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May 31, 2026
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सेहत टिप्स /शौर्यपथ /बच्चों की सेहत को लेकर अक्सर मां पैरेंट्स में रहते हैं. देखा जाए तो बच्चे खाने पीने में नखरे करते हैं और इसी कारण उनकी इम्युनिटी पावर कमजोर रहती है.इम्यूनिटी  कमजोर होने से बच्चे बार बार बीमार पड़ने लगते हैं और इससे उनकी ग्रोथ पर बुरा असर पड़ता है. इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट बच्चों की इम्यूनिटी पर गौर करने की सलाह देते हैं. बच्चों के एक्सपर्ट कहते हैं कि इम्यूनिटी बूस्ट  करने के लिए पेठे का जूस काफी कारगर साबित हो सकता है. चलिए आज जानते हैं कि पेठे का जूस बच्चों के लिए किस तरह फायदा करते हैं और साथ ही जानेंगे इसे बनाने का तरीका.
बच्चोंके लिए काफी फायदेमंद है पेठे का जूस   
देखा जाए तो पेठा ऐसी सब्जी है जिसे बच्चे खाना पसंद नहीं करते. लेकिन ग्रोथ और ताकत के लिहाज से इसे पोषक तत्वों का पावर हाउस कहा जाता है क्योंकि इसमें ढेर सारे न्यूट्रिएंट्स होते हैं. इससे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता तो मजबूत होती है, साथ ही इसके सेवन से बच्चे की ग्रोथ में भी काफी मदद मिलती है. बच्चे की डेवलपमेंट में पेठे का जूस काफी कारगर है. पेठे में एंटी इंफ्लामेटरी गुण होते हैं जो बच्चों के लिए अच्छे होते हैं. इससे पेट साफ होता है और स्किन पर भी अच्छा असर होता है. पेठे के जूस में ढेर सारा फाइबर होता है जिससे मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है.
घर पर कैसे बनाएं पेठे का जूस  |
    घर पर पेठे का जूस बनाना बेहद आसान है. इसके लिए आपको ढाई सौ ग्राम सफेद पेठा चाहिए. इसके साथ साथ भुना हुआ जीरा, नींबू का रस और थोड़ा सा नमक चाहिए.
    इसे बनाने के लिए सबसे पहले पेठे को काटकर इसके टुकड़े कर लें और ब्लेंडर में डालें.
    अब थोड़ा सा पानी डालकर पेठे को ब्लेंड कर लें. अब एक छन्नी की मदद से पेठे को एक बर्तन में छान लीजिए और इसका पानी अलग कर लीजिए.
    इस पानी को गिलास में डालिए. इसमें भुना हुआ जीरा, नींबू का रस और थोड़ा सा नमक डालकर अच्छे से मिक्स कीजिए. चाहें तो कुछ देर फ्रिज में रख दीजिए.
    इस जूस को बच्चे को रोज सुबह के समय पिलाइए. इससे आपके बच्चे की ताकत और इम्यूनिटी में काफी इजाफा होगा और बच्चे के विकास पर भी अच्छा असर होगा.
    जिन लोगों का पेट खराब रहता है, वो भी इस जूस को पी सकते हैं क्योंकि ये जूस पेट के लिए काफी अच्छा होता है.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / सऊदी अरब समेत खाड़ी मुल्कों और कुछ अन्य देशों में कल ही शव्वाल का चांद देख लिया गया था. ऐसे में इन जगहों पर आज ही ईद मनाई जा रही है. वहीं भारत में केरल, कश्मीर और लद्दाख में भी कल ईद का चांद नजर आ गया था जिसके कारण यहां भी आज ही ईद-उल-फितर का जश्न मनाया जा रहा है. लेकिन भारत के अन्य हिस्सों में कल यानि 11 तारीख दिन गुरुवार को ईद मनाया जाना तय हुआ है.
आपको बता दें कि दिल्ली में ईद की नमाज अलग-अलग हिस्से में 7 से 8 बजे से शुरू हो जाएगी. यहां जानिए भारत के प्रमुख शहरों में चांद निकलने का समय.
चांद निकलने का समय
    दिल्ली - 8 बजकर 37 मिनट पर चांद दिखाई देगा
    कोलकाता - करीब 7 बजकर 40 मिनट पर
    मुंबई - 8 बजकर 38 मिनट पर चांद दिखाई देगा
    नोएडा - लगभग 8 बजकर 35 मिनट पर.
