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टिप्स /शौर्यपथ /चाय का चौक हर किसी को होता है. लोग अच्छी चाय की तलाश में बहुत दूर तक चले जाते हैं. घर में भी चाय बनाते समय हर किसी के दिमाग में चल रहा होता है कि चाय बढ़िया बन जाए तो मजा ही आ जाएगा. अच्छी चाय बनाने के चक्कर में कई बार लोग दूध ज्यादा डाल देते हैं तो कभी चीनी. इससे चाय का पूरा स्वाद खराब हो जाता है. आज हम आपको चाय बनाने का सही तरीका बताते हैं. जिससे बेहतरीन चाय घर में ही बनाई जा सकती है. इसके लिए बस दूध और चीनी की सही मात्रा जान लें.
चाय में परफेक्ट होना चाहिए इंग्रेडिएंट्स का रेशियो
चाय बनाते समय सबसे ज्यादा चीनी और दूध का ध्यान रखें. कोशिश करें कि चीनी की मात्रा थोड़ी कम ही डालें. ज्यादा चीनी आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है. इसलिए कम ही चीनी डालने की कोशिश करें. अगर आप एक कप चाय बना रहे हैं तो कोशिश करें कि एक छोटा चम्मच ही चीनी डालें. अगर आप चाय में चीनी नहीं डालना चाहते हैं तो उसकी जगह गुड़ का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
दूध की मात्रा का खास ध्यान रखें
चाय में दूध ज्यादा हो जाता है तो इसके स्वाद खराब हो जाता है और कम हो जाता है तो ये पानी जैसी लगने लगती है. चाय में सही मात्रा में दूध डालें. अगर आप एक कप चाय बना रहे हैं तो उसमें आधा कप पानी और आधा कप दूध डालें. इससे परफेक्ट मात्रा में चाय में दूध डालते है और बढ़िया चाय बनती है.
चाय के फायदे |
अगर किसी भी चीज को लिमिट में पिया जाए तो उसके ढेर सारे फायदे होते हैं. इसी तरह चाय पीने के भी कई फायदे होते हैं.
1- अगर आप चाय में अदरक और लौंग डालकर बनाते हैं तो ये आपके शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होती है. ये आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट कर देती है.
चाय एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है. इसमें इलायची, दालचीनी, अदरक डालकर बनाना चाहिए. इन सब चीजों में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स के प्रभाव से बचाते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /कैल्शियम की कमी होने पर शरीर कई तरह से प्रभावित होता है. हड्डियों में दर्द से डेंटल कैविटीज, मसल्स क्रैंप्स, नींद की कमी और नर्व्स संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं. ऐसे में कैल्शियम की कमी से बचे रहना आवश्यक होता है. यह कमी ज्यादातर उन लोगों को प्रभावित करती है जो दूध पीने से परहेज करते हैं और जिनके खानपान में कैल्शियम के दूसरे स्त्रोत नहीं होते हैं. दूध को कैल्शियम का एकलौता स्त्रोत समझा जाता है लेकिन जो लोग दूध नहीं पीते हैं वे इन फूड्स को खानपान का हिस्सा बनाकर कैल्शियम की कमी को पूरा कर सकते हैं. खासकर ऐसे कुछ हरे पत्ते हैं जिनका जूस पीने पर भी कैल्शियम की कमी पूरी होती है.
दूध के अलावा कैल्शियम से भरपूर फूड्स |
पालक का जूस
सिर्फ आयरन ही नहीं बल्कि पालक के पत्ते कैल्शियम से भी भरपूर होते हैं. एक कप पके हुए पालक में दिनभर की जरूरत का 25 फीसदी तक कैल्शियम पाया जाता है. पालक आयरन, विटामन ए और फाइबर का भी अच्छा स्त्रोत है. ऐसे में इस हरी पत्तेदार सब्जी को खाने या फिर इसका जूस (Spinach Juice) बनाकर पीने पर शरीर की कैल्शियम की कमी पूरी हो सकती है.
चिया सीड्स
शरीर की कैल्शियम की कमी पूरी करने में चिया सीड्स का असर भी देखने को मिलता है. एक चम्मच चिया सीड्स को रोजाना पानी में भिगोकर खाने पर भी कैल्शियम की कमी पूरी हो सकती है. कैल्शियम के लिए चिया सीड्स को सलाद, जूस और अलग-अलग ड्रिंक्स में डालकर भी खाया-पिया जा सकता है.
