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May 31, 2026
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 ब्यूटी टिप्स/शौर्यपथ/ बहुत सी महिलाएं लंबे बालों की इच्छा रखती हैं लेकिन बाल बढ़ने का नाम ही नहीं लेते हैं. कई बार बालों का झड़ना और उनमें पोषण की कमी होना भी बालों की ग्रोथ को प्रभावित करता है. ऐसे में अगर आप लंबे बालों की इच्छा रखती हैं और बाल कमर या घुटनों तक बढ़ाना चाहती हैं तो यहां बताए तरीके से बालों पर नारियल तेल  लगा सकती हैं. नारियल तेल में फैटी एसिड्स की अच्छी मात्रा होती है, खासतौर से लौरिक एसिड की जो बालों को स्वस्थ बनाने में असरदार होता है. इस तेल के इस्तेमाल से बाल बढ़ते हैं, डैमेज से बचते हैं, हेयर टेक्सचर बेहतर होता है और बालों को स्वस्थ बनने में मदद मिलती है. लेकिन, नारियल तेल को बालों पर सादा लगाने के बजाय इसमें 2 चीजें मिलाकर इफेक्टिव हेयर ग्रोथ ऑयल  तैयार किया जा सकता है. इस हेयर ऑयल का बालों पर अच्छा असर दिखता है और बाल लंबे बनते हैं सो अलग.
लंबे बालों के लिए होममेड ऑयल |
इस तेल को बनाने के लिए नारियल तेल, गुड़हल के फूल और मेथी के दानों की जरूरत होगी. गुड़हल के फूल में विटामिन सी, विटामिन बी6 और आयरन की अच्छी मात्रा होती है. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं और इस फूल से हेयर फॉलिकल्स को भी फायदा मिलता है. वहीं, मेथी के दानों में विटामिन, खनिज और एंटी-ऑक्सीडेंट्स की अच्छी मात्रा होती है.
बाल बढ़ाने वाला तेल बनाने के लिए सबसे पहले नारियल के तेल को पकने के लिए आंच पर रखें और इसमें 2 चम्मच मेथी के दाने और 4 से 5 गुड़हल के फूल  डाल लें. इस तेल को पकाएं और पक जाने के बाद ठंडा होने के लिए अलग रख दें. तेल ठंडा हो जाने के बाद इसे छानकर शीशी में भरें. हेयर ग्रोथ ऑयल तैयार है. इस तेल को बालों पर लगाकर मालिश करें और कम से कम एक से डेढ़ घंटा लगाए रखने के बाद धोकर हटा लें. इस तेल को बालों पर रातभर लगाकर भी रखा जा सकता है. बाल बढ़ने में असर दिख सकता है.
लंबे बालों के लिए नारियल के तेल में करी पत्ते डालकर भी तेल बनाया जा सकता है. आधा कटोरी नारियल का तेल लेकर उसमें मुट्ठीभर करी पत्ते डालें और जब पत्ते चटक जाएं और पककर काले हो जाएं तो आंच बंद कर लें. इस तेल को बालों पर आधा घंटा लगाकर रखा जा सकता है. हफ्ते में 2 से 3 बार इस तेल को बालों पर लगाया जाए तो बाल बढ़ने में असर दिख सकता है, साथ ही बालों में चमक आती है सो अलग.

ब्यूटी टिप्स/शौर्यपथ / उम्र बढ़ने लगती है तो चेहरे पर उम्र के निशान पड़ना भी शुरू हो जाते हैं. त्वचा की सही तरह से देखरख ना करने पर कम उम्र में भी चेहरे पर फाइन लाइंस दिखने लगती हैं और महसूस होता है जैसे व्यक्ति समय से पहले ही बूढ़ा होने लगा है. ऐसे में स्किन का वक्त रहते ध्यान रखना जरूरी होता है. यहां कुछ ऐसे ही फेस पैक्स दिए जा रहे हैं जो त्वचा को टाइटनिंग इफेक्ट्स देते हैं. इन फेस पैक्स को घर पर ही बनाकर लगाया जा सकता है. ये फेस पैक्स स्किन को टाइटनिंग इफेक्ट्स देने के साथ ही ग्लोइंग भी बनाते हैं. बेसन, खीरा, एलोवेरा और पपीता जैसी एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर चीजों से इन फेस पैक्स को बनाया जाता है.
