August 07, 2026
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     सेहत टिप्स /शौर्यपथ /मोरिंगा की पत्तियां, जिन्हें सहजन की पत्तियां भी कहा जाता है, जरूरी पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं. इन अद्भुत हरी पत्तियों का उपयोग सदियों किया जाता रहा है. आयुर्वेद के अनुसार, मोरिंगा की पत्तियों से भिगोया हुआ पानी अपने मॉर्निंग रूटीन में शामिल करना कई मायनों में अविश्वसनीय रूप से फायदेमंद हो सकता है. आपके सिस्टम को डिटॉक्सीफाई करने से लेकर आपके मेटाबॉलिज्म रेट को बढ़ाने तक जब आप नेचुरल तरीके से वजन कम करने की कोशिश कर रहे हों तो मोरिंगा की पत्तियां सबसे अच्छा विकल्प हैं, लेकिन सवाल यह है कि इन पत्तियों को अपनी डाइट में कैसे शामिल किया जाए. मोरिंगा की पत्तियों का सेवन करने के कई तरीकों में से एक तरीका यह है कि सुबह एक डिटॉक्सिफाइंग ड्रिंक बनाया जाए जिसे आप खाली पेट पी सकते हैं, लेकिन जब आप अपने दिन की शुरुआत इस तरह से करते हैं तो आपके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है? यहां कुछ फायदों के बारे में बताया गया है जिन्हें आपको जरूर जान लेना चाहिए.
    क्या खाली पेट मोरिंगा की पत्तियों का पानी पीना चाहिए? |
    1. आपके शरीर को भीतर से डिटॉक्सीफाई करता है
      सुबह सबसे पहले मोरिंगा की पत्तियों वाला पानी पीने से आपके शरीर को डिटॉक्सीफाई में मदद मिलती है. पत्तियां अपनी शुद्धिकरण क्षमताओं के लिए प्रसिद्ध हैं और वे टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में सहायता करती हैं. आप बस एक चम्मच मोरिंगा पत्तियों का पाउडर ले सकते हैं और इसे अपने नियमित गर्म सुबह के पानी में मिला सकते हैं. यह आपकी स्किन और बालों के लिए भी सबसे अच्छा डिटॉक्स ड्रिंक है.
    2. मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ता है
      इन जादुई पत्तियों से आपके दिन के मेटाबोलिज्म को बढ़ावा मिलता है. शोध से पता चला है कि मोरिंगा की पत्तियों में ऐसे यौगिक होते हैं जो मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने और वजन घटाने में मदद करते हैं. खाली पेट इस मिश्रण का सेवन आपके मेटाबॉलिज्म को स्टिमुलेट कर सकता है और आपके शरीर को दिन भर में ज्यादा प्रभावी ढंग से कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है.
    3. वजन घटाने को बढ़ावा देता है
      एक गिलास मोरिंगा की पत्तियों के पानी के साथ अपने दिन की शुरुआत करने का एक और बड़ा स्वास्थ्य लाभ वजन कम करना है. जब आप सुबह सबसे पहले इस डिटॉक्स ड्रिंक को पीते हैं तो आपका मेटाबॉलिज्म रेट एक बेहतरीन किकस्टार्ट बन जाती है. हाई मेटाबॉलिज्म रेट स्वाभाविक रूप से वजन कम करने में मदद कर सकता है.
    4. जरूरी विटामिन से भरपूर
     मोरिंगा की पत्तियां सुरक्षात्मक एंटीऑक्सिडेंट से भी भरी होती हैं जो आपके शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाती हैं. ये छोटी हरी पत्तियां विटामिन और विटामिन सी, विटामिन ए, कैल्शियम और आयरन जैसे जरूरी मिनरल्स का भी स्रोत हैं. इनका सेवन एक मजबूत इम्यून सिस्टम, हेल्दी हड्डियों को सपोर्ट कर सकता है.