    लखनऊ - रात में करीब 8 बजकर 20 मिनट पर.
    चंडीगढ़ - रात में करीब 8 बजकर 36 मिनट पर .
    पटना - रात में करीब 8 बजकर 3 मिनट पर.
    गुवाहाटी - रात में 7 बजकर 37 मिनट पर.
    जयपुर - रात में करीब 8 बजकर 40 मिनट पर
    इंदौर - रात में करीब 8 बजकर 37 मिनट पर
    प्रयागराज - रात में करीब 8 बजकर 15 मिनट पर चांद देखा जा सकता है
    कानपुर - रात में करीब 8 बजकर 52 मिनट पर.

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /पुरुषों में मिनोपोज होता है या नहीं? क्या कभी आपके मन में भी ये सवाल आया है. तो आज आपके इस सवाल का जवाब हम लेकर आए हैं. जवाब से पहले कुछ सवाल... क्या आपका कभी वजन बढ़ा है, गर्मी महसूस हुई है या यौन उत्तेजना कम हुई है? ये सवाल हम 45 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं से नहीं बल्की पुरुषों से पूछ रहे हैं. ये पुरुष रजोनिवृत्ति के कुछ लक्षण हैं, एक चिकित्सीय स्थिति  जिसे काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया जाता है. जैसा कि हम जानते हैं महिलाओं में एक निश्चित डिम्बग्रंथि रिजर्व होता है, जो समय के साथ धीरे-धीरे कम हो जाता है और रजोनिवृत्ति  की ओर ले जाता है. तो फिर पुरुषों में मिनोपोज  कैसे होता होगा... चलिए जानते हैं.
हालांकि पुरुष रजोनिवृत्ति से नहीं गुजरते हैं, लेकिन टेस्टोस्टेरोन में अचानक गिरावट के कारण उन्हें इसी तरह की समस्याओं से गुजरना पड़ता है. इसे एंड्रोपॉज़ , या पुरुष रजोनिवृत्ति कहा जाता है. जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती है, उनमें कई तरह के बदलाव आते हैं, जिनमें मांसपेशियों का कम होना और बालों का सफेद होना शामिल है. पुरुषों में देखा जाने वाला एक प्रमुख परिवर्तन उनके टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी है.
"इस विषय की शायद ही कभी जांच की जाती है, क्योंकि इस पर बहुत अधिक शोध नहीं हुआ है, हार्मोन की कमी या बदलाव उतनी बुरी नहीं है, जितनी महिलाओं में होती है, और आप गोनाडल हार्मोन में कमी होने से मरते नहीं हैं. जब पुरुषों को इसका अनुभव होता है, तो यह आमतौर पर तनाव के कारण होता है. मदर्स लैप आईवीएफ की चिकित्सा निदेशक और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. शोभा गुप्ता ने कहा, "काम पर तनाव, शादी में तनाव, जीवन प्रबंधन में तनाव और जीवनशैली विकल्पों के अलावा हार्मोन में गिरावट जैसे कारकों का एक संयोजन है."
एंड्रोपॉज़ क्या है?
पुरुष रजोनिवृत्ति का मतबल है पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट होना. डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन स्वाभाविक रूप से उम्र के साथ कम हो जाता है, हालांकि, मधुमेह भी उत्पादन में इस गिरावट का कारण बन सकता है. टेस्टोस्टेरोन के स्तर में लगातार कमी को उम्र से संबंधित कम टेस्टोस्टेरोन या देर से शुरू होने वाले हाइपोगोनाडिज्म के रूप में जाना जाता है."
कुछ लक्षण और संकेत क्या हैं?
इस गिरावट से उत्पन्न होने वाले कुछ लक्षण थकान, कम कामेच्छा और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हैं. इसके अलावा कुछ और लक्षण भी दिख सकते हैं जैसे कि -
    मानसिक स्पष्टता में कमी (ख़राब ध्यान, ख़राब मूड).
    ऊर्जा और शक्ति की हानि.
    मांसपेशियों का कम होना, वसा का बढ़ना और वजन का बढ़ना.
