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May 31, 2026
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ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / आपने अक्सर ये नोटिस किया होगा कि कोरियाई लड़कियों और लड़कों की स्किन कांच के समान चमकदार और मुलायम होती है. यही कारण है कि हर कोई उनकी तरह एक कांच की स्किन चाहता है. वहीं कोरियन स्किन के बढ़ते क्रेज को देखते हुए आज हम आपके लिए एक और फेस पैक लेकर आए है. चेहरे को चमकदार बनाने के लिए आप ओट्स और दूध को मिलाकर फेस पैक बना सकते हैं. अगर आप भी कोरियन ग्लास स्किन चाहते हैं तो इस ओट्स फेस पैक को लगा सकते हैं.
जानिए घर पर ओट्स से फेस पैक बनाने की विधि.
 * ओट्स के 3 बड़े चम्मच
* 2 बड़े चम्मच दूध
* 1/2 छोटा चम्मच शहद
* 1/2 कप पानी
इस फेस पैक को बनाने के लिए 3 बड़े चम्मच ओट्स को आधा कप पानी में उबाल लें. अब इसे सूखने दें और ग्राइंडर के बर्तन में रखें. इस पेस्ट को दूध में मिला लें फिर उसमें शहद डालें. इस फेस पैक को बनाकर अलग रख दें और चेहरे को पूरी तरह से साफ कर लें. अब फेसपैक को साफ चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगाएं पैक सूखने के बाद चेहरे की मसाज करें और फिर ठंडे पानी से धो लें. दूध त्वचा को साफ करता है इसके अलावा शहद त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद करता है. यह ओट्स फेस पैक कोरियन ग्लास स्किन पाने के लिए बेस्ट है.
 चमकदार त्वचा पाने के लिए ये फेसपैक आजमाएं |
1. हल्दी और शहद का फेसपैक:
1 चम्मच हल्दी
1 चम्मच शहद
1 चम्मच दूध
सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें, चेहरे और गर्दन पर लगाएं और गुनगुने पानी से धो लें.
2. दही और ओट्स का फेसपैक:
1 चम्मच दही
1 चम्मच ओट्स
1/2 चम्मच शहद
सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें, चेहरे और गर्दन पर लगाएं और गुनगुने पानी से धो लें.
3. एलोवेरा और नींबू का फेसपैक:
1 चम्मच एलोवेरा जेल
1/2 चम्मच नींबू का रस
1/2 चम्मच शहद
सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें, चेहरे और गर्दन पर लगाएं और गुनगुने पानी से धो लें.
4. चावल का पानी और बेसन का फेसपैक:
2 चम्मच चावल का पानी
1 चम्मच बेसन
1/2 चम्मच हल्दी
सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें, चेहरे और गर्दन पर लगाएं और गुनगुने पानी से धो लें.
5. टमाटर और दही का फेसपैक:
1 टमाटर
1 चम्मच दही
1/2 चम्मच शहद
टमाटर को पीस लें और दही और शहद के साथ मिला लें. चेहरे और गर्दन पर लगाएं फिर गुनगुने पानी से धो लें. रोजाना चेहरा धोएं और मॉइस्चराइज़ करें साथ ही सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें. पानी खूब पीएं स्वस्थ भोजन खाएं पर्याप्त नींद लें. इन नुस्खों को नियमित रूप से इस्तेमाल करने से आपको कोरियन लड़कियों जैसी चमकदार त्वचा पाने में मदद मिलेगी.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /आज नवरात्रि का पांचवा दिन है. देशभर में मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना हो रही है. इस दिन माता को पीले रंग का फूल चढ़ाने से हर मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मान्यता है कि माता के हर स्वरूप को अलग-अलग रंग के फूल प्रिय हैं. अगर हर दिन उस कलर के फूलों से माता रानी की आराधना की जाए तो मां प्रसन्न होती हैं और मन की मुरादें पूरी करती हैं. यहां जानिए नवरात्रि  में किस दिन कौन सा फूल जगत जननी मां दुर्गा को चढ़ाना चाहिए...
पहला दिन- चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है. माता को लाल जसुद और सफेद करेण के फूल अत्यंत प्रिय हैं. इस फूल को चढ़ाने से हर मनोकामनाएं पूरी होती है.