    5. ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने में मददगार
     खाली पेट मोरिंगा की पत्तियों के पानी का सेवन आपके ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखने में अद्भुत काम कर सकता है. यह मुख्य रूप से इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाने वाले यौगिकों के कारण होता है. मोरिंगा का पानी डायबिटीज वाले लोगों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है.
    6. बेहतर पाचन को बढ़ावा देता है
     क्या आप अपच और पेट फूलने से पीड़ित हैं. हर सुबह इस अद्भुत डिटॉक्स ड्रिंक के साथ अपने दिन की शुरुआत करें और जादू देखें. मोरिंगा की पत्ती का पानी अपनी हाई फाइबर सामग्री के कारण हेल्दी डायजेशन को बढ़ावा देता है.

      ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / गुलाबजल का उपयोग चेहरे की खूबसूरती निखारने में किया जाता है. यह टोनर गुलाब की पंखुड़िय़ों से तैयार किया जाता है. रोज वॉटर आपकी स्किन में कसाव लाने का काम करता है. इससे चेहरे पर झुर्रियां और फाइन लाइन कम होती हैं. लेकिन कुछ लोग इसका इस्तेमाल गलत तरीके से करते हैं जिसके कारण यह स्किन को फायदे की बजाय नुकसान पहुंचाता है. हम आपको यहां पर बताने वाले हैं आखिर गुलाब जल में किन चीजों को मिलाकर फेस पर नहीं लगाना चाहिए.
    गुलाब जल में क्या नहीं मिलाएं
    - रोज वॉटर को फेस ऑयल के साथ मिक्स करके अप्लाई नहीं करना चाहिए. क्योंकि, गुलाब जल वाटर बेस्ड होता है इसलिए संभव है कि यह ऑयल के साथ अच्छी तरह मिक्स न हो. ऐसे में आप पहले गुलाब जल लगाएं फिर कुछ देर बाद फेस ऑयल अप्लाई करें.
    - विटामिन सी भरपूर नींबू को गुलाब जल में मिक्स करके नहीं लगाना चाहिए. इससे आपकी स्किन में जलन हो सकती है.
    - अगर आप अल्कोहल बेस्ड टोनर का इस्तेमाल करते हैं तो उसके साथ गुलाब जल को कभी मिक्स ना करें. इससे स्किन में रूखापन, जलन  की शिकायत हो सकती है.
    - वहीं, कुछ लोग क्ले फेस पैक इस्तेमाल करते समय उसमें गुलाबजल मिक्स कर देते हैं. जो कि नहीं करना चाहिए. क्ले में अलग-अलग पीएच लेवल हो सकते हैं. जिससे आपको स्किन में इरिटेशन हो सकता है.
    गुलाब जल के फायदे
    - यह फेस को डीप क्लींजिंग करता है. यह आयुर्वेदिक होने के नाते किसी तरह का नुकसान स्किन को नहीं पहुंचाएगा.
    - वहीं, गुलाबजल मेकअप रिमूवर का भी काम बखूबी करता है.
    - यह चेहरे पर कसाव लाने का काम करता है. 

       सेहत टिप्स /शौर्यपथ / खुशहाल जीवन में हमारे स्वास्थ्य का अहम योगदान होता है. हमे सेहतमंद रखने में पेट की अहम भूमिका होती है.दरअसल, दिनभर आप जो कुछ भी खाते-पीते हैं, पाचन तंत्र उसे ठीक ढंग से पचाकर शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व तैयार करता है. इन्हीं पोषक तत्वों से हमारे शरीर और दिमाग को सही ढंग से काम करने की ऊर्जा मिलती है. लेकिन, कई बार आंत में खराबी आ जाने के कारण शरीर खाने को अच्छे ढंग से पचा नहीं पाता है. ऐसे में आपको हम यहां पर शरीर के उन लक्षणों के बारे में बताने वाले हैं, जो बताते हैं कि आप जो कुछ भी खा पी रहे हैं वो आंत में सड़न पैदा कर रहा है. अगर इनपर सही समय पर ध्यान नहीं देते हैं फिर, ये गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है. तो आइए जानते हैं, उन लक्षणों के बारे में.