बादाम
सूखे मेवे कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. इनमें प्रोटीन से लेकर विटामिन और खनिज भी पाए जाते हैं. बादाम ऐसा सूखा मेवा है जिसमें कैल्शियम की अच्छी मात्रा होती है. बादाम को रोजाना खाया जाए तो शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं होती.
टोफू
वीगन और वेजीटेरियन लोगों के लिए टोफू कैल्शियम का एक अच्छा स्त्रोत है. सोया मिल्क, सोयाबीन, टोफू और अन्य सोया प्रोडक्ट्स से भी शरीर को अच्छी मात्रा में कैल्शियम मिल जाता है. टोफू को डाइट में शामिल करने के भी अलग-अलग तरीके हैं. इसे सलाद, सब्जी या करी वगैरह बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / आपके दूध के गिलास को न्यूट्रिशन के पावरहाउस में बदलने के लिए केवल कुछ चीजें उसमें शामिल करने की जरूरत है. आप नहीं जानते हैं लेकिन ऐसा करने से कई स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. भले ही दूध अपने आप में एक पोषक तत्व से भरपूर ड्रिंक है, लेकिन कुछ और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करने से इसके स्वास्थ्य लाभ बढ़ सकते हैं. न सिर्फ ये दूध एडल्ट लोगों के लिए बल्कि बच्चों के लिए चमत्कार कर सकता है. यहां उन चीजों के बारे में जानिए जिन्हें दूध में डालकर इसे एक पावरफुल ड्रिंक बना सकते हैं जो इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू में सुधार करते हैं.
दूध में क्या मिलाने से फायदे बढ़ जाते हैं |
1. दालचीनी
अपने दूध में एक चुटकी दालचीनी मिलाने से इसका स्वाद बेहतर होने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं. दालचीनी सूजन को कम करने, ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने और आपकी ड्रिंक को एक हेल्दी टच देने में मददगार साबित हुई है.
2. चिया बीज
अपने दूध में चिया बीज मिलाना एक छोटा लेकिन पावरफुल बूस्ट है. चिया बीज, फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड और मिनरल्स से भरपूर होने के कारण आपको एक्स्ट्रा एनर्जी देता है, फुलनेस की फीलिंग के साथ हार्ट हेल्थ को भी बढ़ावा देता है.
3. शहद
आपके दूध में एक चम्मच असली शहद स्वादिष्टता के अलावा कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टीरियल गुण एड करता है. शहद गले की जलन से राहत दिलाने के लिए जाना जाता है, इसलिए यह कॉम्बिनेशन स्वादिष्ट और पौष्टिक दोनों है.
4. हल्दी
एक चुटकी हल्दी में मौजूद करक्यूमिन दूध को गोल्डन मिल्क में बदल सकता है जो स्वास्थ्य लाभों से भरपूर है. अपने सुप्रसिद्ध एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण हल्दी बेहतर इम्यून सिस्टम को भी बढ़ावा देती है.
5. पीनट बटर
अपने दूध में एक चम्मच पीनट बटर मिलाने से इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू बढ़ जाएगी. विटामिन, प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर पीनट बटर, हार्ट हेल्थ के साथ ऑलओवर हेल्थ को बढ़ावा मिलेगा.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / माघ माह में आने वाली अमावस्या का विशेष महत्व है. इसे माघी अमावस्या या मौनी अमावस्या कहा जाता है. इस वर्ष 9 फरवरी को मौनी अमावस्या है. ज्योतिष शास्त्र में इस अमावस्या का काफी महत्व बताया गया है. इस अमावस्या को नदी में स्नान के बाद दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. मौनी अमावस्या के दिन विशेष उपाय करने से शनि की साढ़े साती और शनि की ढैय्या के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है. आइए जानते हैं किन राशियों पर शनि का प्रकोप चल रहा है और किन उपायों से प्रभाव को कम किया जा सकता है.
मौनी अमावस्या पर शनि साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति
ज्योतिषशास्त्र की गणना के अनुसार, फिलहाल मकर, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़े साती चल रही है जबकि कर्क और वृश्चिक राशि पर शनि की ढैय्या का प्रभाव है. इन राशियों के लोगों को मौनी अमावस्या पर इन उपायों से राहत प्राप्त हो सकती है.
पीपल के नीचे दीया
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभावों को कम करने के लिए मौनी अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीच दीया जलाया जा सकता है. इसके साथ ही ऊं शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करें.