दूसरा दिन- माता ब्रह्मचारिणी की पूजा में मोगरे का फूल या सफेद रंग का फूल चढ़ाना चाहिए.
तीसरा दिन- मां चंद्रघंटा की पूजा करते समय कमल या शंखपुष्प चढ़ाएं. मान्यता है कि इससे देवी मां प्रसन्न होती हैं.
चौथा दिन- मां कुष्मांडा को चमेली या पीले रंग का फूल अत्यंत प्रिय है. इससे उनकी पूजा करने पर मां का आशीर्वाद मिलेगा.
पांचवां दिन- देवी स्कंदमाता की पूजा में पीले फूल चढ़ाएं. इस फूल को अर्पित करने से मां प्रसन्न होती हैं और हर तरह का सुख देती हैं.
छठां दिन- माता कात्यायनी की आराधना गेंदा यानी गलगोटा के फूल से करना चाहिए. मान्यता है कि इस फूल को चढ़ाने से मां प्रसन्न होती हैं और आशीर्वाद देती हैं.
सातवां दिन- मां कालरात्रि की पूजा में नीले रंग का फूल चढ़ाना चाहिए. मान्यता है कि यह फूल माता को बेहद प्रिय है.
आठवां दिन- मां महागौरी को मोगरे का फूल अत्यंत प्रिय है. माना जाता है कि इस फूल को चढ़ाने से परिवार पर माता रानी की कृपा सदैव बनी रहती है.
नौवां दिन- माता सिद्धिदात्री की पूजा पूजा होती है. उनकी पूजा में चंपा और जसुद का फूल चढ़ाने से धन-वैभव की प्राप्ति होती है.

  आस्था /शौर्यपथ /अयोध्या  रामनवमी के दिन वैज्ञानिक दर्पण के जरिए सूर्य की किरण को भगवान रामलला के मस्तक पर पहुंचाएंगे. इस दौरान सूर्य की किरण लगभग 4 मिनट तक रामलला के ललाट की शोभा बढ़ाएगा. जिसका शुक्रवार को पूर्वाभ्यास हुआ और प्रयोग पूर्ण रूप से सफल रहा. वैज्ञानिकों ने सफल परीक्षण के बाद यह स्पष्ट कर दिया कि भगवान रामलला का तिलक सूर्यदेव इस बार ही रामनवमी के मौके पर करेंगे. पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि मंदिर पूर्ण होने के बाद ही यह प्रयोग सफल हो सकेगा, लेकिन वैज्ञानिकों ने सूर्य की किरण को शुक्रवार को भगवान रामलला के मस्तक तक सफलतापूर्वक पहुंचाया.
   श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने जानकारी दी कि सूर्य के तिलक का सफल परीक्षण पूरा कर लिया गया है. वैज्ञानिकों ने जिस तरह से प्रयास किया है, वह बहुत सराहनीय और वह बहुत अद्भुत है, क्योंकि सूर्य की किरणें भगवान रामलला के ठीक ललाट पर पड़ी है. जैसे ही सूर्य की किरणें प्रभु राम के माथे पर पड़ी, वैसे ही पता चल रहा है कि भगवान सूर्य उदय कर रहे हैं.
   उन्होंने आगे कहा कि इतना ही नहीं, त्रेता युग में भी जब प्रभु राम ने अवतार लिया था तो उस दौरान सूर्य देव एक महीने तक अयोध्या में रुके थे. त्रेता युग का वह दृश्य अब कलयुग में भी साकार हो रहा है. जब हम प्रभु राम का आरती उतार रहे थे और सूर्य देव उनके माथे पर राजतिलक कर रहे थे तो वह दृश्य बहुत अद्भुत दिख रहा था.

