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May 31, 2026
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व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / सनातन परंपरा में अमावस्या तिथि का बेहद महत्व है. अगर यह तिथि सोमवार या शनिवार को पड़े तो इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. ज्योतिष शास्त्र में इस दिन को लेकर कई सारे नियम बनाए गए हैं.  इस बार चैत्र मास की अमावस्या तिथि 8 अप्रैल, 2024 दिन सोमवार प्रात: 03 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, इसका समापन उसी दिन 8 अप्रैल, 2024 रात्रि 11 बजकर 50 मिनट पर होगा. सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा और व्रत करने का विधान है. तो चलिए जानते हैं सोमवती अमावस्या पर क्या करें और क्या नहीं.
सोमवती अमावस्या तिथि पर क्या करें और क्या न करें?
अपने पितरों को भोजन, जल और अन्य वस्तुएं अर्पित करें.
मांसाहारी भोजन या शराब का सेवन न करें.
धर्मग्रंथों का पाठ करें.
इस दिन चना, मसूर दाल, सरसों का साग और मूली जैसी चीजों को खाने की मनाही होती है.
पूजा-पाठ पर ज्यादा से ज्यादा जोर दें.
भगवान विष्णु की पूजा करें.
इस तिथि पर क्रोध करने से बचें.
सोमवती अमावस्या व्रत रेसिपी-
सोमवती अमावस्या पर अगर आप व्रत कर रहे हैं तो आप साबूदाने की खीर का सेवन कर सकते हैं.  इसे आसानी से बनाया जा सकता है. पूरी रेसिपी के लिए यहां क्लिक करें.  
सोमवती अमावस्या पूजन विधि-
सोमवती अमावस्या के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवता के ध्यान से करें. इसके बाद स्नान करें. अब भगवान सूर्य देव को जल अर्पित करें. इसके पश्चात भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करें. शास्त्रों के अनुसार इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ को स्पर्श करके पूजा अर्चना की जाती है. इसके अलावा धान, पान और खड़ी हल्दी को मिला कर उसे विधान पूर्वक तुलसी के पेड़ पर भी चढ़ाने की मान्यता है.

  ज्योतिष  शाश्त्र /शौर्यपथ /वैदिक ज्योतिष में शनि को सभी ग्रहों में सबसे संवेदनशील माना जाता है. शनि देव जातक के कर्मों के लिहाज से उसका न्याय करते हैं. उनको न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है. शनि को लेकर अक्सर ये कहा जाता है कि जिससे वो नाराज हो जाएं उसे काफी कष्ट झेलने पड़ते हैं. ऐसे में शनि की चाल भी काफी मायने रखती है. ढाई साल में घर बदलने वाले शनि जब वापस उसी घर में जाते हैं तो 30 साल लग जाते हैं. फिलहाल शनि अपनी मूल राशि यानी कुंभ में विराजे हैं और 29 जून को इसी राशि में शनि उल्टी चाल चलेंगे यानी शनि वक्री हो जाएंगे. शनि की ये वक्री चाल कई राशियों के भाग्य में परिवर्तन ला सकती है. चलिए जानते हैं कि शनि की वक्री चाल का किन राशियों पर अच्छा असर पड़ने वाला है.
शनि वक्री के राशियों पर प्रभाव |
मेष राशि
शनि 29 जून की रात को 12 बजकर 35 मिनट पर अपनी ही राशि यानी कुंभ में उल्टी चाल से चलने लगेंगे. शनि इस वक्री अवस्था में 15 नवंबर तक रहेंगे और शनि की उल्टी चाल के ये 139 दिन 3 राशियों के लिए काफी शुभ रहेंगे. इसमे सबसे पहली राशि है मेष. शनि मेष राशि के एकादश भाव में वक्री हो रहे हैं. ये भाव धन का भाव है और इस लिहाज से शनि का वक्री होना मेष राशि के जातकों के लिए आर्थिक तौर पर काफी लाभदायक रहने वाला है. आकस्मिक धन लाभ होगा और इसके साथ-साथ करियर और बिजनेस में भी सफलता मिलने के योग बन रहे हैं. लंबे समय से रुके हुए काम पूरे होंगे और संतान का सुख भी मिल सकता है. आय के नए रास्ते खुलेंगे और परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा.  