सरसों के तेल में बना भोजन
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभावों को कम करने के लिए मौनी अमावस्या के दिन छाया दान करने से भी राहत मिल सकती है. इसके साथ ही इस दिन भोजन में सरसों के तेल, काले चने और गुड़ का उपयोग करें.
चींटियों को खिलाएं
मौनी अमावस्या के दिन स्नान ध्यान के बाद काले तिल, आटा, शक्कर को मिलाकर चींटियों को खिलाने से भी शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /आंवला एक ऐसी जड़ी बूटी है जो कई रोगों के इलाज में काम आती है.इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल स्किन और हेयर केयर में किया जाता है. लेकिन आज हम आपको यहां पर यूरिन से जुड़ी परेशानी में कैसे इसको इस्तेमाल में लाया जा सकता है, इसके बारे में बताएंगे. तो बिना देर किए चलिए जानते हैं आंवले का सेवन कैसे करना चाहिए बार-बार पेशाब की परेशानी से निजात पाने के लिए.
बार-बार पेशाब की परेशानी से कैसे पाएं निजात
- आंवले का जूस आप पी सकते हैं इस बीमारी में. इससे आपकी इम्यूनिटी बूस्ट होगी, साथ ही संक्रमण से बचाव भी होगा. यह शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं. आपको बस एक गिलास पानी में 2 चम्मच आंवले का पाउडर मिलाकर पी लीजिए.
- तुलसी भी इस बीमारी में लाभकारी होती है. इसमें मौजूद यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन को रोकने में मदद करता है. बस आप इसकी तुलसी की पत्तियों को पीसकर रस निकालकर पी लीजिए.
- यूरिन में जलन की समस्या से निजात पाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए. नींबू पानी और पुदीना के अर्क को इस्तेमाल करें, इससे संक्रमण को बढ़ने से रोकने में सहायता मिलती है.
- फलों के जूस और हरी सब्जियां आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने का काम करेंगे और वॉटर लेवल को बनाएं रखेंगे.
- यूरिन से जुड़ी कोई परेशानी हो तो नियमित रूप से नारियल पानी का सेवन करना चाहिए. नारियल पानी कई सारे विटमिन्स और मिनरल्स का नेचुरल सोर्स हैं. इसके साथ ही ये बॉडी को हाइड्रेट रखने का काम भी अच्छे से करता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / चने खाने की सलाह अक्सर एक्सपर्ट देते है क्योंकि इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी होते हैं. लेकिन कुछ लोग इस बात को लेकर कंफ्यूज होते हैं कि वो भिगा चना खाएं या फिर भुना, कौन सा ज्यादा फायदेमंद होगा. तो आज इस आर्टिकल में आपके सवालों के जवाब मिल जाएंगे. बिना देर किए आइए जानते हैं.
भुना चना खाएं या भिगा
हालांकि भुने और भीगे दोनों ही चने सेहत के लिए लाभाकारी हैं. भुने चने को आप कभी भी खा सकते हैं. आप उसको चने के साथ स्नैक्स के रूप में सेवन कर सकते हैं.डायबिटीज और थायराइड के मरीज को भुने चने ही खाने चाहिए.
भुने चने सर्दी जुकाम में ज्यादा फायदा करते हैं. लेकिन जो लोग अंडरवेट हैं उन्हें भुने चने खाने से बचना चाहिए.
भीगे चने - हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो अंकुरित चने बहुत ज्यादा फायदेमंद होते हैं. ये शरीर को ज्यादा पोषक तत्व प्रदान करते हैं. विटामिन बी कॉम्पलेक्स काफी होता है साथ ही इसमें प्रोटीन की भी मात्रा ज्यादा होती है. इससे मसल्स मजबूत होते हैं. यह पाचन को आसान बनाता है.
अन्य फायदे
अगर आप रोजाना गुण और चना मॉर्निंग डाइट में शामिल कर लेते हैं तो आपकी मांपेशियां मजबूत बनी रहेंगी. जो लोग जिम करते हैं तो उन्हें तो इसका सेवन जरूर करना चाहिए. क्योंकि गुण में पोटैशियम भरपूर मात्रा में होती है जो चयापचय को बढ़ावा देने में मदद करती है.
वहीं, इसके सेवन से आप अपने वजन को भी कम कर सकती हैं. हर दिन आप अगर 100 ग्राम चना गुण के साथ खा लेते हैं तो 19 ग्राम प्रोटीन आप शरीर को प्रदान करने का काम करेंगे.
