Google Analytics —— Meta Pixel
June 01, 2026
Hindi Hindi

आस्था / शौर्यपथ /नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा करने का अधिक महत्व है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक वर्ष में जब भी नवरात्रि आते हैं, देवी दुर्गा मां विभिन्न वाहनों पर सवार होकर आती हैं। इस बार 13 अप्रैल, मंगलवार से माता की आराधना का यह पर्व आरंभ हो जाएगा...
इसी के साथ देवी दुर्गा के विभिन्न 9 रूपों की आराधना भी शुरू हो जाएगी। मान्यता है कि नवरात्रों में देवी की पूजा से जातक की सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

आइए, जानते हैं कि इस बार मां दुर्गा किस पर सवार होकर अपने भक्तों की इच्छाओं को पूर्ण करने आएंगी?

घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा के वाहन का अधिक महत्व है। वर्ष में आने वाले प्रत्येक नवरात्रि के पहले दिन माता दुर्गा अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आती हैं। मातारानी के वाहन से मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धि का पता भी लगाया जाता है।

चैत्र नवरात्रि 2020 में देवी दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आई थीं और इस बार भी मातारानी इसी वाहन पर सवार होकर आने वाली हैं। जी हां, इस बार भी मां के वाहन में कोई बदलाव नहीं है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को भी मां दुर्गा का वाहन अश्व ही रहेगा। ज्योतिषियों का मानना है कि इस बार चैत्र नवरात्रि का आरंभ मंगलवार से हो रहा है इसलिए मां का वाहन अश्व है।

नवरात्रि का पर्व इस वर्ष 13 अप्रैल, मंगलवार से आरंभ होगा... प्रथम दिन घटस्थापना की जाएगी। इसका समापन 22 अप्रैल 2021 को होगा। खासतौर पर नवरात्रि पर्व उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार, गुजरात और बंगाल सहित पूरे भारत में मनाया जाता है।
नवरात्रि के मौके पर व्रत रखने की परंपरा है। देवी मां के भक्त पूरे 9 दिनों तक व्रत रखते हैं और पूरे विधि-विधान से मां की उपासना करते हैं। नवरात्रि के पावन मौके पर मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। हिन्दू धर्म में इन सभी देवियों का विशेष महत्व है। इन सभी देवियों की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति के साथ-साथ नवग्रह से भी शांति मिलती है।

व्रत त्यौहार / शौर्यपथ / इस वर्ष 2021 की पहली अमावस्या 2 दिन पड़ रही है। पहली अमावस्या 11 अप्रैल को चैत्र श्राद्धादि की मनाई जाएगी, इस दिन पितरों का श्राद्ध एवं तर्पण करने की मान्यता है तथा इसके साथ ही 12 अप्रैल, सोमवार को स्नान-दान की अमावस्या मनाई जा रही है। जिसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है।
यह दिन भगवान शिव को समर्पित है। यह अमावस्या दरिद्रता को दूर करने के लिए खास मानी गई है। सोमवती अमावस्या का व्रत सुहागिनों का प्रमुख व्रत माना जाता हैं। सोमवार चंद्रमा का दिन हैं। इस दिन सूर्य तथा चंद्रमा एक सीध में स्थित होते हैं। इसलिए यह पर्व विशेष पुण्य फल प्राप्ति वाला माना जाता हैं। पुराणों में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है और माना गया हैं कि जब भी अमावस्या दो दिन की होती है तो पहले दिन श्राद्धादि की अमावस्या और दूसरे दिन स्नान-दान की अमावस्या मनाई जाती है।
शास्त्रों के अनुसार जिस अमावस्या को सोमवार हो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। हमारे शास्त्रों में इस दिन के लिए कुछ विशेष प्रयोग बताए गए हैं। जिनसे जीवन के समस्त कष्टों का निवारण किया जा सकता है।
यहां प्रस्तुत हैं कुछ सरल उपाय-
1. सोमवती अमावस्या के दिन प्रात: पीपल के वृक्ष के पास जाइए, उस पीपल के वृक्ष को एक जनेऊ दीजिए और एक जनेऊ भगवान विष्णु के नाम भी उसी पीपल को अर्पित कीजिए। फिर पीपल और भगवान विष्णु की प्रार्थना कीजिए। तत्पश्चात 108 बार पीपल वृक्ष की परिक्रमा करके, शुद्ध रूप से तैयार की गई एक मिठाई पीपल के वृक्ष को अर्पित कीजिए। परिक्रमा करते वक्त 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। 108 परिक्रमा पूरी होने के बाद पीपल और भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हुए अपने हाथों हुए जाने-अनजाने अपराधों की क्षमा मांगें। सोमवती अमावस्या के दिन की गई इस पूजा से जल्दी ही आपको उत्तम फलों की प्राप्ति होने लगती है।
2. सोमवती अमावस्या के दिन अपने आसपास के वृक्ष पर बैठे कौओं और जलाशयों की मछलियों को (चावल और घी मिलाकर बनाए गए) लड्डू दीजिए। यह पितृ दोष दूर करने का उत्तम उपाय है।
3. पितृ दोष की शांति के लिए अमावस्या के अतिरिक्त भी प्रति शनिवार पीपल के वृक्ष की पूजा करना चाहिए।
4. सोमवती अमावस्या के दिन दूध से बनी खीर दक्षिण दिशा में (पितृ की फोटो के सम्मुख) कंडे की धूनी लगाकर पितृ को अर्पित करने से भी पितृ दोष में कमी आती है।
5. सोमवती अमावस्या को एक ब्राह्मण को भोजन एवं दक्षिणा (वस्त्र) दान करने से पितृ दोष कम होता है।
6. सोमवती अमावस्या पर निम्न मंत्र का जाप करें-
मंत्र- 'अयोध्या, मथुरा, माया, काशी कांचीर्अवन्तिका पुरी, द्वारावतीश्चैव सप्तैता मोक्ष दायिका।।
- गंगे च यमुनेश्चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदा, सिंधु कावेरी जलेस्मिने संन्निधि कुरू।।'
अमावस्या का दिन आध्यात्मिक चिंतन और पूजन-अर्चन के लिहाज से अधिक श्रेष्ठ होता है। अत: इस दिन चिंतन-मनन करना लाभदायी होता है।
इस वर्ष चैत्र अमावस्या पर पूजन के शुभ मुहूर्त निम्नानुसार रहेंगे।
चैत्र अमावस्या तिथि का आरंभ रविवार, 11 अप्रैल 2021 को प्रातः 06.05 मिनट से हो रहा है तथा सोमवार, 12 अप्रैल 2021 को प्रातः 08.02 मिनट पर अमावस्या तिथि समाप्त होगी। अत: इस समयावधि में पितृ तर्पण, दान-पुण्य करना श्रेष्‍ठ रहेगा।

लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / रटगर्स यूनिवर्सिटी द्वारा किए नए शोध से पता चला है कि जिन शिशुओं को शुरुआती 2 वर्षों में एंटीबायोटिक्स दिया जाता है, उनमें कई अन्य बीमारियों जैसे अस्थमा, सांस संबंधी एलर्जी, सीलिएक, एक्जिमा, मोटापा और एकाग्रता में कमी जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही उनके इम्यून सिस्टम पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।

शोध के अनुसार हमारे शरीर में मौजूद माइक्रोबायोम की संरचना इस तरह होती है जो बचपन में इम्युनिटी, मेटाबोलिज्म और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गौरतलब है कि माइक्रोबायोम हमारे शरीर में मौजूद वो खरबों सूक्ष्मजीव होते हैं जो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से लाभदायक होते हैं।
14,572 बच्चों का अध्ययन किया: मायो क्लीनिक और रटगर्स यूनिवर्सिटी द्वारा किया यह शोध जर्नल मायो क्लिनिक प्रोसीडिंग्स में छपा है। इस शोध में 2003 से 2011 के बीच जन्मे 14,572 बच्चों का अध्ययन किया है। जिनमें से करीब 70 फीसदी को जन्म के दो वर्षों के भीतर कम से कम एक एंटीबायोटिक दिया गया था। उनमें से ज्यादातर बच्चे मुख्य रूप से सांस या कान सम्बन्धी संक्रमण से ग्रस्त थे।
इस शोध से जुड़े शोधकर्ता और रटगर्स के सेंटर फॉर एडवांटेड बायोटेक्नोलॉजी एंड मेडिसिन के निदेशक मार्टिन ब्लेसर ने बताया कि एंटीबायोटिक्स का ज्यादा उपयोग न चाहते हुए भी शरीर में एंटीबायोटिक रेसिस्टेन्स बैक्टीरिया के विकास का कारण बन जाता है। बचपन में बीमारियों के ग्रस्त होने पर जब एंटीबायोटिक्स का प्रयोग किया जाता है तो वो बच्चों के इम्यून सिस्टम और मानसिक विकास पर असर डालता है। एंटीबायोटिक्स का प्रयोग शरीर में मौजूद माइक्रोबायोम पर असर डालता है, जो आगे चलकर कई अन्य समस्याओं का कारण बन जाता है।