    ऐसी मनोदशाएं जो उदास हैं या जिनमें उत्तेजना और ऊर्जा की कमी है.
    चिड़चिड़ापन.
    मांसपेशियों में दर्द और दर्द (कठोरता महसूस होना).
    पसीना या गर्मी लगना
    हाथ और पैर ठंडे होना
    खुजली
    यौन रोग
एंड्रोपॉज़ क्यों होता है?
टेस्टोस्टेरोन पुरुषों में कई अहम कामों को कंट्रोल करता है. जैसे, कामेच्छा, मांसपेशियों और शुक्राणु उत्पादन को नियंत्रित करना. टेस्टोस्टेरोन हड्डियों के स्वास्थ्य और रक्त उत्पादन दोनों के लिए जरूरी है. जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती है, उनकी शुक्राणु पैदा करने की क्षमता और टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने लगता है. इससे एंड्रोपॉज नामक स्थिति उत्पन्न हो जाती है.
एक आदमी एंड्रोपॉज से कब गुजरता है?
एंड्रोपॉज की शुरुआत 40 साल की उम्र के आसपास हो सकती है, लेकिन यह इससे पहले भी हो सकती है और 70 की उम्र तक बनी रह सकती है. "एंड्रोपॉज पर आज के समय में ज्यादा चर्चा हो रही है. हालांकि सभी डॉक्टर और मनोवैज्ञानिक इस बात से सहमत नहीं हैं कि पुरुष रजोनिवृत्ति का अनुभव करते हैं, क्योंकि सभी पुरुष इसका अनुभव नहीं करते हैं, और जो लोग ऐसा करते हैं वे आमतौर पर इसके बारे में बात नहीं करते हैं.''
कैसे पता चलेगा कि कोई पुरुष मिनोपोज के दौर से गुजर रहा है, इसके लिए क्या इलाज हैं
ऊपर बताए लक्षणों से आप अनुमान लगा सकते हैं कि कोई पुरुष मिनोपोज से गुजर रहा है. इसके अलावा आपका डॉक्टर आपके टेस्टोस्टेरोन के स्तर को मापने के लिए रक्त परीक्षण के लिए कह सकता है. अगर वे कम हैं, तो हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) का सुझाव दिया जा सकता है. आप अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने, जैसे अपनी शारीरिक गतिविधि बढ़ाने और बेहतर आहार खाने पर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं.
आहार : ऐसा आहार जो फलों, सब्जियों, मांस, मछली और डेयरी उत्पादों की मात्रा के संदर्भ में संतुलित हो.
एक्सरसाइज करें : मांसपेशियों, लचीलेपन और एरोबिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए नियमित रूप से व्यायाम करें.
हार्मोन: जब आप बूढ़े हो जाएं, तो अपने हार्मोन के स्तर की जांच करें. किसी व्यक्ति के शरीर में कई महत्वपूर्ण हार्मोन आमतौर पर 40 से 55 वर्ष की आयु के बीच कम होने लगते हैं.
तनाव कम करें: अपनी कठिनाइयों के बारे में अपने साथी, दोस्तों और परिवार से बात करने से आपको आराम करने और तनाव कम करने में मदद मिल सकती है.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /चैत्र नवरात्रि का आज तीसरा दिन है. इस दिन मां के तीसरे रूप चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की जाती है. देवी दुर्गा के इस स्वरूप की सवारी सिंह है. मां चंद्रघंटा के स्वरूप की बात करें तो उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्द्धचंद्र होता है. शास्त्रों के अनुसार, मां चंद्रघंटा के दस हाथ होते हैं और इनका शरीर सोने की तरह चमकता है. आपको बता दें कि मां च्रद्रघंटा का अवतार राक्षसों के संहार के लिए हुआ था. वहीं, मां के तीसरे स्वरूप में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों की शक्तियां होती हैं.
मां चंद्रघंटा अपने हाथ में तलवार, त्रिशूल, धनुष व गदा धारण करती हैं. मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप शांतिदायक और कल्याणकारी माना जाता है. ऐसे में इनकी पूजा विधि, मंत्र, स्तोत्र और आरती क्या है,  इसके बारे में आपको आर्टिकल में बताने वाले हैं.
