एक चुटकी नमक के साथ खा सकती हैं। इससे आपके पेट की सेहत काफी अच्छी बनी रहती है क्योंकि यह आपके पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।
तो यह थे हरे केले या कच्चे केले के कुछ स्वास्थ्य लाभ। जब भी आप इसे बाजार में खरीदने जाती हैं, तो केवल ताजे केले ही खरीदें।
सेहत / शौर्यपथ /दालें प्रोटीन से भरपूर होती हैं। वैसे तो हर दाल पोषक तत्वों से भरपूर होती है लेकिन फिर भी अगर आपको प्रोटीन की मात्रा से के साथ कुछ परेशानियों को जड़ से खत्म करना है, तो आप अपनी डाइट में मूंग दाल जरूर जोड़ें। किसी भी रूप में मूंग दाल के सेवन के कई फायदे हैं।
दाल के पोषक तत्त्व
-दालों में सबसे पौष्टिक दाल, मूंग की होती है, इसमें विटामिन ए, बी, सी और ई की भरपूर मात्रा होती है। साथ ही पोटेशियम, आयरन, कैल्शियम की मात्रा भी मूंग में बहुत होती है। इसके सेवन से शरीर में कैलोरी भी बहुत नहीं बढ़ती है। अगर अंकुरित मूंग दाल खाएं तो शरीर में कुल 30 कैलोरी और 1 ग्राम फैट ही पहुंचता है।
-अंकुरित मूंग दाल में मैग्नीशियम, कॉपर, फोलेट, राइबोफ्लेविन, विटामिन, विटामिन सी, फाइबर, पोटेशियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन, विटामिन बी -6, नियासिन, थायमिन और प्रोटीन होता है।
-मूंग की दाल के स्प्राउट में ग्लूकोज लेवल बहुत कम होता है इस वजह से मधुमेह रोगी इसे खा सकते हैं।
-मूंग की दाल में ऐसे गुण होते हैं, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देते हैं और उसे बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं। इसमें एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफलामेट्री गुण होते हैं, जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाते हैं।
-मूंग की दाल के स्प्राउट में शरीर के टॉक्सिक को निकालने के गुण होते हैं। इसके सेवन से शरीर में विषाक्त तत्वों में कमी आती है।
ऐसे बनाएं हेल्दी मूंग दाल का चीला
रात को मूंग दाल को एक पैन में पानी डालकर रख दें। इसके बाद सुबह इसे छान कर ग्राइंडर में पीस लें। इसके बाद इसमें नमक डालकर अच्छी तरह से मिला लें। अब तवा को गर्म करें। गर्म हो जाने में थोड़ा सा तेल डालकर मूंग दाल के पेस्ट को डालकर अच्छी तरह से फैला लें। इसके बाद इसमें सभी सब्जियां और पनीर डाल दें। इसके बाद इसमें थोड़ा सा घी डालकर दूसरी तरफ भी सेंक लें। इसके बाद इसे प्लेट में निकाल लें। आपका मूंग दाल का चीला बनकर तैयार हैं। इसे हरी या लाल चटनी के साथ गर्मागर्म सर्व करें।
खाना खजाना / शौर्यपथ /कड़वा करेला सभी को पसंद नहीं होता है, लेकिन यह हरी सब्जियों के बीच आकर्षित करने वाला होता है। यह स्वाद में भले ही कड़वा लगता हो, लेकिन इससे होने वाले सेहत के फायदे जरूर मीठे होते हैं। यह खून लकवा रोग, साफ करने, मधुमेह में बेहद असरकारक माना जाता है। आइए यहां जानते हैं करेले की 3 लाजवाब डिशेज और 6 स्वास्थ्य को होने वाले फायदे के बारे में-
1. मजेदार क्रंची करेले
सामग्री : 2 कप पतले गोल स्लाइसेस में कटे हुए करेले, 1 कप पतली लंबी कटी प्याज, 2 चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 2 चम्मच जीरा पाउडर, 1 चम्मच अमचूर पाउडर, 1 चम्मच सौंफ दरदरी पिसी हुई, तेल तलने के लिए, नमक व पिसी चीनी स्वादानुसार।
विधि : सबसे पहले करेले के स्लाइसेस 1 चम्मच नमक में मिलाकर 10-15 मिनट तक भिगोए रखें। फिर दोनों हाथों से दबाकर उसका पानी निकाल लें। तेल गरम करके उसमें प्याज लाल कुरकुरी होने तक तल लें। फिर करेले के स्लाइसेस भी कुरकुरे होने तक तल लें। तले हुए प्याज और करेले के गरम स्लाइसेस पर लाल मिर्च, जीरा और सौंफ पाउडर, अमचूर, नमक और पिसी चीनी डालकर अच्छी तरह से मिला दें। अब तैयार क्रंची करेले के ऊपर हरा धनिया बुरकाएं और खाने में स्वादिष्ट क्रंची करेले का आनंद उठाएं।