एंटीबायोटिक्स के अनावश्यक उपयोग से बचना जरुरी
हालांकि इससे पहले भी कई शोधों में एंटीबायोटिक दवाओं और किसी रोग के बीच सम्बन्ध को देखा गया है। पर यह पहला मौका है जब किसी शोध में एंटीबायोटिक्स और कई बीमारियों के बीच के सम्बन्ध को देखा गया है। शोध के अनुसार एंटीबायोटिक्स मेटाबोलिज्म से जुड़ी बीमारियों (मोटापा, वजन का बढ़ना), इम्यून से जुड़ी बीमारियों (अस्थमा, फूड एलर्जी, हे फीवर और मानसिक विकार (जैसे एडीएचडी और ऑटिज्म) के खतरे को बढ़ा सकते हैं, हालांकि अलग-अलग एंटीबायोटिक का भिन्न-भिन्न प्रभाव पड़ता है। सेफालोस्पोरिन नामक एंटीबायोटिक कई बीमारियों के जोखिम को बढ़ा देता है, खासतौर पर इसके चलते फूड ऐलर्जी और ऑटिज्म का खतरा काफी बढ़ जाता है।

सेहत /शौर्यपथ / भले ही आप घर से बाहर नहीं निकल रहीं, न ही आपको किसी से गले मिलते हुए शर्मिंदा होना पड़ रहा है। लेकिन शरीर आने वाली पसीने की बदबू बैक्‍टीरिया का जमावड़ा होते जाने का संकेत है। इसके लिए फैंसी डियो लगाने से बेहतर है कि आप कुछ नेचुरल ट्राय करें। हम आपकी रसोई में मौजूद ऐसी ही सामग्रियों के बारे में बताने जा रहे हैं।
शरीर में आने वाली पसीने की बदबू को नियंत्रण में रखने का सबसे अच्छे तरीका है:
एंटी-बैक्टीरियल साबुन से स्नान करना, शरीर को अच्छी तरह से साफ करना, और एंटीपर्सपिरेंट का इस्तेमाल करना। इसके अलावा, रोजाना पैरों को धोने और जूते - चप्पल और मोजे को साफ रखने से शरीर की गंध पर काबू पाया जा सकता है।
पसीने की बदबू से छुटकारा पाने के कुछ घरेलू उपाय:
1 सेंधा नमक
रॉक सॉल्‍ट या सेंधा नमक में शक्तिशाली क्लींजिंग गुण होते हैं, जो पसीने और उसकी बदबू को खत्म करते हैं और त्वचा की सतह पर रहने वाले रोगाणुओं की क्रिया को प्रभावित करते हैं।
गुनगुने पानी के एक टब या बाल्टी में सेंधा नमक के कुछ क्रिस्टल डालें और अच्छी तरह से मिलाएं। जब तक कि वे पूरी तरह से मिक्स न हो जाएं और पसीने और शरीर की गंध को नियंत्रण में रखें।
2 टमाटर का रस
टमाटर अपने विटामिन-C और एंटीऑक्सिडेंट विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है, जो अतिरिक्त पसीने को रोकते हैं। साथ ही शरीर की सतह के बैक्टीरिया को ख़त्म करने में सहायता करते हैं।
इसका इस्तेमाल करने के लिए टमाटर के रस में एक कपड़े को डुबोएं और शरीर के प्रभावित हिस्सों पर लगाएं जहां आपको पसीना ज्यादा आता हो। ये छिद्रों को बंद करेगा और अत्यधिक पसीने को रोकेगा।
3 बेकिंग सोडा
इसे हम खाने वाला सोडा भी कहते हैं। बेकिंग सोडा एल्कलाइन होता है, जो शरीर से बदबू को कम करने के लिए बैक्टीरिया द्वारा संसाधित पसीने में एसिड को संतुलित करता है।
पसीने की बदबू दूर करने के लिए बेकिंग सोडा और पानी के साथ एक पेस्ट तैयार करें। इसे सीधे बगल में लगाएं और सूखने के बाद धो लें ताकि नमी का स्तर कम हो जाए।
4 ग्रीन टी बैग्स
एंटीऑक्सीडेंट और डिटॉक्सिफाइंग गुणों से भरपूर, ग्रीन टी बैग पसीने की वजह से शरीर से आने वाली गंध को दूर करने का एक वरदान है।
बस गर्म पानी में कुछ टी बैग को डुबोएं और एक बार पूरी तरह से भिगोने के बाद, अंडरआर्म के क्षेत्र पर जहां भी आपको पसीना आता है, वहां पर 5 मिनट तक दबाएं और धो लें।
5 सेब का सिरका
एसिटिक एसिड की पर्याप्त मात्रा से प्रभावित, सेब के सिरका में स्वाभाविक रूप से एसिडिक विशेषताएं होती हैं। जो शरीर में विषाक्त रोगाणुओं को नष्ट करती हैं। ये बैक्टीरिया को मिटाता है जो दुर्गंध पैदा करते हैं।
आपको बस कुछ कॉटन बॉल को एप्पल साइडर विनेगर में डुबोना है और सभी पसीने वाले हिस्सों पर लगाना है। सूखने के बाद इसे ठंडे पानी से धो लें।
गर्मियों में पसीने से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये टिप्स:
स्नान करने के बाद शरीर को बिना अच्छे से पोछे कपड़े न पहने, जिससे कि नहाने के तुरंत बाद पसीना न आये।
अपनी आर्मपिट्स को शेव या वैक्स करती रहें, क्योंकि बालों से और पसीना आता है।
ज्यादा भारी और गरिष्ठ भोजन न करें और खुद को हाइड्रेटेड रखें।
कॉटन के आरामदायक कपड़े पहनें।
धूम्रपान न करें क्योंकि यह आपके शरीर का तापमान बढ़ाता है।
नेचुरल परफ्यूम का इस्तेमाल करें।