चना और गुण कब्ज की समस्या से निदान दिलाने का काम करता है. चने में पाया जाने वाला फाइबर हाजमे को दुरुस्त करने का काम करते हैं. ये सूपर फूड डाइजेस्टिव एंजाइम को सक्रिय करने का काम करता है.
याददाश्त तेज करने में भी ये आहार बहुत कारगर साबित होता है. ये आपके शरीर में हार्मोन सेरोटोनिन को बढ़ावा देने का काम करता है. इससे आपका ब्रेन अच्छे से फंक्शन करता है. इससे तनाव भी कम होता है.
दांतों को मजबूती देने में भी गुण और चना लाभकारी होता है. क्योंकि इनमें मौजूद फास्फोरस दांतों को मजबूती प्रदान करता 10 ग्राम गुड़ में 4 मिलीग्राम फॉस्फोरस होता है और चना में 168 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम होता है.
दिल की बीमारी को भी ठीक करने में गुण और चना लाभकारी है. गुण रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी मदद करता है. चने में कोलेस्ट्रॉल कम होता है इस लिहाज से इसे खाना अच्छा है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / एक अच्छी और कम्पलीट डाइट में सभी तरह के पोषक तत्व शामिल होने चाहिए. जिसमें फ्रेश सब्जियां, ताज़े फल, प्रोटीन, कार्ब्स और सबसे महत्वपूर्ण ड्राई फ्रूट्स. ड्राई फ्रूट हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. लेकिन जब हम ड्राइ फ्रूट की बात करते हैं, तब सबसे पहले आपका ध्यान काजू, बादाम, पिस्ता और अखरोट की तरफ जाता है. इन सभी ड्राइ फ्रूट्स में भरपूर पोषक तत्व पाए जाते हैं. लेकिन एक और नट्स हैं, जिसमें इन सबसे अधिक पोषक तत्व होते हैं, वो है टाइगर नट , ये मिनरल्स और विटामिन्स से भरपूर होता है.
टाइगर नट्स क्या हैं ?
टाइगर नट्स भी एक तरह का ड्राई फ्रूट ही है, जो अन्य ड्राई फ्रूट्स से कई गुना अधिक शरीर को फायदा पहुंचाता है. टाइगर नट्स को और भी कई नामों से जाना जाता है, जैसे नट घास, अर्थ आलमंड और येलो नटसेज. इसमें विटामिन्स और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं. टाइगर नट्स भारत के अलावा मीडिल ईस्ट, दक्षिण यूरोप और अफ्रीका जैसे देशों में मिलता है.
टाइगर नट्स के 5 फायदे
हार्ट अटैक से बचाव : टाइगर नट्स में अमीनो एसिड होते हैं, जो हमारी ब्लड सेल्स को नॉर्मल करने के साथ ही कई बीमारियों से शरीर को बचाते हैं. टाइगर नट्स छाती में पेन, हार्ट अटैक, मसल्स के खिंचाव और सिरदर्द जैसी समस्याओं में असरदार होता है.
वजन कम करने में मददगार : आजकल अधिक वजन की समस्या से हर कोई परेशान हैं. अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो टाइगर नट्स खाएं, जिससे आपको वजन कम करने में मदद मिलेगी. टाइगर नट्स में फाइबर अधिक होने से ये हमारा पाचन तंत्र भी ठीक रखता है. जिससे आपका वजन कंट्रोल रहता है.
बीपी को करे कंट्रोल : टाइगर नट्स में मैग्नीशियम पाया जाता है, जिससे शुगर को कंट्रोल करने में हेल्प मिलती है. इसमें पोटेशियम और प्रोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो कि मांसपेशियों के खिंचाव, पाचन और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखता है.
किडनियां मजबूत होगी : टाइगर नट्स आपकी किडनियों को भी मजबूत रखता है, महिलाओं को पीरियड्स में दर्द को कम करता है और शरीर में पीएच लेवल बनाए रखता है.
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर : टाइगर नट्स में अच्छी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. जो हमारे शरीर को कई बीमारियों से बचाते हैं. साथ ही हार्ट के लिए भी टाइगर नट्स फायदेमंद होता है.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / सर्दियों के मौसम में कोल्ड क्रीम लगा-लगाकर चेहरा डल दिखने लगता है. ग्लो मानो खत्म सा हो जाता है. सुबह लगाई कोल्ड क्रीम शाम तक चेहरे को बेहद चिपचिपा बना देती है. चेहरा रूखा, बेजान और डल नज़र आने लगता है. अब ऐसे मौसम में ग्लो के लिए क्या करें? अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो हम आपको बता रहे हैं ऐसे टिप्स, जो सर्दियों के इस रूखे-बेजान मौसम में भी चेहरे पर ग्लो ला देंगे.
