August 07, 2026
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      रायपुर / शौर्यपथ /

       स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पंडित शंकरानन्द झा मेमोरियल स्कूल के 27वें वार्षिकोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने इस मौके पर स्कूली बच्चों को सम्बोधित करते हुए पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों में देश सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने का दायित्व हमारे गुरूजनों पर है। यही भावना हमें देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देती है।
      स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यार्थी एक पौधे के समान होते हैं और शिक्षक उस माली की तरह होता है जिसकी देखभाल से पौधे पनपकर एक फलदार वृक्ष का रूप ले लेते हैं। ऐसे में शिक्षकों की यह जिम्मेदारी है कि विद्यार्थियों को स्कूल में एक अच्छा वातावरण उपलब्ध कराए, उनसे अच्छा व्यवहार करें और उनकी छुपी प्रतिभा को सामने लाए।
      वार्षिकोत्सव में विद्यार्थियों ने देशभक्ति, लोकनृत्य सहित मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर स्कूल के निदेशक श्री रविन्द्र झा, प्राचार्या डॉ. बबीता झा, प्रशासनिक प्रमुख श्री ऋषि झा, शैक्षणिक प्रमुख श्रीमती विनिता अग्रवाल तथा शिक्षक व छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षट्तिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन एकादशी का व्रत करके लक्ष्मी नारायण की पूजा अर्चना करने और तिल का दान करने का विशेष महत्व है। साथ ही षट्तिला एकादशी पर 6 तरह से तिल का प्रयोग किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गृहस्थ के लोग अगर इस दिन 6 तरह से तिल का प्रयोग करते हैं तो उनके जीवन में चल रहे सभी कष्ट खत्म हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही धन धान्य से संबंधित सभी समस्याओं का अंत हो जाता है और खुशियों में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं षट्तिला एकादशी पर तिल का 6 तरीके से प्रयोग कैसे करें...
    तिल का पहला प्रयोग
       तिल का पहला प्रयोग स्नान वाले जल में करें। जी हां, षट्तिला एकादशी के दिन सुबह स्नान करने वाले पानी में कुछ तिल के दाने डाल दें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए या मंत्रों का जप करते हुए स्नान करें।
    तिल का दूसरा प्रयोग
      तिल का दूसरा प्रयोग तिल का उबटन लगाकर करना चाहिए। ऐसा करने से आपको सर्दी के मौसम में आपको कई फायदे मिलेंगे। आर्युवेद के अनुसार, तिल का उबटन करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और कई तरह के विकारों से दूरी भी रहेगी।
    तिल का तीसरा प्रयोग
      तिल का तीसरा प्रयोग पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं और 5 मुट्ठी तिलों से 108 बार ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करने में करने के बाद हवन में तिलों की आहुति दे दें।
    तिल का चौथा प्रयोग
      तिल का चौथा प्रयोग तर्पण में करें। इसके लिए आप दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके खड़े हो जाएं और पितरों को तिल का तर्पण करें। षट्तिला एकादशी के दिन तिल से तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और कई तरह के दोषों से मुक्ति मिलती है।
    तिल का पांचवा प्रयोग
      तिल का पांचवा प्रयोग तिल का दान करके करें। षट्तिला एकादशी के दिन तिल का दान करने से पुण्य फल और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाभारत में उल्लेख है कि जो भी मनुष्य माघ मास में ऋषि-मुनि, गरीबों को तिल का दान करता है, वह कभी नरक के दर्शन नहीं करता है। माना जाता है कि माघ मास में जितने तिलों का दान करेंगे उतने हजारों साल तक स्वर्ग में रहने का अवसर प्राप्त होगा।
    तिल का छठवां प्रयोग
      तिल का छठवां प्रयोग खाने में करना चाहिए। शाम के समय तिलयुक्त भोजन बनाकर भगवान विष्णु का भोग लगाएं और उस प्रसाद को सभी में वितरण कर दें। इसके बाद तिलयुक्त फलाहार कराना चाहिए।

    उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के वार्षिक उत्सव में हुए शिक्षा मंत्री शामिल
    स्कूल के विकास कार्यों के लिए 25 लाख देने की घोषणा