सेहत /शौर्यपथ / कोरोना वायरस नाम की महामारी ने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया है। आए दिन बढ़ते संक्रमितों की संख्या लोगों के बीच परेशानी का सबब बनती जा रही है। वैज्ञानिक भी लगातार इस महामारी से बच निकलने के उपाय ढ़ूंढ़ रहे हैं। बावजूद इसके अभी तक कोरोना से निजात पाने में सफलता नहीं मिल पाई है।
कोरोना को खत्म करने के लिए वैज्ञानिक आए दिन नए-नए शोध कर रहे हैं। जिससे कभी लोगों की हैरानी बढ़ती है तो कभी परेशानी। अभी तक कोरोना के बारे में कहा जा रहा था कि यह मुख्य रूप से एक वायरल संक्रामक बीमारी है, जो एक बीमार व्यक्ति के खांसने, छींकने या छूने से एक स्वस्थ व्यक्ति को फैल सकती है। कोरोनावायरस बीमारी के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, कभी-कभी सिरदर्द और थकान शामिल हैं।
हालांकि, दुनिया भर के डॉक्टर और वैज्ञानिक जो COVID-19 रोगियों का इलाज और उनके बारे में अध्ययन कर रहे हैं, वे कोरोनवायरस से संक्रमित लोगों द्वारा प्रदर्शित किए जा रहे नए लक्षणों का भी तेजी से अवलोकन कर रहे हैं। कोरोना फेफड़ों को प्रभावित नहीं करता है बल्कि यह शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। कोरोना के कुछ लक्षण मुंह पर भी दिखाई देने शुरू हो गए हैं जिनका आप आसानी से पता लगा सकते हैं।
साल 2021, जनवरी में ऐसा ही एक अलग लक्षण 'COVID Tongue' के बारे में शोधकर्ताओं को पता चला है। इसके बारे में लंदन के किंग्स कॉलेज के एक प्रसिद्ध ब्रिटिश महामारी एक्सपर्ट प्रोफेसर टिम स्पेक्टर ने अपने ट्विटर पर एक पोस्ट शेयर करके बताया। प्रोफेसर टिम स्पेक्टर के अनुसार, COVID-19 के असामान्य गंभीर लक्षणों में से एक मुंह में भी विकसित हो सकता है।
NIH अध्ययन के अनुसार, कोरोना के मुंह से जुड़े लक्षण हल्के और गंभीर हो सकते हैं। यह लक्षण उनमें भी दिख सकते हैं जिनमें कोरोना के बाकी लक्षण जैसे खांसी या बुखार नहीं हैं। वैज्ञानिक पत्रिका नेचर मेडिसिन में प्रकाशित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा किए गए एक नए अध्ययन के अनुसार, कोरोना वायरस के लगभग आधे पीड़ित संक्रमण के दौरान मुंह के लक्षणों से पीड़ित होते हैं।
आइए जानते हैं कोरोना के मुंह से जुड़े उन लक्षणों के बारे में, जिनके दिखते ही आपको तुरंत करवाना चाहिए अपना कोविड टेस्ट।
कोविड टंग-
यह एक वायरल लक्षण है। इसमें कोरोना व्यक्ति की जीभ को प्रभावित करता है। जिसकी वजह से रोगी की जीभ की सतह पर जलन और सूजन महसूस होती है।
जीभ का रंग बदलना-
कोरोना के मरीजों में जीभ का रंग बदलना जैसे लक्षण भी देखे जा रहे हैं। मुंह में जलन और सूजन जीभ को अजीब महसूस करा सकते हैं। इससे मुंह में जलन, होंठ और जीभ में झुनझुनी हो सकती है। यह जीभ के रंग में बदलाव का कारण भी बन सकता है।
जीभ पर सफेद पैच-
कोरोना के मरीजों की जीभ पर सफेद पैच भी देखे जा सकते हैं।