स्किन टाइटनिंग फेस पैक्स |
खीरे का फेस पैक बनाने के लिए आधा खीरा लें और उसे एक चम्मच दही के साथ ब्लेंडर में डाल लें. इस तैयार फेस पैक को चेहरे पर 15 से 20 मिनट लगाकर रखने के बाद धोकर हटा लें. चेहरे पर ताजगी भी आएगी और स्किन को टाइटनिंग इफेक्ट्स भी मिलते हैं. हफ्ते में एक बार इस फेस पैक को लगाया जा सकता है.
झुर्रियां कम करने के लिए पपीते का फेस पैक भी बनाकर लगाया जा सकता है. इस फेस पैक को बनाने के लिए 2 चम्मच पपीते का पेस्ट लें और उसमें एक चम्मच शहद मिला लें. इस पैक को चेहरे पर 20 मिनट लगाकर धोकर हटा लें.
बेसन भी त्वचा को टाटनिंग इफेक्ट्स देता है. बेसन फेस पैक  को बनाने के लिए एक चम्मच बेसन में एक चम्मच दही और जरूरत के अनुसार गुलाबजल मिला लें. पेस्ट बनाकर चेहरे पर 15 से 20 मिनट लगाकर रखें और फिर धोकर हटाएं. त्वचा बेदाग और झुर्रियों से मुक्त बनती है.
चेहरे पर एलोवेरा जैल लगाकर भी टाइटनिंग इफेक्ट्स पाए जा सकते हैं. एलोवेरा स्किन को हाइड्रेटिंग इफेक्ट्स भी देता है. ताजा एलेवोरा का गूदा लेकर चेहरे पर मलें और 20 मिनट बाद धोकर हटा लें. आप इसे लगाए भी रख सकते हैं. बाजार से खरीदा हुआ एलोवेरा जैल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
एंटी-एजिंग गुणों से भरपूर केले का फेस पैक भी बेहद फायदेमंद होता है. इस फेस पैक को लगाने पर त्वचा की कसावट बढ़ती है. इसे बनाने के लिए एक चम्मच दही में आधा केला मसलकर मिलाएं और चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगाकर रख लें.

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / प्याज तो आप रोज खरीदते  होंगे और हर दिन इसका इस्तेमाल सब्जी में करते होंगे. प्याज को लोग अलग-अलग तरीके से  स्टोर करते हैं. जैसे कि कोई टोकरी में रखता है तो कुछ लोग बाकि सब्जियां या फलों की तरह फ्रिज  में रखते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्याज को भी रखने का एक सही तरीका होता है. फ्रिज में कटा हुआ प्याज रखना भी सही नहीं होता है. वहीं एक्सपर्ट ने प्याज को स्टोर करने के कई तरीके बताएं, आइए जानते हैं.
प्याज स्टोर करने का सही तरीका |
एक्सपर्ट  के अनुसार प्याज को 45 से 50 डिग्री फारेनहाइट (रेफ्रिजरेशन लेवल से ठीक ऊपर) पर स्टोर करना चाहिए.  प्याज को कभी भी बैग में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इन्हें भी सांस लेने के लिए हवा की आवश्यकता होती है. साथ ही आप आलू के साथ भी प्याज न रखें, क्योंकि आलू नमी उत्सर्जित कर सकता है, जो प्याज  के सड़ने की गति को बढ़ा देता है.
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए अध्ययनों से पता चला है कि प्याज को 40-50°F (4-10°C) तापमान पर स्टोर करना सबसे बेस्ट होता है. इस तापमान पर प्याज अपनी विशेषताओं को सर्वोत्तम रूप से बनाए रखते हैं, 10 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान अंकुरण के लिए ऑप्टिमल पाया गया. इतना ही नहीं प्याज में अंकुरण संकेत हा कि प्याज खराब हो गया है.
