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May 31, 2026
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टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / खाने का स्वाद बढ़ाने वाला तेज पत्ता वास्तु शास्त्र और आयुर्वेद में भी बहुत महत्व रखता है. यह सेहत के लिए जितना अच्छा होता है उतना ही इससे जुड़े उपाय भी प्रभावकारी हैं. इसके उपायों में रात को सोने के पहले बेडरूम में तेज पत्ता को जलाना भी शामिल है. आइए जानते हैं रात को सोने से पहले बेडरूम में तेज पत्ता जलाने से होते हैं क्या-क्या फायदे.
टेंशन दूर
तेज पत्ता की अपनी खुशबू होती है और इसे जलाने पर वह खुशबू आसपास फैलने लगती है. रात में सोने से पहले इसे जलाने से इसकी खुशबू के कारण तनाव दूर हो जाता है और मन को शांति मिलती है.
बुरी नजर से बचाव
तेज पत्ता जलाने का उपाय बुरी नजर से बचाने का प्रभावशाली तरीका है. रात में सोने से पहले तेज पत्त जलाने का उपाय कर लेने से दिन भर की लगी बुरी नजर उतर जाती है.
इम्युनिटी पर असर
अपने औषधीय गुणों के कारण तेज पत्ता जलाने का असर बॉडी में इम्युनिटी पर पड़ता है . इससे बीमारियों से बचने में मदद मिलती है. तेज पत्ता जलाने से उसके गुण सांसों के जरिए बॉडी में पहुंच जाते हैं.
निगेटिव एनर्जी और बुरे सपनों से बचाव
वास्तु शास्त्र के अनुसार रात में बेडरूम में तेजपत्ता जलाने का उपाय निगेटिव एनर्जी और बुरे सपनों को दूर रखने में मदद करता है. इससे आप सुकून से अच्छी नींद ले सकते हैं.
आर्थिक परेशानी करे दूर
रात के समय तेजपत्ता जलाने के कारण घर का वातावरण शुद्ध हो जाता है जिससे घन की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर कृपा करती हैं. इससे आर्थिक परेशानियां कम होने लगती हैं.
बेहतर रिश्ते
बेडरूम में तेजपत्ता जलाने का उपाय दंपति के आपसी रिश्ते में मधुरता लाता है. इससे घर में क्लेश और मनमुटावों को दूर करने में मदद मिलती है.

आस्था /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे की बहुत मान्यता है. हर घर में तुलसी के पेड़ की पूजा जरूर होती है. लोग तुलसी के पेड़ के आगे दीया जलाते हैं और जल भी चढ़ाते हैं. धार्मिक कारणों के साथ स्वास्थ्य के लिए भी तुलसी का पेड़ बहुत अच्छा माना जाता है. तुलसी में कई औषधीय गुण होते हैं जो शरीर को बीमारियों से दूर रखने में मदद करते हैं. मगर कई बार तुलसी के पत्ते काले पड़ जाते हैं. इतना ही नहीं पत्ते झड़ने भी लगते हैं और ये पौधा सूख जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आप पौधे का अच्छे से ध्यान नहीं रख रहे होते हैं. तुलसी का पौधा (Tulsi Plant) खराब होने की शुरुआत कुछ पत्तों के काले होने से होती है मगर धीरे-धीरे ये बढ़ता जाता है और सारे पत्ते काले हो जाते हैं.
तुलसी के पत्तों का सेवन करने के फायदे |
तुलसी की पत्तियां एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होने के चलते इम्यून सिस्टम को मजबूत करती हैं. ये एसेंशियल ऑयल से भरपूर होती हैं. जो इम्यूनिटी बढ़ाता है.
तुलसी के पत्ते पाचन बेहतर करने में भी मददगार हैं. ये एसिडिटी और गैस की समस्या को दूर करते हैं. तुलसी आपको स्ट्रेस फ्री बनाने में मददगार है.
तुलसी के पत्तों की चाय पीने या इनको चबाने से तनाव और चिंता को कम करने में मदद मिल सकती है.
तुलसी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट ब्लड प्यूरिफिकेशन का काम कर सकते हैं. ये आपकी स्किन और बालों के लिए कमाल कर सकते हैं.
तुलसी को डाइट में शामिल करने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और खांसी जैसी श्वसन स्थितियों से राहत मिल सकती है.
तुलसी पत्तों को काले होने से रोकने के उपाय | तुलसी के पत्ते काले होने पर क्या करें?