ग्लिसरीन का इस्तेमाल करें |
सबसे पहले तो केमिकल से भरी कोल्ड क्रीम और मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल कम कर दीजिए. ये चेहरे की रंगत को काफी नुकसान पहुंचाते हैं. इसकी जगह ग्लिसरीन का इस्तेमाल करें. कैसे करेंगे, जानें-
सबसे पहले तो आपको शुद्ध ग्लिसरीन खरीदनी है, जिसमें कोई मिलावट ना हो. तभी आप इसके फायदे ले सकते हैं. अब एक भाग ग्लिसरीन और तीन भाग पानी लेकर एक मिक्सचर बना लें. चेहरे से गंदगी हटाने के लिए माइल्ड फेसवॉश से चेहरे को साफ करें. माइल्ड का मतलब है जिसमें कम से कम केमिकल्स हों, हर्बल फेस वॉश भी यूज कर सकती हैं. घर का बना उबटन भी चेहरे को साफ करने के लिए अच्छा है.
चेहरा धोने के बाद एक सॉफ्ट टॉवल से उसे अच्छी तरह से सुखा लें. अब ग्लिसरीन और पानी का जो मिक्सचर बनाया है उसे पूरे चेहरे पर आराम से लगाएं. चेहरे पर जहां ज्यादा ड्राई स्किन दिखे, जैसे गालों के आसपास या फोरहेड में, वहां थोड़ा ज्यादा लगा सकते हैं. अब चेहरे की हल्की हाथों से मसाज करें. मसाज नीचे से ऊपर की ओर सर्कुलर तरीके से करनी है. 15 से 20 मिनट के लिए चेहरे को छोड़ दें, इसके बाद अगर आप चाहें तो कोई दूसरा प्रोडक्ट लगा सकते हैं. इसे रात को सोने से पहले लगाएंगे तो नतीजे ज्यादा बेहतर मिलेंगे. क्योंकि त्वचा को पूरी रात रिकवर होने का समय मिलता है.
ये ध्यान रखें
अगर आपको किसी तरह की एलर्जी है या स्किन सेंसेटिव है तो पहले हाथ में ये मिक्सचर लगाकर टेस्ट कर लें या त्वचा विशेषज्ञ की सलाह से ही ये लगाएं।
खूब पानी पीएं
सर्दियों के मौसम में चेहरे पर रौनक लाने के लिए खुद को हाइड्रट रखें. चेहरे को साफ करने के लिए घर पर तैयार फेसपैक का यूज करें.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /स्किन के लिए एलोवेरा और नारियल तेल सबसे ज्यादा फायदेमंद माने जाते हैं. एलोवेरा अपने हीलिंग गुणों के लिए जाना जाता है और नारियल का तेल सॉफ्ट और ग्लोइंग स्किन को बनाए रखने के लिए जाना जाता है. स्किन के लिए नारियल तेल सदियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है. चेहरे से दाग धब्बे हटाने के लिए का इस्तेमाल फायदेमंद माना जाता है. हालांकि नारियल का तेल सीधे तौर पर हाइपरपिग्मेंटेशन को हल्का नहीं करेगा, यह कई अलग-अलग तरीकों से मदद करता है. इसके मॉइस्चराइजिंग गुण स्किन हेल्थ को बढ़ा सकते हैं और नई स्किन सेल्स के रिजनरेशन को बढ़ावा दे सकते हैं, जो समय के साथ हाइपरपिग्मेंटेशन को कम करने में मदद कर सकते हैं.
बेदाग स्किन के लिए एलोवेरा के फायदे |
स्किन के लिए एलोवेरा
एलोवेरा डैमेज स्किन सेल्स की मरम्मत और पुनर्जीवित करने की अपनी क्षमता के लिए प्रसिद्ध है. चाहे आपको बचपन में कोई चोट लगी हो या सनबर्न हुआ हो. जब स्किन सेल्स डैमेज हो जाती हैं, तो एलोवेरा काफी फायदेमंद हो सकता है. जैसे ही चोट लगने के बाद आपकी स्किन ठीक होने लगती है, तो एलोवेरा का इस्तेमाल कोलेजन स्ट्रक्चर को मजबूत करता है और स्किन को हेल्दी रखता है.