ड्राई होंठ-
कोविड सिम्पटम्स स्टडी ऐप के संयोजन में ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार, यदि आप कोरोना से संक्रमित हैं, तो आपके होंठ ड्राई dry lips) और पपड़ीनुमा महसूस हो सकते हैं। होठों की यह समस्या मुंह के अंदर तक फैल सकती है, शोधकर्ताओं ने यह चेतावनी दी। कोरोनोवायरस का यह मौखिक संकेत स्किन से संबंधित लक्षणों की एक छोटी सी समस्या है। यूके में अब तक 46 हजार से भी अधिक लोगों की मौत कोरोनावायरस के कारण हो चुकी है।
मुंह के छाले-
कोरोना के कई रोगियों ने अपने जीभ पर आए उभार या छाले को पिंपल्स यानी मुंहासों के समान बताया है। ये छाले, रैश या बम्प्स बिना कुछ खाए पीए भी काफी दर्दनाक हो सकते हैं। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि आपको लाई बम्प्स हो गया है, तो आप कोरोनावायरस से संक्रमित हो गए हैं। लाई बम्प्स कई बार अधिक मसालेदार भोजन, खाने से एलर्जी या फिर गलती से जीभ कटने की वजह से भी हो सकता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज-
हालांकि मुंह और जीभ में देखे गए ये बदलाव अभी कोरोना के सटीक लक्षण नहीं माने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कोरोना से जुड़े ये लक्षण हर संक्रमित व्यक्ति को प्रभावित करें यह जरूरी नहीं है। लेकिन वायरस के बदलते व्यवहार और मामलों में वृद्धि के साथ, किसी भी लक्षण और अचानक, असामान्य लक्षण को जांचने की जरूरत बताई जा रही है। तो अगर आपको भी इस तरह के लक्षण महसूस हो तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /आज के समय में वजन बढ़ने के बाद उसे घटाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में अगर आपकी हाइट औसत से कम है, तो वजन घटाने में और भी परेशानी हो सकती है। आपका वजन लंबाई के अनुसार होना चाहिए। लंबाई और वजन का सही अनुपात बॉडी मास इंडेक्स से पता चलता है, ऐसे में अगर आपका वजन लंबाई से ज्यादा है, तो आप मोटापे की श्रेणी में आते हैं यानी आपको अपनी लंबाई के हिसाब से वजन घटा लेना चाहिए लेकिन अक्सर यह देखने को मिलता है कि छोटे कद के लोगों को वजन घटाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके भी कई कारण लेकिन कुछ तरीकों को अपनाकर आप अपना वजन तेजी से घटा सकते हैं-
छोटे कद के लोगों को क्यों होती है वजन घटाने में समस्या
लम्बे लोगों में मांसपेशियों की अधिकता होती है और इस प्रकार उनका मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। इससे उन्हें कम समय में अधिक कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है। यदि आप लंबे होते हैं, तो आपकी मांसपेशियों में अधिक लचीलापन होता है, तो आराम करते समय या सोते वक्त आपका शरीर अधिक कैलोरी को जला लेता है यानी कि जितनी अधिक दुबली मांसपेशियां, उतनी बेहतर मेटाबॉलिज्म और उतनी ही आसानी से कैलोरी बर्न हो जाती है। हालांकि, शारीरिक गतिविधि यहां एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यानी कि कम एक्सरसाइज, ज्यादा वेटगेन। लंबे कद काठी के लोग नाटे कद वाले लोगों से जल्दी कोई भी एक्सरसाइज करने की क्षमता रखते हैं इसलिए वो जल्दी वेटलूज कर पाते हैं। इसी तरह डाइट को सही रखना बहुत जरूरी है। कोशिश करें कि अपनी भूख से थोड़ा सा कम खाएं ये आपको एक्सट्रा केलोरी गेन करने से बचाती रहेगी।
इन तरीकों से तेजी से कम कर सकते हैं वजन
वॉक
सबसे पहले तो आपको तीनों टाइम खाना खाने के बाद वॉक करना बहुत जरुरी है। खासकर रात का खाना खाने के बाद आपको तुंरत सोने के लिए नहीं जाना बल्कि आपको कुछ देर टहलना जरुर है।
जूस का न करें सेवन
आपको जानकर हैरानी होगी कि जूस पीने से आपको फलों का पूरा पोषण नहीं मिल पाता। जूस की दुकान पर ज्यादातर फलों के जूस में चीनी मिलाकर बेचते हैं, इसलिए आपको फलों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।
पुशअप्स
आपको कोशिश करनी चाहिए कि आप रोजाना पुशअप्स करें, इससे आपके शरीर में जमा फैट धीरे-धीरे बर्न हो जाता है। आप अगर लगातार पुशअप्स नहीं भी कर पा रहे हैं, तो आपको कोशिश करनी चाहिए कि रुक-रुककर पुशअप्स करें।
चीनी और रिफॉइन कार्बोहाइट्रेड का इस्तेमाल न करें
आपको खाने में चीनी न के बराबर खानी होगी। साथ ही मैदा, चावल, ब्रेड जैसी चीजें भी अपनी डाइट मे शामिल न करें।
वर्कआउट करें
आपको अगर तेजी से वजन कम करना है, तो आपको डाइट में कंट्रोल करने के साथ वर्कआउट भी करना होगा। आप एक्सर्साइज करने के अलावा साइकिलिंग, रेसिंग, वाकिंग कर सकते हैं। इसके अलावा आप यूट्यूब से फैट कम करने वाले वीडियोज की मदद से भी वजन कम कर सकते हैं।