    आंत खराब होने के लक्षण - symptoms of intestinal upset
    पहला लक्षण
        लंबे समय तक बिना खाए रहने के बाद भी आपको खाने का मन न हो,भूख ना लगे तो समझिए पाचन तंत्र में गड़बड़ी है.
    दूसरा लक्षण
        अगर आपकी जीभ पर सफेद रंग की मोटी परत जम रही है, तो ये भी पाचन तंत्र में खराबी के लक्षण हो सकते हैं
    तीसरा लक्षण
        अगर आपको हर समय पेट फूलने, पेट में दर्द, या कुछ खाने पर उल्टी मतली जैसा महसूस होना, साथ ही मल त्याग में परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो ये बड़ा संकेत है आंतों खराब होने का.
    चौथा लक्षण
        अगर आपको दर्द या डकार लेने पर सीने में हल्की चुभन महसूस हो रही है, तो ये भी खराब पाचन के संकेत हो सकते है.
    पांचवां लक्षण
        वहीं, पेट की खराबी का असर आपके चेहरे पर भी नजर आता है. इसके कारण फेस पर पस वाले पिंपल निकल आते हैं. इससे एक्जिमा, सोरायसिस जैसी परेशानी भी बढ़ जाती है.

     टिप्स /शौर्यपथ /ठंड के मौसम में किचन में रखे अनाज धूप ना मिल पाने के कारण खराब हो जाते हैं. इसमें कीड़े लगने लगते हैं. कीड़ों का संक्रमण अनाज के भीतर पोषक तत्वों को ख़त्म कर सकता है. ऐसे में आपको इस मौसम में अनाज को कैसे स्टोर करना चाहिए कि उसमें कीड़े ना लगें 8 आसान टिप्स  बताने वाले हैं,  तो आइए जानते हैं.
    गेहूं, चावल और दाल कैसे करें स्टोर
    एयरटाइट जार में करें स्टोर
      ठंड में धूप की कमी से अनाज में बहुत ज्यादा नमी आ जाती है. इनसे बचने के लिए आप सूखे एयरटाइट जार में स्टोर करें.
    तेजपत्ता करें इस्तेमाल
      तेजपत्ता बहुत ही अरोमैटिक होती है, जिसकी खुशबू कीड़ों को पसंद नहीं आती है. अगर आप एक महीने का राशन एक साथ स्टोर करती हैं, तो इस हैक को अपनाएं.
    लहसुन की कलियां
      वहीं, मूंग, चने जैसी दालों को स्टोर करने के लिए आप कंटेनर में लहसुन की कलियों को छीलकर डाल दें. इनकी गंध से कीड़े दूर भागते हैं. आप माचिस की तीली भी डालकर अनाज को स्टोर कर सकती हैं.
    लौंग डालकर करें स्टोर
      आटे के डिब्बे में आप लौंग और तेजपत्ता को कपड़े में बांधकर रख सकती हैं. इससे सफेद और काले कीड़े दोनों ही दूर रहेंगे.
    सूखी नीम
      वहीं, आप कंटेनर के निचले हिस्से में कुछ सूखी नीम की पत्तियां डालकर अनाज भर दें. इससे अनाज अधिक समय तक सुरक्षित रहेगा. पुराने समय से इस नुस्खे को लोग अपना रहे हैं, दाल चावल स्टोर करने के लिए.
    सूखी लाल मिर्च
      दालों को कांच के जार में रखने से पहले उन्हें सूखा भून लेना भी एक अच्छा विचार है. दालों को खराब होने से बचाने के लिए जार में एक चुटकी सूखी लाल मिर्च डाल दीजिए.
