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May 31, 2026
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 व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /9 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि का त्योहार शुरू हो रहा है. इन नौ दिनों में माता के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना बहुत ही विधि-विधान से की जाएगी. बता दें कि जिस तरह से इन नौ दिनों में माता के पूजा-पाठ का विधान है उसी तरह से इन नौ दिनों में माता को भोग लगाने का भी महत्व है. ऐसा माना जाता है कि इस दौरान अगर देवी को उनका पसंदीदा भोग लगाते हैं तो मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामना शीघ्र पूरी होती है. ये भी माना जाता है कि अगर देवियों के दिन और रुचि के अनुसार उनको भोग लगाया जाए तो इससे देवी मां से वह जल्दी प्रसन्न होती हैं और भक्त को दोगुने फल की प्राप्ति होती है, इसके साथ ही भक्तों के सभी कष्ट भी दूर हो जाते हैं. आइए जानते हैं माता को इन नौ दिनों में क्या-क्या भोग लगाना चाहिए.
चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में नौ तरह के लगाएं भोग
    पहले दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए.
    दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को पंचामृत का भोग लगाना चाहिए.
    तीसरे दिन मां चंद्रघंटा मां को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए.
    चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाना चाहिए.
    पांचवें दिन मां स्कंदमाता को चीनी, केला का भोग लगाना चाहिए.
    छठे दिन मां कात्यायनी को मीठे पान का भोग लगाना चाहिए.
    सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए.
    आठवें दिन मां महागौरी को नारियल का भोग लगाना चाहिए.
    नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को खीर, पूरी, हलवा का भोग लगाना चाहिए.

  व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /मीठे की चाहत आमतौर पर आपके मुंह में पानी ला देती है, फिर वो चाहे दिन हो, शाम हो या रात हो. इसके अलावा, त्योहारी सीज़न के दौरान इसे खाने की चाहत ज्यादा महसूस होती है. नवरात्रि का त्योहार भी इसके लिए बिल्कुल परफेक्ट है. इस दौरान कई लोगों को अपनी मीठे की चाहत को रोकना पड़ता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारी अधिकांश पसंदीदा मिठाइयों में ऐसी सामग्रियां शामिल होती हैं जिनसे नौ दिनों के व्रत में नहीं का सकते. उदाहरण के लिए, गुलाब जामुन, जलेबी, खीर, हलवा, सभी में मैदा या चावल होता है, जिसे व्रत में नहीं खाया जा सकता है. लेकिन उम्मीद मत खोइए, क्योंकि कई दूसरी स्वादिष्ट मिठाइयाँ भी हैं जिनका आप आनंद ले सकते हैं. यहां, हम आपके साथ पांच ऐसी मिठाइयां शेयर करेंगे जिनका न केवल स्वाद लाजवाब होगा बल्कि ये सिर्फ 30 मिनट से भी कम समय में तैयार हो जाएंगी.
व्रत के लिए मिठाइयाँ: 5 स्वादिष्ट व्रत के लिए मिठाइयों की रेसिपी जिन्हें आपको जरूर ट्राई करना चाहिए:
1. साबूदाना खीर
साबूदाना सबसे लोकप्रिय और बहुमुखी व्रत सामग्रियों में से एक है. आपको ये जानकर ख़ुशी होगी कि आप इसका इस्तेमाल स्वादिष्ट खीर बनाने में भी कर सकते हैं. आपको बस साबूदाना, इलायची पाउडर, केसर, दूध और चीनी चाहिए. यह नियमित खीर की तरह ही मुलायम और मलाईदार है और इस व्रत के मौसम में आपको इसे जरूर आज़माना चाहिए.
2. साबूदाना लड्डू
अगर आप लड्डू के शौकीन हैं, तो ये साबूदाना के लड्डू नवरात्रि के दौरान आपके पसंदीदा बन जाएंगे. आप इस मिठाई को केवल तीन सामग्रियों से बना सकते हैं: साबूदाना, घी, और चीनी, बस इतना ही! ऐसी मिठाई के साथ जिसे बनाना बहुत आसान है, क्या कोई कारण है कि आपको इसे नहीं आज़माना चाहिए? हमें नहीं लगता! व्रत के दौरान इसे एक बार जरूर ट्राई करना चाहिए.