ज्यादा पानी ना डालें
तुलसी में अगर ज्यादा पानी डाल दो तो भी इसके नुकसान होते हैं और कम डालो तो भी. तुलसी के पत्ते को काला होने से बचाने के लिए पौधे में उतना ही पानी डालें जितने में मिट्टी गीली हो जाए. बहुत अधिक पानी डालने से बचे, ये आपके पौधों की सेहत के लिए अच्छा नहीं है.
नमी चेक करें
तुलसी के पौधे को काला होने से बचाने के लिए इसकी नमी चेक करना बेहद जरुरी होता है. ज्यादा पानी की वजह से पौधे की जड़ें गीली रहने लगती हैं जिसकी वजह से पौधा सड़ने लगता है. इसलिए हमेशा मिट्टी की नमी अंगुली से चेक करें उसके बाद ही पानी डालें. ताकि आपको आइडिया रहेगा कितना पानी डालना है और कितना नहीं.
कीटनाशक का इस्तेमाल
तुलसी के पत्ते काले कई कारणों की वजह से होते हैं. इसका सबसे मेन कारण कीड़े लगना है. जब पौधे में कीड़े लग जाते हैं तो पत्ते काले पड़ना शुरू हो जाते हैं. ये कीड़े नजर नहीं आते हैं. ये तब पता चलता है जब पत्ते नीचे से काले होने लगते हैं. कीड़ों से बचाने के लिए घर में ही कीटनाशक दवाई बनाकर डालें. इससे तुलसी के पौधे में कीड़े नहीं लगते हैं.

आस्था /शौर्यपथ / मान्यता है कि श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्‌डू गोपाल की पूजा और सेवा से जीवन की हर मनोकमाना पूरी होती है. अगर आप लड्डू गोपाल के भक्त हैं तो उनकी सेवा के कुड खास नियमों का जरूर पालन करें. लड्डू गोपाल को नियम के साथ समय पर भोग लगाने का बहुत महत्व है. शास्त्रों के अनुसार लड्डू गोपाल को हर दिन सुबह से रात सोने तक चार बार भोग जरूर लगाना चाहिए. आइए जानते हैं लड्डू गोपाल को भोग लगाने का सही समय क्या है.
चार बार भोग
लड्‌डू गोपाल को सुबह से रात तक चार बार भोग लगाने का नियम है. उन्हें हर बार सही समय पर अगल अलग चीजों का भोग लगाना चाहिए और भोग में तुलसी के पत्ते जरूर डालना चाहिए.
पहले भोग का समय
बाल गोपाल को दिन का सबसे पहला भोग सुबह 6 से 7 बजे के बीच लगाना चाहिए. इसके लिए भगवान को घंटी या फिर ताली बजाकर जगाएं. सुबह के पहले भोग में दूध या चाय के साथ सात्विक बिस्कुट चढ़ाया जा सकता है.
दूसरे भोग का समय
प्रभु को दूसरा भोग लगाने से पूर्व स्वयं स्नान जरूर कर लें. इससे प्रभु को स्नान करवाएं और उन्हें वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार करें. उन्हें तिलक लगाएं. बाल गोपाल को दूसरे भोग में मक्खन और मिश्री या लड्डू का भोग चढ़ाया जा सकता है.
तीसरा भोग कब लगाएं
बाल गोपाल को तीसरा भोग दोपहर में लगाना चाहिए. इस समय अपने लिए बनाए भोजन से ही भगवान को भोग लगाएं. भोग के भोजन में प्याज और लहसुन का उपयोग वर्जित होता है इसका ध्यान रखें. लड्डू गोपाल को भोग लगाने के लिए मीठी पूरी या परांठा भी बना सकते हैं.
चौथे भोग का समय
बाल गोपाल को चौथा भोग शाम को सात से आठ बजे की बीच लगाना चाहिए. इस समय भगवान को घर में बने सात्विक भोजन से भोग चढ़ाएं. इसके लिए भोजन बनते ही भोग को अलग कर लें. प्रभु को सुलाने से पहले दूध का भोग लगाना जरूरी है.