    रायपुर / शौर्यपथ / शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि स्कूल केवल शिक्षा की ही नहीं संस्कारों के भी केंद्र होते है। जहां से उज्ज्वल देश और समाज का निर्माण करते है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि छात्रों में अच्छे संस्कारों का भी विकास करना भी है। वे आज राजिम के शासकीय पंडित राम बिशाल पांडेय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के वार्षिकोत्सव “अभ्युदय“ का शुभारंभ करते हुऐ कहा कि स्कूलों में छात्रों को अनुशासन, नैतिकता, देशभक्ति, सामाजिक भावना जैसे महत्वपूर्ण संस्कारों का शिक्षण दिया जाना चाहिए। जब छात्रों में अच्छे संस्कार होगें, तो वे देश और समाज के लिए एक मूल्यवान मानव संसाधन बन जाते हैं।
       शिक्षा मंत्री अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए  कहा कि, शिक्षा जीवन का आधार है, लेकिन संस्कार जीवन का सार हैं। शिक्षा से हमें ज्ञान प्राप्त होता है, लेकिन संस्कारों से हमें सही और गलत का ज्ञान होता है। इसके साथ ही विद्यार्थियों में अनुशासन भी जरूरी हैं उनको समय का पाबंद होना, नियमों का पालन करना, और दूसरों के प्रति सम्मान जनक व्यवहार करना सिखाया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को सच बोलना, दूसरों के साथ सहानुभूति रखना, और दूसरों की मदद करना सिखाया जाना चाहिए। उनको देश से प्यार करना, देश के प्रति समर्पित रहना, और देश के विकास में योगदान करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा और संस्कार मिलते हैं, तब एक व्यक्ति बेहतर इंसान बनता है।
      शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने स्कूल में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 25 लाख रुपए देने की घोषणा की। कार्यक्रम में विधायक रोहित साहू, श्रीमती रेखा सोनकर, लोकेश पाण्डेय प्राचार्य संजय कुमार एक्का समेत बड़ी संख्या में विद्यार्थी और पालकगण उपस्थित थे।

    रायपुर / शौर्यपथ / रामकृष्ण मिशन के ंछात्र -छात्राओं से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तनाव से मुक्त रहने से ही परीक्षा में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नारायणपुर में स्कूली बच्चों से चर्चा करते हुए कहा कि परीक्षा की अच्छी तैयारी के साथ ही तनाव मुक्त रहना भी उतना ही जरूरी है।
      मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा बच्चों से परीक्षा पर चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चे परीक्षा के दिन पूरी तरह शांतचित्त होकर परीक्षा हाल में पहुंचें और किसी भी प्रकार का तनाव न लें। परीक्षा के समय प्रश्नों को भली-भांति पढ़ और समझ लें और सबसे सरल प्रश्नों के उत्तर को सबसे पहले हल करें। उन्होंने परीक्षा के पूर्व पढ़ने के साथ ही लिखने का अधिक से अधिक अभ्यास करने को कहा, जिससे परीक्षा के दौरान लिखने की गति अच्छी रहे।
      मुख्यमंत्री साय ने इन बच्चों से कहा कि यहां पर उच्च शिक्षा की समुचित सुविधा के लिए अब नारायपुर में कॉलेज भी खोलने जा रहे हैं, इस पर बच्चों ने खुशी जाहिर करते हुए  मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारी, रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी व्याप्तानंद सहित आश्रम के पदाधिकारी तथा शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे उपस्थित थे।

