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June 01, 2026
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आस्था /शौर्यपथ /श्रावण माह में जिसकी जैसी मनोकाना होती है वह वैसे शिवलिंग की पूजा करता है। आओ जानते हैं कि श्रावण माह में प्रमुख रूप से किस शिवलिंग की पूजा सबसे ज्यादा प्रभावकारी होती है।
शिवलिंग के प्रकार : प्रमुख रूप से शिवलिंग 2 प्रकार के होते हैं- पहला आकाशीय या उल्का शिवलिंग और दूसरा पारद शिवलिंग। पहला उल्कापिंड की तरह काला अंडाकार लिए हुए। ऐसे शिवलिंग को ही भारत में ज्योतिर्लिंग कहते हैं। दूसरा मानव द्वारा निर्मित पारे से बना शिवलिंग होता है। पारद विज्ञान प्राचीन वैदिक विज्ञान है। इसके अलावा पुराणों के अनुसार शिवलिंग के प्रमुख 6 प्रकार होते हैं- देवलिंग, असुरलिंग, अर्शलिंग, पुराणलिंग, मनुष्यलिंग और स्वयंभूलिंग।
श्रावण माह में व्यक्ति को स्वयंभू शिवलिंग, पुराणलिंग, मनुष्‍यलिंग या परद शिवलिंग की पूजा करना चाहिए। इससे भी सबसे ज्याद प्रभावकारी स्वयंभू शिवलिंग है।
1.देवलिंग:- जिस शिवलिंग को देवताओं या अन्य प्राणियों द्वारा स्थापित किया गया हो, उसे देवलिंग कहते हैं। वर्तमान समय में धरती पर मूल पारंपरिक रूप से यह देवताओं के लिए पूजित है।
2.आसुरलिंग:- असुरों द्वारा जिसकी पूजा की जाए वह असुर लिंग। रावण ने एक शिवलिंग स्थापित किया था, जो असुर लिंग था। देवताओं से द्वैष रखने वाले रावण की तरह शिव के असुर या दैत्य परम भक्त रहे हैं।
3.अर्शलिंग:- प्राचीन काल में अगस्त्य मुनि जैसे संतों द्वारा स्थापित इस तरह के लिंग की पूजा की जाती थी।
4.पुराणलिंग:- पौराणिक काल के व्यक्तियों द्वारा स्थापित शिवलिंग को पुराण शिवलिंग कहा गया है। इस शिवलिंग की पूजा पुराणिकों द्वारा की जाती है।
5.मनुष्यलिंग:- प्राचीनकाल या मध्यकाल में ऐतिहासिक महापुरुषों, अमीरों, राजा-महाराजाओं द्वारा स्थापित किए गए शिवलिंग को मनुष्य शिवलिंग कहा गया है।
6.स्वयंभूलिंग:- भगवान शिव किसी कारणवश स्वयं शिवलिंग के रूप में प्रकट होते हैं। इस तरह के शिवलिंग को स्वयंभू शिवलिंग कहते हैं। भारत में स्वयंभू शिवलिंग कई जगहों पर हैं। वरदान स्वरूप जहां शिव स्वयं प्रकट हुए थे।
7.पारद शिवलिंग:- पारद शिवलिंग अक्सर घर, ऑफिस, दूकान आदि जगहों रखा जाता है। इस शिवलिंग की पूजा अर्चना करने से जीवन में सुखशांति और सौभाग्य प्राप्त होता हैं।
8.मिश्री शिवलिंग:- यह शिवलिंग चीनी या मिश्री से बना होता हैं। कहते हैं कि इस की पूजा करने से रोगों का नाश होकर पीड़ा से मुक्ति मिलती हैं।
9.जौं और चावल से बने शिवलिंग:- पारिवारिक समृद्धि के लिए इसका पूजना होता हैं। जो दम्पति संतानसुख से वंचित हैं उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती हैं।
10.भस्म शिवलिंग:- यज्ञ की भस्म से बनाए गए इस शिवलिंग से सिद्धियों की होती है। इसकी पूजा अक्सर अघोरी सम्प्रदाय के लोग करते हैं।
11.गुड़ शिवलिंग:- गुड़ और अन्न से मिल कर बने इस शिवलिंग की पूजा करने से कृषि और अन्न उत्पादन में वृद्धि होती हैं।
12.फल-फूल के शिवलिंग:- फूल से बने शिवलिंग की पूजा करने से भूमि-भवन से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा मिलता हैं। वहीं, फल से बने शिवलिंग की पूजा करने से घर में अन्न-जल आदि में बरकत बनी रहती।
13.स्वर्ण-रजत से बने शिवलिंग:- सोने और चांदी के धातु से बने शिवलिंग से सुख-समृद्धि तथा धन वैभव की प्राप्ति होती हैं।
14.बिबर मिट्टी के शिवलिंग:- बिबर की मिटटी से बने शिवलिंग की पूजा करने से विषैले प्राणी जैसे सर्प-बिच्छू आदि के भय से मुक्ति मिलती हैं।
15.दही से बने शिवलिंग:- दही को कपड़े में बांध कर बनाया गया शिवलिंग सुख, समृद्धि और धन संपत्ति की प्राप्ति के लिए होता हैं।
16.लहसुनिया शिवलिंग:- लहसुनिया से बने शिवलिंग की पूजा से हमें हमारे शत्रु पर विजय प्राप्ति की समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
देश के प्रमुख शिवलिंग की करें पूजा :
सोमनाथ (गुजरात), मल्लिकार्जुन (आंध्रप्रदेश), महाकाल (मध्यप्रदेश), ममलेश्वर (मध्यप्रदेश), बैद्यनाथ (झारखंड), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), केदारनाथ (उत्तराखंड), विश्वनाथ (उत्तरप्रदेश), त्र्यम्बकेश्वर (महाराष्ट्र), नागेश्वर (गुजरात), रामेश्वरम् (तमिलनाडु), घृश्णेश्वर (महाराष्ट्र), अमरनाथ (जम्मू-कश्मीर), पशुपतिनाथ (नेपाल), कालेश्वर (तेलंगाना), श्रीकालाहस्ती (आंध्रप्रदेश), एकम्बरेश्वर (तमिलनाडु), अरुणाचल (तमिलनाडु), तिलई नटराज मंदिर (तमिलनाडु), लिंगराज (ओडिशा), मुरुदेश्वर शिव मंदिर (कर्नाटक), शोर मंदिर, महाबलीपुरम् (तमिलनाडु), कैलाश मंदिर एलोरा (महाराष्ट्र), कुम्भेश्वर मंदिर (तमिलनाडु), बादामी मंदिर (कर्नाटक) आदि सैकड़ों प्राचीन और चमत्कारिक मंदिर हैं।