चंद्रघंटा की पूजा विधि
आप सुबह उठकर स्नान करें और फिर मंदिर की साफ सफाई करें. इसके बाद देवी चंद्रघंटा को गंगाजल से स्नार कराएं, फिर मां को अक्षत, लाल चंदन, चुनरी और लाल पीले फूल चढ़ाएं, इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. साथ ही दुर्गा चालीसा भी पढ़ें. इसके बाद अंत में आप दुर्गा आरती करके पेड़े का भोग लगाएं.
देवी चंद्रघंटा मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:।।
नवरात्रि 2024 मां चंद्रघंटा पूजा मुहूर्त -
चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि 10 अप्रैल 2024, शाम 05.32 से 11 अप्रैल 2024, दोपहर 03.03 बजे तक रहेगी.
शुभ - सुबह 06.00 - सुबह 07.35
चर- सुबह 10.47 - दोपहर 12.22
लाभ - 2.22 - दोपहर 01.58
मां चंद्रघंटा आरती -  
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम
पूर्ण कीजो मेरे काम
चंद्र समान तू शीतल दातीचंद्र तेज किरणों में समाती
क्रोध को शांत बनाने वाली
मीठे बोल सिखाने वाली
मन की मालक मन भाती हो
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो
सुंदर भाव को लाने वाली
हर संकट मे बचाने वाली
हर बुधवार जो तुझे ध्याये
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं
शीश झुका कहे मन की बाता
पूर्ण आस करो जगदाता
कांची पुर स्थान तुम्हारा
करनाटिका में मान तुम्हारा
नाम तेरा रटू महारानी
'भक्त' की रक्षा करो भवानी
मां चन्द्रघंटा का स्तोत्र -
ध्यान वन्दे वाच्छित लाभाय चन्द्रर्घकृत शेखराम।
सिंहारूढा दशभुजां चन्द्रघण्टा यशंस्वनीम्घ
कंचनाभां मणिपुर स्थितां तृतीयं दुर्गा त्रिनेत्राम।
खड्ग, गदा, त्रिशूल, चापशंर पद्म कमण्डलु माला वराभीतकराम्घ
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्यां नानालंकार भूषिताम।
मंजीर हार, केयूर, किंकिणि, रत्‍‌नकुण्डल मण्डिताम्घ
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुग कुचाम।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटिं नितम्बनीम्घ

आस्था /शौर्यपथ /चैत्र नवरात्रि पूरे देश में बहुत धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है. हिंदू समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला नवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है नौ रातें. त्योहार के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक रूप की पूजा की जाती है. मां दुर्गा के नौ रूप हैं- मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कुष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री. नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के अलावा गणगौर का पर्व भी मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गणगौर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है. यह व्रत महिलाएं समृद्धि और पति की लंबी आयु की के लिए करती हैं.
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाले इस पर्व को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती को और माता पार्वती ने संपूर्ण स्त्रियों को सौभाग्यवती होने का वरदान दिया था.
कैसे होती है गणगौर की पूजा
गणगौर के दिन किसी नदी या तालाब के किनारे रेत से माता गौरी की मूर्ति बनाई जाती है. पूजा करने के बाद अगले दिन मूर्ति का विसर्जन कर दिया जाता है. इस दिन व्रती महिलाएं उपवास रखती हैं और मां दुर्गा से सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगती हैं. इस पूजा में विवाहित और अविवाहित दोनों महिलाएं भाग लेती हैं. ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं पूरे दिन उपवास रखती हैं और केवल दूध पीती हैं, उनके वैवाहिक जीवन में खुशियां बनी रहती हैं. गणगौर व्रत की विशेषता यह है कि इसे पति से गुप्त रखकर रखा जाता है.
गणगौर का महत्व
इस दिन महिलाएं हल्दी और आटे से आभूषण बनाती हैं और देवी पार्वती को चढ़ाती हैं. इन आभूषणों को 'गुने' कहा जाता है. पूजा के बाद ये आभूषण महिलाएं अपनी सास या ननद को दे देती हैं. राजस्थान में गणगौर अठारह दिनों तक मनाया जाता है.
पूजा मुहूर्त
इस साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 10 अप्रैल को शाम 05:32 मिनट से प्रारंभ होकर 11 अप्रैल को दोपहर 03:03 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार गणगौर की पूजा आज यानि गुरुवार 11 अप्रैल को होगी.