2. लाजवाब भरवां करेले
सामग्री : 200 ग्राम करेले, 100 ग्राम बेसन, 100 ग्राम प्याज, चुटकीभर हींग, जीरा, लाल मिर्च, सूखा हरा धनिया, हल्दी, नमक, चीनी, नींबू या सत, हरी मिर्च, तेल आवश्यकतानुसार।
विधि : करेले को धोकर ऊपर के छिलके साफ बर्तन में निकालें। एक भाग में चाकू से चीरा लगाकर बीज इत्यादि निकाल कर छिलके के साथ रखें तथा प्याज के टुकड़े को पीसकर एक ओर रख लें। करेले के अंदर के भाग में नमक भरकर 15 मिनट तक रखें व उन्हें धो लें।
अब मसाला तैयार करें। फ्रायपैन में 100 ग्राम तेल डालकर मसाला भून लें। बाद में एक कटोरी में पिसी लाल मिर्च, नमक, पिसा धनिया, चीनी, नींबू, हल्दी को मिला लें तथा भूने हुए मसाले में डाल दें एवं बेसन डाल दें तथा भून लें। करेले के छिलके व बीज इत्यादि इसमें डालकर भूनकर प्लेट में ठंडा कर लें।
अब करेले में मसाले भरें और सफेद धागा लपेट दें ताकि मसाला बाहर न निकले एवं पेन में तेल रखकर गरम करके उसमें भरे हुए करेले डालें तथा थोड़ी देर बाद उसे ढँक कर पका लें। ठंडा होने पर बँधा धागा अलग कर करेलों को हरे धनिए से सजाएँ व सर्व करें।
3. मूंगफली के करेले
सामग्री : 250 ग्राम करेले, आधा कटोरी दाने भुने और पिसे हुए, 1 चम्मच सौंफ, चुटकीभर हींग, 1 चम्मच लाल मिर्च पावडर, पाव चम्मच हल्दी, पाव चम्मच गरम मसाला, चुटकीभर साइट्रिक एसिड, नमक स्वादानुसार, तेल।
विधि : सबसे पहले ताजे करेले लेकर, छीलकर उसमें बीच में चीरा लगाकर उसमें नमक भर दें। अब एक कड़ाही में करेले डूब जाएं इतना पानी लेकर नमक लगे करेले उबाल लें। करेले अच्छी तरह उबल जाने पर चालनी में छान लें और ठंडे होने पर हाथ से अच्छी तरह निचोड़ लें ताकि उसका बचा अतिरिक्त पानी भी निकल जाए।
अब एक प्लेट में उपरोक्तानुसार सारी मसाला सामग्री डालकर मिक्स कर लें। अब करेले में तैयार मिश्रण भरकर उनको छोटे-छोटे पीसेस में काट लें। फिर एक कड़ाही में तेल गर्म करके राई-जीरे और सौंफ का छौंक लगाएं और मसाला भरे हुए करेले कड़ाही में डाल दें। पांच-सात मिनट तक उलट-पुलट करने के बाद बचा मसाला डालकर हिलाएं। 5 मिनट बाद आंच बंद कर दें। तैयार मूंगफली से बने टेस्टी करेले खुद भी खाएं औरों को भी खिलाएं।
जानिए करेले से होने वाले 6 सेहत फायदे
1 पेट में गैस बनने और अपच होने पर करेले के रस का सेवन करना अच्छा होता है, जिससे लंबे समय के लिए यह बीमारी दूर हो जाती है।
2 करेले का जूस पीने से लीवर मजबूत होता है और लीवर की सभी समस्याएं खत्म हो जाती है। प्रतिदिन इसके सेवन से एक सप्ताह में परिणाम प्राप्त होने लगते हैं। इससे पीलिया में भी लाभ मिलता है।
3 करेले में फास्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह कफ, कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। इसके सेवन से भोजन का पाचन ठीक तरह से होता है, और भूख भी खुलकर लगती है।
4 अस्थमा की शिकायत होने पर करेला बेहद फायदेमंद होता है। दमा रोग में करेले की बगैर मसाले की सब्जी खाने से लाभ मिलता है।
5 करेले की पत्तियों या फल को पानी में उबालकर इसका सेवन करने से, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, और किसी भी प्रकार का संक्रमण हो, ठीक हो जाता है।
6 उल्टी-दस्त या हैजा हो जाने पर करेले के रस में काला नमक मिलाकर पीने से तुरंत आराम मिलता है। जलोदर की समस्या होने पर भी दो चम्मच करेले का रस पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /महिलाएं हर खास त्योहार पर व्रत रखने के साथ ही हाथों में अपने पिया के नाम की मेहंदी बनाती है। कहते है कि मेहंदी का रंग जितना गहरा हाथों पर चढ़ता है, उतनी ही गहरा पति का प्रेम आपके लिए होता है। तो चलिए, क्यों न हम यह जान ले कि मेहंदी को हाथों में गहरा कैसे रचाया जा सकता है?