नारियल के तेल में स्किन के लिए कई लाभकारी गुण होते हैं. नेचुरल फैटी एसिड स्किन को गहराई से मॉइस्चराइज करते हैं और पोषण देते हैं, जिससे यह नरम, चिकनी और हाइड्रेट हो जाती है. इसके एंटी बैक्टीरियल गुण और वायरस से लड़ने की क्षमता इसे और भी ज्यादा लाभकारी बनाती है. इसके अलावा, नारियल तेल के सूजन-रोधी गुण सेंसिटिव स्किन को शांत करने में मदद करते हैं. नारियल के तेल को अपने स्किन केयर रूटीन में शामिल करें और प्राकृतिक रूप से हेल्दी, चमकती त्वचा पाएं.
ऐसे करें इस्तेमाल:
चम्मच या चाकू से सारा जेल निकाल लें और ब्लेंडर में डाल दें. एलोवेरा और नारियल तेल को एक कटोरे में मिलाएं और नारियल तेल में तब तक मिलाएं जब तक मिश्रण एक समान न हो जाए. लोशन को किसी कन्टेनर में रखने के बाद जरूरत के अनुसार उपयोग करें.नारियल का तेल
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / बसंत पंचमी को श्री पंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है. पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बसंत पंचमी मनाई जाती है. बसंत पंचमी पर मां सरस्वती का पूजन किया जाता है. मां सरस्वती को विद्या और वाणी की देवी कहा जाता है. माना जाता है जो लोग मां सरस्वती का पूजन करते हैं उनकी बुद्धि बढ़ती है, ज्ञान में वृद्धि होती है और संगीत की विधा आती है. इस दिन ना सिर्फ घरों में बल्कि स्कूल और कॉलेज जैसे शैक्षिक संस्थानों में भी बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा होता है. सरस्वती पूजा में खासतौर से पीले चावल का भोग सरस्वती मां को लगाया जाता है. जानिए इस साल बसंत पंचमी कब है और इस दिन पीले चावल भोग स्वरूप चढ़ाने का क्या है महत्व.
बसंत पंचमी की पूजा |
पंचांग के अनुसार, इस साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 13 फरवरी दोपहर 2 बजकर 41 मिनट होगा और इस तिथि का समापन अगले दिन 14 फरवरी, दोपहर 12 बजकर 9 मिनट हो जाएगा. उदया तिथि के चलते बसंत पंचमी 14 फरवरी, बुधवार के दिन मनाई जाएगी.
मां सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी के दिन सुबह 7 बजकर 1 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 के बीच की जा सकती है. यह समय सरस्वती पूजा के लिए बेहद शुभ कहा जा रहा है.
पीले चावल के भोग का महत्व
मान्यतानुसार पीला रंग सुख-समृद्धि और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. पीले रंग को सरस्वती मां का प्रिय रंग भी कहा जाता है. इसीलिए सरस्वती पूजा के दिन पीले रंग के वस्त्र पहने जाते हैं, पीले फूलों को मां पर अर्पित किया जाता है, पीले रंग की साज-सज्जा की जाती है और पीले रंग के चावल माता को भोग में चढ़ाने शुभ माने जाते हैं. माना जाता है कि मां सरस्वती को पीले चावल बेहद अच्छे लगते हैं. अगर पूजा में पीले चावल रखे जाएं और मां सरस्वती को भोग में पीले चावल चढ़ाएं जाएं तो साधक की इच्छा पूर्ण होती है और घर में खुशहाली आती है.
मां सरस्वती की पूजा के मंत्र
1. या कुंदेंदुतुषारहारधवला, या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणा वर दण्डमण्डित करा, या श्वेत पद्मासना।।
या ब्रहमाऽच्युत शंकर: प्रभृतिर्भि: देवै: सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती, नि:शेषजाड्यापहा।।
2. ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।
कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।।
वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।
रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।।
सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।
वन्दे भक्तया वन्दिता च।।
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / ठंडे मौसम के बीच, देश भर से हजारों श्रद्धालु शुक्रवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर उत्तराखंड के हरिद्वार में पवित्र नदी गंगा में डुबकी लगाने के लिए उमड़ पड़े. इस दिन मौन रहने, पवित्र गंगा में स्नान करने और दान करने से जीवन के सारे कष्ट दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. साथ ही यह भी मान्यता है कि इससे मोक्ष की प्राप्ति होती है. आपको बता दें कि मौनी अमावस्या से पहले दूर-दूर से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे.