कटे प्याज को न रखें फ्रिज में |
- कई बार सलाद या सब्जी में डालने के बाद थोड़ा कटा हुआ प्याज बच जाता है, जिसे लोग रेफ्रिजरेटर में रख देते हैं. आपको ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए. क्योंकि वे नमी को जल्दी सोख लेते हैं, जिससे उसमें बैक्टेरिया और फफूंद लगने लगते हैं. वहीं आप प्याज को मैरिनेट कर सकते हैं, तेल प्याज को नमी सोखने से रोकता है.
- रेफ्रिजरेटर में ठंडा और ह्यूमिड वातावरण होता है, जो रसदार और पत्तेदार सब्जियों में नमी बनाए रखता है. ठंडे तापमान में प्याज सही से फिट नहीं हो पाता है और वो स्टार्च को चीनी में बदलना शुरू  कर देता  है. अगर तापमान या ह्यूमिडिटी बहुत ज्याद होगा तो वे अंकुरित होना या सड़ने लगते हैं.
प्याज स्टोर करने के कुछ टिप्स-
–  प्याज को ठंडे, सूखे, हवादार क्षेत्र में रखें.
–  स्टोर करने का तापमान 45-55°F बनाए रखें.
-  आपको ये याद रहे कि प्याज को कभी भी प्लास्टिक में न लपेटकर रखें  या फिर प्लास्टिक की थैलियों में न रखें. इससे हवा सर्कुलेट न होने पर प्याज का शेल्फ लाइफ कम हो जाएगा.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / भगवान शिव की पूजा के लिए हर माह की त्रयोदशी तिथि समर्पित होती है. त्रयोदशी तिथि को प्रदोष का व्रत रखकर भक्त भगवान शिव  की पूजा अर्चना करते हैं. शिव पुराण और स्कंद पुराण में प्रदोष व्रत की महिमा का वर्णन किया गया है. चैत्र माह की शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 21 अप्रैल रविवार को है. रविवार के दिन होने के कारण यह रवि प्रदोष व्रत कहलाता है. रवि प्रदोष व्रत को बहुत खास माना जाता है. मान्यता है कि रवि प्रदोष आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने वाला होता है. रवि प्रदोष को सूर्य उपासना का भी बहुत महत्व है. आइए जानते हैं रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि और इस व्रत के दिन किन चीजों से लगाना चाहिए भगवान शिव को भोग.
रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि और भोग
रवि प्रदोष व्रत के दिन सूर्य उपासना का भी बहुत महत्व है. इस दिन सुबह जल्दी उठने के बाद स्नान कर भगवान सूर्य को नमस्कार करें. इसके बाद लाल रंग के आसन पर पूर्व की दिशा की ओर मुख करके बैठें और तांबे के लोटे में जल भरकर रखें. तांबे के दीये में गाय का घी डालकर कलेवा की बत्ती से दीया जलाएं और सूर्य स्रेत का पाठ करें. पाठ करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्य भगवान  को अर्घ्य दें. संध्या के समय प्रदोषकाल में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें. सबसे पहले पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें. भगवान शिव को साबुत चावल की खीर, हलवा या बेल के फल का भोग लगाएं. शिव चालीसा का पाठ करें. शिव भगवान अपने प्रिय भोग और शिव चालीसा से परम प्रसन्न होते हैं.
रवि प्रदोष व्रत पर इनका रखें ध्यान
रवि प्रदोष व्रत पर फलाहार करना चाहिए. पूरे दिन उपवास रखने के बाद सूर्य अस्त होने पर स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए. पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करना चाहिएय इस व्रत के दिन घर पर सात्विक भोजन बनाया जाता है.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में चैत्र मास धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी माह में रामनवमी के साथ साथ हनुमान जयंती भी आती है. चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन देश भर में उत्साह और विधि विधान से हनुमान जयंती मनाई जाती है. शास्त्रों में कहा गया है कि त्रेता युग में इसी पावन दिवस पर बजरंग बली का जन्म हुआ था. इसलिए भक्त इस दिन हनुमान जी की पूजा अर्चना करते हैं. इस दिन मंदिर सजाए जाते हैं और जगह जगह भंडारे और कार्यक्रम आयोजित होते हैं. अगर आप भी जानना चाह रहे हैं कि इस बार यानी साल 2024 में हनुमान जयंती कब है, तो चलिए यहां सही तारीख जानते हैं और साथ ही जानेंगे हनुमान जयंती पर बजरंग बली की पूजा का शुभ मुहूर्त भी.