गणगौर पूजा शुभ योग
गणगौर पूजा के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं- रवि योग, प्रीति योग और आयुष्मान योग. रवि योग प्रात:काल में 06:00 बजे से अगले दिन 12 अप्रैल को मध्य रात्रि 01:38 तक है. वहीं, प्रीति योग सुबह 07:19 तक है और उसके बाद से आयुष्मान योग शुरू होगा, जो 12 अप्रैल को प्रात: 04:30 तक रहेगा.

सेहत टिप्स /शौर्यपथ / कई बार कुछ लोगों के साथ ऐसा होता है कि वो खाने-पीने का ध्यान रखते हैं. ऑयली और जंक फूड से दूर रहते हैं लेकिन इन सबके बावजूद भी उनका वजन बढ़ता ही जाता है. क्या आप जानते हैं कि इसकी वजह क्या है. दरअसल आप अक्सर अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां करते हैं जो वजन बढ़ने का कारण बनती हैं. बता दें कि वजन का बढ़ना सिर्फ खाने से जुड़ा हुआ नही है. खाने के अलावा भी हम कुछ ऐसी गलतियां करते हैं जो वजन बढ़ने का कारण बनती हैं. आज हम आपको ऐसी 10 गलतियों के बारे में बताएंगे जिनको सुधारने के बाद आप कितना भी खा लें आपका वजन नहीं बढ़ेगा.
वजन बढ़ने का वजह क्या है
फिजिकल एक्टिविटी
कई बार हम फिजिकली बहुत कम एक्टिव होते हैं जो हमारे मेटाबॉलिज्म को स्लो कर देता है. इस वजह से हम कुछ भी खाते हैं तो वजन बढ़ने लगता है. इसलिए जरूरी है कि हम रोजाना एक्सरसाइज करें जिससे हमारी कैलोरी बर्न हो.
कम नींद
वजन बढ़ने का कनेक्शन आपकी नींद से भी है. दरअसल जब हमारी नींद पूरी नही होती है तो इससे हमारे हार्मोन्स डिसबैलेंस हो जाते हैं. जिस वजह से क्रेविंग होती है और हम हाई कैलोरी वाले फूड आइटम्स खाते हैं. इसलिए अगर वजन कंट्रोल रखना चाहते हैं तो पूरी नींद लें.
स्ट्रेस इटिंग
कई लोग स्ट्रेस होने पर ज्यादा खाने लगते हैं. ऐसा करने से वो स्ट्रेस फ्री होते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो ये आदत तुरंत बदल दें.
शुगर
ज्यादा मीठी चीजों का सेवन और ड्रिंक्स का सेवन करना भी वजन बढ़ने की एक वजह होता है. यह हमारी क्रेविंग को बढ़ाता है और हम ओवरईटिंग करते हैं.
ज्यादा खाना
कई लोगों की आदत होती है कि वो प्लेट में बहुत सारा खाना लेकर बैठ जाते हैं जिस वजह से वो ज्यादा खाना खा लेते हैं. इसलिए अपने खाने के पोर्शन पर ध्यान दें.
जंक फूड
अक्सर लोद ब्रेकफास्ट-लंच और लंच-डिनर के बीच स्नैक्स खाते हैं. ये स्नैक्स अक्सर प्रोसेस्ड होते हैं जो वजन बढ़ने का कारण बनते हैं. इसलिए ब्रंच में हेल्दी ऑप्शन्स चुनें.
खाते वक्त मोबाइल
कई लोग खाना खाते समय मोबाइल या टीवी देखते हैं. जो वजन बढ़ने का एक कारण हो सकता है. क्योंकि उस वक्त हमारा फोकस खाने पर नहीं होता है और हम ज्यादा खाना खा लेते हैं.
मील स्किप
कई लोग वेट लॉस के चक्कर में अपनी मील स्किप कर देते हैं और जब खाते हैं तब एक बार में बहुत सारा खा लेते हैं.
लिक्विड कैलोरी
सोडा, चाय, कॉफी जैसी चीजें हाई कैलोरी होती हैं. इनको ज्यादा पीने से भी वजन बढ़ता है.