आइए, जानते हैं गहरी मेहंदी रचाने के 10 टिप्स-
1. मेहंदी लगाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से साफ करें और नीलगिरी या मेहंदी का तेल जरूर लगाएं। यह तेल बाजार में आसानी से उपलब्ध होता है।
2. मेंहदी को आप जितना अधिक समय हाथों में लगाए रख सकते हैं लगाएं, कम से कम 5 घंटे तक मेहंदी उसी तरह लगी रहने दें। उसे निकालें नहीं।
3. मेहंदी जब हल्की-हल्की सूख जाए, तो उसे पर नींबू और शक्कर का मिश्रण लगाएं, ताकि वह सूखने के बाद निकले नहीं। इस मिश्रण का प्रयोग मेहंदी को अपने स्थान पर चिपकाए रखने के लिए होता है।
4. जब भी मेहंदी को अपने हाथ से निकालें, हाथों पर पानी न लगनें दें, अन्यथा मेहंदी का रंग गहरा होने की संभावना कम हो जाएगी।
5. मेहंदी का रंग हल्का होने पर आप इसपर बाम, आयोडेक्स, विक्स या सरसों का तेल लगा लें। यह सभी चीजें हथेली को गर्माहट देती हैं, जिससे मेहंदी का रंग धीरे-धीरे गहरा हो जाता है।
6. आप अगर चाहें तो मेहंदी वाले हाथों पर लौंग का धुंआ भी ले सकते हैं। शादियों में यह तरीका मेहंदी का गहरा करने के लिए अपनाया जाता है। इसके अलावा लोग मेहंदी पर अचार का तेल भी लगाते हैं।
7. मेहंदी का रंग गहरा करने के लिए एक पारंपरिक और व्यवसायिक तरीका है, चूना। जी हां, बगैर पानी लगाए मेहंदी वाली हथेलियों पर चूना रगड़ने से भी मेहंदी का रंग गहरा होता है।
8. मेहंदी का रंग गाढ़ा करने के लिए एक बहुत अच्छा तरीका है, कि जब आप मेहंदी लगवाते हैं उसके बाद उसे हल्का सूखने दें और फिर किसी कंबल या रजाई से मेहंदी को ढंक दें। अगर रात के समय मेहंदी लग रही है, तो सबसे अच्छा तरीका है कि रजाई ओढ़कर सो जाएं। इससे गर्माहट मिलेगी और मेहंदी का रंग गहरा होगा।
9. अगर आप चाहते हैं कि मेहंदी अच्छी तरह से रचे, तो उसे सुखाने की जल्दी कभी न करें। जल्दी सूखने पर मेहंदी जल्दी निकलने भी लगेगी, और रंग भी नहीं चढ़ सकेगा। इसलिए उसे प्राकृतिक तरीके से सूखने दें।
10. किसी भी कार्यक्रम या त्योहार पर कार्यक्रम के लिए मेहंदी लगाते समय ध्यान रखें कि कार्यक्रम से एक या दो दिन पहले ही मेहंदी लगाएं, ताकि उसका रंग सही समय पर गहरा हो जाए।
आस्था / शौर्यपथ / सावन मास की अमावस्या और पूर्णिमा तिथि का बहुत महत्व होता है। श्रावण अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहते हैं। श्रावण अमावस्या 8 अगस्त 2021 रविवार के दिन है। इस दिन व्यातीपात और वरियान योग साथ में पुष्य नक्षत्र रहेगा। आओ श्रावण अमावस्या के 10 सरल उपाय।
1. पितृदोष से मुक्ति का उपाय : इस दिन यदि पितृदोष से मुक्त होना है तो पितरों के निमित्त नदी के तट पर तर्पण आदि कर्म करें। इस दिन पितृसूक्त पाठ, गीता पाठ, गरुड़ पुराण, गजेंद्र मोक्ष पाठ, रुचि कृत पितृ स्तोत्र, पितृ गायत्री पाठ, पितृ कवच का पवित्र पाठ या पितृ देव चालीसा और आरती करें।
2. धन समृद्धि हेतु मछलियों को दाना डालें : इस दिन किसी नदी या तालाब में जाकर मछली को आटे की गोलियां खिलाने से धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
3. आकस्मिक संकट से बचने के लिए : इस दिन घर के आसपास चींटियों को सूखे आटे में चीनी मिलाकर खिलाने से संभी तरह के संकट दूर होते हैं।
4. पौधा रोपण करना शुभ : श्रावणी अमावस्या के दिन पौधा रोपड़ का बहुत महत्व होता है। इस दिन देववृक्ष पीपल, बरगद, केला, नींबू, तुलसी आदि का वृक्षारोपण करना शुभ माना जाता है।