2024 में कब है हनुमान जयंती
हिंदू पंचांग और उदया तिथि के अनुसार इस बार चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि 23 अप्रैल यानी मंगलवार को सुबह 3 बजकर 26 मिनट पर आरंभ हो रही है.  पूर्णिमा तिथि अगले दिन 24 अप्रैल को  सुबह 5 बजकर 18 मिनट तक रहेगी. इस लिहाज से उदया तिथि के अनुसार हनुमान जयंती 23 अप्रैल के दिन मनाई जाएगी. हनुमान जयंती पर बजरंग बली की विधिवत पूजा में आराध्य को लाल चोला पहनाया जाता है. इसके साथ साथ बजरंग बली को लड्डुओं का भोग लगाया जाता है. इस दिन भगवान राम के साथ बजरंग बली की पूजा करनी चाहिए क्योंकि इससे बजरंग बली जल्दी प्रसन्न होते हैं.
शुभ संयोग और पूजा का शुभ मुहूर्त
कहा जाता है कि बजरंग बली का जन्म मंगलवार के दिन हुआ था और इसी कारण बजरंग बली को मंगलमूर्ति का ना भी दिया जाता है. इस साल यानी साल 2014 में  हनुमान जयंती 23 अप्रैल दिन मंगलवार को मनाई जाएगी और इसे शुभ संयोग कहा जा रहा है .इस दिन विधिवत रूप से और सच्चे मन से पूजा करने पर मनोरथ पूरे होंगे. यूं तो 23 अप्रैल को पूरे दिन पूर्णिमा होने के कारण किसी भी समय आप हनुमान जी की पूजा कर सकते हैं. लेकिन अगर अगर शुभ मुहूर्त में पूजा की जाए तो मनोरथ सकल होते हैं और बजरंग बली का आशीर्वाद मिलता है. हनुमान जयंती पर पूजा का खास मुहूर्त सुबह 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 49 मिनट तक रहेगा. इसके बाद 12 बजकर 25 मिनट से दोपहर 2 बजे तक पूजा का बेहद खास मुहूर्त है. सांयकाल के समय 3 बजकर 36 मिनट से शाम 5 बजकर 11 मिनट तक भी पूजा का शुभ मुहूर्त बन रहा है. रात्रिकाल का शुभ मुहूर्त 8 बजकर 14 मिनट से रात नौ बजकर 25 मिनट तक रहेगा.

  व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /सनातन धर्म में हनुमान जी को संकट हरने वाला संकटमोचन कहा गया है. भगवान राम के भक्त हनुमान जी त्रेता युग में चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन पैदा हुए थे और इसीलिए भक्त हर साल चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन धूमधाम से हनुमान जन्मोत्सव मनाते हैं. बल, बुद्धि और साहस का आशीर्वाद देने वाले हनुमान जी भक्तों की पूजा से बेहद प्रसन्न हो जाते हैं और उन्हे हर संकट से बचाते हैं. इस साल हनुमान जयंती 23 अप्रैल यानी मंगलवार के दिन पड़ रही है. मान्यता है कि बजरंग बली मंगलवार के दिन जन्मे और इसी कारण उनका नाम मंगलमूर्ति पड़ा.  ज्योतिषियों के अनुसार इस बार हनुमान जयंती पर मंगलकारक भद्रावास योग बन रहा है जो बजरंग बली की पूजा के लिए बेहद खास बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि इस शुभ योग में हनुमान जी की पूजा करने पर साधक और उसके परिवार को मनोवांछित फल मिलने के योग बनेंगे.