    लहसुन की कलियां
      दाल के कन्टेनर में लहसुन की कलियां डालें और अच्छी तरह मिलाएं. एक बार सूख जाने पर उन्हें हटा दें और उनकी जगह दूसरी कलियां लगा दें. अगर आप इस हैक का इस्तेमाल करेंगी तो आपकी दालें लंबे समय तक कीड़ों से सुरक्षित रहेंगी.
    रेफ्रिजिरेट करें
      अगर आप उड़द दाल, चना दाल और मूंग दाल कम मात्रा में खरीदते हैं, तो आप इसे एक कंटेनर में भरकर फ्रिज में रख सकते हैं. इससे दालें लंबे समय तक खराब नहीं होंगी और कीड़ों से भी बची रहेंगी.

       सेहत टिप्स /शौर्यपथ /जरा सा इमेजिन करिए कि पूरे दिन ऑफिस में काम करने के बाद रात को आपको कुछ टेस्टी खाने का मन है और आपने बहुत मन से रात के लिए शाही पनीर और रोटी बना ली है. लेकिन जैसे ही आप इस टेस्टी कॉम्बो को सर्व करने के लिए खोलें और देखें कि आपकी करी बिल्कुल पानीदार हो गई है. फिर तो आपका मुंह ही उतर जाता है और सारी एक्साइटमेंट खत्म हो जाती है. खासकर अगर आप घर पर रेस्तरां-स्टाइल डिश बनाने की उम्मीद से तैयार किया हो. अगर आप भी उन लोगों में से है जो अक्सर कई बार पतली ग्रेवी होने की वजह से दुखी हो जाते हैं तो आज हमारे पास आपके लिए है कुछ ऐसे कुकिंग टिप्स जो आपकी ग्रेवी को रेस्टोरेंट स्टाइल थिक और को गाढ़ा कर सकते हैं.
    पानी वाली ग्रेवी को गाढ़ा करने के 5 तरीके
    1. काजू का पेस्ट
       पानी वाली ग्रेवी को गाढ़ा करने का सबसे आसान तरीका यह है कि इसमें काजू का पेस्ट मिला दें. अपनी ग्रेवी में काजू का पेस्ट मिलाने से न सिर्फ ग्रेवी गाढ़ी हो जाएगी, बल्कि पूरी डिश में शानदार मलाईदार स्वाद भी आ जाएगा. काजू का पेस्ट बनाने के लिए आपको बस 8-10 काजू को गर्म पानी में 30 मिनट के लिए भिगोना है. फिर इन्हें मिक्सर जार में पीसकर मुलायम पेस्ट बना लें.
    2. खस-खस
       इंडियन ग्रेवी में एक लोकप्रिय गाढ़ा करने वाला एजेंट, खसखस ​​या खसखस ​​का पेस्ट जो आपके पकवान को एक अलग स्वाद और टेक्सचर देने में मदद कर सकता है. इस बीज के पेस्ट को स्टैंडअलोन एजेंट के तौर पर या दूसरे मसालों के साथ पीसकर इस्तेमाल किया जा सकता है. हालाँकि, खसखस ​​को पीसने से पहले उसे भिगोना जरूरी है. खसखस आपकी करी में एक विशेष पौष्टिक स्वाद जोड़ता है.
    3. बेसन
      आपकी करी और ग्रेवी में बेसन मिलाना एक प्रसिद्ध इंडियन किचन ट्रिक है. यह एक ऐसी चीज है जिससे सभी कढ़ी लवर्स एक कनेक्शन महसूस करेंगे. आपको बस बेसन को पानी के साथ मिलाना है और इसका चिकना घोल बनाना है. जब आप इस मिश्रण को अपनी ग्रेवी में डालें, तो हिलाएं और थोड़ी देर तक धीमी आंच पर पकने दें. आपकी ग्रेवी गाढ़ी हो जाएगी.