5. बाधाओं से मुक्ति हेतु हनुमान पूजा : इस दिन सभी तरह की अला बला या उपरी बाधाओं से मुक्ति हेतु हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमानजी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।
6. दीपदान करें : इस दिन आटे के दीपक जलाकर नदी में प्रवाहित करने से पितृदेव और माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है।
7. शनि दोष से मुक्ति हेतु : इस दिन शनिदेवजी के मंदिर में विधि अनुसार दीपक लगाने से वे प्रसन्न होते हैं और शनि पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
8. सुख समृद्धि हेतु : इस अमावस्या की रात्रि में पूजा करते समय पूजा की थाली में स्वास्तिक या ॐ बनाकर और उसपर महालक्ष्मी यंत्र रखें फिर विधिवत पूजा अर्चना करें, ऐसा करने से घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होगा और आपको सुख समृद्धि की प्राप्ति होगी।
9. गीता पाठ करें : इस अमावस्या के दिन श्रीविष्णु के मंत्रों का जाप और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें। इससे जीवन की सभी तरह की समस्याओं के अंत हो जाएगा।
10. मनोकामना पूर्ति हेतु : भगवान शिव को सफेद आंकड़े के फूल, बिल्व पत्र और भांग, धतूरा चढ़ाएं। इस दिन भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से करना चाहिए। शिवजी के आशीर्वाद से सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होगी।
धर्म संसार / शौर्यपथ /श्रावण मास में खरीदनी चाहिए ये 10 शुभ चीजेंआइए जानें कौन सी 10 सामग्री श्रावण मास में खरीदनी चाहिए।
1 . त्रिशूल
त्रिशूल शिव के हाथों में हमेशा होता है। यह 3 देव और 3 लोक का प्रतीक है। अत: सावन मास में चांदी का त्रिशूल लाने से वर्ष भर आपदाओं से रक्षा होती है।
2. रुद्राक्ष :
सुख, सौभाग्य और समृद्धि के लिए तथा मन की पवित्रता के लिए असली रुद्राक्ष को घर में लाएं या फिर घर में रखे रुद्राक्ष को चांदी में गढ़वा कर पहनें। यह आपके जीवन के लिए अत्यंत शुभ और समृद्धिदायक होगा।
3. डमरू :
यह शिव का पवित्र वाद्य यंत्र है। इसकी पवित्र ध्वनि से आसपास से समस्त नकारात्मक शक्तियां दूर भागती है। आरोग्य के लिए भी डमरू की ध्वनि असरकारक मानी गई है। सावन मास में लाकर रखें और अंतिम दिन किसी बच्चे को यह डमरू उपहार में दें।
4. चांदी के नंदी :
नंदी शिव जी का गण भी है और वाहन भी। सावन मास में चांदी के नंदी को घर में लाकर माह भर पूजा करें तो यह आर्थिक संकटों से मुक्ति दिलाता है।
5. जल पात्र :
जल शिव जी को अत्यंत प्रिय है। आप चाहे तो सावन मास में गंगाजल लाकर घर में रखें और माह भर पूजन करें लेकिन अगर यह संभव नहीं है तो आप चांदी, तांबे या पीतल का पात्र लाकर उसमें शुद्ध स्वच्छ निर्मल जल भरें और प्रतिदिन उससे शिवजी को जल अर्पित कर पुन: भरकर रख दें। यह प्रयोग भी धन के आगमन के लिए सबसे अधिक प्रभावी है।
6. सर्प :
भगवान शिव के गले में सर्पराज हर घड़ी रहते हैं। अत: सावन मास में चांदी के नाग-नागिन के जोड़े को घर में लाकर रखें, हर दिन पूजन करें और सावन के अंतिम दिन उसे किसी शिव मंदिर में ले जाकर रख दें। यह प्रयोग आपको पितृ दोष और काल सर्प योग में राहत देता है।
7. चांदी की डिब्बी में भस्म :
किसी भी शिव मंदिर से भस्म लाकर उसे नई चांदी की डिब्बी में लाकर रखें, माह भर उसे पूजन में शामिल करें और बाद में तिजोरी में रख दें। बरकत के लिए यह अचूक प्रयोग है।