हरिद्वार में मौनी अमावस्या पर गंगा में स्नान करके के लिए आए एक श्रद्धालु नागेंद्र सिंह ने बताया कि स्नान के बाद मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ और इससे मेरे मन को बहुत शांति मिली. पानी काफी ठंडा है, लेकिन स्नान के बाद जो शांति मिलती है वह अद्भुत है. यह मां गंगा के प्रति गहरा प्रेम है जो मुझे छह महीने बाद यहां खींच लाया है.
एक अन्य श्रद्धालु ने मौनी अमावस्या के अवसर पर हरिद्वार में की गई व्यवस्था की सराहना करते हुए बताया कि आज मौनी अमावस्या है जिसको लेकर हरिद्वार में अच्छी व्यवस्था की गई है. सबसे पहले, मैं हरिद्वार में स्वच्छता प्रयासों और भक्तों के लिए अच्छी सुविधाएं प्रदान करने के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करता हूं. मुझे आशा है कि मां गंगा सभी की इच्छाओं पूरा करेंगी जो लोग यहां पवित्र स्नान के लिए आये हैं.
वहीं, श्रद्धालु ने बताया कि पवित्र नदी गंगा में डुबकी लगाने के बाद बताया कि मैंने मां गंगा से पूरे देश में शांति की कामना की. स्नान करना एक अद्भुत अनुभव था. ठंड होने के बावजूद, जैसे ही मैंने मां गंगा में डुबकी लगाई, मेरे शरीर को ऊर्जा महसूस हुई. आपको बता दें कि हिन्दू मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर स्नान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.
चाणक्य निति /शौर्यपथ /आचार्य चाणक्य ऐसे महाज्ञानी थे जिन्होंने मानव व्यवहार और आचरण पर ऐसी बातें लिखीं जो आज के समय में भी सही साबित होती हैं. उनकी कही बातों पर चलकर महामूर्ख भी ज्ञानी बन सकता है. आचार्य की कही बातों में से एक यह था कि कोई व्यक्ति आखिर कैसे धनवान बन सकता है. इस संदर्भ में उन्होंने मनुष्य की कुछ ऐसी आदतों का वर्णन किया था, जिन्हें अपनाने से कम समय में ही अमीर बना जा सकता है. इन आदतों को अपनाने वाला ना केवल तरक्की करता है बल्कि उसके शिखर को प्राप्त करता है, महान यशस्वी बनता है.
आचार्य चाणक्य के वाक्य |
1- आचार्य चाणक्य के अनुसार जिसे धन पाना है, जीवन में तरक्की करनी है उसे सुबह जल्दी उठना चाहिए. आचार्य ने ब्रह्म मुहूर्त में उठने को सर्वोत्तम कहा है. आचार्य के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठने वाला हमेशा तरक्की करता है.
2- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो मेहनत करने से नहीं डरता उसे धन की कभी कमी नहीं होती. अगर किसी भी तरह के काम में सफलता पाने की इच्छा है तो मेहनत करना बहुत जरूरी है.
3- आचार्य चाणक्य के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति बहुत कुशल हो लेकिन आलसी हो तो उसका कौशल व्यर्थ हो जाता है. इसलिए जीवन में आलस का त्याग कर देना चाहिए. तभी जीवन में सफलता मिलती है.
4- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो इंसान धन संचय करता है या उसे धन संचय करने की आदत होती है, उसे जीवन में धन की कमी नहीं होती. इसलिए व्यर्थ में धन नष्ट नहीं करना चाहिए.
5- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है घमंड, इसलिए उसे कभी घमंड नहीं करना चाहिए. खास तौर पर धन का घमंड. जो अपने धन का घमंड करता है उसके यहां लक्ष्मी निवास नहीं करतीं और जल्द ही वह धनहीन हो जाता है.
6- चाणक्य कहते हैं कि कभी भी व्यक्ति को किसी से भी वह लक्ष्य नहीं बताना चाहिए जो वह हासिल करना चाहता है. ऐसा करने से उस व्यक्ति को मनमुताबिक परिणाम हासिल नहीं होते, सफलता कोसों दूर चली जाती है.
आस्था /शौर्यपथ /जब हमारे घर में कोई भी भगवान विराजमान होते हैं, तो उनकी विधि विधान से पूजा अर्चना करने के साथ ही उनके प्रसाद का भी बहुत ध्यान रखा जाता है. सुबह, दोपहर, शाम भगवान को तरह-तरह के भोग अर्पित किए जाते हैं, लेकिन कभी आपने सोचा है कि भगवान को भोग लगाने के कितने समय बाद हम वह भोग उठाकर खा सकते हैं या दूसरों में बांट सकते हैं. आइए जानते हैं कि भगवान के भोग को कितने समय बाद हमें ग्रहण करना चाहिए.