3. मखाने की खीर
खीर की एक और स्वादिष्ट किस्म जो आपका ध्यान आकर्षित करती है वह है मखाना खीर. इस रेसिपी में चावल की जगह भुने हुए मखाने और काजू को दूध में उबाला जाता है. नतीजा यह स्वादिष्ट खीर है जो कुछ ही समय में आपकी स्वीट क्रेविंग को संतुष्ट कर देगी. इसे कटे हुए पिस्ता और केसर के धागों से सजाएं और इसकी अच्छाइयों का आनंद लें.
4. सेब की रबड़ी
कुछ अनोखा आज़माना चाहते हैं? इस सेब रबड़ी के अलावा और कुछ न देखें. सबसे पहले, आपकी रबड़ी में सेब रखने का विचार अजीब लग सकता है. लेकिन हम पर विश्वास करें, एक बार जब आप इसे आज़मा लेंगे, तो पीछे नहीं हटेंगे. यह रबड़ी समृद्ध, मलाईदार और पौष्टिक है, जो इसे फेस्टिवल सीजन के लिए एकदम सही बनाती है. आप इस रबड़ी का स्वाद गर्म और ठंडा दोनों तरह से ले सकते हैं.
5. पनीर मालपुआ
मालपुआ एक लोकप्रिय उत्तर भारतीय मिठाई है, जो आमतौर पर त्योहारों के दौरान बनाई जाती है. यह आम तौर पर मैदा या आटे का इस्तेमाल करके बनाई जाती है, लेकिन आप इसे पनीर से भी बना सकते हैं जिससे आप इसको व्रत में खा सकते हैं. इसमें अरारोट भी होता है, जो सभी सामग्रियों को एक साथ बांधने में मदद करता है. इसे चीनी की चाशनी में अच्छी तरह से भिगो दें और इसका स्वाद पूरी तरह से चखने के लिए गर्मागर्म परोसें.

 व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /नवरात्रि  में नौ दिन माता की पूजा अर्चना की जाती है. हर साल चैत्र नवरात्रि  चैत्र शुक्ल के प्रतिपदा के दिन से शुरू होती है. इस साल 9 अप्रैल बुधवार को चैत्र नवरात्रि शुरू होगी. भक्त नौ दिन व्रत रखकर माता के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना करेंगे. हर वर्ष नवरात्रि पर माता अलग-अलग सवारियों पर आगमन और प्रस्थान करती हैं. जानिए इस चैत्र नवरात्र को माता किस पर सवार होकर आएंगी और किस पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी और उसका क्या होगा असर.
घोड़े पर पधारेंगी माता
  नवरात्रि जिस दिन से शुरू होती है उसके आधार पर ही माता की सवारी निश्चित होती है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, मंगलवार और शनिवार को नवरात्रि की शुरूआत शुभ संकेत वाली नहीं होती है. इस बार चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल यानी मंगलवार को शुरू होगी. मंगलवार और शनिवार को नवरात्रि शुरू होने पर माता घोड़े पर सवार होकर पधारती हैं. माता की सवारी घोड़ा होना सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में बड़े बदलावों की ओर संकेत करता है. इसे युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ या अकाल जैसी परेशानियों का भी संकेत माना जाता है.  
हाथी पर प्रस्थान करेंगी माता
  इस बार चैत्र नवरात्रि 17 अप्रैल को राम नवमी के दिन समाप्त होगी और उस दिन बुधवार है. नवरात्रि की समाप्ति बुधवार को होने पर माता हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं. हाथी की सवारी पर प्रस्थान के शुभ संकेत वाला माना जाता है. यह अच्छी बारिश, अच्छी फसल और किसानों को भरपूर फसल प्राप्त करने का संकेत देती है.