8. चांदी का कड़ा :
भगवान शिव पैरों में चांदी का कड़ा धारण करते हैं। सावन मास में यह लाकर रखने से तीर्थ यात्रा और विदेश यात्रा के शुभ योग बनते हैं।
9. चांदी का चंद्र या मोती :
भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजित हैं। अत: सावन मास में चांदी के चंद्र देव लाकर पूजन में रखें अगर संभव हो तो सच्चा मोती भी ला सकते हैं। मोती चंद्र ग्रह की शांति करता है। इसे करने से चंद्र ग्रह की शांति तो होती ही है साथ ही मन भी मजबूत होता है। चाहे तो चंद्र और मोती का साथ में पेंडेट लाकर धारण कर सकते हैं।
10. चांदी के बिल्व पत्र :
हम पूरे सावन माह में शिव जी को बिल्व पत्र अर्पित करते हैं। लेकिन कई बार शुद्ध अखंडित बिल्वपत्र मिलना संभव नहीं होता। ऐसे में चांदी का महीन बिल्वपत्र लाकर प्रतिदिन शिव जी को अर्पित करने से करोड़ों पापों का नाश होता है और घर में शुभ कार्यों का संयोग बनता है।
खाना खजाना / शौर्यपथ /आगामी दिनों में हरियाली और हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाएगा। आप इस खास त्योहार के दिन घर पर ही कुछ खास पकवान तैयार करके त्योहार की मिठास को बढ़ा सकती हैं और अपने परिवार वालों का दिल जीत सकती हैं। अगर आप भी तीज के खास मौके पर कुछ खास पकवान बनाना चाहती है तो आपके लिए यहां प्रस्तुत हैं 3 खास मिठाइयां बनाने की एकदम आसान विधियां...
1. मालपुआ
सामग्री :1 कप मैदा छना हुआ, 1 कप दूध, 1 चम्मच सौंफ, डेढ़ कप शक्कर, 1 चम्मच नीबू रस, घी (तलने और मोयन के लिए), डेकोरेशन के लिए मेवे की कतरन, 1 चम्मच इलायची पावडर।
विधि :पहले मैदे में दो बड़े चम्मच घी का मोयन डालें, तत्पश्चात दूध और सौंफ मिलाएं और घोल तैयार कर लें। एक मोटे पेंदे के अलग बर्तन में शक्कर, नीबू रस और तीन-चौथाई कप पानी डालकर चाशनी तैयार कर लें।
एक कड़ाही में घी गर्म करके एक बड़े चम्मच से घोल डालते जाएं और करारा फ्राय होने तक तल लें। फिर चाशनी में डुबोएं और एक अलग बर्तन में रखते जाएं। इस तरह सभी मालपुए तैयार कर लें और ऊपर से मेवे की कतरन और इलायची बुरका कर भोग लगाएं।
2. घेवर
सामग्री :डेढ़ कटोरी मैदा, 2 कप पानी, डेढ़ बड़ा चम्मच जमा गाढ़ा घी, डेढ़ कप बर्फ का ठंडा पानी, घी, सवा 2 कटोरी शकर, गुलाब पत्ती, चुटकी भर पीला रंग, कटे हुए पिस्ता व बादाम, 1 मटका रखने वाली रिंग।
विधि : सबसे पहले जमा हुआ गाढ़ा घी लेकर एक बर्तन में बर्फ के ठंडे पानी के साथ खूब फेंटिए। करीबन 5-10 मिनट बाद घी में से पानी बाहर निकल जाता है। अब पानी निथारकर इसमें थोड़ा-थोड़ा कर मैदा मिलाकर फेंटिए।
सबसे पहले जमा हुआ गाढ़ा घी लेकर एक बर्तन में बर्फ के ठंडे पानी के साथ खूब फेंटिए। करीबन 5-10 मिनट बाद घी में से पानी बाहर निकल जाता है। अब पानी निथारकर इसमें थोड़ा-थोड़ा कर मैदा मिलाकर फेंटिए।
जब भजिए से भी पतला घोल तैयार हो जाए, तब छोटी कड़ाही में मटका रखने वाली रिंग रखें। इसमें घी डालकर गर्म करें। जब घी अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब रिंग के बीच में धीरे-धीरे धार-सी बनाते हुए मैदे का घोल छोड़ें। रिंग करीब आधा डूबा होना चाहिए। हल्का बादामी होने लगे, तब सलाई की सहायता से घेवर उठा लीजिए। घेवर पर 3-4 बार डेढ़ तार की गर्म चाशनी डालें और तैयार घेवर को मेवे से सजाएं।
लजीज गुझिया
सामग्री :