    आस्था /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में घर में तुलसी का पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि तुलसी की पूजा से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. जीवन में कष्टों से मुक्ति और सुख सृद्धि प्राप्त करने के लिए हर दिन नियम से तुलसी की पूजा करनी चाहिए. धर्म के विद्वानों के अनुसार, तुलसी पूजन के बाद खास मंत्रों के जाप से जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. जाप के बाद भगवान विष्णु को तुलसी की पत्तियां डालकर भोग लगाना चाहिए. आइए जानते हैं तुलसी पूजा के दौरान किन मंत्रों का जाप माना जाता है शुभ.
    तुलसी पूजा के समय इन मंत्रों का करें जाप
    तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
    धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
    लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
    तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।
    तुलसी नामाष्टक मंत्र
    वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
    पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
    एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
    य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
    तुलसीस्तुति
    मनः प्रसादजननि सुखसौभाग्यदायिनि।
    आधिव्याधिहरे देवि तुलसि त्वां नमाम्यहम्॥
    यन्मूले सर्वतीर्थानि यन्मध्ये सर्वदेवताः।
    यदग्रे सर्व वेदाश्च तुलसि त्वां नमाम्यहम्॥
    अमृतां सर्वकल्याणीं शोकसन्तापनाशिनीम्।
    आधिव्याधिहरीं नॄणां तुलसि त्वां नम्राम्यहम्॥
    देवैस्त्चं निर्मिता पूर्वं अर्चितासि मुनीश्वरैः।
    नमो नमस्ते तुलसि पापं हर हरिप्रिये॥
    सौभाग्यं सन्ततिं देवि धनं धान्यं च सर्वदा।
    आरोग्यं शोकशमनं कुरु मे माधवप्रिये॥
    तुलसी पातु मां नित्यं सर्वापद्भयोऽपि सर्वदा।
    कीर्तिताऽपि स्मृता वाऽपि पवित्रयति मानवम्॥
    या दृष्टा निखिलाघसङ्घशमनी स्पृष्टा वपुःपावनी
    रोगाणामभिवन्दिता निरसनी सिक्ताऽन्तकत्रासिनी।
    प्रत्यासत्तिविधायिनी भगवतः कृष्णस्य संरोपिता
    न्यस्ता तच्चरणे विमुक्तिफलदा तस्यै तुलस्यै नमः॥
    ॥ इति श्री तुलसी स्तुति ॥
    तुलसी का महत्व
    तुलसी के पौधे का धार्मिक महत्व है. तुलसी के पत्तियों के बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती है. भगवान विष्णु की पूजा बगैर तुलसी के पूरी होती है. तुलसी के पौधे में धन की देवी लक्ष्मी का वास माना जाता है. तुलसी की नियमित पूजा से घर में सुख और समृद्धि बनी रहती हैऔर आर्थिक परेशानियां कम होती है.

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /देवी सरस्वती को ज्ञान की देवी माना जाता है. माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को देवी सरस्वती की पूजा होती है जिसे बसंत पंचमी कहा जाता है. बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ मौसम के बदलाव से भी संबंध है. दो माह की ठंड के बाद बसंत के आगमन के साथ मौसम बदलने लगता है और चारों तरफ फूलों की बहार छा जाती है. साहित्य, शिक्षा, कला से जुड़े लोग बसंत पंचमी को मां सरस्वती की पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. इसी दिन से बच्चों को अक्षर ज्ञान की शुरुआत कराई जाती है. आइए जानते हैं क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी और इसकी शुरुआत कैसे हुई.
    बसंत पंचमी की शुरुआत
    पौराणिक मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन ज्ञान की देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं. सृष्टि को रचने वाले ब्रह्मा जी ने जब संसार की रचना की थी उसमें कोई ध्वनि नहीं होने के कारण उन्हें कुछ कमी लगी. उन्होंने अपने कमंडल से पृथ्वी पर जल छिड़का. पृथ्वी पर कंपन होने लगा और देवी सरस्वती प्रकट हुई. उनके हाथ में वीणा, माला और पुस्तक थी. देवी सरस्वती ने अपनी वीणा से वसंत राग छेड़ा. उनकी वीणा की ध्वनि से सृष्टि को वाणी और संगीत की प्राप्ति हुई. देवी ने वाणी के साथ-साथ विद्या और बुद्धी दी, जिससे संसार को ज्ञान का प्रकाश मिला. इसलिए बसंत पंचमी के दिन सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है.
    क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी
    बसंत पंचमी जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक है. बसंत ऋतु के साथ ही फसलें पकने लगती हैं. ठंड समाप्त होने के कारण मौसम सुहावना हो जाता है जिससे प्रकृति में रंग भरने लगता और फूल खिलने लगते हैं. यह दिन नई चीजे शुरू करने के लिए शुभ माना जाता है. इन सभी चीजों को उत्सव बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है.