हनुमानजयंती पर लग रहा है भद्रावास योग  
ज्योतिषियों ने कहा है कि हनुमान जयंती के दिन भद्रावास योग बन रहा है. भद्रा यानी शनि की बहन इस दिन पाताल लोक में रहेंगी और धरती पर सभी तरह के धार्मिक और मांगलिक कार्यक्रम शुभ होंगे. कहते हैं कि जब भद्रा पाताल लोक में रहती हैं तो धरती पर भक्तों द्वारा की गई पूजा लाभकारी और पावन फल देने वाली होती है. इस दिन भद्रावास योग सायंकाल के समय 4 बजकर 25 मिनट से लग रहा है. इस समय बजरंग बली की पूजा करने पर साधक और उसके पूरे परिवार को अक्षय फल की प्राप्ति का वरदान मिलने के योग बन रहे हैं.
कैसे करें हनुमान जी की विधिवत पूजा  
हनुमान जी की पूजा करने से पहले आपको मंदिर के सामने एक चौकी स्थापित करनी होगी. इस पर एक लाल कपड़ा बिछाएं. इसके बाद चौकी पर भगवान राम और बजरंग बली की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें. अब चंदन से भगवान को तिलक करें.फूल और फल अर्पित करें. इसके बाद बजरंग बली को लड्डुओं का भोग लगाएं और तुलसी दल अर्पित करें. पहले भगवान राम की आरती करें और इसके बाद बजरंग बली की आरती करें. बजरंग बाण और हनुमान चालीसा का पाठ करें.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व होता है. माना जाता है कि एकादशी पर श्रीहरि की पूरे मनोभाव से पूजा करने पर जीवन में खुशहाली आती है. हिंदु कैलेंडर के अनुसार नववर्ष की पहली एकादशी अप्रैल माह में पड़ने वाली है. यह एकादशी कामदा एकादशी होगी. कामदा एकादशी को फलदा एकादशी भी कहा जाता है. जानिए किस दिन है कामदा एकादशी, किस शुभ मुहूर्त में किया जा सकता है भगवान विष्णु  का पूजन और क्या है कामदा एकादशी की पूजा विधि.
कामदा एकादशी कब है |
पंचांग के अनुसार, इस साल कामदा एकादशी का व्रत 19 अप्रैल, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा इस एकादशी की तिथि का आरंभ 18 अप्रैल की शाम 5 बजकर 32 मिनट पर होगा और इसका समापन अगले दिन 19 अप्रैल रात 8 बजकर 5 मिनट पर हो जाएगा. चलते एकादशी का व्रत 19 अप्रैल के दिन ही रखा जाना है. एकादशी का पूरा दिन ही पूजा-पाठ के लिए शुभ माना जाता है.
कामदा एकादशी व्रत  का पारण 20 अप्रैल सुबह 5 बजकर 50 मिनट से सुबह 8 बजकर 26 मिनट के बीच किया जा सकता है. इस शुभ मुहूर्त में एकादशी का व्रत खोला जा सकता है.
कामदा एकादशी की पूजा विधि
एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और भगवान विष्णु का स्मरण करके व्रत का संकल्प लिया जाता है. पूजा करने के लिए मंदिर या पूजा स्थल पर चौकी सजाई जाती है और उसपर श्रीहरि की प्रतिमा को स्थापित किया जाता है. चौकी पर लाल कपड़ा बिछाने के बाद प्रतिमा उसपर रखी जाती है. इसके बाद लोटे में साफ जल भरकर रखा जाता है और पूजा सामग्रीमें तिल, रोली, अक्षत, दीप, धूप, पंचामृत, फल, फूल और दूध सम्मिलित किए जाते हैं. इसके बाद भगवान विष्णु की आरती की जाती है और व्रत की कथा सुनते हैं. भोग लगाने के बाद सभी में प्रसाद का वितरण किया जाता है और पूजा संपन्न की जाती है.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / भक्तों के हर संकट को दूर करने वाले हनुमान जी  को संकट मोचक कहा जाता है. इस साल 23 अप्रैल को देशभर में धूमधाम से हनुमान जयंती मनाई जाएगी. मान्यता है कि हनुमान जयंती के दिन विधि विधान से पवन पुत्र की पूजा अर्चना करने से जीवन के कष्टों का निवारण हो जाता है. मान्यता है कि प्रभु को उनका प्रिय भोग अर्पित करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं. हनुमान जयंती के दिन बजरंग बली की पूजा के दौरान उन्हें उनके प्रिय चीजों का भोग लगाना चाहिए. आइए जानते हैं हनुमान जी के प्रिय भोग और उसकी रेसिपी.