250 ग्राम खोया, 250 ग्राम मैदा, 1/2 कटोरी घी (मोयन के लिए), 200 ग्राम पिसी चीनी, आधा कटोरी मेवा कतरन, 1/2 छोटा चम्मच इलायची पावडर, पाव कटोरी खोबरा बूरा, थोड़ी-सी चारोली एवं किशमिश, केसर के कुछ लच्छे, तलने के लिए घी, थोड़ा-सा दूध अथवा पानी एक कटोरी में अलग से।
विधि :एक कड़ाही में धीमी आंच पर मावा गुलाबी होने तक भून लें। जब वह भुन जाए तो उसे ठंडा करके उसमें पिसी चीनी, मेवे की कतरन, खोबरा पूरा, इलायची पावडर, चारोली, किशमिश और केसर डालकर अच्छी तरह मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें।
अब मैदे में मोयन वाला घी डाल कर गूंथ लें। थोड़ी देर कपड़े से ढंककर रख दें। अब आटे की छोटी-छोटी लोई पूरी की तरह बेलने के बाद उसमें गुझिया का मिश्रण (एक से डेढ़ छोटा चम्मच) रखकर (हाथ से हल्का दबा दें) और चारों तरफ पानी या दूध की ऊंगली घूमाकर उसे बंद कर दें। गुझियों को गोठते समय ध्यान रखें कि वे खुलें नहीं। इन्हें थोड़ी देर कपड़े पर फैला दें। अब कड़ाही में घी गरम कर के गुझियों को गुलाबी होने तक तल लें। तैयार लजीज गुझिया को पेश करें।
ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ /पानी में अधिक देर तक हाथ रखने से स्किन गल जाती है। लेकिन जब मौसम बदलता है तब हाथों और पैरों की स्किन निकलने लगती है। इससे हाथ और पैर खुरदुरे हो जाते हैं। काम के दौरान बार-बार क्रीम लगाना पड़ता है। स्किन इस कदर निकलती है कि कभी - कभी जलन भी करने लगती है। ऐसे में आराम पाने के लिए 3 आसान घरेलू उपाय है जिससे आपको राहत मिल सकती है। तो आइए जानते हैं...
1. दूध - इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड स्किन के लिए लाभदायक है। इसे लगाने से त्वचा लंबे वक्त तक मुलायम बनी रहती है। जिससे बार-बार स्किन नहीं निकलती है। दूध के साथ
में थोड़ा सा गुलाबजल भी मिक्स करें। मिक्स करने के बाद अपने हाथों पर लगा लें और 5 मिनट बाद हाथों को धो लें। ऐसा दिन में 2 या 3 बार करें। आपको आराम मिलेगा।
2. केला - केले में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट स्किन को बेहतरीन तरह से मॉइश्चराइज करते हैं। स्किन निकलने पर आप केले का पैक भी लगा सकते हैं। सबसे पहले आधे केले को मैश कर लें। इसके बाद उसमें दो चम्म्च दूध मिला लें। दोनों को अच्छे से मिक्स कर लें। और हाथों पर 5 मिनट के लिए लगा लें। इसके बाद साफ पानी से धो लें। दिन में दो बार ऐसा करें जल्द आराम मिलेगा ।
3.एलोवेरा जेल - यह गूणों से भरपूर होता है। इसका कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मौजूद तत्व स्किन को हाइड्रेट रखते हैं। ऐसे में एलोवेरा जेल को फ्रिज में आइस ट्रे में जमा दें। इसके बाद एक - एक क्यूब को अपने हाथों पर घिसे। इससे जल्द आराम मिलेगा।
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /ग्लोइंग स्किन के लिए कई सारे जतन करते हैं। निखार नहीं आने पर महंगे से महंगे प्रोडक्ट का इस्तेमाल भी करते हैं। लेकिन चेहरे पर निखार नहीं आता है। वही बेजान और रूखी त्वचा। लेकिन हमेशा गलती किसी प्रोडक्ट की नहीं होती है। कई बार छोटी - छोटी गलतियां भारी पड़ जाती है। जिस वजह से किसी भी तरह का उपाय स्किन पर असर नहीं करता है। इसके बाद परेशान हो कर केयर करना छोड़ देते हैं। लेकिन आपने कभी गौर किया है आप कहां गलती करते हैं इसलिए किसी भी तरह का उपचार स्किन पर असर नहीं करता है। आइए जानते हैं किस तरह अपनी स्किन की चमक को खोने से रोके।