सेहत टिप्स /शौर्यपथ / हम सभी ने कभी न कभी अपने हाथों या पैरों में झुनझुनी सनसनी महसूस की होगी. ऐसा तब हो सकता है, जब हम अपनी हाथों के बल सो जाते हैं या बहुत देर तक पैरों को क्रॉस करके बैठे रहते हैं. आप इसको पेरेस्टेसिया भी कह सकते हैं. झुनझुनी के अलावा, आप अपने हाथों और पैरों में या उसके आसपास सुन्न, दर्द या कमजोरी भी महसूस कर सकते हैं. इस परेशानी का कारक सामान्यतया, दबाव, ट्रॉमा या तंत्रिकाओं में होने वाली किसी तरह की क्षति से हो सकता है. इसके अलावा और क्या कारण होते हैं, हम आपको स्टोरी में आगे बताने वाले हैं.
हाथ और पैर में होने वाली झुनझुनी
मधुमेह न्यूरोपैथी
मधुमेह न्यूरोपैथी तब होती है जब मधुमेह के कारण नर्वस सिस्टम खराब होता है.  यह टांगों और पैरों और कभी-कभी बांहों और हाथों को प्रभावित कर सकता है. नसों को नुकसान पहुंचाने के अलावा, यह आपकी नसों को आपूर्ति करने वाली ब्लड वेसेल्स को भी नुकसान पहुंचा सकता है. जब नसों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती है, तो वे ठीक से काम नहीं कर पाती हैं जिसके कारण झुनझुनी शुरू होती है.
सूखी नस
शरीर के कई हिस्सों में नस दब सकती है और हाथों या पैरों को प्रभावित कर सकती है, जिससे झुनझुनी, सुन्नता या दर्द हो सकता है. आपकी निचली रीढ़ की हड्डी में दबी हुई नस के कारण ये संवेदनाएं आपके पैर के पीछे और आपके पैर तक फैल सकती हैं.
किडनी खराब
किडनी फेल्योर तब होता है जब आपकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही होती है. उच्च रक्तचाप (उच्च रक्तचाप) या मधुमेह जैसी स्थितियां किडनी की फेल होने का कारण बन सकती हैं. जब आपकी किडनी ठीक से काम नहीं करती है, तो किडनी खराब होने पर अक्सर टांगों या पैरों में झुनझुनी होने लगती है.
झुनझुनी से निजात पाने के लिए इन विटामिन को करें शामिल - विटामिन बी 12, विटामिन बी6, विटामिन बी1, विटामिन ई, विटामिन बी9, या फोलेट.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / रामभक्त हनुमान को संकटमोचन कहते है. अपने भक्तों को हनुमान जी हर भय, पीड़ा से मुक्त रखते हैं. दरअसल, हनुमान जी का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हुआ था. इसलिए हर साल चैत्र पूर्णिामा को हनुमान जयंती मनाई जाती है. बता दें कि इस साल हनुमान जयंती के मौके पर एक अध्दुत संयोग बन रहा है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी भगवान शिव के अवतार हैं और उन्होंने त्रेतायुग में प्रभु श्री राम की मदद के लिए यह अवतार लिया था. वैदिक पंचांग के मुताबिक इस साल चैत्र शुक्ल पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 23 अप्रैल को 03 बजकर 25 मिनट पर होगा.
हनुमान जयंती 2024 पर बना अदृभुत संयोग |
ऐसा कहा जाता है कि जब हनुमान जी का जन्म हुआ था तो उस दिन मंगलवार था. इस साल भी हनुमान जयंती के दिन मंगलवार है. इसलिए मंगलवार को हनुमान जी का जन्म होने कि वजह से उस दिन ज्यादातर लोग व्रत रखते हैं और बजरंगबली की पूजा भी करते हैं.
23 अप्रैल के दिन चित्रा नक्षत्र और वज्र योग है. वज्र योग 23 अप्रैल की सुबह से लेकर 24 अप्रैल को सुबह 04 बजकर 57 मिनट तक है. वहीं चित्रा नक्षत्र भी सुबह से लेकर रात 10 बजकर 32 मिनट तक है, उसके बाद स्वाति नक्षत्र है.
हनुमान जयंती 2024 मुहूर्त
हनुमान जयंती का शुभ मुहूर्त सुबह 04 बजकर 20 मिनट से 05 बजकर 04 मिनट तक ही रहेगी. वहीं इस साल अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक है. उस दिन आप हनुमान जी की पूजा सुबह 09 बजकर 03 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट के बीच कर सकते है. उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक है. वहीं अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से दोपहर 01 बजकर 58 मिनट तक है.