कैलोरी फूड
अगर आपकी डाइट में फल, सब्जियां और साबुत अनाज नहीं है और आप केवल कैलोरी फूड का सेवन कर रहे हैं तो ये भी वजन बढ़ने का एक कारण हो सकता है.

 सेहत टिप्स /शौर्यपथ /भिंडी एक पौष्टिक सब्जी है जो गर्मी के मौसम में आती है. यह कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने के साथ-साथ स्वादिष्ट भी होती है. इसमें कई पोषक तत्व होते हैं, जिनके सेवन से शारीरिक स्वास्थ्य को कई लाभ प्राप्त होते हैं. यह भारतीय रसोई में एक पसंदीदा तथा स्वादिष्ट सब्जी है. सबसे ज्यादा लोग इसी सब्जी को पसंद करते हैं. इसके सेहत संबंधित लाभों के बारे में जानना जरूरी है. यहां हम लेडीफिंगर के कुछ जरूरी स्वास्थ्य लाभों के बारे में बता रहे हैं.
भिंडी के शानदार स्वास्थ्य लाभ |
1. पोषण से भरपूर: भिंडी में विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन बी-6, फोलेट, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर जैसे पोषक तत्व प्रचूर मात्रा में से पाए जाते हैं. ये सभी तत्व शारीर के लिए जरूरी होते हैं और उसे हेल्दी रखने में मदद करते हैं.
2. डायबिटीज को कंट्रोल करना: भिंडी में मौजूद फाइबर डायबिटीज को कंट्रोल में मदद कर सकती है, क्योंकि यह खाने के बाद ग्लूकोज लेवल को बैलेंस रखने में मदद करता है.
3. पाचन को सुधारे: भिंडी में फाइबर की अच्छी मात्रा होने से पाचन क्रिया को सुधारा जा सकता है. यह खाना खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल को भी संतुलित रखता है और साथ ही हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है.
4. हेल्दी ब्लड सर्कुलेशन: भिंडी में मौजूद फाइबर और विटामिन सी ब्लड प्रेशर को सुधारने में मदद कर सकते हैं और शरीर को हेल्दी रखने में सहायक होते हैं.
5. वजन को कंट्रोल रखना: भिंडी का सेवन करने से वजन को कंट्रोल किया जा सकता है क्योंकि इसमें लो कैलोरी और ज्यादा फाइबर होता है, जिससे भूख कम लगती है और वजन कंट्रोल में रहता है.
6. स्किन के लिए फायदेमंद: भिंडी में विटामिन ए और विटामिन सी की मात्रा अच्छी होती है, जो स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. ये त्वचा को ताजगी और चमक देते हैं और उसे हेल्दी रखने में मदद करते हैं.

ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / हर कोई चाहता है कि चेहरा हमेशा यंग दिखे, लेकिन कुछ कारणों से स्किन कम उम्र में ही बुढ़ी दिखाई देने लगती है. यंग एज में ही चेहरे पर झुर्रियां दिखना हर किसी को परेशान कर सकता है. झुर्रियां चेहरे की खूबसूरती को कम कर सकती हैं और उम्र कई साल ज्यादा लगती है. कई लोग इस समस्या को हल करने के लिए अलग-अलग एंटी एजिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कभी-कभी प्राकृतिक उपाय भी बहुत प्रभावी साबित हो सकते हैं. एक ऐसा नेचुरल उपाय है कलौंजी, जो की अपनी चमकदार और गुणकारी गुणों के लिए प्रसिद्ध है. कलौंजी का तेल अलग-अलग तरीकों से उपयोग किया जा सकता है. झुर्रियों को हटाने के लिए कलौंजी का तेल किसी रामबाण उपाय से कम नहीं है. अगर आप झुर्रियां कैसे हटाएं, झुर्रियां हटाने के उपाय, जवां दिखने के लिए क्या करें जैसे सवालों से परेशान हैं, तो यहां हम कलौंजी के तेल का इस्तेमाल करने के कुछ तरीके बता रहे हैं.
झुर्रियां हटाने के लिए कलौंजी का तेल |
कलौंजी का तेल झुर्रियों के लिए खासतौर से प्रभावी होता है क्योंकि यह अनेक पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसमें विटामिन ए, सी, डी और ए के अलावा अल्फा-हाइड्रॉक्सी एसिड और फाइबर होते हैं, जो झुर्रियों को कम करने में मदद कर सकते हैं. इसके अलावा कलौंजी का तेल त्वचा को मोइस्चराइज़ करता है और उसे नरम बनाता है, जिससे झुर्रियां कम दिखाई देती हैं.