दुर्ग । शौर्य पथ । 

कुछ रोचक जानकारी क्या आपको पता है ?

 

1. ? चीनी को जब चोट पर लगाया जाता है, दर्द तुरंत कम हो जाता है...

2. ? जरूरत से ज्यादा टेंशन आपके दिमाग को कुछ समय के लिए बंद कर सकती है...

3.? 92% लोग सिर्फ हस देते हैं जब उन्हे सामने वाले की बात समझ नही आती...

4.? बतक अपने आधे दिमाग को सुला सकती हैं जबकि उनका आधा दिमाग जगा रहता....

5.? कोई भी अपने आप को सांस रोककर नही मार सकता...

6.? स्टडी के अनुसार : होशियार लोग ज्यादा तर अपने आप से बातें करते हैं...

7.? सुबह एक कप चाय की बजाए एक गिलास ठंडा पानी आपकी नींद जल्दी खोल देता है...

8.? जुराब पहन कर सोने वाले लोग रात को बहुत कम बार जागते हैं या बिल्कुल नही जागते...

9.? फेसबुक बनाने वाले मार्क जुकरबर्ग के पास कोई कालेज डिगरी नही है...

10.? आपका दिमाग एक भी चेहरा अपने आप नही बना सकता आप जो भी चेहरे सपनों में देखते हैं वो जिदंगी में कभी ना कभी आपके द्वारा देखे जा चुके होते हैं...

11.? अगर कोई आप की तरफ घूर रहा हो तो आप को खुद एहसास हो जाता है चाहे आप नींद में ही क्यों ना हो...

12.? दुनिया में सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला पासवर्ड 123456 है.....

13.? 85% लोग सोने से पहले वो सब सोचते हैं जो वो अपनी जिंदगी में करना चाहते हैं...

14.? खुश रहने वालों की बजाए परेशान रहने वाले लोग ज्यादा पैसे खर्च करते हैं...

15.? माँ अपने बच्चे के भार का तकरीबन सही अदांजा लगा सकती है जबकि बाप उसकी लम्बाई का...

16.? पढना और सपने लेना हमारे दिमाग के अलग-अलग भागों की क्रिया है इसी लिए हम सपने में पढ नही पाते...

17.? अगर एक चींटी का आकार एक आदमी के बराबर हो तो वो कार से दुगुनी तेजी से दौडेगी...

18.? आप सोचना बंद नही कर सकते.....

19.? चींटीयाँ कभी नही सोती...

20.? हाथी ही एक एसा जानवर है जो कूद नही सकता...

21.? जीभ हमारे शरीर की सबसे मजबूत मासपेशी है...

22.? नील आर्मस्ट्रांग ने चन्द्रमा पर अपना बायां पाँव पहलेरखा था उस समय उसका दिल 1 मिनट में 156 बार धडक रहा था...

23.? पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल के कारण पर्वतों का 15,000मीटर से ऊँचा होना संभव नही है...

23.? शहद हजारों सालों तक खराब नही होता..

24.? समुंद्री केकडे का दिल उसके सिर में होता है...

25.? कुछ कीडे भोजन ना मिलने पर खुद को ही खा जाते है....

26.? छींकते वक्त दिल की धडकन 1 मिली सेकेंड के लिए रूक जाती है...

27.? लगातार 11 दिन से अधिक जागना असंभव है...

28.? हमारे शरीर में इतना लोहा होता है कि उससे 1 इंच लंबी कील बनाई जा सकती है.....

29.? बिल गेट्स 1 सेकेंड में करीब 12,000 रूपए कमाते हैं...

30.? आप को कभी भी ये याद नही रहेगा कि आपका सपना कहां से शुरू हुआ था...

31.? हर सेकेंड 100 बार आसमानी बिजली धरती पर गिरती है...

32.? कंगारू उल्टा नही चल सकते...

33.? इंटरनेट पर 80% ट्रैफिक सर्च इंजन से आती है...

34.? एक गिलहरी की उमर,, 9 साल होती है...

35.? हमारे हर रोज 200 बाल झडते हैं...

36.? हमारा बांया पांव हमारे दांये पांव से बडा होता हैं...

37.? गिलहरी का एक दांत हमेशा बढता रहता है....