घट स्थापना का मुहूर्त
  इस बार चैत्र नवरात्रि को घट स्थापना का मुहूर्त 9 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 12 मिनट से 10 बजकर 23 मिनट तक है. चैत्र नवरात्रि के प्रथ्रम दिन पूजा पाठ के लिए 4 घंटे 11 मिनट का समय होगा. इस दिन घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त भी है. दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक यानी 50 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना की जा सकती है.

टिप्स /शौर्यपथ / छोटा सा दिखने वाला लहसुन आपकी सब्जी का स्वाद तो बढ़ाता है साथ में सेहत को भी कई लाभ पहुंचाता है. आप रोज इसकी एक कली खा लेते हैं, तो इसके अनगिनत लाभ मिलेंगे. इसमें कार्बोहाइड्रेट्स, कॉपर, फॉस्फोरस, डायटरी फाइबर, प्रोटीन, पोटैशियम, आयरन, विटामिन सी, बी6, मैंगनीज, कैल्शियम, सेलेनियम, फाइबर आदि से भरपूर होता है. तो चलिए जानते हैं लहसुन के औषधीय गुणों के बारे में
लहसुन के सेहत लाभ क्या हैं
- सूजन संबंधी विकारों को दूर करने में लहसुन बहुत लाभकारी होता है. इसकी एक कली आप खा लेते हैं, तो फिर आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होगा. इसमें पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो इम्यूनिटी बूस्ट करता है.
- लहसुन खाने से आपकी हार्ट हेल्थ भी अच्छी बनी रहती है. यह ब्लड क्लॉट बनने से भी रोकता है. इससे हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा कम होता है.
- लहसुन के सेवन से पाचन तंत्र भी मजबूत होता है. इससे डाइजेस्टिव सिस्टम भी समस्याओं से बचा रहता है. गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल इंफेक्शन को कम करता है, क्योंकि इसमें एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज होती हैं.
- कच्चा लहसुन खाने से पेट के कीड़े बाहर निकल जाते हैं मल मूत्र के सहारे. अच्छी बात यह है कि यह खराब बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है और आंत में अच्छे बैक्टीरिया को प्रोटेक्ट करता है.

  ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / सफेद बाल आज के समय की एक बड़ी समस्या में से एक है. छोटे से लेकर बड़ों तक में ये समस्या देखी जा सकती है. असल में कई लोग बालों को काला करने के लिए मार्केट में मिलने वाले हेयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन लगातार इन चीजों का इस्तेमाल बालों के लिए हानिकारक हो सकते हैं. क्योंकि मार्केट में मिलने वाले हेयर प्रोडक्ट में केमिकल होता है. तो अगर आप भी बिना किसी केमिकल वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल किए बालों को काला करना चाहते हैं तो आप घरेलू उपाय अपना सकते हैं. आज हम आपको एक ऐसी चीज के बारे में बता रहे हैं जिसे आमतौर पर सुबह ब्रेकफास्ट में खाया जाता है. जी हां आपने सही गेस किया. अंडा एक ऐसी सामग्री है जिसे सबसे ज्यादा सुबह ब्रेकफास्ट में खाया जाता है. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि अंडे से बालों को काला किया जा सकता है.
क्या अंडा बालों के लिए अच्छा है-
अंडे की सफेदी में मजबूत और हेल्दी बालों के लिए प्रोटीन, कैल्शियम, सेलेनियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और पोटैशियम होता है. वहीं, अंडे की सफेदी का इस्तेमाल ऑयली बालों के लिए किया जा सकता है. वहीं अंडे की जर्दी रूखे बालों को पोषण देने और उन्हें चमकदार और झड़ने से रोकने के लिए बेहतर होती है.
बालों को काला करने के लिए कैसे करें अंडे का इस्तेमाल-
बालों को काला करने के लिए आप अंडे का इस्तेमाल कर सकते हैं. आपको सरसों, नारियल के तेल में अंडे का सफेद भाग डालकर मिलाना है. आप इसमें नींबू का रस भी मिला सकते हैं. इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं और इस मिश्रण को बालों पर लगाएं 2-3 घंटे बाद बालों को धो लें. आप हफ्ते में 2 बार इसे अप्लाई कर सकते हैं.