कलौंजी का तेल कैसे इस्तेमाल करें?
1. सीधे तेल का इस्तेमाल: अच्छा तरीका है कलौंजी का तेल सीधे त्वचा पर लगाना. इसके लिए एक छोटी सी मात्रा का कलौंजी का तेल लें और उसे हल्के हाथों से त्वचा पर मालिश करें. इसे रात को सोने से पहले करना बेहतर होता है.
2. नारियल के तेल के साथ मिलाकर इस्तेमाल करें: नारियल का तेल भी त्वचा के लिए बहुत अच्छा होता है. इसे कलौंजी के तेल के साथ मिलाकर लगाने से उसकी गुणकारी शक्ति और बढ़ जाती है.
3. फेस पैक के रूप में इस्तेमाल करें: एक बाउल में कलौंजी का तेल, दही और शहद को मिलाकर फेस पैक बना सकते हैं. इसे हफ्ते में एक बार लगाकर रात को सोने से पहले धो लें.
सावधानियां:
    कलौंजी का तेल बिल्कुल साफ और अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए.
    पर इस्तेमाल करने से पहले हमेशा एक पैच टेस्ट करें ताकि किसी तरह की खुजली या चुभन होने की संभावना ना हो.
    झुर्रियों के लिए इस्तेमाल करने से पहले त्वचा को साफ करें और धो लें.
कलौंजी का तेल झुर्रियों को हटाने में मदद कर सकता है, लेकिन इसका रेगुलर और सही इस्तेमाल करना जरूरी है. इसे सही तरीके से इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर से संपर्क करें.
 हर कोई चाहता है कि चेहरा हमेशा यंग दिखे, लेकिन कुछ कारणों से स्किन कम उम्र में ही बुढ़ी दिखाई देने लगती है. यंग एज में ही चेहरे पर झुर्रियां दिखना हर किसी को परेशान कर सकता है. झुर्रियां चेहरे की खूबसूरती को कम कर सकती हैं और उम्र कई साल ज्यादा लगती है. कई लोग इस समस्या को हल करने के लिए अलग-अलग एंटी एजिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कभी-कभी प्राकृतिक उपाय भी बहुत प्रभावी साबित हो सकते हैं. एक ऐसा नेचुरल उपाय है कलौंजी, जो की अपनी चमकदार और गुणकारी गुणों के लिए प्रसिद्ध है. कलौंजी का तेल अलग-अलग तरीकों से उपयोग किया जा सकता है. झुर्रियों को हटाने के लिए कलौंजी का तेल किसी रामबाण उपाय से कम नहीं है. अगर आप झुर्रियां कैसे हटाएं, झुर्रियां हटाने के उपाय, जवां दिखने के लिए क्या करें जैसे सवालों से परेशान हैं, तो यहां हम कलौंजी के तेल का इस्तेमाल करने के कुछ तरीके बता रहे हैं.

सेहत टिप्स /शौर्यपथ / गर्मियों के मौसम में लौकी का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है. लौकी एक हरी सब्जी है जिसे सेहत के लिहाज से काफी अच्छा माना जाता है. लौकी को घीया के नाम से भी जाना जाता है. भारतीय व्यंजनों में लौकी का खूब इस्तेमाल किया जाता है. लौकी से कई तरह की रेसिपीज बनाई जा सकती हैं. जैसे लौकी का हलवा, लौकी की खीर, लौकी की सब्जी, लौकी का जूस लौकी के पकौड़े आदि. लौकी की सबसे अच्छी बात ये है कि ये बेहद आसानी से मिल जाती है. आपको बता दें कि लौकी में विटामिन बी, विटामिन सी, आयरन और सोडियम जैसे तमाम पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मददगार है. तो चलिए जानते हैं गर्मी में लौकी खाने के फायदे.
लौकी खाने के फायदे-
1. लौकी का सेवन करने से दिल को दुरुस्त रखा जा सकता है. इतना ही नहीं इसके सेवन से हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को भी कम किया जा सकता है.