38.? दुनिया के 100 सबसे अमीर आदमी एक साल में इतना कमा लेते हैं जिससे दुनिया 

की गरीबी 4 बार खत्म की जा सकती है...

39.? एक शुतुरमुर्ग की आँखे उसके दिमाग से बडी होती है...

40.? चमगादड गुफा से निकलकर हमेशा बांई तरफ मुडती है...

41.? ऊँट के दूध की दही नही बन सकता...

42.? एक काॅकरोच सिर कटने के बाद भी कई दिन तक जिवित रह सकता है...

43.? कोका कोला का असली रंग हरा था...

44.? लाइटर का अविष्कार माचिस से पहले हुआ था...

45.? रूपए कागज से नहीं बल्कि कपास से बनते है...

46.? स्त्रियों की कमीज के बटन बाईं तरफ जबकि पुरूषों की कमीजके बटन दाईं तरफ होते हैं...

47.? मनुष्य के दिमाग में 80% पानी होता है.

48.? मनुष्य का खून 21 दिन तक स्टोर किया जा सकता है...

49.? फिंगर प्रिंट की तरह मनुष्य की जीभ के निशान भी अलग-अलग होते हैं...

 

शौर्य की दुनिया । भारत में पहली बार आधुनिक साबुन अंग्रेज 1890 के दशक में लेकर आए थे. पहले वो ब्रिटेन से आयात हुआ फिर यहां उसकी फैक्ट्री खुली. लेकिन उससे पहले भारतीय अपने कपड़े कैसे धोते थे. कैसे राजा-रानियां के महंगे कपड़ों को साफ करके चमका दिया जाता था...इसके अलावा कपड़ों को धोने और नहाने में खुद को साफ करने के अपने तरीके थे, क्या थे वोक्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि जब साबुन और सर्फ नहीं रहे होंगे तो कपड़े कैसे धुलते रहे होंगे. राजा-रानियों के महंगे कपड़े कैसे साफ होकर चमकते रहे होंगे. कैसे आम साधारण व्यक्ति भी अपने कपड़े धोता रहा होगा.

भारत में आधुनिक साबुन की शुरुआत 130 साल से पहले पहले ब्रिटिश शासन में हुई थी. लीबर ब्रदर्स इंग्‍लैंड ने भारत में पहली बार आधुनिक साबुन बाजार में उतारने का काम किया. पहले तो ये ब्रिटेन से साबुन को भारत में आयात करती थी और उनकी मार्केटिंग करती थी. जब भारत में लोग साबुन का इस्तेमाल करने लगे तो फिर यहां पहली बार उसकी फैक्ट्री लगाई गई.

ये फैक्ट्री नहाने और कपड़े साफ करने दोनों तरह के साबुन बनाती थी. नॉर्थ वेस्‍ट सोप कंपनी पहली ऐसी कंपनी थी जिसने 1897 में मेरठ में देश का पहला साबुन का कारखाना लगाया. ये कारोबार खूब फला फूला. उसके बाद जमशेदजी टाटा इस कारोबार में पहली भारतीय कंपनी के तौर पर कूदे.लेकिन सवाल यही है कि जब भारत में साबुन का इस्तेमाल नहीं होता था. सोड़े और तेल के इस्तेमाल से साबुन बनाने की कला नहीं मालूम थी तो कैसे कपड़ों को धोकर चकमक किया जाता था.

रीठा का खूब इस्तेमाल होता था भारत वनस्पति और खनिज से हमेशा संपन्न रहा है. यहां एक पेड़ होता है जिसे रीठा कहा जाता है. तब कपड़ों को साफ करने के लिए रीठा का खूब इस्तेमाल होता था. राजाओं के महलों में रीठा के पेड़ अथवा रीठा के उद्यान लगाए जाते थे. महंगे रेशमी वस्त्रों को कीटाणु मुक्त और साफ करने के लिए रीठा आज भी सबसे बेहतरीन ऑर्गेनिक प्रोडक्ट है.अब रीठा का इस्तेमाल बालों को धोने में खूब होता है. रीठा से शैंपू भी बनाए जाते हैं. ये अब भी खासा लोकप्रिय है. पुराने समय में भी रानियां अपने बड़े बालों को इसी से धोती थीं. इसे सोप बेरी या वाश नट भी कहा जाता था.

गर्म पानी में डालकर उबाला जाता था कपड़ों को तब दो तरह से कपड़े साफ होते थे. आम लोग अपने कपड़े गर्म पानी में डालते थे और उसे उबालते थे. फिर इसे उसमें निकालकर कुछ ठंडा करके उसे पत्थरों पर पीटते थे, जिससे उसकी मैल निकल जाती थी. ये काम बड़े पैमाने पर बड़े बड़े बर्तनों और भट्टियों लगाकर किया जाता था. अब भारत में जहां बड़े धोबी घाट हैं वहां कपड़े आज भी इन्हीं देशी तरीकों से साफ होते हैं. उसमें साबुन या सर्फ का इस्तेमाल नहीं होता.

महंगे कपड़ों को रीठा के झाग से धोते थे महंगे और मुलायम कपड़ों के लिए रीठा का इस्तेमाल होता था. पानी में रीठा के फल डालकर उसे गर्म किया जाता है. ऐसा करने से पानी में झाग उत्पन्न होता है. इसको कपड़े पर डालकर उसे ब्रश या हाथ से पत्थर या लकड़ी पर रगड़ने से ना कपड़े साफ हो जाते थे बल्कि कीटाणुमुक्त भी हो जाते थे. शरीर पर किसी प्रकार का रिएक्शन भी नहीं करते.