 सेहत टिप्स /शौर्यपथ / हमारी अच्छी सेहत के लिए डॉक्टर हमें फल खाने की सलाह देते हैं, जिससे हमें विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर प्राप्त होते हैं. उन्हीं में से एक है संतरा, संतरा ऐसा फल है जिसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, इसमें मौजूद पोषक तत्व हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं. संतरे के सेवन से हमारी स्किन पर ग्लो आता है और हमारी स्किन में कसावट भी संतरे में मौजूद विटामिन सी की वजह से आती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि संतरे खाने के कई नुकसान भी हैं. अगर नहीं तो आज हम आपको उन लोगों के बारे में बताएंगे जिन्हें संतरा खाने से बचना चाहिए.
किन लोगों को नहीं खाना चाहिए संतरे
1. कब्ज से पीड़ित : ऐसे लोग जिन्हें कब्ज और एसिडिटी की समस्या है, उन लोगों को संतरे का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए.
2. दांतों के दर्द से पीड़ित : ऐसे लोग जो दांतों की परेशानी से पीड़ित हैं उन लोगों को संतरा नहीं खाना चाहिए. दांत की समस्या से परेशान लोगों के संतरा खाने से संतरा दांत में मौजूद कैल्शियम के साथ मिलकर बैक्टीरिया उत्पन्न करता है जिससे इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.
3.जोड़ों के दर्द से पीड़ित : ऐसे लोग जिन्हें हड्डियों और जोड़ों का दर्द सता रहा है, उन्हें भी संतरे का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए. संतरे का सेवन आपके दर्द में इजाफा कर सकता है.
4.किडनी की समस्या से पीड़ित : विशेषज्ञ के अनुसार जो लोग किडनी की समस्या से परेशान हैं, ऐसे लोगों को भी संतरे का सेवन नहीं करना चाहिए. इससे उनकी परेशानी और ज्यादा बढ़ सकती है.
5. सीने में जलन से पीड़ित : विशेषज्ञों की मानें तो ऐसे लोगों को भी संतरे का सेवन नहीं करना चाहिए, जिन्हें सीने में जलन की समस्या हो. संतरे में एसिडिक गुण पाया जाता है, अगर आप संतरे का सेवन करते हैं तो हार्टबर्न की समस्या और अधिक बढ़ सकती है.
खाली पेट संतरे का सेवन नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए कोशिश करें कुछ खाने के बाद ही संतरा खाएं. शाम के समय संतरा खाने से परहेज करें.

 व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / अक्षय तृतीया का हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व होता है. प्रतिवर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया मनाई जाती है. इस दिन पूजा-पाठ करने पर माना जाता है कि जीवन से सभी तरह के दुख और कष्ट हट जाते हैं और जीवन में खुशहाली आने लगती है. घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए अक्षय तृतीया की पूजा की जाती है. मान्यतानुसार अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी  का पूजन होता है. जानिए इस साल कब पड़ रही है अक्षय तृतीया और किस तरह की जा सकता है अक्षय तृतीया पर पूजा संपन्न.
अक्षय तृतीया कब है |
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अक्षय तृतीया 10 मई, शुक्रवार के दिन पड़ रही है. तृतीया तिथि का प्रारंभ 10 मई, सुबह 4 बजकर 17 मिनट पर होगा और इसका समापन 11 मई के दिन सुबह 2 बजकर 50 मिनट पर हो जाएगा. अक्षय तृतीया की पूजा का शुभ मुहूर्त 10 मई के दिन सुबह 5 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट के बीच है. अक्षय तृतीया पर पूरा दिन अबूझ मुहूर्त रहता है. माना जाता है कि अबूझ मुहूर्त में जो भी कार्य किए जाते हैं वे अत्यधिक सफल रहते हैं. इस दिन भगवान विष्णु  और मां लक्ष्मी की पूजा का अत्यधिक महत्व होता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम का जन्म हुआ था. मान्यतानुसार अक्षय तृतीया के दिन सोने की खरीदारी अत्यधिक शुभ होती है. कहते हैं इस दिन घर लाई हर चीज फलती है.