    4. टमाटर प्यूरी
       अगर आपकी ग्रेवी पतली है, तो उसमें थोड़ी टमाटर प्यूरी क्यों नहीं मिला देते? यह एक तरकीब है जिसका उपयोग सभी शेफ टेस्टी करी बेस बनाने के लिए करते हैं. अपनी डिश में टमाटर की प्यूरी मिलाने से इसमें तीखा स्वाद आ जाएगा. इसे बनाने के लिए, एक पैन लें और इसमें कटे हुए टमाटर, थोड़ा तेल, नमक, कीमा बनाया हुआ लहसुन और प्याज डालें. ढक्कन से ढक दें और इसे 10 मिनट तक या टमाटर के नरम होने तक पकने दें. पेस्ट के ठंडा होने के बाद इसे मिक्सर में डालकर अच्छी तरह पीस लीजिए. इस मिश्रण को अपनी ग्रेवी में मिलायें!
    5. खोया
      सिर्फ हलवे में ही नहीं, बल्कि आप अपनी ग्रेवी को गाढ़ा करने के लिए उसमें भी खोया मिला सकते हैं. खोया या मावा दूध के टुकड़ों की तरह होता है जो आपकी करी में पिघलकर उसमें एक बेहतरीन स्वाद जोड़ देता है. इसलिए यह न केवल गाढ़ा करने वाला एजेंट है बल्कि आपके व्यंजन का स्वाद भी बढ़ाता है. खोया का इस्तेमाल खासतौर पर पनीर या कोफ्ता जैसी डिश बनाने में किया जाता है क्योंकि यह इसमें एक मीठा स्वाद जोड़ता है.

      खाना खजाना /शौर्यपथ / चाहे चावल हों या भटूरे या फिर कुलचा, ये डिशेज बिना छोले के अधूरी हैं. छोले को भी कई अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है और अलग-अलग फूड्स के साथ सर्व किया जाता है. अमृतसरी छोले, पिंडी छोले या छोला मसाला तो आपने खूब खाया होगा, लेकिन क्या आपने कभी चटनी छोले बनाए हैं. जी हां, चटनी छोले, जिसका नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ जाए. मशहूर सेलिब्रिटी शेफ पंकज भदौरिया ने हाल में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी इस स्पेशल रेसिपी को शेयर किया है. आइए शेफ पंकज की स्टाइल में इस डिश की रेसिपी जानते हैं.
    चटनी छोले रेसिपी
    सामग्री
        250 ग्राम चना
        2 कप पानी
        नमक स्वाद अनुसार
        एक चुटकी बेकिंग सोडा
        2 तेजपत्ता
        2 काली इलायची
        1 गुच्छा धनिया पत्ती
        1 गुच्छा पुदीने की पत्तियां
        3-4 हरी मिर्च
        2” अदरक
        2 प्याज कटे हुए
        5 बड़े चम्मच सरसों का तेल
        100 ग्राम पनीर
        4 मध्यम उबले आलू
        10-12 पालक के पत्ते
        ¼ छोटा चम्मच हींग
        1 चम्मच जीरा
        1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर
        1 चम्मच धनिया पाउडर
        2 बड़े चम्मच छोले मसाला
        2 बड़े चम्मच इमली का गूदा
    चटनी छोले बनाने का तरीका
        चने को रात भर भिगो दें. छाने हुए चने को स्वादानुसार नमक, तेजपत्ता, बड़ी इलायची के साथ उबालें.
        धनिया पत्ती, पुदीना पत्ती, अदरक, हरी मिर्च को आधा कप पानी के साथ पीसकर चटनी बना लीजिए.
        एक लोहे की कढ़ाई में तेल गर्म करें. क्यूब्ड पनीर, क्यूब्ड आलू, कटा हुआ प्याज, पालक के पत्ते, हरी मिर्च को अलग-अलग भूनें और एक तरफ रख दें. उसी तेल में जीरा, हींग और चटनी डालें. मसाले की खुशबू आने तक भूनिये. पिसा हुआ मसाला डालें और अच्छी तरह मिलाएं. उबले हुए चने डालें, 10- 12 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं.
        अब तली हुई सब्जियां इमली का गूदा डालें और अच्छी तरह मिलाएं.