सफेद रंग का एक खास पाउडर भी आता था काम एक तरीका साफ करने का और था, जो भी खूब प्रचलित था. ग्रामीण क्षेत्रों में खाली पड़ी भूमि पर, नदी-तालाब के किनारे अथवा खेतों में किनारे पर सफेद रंग का पाउडर दिखाई देता है जिसे ‘रेह’ भी कहा जाता है. भारत की जमीन पर यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. इसका कोई मूल्य नहीं होता. इस पाउडर को पानी में मिलाकर कपड़ों को भिगो दिया जाता है. इसके बाद कपड़ों लकड़ी की थापी या पेड़ों की जड़ों से बनाए गए जड़ों से रगड़कर साफ कर दिया जाता था.रेह एक बहुमूल्य खनिज है. इसमें सोडियम सल्फेट, मैग्नीशियम सल्फेट और कैल्शियम सल्फेट होता है, इसमें सोडियम हाइपोक्लोराइट भी पाया जाता है, जो कपड़ों को कीटाणुमुक्त कर देता है.

नदियों और समुद्र के सोडा से भी साफ होते थे कपड़े जब नदियों और समुद्र के पानी में सोड़े का पता लगा तो कपड़े धोने में इसका भरपूर इस्तेमाल होने लगा.

भारतीय मिट्टी और राख से रगड़कर नहाते थे

प्राचीन भारत ही नहीं बल्कि कुछ दशक पहले तक भी मिट्टी और राख सो बदन पर रगड़कर भी भारतीय नहाया करते थे या फिर अपने हाथ साफ करते थे. राख और मिट्टी का इस्तेमाल बर्तनों को साफ करने में भी होता था. पुराने समय में लोग सफाई के लिए मिट्टी का प्रयोग करते थे.

 

 

 

ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ / कोरोना वायरस महामारी के बाद से लाइफस्‍टाइल पूरी तरह बदल गई है। खान पान, परिजन, रिश्‍तेदारों से मिलना, दोस्‍तों से मिलना बाहर कब घूमने जाना से लेकर तमाम तरह के परिवर्तन हो गए है। वहीं फैशन स्‍टाइल में भी बदलाव देखे जा रहे हैं। इस बीच 2 चीजें हैंड बैग के असेंशियल आइटम बन चुके हैं। सैनिटाइजर और मास्‍क। यह लड़कियों के बैग में हमेशा मिलेगा। अभी तक तो सैनिटाइजर का प्रयोग हाथों में मौजूद बारीक जर्म्स को मारने के लिए किया जाता था। लेकिन क्‍या आप जानते हैं इसका इस्‍तेमाल ब्‍यूटी हैक्‍स के लिए भी किया जा सकता है। शायद आपको यह सुनकर जरूर झटका लगा होगा लेकिन सैनिटाइजर के ब्‍यूटी बेनिफिट्स भी है। तो आइए जानते हैं -
1. तैलीय त्‍वचा की छुट्टी - कुछ लोगों की स्किन बहुत अधिक ऑयली होती है। हर थोड़ी - थोड़ी देर में स्किन पर तेल आ जाता है। ऐसे में आप सैनिटाइजर का प्रयोग कर सकते हैं। जी हां, रूई में हैंड सैनिटाइजर लेकर स्किन पर जहां भी आपको तेल आता हो वहां हल्‍के हाथों से लगा सकते हैं। इससे स्किन भी साफ दिखेगी और तेल भी नहीं आएगा। हालांकि इसका प्रयोग करने के दौरान काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर आपकी स्किन काफी सेंसेटिव है तो इसका प्रयोग नहीं करें।
2. क्‍लीनिंग - दरअसल, सैनिटाइजर में एंटीबैक्‍टीरियल और एंटी माइक्रोबियल तत्‍व मौजूद होते हैं, जो आपकी स्किन को डस्‍ट से बचाते हैं। आपके पास सैनिटाइजर के अलावा कोई ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट नहीं है तो ऐसे में आप सैनिटाइजर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। थोड़ा सा लेकर चेहरे पर हल्‍के हाथों से साफ कर सकते हैं।
3. तुरंत मिटाएं खुजली - अक्‍सर ऑयल और पसीना जमा होने पर हाथ पर तेजी से खुजली होने लगती है। ऐसे में आप हैंड सैनिटाइजर का इस्‍तेमाल कर सकती हैं। खुजली वाली जगह पर आप इसे थोड़ा- थोड़ा लगा लीजिए। और हल्‍के हाथों से मसाज कीजिए। तुरंत ही आराम मिल जाएगा।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /जीवन में आदमी की हजारों चीजों में से कुछ ही चीजें काम आती हैं। कई लोग उन चीजों को छोड़कर फालतू की चीजों पर अपना समय और पैसा बर्बाद करते रहे हैं। ऐसे में जब उन्हें असफलता हाथ लगती है तो वे भाग्य और ईश्वर को दोष देते रहते हैं जबकि वे असल में समझ नहीं पाते हैं कि जीवन में गलतियां कहां पर हुई। आओ जानते हैं जीवन में काम आने वाली 10 चीजों के बारे में।
1. पढ़ाई : यह बात सभी जानते हैं कि जीवन में पढ़ाई ही सबसे ज्यादा काम आती है परंतु कुछ लोग कहेंगे कि खेलकूद भी काम में आता है। निश्चित ही कुछ लोगों के जीवन में खेलकूद काम आता है लेकिन अधिकतर लोगों के जीवन में खेलकूद तंदुरुस्ति बनाए रखने के लिए सही है।
2. योग्यता-कुशलता : आपमें जितनी ज्यादा योग्यता या हुनर और कुशलता रहेगी आपकी सफलता के चांस उतने ही बढ़ जाएंगे। आपमें सीखने की लगन होना चाहिए। कार्य में कुशलता, भाषा पर कमांड और गणित में मास्टरी से ही संसार चलता है। उदाहरण के लिए आपने भले ही तैराकी में पीएचडी कर रखी हो परंतु यदि आपको तैरना नहीं याद है तो किस काम की पीएचडी?
3. अच्छी संगत और संबंध : कहते हैं कि बुरी संगत उस कोयले के समान है, जो गर्म हो तो हाथ जला देता है, और ठंडा हो तो हाथ काला कर देता है। इसीलिए अच्छी संगत ही आपके जीवन में काम आती है। अच्छे दोस्तों को हमेशा संभालकर रखें और संबंधों का दायरा बढ़ाएं। मिट्टी का मटका और परिवार की कीमत सिर्फ बनाने वाले को ही पता होती है, तोड़ने वाले को नहीं।
4. अनुभव : कई लोग हैं जो अपने अनुभव का उपयोग नहीं करते या अनुभव से सीखते नहीं है। अनुभव हमें जीवन में बहुत काम आता है। अनुभव चाहे जिस प्रकार का हो हर अनुभव जीवन में काम आता। अनुभव होने के कारण हम बहुत से कामों को आसानी से कर सकते हैं और अपने अनुभव से ही हम आगे बढ़ते हैं और दूसरों की मदद करते हैं। इसलिए अनुभव को हमेशा संभालकर रखना चाहिए।
5. बोलना : कई लोग होते हैं जो ज्ञान तो बहुत रखते हैं परंतु समूह में अच्छे से बोलना नहीं जानते या अपनी बात अच्छे से रखना नहीं जानते हैं। बोलना भी एक कला है। कब, कहां, कैसे और कितना बोलना है यह जीवन में बहुत काम आता है।
6. समय और पैसा : जीवन में समय और पैसे का बहुत महत्व है यह भी बहुत काम आता है। अच्छे वक्त के लिए समय बचाएं और बुरे वक्त के लिए पैसा बचाएं। यह दोनों ही बहुत काम आएंगे। पैसा गोल्ड या प्रापर्टी के रूप में भी बचाया जा सकता है और समय फालतू के कार्यों को करने से बच-बचाकर भविष्य की योजनाओं में लगाया जा सकता है।
7. अवसर : जीवन में अवसर बहुत काम आते हैं। हमारे जीवन में इन्हीं का सबसे बड़ा योगदान होता है। इसीलिए कभी भी अवसर को चूकना नहीं चाहिए। उसे तुरंत ही समझकर लपक लेना चाहिए।
8. गोपनीयता : जीवन में ऐसी कई बातें हैं जिन्हें गोपनीय रखने में ही भलाई। कहते हैं कि बंद मुट्ठी लाख की खुल गई तो प्यारे खाक की। कुछ बातों को अपने तक सीमित रखना और कुछ बातों को सार्वजनीक करना यह सीखना चाहिए।
9. छवि : आपकी पहचान और आपकी छवि आपके जीवन में बहुत काम आती है। भीड़ के साथ चलने से पहचान नहीं बनती और छवि एक बार बिगड़ जाए तो सुधरना लगभग मुश्किल हो जाता है। आपके कई कार्य तो आपकी छवि से ही बन जाते हैं। अपनी एक सशक्त पहचान बनाएं।
10. विनम्रता : जीवन में विनम्रता बहुत काम आती है। यदि आप घमंडी या अहंकारी हैं तो ऐसे कई कार्य हैं जो आप नहीं कर पाएंगे या लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं हो पाएंगे। यदि आप अमीर हैं या किसी बड़े पद पर हैं तो आपके लिए विनम्रता सबसे बड़ी दौलत है।

फैशन / शौर्यपथ /बारिश के मौसम में फैशन स्‍टाइल काफी बदल जाता है। इस मौसम में नियोन कलर खूब जचते हैं। वहीं देखा जाए तो बारिश के मौसम में कलर भी साफ हो जाता है। स्किन एकदम गोरी हो जाती है। बरसात के सीजन में मौसम सुहावना होते ही लोग लॉन्‍ग ड्राइव पर निकल जाते हैं। लेकिन लड़कियां कभी अपने फैशन में कॉम्प्रोमाइज नहीं करती है। और लेटेस्‍ट ट्रेंड को भी जल्‍दी फॉलो करती है। बरसात के मौसम में पोल्‍का डॉट एक बार फिर से ट्रेंड में आ गया है। हालांकि यह काफी पुराना फैशन स्‍टाइल है लेकिन यह स्‍टाइल काफी पसंद किया जा रहा है। इसे पहनने के बाद रेट्रो लुक वाली फीलिंग आती है। क्‍योंकि यह फैशन फीलिंग 70-80 के दशक का ट्रेंड है। तो आइए जानते हैं किस तरह पोल्‍का डॉट को पहन सकते हैं
-पोल्‍का डॉट ड्रेस बॉलीवुड एक्‍ट्रेस अक्‍सर पहनते हुए स्‍पॉट होती रहती है। यह उनके वार्डरोब में आपको जरूर मिल जाएगी। फिर चाहे वह साड़ी हो, वेस्‍टर्न ड्रेस हो, इंडो वेस्‍टर्न हो या इवनिंग गाउन हो या शॉट्र्स हो। इस ड्रेस में एक्‍ट्रेस हमेशा छाई रहती है।
- आप भी पोल्‍का डॉट ड्रेस बर्थ डे पार्टी, संगीत प्रोग्राम, डीजे नाइट या कहीं बाहर धूमने जा रहे हैं तब पहन सकते हैं। यह ड्रेस खूब जचेगा। साथ ही यह ड्रेस पहनने में काफी हल्‍की होती है। और सुबह से शाम तक आराम से सफर के दौरान पहन सकते हैं।
- पोल्‍का डॉट एवरग्रीन स्टाइल है, यह स्‍टाइल जरूर दशको पुराना है लेकिन आज भी ट्रेंड में छाए रहता है। साथ ही पार्टीयों में लड़कियां फैशन के तौर पर पोल्‍का डॉट पसंद करती हैं।