हनुमान जी को प्रसन्न करने के उपाय |
1.   हनुमान जी का दिल बहुत ही उदार हैं, इसलिए आपको हमेशा लोगों के लिए उदारता दिखानी चाहिए. खासतौर पर आपको हनुमान जयंती पर गरीबों में अन्न जरूर बांटना चाहिए.
2.  हनुमान जी श्रीराम के परभक्त माने जाते हैं, इसलिए आपको हनुमान जयंती पर भगवान राम की स्तुति भी करनी चाहिए, इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं.
3.  हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें बूंदी, लड्डू का प्रसाद जरूर चढ़ाएं. साथ ही हनुमान जयंती पर उन्हें केसरिया रंग का सिंदूर जरूर चढ़ाएं.
4.  इस दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, बजरंग बाण का पाठ करने से हनुमान जी की कृपा हमेशा अपने भक्तों पर बरसती रहती है.

  आस्था /शौर्यपथ /कैसे लगाएं लड्डू गोपाल को भोग : बाल गोपाल के कई रूप निराले हैं, वहीं कई लोग उनके बाल स्वरूप को लड्डू गोपाल भी कहते हैं. कई परिवारों में तो लड्डू गोपाल को परिवीर के सदस्य की तरह ही माना जाता है और उनकी सेवी की जाती है. लेकिन क्या आप जानते है इनको घर में रखने के कई नियम होते हैं जिनका पालन किया जाए तो घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. दरअसल, लड्डू गोपाल की सेवा-पूजा से लेकर उन्हें स्नान कराने, सुलाने, उठाने और भोग लगाने से जुड़ी कई महत्तवपूर्ण बातें शास्त्रों में बताई गई हैं. ठीक इन कार्यों को करने के दौरान बोले जाने वाले मंत्रों का भी उल्लेख मिलता हैं.
लड्डू गोपाल को कराएं इन चीजों से स्नान
1. गोपी चंदन लड्डू गोपाल को अति प्रिय है. ऐसे में आप लड्डू गोपाल को रोजाना गोपी चंदन से स्नान कराएं. अगर आप गोपी चंदन से स्नान करवाते है तो उससे बाल गोपाल प्रसन्न रहते हैं.
2. लड्डू गोपाल को स्नान कराते समय केसर का प्रयोग करें. केसर से स्नान कराने से उनका मन हर्षित रहता है और उनकी कृपा से घर में खुशहाली का आगमन होता है.
3. रोजाना पंचामृत से स्नान कराने पर मनाही है. बता दें कि पंचामृत से स्नान सिर्फ मंदिरों में करवाया जाता है. घर में लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान सिर्फ किसी उत्सव या जन्माष्टमी के मौके पर ही करवाना चाहिए.  
जाने भोग लगाते समय किस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए -
जब आप बाल गोपाल को भोग लगाएं तो उस समय इस मंत्र का उच्चारण करें ' त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाणे सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।। आपको इस मंत्र का जाप करना चाहिए. इस मंत्र का अर्थ है कि मेरे पास जो भी है भगवान वो सब आपने ही दिया है और अब मैं उसी को भोग के रूप में आपको अर्पित कर रहा हूं. इसे ग्रहण करें और अपनी कृपा मुझ पर बनाएं रखें.  जब आप भोग लगा रहे हो तब इस मंत्र का उच्चारण करें और फिर मंदिर में पर्दा कर दें और वहां से हट जाएं. ऐसा कहा जाता है कि लड्डू गोपाल राधा रानी के भोग पाते हैं.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /आज चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा पांचवे रूप स्कंदमाता  की पूजा होती है. माता दुर्गा के पांचवें स्वरूप को यह नाम भगवान कार्तिकेय से मिला है और इस रूप में माता के ममतामई स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है. संतान की कामना करने वालों को मां के इस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए. आइए जानते हैं नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता रूप की पूजा कैसे करनी चाहिए और किस चीज का लगाना चाहिए भोग.