वृषभ राशि
शनि की वक्री अवस्था का शुभ लाभ वृषभ राशि (Taurus) के जातकों को भी मिलेगा. शनि इस राशि के दसवें भाव में वक्री हो रहे हैं और ऐसे में शनि की वक्री चाल इस राशि के जातकों के लिए आर्थिक तौर पर लाभकारी साबित होगी. करियर में उन्नति के योग बन रहे हैं. अटके काम पूरे होंगे. वरिष्ठ लोगों का साथ मिलेगा. करियर और बिजनेस में तरक्की होगी और धन लाभ के योग बन रहे हैं. इसके साथ-साथ पैतृक संपत्ति में लाभ के भी योग बन रहे हैं. इस राशि के जातकों का बैंक बैलेंस बढ़ेगा और वो अच्छी सेविंग भी कर पाएंगे.
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के लिए शनि की वक्री चाल काफी फायदेमंद रहने वाली है क्योंकि शनि इस राशि के चौथे भाव में रहेंगे और वो इस भाव के स्वामी हैं. करियर में लाभ होगा और नए बिजनेस प्लान बनाने पर कामयाब होंगे. परिवार का सहयोग मिलेगा और आय के नए रास्ते खुलेंगे. अचानक कहीं से धन लाभ हो सकता है. जिस भी काम में हाथ डालेंगे, वहां मेहनत से आपको कामयाबी मिलेगी. परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और खुशखबरी मिल सकती है.

  मनोरंजन/शौर्यपथ /फिल्म इंडस्ट्री यानी कि माया नगरी उस दुनिया का नाम है जहां चढ़ते सूरज को ही सलाम किया जाता है. एक बार स्टारडम का सूरज मद्धिम होता है तो उस सितारे को लोग भुलाने लगते हैं. लेकिन इस बच्चे की बात कुछ और है. ताल्लुक तो फिल्मी दुनिया से है, एक्टर भी उम्दा ही बना, लेकिन जबरदस्त हिट के नाम पर कोई सोलो फिल्म दर्ज नहीं करवा सका. उसके बावजूद ये सितारा करोड़ों में खेलता है और लग्जरी लाइफ भी जीता है. ये स्टार हैं अभय देओल. जो 19 साल लंबे फिल्मी करियर में सोलो हिट के लिए तरस रहे हैं और जो चंद हिट फिल्में उनके नाम पर दर्ज हैं, वो मल्टीस्टारर फिल्में हैं.
इस घराने से है रिश्ता
अभय देओल सीधे-सीधे स्टार किड तो नहीं हैं, लेकिन उनका ताल्लुक एक बड़े फिल्मी घराने से है. वो एक्टर अजीत देओल के बेटे हैं और उनसे भी बड़ा नाम है धर्मेंद्र का. धर्मेद्र रिश्ते में अभय देओल के ताऊ जी लगते हैं. इस नाते अभय देओल, सनी देओल और बॉबी देओल के चचेरे भाई भी लगते हैं. इसके अलावा उनका रिश्ता ईशा देओल और अहाना देओल से भी जुड़ता है. लेकिन जिस बुलंदी पर सनी देओल और बॉबी देओल का नाम पहुंचा, उस बुलंदी पर अभय देओल का नाम कभी नहीं पहुंच सका. साल 2005 में सोचा न था मूवी से फिल्मों में कदम रखने वाले अभय देओल अब तक 13 फ्लॉप फिल्में दे चुके हैं.