सेहत / शौर्यपथ /फलों के जूस का सेवन करना सेहत के लिए हमेशा से ही फायदेमंद है। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है, कमजोरी और थकान नहीं लगती है। नोनी भी उसी प्रकार का फल है। यह दक्षिण पूर्व और दक्षिण एशिया और प्रशांत महाद्वीपों में मुख्‍य रूप से पाया जाता है। उस क्षेत्र में यह फल औषधि के रूप में काम करता है। इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट, विटामिन बी 3, विटामिन ए, विटामिन सी और आयरन मुख्‍य रूप से पाया जाता है। इसके एक नहीं अनेक गुण है। ब्‍यूटी से हेल्‍थ तक इस फल के फायदे हैं। आइए जानते हैं नोनी फ्रूट जूस से होने वाले फायदों के बारे में -
1. दिल का रखें ख्‍याल - नोनी फ्रूट जूस में मौजूद तत्‍व दिल को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करते हैं। इसका सेवन करने से धमनियों में रक्‍त का संचार सुचारू रूप से होता है। इसी के साथ ब्‍लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है।
2.एंटी एजिंग - शरीर में विटामिन सी की कमी होने पर अन्‍य महिलाओं के मुकाबले झुर्रिया दिखने लगती है। स्किन एकदम ड्राई हो जाती है। नोनी में विटामिन सी मौजूद है। साथ ही इसमें एंटी एक्‍ने गुण भी होते हैं। चेहरे की चमक को बढ़ाता है।
3.वायरल से बचाएं - नोनी में मौजूद एंटी वायरल गुण वायरल सर्दी, खांसी, बुखार से बचाता है। बुखार से शरीर में हो रहे दर्द को दूर करता है। इसलिए डॉक्‍टर की सलाह से नोनी का जूस दे सकते हैं।
4.कैंसर से बचाएं - नोनी के सेवन से ट्यूमर का खतरा कम हो जाता है। इसमें मौजूद एंटी कैंसर और एंटीऑक्‍सीडेंट गुण होते हैं। इससे स्‍तन कैंसर में भी राहत मिलती है। इतना ही इसके जूस का सेवन करने से धूम्रपान से होने वाले कैंसर का खतरा भी कम होता है।
5. गठिया बादी से बचाएं - 30 की उम्र के बाद शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। जिस वजह से शरीर के जोड़ों में असहनीय दर्द होता है। उसमें नोनी का जूस पीना फायदेमंद होता है। क्‍योंकि जूस पीने से यूरिक एसिड कम होता है।
6. तनाव को करें कम - तनाव की वजह से काम बहुत प्रभावित होता है। ऐसे में नोनी जूस का सेवन करना फायदे का सौदा है। इसमें मौजूद स्‍ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का स्‍तर कम होता है। जिससे बड़ी राहत मिलती है।साथ ही दिमाग को भी आराम मिलता है।