 

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / गर्मियां आते ही चेहरे को पिंपल्स, फाइलाइन्स, टैनिंग जैसी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिसकी वजह से त्वचा अपनी प्राकृतिक चमक खोने लगती है। अगर आप भी ऐसा ही कुछ महसूस कर रहे हैं तो ट्राई करें मेथी-नींबू फेस पैक। यह फेस पैक न सिर्फ आपके चेहरे की खोई हुई रंगत वापस लौटाने में आपकी मदद करेगा बल्कि 40 की उम्र में भी आपके चेहरे पर बनाए रखेगा 20 वाला निखार। आइए जानते हैं क्या है इस फेस पैक को बनाने का तरीका।

मेथी-नींबू फेस पैक बनाने के लिए सामग्री-
-मेथी दाना- 1 चम्मच
-गुलाबजल- 4 बड़े चम्मच
-हल्दी- 2 चुटकी
-नींबू का रस- 1 बड़ा चम्मच

मेथी-नींबू फेस पैक बनाने की विधि-
मेथी-नींबू फेस पैक बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरी में 1 चम्मच मेथी दाना लें। मेथी को गर्म पानी में कुछ देर भिगोने के बाद इसका पेस्ट तैयार कर लें। अब मेथी के पेस्ट में दो चुटकी हल्दी, और 1 चम्मच नींबू का रस मिलाकर अच्छे से मिक्स करें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं। जब पेस्ट चेहरे पर हल्का गीला रह जाए तब इसे हल्के हाथों से रगड़कर साफ करके नॉर्मल पानी से चेहरा और गर्दन धो लें। इस फेस पैक को हफ्ते में 3 से 4 बार लगाने से आपके चेहरे पर निखार दिखने लगेगा।

खाना खजाना /शौर्यपथ / आपने कई तरह की पुडिंग जरूर खाई होगी। बच्चों को खासतौर से पुडिंग बहुत अच्छी लगती है। आज हम पेश कर रहे कोकोनट पुडिंग की रेसिपी।
सामग्री :
कच्चा नारियल -3/4
कच्चे नारियल का पानी-1 कप
दूध-1 कप
कंडेंस्ड मिल्क-1/2 कप
चीनी -2 चम्मच
खसखस (चाइना ग्रास पाउडर)- 1/2 चम्मच
पुडिंग बनाने के लिए सांचा

विधि :
सबसे पहले ताजे नारियल से पानी निकालें। अब नारियल के भूरे हिस्से को हटाएं और सफेद हिस्से को मिक्सर में डालकर पीस लें। एक भारी तले वाले बर्तन में नारियल पानी लेकर खसखस पाउडर को घोल लें। इसे तब तक गर्म करें, जब तक कि खसखस पूरी तरह घुल न जाए। एक दूसरे बर्तन में कंडेंस्ड मिल्क और सामान्य दूध गर्म करें। साथ में चीनी भी मिलाएं। अब इसमें खसखस का मिश्रण व पिसा हुआ नारियल मिलाएं। इस मिश्रण को सांचे में डालें, फिर इसे रूम टेम्परेचर पर आने दें। इसके बाद 30 मिनट के लिए फ्रिज में रखें। अगर पुडिंग के सांचे से निकालने में दिक्कत हो रही है, तो चाकू से धीरे-धीरे निकालें।