        धनिया पत्ती और नींबू का टुकड़ा डालकर सर्व करें.

      आस्था /शौर्यपथ / 22 जनवरी का दिन पूरे देश के लिए ऐतिहासिक था. यह दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में हमेशा के लिए दर्ज हो चुका है. इस ख़ास दिन ही भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई है. देश-विदेश के गणमान्य लोग इस खास दिन आकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई. प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्री राम मंदिर का दरवाजा सभी भक्तों के लिए खोल दिया गया है. लाखों भक्तगण भगवान राम के दर्शन करने के लिए रोज़ मंदिर आ रहे हैं. ऐसे में एक जबर्दस्त वाकया हुआ, जिसे सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है.
    स्वयं हनुमान राम लला के दर्शन करने आएं
      श्री रामजन्मभूमि मंदिर में हुई एक सुंदर घटना का वर्णन शेयर किया गया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट लिखा है. "आज सायंकाल लगभग 5:50 बजे एक बंदर दक्षिणी द्वार से गूढ़ मंडप से होते हुए गर्भगृह में प्रवेश करके उत्सव मूर्ति के पास तक पहुंचा. बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने देखा, वे बन्दर की ओर यह सोच कर भागे कि कहीं यह बन्दर उत्सव मूर्ति को जमीन पर न गिरा दे. परन्तु जैसे ही पुलिसकर्मी बंदर की ओर दौड़े, वैसे ही बंदर शांतभाव से भागते हुए उत्तरी द्वार की ओर गया. द्वार बंद होने के कारण पूर्व दिशा की ओर बढ़ा और दर्शनार्थियों के बीच में से होता हुआ, बिना किसी को कष्ट पहुंचाए पूर्वी द्वार से बाहर निकल गया."
     सुरक्षाकर्मी कहते हैं कि ये हमारे लिए ऐसा ही है, मानो स्वयं हनुमान जी रामलला के दर्शन करने आये हों.
       दरअसल, राम मंदिर की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि एक बंदर बाहर से आकर सीधे गर्भगृह में घुस गया. सुरक्षाकर्मियों ने उसे ये सोचकर रोकना चाहा कि कहीं वो किसी को नुकसान ना पहुंचा दे. मगर हैरानी की बात है कि बंदर ने किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाया और वो सीधे गर्भगृह से बाहर की ओर निकल आया. अब प्राण प्रतिष्ठा के अगले दिन मंदिर में कुछ ऐसा देखने को मिला है, जिसे जानकर हर किसी को हैरानी हो रही है. हर कोई हैरान है कि भला ये आज के समय में कैसे हो सकता है. इसे देखने के बाद हर कोई यही कह रहा है कि रामलला के दर्शन करने को हनुमान स्वयं पधारे हैं.
     कई भक्तों ने इस घटना को भगवान राम से जोड़ कर देख रहे हैं. भक्तोंं का मानना है कि स्वयं हनुमान, प्रभु श्री राम के दर्शन करने आए हैं.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /मकर संक्रांति के मौके पर सूर्य देव   ने मकर राशि में प्रवेश कर लिया है, इसके साथ ही मंगल और गुरु ने भी आपस में राशि परिवर्तन किया है. ज्योतिष के अनुसार, सूर्य के मंगल और गुरु दोनों मित्र हैं, ऐसे में मकर राशि   में सूर्य के आ जाने से सूर्य का एक केंद्रीय प्रभाव मेष राशि के ऊपर आ गया है और इससे न सिर्फ मेष राशि बल्कि कई राशि के जातकों की किस्मत का ताला खुलने वाला है, उन पर धन की अपार वर्षा होने वाली है और साथ ही करियर में भी तरक्की के रास्ते खुल रहे हैं. आइए आपको बताते हैं सूर्य का ये केंद्रीय प्रभाव किन राशि के जातकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
    मेष राशि - मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का केंद्रीय प्रभाव बहुत फलदायी साबित हो सकता है, क्योंकि सूर्य ग्रह गुरु के साथ मेष राशि में स्थित है, इसलिए मेष राशि के जातकों की किस्मत इस दौरान पलट सकती है. आपकी सोची हुई योजनाएं सफल होंगी और आपके मान सम्मान में वृद्धि भी होने के चांसेस है.