जीते हैं लग्जरी लाइफ
  फिल्मों में भले ही अभय देओल कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके हों, लेकिन वो एक लग्जरी लाइफ जीते हैं. वो 400 करोड़ की मिल्कियत के मालिक हैं. अपनी हर फिल्म के लिए वो 3 करोड़ रु. चार्ज करते हैं. इसके अलावा वो ब्रांड एंडोर्समेंट के लिए 25 लाख रु. तक चार्ज करते हैं. फिल्मों में काम करने के अलावा उनकी खुद की एक प्रोडक्शन कंपनी है. द फैटी काउ के नाम से वो एक सक्सेसफुल रेस्टोरेंट चेन भी रन करते हैं. कुछ और बड़े रेस्टोरेंट्स की चेन में उनके शेयर्स हैं.

  सेहत टिप्स /शौर्यपथ /पोषक तत्वों से भरपूर बीजों ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के दिलों में एक अच्छी-खासी जगह बना ली है. जिसमें सूरजमुखी और कद्दू के बीज फिटनेस फ्रीक्स के बीच ज्यादा लोकप्रिय हैं. इनका सेवन लोग स्नैक्स के रूप में मुख्य रूप से करते हैं.  लेकिन इस स्टोरी का उद्देश्य सूरजमुखी के बीज बनाम कद्दू के बीज के बारे में आपके प्रश्नों का उत्तर देना है. तो आइए जानते हैं.  
सूरजमुखी बनाम कद्दू बीज -
1- जब सूरजमुखी और कद्दू के बीज के बीच चयन करने की बात आती है, तो दोनों ही पोषक तत्व के मामले में एक दूसरे से किसी मामले में कम नहीं हैं.
2-सूरजमुखी के बीज में पॉलीअनसेचुरेटेड और मोनोअनसैचुरेटेड वसा का मिश्रण होता है, जबकि कद्दू के बीज हेल्दी मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड प्रदान करते हैं.
3-वहीं, दोनों ही सीड्स प्लांट बेस्ड प्रोटीन (Plant based protein) के अच्छे स्त्रोत हैं. जो शाकाहारी डाइट वालों के लिए प्रोटीन की भरपाई के लिए अच्छा माना जाता है.
4- इसके अलावा सूरजमुखी के बीज विटामिन ई (vitamin e) और बी (b) प्रदान करते हैं, जबकि कद्दू के बीज मैग्नीशियम और जस्ता सहित विविध खनिज इंग्रीडिएंट्स प्रदान करते हैं. दोनों बीज एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करके हार्ट को हेल्दी रखते हैं.
5- कद्दू के बीज प्रोस्टेट स्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं, जबकि सूरजमुखी के बीज अपने विटामिन ई गुणों के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखते हैं.
6- चाहे आप हार्ट को हेल्दी रखना चाहते हों या फिर प्रोटीन की भरपाई, या अन्य पोषक तत्व का लाभ उठाना चाह रहे हों, इन बीजों को अपने डाइट में शामिल करने से स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
कैसे खाएं?
    आप इन दोनों बीजों को सलाद के रूप में खा सकते हैं. यह सबसे बढ़िया तरीका है इनके पोषक तत्वों का फायदा उठाने का.

  सेहत टिप्स /शौर्यपथ / कब्ज आज के समय की एक ऐसी समस्या है जिससे हर 4 में से 2 लोग परेशान हैं. कब्ज में आप ठीक से शौच करने में सक्षम नहीं होते हैं या जब आप प्रत्येक हफ्ते तीन से कम बार मल त्याग करते हैं. इससे असुविधा हो सकती है. कब्ज से पीड़ित लोग अक्सर टॉयलेट में लंबे समय तक बैठे रहते हैं. लेकिन इन सबके बाद भी पेट सही तरह से साफ नहीं हो पाता है. कब्ज की समस्या कई कारण से हो सकती है. कब्ज की समस्या के चलते शरीर को कई अन्य समस्याओं से भी गुजरना पड़ता है. तो अगर आप भी कब्ज की समस्या से परेशान हैं तो आप कीवी फ्रूट का सेवन कर सकते हैं. कीवी को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. तो चलिए जानते हैं कब्ज की समस्या में कैसे मददगार है कीवी.