मां स्कंदमाता का रूप
मां स्कंदमाता स्वरूप में माता चार भुजाधारी हैं और दाई ओर की ऊपरी भुजा में कार्तिकेय को गोद में लिया है. निचली भुजा में कमल का पुष्प धारण करती हैं. बाई ओर की ऊपरी भुजा अभय मुद्रा में और निचली भुजा में सफेद रंग का कमल धारण किए हैं. माता की सवारी सिंह है और कमल पर विराजने के कारण पद्मासना कहीं जाती हैं.
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा के लिए प्रात: स्नान के बाद पीले रंग का वस्त्र धारण कर पूजा करें. पूजा के लिए लाल पुष्प लेकर माता का स्मरण करें. देवी को गंध, अक्षत, धूप, फूल, फल, बताशा, पान, लौंग, इलायची अर्पित करें. धूप और दीप जलाएं. माता को उनके प्रिय केले से भोग लगाएं. माता की आरती करें और शंख बनाएं. माता को लाल रंग की चूनर और सुहाग की वस्तुएं अर्पित करें. मां स्कंदमाता की पूजा में धनुष बाण अर्पित करने का विशेष महत्व है.
मां स्कंदमाता की पूजा का मंत्र
मां स्कंदमाता की पूजा के लिए इस मंत्र का करें जाप
या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /इस वर्ष 9 अप्रैल से शुरू हुए चैत्र नवरात्रि में 14 अप्रैल रविवार को माता के मां कात्यायनी रूप की पूजा होगी. ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण माता को कात्यायनी नाम मिला है. माता के रूप की पूजा अर्चना से विवाह संबंधी रुकावट दूर होने के साथ-साथ सिद्धि की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं माता के कात्यायनी स्वरूप, पूजा विधि और मंत्र.
मां कात्यायनी का स्वरूप
स्वर्ण आभा से दमकती कात्यायनी स्वरूप में माता चार भुजाधारी हैं. माता का यह रूप शस्त्र धारण करने वाला है. शेर पर सवार माता बाएं भुजाओं में कमल और खड्ग धारण करती हैं और दाएं भुजाएं स्वास्तिक और आशीर्वाद की मुद्रा में हैं. माता ने इसी रूप में राक्षसराज महिषासुर का संहार किया था. दानवों, पापियों और असुरों का नाश करने के कारण माता को  महिसासुरमर्दिनी कहा जाता है. पुराणों के अनुसार, ऋषि कात्यायन की पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण माता को कात्यायनी का नाम मिला है.
मां कात्यायनी की पूजा विधि
चैत्र नवरात्रि के छठे दिन माता के कात्यायनी रूप की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करने के बाद पीले वस्त्र धारण कर हाथों के लाल पुष्प लेकर माता का आह्वान करें. मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर पूजा विधि शुरू करें. माता को पुष्प, गंध, रोली अक्षत, कुमकुम अर्पित करें. माता के इस रूप को श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ानी चाहिए. इसके लिए लाल रंग की चुनरी, सिंदूर, बिंदी, लाल चूड़ियां माता को चढ़ाएं. आरती करें और देसी घी के दीपक जलाएं. पूजा के दौरान ऊं देवी कात्यायन्यै नम: का जाप करें.
विवाह के लिए माता की पूजा
माता के इस रूप की पूजा से विवाह में आ रही परेशानियों से मुक्ति मिलती है. शीघ्र विवाह के योग बनते हैं. नवविवाहितों के जीवन में आ रही अड़चने दूर होती हैं.

सेहत टिप्स /शौर्यपथ / वैसे तो तनाव लेना मेंटल हेल्थ के लिए अच्छा नहीं होता है. इससे निकलने के लिए लोग स्ट्रेस मैनेजमेंट थैरेपी, योग और ध्यान करते हैं. आजकल तो बच्चे और किशोर भी इस समस्या की चपेट में आ रहे हैं. इसके कारण उनके कामकाज और रिश्तों में नकारात्मक असर पड़ता है. हालांकि, आज हम आर्टिकल में तनाव लेने के फायदों के बारे में बात करेंगे. यह आपको थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे का विज्ञान क्या है इसके बारे में आपको बताएंगे, ताकि आपको इसे समझने में आसानी हो. तो आइए जानते हैं.