- अगर आप घर पर कोई फेस पैक लगाते हैं तो उस दौरान 20 मिनट आंख बंद करके सो जाएं। ना ही कुछ खाएं और ना ही कुछ पिएं। अक्सर महिलाएं फेस पैक लगाने के बाद कुछ ना कुछ खाती रहती है या किसी से फोन पर बात करने लगेगी। रिलेक्स होकर फेस पैक का आनंद लें।
-फेस पैक लगाने के बाद चेहरे को हिलाना नहीं। इससे स्किन में खिंचाव होता है। और चेहरे पर सल पड़ने लगते हैं।
- आपने कोई सा भी फेस पैक लगाया हो उसे 20 मिनट से अधिक नहीं रखें। अगर आपको यह लगता है कि उसे पूरा सूख जाने दें। ऐसा नहीं करें। अगर वह हल्का सा भी नर्म रहता है तो उसे गुनगुने या ठंडे पानी से हल्के हाथों से धोएं।
- अक्सर लोग अपने चेहरे को जोर-जोर से घिसते हैं। उन्हें लगता है कि इससे चेहरे पर जमा मेल निकल जाएगा लेकिन यह गलत तरीका है। दरअसल, चेहरे को जोर से नहीं रगड़ते हुए हल्के-हल्के हाथों से रगड़ें। जोर से घिसने पर चेहरे का जरूरी तेल भी निकल जाता है। इस वजह से चेहरा पूरी तरह से रूखा हो जाता है। साथ ही यह गलती भी कर देते हैं कि चेहरे को गर्म पानी से धो लेते हैं। चेहरे को हमेशा गुनगुने या ठंडे पानी से ही धोएं। कभी चेहरे पर किसी प्रकार का साबुन नहीं लगाएं। चेहरे की त्वचा नाजुक होती है।
ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ /पैरों की सुंदरता भी जरूरी होती है। वहीं अगर शॉर्ट ड्रेस पहन रहे हैं तो आपके जांघों का भी सुंदर होना जरूरी है। सुंदर होने से तात्पर्य कई अलग-अलग कारणों से काली धाराएं बन जाती है। जो ड्रेस पहनने के बाद अलग ही झाई मारती है। जिस वजह से पूरा लुक खराब हो जाता है। लेकिन आप घबराए नहीं हर समस्या का समाधान होता है तो इसका भी है। जी हां, नानी मां के नुस्खे हमेशा काम आते हैं। तो आइए जानते हैं कैसे जाघों पर छा रही झाइयों को दूर करें। इससे पहले जानते हैं कालापन होने का कारण -
- हार्मोनल बदलाव के कारण जांघों का कालापन बढ़ता है।
- जब दोनों पैर ऊपर की ओर से टकराते हैं।
- धूप में अधिक घूमने से।
- टाइट जींस या कपड़े पहनने से पसीना आना।
- शेविंग करने से।
- डायबिटीज होने पर।
कैसे मिटाएं काली झाइयां -
एलोवेरा जेल - इसमें मौजूद तत्व आपकी त्वचा की टैनिंग को कम करने में मदद करती है। एलोवेरा जेल का गुदा अपनी प्रभावित जगह पर लगाएं। 20 मिनट के लिए लगा रहने दें।
इसके बाद गुनगुने पानी से धो लें। आप चाहे तो उसमें कुछ बूंदे बादाम तेल की मिला सकते हैं।
हल्दी - हल्दी एक औषधि है। खाने में स्वाद बढ़ाती है तो, रोगों का उपचार करती है साथ ही सुंदरता बढ़ाने में भी कारगर है। 1 चम्मच मलाई लें और उसमें 2 चुटकी हल्दी मिक्स कर लें।
इसके बाद दोनों को मिक्स करके प्रभावित स्थान पर लगा लें। 15 मिनट बाद रगड़ कर साफ करें। और गुनगुने पानी से धो लें।
नारियल तेल - प्राकृतिक नारियल तेल लें। उसमें कुछ बूंदे नींबू का रस मिला लें। इसके बाद जांघ के प्रभावित काले एरिया पर उसे लगाएं। 15 मिनट बाद हल्के हाथों से उसे साफ करें और सादे पानी से धो लें। सप्ताह में दो बार जरूर करें। जल्द आराम मिलेगा।
व्रत त्यौहार / शौर्यपथ / हरियाली तीज पर श्रृंगार का राज : शिव पुराण के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए 107 जन्मों तक कठिन तप किया, फिर भी उनकी मनोकामना पूर्ण नहीं हुई। वे अपने 108वें जन्म में इसी हरियाली तीज व्रत के प्रभाव से शिवजी को प्रसन्न करने में सफल रहीं। भगवान शिव ने माता पार्वती के व्रत से प्रसन्न होकर उनको अपनी अर्धांगिनी बनाया।