आस्था /शौर्यपथ /पूजा पाठ से लेकर संध्या के समय दिया जलाने का बहुत महत्व है. सनातन धर्म में पूजा के समय भगवान के सामने दिया जलाकर प्रार्थना की जाती है और संध्या के समय तुलसी के चौरे और मुख्य दरवाजे पर दिया जलाया जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दिए की लौ से कई तरह के संकेत मिलते हैं. आमतौर पर दिऐ की लौ तब ऊंची होती जब तेल या घी समाप्त होने के कारण दिया बुझने वाला होता है, लेकिन दिया जलाते ही अगर लौ ऊंची हो तो उसका अलग अर्थ होता है. आइए जानते हैं दिऐ की ऊंची लौ से क्या संकेत मिलते हैं
प्रभु प्रसन्न
दिया जलाते ही अगर लौ ऊंची तो यह बहुत शुभ संकेत है. यह बताता है कि प्रभु आपसे प्रसन्न हैं. उन्हें आपकी पूजा स्वीकार है और वे आप पर अपनी कृपा बनाए हुए हैं. भगवान की आप पर कृपा दिए की लौ में प्रतिबिंबित होती है.
वास्तु दोष से मुक्त
दिए की लौ का ऊंचा रहना बताता है कि घर की ऊर्जा सकारात्मक है और नकारात्मकता का कोई अंश मौजूद नहीं है. इसके साथ ही दिए की ऊंची लौ संकेत है कि घर वास्तु दोष से पूरी तरह से मुक्त है. वास्तु के अनुसार दोष मुक्त घर में ही दिए की लौ ऊंची उठती है.
अनुकूल हैं ग्रह
दिया जलाने पर ऊंची और अच्छी प्रकाश वाली लौ संकेत है कि घर परिवार पर ग्रहों की कृपा है और कोई ग्रह प्रतिकूल स्थिति का निर्माण नहीं कर रहे हैं. आपके और आपके परिजनों की कुंडली में ग्रह दोष नहीं बन रहा है.
शुभ समाचार
दिए की ऊंची लौ संकेत है कि जल्दी ही आपको कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है. आपको लंबे समय से किसी विशेष चीज का इंतजार है तो वह पूर्ण होने के करीब आ गया है. यह आपके घर और परिवार के लिए समय के बेहतर होने का संकेत है.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हर साल 24 एकादशी पड़ती हैं और हर एकादशी का अपना अलग महत्व होता है. माघ के महीने में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है. माना जाता है कि इस एकादशी पर विधि-विधान से भगवान विष्णु का पूजन किया जाए तो घर में सुख-समृद्धि आती है और पापों से मुक्ति मिल जाती है. इस साल पंचांग के अनुसार, जया एकादशी की तिथि 19 फरवरी की सुबह 8 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी और इस तिथि का समापन 20 फरवरी की सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर हो जाएगा. उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए जया एकादशी का व्रत 20 फरवरी को रखा जाएगा और इसी दिन पूजा भी की जाएगी.
जया एकादशी की व्रत कथा |
माना जाता है कि एक समय की बात है जब चिरकाल में स्वर्ग में स्थित नंदन वन में एक उत्सव का आयोजन किया जा रहा था. इस उत्सव में स्वर्ग के सभी देवगण, सिद्धगण और मुनि आदि उपस्थित हुए थे. इस समय नृत्य और गायन चल रहे थे जो गंधर्व और गंधर्व कन्याओं द्वारा किया जा रहा था. इसी समूह में एक नृतिका पुष्यवती की दृष्टि गंधर्व माल्यवान पर पड़ गई और वह उसके यौवन पर मोहित हो गई और अमर्यादित ढंग से नृत्य करने लगी. इस चलते माल्यवान ने बेसुरा गाना गाना शुरू कर दिया.
इस घटना को देख-सुन सभी क्रोधित होने लगे. स्वर्ग नरेश इंद्र देव ने क्रोधित होकर दोनों को स्वर्गलोक से निष्कासित कर दिया. इसके साथ ही दोनों को शाप दिया कि दोनों को अधम योनि प्राप्त होगी और दोनों इसके बाद से ही हिमालय में पिशाच योनि में कष्टदारी जीवन व्यतीत करने लगे.
सदियों बाद माघ मास की एकादशी अर्थात् जया एकादशी के दिन माल्यवान और पुष्यवती ने कुछ नहीं खाया और फल खाकर दिन व्यतीत किया. इसके बाद रातभर जागरण किया और श्रीहरि का स्मरण किया. इससे भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और दोनों को प्रेत योनि से मुक्त कर दिया. इसके बाद से ही भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने के लिए जया एकादशी का व्रत रखा जाता है.

   आस्था /शौर्यपथ / भोलेनाथ की पूजा-अर्चना में बेलपत्र, धतूरा दूध आदि विशेष रूप से शामिल किया जाता है. लेकिन अब से आप काली मिर्च को भी शामिल कर सकते हैं. इसे शिव जी को अर्पित करने से कई लाभ मिलते हैं, जिसके बारे में आपको बताने वाले हैं. आइए जानते हैं छोटे से दिखने वाले इस मसाले का धार्मिक महत्व क्या है.