कब्ज में कीवी कैसे काम करता है? |
कीवी में फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है. फाइबर "कब्ज के दौरान एक फिजियोकेमिकल भूमिका निभाता है" और मल को बाहर निकालने में मदद करता है.
कब्ज की समस्या में कैसे करें कीवी का सेवन-
1. कीवी स्मूदी-
कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए आप कीवी से स्मूदी बना कर पी सकते हैं. इसे बनाने के लिए सबसे पहले कीवी और केले के छोटे-छोटे पीस कर लें. अब ग्राइंडर जार में सभी चीजें, दूध और वनीला एसेंस डालकर पेस्ट बना लें. स्मूदी को एक गिलास में निकालकर इसमें शहद मिला लें.
2. कीवी जूस-
कब्ज की समस्या से राहत पाने के लिए आप सुबह-सुबह कीवी के जूस का सेवन कर सकते हैं. स्वाद को बढ़ाने के लिए आप इसमें काला नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं.
3. कीवी सलाद-
कीवी को आप अपनी डाइट में सलाद के रूप में शामिल कर सकते हैं. कीवी सलाद को अपने सलाद में शामिल कर इसमें काला नमक डालकर खा सकते हैं,

  सेहत टिप्स /शौर्यपथ / यूरिक एसिड एक प्रकार का अपशिष्ट है जो हमारे शरीर में कई परेशानियों को जन्म देता है. शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने पर जोड़ों का दर्द और चलने-फिरने, उठने-बैठने में तक में दिक्कत हो सकती है. यह समस्या आमतौर पर ज्यादातर लोगों में दिखाई देती है, खासकर वे लोग जो उम्रदराज हो गए हैं. शरीर में हाई यूरिक एसिड होने के कई कारण हैं. बढ़ने हाई प्रोटीन और प्यूरीन वाली चीजों को खाने के कारण होता है. हालांकि भोजन के बाद कुछ सावधानियों को अपनाना जरूरी होता है. साथ ही कुछ दालें हैं जिनका सेवन करने से परहेज किया जाना चाहिए. यूरिक एसिड बढ़ रहा है तो यहां बताई गई दालों का सेवन बिल्कुल न करें.
यूरिक एसिड को बढ़ा देती हैं ये दालें |  
1. राजमा
यह एक प्रकार की दाल है जो यूरिक एसिड बढ़ने का कारण बनती है. राजमा में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे यूरिक एसिड लेवल और बढ़ सकता है.
2. मसूर दाल
यह भी एक प्रकार की दाल है जिसमें प्रोटीन की ज्यादा मात्रा होता है और ये यूरिक एसिड को बढ़ा सकती है. इसलिए यूरिक एसिड के संबंध में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.
3. अरहर दाल
यह दाल भी प्रोटीन से भरपूर होती है, जो कि यूरिक एसिड को बढ़ा सकता है. जब यूरिक एसिड की समस्या हो, तो इस दाल का कम मात्रा में ही सेवन करना उचित होता है.
4. चने
चने भी प्रोटीन की मात्रा ज्यादा पाई जाती है, जो कि यूरिक एसिड को बढ़ा सकती है. अगर यूरिक एसिड लेवल बढ़ा हुआ है, तो चने की मात्रा को कम करना उचित होता है.
इसके अलावा, यूरिक एसिड लेवल को कंट्रोल रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना, अच्छी एक्सरसाइज करना और हेल्दी डाइट का सेवन करना भी जरूरी है.

  ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /बालों की चमक और मजबूती के लिए एलोवेरा को बालों में लगाना एक प्रभावी तरीका है. यह प्राकृतिक तरीके से बालों की देखभाल करता है और उन्हें हेल्दी बनाए रखता है. एलोवेरा का इस्तेमाल करके बालों की ग्रोथ को बढ़ाया जा सकता है. बालों की देखभाल और सुंदरता के लिए एलोवेरा एक प्राचीन उपाय है. यह एक प्रकार का पौधा है जो ब्यूटी प्रोडक्ट्स में प्रयोग होता है, लेकिन इसके सेवन से बालों की ग्रोथ को भी बढ़ाई जा सकती है. बालों की ग्रोथ के लिए एलोवेरा का उपयोग बेहद फायदेमंद माना जाता है, जो आपके बालों को मजबूत, चमकदार और लंबे बनाने में मदद कर सकता है. यहां जानिए लंबे, घने और मजबूत बालों के लिए बालों पर एलोवेरा कैसे लगाएं.
बालों की ग्रोथ के लिए इस तरह लगाएं एलोवेरा |
1. प्राकृतिक एलोवेरा जूस का उपयोग
एलोवेरा के पत्तों को काटकर उनसे निकले जूस को अपने बालों में लगाएं. इसे बालों पर 30-45 मिनट रखें और फिर धो लें. इससे आपके बालों की रक्षा होगी और उन्हें मुलायम और चमकदार बनाए रखेगा.
2. एलोवेरा और शहद का मिश्रण
एलोवेरा जूस में थोड़ा सा शहद मिलाएं और इसे बालों में लगाएं. इस मिश्रण को लगाने से बालों की मानसिकता बढ़ती है और वे मजबूत होते हैं.
3. एलोवेरा और नारियल तेल का मास्क
एक कप नारियल तेल में दो चमच एलोवेरा जूस मिलाएं और इसे अच्छे से मिला लें. इस मिश्रण को बालों पर लगाएं और उसे 1 घंटे तक लगाकर छोड़ दें. फिर बालों को धो लें. यह मास्क आपके बालों को गहराई से मोइस्चराइज़ करता है.
4. एलोवेरा और धनिया मिश्रण
एलोवेरा जूस में थोड़ी सी पाउडर की धनिया मिलाएं और इसे बालों में मसाज करें, धनिया बालों को मजबूत और हेल्दी बनाए रखता है जो उन्हें बढ़ाने के लिए जरूरी न्यूट्रिएंट्स प्रदान करता है.
इसके साथ और क्या करें?
    एलोवेरा जेल को शहद के साथ मिलाकर भी लगाया जा सकता है.
    यह उपाय बालों की ग्रोथ को बढ़ाने में मदद करता है और उन्हें मजबूत बनाता है.
    ध्यान दें कि इन उपायों का प्रभाव व्यक्ति के बालों के नेचर और एलिमेंट्स पर निर्भर कर सकता है. अच्छे रिजल्ट के लिए इन्हें नियमित रूप से अपनाएं.
एलोवेरा के गुण:
प्रोटीन से भरपूर: एलोवेरा में प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है, जो बालों के लिए जरूरी होती है. यह प्रोटीन बालों की ग्रोथ और मजबूती में मदद करता है.
विटामिन: एलोवेरा में विटामिन ए, सी और ई होते हैं, जो बालों को पोषण प्रदान करते हैं और उन्हें हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं.
बालों को मोटा करने की क्षमता: एलोवेरा में एन्जाइम्स होते हैं जो करते हैं कि बाल मोटे और मजबूत बनें, जिससे टूटने से बचे रहें.
बालों के झड़ने को रोकने में मदद: एलोवेरा में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो बालों के झड़ने को रोकने में मदद कर सकते हैं.

   टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /बच्चे अपने आसपास के माहौल से बहुत से कुछ सीखते हैं. कुछ बच्चे स्वभाव से बहुत सीधे और कुछ बहुत जिद्दी किस्म के बन जाते हैं. जिद्दी बच्चों से माता पिता काफी परेशान रहते हैं और बहुत बार उनकी बेतुकी जिद्द भी पूरी करनी पड़ती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चे जिद्दी क्यों बन जाते हैं? कई बार हम अपनी अनजानी गलतियों के कारण उन्हें जिद्दी बना सकते हैं. बच्चों की यह आदत किसी भी माता-पिता के लिए चिंताजनक हो सकती है. माता-पिता की कुछ आदतों या गलतियों के कारण बच्चे जिद्दी हो जाते हैं. इन गलतियों को सुधारकर आप अपने बच्चे की सही दिशा में काम करने और आज्ञाकारी बना सकते हैं.
माता पिता की इन गलतियों की वजह से बच्चे जिद्दी बन जाते है |
1. संयम और सीमा न होना
बच्चे के लिए संयम और सीमा की बड़ी भूमिका होती है. बिना सीमाओं के बच्चे ज्यादातर अपनी इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करेंगे, जो जिद्दीपने को बढ़ा सकता है. इसलिए बच्चों को सीमा में रखने की कोशिश करें.
2. क्लियरिटी की कमी
अगर आप बच्चों से बात करते समय क्लियरिटी नहीं रखते हैं, तो बच्चे अपने फैसलों को लेकर असमंजस की स्थिति में पड़ सकते हैं, जो जिद्दीता का कारण बन सकता है.
3. प्रशंसा न करना
बच्चों को सही तरीके से प्रशंसा न मिलना उन्हें असहाय या नाकारात्मक महसूस करा सकता है, जिससे वे जिद्दी बन सकते हैं. बच्चों की सही समय पर प्रशंसा करना जरूरी है.
4. स्वतंत्रता का अभाव
अगर वे हमेशा आपके निर्देशों के अनुसार चलते हैं, तो वे अपनी स्वतंत्रता का अभाव महसूस कर सकते हैं जो जिद्दीपने का कारण बन सकता है.
5. खराब एनवायरमेंट
बच्चों का वातावरण उनको प्रभावित करने वाली बड़ी चीज है. अगर घर में या स्कूल में अप्रिय वातावरण है, तो बच्चे जिद्दी हो सकते हैं.
6. उनकी बातें न सुनना
बच्चों की बातें सुनना जरूरी होता है. अगर आप उन्हें ध्यान से नहीं सुनते, तो वे अनदेखे महसूस कर सकते हैं, जिससे उनमें जिद्दी भावना पैदा हो सकती है.

  शौर्यपथ /अच्छी नींद का महत्व हर किसी को पता है और यह तब और बढ़ जाता है जब हम नींद लेने के समय को समझ जाते हैं. ये नींद के समय के महत्व को और भी बढ़ा देता है. अगर आप हर रात समय पर सोते हैं और सुबह समय पर उठते हैं, तो इससे आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर कई प्रभाव पड़ते हैं. अच्छी नींद और नियमित जागरूकता एक हेल्दी और पॉजिटिव लाइफ के लिए जरूरी हैं. आज के दौर में जब लोगों की जिंदगी तेजी से चल रही है, तो सोने और उठने का समय तय करना और उसे अपने रोजमर्रा का हिस्सा बनाना जरूरी है. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि जल्दी सोना और जल्दी उठना उनके लिए मुश्किल है, लेकिन यह आदत हासिल करना आपके लिए सफलता की कुंजी हो सकती है.
रोज एक ही समय पर सोने और जागने के फायदे |
1. स्वास्थ्य लाभ
नियमित एक समय पर सोने और जागने से इम्यून सिस्टम को बढ़ावा, हाई एनर्जी लेवल और ताजगी का अनुभव होता है. समय पर सोने से आपका शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है और रोगों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है.