हरियाली तीज व्रत श्रावण के महीने में पड़ता हैं, जब चारों ओर प्रकृति की हरियाली छटा बिखरी रहती है। इस मौसम में बारिश की रिमझिम फुहारों से मौसम खुशनुमा हो जाता है और ऐसे ही समय में मनाया जाता है हरियाली तीज का यह पवित्र त्योहार। हरियाली तीज के दिन महिलाएं 16 श्रृंगार करती हैं और शाम को पूजा के दौरान माता पार्वती को 16 श्रृंगार की वस्तुएं तथा भगवान शिव को वस्त्र अर्पित करती हैं।
हरियाली तीज के दिन महिलाएं सुबह घर के काम और स्नान करने के बाद सोलह श्रृंगार करके निर्जला व्रत रखती हैं। इसके बाद मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा होती है। विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। इस खास त्योहार पर हरे वस्त्र, हरी चुनरी, हरा लहरिया, हरा श्रृंगार, मेहंदी, झूला झूलने का भी रिवाज है। हरियाली तीज को महिलाएं उत्साह व उमंग के साथ मनाती हैं। इस दिन 16 श्रृंगार महिलाएं करती हैं जिसमें खासतौर पर अपने श्रृंगार में हरे रंग को शामिल करती हैं।
जानें हरियाली तीज के हरे श्रृंगार-
मेहंदी- हरियाली तीज में मेहंदी का भी महत्वपूर्ण स्थान है। इस खास अवसर पर महिलाएं अपने हाथों में मेहंदी लगाती हैं। मेहंदी डिजाइन में आप अरेबिक डिजाइन, फ्लोरल मेहंदी डिजाइन, भरवां मेहंदी, सिंपल और सादगीभरी डिजाइन बना सकती हैं। इन्हें आप आसानी से घर पर ही आप बना सकती हैं।
हरी चूड़ियां- सावन माह में हरे रंग का बहुत महत्व होता है। सुहागिन स्त्रियां हरियाली तीज में हरे रंग की चूड़ियों को शामिल करती हैं, क्योंकि हरे रंग की चूड़ियां सुहागिन स्त्रियां पति की खुशहाली, तरक्की, दीर्घायु व सेहतमंद जिंदगी के लिए पहनती हैं।
हरे वस्त्र- सावन के महीने में प्रकृति बेहद खूबसूरत नजर आती है। हरियाली तीज में महिलाएं हरे रंग के वस्त्र धारण करती हैं। यह आंखों को भी राहत पहुंचाने वाला रंग है। आप साड़ी, सूट, लहंगा जैसे ट्रेडिशनल ड्रेस पहन सकती हैं।
झुमके- महिलाओं का 16 श्रृंगार झुमकों के बिना अधूरा-सा लगता है। हरियाली तीज में आप हरे रंग के झुमकों को अपने श्रृंगार में शामिल कर सकती हैं, जो आपकी खूबसूरती में चार चांद लगा देंगे। इसके लिए आप कुंदन बालियां, लटकने वाली एंटीक डिजाइनर बालियां, मीनाकारी झुमकी, कुंदन की मीनाकारी झुमकी को चुन सकती हैं। इसके अलावा विंग्स स्टाइल ईयररिंग, झुमके, घुंघरू वाली ईयररिंग्स भी महिलाएं ट्राए कर सकती हैं। पिकॉक डिजाइन में अंगूठी ईयररिंग्स और नेकलेस इन्हें आप लहंगे, साड़ी के साथ टीमअप करके पहन सकती हैं।
हरी बिंदी- हरियाली तीज में हरा श्रृंगार एक तरह से प्रकृति से नाता झलकाता है। हरी बिंदियों को महिलाएं अपने 16 श्रृंगार में शामिल करती हैं। साड़ी के अलावा भी बिंदी सूट और हर ट्रेडिशनल ड्रेस पर खूब जंचती है। यह आपके फीचर्स को भी शॉर्प दिखाती है। इसके लिए अपने फेस कट के अनुसार बिंदी का चयन करें। हार्ट शेप फेसकट की महिलाओं को छोटी बिंदी लगानी चाहिए, बड़ी बिंदी इनके चेहरे पर नहीं जंचती।
ओवल फेसकट वाली महिलाओं पर किसी भी तरह की बिंदी जंचती है तो आप हर डिजाइन की बिंदी लगा सकती हैं। राउंड फेसकट वाली महिलाओं को गोल बिंदी लगानी चाहिए। यह आपको परफेक्ट लुक देने में मदद करती है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