भोलेनाथ की पूजा में काली मिर्च के उपाय
1- अगर आप शिवलिंग पर काली मिर्च और तिल चढ़ाते हैं, तो फिर शिव की पूजा का आपको दोगुना लाभ मिलेगा. इससे शिव जी प्रसन्न होंगे. आपको शिवलिंग पर 1 कालीमिर्च 7 काले तिल चढ़ाने चाहिए. इससे आपको बहुत फायदे होंगे.
2- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस उपाय को तो आप हफ्ते के किसी दिन भी कर सकते हैं. आप इस तरीके से पूजा शिवरात्रि में करते हैं तो इसका विशेष लाभ आपको मिलेगा.
3- आपको बता दें कि जिनकी कुंडली में राहु, शनि और केतु अशुभ स्थिति में हैं तो उनके लिए काली मिर्च और तिल का उपाय बहुत अच्छा होता है. शिवलिंग पर कालीमिर्च अर्पित करने से रोगों का नाश होता है.
4- भगवान भोलेनाथ की कृपा से असंभव कार्य पूरे किए जा सकते हैं. साथ ही मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. शिवरात्रि के दिन शिवलिंग का रुद्राभिषेक करना फलदायी होता है. यह व्रत क्रोध, ईर्ष्या, अभिमान और लालच जैसी भावनाओं पर रोक लगाता है.

  व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी  का त्योहार मनाया जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि कोई भी हिंदू त्योहार एक दिन नहीं बल्कि दो दिन मनाया जाता है. ऐसे में बसंत पंचमी की तारीख को लेकर भी लोगों को कई सारी कन्फ्यूजन है कि बसंत पंचमी 13 फरवरी 2024 को मनाई जाएगी या 14 फरवरी को मनाई जाएगी? तो चलिए आज हम आपको बताते हैं ज्योतिषों  के अनुसार बसंत पंचमी की सही तिथि कौन सी है और किस दिन आप व्रत, पूजन और दान आदि कर सकते हैं.
बसंत पंचमी 2024 डेट - हिंदू पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी की शुरुआत 13 फरवरी को दोपहर 2:41 से हो जाएगी और अगले दिन यानी कि 14 फरवरी को दोपहर 12:09 तक रहेगी, हालांकि उदया तिथि 14 जनवरी को है. ऐसे में बसंत पंचमी का त्योहार 14 फरवरी को ही मनाया जाएगा.इतना ही नहीं इस बार बसंत पंचमी के मौके पर रेवती नक्षत्र भी बन रहा है. इसके अलावा रवि योग, अश्विनी नक्षत्र और शुक्ल योग भी बनने जा रहा है.
क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी - धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा के मुख से ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती प्रकट हुई थी. ऐसे में बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है और पीले रंग के वस्त्र धारण किए जाते हैं. उन्हें पीले रंग का भोग लगाया जाता है और इस दिन नई किताबों की पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है.
बसंत पंचमी की पूजा - अब बात आती है कि बसंत पंचमी की पूजा हमें कैसे करनी चाहिए? तो सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, सरस्वती पूजा के लिए पीले रंग के कपड़े पहने. साथ ही देवी मां को भी पीले रंग के वस्त्र पहनाएं या केसर का तिलक जरूर लगाएं. इसके अलावा मां सरस्वती को पीले रंग के फूल और पीले रंग का भोग अर्पित करें. पूजा के दौरान ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।। कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्। वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।। रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्। मंत्र का जाप करें. कहते हैं सच्चे दिल से बसंत पंचमी के दिन अगर मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाए तो वह धन, बुद्धि और ज्ञान का आशीर्वाद देती हैं.

सेहत टिप्स /शौर्यपथ /जब सफल वेट लॉस या वेट मैनेजमेंट की बात आती है, तो क्रेविंग को कंट्रोल करना और तृप्ति को बढ़ावा देना एक अहम पहलू है. भूख लगना, खाने की इच्छा होना आम बात है और हम सभी इसके लिए दोषी हैं. कैलोरी से भरपूर खाने की लालसा, अनियमित मात्रा या खाना, अनियमित समय वजन घटाने की पूरी प्रक्रिया में काफी बाधा डाल सकता है और यहीं पर तृप्ति काम आती है. तृप्ति भोजन के बाद फुलनेस और संतुष्टि की भावना है. अच्छी खबर यह है कि कुछ फूड्स आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने की शक्ति रखते हैं, जिससे आपको ज्यादा खाने पर अंकुश लगाने और हेल्दी विकल्प चुनने में मदद मिलती है.