2. दिनचर्या में सुधार
नियमित नींद से आपकी दिनचर्या में सुधार होता है, आपका कामकाज अच्छे से होता है और आपका उत्साह बढ़ता है. नियमित सोने से दिन के कार्यों में ज्यादा प्रोडक्टिविटि और स्टेबिलिटी आती है.
3. मानसिक स्वास्थ्य
अच्छी नींद आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी सुधारती है, आपका मूड बेहतर होता है और तनाव कम होता है. समय पर सोने से दिनभर की थकान कम होती है और मनोबल बढ़ता है.
4. खाने की निगरानी
समय पर सोने से आपके खाने का आइडियल टाइम फॉलो होगा, जिससे आपका वजन कंट्रोल रहता है और आप हेल्दी रहते हैं.
5. टाइम मैनेजमेंट
नियमित नींद से आपका टाइम मैनेजमेंट भी बेहतर होता है, आप अपने कार्यों को सही ढंग से ऑर्गेनाइज्ड कर पाते हैं और समय का उपयोग सबसे अच्छे तरीके से करते हैं.
  10 बजे सोने और 5 बजे उठने की यह आदत आपके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकती है. इसे अपनाकर आप एक स्वस्थ और सकारात्मक जीवन जी सकते हैं.

  व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर राम नवमी मनाई जाती है. राम नवमी पर मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम की पूजा-आराधना की जाती है. माना जाता है कि इस दिन यदि भक्त पूरे मनोभाव से श्रीराम का पूजन करें तो घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन खुशहाल बना रहता है. इससे व्यक्ति की हर मनोकामना की पूर्ति भी हो जाती है. चैत्र नवरात्रि   के पश्चात राम नवमी मनाई जाती है. मान्यतानुसार यह इस दिन श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है. जानिए इस साल चैत्र माह में राम नवमी किस दिन है और किस तरह इस दिन श्रीराम की पूजा की जा सकती है.
राम नवमी की तारीख |   
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह की नवमी तिथि 16 अप्रैल दोपहर 1 बजकर 23 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 17 अप्रैल दोपहर 3 बजकर 14 मिनट पर हो जाएगा. उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए राम नवमी 17 अप्रैल, बुधवार के दिन मनाई जाएगी. इस दिन भक्त अपने आराध्य श्रीराम की पूजा कर सकते हैं.
राम नवमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 17 अप्रैल, सुबह 11 बजकर 10 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 43 मिनट तक बताया जा रहा है.
   राम नवमी पर अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा. इस दिन विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 34 मिनट से दोपहर 3 बजकर 24 मिनट तक रहने वाला है. वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 47 मिनट पर शुरू होकर शाम 7 बजकर 9 मिनट तक रहने वाला है. रवि योग राम नवमी के दिन पूरे दिन रहने वाला है.
राम नवमी पर बन रहा है शुभ योग
   इस वर्ष राम नवमी के दिन बेहद ही शुभ योग बन रहा है. यह योग है रवि योग. रवि योग को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस योग को बेहद शुभ भी कहा जाता है. इस योग में सूर्य का प्रभाव होता है इसीलिए इस योग में पूजा करने पर माना जाता है कि कष्टों से मुक्ति मिल जाती है. रवि योग में धर्म-कर्म और पूजा-पाठ बेहद फलदायी माने जाते हैं.
राम नवमी की पूजा-विधि
   राम नवमी का पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन श्रीराम की पूजा करने के लिए सबसे पहले चौकी सजाई जाती है और उसमें श्रीराम के साथ-साथ माता सीता, लक्ष्मण और बजरंगबली की प्रतिमा स्थापित की जाती है. जल अर्पित किया जाता है और फिर चंदन, रोली, अक्षत, फूल व फल आदि एक-एक करके अर्पित किए जाते हैं. भोग लगाया जाता है. राम रक्षा स्त्रोत, श्रीराम चालीसा और रामायण की चौपाइयों का पाठ करना इस दिन बेहद शुभ होता है.

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