आस्था /शौर्यपथ / अगस्त माह में बहुत ही खास 2 एकादशी आ रही है। एक एकादशी जहां सभी पापों का नाश करने में सक्षम है, वहीं दूसरी एकादशी संतान देने वाली मानी गई है।
इस वर्ष श्रावण मास कामिका और पुत्रदा एकादशी व्रत मनाया जाएगा। कामिका एकादशी का यह व्रत लोक हित के लिए बहुत जरूरी है। श्रावण मास की कृष्ण एकादशी का नाम कामिका है। यह एकादशी 4 अगस्त 2021, बुधवार को मनाई जाएगी। पौराणिक ग्रंथों में इस एकादशी का इतना महत्व है कि इसकी कथा सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
इस दिन शंख, चक्र, गदाधारी विष्णु भगवान का पूजन करने का विधान है। इस एकादशी के दिन श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव, मधुसूदन इन नामों से पूजन करने से गंगा, काशी, नैमिषारण्य और पुष्कर स्नान से जो मिलता है, वह विष्णु भगवान के पूजन से मिलता है। जो फल ग्रहण के समय काशी में स्नान करने, समुद्र, वन सहित पृथ्वी दान करने से भी प्राप्त नहीं होता वह भगवान विष्णु के पूजन से मिलता है।
शास्त्रों के अनुसार जो मनुष्य श्रावण में भगवान का पूजन करते हैं, उनसे देवता, गंधर्व और सूर्य आदि सब पूजित हो जाते हैं। अत: पापों से डरने वाले मनुष्यों को कामिका एकादशी व्रत और विष्णु भगवान का पूजन अवश्य करना चाहिए। यह पूजन सभी पापों के नाश करने में सक्षम है।
अगस्त माह में दूसरा एकादशी का व्रत 18 अगस्त 2021, बुधवार मनाया जाएगा। इस दिन श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। यह दिन संतान प्राप्ति के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन संतान प्राप्ति की कामना के लिए भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा भी की जाती है।
यदि पूरे मन से नि:संतान दंपति यह व्रत करता हैं तो उन्‍हें संतान सुख अवश्‍य मिलता है। यह एकादशी संतान प्राप्ति तथा उसके दीघार्यु जीवन के लिए बहुत महत्व की मानी गई है।
एकादशी को कतई न करें इनमें से कोई भी कार्य, वरना आ सकती है मुसीबत
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार एकादशी अत्यंत पवित्र तिथि है। इस दिन तन-मन-धन की पवित्रता को बनाए रखने के पूरे प्रयास करना चाहिए। यह तिथि इतनी शुभ है कि मन, कर्म और वचन की थोड़ी सी अशुद्धि भी आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। शास्त्रों में बताया गया है कि एकादशी के दिन कौन से कार्य बिलकुल भी नहीं करने चाहिए...। आइए जानते हैं कौन से 11 काम हैं, जो एकादशी के दिन कतई नहीं करने चाहिए।
1. जुआ खेलना- जुआ खेलना एक सामाजिक बुराई है। जो व्यक्ति जुआ खेलता है, उसका परिवार व कुटुंब भी नष्ट हो जाता है। जिस स्थान पर जुआ खेला जाता है, वहां अधर्म का राज होता है। ऐसे स्थान पर अनेक बुराइयां उत्पन्न होती हैं। इसलिए सिर्फ आज ही नहीं बल्कि कभी भी जुआ नहीं खेलना चाहिए।
2. रात में सोना- एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए। पूरी रात जागकर भगवान विष्णु की भक्ति करनी चाहिए। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के निकट बैठकर भजन करते हुए ही जागरण करना चाहिए। इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
3. पान खाना- एकादशी के दिन पान खाना भी वर्जित माना गया है। पान खाने से मन में रजोगुण की प्रवृत्ति बढ़ती है। इसलिए एकादशी के दिन पान न खा कर व्यक्ति को सात्विक आचार-विचार रख प्रभु भक्ति में मन लगाना चाहिए।
4. दातून करना- एकादशी पर दातून (मंजन) करने की भी मनाही है। इस निषेध के शास्त्रसम्मत कारण नहीं मिलते हैं।
5. दूसरों की बुराई करना- परनिंदा यानी दूसरों की बुराई करना। ऐसा करने से मन में दूसरों के प्रति कटु भाव आ सकते हैं। इसलिए एकादशी के दिन दूसरों की बुराई न करते हुए भगवान विष्णु का ही ध्यान करना चाहिए।
6. चुगली करना- चुगली करने से मान-सम्मान में कमी आ सकती है। कई बार अपमान का सामना भी करना पड़ सकता है। इसलिए सिर्फ एकादशी ही नहीं अन्य दिनों में भी किसी की चुगली नहीं करना चाहिए।
7. चोरी करना- चोरी करना पाप कर्म माना गया है। चोरी करने वाला व्यक्ति परिवार व समाज में घृणा की नजरों से देखा जाता है। इसलिए सिर्फ एकादशी ही नहीं अन्य दिनों में भी चोरी जैसा पाप कर्म नहीं करना चाहिए।
8. हिंसा करना- एकादशी के दिन हिंसा करने की मनाही है। हिंसा केवल शरीर से ही नहीं मन से भी होती है। इससे मन में विकार आता है। इसलिए शरीर या मन किसी भी प्रकार की हिंसा इस दिन नहीं करनी चाहिए।
9. स्त्रीसंग- एकादशी पर स्त्रीसंग करना भी वर्जित है क्योंकि इससे भी मन में विकार उत्पन्न होता है और ध्यान भगवान भक्ति में नहीं लगता। अतः एकादशी पर स्त्रीसंग नहीं करना चाहिए।
10. क्रोध- एकादशी पर क्रोध भी नहीं करना चाहिए। इससे मानसिक हिंसा होती है। अगर किसी से कोई गलती हो भी जाए तो उसे माफ कर देना चाहिए और मन शांत रखना चाहिए।
11. झूठ बोलना- झूठ बोलना व्यक्तिगत बुराई है। जो लोग झूठ बोलते हैं, उन्हें समाज व परिवार में उचित मान सम्मान नहीं मिलता। इसलिए सिर्फ एकादशी पर ही नहीं अन्य दिनों में भी झूठ नहीं बोलना चाहिए।