अक्षय तृतीया की पूजा
सुबह सवेरे उठकर स्नान किया जाता है और स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं. इसके बाद मंदिर में दीप प्रज्वलित किया जाता है. माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूरे मनोभाव से पूजा की जाती है, आरती गाई जाती है और भोग लगाकर पूजा का समापन होता है.
अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
अक्षय तृतीया पर मां लक्ष्मी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुम को निश दिन सेवत, हर विष्णु विधाता....
ॐ जय लक्ष्मी माता...।।
उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता
सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता
ॐ जय लक्ष्मी माता...।।
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धि धन पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता...।।
तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता
कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता
ॐ जय लक्ष्मी माता...।।
जिस घर तुम रहती सब सद्गुण आता
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता
ॐ जय लक्ष्मी माता...।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता
ॐ जय लक्ष्मी माता...।।
शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता...।।
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता
ॐ जय लक्ष्मी माता...।।

  वास्तु टिप्स /शौर्यपथ /वास्तु शास्त्र में हर एक चीज का अपना महत्व है. इसमें दिशाओं का खास ध्यान रखा जाता है. इसलिए घर बनाते समय वास्तु शास्त्र का लोग बहुत ध्यान देते हैं. ऐसे में आज हम आपको यहां पर किचन की खिड़की में फिटकरी बांधने के क्या फायदे होते हैं, उसके बारे में बताएंगे, तो आइए बिना देर किए जानते हैं.
खिड़की में फिटकरी बांधने के फायदे -
1- अगर आप फिटकरी को कमरे की खिड़की पर लटका देते हैं, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है. इससे वास्तु दोष दूर  होता है. इसके अलावा आप फिटकरी को काले कपड़े में बांधकर खिड़की पर लटकाएं इससे आर्थिक स्थिति अच्छी होती है.
2- वहीं, खिड़की पर फिटकरी लटकाने से शुक्र दोष भी दूर होता है. इससे शरीर भी स्वस्थ रहता है. यह निगेटिव एनर्जी को दूर करता है. इससे क्लेश नहीं होता है.
3- फिटकरी का उपाय करने से घर में क्लेश नहीं होता है. लेकिन महीने में एकबार फिटकरी को बदल जरूर दें. इससे फायदा होगा.
4- रात को अगर आप सही ढंग से सो नहीं पाते हैं तो फिर फिटकरी से जुड़ा ये उपाय जरूर करें. इस नुस्खे से आपको बुरे सपने भी नहीं आएंगे. फिटकरी के टुकड़े को खिड़की पर बांधने से बुरी नजर दूर रहती है.

  आस्था /शौर्यपथ/ हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत की विशेष मान्यता है. पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है. माना जाता है कि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती का पूजन भी किया जाता है. पंचांग के अनुसार, अप्रैल महीने का पहला प्रदोष व्रत 6 अप्रैल, शनिवार के दिन पड़ने वाला है. शनिवार के दिन पड़ने के चलते इसे शनि प्रदोष व्रत  भी कहते हैं. जानिए इस दिन किस तरह भगवान शिव की पूजा से उन्हें प्रसन्न किया जा सकता है.
प्रदोष व्रत के दिन कैसे करें भगवान शिव को प्रसन्न |
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का 6 अप्रैल, सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर शुरू हो जाएगी और इस तिथि का समापन अगले दिन 7 अप्रैल, सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर हो जाएगा. संध्या के समय प्रदोष काल में प्रदोष व्रत की पूजा होती है इस चलते 6 अप्रैल के दिन ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा.
इस दिन भगवान शिव की पूजा करने के लिए सुबह के समय जल्दी उठकर स्नान किया जाता है और स्नान पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं. इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लेते हैं. असल पूजा शाम के समय होती है परंतु सुबह के समय भी पूजा-पाठ किया जाता है. शाम के समय शिवलिंग पर भांग, मदार, बेलपत्र और पुष्प अर्पित किए जाते हैं. इस दिन शिव चालीसा  के पाठ से भी भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं.