पेट को लंबे समय तक भरा रखने वाले फूड्स |
फाइबर वाले फूड्स: फाइबर से भरपूर फूड्स तृप्ति को बढ़ाने में सहायक हैं. उन्हें चबाने और पचने में ज्यादा समय लगता है, जिसका अर्थ है कि वे लंबे समय तक आपके पेट में रहते हैं. इससे लंबे समय तक पेट भरे होने का अहसास होता है. साबुत अनाज, जैसे ओट्स, क्विनोआ और ब्राउन राइस, फाइबर के बेहतरीन स्रोत हैं. इसी तरह दाल, चना और काली फलियों का भी सेवन कर सकते हैं.
प्रोटीन पावरहाउस: प्रोटीन एक और तृप्ति सुपरस्टार है. यह न केवल टिश्यू को बनाने और मरम्मत में मदद करता है बल्कि फुलनेस की फीलिंग भी प्रदान करता है. जब आप प्रोटीन से भरपूर फूड्स खाते हैं, तो आपका शरीर हार्मोन जारी करता है जो आपके ब्रेन को संकेत देता है कि आपने पर्याप्त खा लिया है. चिकन, टर्की, मछली, टोफू और बीन्स जैसे प्रोटीन के कम स्रोत लंबे समय तक संतुष्ट रहने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं.
हेल्दी फैट: जबकि आपको फैट का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए, सही प्रकार का फैट भी तृप्ति को बढ़ावा दे सकता है. एवोकाडो, नट्स और बीज जैसे फूड्स में हेल्दी फैट होता है जो पाचन को धीमा कर देती है और आपको पेट भरा हुआ महसूस कराता है.
वाटर कंटेंट वाली चीजें: हाई वाटर कंटेंट वाले फूड्स तृप्ति को बढ़ावा देने में आश्चर्यजनक रूप से प्रभावी हो सकते हैं. खीरा, अजवाइन और सलाद जैसी सब्जियां ज्यादातर पानी से बनी होती हैं, जो बिना ज्यादा कैलोरी जोड़े आपके भोजन में मात्रा बढ़ा देती हैं.
साबुत फूड्स: तृप्ति को बढ़ावा देने वाले इन फूड्स के बीच एक सामान्य विषय यह है कि वे अक्सर अपने प्राकृतिक, संपूर्ण रूप में पाए जाते हैं. साबुत फूड्स में प्राकृतिक फाइबर, पोषक तत्व और पानी की मात्रा बरकरार रहती है.
बैलेंस डाइट: बैलेंस डाइट का लक्ष्य रखें जिसमें इन पेट भरने वाले फूड्स का संयोजन शामिल हो. उदाहरण के लिए ओटमील का एक कटोरा जिसके ऊपर नट्स और जामुन डाले गए हों, फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर होता है.

  आस्था /शौर्यपथ /मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है. कहते हैं कि अगर धन की देवी की कृपा अपने जातकों पर बनी रहे तो उनके जीवन में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हम अपने घर में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिससे देवी मां रुष्ट हो जाती हैं.  इतना ही नहीं इससे जीवन में धन-धान्य की कमी होने लगती है और दरिद्रता बढ़ने लगती है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सुबह के समय आपको ऐसे कौन से काम नहीं करने चाहिए, जिससे देवी मां नाराज हों.
सुबह देर से उठाना
  कहा जाता है कि सूर्योदय के बाद सोने वाले व्यक्ति से देवी मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं, इसलिए कभी भी देर तक नहीं सोना चाहिए. कोशिश करें कि आप ब्रह्म मुहूर्त में उठे, स्नान करने के बाद भगवान की पूजा अर्चना करें और उनका आशीर्वाद लें.
क्लेश
   जी हां, कहा जाता है कि जिस घर में सुबह-सुबह क्लेश शुरू हो जाते हैं उस घर में मां लक्ष्मी कभी विराजमान नहीं होती है. ऐसे में कभी भी सुबह के समय लड़ाई-झगड़ा करने से बचें और घर में एक पॉजिटिव माहौल बनाएं.