हनुमान जी का प्रिय भोग |
बजरंग बली को भोग में कुछ खास चीजें अत्यंत प्रिय हैं. उन्हें लड्‌डू, पंचमेवा, इमरती या जिलेबी, बूंदी और पान का बीड़ा भोग के रूप में अर्पित करना चाहिए. इन चीजों को भोग में चढ़ाने से पवनपुत्र अत्यंत प्रसन्न होते हैं, ऐसी मान्यता है. गुड़ और चने का भोग भी हनुमान जी को प्रिय हैं.
हनुमान जी के प्रिय भोग बूंदी की रेसिपी
हनुमान जी के प्रिय भोग बूंदी बनाने के लिए एक बर्तन में बेसन, पानी, दही और बेकिंग सोडा डालकर गाढ़ा घोल बना तैयार करें. इस घोल को 2-4 घंटे के लिए रखें. इस समय  बूंदी में डालने के लिए गाढ़ी चाशनी तैयार करें. इसके बाद कड़ाही में घी गर्म करें और बूंदी मेकर में घोल डाल कर  बूंदी तैयार कर लें. तैयार बूंदी को चाशनी में डाल दें. बूंदी के अच्छे से चाशनी में डूब जाने पर बजरंगबली को बूंदी का भोग लगाएं.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / पितरों की आत्मा की शांति के लिए साल के 15 दिन बहुत विशेष होते हैं, जिन्हें पितृ पक्ष   कहा जाता है. हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष का विशेष महत्व होता है, कहते हैं पितृपक्ष के दौरान हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और इस दौरान उनका नियमित श्राद्ध   करने से, तर्पण करने से और पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. ऐसे में साल 2024 में पितृ पक्ष कब आएगा,  इसकी तिथि और महत्व क्या है, आइए हम आपको बताते हैं.
पितृपक्ष 2024 डेट और तिथियां
पितृपक्ष की शुरुआत हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा से अमावस्या तक होती है, जो इस बार 17 सितंबर 2024 से शुरू होकर 2 अक्टूबर 2024 तक रहेगा, इनमें कुल 16 तिथियां पड़ेगी जो इस प्रकार है-
17 सितंबर 2024, मंगलवार- पूर्णिमा का श्राद्ध
18 सितंबर 2024, बुधवार- प्रतिपदा का श्राद्ध
19 सितंबर 2024, गुरुवार- द्वितीय का श्राद्ध
20 सितंबर 2024, शुक्रवार तृतीया का श्राद्ध-
21 सितंबर 2024, शनिवार- चतुर्थी का श्राद्ध
21 सितंबर 2024, शनिवार महा भरणी श्राद्ध
22 सितंबर 2014, रविवार- पंचमी का श्राद्ध
23 सितंबर 2024, सोमवार- षष्ठी का श्राद्ध
23 सितंबर 2024, सोमवार- सप्तमी का श्राद्ध
24 सितंबर 2024, मंगलवार- अष्टमी का श्राद्ध
25 सितंबर 2024, बुधवार- नवमी का श्राद्ध
26 सितंबर 2024, गुरुवार- दशमी का श्राद्ध
27 सितंबर 2024, शुक्रवार- एकादशी का श्राद्ध
29 सितंबर 2024, रविवार- द्वादशी का श्राद्ध
29 सितंबर 2024, रविवार- माघ श्रद्धा
30 सितंबर 2024, सोमवार- त्रयोदशी श्राद्ध
1 अक्टूबर 2024, मंगलवार- चतुर्दशी का श्राद्ध
2 अक्टूबर 2024, बुधवार- सर्वपितृ अमावस्या
किस समय करें श्राद्ध कर्म
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सुबह और शाम के समय देवी-देवताओं की पूजा पाठ की जाती है और दोपहर का समय पितरों को समर्पित होता है. दोपहर में करीब 12:00 बजे श्राद्ध कर्म किया जा सकता है, इसके लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त सबसे अच्छे माने जाते हैं. सुबह सबसे पहले स्नान आदि करने के बाद अपने पितरों का तर्पण करना चाहिए, श्राद्ध के दिन कौवे, चींटी, गाय, देव, कुत्ते और पंचबलि भोग देना चाहिए और ब्राह्मणों को भोज करवाना चाहिए.