तनाव लेने के क्या हैं फायदे -
- तनाव आपके दिमाग और शरीर को बाहरी परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता विकसित करता है. लेकिन जो लोग इसको सकारात्मक तरीके से नहीं ले पाते हैं, उनपर स्ट्रेस हावी हो जाता है. फिर इससे मानसिक और शारीरिक समस्याएं पैदा होती हैं.
- तनाव की स्थिति में आपके ब्रेन में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. इससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता अच्छी होती है. इस स्थिति में आप चीजों पर बेहतर तरीके से फोकस कर पाते हैं और निर्णय ले पाते हैं.
- इससे मस्तिष्क में स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण और विकास में भी मदद मिल सकती है, जिससे मेंटल हेल्थ बेहतर होती है.
- यह आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करता है. दरअसल, तनाव की स्थिति में शरीर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स सक्रिय रूप से काम करते हैं और इसके चलते संक्रामक रोगों से बचाव होता है.
- हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, तनाव की स्थिति में शरीर में कोर्टिकोस्टेरोन स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकता है.
कैसे करें स्ट्रेस मैनेज
- तनाव पर नियंत्रण के लिए आपको योग, ध्यान और ब्रीदिंग एक्सरसाइज पर ध्यान देना होगा. वहीं, जब भी आपको तनाव महसूस हो आप खुद को शांत करने की कोशिश और मुख्य वजह जानने की कोशिश करें.
- अगर आपसे स्ट्रेस मैनेज नहीं हो पा रहा है, तो आप इस बारे में दूसरों से बात करें. इससे आपको रिलीफ महसूस होगा और  इससे निकलने का हल भी मिल सकता है. मेंटल हेल्थ को अच्छा बनाए रखने के लिए अपने खान-पान पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी होता है.

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /अदरक एक ऐसा मसाला है जिसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल चाय बनाते समय किया जाता है. यह चाय के स्वाद को चार गुना बढ़ा देता है. वहीं, इसका उपयोग सब्जी को स्वादिष्ट बनाने में भी किया जाता है. इसके अलावा आप इसका इस्तेमाल साफ-सफाई के लिए भी कर सकते हैं. आप अदरक के एक टुकड़े से गंदे बेसिन और फर्श की सफाई भी कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल कैसे करना है, आगे आर्टिकल में बताने वाले हैं.
अदरक के 4 क्लीनिंग हैक्स
1- वॉश बेसिन की सफाई के लिए आप अदरक रस को एक मग पानी में घोल लीजिए. फिर इसमें 2 चम्मच बेकिंग सोडा  मिलाइए और वॉश बेसिन में डालकर स्क्रब से रगड़ें. इससे आपका बेसिन 1 मिनट में शीशे की तरह चमकदार और बैक्टीरिया फ्री हो जाएगा.
2- वहीं, फर्श और फर्नीचर की चिकनाई दूर करने के लिए आप 1 कप सिरके में 1 चम्मच अदरक का पेस्ट मिलाकर घोल तैयार कर लीजिए. फिर इस घोल को स्प्रे बॉटल में भरें और फर्श व फर्नीचर पर स्प्रे करके सूखे कपड़े से पोंछ दीजिए. इससे मिनटों में चिपचिपापन छूमंतर हो जाएगा.
3- आप एक टुकड़े अदरक से कीड़ों-मकौड़ों से भी छुटकारा पा सकते हैं. इसके लिए अदरक का रस थोड़े से पानी में मिलाकर घोल तैयार कर लीजिए. फिर इसे स्प्रे बॉटल में स्टोर करिए. अब इस घोल को घर के कोनों में स्प्रे कर दीजिए. इससे मक्खी, मच्छर, छिपकली, कॉकरोच घर में घुसने नहीं पाएंगे. उन्हें इसकी महक पसंद नहीं आती है.
4- घर को बैक्टीरिया फ्री बनाने के लिए अदरक का रस पानी में मिलाकर घर में हर जगह छिड़क दीजिए. इससे घर में छुपे हुए बैक्टिरिया भी चुटकियों में गायब हो सकते हैं.

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