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥
चौपाई
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी।कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई।कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी।करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।संकट ते मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई।संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी।आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा हीं।जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र होन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे।ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
दोहा
बहन करौ तुम शीलवश, निज जनकौ सब भार।
गनौ न अघ, अघ-जाति कछु, सब विधि करो सँभार
तुम्हरो शील स्वभाव लखि, जो न शरण तव होय।
तेहि सम कुटिल कुबुद्धि जन, नहिं कुभाग्य जन कोय
दीन-हीन अति मलिन मति, मैं अघ-ओघ अपार।
कृपा-अनल प्रगटौ तुरत, करो पाप सब छार॥
कृपा सुधा बरसाय पुनि, शीतल करो पवित्र।
राखो पदकमलनि सदा, हे कुपात्र के मित्र॥
।। इति श्री शिव चालीसा समाप्त ।।

लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / बच्चे अक्सर ही नाक में दम कर देते हैं. चाहे अपने खिलौनों को यहां-वहां फैलाना हो, खाना समय से ना खाना हो, हर समय कुछ ना कुछ मांगना, बेसमय खेलने की जिद करना हो या फिर बच्चों का आपस में झगड़ना, ये सभी चीजें मां को गुस्सा दिलाने वाली साबित होती हैं. ऐसे में मां या तो बच्चे पर चिल्लाने लगती हैं या फिर गुस्सा करने और तनाव   लेने लगती हैं. ये गुस्सा या तनाव मां की सेहत के लिए अच्छा नहीं है, साथ ही बच्चे भी बार-बार डांट सुनने से डरने लगते हैं. इसीलिए मां के लिए खुद को शांत रखना बेहद जरूरी है. ऐसे में यहां कुछ ऐसे टिप्स दिए गए हैं जिन्हें ध्यान में रखकर मां खुद को शांत रखकर बच्चे को भी अपने गुस्से का पात्र बनने से बचा सकेंगी.
मांएं खुद को कैसे रखें शांत |
लें पूरा आराम
अक्सर ही आराम की कमी फ्रस्ट्रेशन का कारण बनती है. अगर आप पूरा या पर्याप्त आराम नहीं लेंगी तो हो सकता है आपको इरिटेशन होने लगे और हर छोटी-बड़ी बात पर आपको गुस्सा आने लगे. इसीलिए कोशिश करें कि हर थोड़ी देर में अपने लिए समय निकालकर आप कुछ खाएं-पिएं, थोड़ा टहल लें या लेटकर कमर सीधी कर लें.
पहले सिचुएशन को समझें
अगर अचानक से आपको बच्चा किसी टूटे बर्तन के साथ नजर आ जाए तो उसपर एकदम से ही गुस्सा करने से पहले उसकी बात सुनें और पूरी सिचुएशन को समझें. हो सकता है हवा से बर्तन गिर गया हो या फिर बरतन पहले से ही गिरा पड़ा हो. बिना पूरी बात जाने गुस्सा  करने से परहेज करें.
चिल्लाने के बजाए परेशानी का हल ढूंढें
कई बार बच्चा किसी काम को बिगाड़ देता है या सही तरह से नहीं करता तो मां को उसपर गुस्सा आता ही है. मां  बच्चे पर चिल्लाकर अपना गुस्सा शांत करती हैं. लेकिन, चिल्लाने के बजाय बच्चे ने जो काम बिगाड़ा है उसपर फोकस करने की कोशिश करें. बच्चे से बिना जाने-समझे अनजाने में भी गलती हो सकती है.
अपने गुस्से के परिणाम को सोचें
कई बार मां का गुस्सा बच्चों को जरूरत से ज्यादा प्रभावित कर देता है. मान लीजिए बच्चा कहीं बाहर दोस्त की पार्टी में जाने के लिए खुशी से तैयार हो रहा हो लेकिन लेट हो रहा हो. आपके गुस्सा करने और चिल्लाने के कारण बच्चे का पूरा दिन खराब हो सकता है. इसीलिए अपने गुस्से के परिणाम को पहले ही सोच लें.

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