  सेहत टिप्स /शौर्यपथ /गर्मियाँ आ गई हैं और ज्यादा गर्मी, पसीना और डिहाइड्रेशन का समय भी आ गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी अप्रैल और जून के बीच भारत के अलग-अलग हिस्सों में लू चलने की भविष्यवाणी की है. इसका मतलब यह है कि कई हेल्थ प्रॉबलम्स से बचने के लिए ज्यादा ध्यान देने का समय आ गया है. भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कुछ एहतियाती उपाय शेयर किए हैं जो आपको बाहर की भीषण गर्मी से बचने में मदद कर सकते हैं. हेल्दी रहने के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स लें. इसे ध्यान में रखते हुए, हम आपके लिए गर्मियों के लिए खास इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक का ऑप्शन लेकर आए हैं, जो न केवल बनाने में आसान है, बल्कि आपके पेट को लंबे समय तक भरा रखने और ठंडा रखने में भी मदद कर सकता है. यह एक सत्तू-दही से बनी रेसिपी है, जिसे न्यूट्रिशनिस्ट मोहिता मैस्करेनहास ने शेयर किया है.
सत्तू-दही गर्मियों के लिए क्यों बेहतर है?
न्यूट्रिशनिस्ट मोहिता के अनुसार, इस सत्तू ड्रिंक में दही, अदरक, हरी मिर्च, पुदीना की पत्तियां, नींबू का रस और सेंधा नमक शामिल है. इनमें से हर चीज पोषक तत्वों से भरी हुई है जो शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालने, पेट को ठंडा रखने और गर्मी और पसीने के बीच पानी का बैलेंस बनाए रखने में मदद करती है.
सत्तू शरीर को ठंडा रखने और प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है, वही दही प्रोबायोटिक्स का एक समृद्ध स्रोत है जो आपको हेल्दी रखने के साथ गट हेल्थ के लिए भी अच्छा होता है. दूसरी ओर अदरक एंटीऑक्सिडेंट, और एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-सेप्टिक गुणों से भरपूर होती है जो शरीर की गर्मी के कारण होने वाली सूजन को कम करता है. सेंधा नमक, गर्मियों में एक लोकप्रिय स्वाद बढ़ाने वाला पदार्थ है, जो शरीर में नमक के संतुलन को बनाए रखने के लिए सोडियम क्लोराइड, सोडियम सल्फेट, सोडियम बाइसल्फेट, आयरन सल्फाइड और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है.
गर्मियों के लिए सत्तू-दही ड्रिंक रेसिपी | इलेक्ट्रोलाइट से भरपूर सत्तू-दही पेय कैसे बनाएं:
न्यूट्रिशनिस्ट मोहिता के मुताबिक, ड्रिंक बनाने के लिए आपको सही रेशियो में सत्तू, दही, कसा हुआ अदरक, हरी मिर्च, ताजा पुदीना की पत्तियां, नींबू का रस, सेंधा नमक और चाट मसाला चाहिए.
इन सभी को एक ब्लेंडर में कुछ बर्फ के टुकड़े और पानी के साथ डालें और अच्छी तरह ब्लेंड करें. और आपका ड्रिंक बनकर तैयार है.
एक्सपर्ट के मुताबिक यह ड्रिंक हेल्दी है लेकिन इसे दोपहर या रात को स्किप कर के नहीं लिया जा सकता है. हालाँकि, आप इसे हमेशा नाश्ते के रूप में या उस समय खा सकते हैं जब आपको दिन के किसी समय भूख लगी हो.

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