पुडिंग बनाने से पहले :
-इसको बनाने से पहले कुछ बातें समझना जरूरी हो जाता है।
- खसखस या चाइना ग्रास को हमेशा सामान्य तापमान पर पानी या अन्य तरल के साथ मिलाना चाहिए, उसके बाद ही गर्म करें।
- अगर खसखस चिपचिपा लगे, तो गर्म करने से पहले इसको भिगो दें और अगर यह चिपका हुआ है, तो घोलने के बाद ही इसे इस्तेमाल में लाएं। फिर मिक्स करने के तुरंत बाद ही इसे सांचे में डाल दें।
- फ्रिज में रखने से पहले इसको रूम टेम्परेचर पर जरूर लाएं।
- खसखस का पाउडर खरीदने से अच्छा है कि आप घर पर ही भूनकर पीस लें।
- अगर आप चाइना ग्रास का इस्तेमाल कर रही हैं, तो लंबा-लंबा काट कर पाउडर बना लें।
- खसखस या चाइना ग्रास की मात्रा ज्यादा ना रखें, वरना ये पुडिंग का टेक्सचर खराब कर सकता है। और हां, आर्टिफिशियल रंग का इस्तेमाल इसमें बिल्कुल भी न करें।

धर्म संसार / शौर्यपथ / शनि ग्रह के स्वामी भगवान शनिदेव को माना जाता है। शनिदेव के सिर पर स्वर्णमुकुट, गले में माला तथा शरीर पर नीले रंग के वस्त्र और शरीर भी इंद्रनीलमणि के समान। यह गिद्ध या कौवे पर सवार रहते हैं। इनके हाथों में धनुष, बाण, त्रिशूल रहते हैं। शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ माह की कृष्ण अमावस्या के दिन हुआ था। हालांकि कुछेक ग्रंथों में शनिदेव का जन्म भाद्रपद मास की शनि अमावस्या को माना गया है।
शनिदेव के अन्य नाम : यमाग्रज, छायात्मज, नीलकाय, क्रुर कुशांग, कपिलाक्ष, अकैसुबन, असितसौरी और पंगु इत्यादि। शनि को 33 देवताओं में से एक भगवान सूर्य का पुत्र माना गया है। उनकी माता का नाम छाया है। उनकी बहन का नाम देवी यमुना है। उनके भाई वैवस्वत मनु, यमराज आदि।
एक अन्य कथा के अनुसार भगवान शनिदेव का जन्म ऋषि कश्यप के अभिभावकत्व यज्ञ से हुआ माना जाता है। लेकिन स्कंदपुराण के काशीखंड अनुसार शनि भगवान के पिता सूर्य और माता का नाम छाया है। उनकी माता को संवर्णा भी कहते हैं लेकिन इसके पीछे एक कहानी है। राजा दक्ष की कन्या संज्ञा का विवाह सूर्यदेवता के साथ हुआ। संज्ञा सूर्यदेव के तेज से परेशान रहती थी तो वह सूर्य देव की अग्नि को कम करने का सोचने लगी।
दिन बीतते गए और संज्ञा ने वैवस्वत मनु, यमराज और यमुना नामक तीन संतानों को जन्म लिया। फिर संज्ञा ने निर्णय लिया कि वे तपस्या कर सूर्यदेव के तेज को किसी भी तरह से कम करेंगी लेकिन बच्चों के पालन और सूर्यदेव को इसकी भनक न लगे इसके लिए उन्होंने एक युक्ति निकाली उन्होंने अपने तप से अपनी ही तरह की एक महिला को पैदा किया और उसका नाम संवर्णा रखा। यह संज्ञा की छाया की तरह थी इसलिए इनका नाम छाया भी हुआ। संज्ञा ने छाया से कहा कि अब से मेरे बच्चों और सूर्यदेव की जिम्मेदारी तुम्हारी रहेगी लेकिन यह राज सिर्फ मेरे और तुम्हारे बीच ही बना रहना चाहिए।
यह कहकर संज्ञा वहां से चलकर पिता के घर पंहुची तो पिता ने कहा कि ये तुमने अच्‍छा नहीं किया तुम पुन: अपने पति के पास जाओ। जब पिता ने शरण नहीं दी तो संज्ञा वन में चली गई और घोड़ी का रूप धारण करके तपस्या में लीन हो गई। उधर सूर्यदेव को जरा भी आभास नहीं हुआ कि उनके साथ रहने वाली संज्ञा नहीं संवर्णा है। संवर्णा अपने नारीधर्म का पालन करती रही और छाया रूप होने के कारण उन्हें सूर्यदेव के तेज से कोई परेशानी नहीं हुई। सूर्यदेव और संवर्णा के संयोग से भी मनु, शनिदेव और भद्रा (तपती) तीन संतानों ने जन्म लिया।
कहते हैं कि जब शनिदेव छाया के गर्भ में थे तो छाया ने भगवान शिव का कठोर तपस्या किया था। भूख-प्यास, धूप-गर्मी सहने के कारण उसका प्रभाव छाया के गर्भ में पल रही संतान यानि शनिदेव पर भी पड़ा। फिर जब शनिदेव का जन्म हुआ तो उनका रंग काला निकला। यह रंग देखकर सूर्यदेव को लगा कि यह तो मेरा पुत्र नहीं हो सकता। उन्होंने छाया पर संदेह करते हुए उन्हें अपमानित किया।
मां के तप की शक्ति शनिदेव में भी आ गई थी उन्होंने क्रोधित होकर अपने पिता सूर्यदेव को देखा तो सूर्यदेव उनकी शक्ति से काले पड़ गए और उनको कुष्ठ रोग हो गया। अपनी यह दशा देखकर घबराए हुए सूर्यदेव भगवान शिव की शरण में पहुंचे तब भगवान शिव ने सूर्यदेव को उनकी गलती का अहसास करवाया। सूर्यदेव को अपने किए का पश्चाताप हुआ, उन्होंने क्षमा मांगी तब कहीं उन्हें फिर से अपना असली रूप वापस मिला। लेकिन इस घटना के चलते पिता और पुत्र का संबंध हमेशा के लिए खराब हो गया।
शनि ग्रह, तेल और शराब, जानिए उपाय
लाल किताब के अनुसार शनिवार के दिन मात्र 5 तरह के उपाय करने से शनि दोष दूर हो सकता है। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या आदि सभी तरह की शनि पीड़ा को शांत किया जा सकता है।
1. शराब पीने वाले पर शनि भगवान की वक्र दृष्टि बनी रहती है। शनिवार को शराब पीना सबसे घातक माना गया है। इससे आपके अच्छे-भले जीवन में तूफान आ सकता है।
2. शनिवार के दिन भैरव महाराज को शराब अर्पित करने से शनि दोष समाप्त हो जाते हैं।
3. शनिवार को एक कांसे की कटोरी में सरसों का तेल और सिक्का (रुपया-पैसा) डालकर उसमें अपनी परछाई देखें और तेल मांगने वाले को दे दें या किसी शनि मंदिर में शनिवार के दिन कटोरी सहित तेल रखकर आ जाएं। यह उपाय आप कम से कम पांच शनिवार करेंगे तो आपकी शनि की पीड़ा शांत हो जाएगी और शनिदेव की कृपा शुरू हो जाएगी।
4. शनि महाराज तो तेल चढ़ाने से भी शनि दोष दूर होते हैं। कहते हैं शनि महाराज की पीड़ा दूर करने के लिए हनुमानजी ने उनके शरीर पर तेल की मालिश की थी। इसीलिए तभी से उन पर तेल चढ़ता है।
5. शनिवार को पीपल के पेड़ में शाम को जल चढ़ाएं और तिल के तेल का दीपक जलाएं। ऐसा कम से कम 11 शनिवार करें। मान्यता अनुसार शनि देव के दुष्प्रभाव से बचने के लिए शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से शनिदोष खत्म होता है।