2. लौकी में कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक के गुण पाए जाते हैं. जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं. लौकी को हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है.
3. लौकी में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो डायबिटीज की समस्या में राहत देने का काम कर सकते हैं.
4. लौकी के जूस का सेवन करने से गर्भाशय को मजबूत और गर्भस्त्राव की समस्या को दूर किया जा सकता है.
5. गर्मियों के मौसम में दस्त की समस्या एक आम समस्या में से एक है. लौकी को छाछ या दही में मिलाकर खाने से दस्त में राहत मिल सकती है.
6. अगर आप खुद को तरोताजा रखना चाहते हैं तो लौकी आपकी मदद कर सकती है. लौकी खाने से शरीर को एनर्जी मिलती है.
7. लौकी में पानी अधिक होता है जो शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है. गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए आप लौकी का सेवन कर सकते हैं.
8. लौकी को डाइट में शामिल कर पेट संबंधी समस्याओं को दूर किया जा सकता है. लौकी के सेवन से एसिडिटी की समस्या को दूर किया जा सकता है.
9. लौकी या लौकी के जूस का सेवन करने से स्किन को हेल्दी रखा जा सकता है. ये शरीर से खराब पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है.

आस्था /शौर्यपथ /जम्मू, नौ अप्रैल (भाषा) देश भर से हजारों श्रद्धालु मंगलवार को नौ दिवसीय चैत्र नवरात्र शुरू होने के उपलक्ष्य में जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए पहुंचे. बॉर्ड के एक प्रवक्ता ने बताया, ''श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बॉर्ड (एसएमवीडीएसबी) के द्वारा इस शुभ अवसर पर वैष्णो देवी की पवित्र गुफा में शांत वातावरण के बीच 'शत चंडी महायज्ञ' का आयोजन किया गया. साथ ही अन्य अनुष्ठान भी किये गये.'' उन्होंने कहा कि त्रिकुटा पहाड़ी के ऊपर स्थित इस मंदिर में सभी के लिए सद्भाव और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करने के लिए पूरी नवरात्रि में पवित्र अनुष्ठान किये जायेंगे. प्रवक्ता ने बताया कि एसएमवीडीएसबी के मुख्य कार्यकारी अधिकार अंशुल गर्ग तीर्थयात्रियों, बोर्ड के अन्य सदस्यों और अधिकारियों के साथ इस यज्ञ में शामिल हुए.
उन्होंने बताया कि नौ दिनों तक प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से एक बजे तक एमएच1 श्रद्धा चैनल पर हवन का सीधा प्रसारण किया जाएगा. नवरात्र के शुभ अवसर पर माता वैष्णो देवी मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों, पारंपरिक रूपांकनों और अलंकरणों के साथ सजाया गया है. प्रवक्ता ने बताया कि बोर्ड ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और एसएमवीडीएसबी के अध्यक्ष मनोज सिन्हा के निर्देशों के अनुसार नवरात्र के दौरान मंदिर में आने वाले बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किये हैं.
उन्होंने कहा कि खास व्यवस्थाओं के तहत मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर चौबीसों घंटे पानी और बिजली की आपूर्ति, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाएं और बोर्ड के 'भोजनालयों' में विशेष 'व्रत वाला भोजन' उपलब्ध कराया गया है.
उन्होंने कहा, ''तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए आवास, बैटरी चालित वाहन, रोपवे और हेलीकॉप्टर सेवाएं जैसी सुविधाएं प्रदान की गई हैं और ये सुचारू रूप से चल रही हैं. भैरों जी में 'लंगर सेवा' के अलावा तीर्थयात्रियों को ताराकोटे मार्ग और सांझीचट्ट में प्रसाद केंद्र पर मुफ्त भोजन भी उपलब्ध कराया जाएगा. अधिकारी ने कहा कि बोर्ड द्वारा दिव्यांग श्रद्धालुओं की तीर्थयात्रा को आसान बनाने के लिए मंदिर में मुफ्त टट्टू और बैटरी कार सेवाएं प्रदान की जा रही हैं.
उन्होंने कहा कि वैष्णो देवी मंदिर में नवरात्र के अवसर पर प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा 'भजन' और 'अटका आरती' का भी आयोजन किया गया है.

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