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व होता है, खासकर माघ महीने में पड़ने वाली षटतिला एकादशी पर विशेष रूप से भगवान विष्णु की उपासना की जाती है. इस बार यह षटतिला एकादशी 6 फरवरी, मंगलवार के दिन पड़ेगी. इस दिन तिल से स्नान करने के साथ ही तिल का उबटन लगाना, तिल से हवन करना, तिल से तर्पण करना, तिल को दान करना और तिलों से बनी चीजों का सेवन करना शुभ माना जाता है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं षटतिला एकादशी के महत्व के बारे में और इस दिन आपको क्या करना चाहिए.
    षटतिला एकादशी शुभ मुहूर्त - हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी मनाई जाती है, जो इस बार 5 फरवरी शाम 5:24 पर शुरू होगी और इसका समापन 6 फरवरी 2024 को शाम 4:07 पर होगा. यानी कि षटतिला एकादशी का व्रत 6 फरवरी को ही किया जाएगा, इस एकादशी पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 7:06 से लेकर 9:18 तक रहेगा.
    इस तरह करें षटतिला एकादशी पर पूजा अर्चना
    षटतिला एकादशी पर पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें, अगर आपके घर में पहले से ही भगवान विष्णु की प्रतिमा है तो उन्हें पुष्प, धूप आदि अर्पित करें. व्रत का संकल्प लें और दिन भर व्रत करने के साथ ही रात्रि में जागरण और हवन भी करें. इसके बाद द्वादश तिथि को प्रातः काल उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु को भोग लगाए, पंडितों को भोजन कराएं और उसके बाद अन्न ग्रहण करें.
    षटतिला एकादशी उपाय
    षटतिला एकादशी के दौरान अगर आप कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. इसके लिए पूजा में तिल से हवन करें, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का लगातार जाप करते रहे. इसके अलावा एकादशी के दिन तिल से तर्पण कर पितरों की आत्मा की शांति की कामना करें. कहते हैं इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और घर में धन और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.

    रायपुर / शौर्यपथ / कोरबा जिले में आयोजित 67वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता 2023-24 के तहत आज बालक-बालिका 14 एवं 19 वर्ष आयु वर्ग के बेसबॉल मैच में  छत्तीसगढ़ ने सभी वर्गों में जीत हासिल कर चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया। छत्तीसगढ़ ने सभी वर्गों में दिल्ली को हराकर यह उपलब्धि हासिल की है। प्रतियोगिता में बालक, बालिका 14 एवं 19 आयु वर्ग में दिल्ली की टीम उपविजेता रही। इसी प्रकार बालक 19 वर्ष में महाराष्ट्र तीसरे, मध्यप्रदेश चतुर्थ, बालिका 19 वर्ष आयु में महाराष्ट्र तीसरा, चंडीगढ़ चतुर्थ, बालक 14 वर्ष में सी.बी.एस.ई तीसरा, महाराष्ट्र चतुर्थ और बालिका 14 वर्ष में चंडीगढ़ तीसरा व महाराष्ट्र चौथे स्थान पर रहा।