इस तरह लगाएं भगवान को भोग |
अगर आपके घर में देवी देवता स्थापित है, तो उनकी पूजा अर्चना करने के बाद उन्हें भोग जरूर लगाना चाहिए. भोग लगाने के लिए भगवान की थाली या बर्तन अलग रखें, आप पीतल या चांदी के बर्तन में भगवान को भोग लगा सकते हैं. लेकिन जिस थाली में आप खाते हैं उस थाली में कभी भी भगवान को भोग नहीं लगना चाहिए, क्योंकि यह भोग अशुद्ध माना जाता है. जब आप भोग लगाएं उस समय मंदिर के आगे पर्दा डालकर थाली को भगवान के पास रख दें. ऐसा माना जाता है कि जब भगवान को भोग लगाया जाता है तो किसी की नजर उन पर नहीं पड़नी चाहिए. भोग को कभी भी जमीन पर नहीं रखें, बल्कि किसी चौकी या स्टैंड के ऊपर रखकर भगवान को भोग लगाएं.
इतनी देर बाद भगवान के पास से भोग उठाकर ग्रहण करें |
अब बात आती है कि भगवान के पास हमने भोग तो लगा दिया लेकिन कितनी देर बाद हम इस प्रसाद का सेवन कर सकते हैं? तो आप भगवान के सामने भोग की थाली 15 मिनट से लेकर आधे घंटे तक रख सकते हैं. जैसे हम खाना खाने में 15-20 मिनट या आधा घंटा लगाते हैं, इसी तरह से भगवान भी अगर भोजन ग्रहण कर रहे हैं तो उन्हें भी इतना ही समय लगेगा. आधे घंटे बाद आप उस भोग की थाली को उठाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकते हैं और घर के लोगों को भी बांट सकते हैं. भगवान के पास भोग लगाने के तुरंत बाद कभी भी भोग को ना उठाएं.
आस्था /शौर्यपथ / भगवान राम के चौदह वर्ष के वनवास के दौरान रावण ने माता सीता का छलपूर्वक अपहरण कर लिया था. साधु के वेश में रावण ने भिक्षा के बहाने माता सीता को लक्ष्मण रेखा से बाहर बुलाकर अपहरण कर लिया. राक्षसराज रावण ने माता सीता को पुष्पक विमान से अपने राज्य लंका ले गया था. आइए जानते हैं पुष्पक विमान के बारे में कुछ अनोखी बातें और लंका में कहां उतरा था विमान..
विश्कर्मा भगवान ने बनाया था
पुष्पक विमान कई तकनीकों से लैस था. इसे आदिकाल का पहला विमान कहा जाता है. मान्यता है पुष्पक विमान का निर्माण विश्वकर्मा भगवान ने किया था. कहीं कहीं बrा को इसका निर्माता बताया गया है. विश्वकर्मा जी ने इस विमान को अपने पिता ब्रह्मा को दिया और बाद में ब्रह्मा जी ने पुष्पक विमान कुबेर को दे दिया. रावण ने कुबेर को हराने के बाद पुष्पक विमान छीन लिया था. इस तरह इस अद्वितीय विमान पर रावण का कब्जा हो गया.
लंका में यहां उतरा
रावण माता सीता को लेकर पुष्पक विमान से लंका गया और वहां वेरांगटोग में विमान को उतारा था. बाद में माता सीता को अशोकवाटिका में रखा गया था. भगवान राम के दूत के रूप में लंका पहुंचे भगवान हनुमान अशोक वाटिका में माता सीता से मिले थे और उन्हें भगवान राम की अंगुठी भेंट की थी.
पुष्पक विमान की खूबियां
पुष्पक विमान में कई खूबियां थीं. यह विमान मोर की आकृति का था और हवा में उड़ता था. इस विमान को केवल वही उड़ा सकता था जिसने मंत्र को सिद्ध किया हो.
कुबेर को सौंपा
लंका पर विजय प्राप्त करने और रावण का अंत करने के बाद भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे थे. उन्होंने पुष्पक विमान को विभीषण को सौंप दिया लेकिन विभीषण ने कुबेर को वापस यह विमान लौटा दिया.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