खाना खजाना /शौर्यपथ / गर्मियों में अक्सर फ्रूट कस्‍टर्ड की डिमांड हर घर में बढ़ जाती है। ऐसे में इस गर्मी के सीजन में अपनी किचन में कुछ अलग और टेस्टी ट्राई करें। आइए जानते हैं कैसे बनाया जाता है ब्रैड कस्‍टर्ड। यह खाने में भी टेस्‍टी होने के साथ जल्दी भी बनकर तैयार हो जाता है।

ब्रैड कस्‍टर्ड बनाने के लिए सामग्री-
-8-10 ब्रैड
-2 बड़े चम्‍मच कस्‍टर्ड पाउडर
-1/2 लीटर दूध
-1/2 कप चीनी
-5 ड्रॉप्‍स रोज एसेंस
-2 बड़े चम्‍मच बारीक कटे हुए ड्राई फ्रूट्स

ब्रैड कस्‍टर्ड बनाने की विधि-
ब्रैड कस्‍टर्ड बनाने के लिए सबसे पहले 8-10 ब्रैड के किनारों को कटकर उन्‍हें एक बड़े बर्तन में फैलाकर रख दें। इसके बाद थोड़े से दूध को अलग करके बाकी दूध को उबाल लें। अलग किए हुए दूध में कस्‍टर्ड डालें और उसे अच्‍छी तरह से मिक्‍स करें। ऐसा करते समय ध्‍यान रखें कि दूध में कस्‍टर्ड की गांठ न पड़े। दूध के उबलने पर उसमें चीनी और कस्‍टर्ड का घोल डाल लें। अब दूध को गाढ़ा होने तक पकाएं। इसके बाद आप ब्रेड पर तैयार कस्‍टर्ड के घोल को फैला लें और ड्राई फ्रूट से गार्निश करें। इतना करने के बाद लगभग 2 घंटे के लिए कस्‍टर्ड को फ्रिज में रख दें और ठंडा होने पर परोसें।

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)