    दुर्ग / शौर्यपथ / आज दिनाँक 29 जनवरी सोमवार को सकट चौथ, संकष्टी चतुर्थी, वक्रतुंडी चतुर्थी, तिलकुटा चौथ के उपलक्ष्य पर श्री राजस्थानी गौड़ ब्राम्हण समाज महिला मंडल द्वारा आज तिलकुटा चौथ के अवसर पर कृष्ण भवन, गंजपारा में उद्यापन का आयोजन किया गया.तिलकुटा चौथ पर महिलाएं अपने बच्चों एवं पति के दिर्धायु एवं स्वस्थ जीवन के लिए निर्जला उपवास रखती है और रात को चन्द्र देव का दर्शन के पश्चात भोजन लेती है.
        आज तिलकूट चौथ व्रत पर श्री राजस्थानी गौड़ ब्राम्हण समाज की महिला मंडल ने महिलाओ के लिए आयोजन किया जिसमें समाज की महिलाओं ने अलग अलग स्थान में पूजा न करके एक साथ सामाजिक भवन में पूजा एवं उद्यापन किया साथ ही साथ सभी महिलाओं ने एक साथ मिलकर अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखा और चौथ माता की कथा सुनी।
        पूरे साल की चार चौथ में से एक संकष्ट चौथ व्रत में महिलाओं पूरे दिन निराहार रहकर रात में चांद के दर्शन किया, चंद्रोदय के बाद महिलाओं ने चांद का अर्घ्य देकर बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। इसके बाद महिलाओं ने व्रत खोला। उद्यापन करने वाली महिलाओं ने चंद्रोदय के बाद 16-16 विवाहिताओं एवं एक छोटे बालक को श्री गणेश जी के नाम से को भोजन करवाकर सभी महिलाओं को श्रृंगार की सामग्री एवं उपहार देकर व्रत खोली।
        महिलाओं ने माताजी एवं चन्द्र देव के दर्शन कर रेवड़ी, गजक, तिलपट्टी और गुड का प्रसाद चढ़ाया।
       इस आयोजन में श्री राजस्थानी गौड़ ब्राम्हण समाज की लगभग 200 से अधिक महिलाएं उपस्थित रही, समाज की 10 महिलाओं ने इस आयोजन में उद्यापन किया जिनके लिए समाज की 16-16 महिलाओं को आमंत्रित किया गया, और सभी को भोजन करवाकर भेंट स्वरूप श्रृंगार की सामग्री दी गयी..
        कार्यक्रम में किरण शर्मा, सारिका शर्मा, चंचल शर्मा, मिथला शर्मा, चंदा शर्मा, अन्नू फुलबाज, अन्नू राम शर्मा, अर्चला शर्मा, नीलू पंडा, रश्मि पुरोहित, अनोखी फुलबाज, सोनम शर्मा, चंचल शर्मा, सुमन शर्मा, अनमोल शर्मा, आरती शर्मा, कचरी शर्मा, रिया शर्मा निक्की शर्मा उषा शर्मा, रूपाली शर्मा, पूनम नरेरा, कविता जोशी, नीलम शर्मा, निवेदिता शर्मा, मधु शर्मा, ज्योति मिसर, अन्नू शर्म एवं सैकड़ो महिलाये उपस्थित थी.

    दुर्ग / शौर्यपथ / केन्द्रीय जेल परिसर दुर्ग में एस आर हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेन्टर चिखली दुर्ग द्वारा दिनांक 27 जनवरी को नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया । उक्त शिविर का आयोजन करने हेतु स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा विधिवत अनुमति ली गई थी।
      आयोजित शिविर में डॉ छाया भारती रेटीना र्सजन द्वारा बंदियों व जेल स्टाफ का नेत्र परीक्षण किया गया। डॉ छाया भारती द्वारा बताया गया कि भविष्य में भी इस प्रकार के शिविर जनहित में आयोजित किए जाएंगे ।
      आयोजित उक्त शिविर मे 95 बंदियों व जेल स्टाफ ने नेत्र परीक्षण कराया जिसमे 6 मरीजों की आँखो में जाले की शिकायत व 3 मरीजों की आँखों में रेटीना की शिकायत व 2 मरीजों की आंखों में मोतियाबिन्द की शिकायत पाई गई ।
      अस्पताल के चेयरेमन संजय तिवारी ने बताया कि श्रीमान जेल अधीक्षक दुर्ग द्वारा अस्पताल प्रबन्धन से नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन करने हेतु पत्राचार किया गया था । जिससे अस्पताल प्रबन्धन द्वारा सहमति प्रदान करते हुए शिविर का आयोजन किया गया था। चेयरमेन ने जेल प्रबन्धन का धन्यवाद दिया कि एस आर अस्पताल की टीम को सेवाएं प्रदान करने अवसर दिया ।
    उक्त शिविर में अस्पताल के स्टाफ प्रेम चन्द्राकर रेखा पारकर मंयक साहू लोकेश्वरी निषाद ने अपनी सेवाएँ प्रदान की ।

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