घर का मेन गेट गंदा होना
    कहते हैं कि लक्ष्मी मां घर के मुख्य द्वार से ही प्रवेश करती हैं, ऐसे में सुबह के समय कभी भी मुख्य द्वार पर कचरा ना रखें और दरवाजे पर कभी भी गंदगी ना होने दें. सुबह के समय सबसे पहले मुख्य द्वार पर झाड़ू लगाकर यहां की सफाई करें.
तुलसी को तोड़ना
   कहते हैं कि तुलसी के पौधे में लक्ष्मी मां का वास होता है, ऐसे में कभी भी सुबह के समय बिना नहाए तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, ना ही बिना नहाए तुलसी को पानी देना चाहिए.
गाय का अनादर करना
    अगर सुबह के समय आपके घर पर गाय आती है या आपको रास्ते में कहीं गाय मिल जाती है, तो उसे भगाएं नहीं बल्कि उन्हें हाथ जोड़कर नमन करें, रोटी दें और उन्हें प्यार से सहलाएं. कहते हैं कि गाय की सेवा करना लक्ष्मी मां की सेवा करने के बराबर होता है.

   ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / आज के समय में लोगों के पास काम इतना ज्यादा है कि वो अपने लिए समय ही नहीं निकाल पाते हैं. खाने-पीने में कमी, उसके साथ ही पॉल्यूशन ये सभी चीजें स्किन को खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ती हैं. बिजी रहने की वजह से स्किन केयर का भी समय नहीं मिल पाता है. जिस वजह से समय से पहले ही स्किन बूढ़ी, बेजान और डल नजर आने लग जाती है. लेकिन ऐसा कोई नहीं चाहता है कि वो उम्र से पहले बूढ़ा दिखे और उसकी स्किन पर झाइयां नजर आएं. हर किसी की ख्वाहिश होती है कि वह जवान और फ्रेश नजर आए. इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी स्किन केयर सही तरीके से करें. आज हम आपके लिए स्किन केयर के कुछ आसान से मॉर्निंग टिप्स लेकर आए हैं, जिन्हें फॉलो करके आप अपनी स्किन का ध्यान रख सकते हैं.
अगर आप रूटीन में हर सुबह ये स्किन केयर टिप्स फॉलो करेंगे तो आपको कुछ ही समय में अपनी स्किन पर सुधार नजर आने लगेगा. आपकी स्किन यंग और फ्रेश नजर आएगी. मॉर्निंग स्किन केयर के लिए आपको सुबह बस 15 मिनट का समय चाहिए. मॉर्निंग रूटीन में इन आदतों को शामिल करके आप अपनी स्किन को हाइड्रेट रखने के साथ ही धूल-मिट्टी, यूवी रेज और पॉल्यूशन से भी बचा सकते हैं.
सुबह अपने चेहरे को अच्छे से साफ कर लें. इससे फेस पर जमा धूल-मिट्टी, डेड स्किन और गंदगी साफ हो जाएगी. एक बात का ध्यान रखें कि आप जिस भी फेस वॉश का यूज कर रहे हैं तो उसे अपनी स्किन टाइप के हिसाब से ही चुनें. अल्कोहल और केमिकल फ्री क्लींजर को यूज करें. अगर आपकी स्किन ऑयली है तो ऑयल फ्री क्लींजर का इस्तेमाल कर सकते हैं.
    अपनी स्किन को यंग और ग्लोइंग बनाने के लिए हल्दी और चंदन के फेस पैक का इस्तेमाल करें. ये दोनों ही स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाने में मदद करते हैं. हल्दी-चंदन का फेस पैक बनाने के लिए आपको चंदन पाउडर में चुटकी भर हल्दी और गुलाब जल मिला लेना है और फिर इसे पूरे चेहरे पर लगभग 10 मिनट के लिए लगा लें और सूख जाने पर धुल लें. इससे आपका चेहरा काफी फ्रेश नजर आएगा.
   मॉर्निंग रूटीन के अगले स्टेप में आपको फेस पर टोनर और मॉइश्चराइजर लगाना है. इसके लिए आप हाइड्रेटिंग टोनर का यूज करें. वहीं मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल अपनी स्किन टाइप के हिसाब से करें. इससे स्किन हाइड्रेट रहती है और ड्राइनेस भी नहीं होती.
इसके बाद अपने फेस पर सीरम लगाएं. सीरम को लेने से पहले उसे भी अच्छे से अपनी स्किन टाइप के हिसाब से ही चुनें. इसको अप्लाई करने के बाद सनस्क्रीन लगाएं और फिर बाहर निकलें. अगर आप घर पर भी रहते हैं तो ये मार्निंग रूटीन जरूर फॉलो करें.

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