आस्था /शौर्यपथ / महामृत्युंजय मंत्र को लंबी उम्र और अच्छी सेहत का मंत्र कहते हैं। शास्त्रों में इसे महामंत्र कहा गया है। इस मंत्र के जप से व्यक्ति निरोगी रहता है। आइए जानें इस महामंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई?
महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति के बारे में पौराणिक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार, शिव भक्त ऋषि मृकण्डु ने संतान प्राप्ति के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने ऋषि मृकण्डु को इच्छानुसार संतान प्राप्त होने का वर तो दिया परन्तु शिव जी ने ऋषि मृकण्डु को बताया कि यह पुत्र अल्पायु होगा। यह सुनते ही ऋषि मृकण्डु विषाद से घिर गए। कुछ समय बाद ऋषि मृकण्डु को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। ऋषियों ने बताया कि इस संतान की उम्र केवल 16 साल ही होगी। ऋषि मृकण्डु दुखी हो गए....
यह देख जब उनकी पत्नी ने दुःख का कारण पूछा तो उन्होंने सारी बात बताई। तब उनकी पत्नी ने कहा कि यदि शिव जी की कृपा होगी, तो यह विधान भी वे टाल देंगे। ऋषि ने अपने पुत्र का नाम मार्कण्डेय रखा और उन्हें शिव मंत्र भी दिया। मार्कण्डेय शिव भक्ति में लीन रहते। जब समय निकट आया तो ऋषि मृकण्डु ने पुत्र की अल्पायु की बात पुत्र मार्कण्डेय को बताई। साथ ही उन्होंने यह दिलासा भी दी कि यदि शिवजी चाहेंगें तो इसे टाल देंगें।
माता-पिता के दुःख को दूर करने के लिए मार्कण्डेय ने शिव जी से दीर्घायु का वरदान पाने के लिए शिव जी आराधना शुरू कर दी। मार्कण्डेय जी ने दीर्घायु का वरदान की प्राप्ति हेतु शिवजी की आराधना के लिए महामृत्युंजय मंत्र की रचना की और शिव मंदिर में बैठ कर इसका अखंड जाप करने लगे।
महामृत्युंजय मंत्र : ॐ त्र्यम्बकं स्यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
समय पूरा होने पर मार्कण्डेय के प्राण लेने के लिए यमदूत आए परंतु उन्हें शिव की तपस्या में लीन देखकर वे यमराज के पास वापस लौट आए... पूरी बात बताई। तब मार्कण्डेयके प्राण लेने के लिए स्वयं साक्षात यमराज आए। यमराज ने जब अपना पाश जब मार्कण्डेय पर डाला, तो बालक मार्कण्डेय शिवलिंग से लिपट गए। ऐसे में पाश गलती से शिवलिंग पर जा गिरा। यमराज की आक्रमकता पर शिव जी बहुत क्रोधित हुए और यमराज से रक्षा के लिए भगवान शिव प्रकट हुए। इस पर यमराज ने विधि के नियम की याद दिलाई।
तब शिवजी ने मार्कण्डेय को दीर्घायु का वरदान देकर विधान ही बदल दिया। सा थ ही यह आशीर्वाद भी दिया कि जो कोई भी इस मंत्र का नियमित जाप करेगा वह कभी अकाल मृत्यु को प्राप्त नहीं होगा।

ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ / त्वचा को हाइड्रेट और साफ रखने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं। कुछ लोग अच्छे फेशियल क्लीन्जर और मॉइस्चराइजर की तलाश करते हैं, तो कुछ फेस स्टीमिंह का इस्तेमाल करते हैं। स्टीम के समय कुछ लोग पानी में नमक, नींबू, चाय, सूखी जड़ी बूटियां और तेल मिलाते हैं। फेस स्टीमिंग के कई फायदे हैं, सेंसिस को रिलेक्स मिलता है, सर्कुलेशन अच्छा होता है, साथ ही सीरम अवशोषण बेहतर होता है। आइए, जानते हैं फेस स्टीमिंग के फायदे।
क्लींजिंग में मदद
स्टीमिंग के दैरान रोम छिद्र (यानि की पोर्स) खुल जाते हैं। जिससे डेड स्किन, गंदगी और अन्य तरह की अशुद्धियां निकल जाती हैं। अगर आपके ब्लैकहेड्स हैं, तो स्टीमिंग के बाद व ह सॉफ्ट हो जाते हैं और उन्हें निकालना आसान हो जाता है। जब स्किन पर व्हाइटहेड्स और ब्लैकहेड्स लंबे समय तक त्वचा पर रहते हैं, तो वह काफी दर्दनाक हो जाते हैं। ऐसे में स्टीमिंग से रोमछिद्र खुल जाते हैं, और चेहरे पर मौजूद गंदगी अदर से नरम हो जाती है, जिसके कारण आपका चेहरा अच्छे से क्लीन हो जाता है।
ब्लड सर्कुलेशन
किसी दिन आपकी स्किन डल और डिहाइड्रेटिड नजर आती है, फिर चाहें आप रोजोना सही तरह से स्किन केयर क्यों ना करते हैं। इसका प्रमुख कारण ब्लड सर्कुलेशन है। ऐसे में त्वचा पर स्टीमिग के खूब फायदे हैं। ये सर्कुलेशन को बढ़ाता है, ऑक्सीजन प्रोवाइड करता है औोर स्किन को स्वस्थ और हेल्दी रखता है।
त्वचा को हाइड्रेट
चेहरे पर स्टीम से अवशोषण में सुधार करने के लिए स्किन की पारगम्यता बढ़ जाती है। स्टीम की मदद से त्वचा हाइड्रेट होता है और फेस को नेचुरली हाइड्रेट करने में मदद करती है।
कोलेजन और इलास्टिन प्रोड्यूस करने में मदद
फेस स्टीमिंग अधिक कोलेजन और इलास्टिन का उत्पादन करने में मदद करता है, जो जवां दिखाने में सहयोग करता है। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे ही कोलेजन और इलास्टिन के नुकसान के कारण उनकी त्वचा पतली और ढीली दिखती है।

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