      कर्क राशि - सूर्य देव का केंद्रीय प्रभाव कर्क राशि के जातकों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि सूर्य इन राशि के जातकों की कुंडली में सप्तम भाव पर है और उनका केंद्रीय प्रभाव गुरु के ऊपर मतलब करियर के घर में है. ऐसे में कर्क राशि के जातकों को करियर में तो तरक्की मिलेगी ही, इसके साथ ही आप कोई नया घर खरीद सकते हैं. लेकिन इस दौरान वैवाहिक जीवन में कुछ तनाव हो सकता है इससे बचके रहना है.
       तुला राशि - सूर्य देव का केंद्रीय प्रभाव तुला राशि के जातकों के लिए भी बहुत लाभकारी होने वाला है. दरअसल, इस राशि के जातकों में सूर्य का केंद्रीय प्रभाव वैवाहिक जीवन पर है, ऐसे में आपका वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा. आप कोई नया वाहन या प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं, वर्कप्लेस में आपका मान सम्मान बढ़ेगा, संपत्ति से जुड़ी कुछ समस्याएं जो पिछले कुछ समय से बनी हुई है उन्हें हल करने का रास्ता मिलेगा. काम और कारोबार के संबंध में देश-विदेश की यात्रा करने के भी योग बन रहे हैं.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का खास महत्व होता है. साल 2024 की बात करें तो पहली पूर्णिमा 25 जनवरी दिन गुरुवार को मनाई जाएगी. इसे पौष पूर्णिमा  के नाम से भी जाना जाता है. आपको बता दें की पौष पूर्णिमा के बाद माघ महीने की शुरुआत हो जाएगी. इस साल पौष पूर्णिमा और भी खास होगी क्योंकि इस दिन अमृत सिद्धियोग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और पुष्य योग का निर्माण होने जा रहा है. तो चलिए आपको बताते हैं कि साल की पहली पूर्णिमा कब पड़ रही है और इस दिन कैसे पूजा करने से फल मिलता है. 50 साल बाद सूर्य ग्रह बनाने वाला है ऐसा प्रभाव, इन राशियों का शुरू हो जाएगा गोल्डन टाइम पीरियड
     पूर्णिमा के दिन करें ये काम, मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न
        ज्योतिषाचार्यों की मानें तो साल की पहली पूर्णिमा पर कुछ खास उपाय करने से धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में कभी भी धन का अकाल नहीं पड़ता.
         पौष पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान करने के बाद तुलसी और सूर्य को जल अर्पित करें. शाम को तुलसी के पास दीया जलाएं. ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है.
         25 जनवरी साल की पहली पूर्णिमा है. इस दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें. इस दिन पीली कौड़िया चढ़ाने और अगले दिन सुबह उन कौड़ियों को अपने धन के स्थान पर रखने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है.
         साल के पहली पूर्णिमा पर पितरों के निमित्त जरूरतमंद और करीब लोगों को भोजन कराना चाहिए. इस दिन धन, अनाज, कपड़े, जूते, चप्पल आदि दान करने चाहिए.
         पौष पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देने का खास महत्व होता है. इसके लिए रात में एक लोटे में दूध, शक्कर, जल और सफेद फूल से अर्घ्य देना चाहिए
         पौष पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी और श्री लक्ष्मी नारायण भगवान को खीर का भोग लगाना चाहिए. ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं.  इसके बाद मां लक्ष्मी के मंत्र का जाप करें.

     आस्था /शौर्यपथ / अयोध्या में श्री राम विराजित हो चुके हैं. हर ओर जय श्री राम के नाम की गूंज है. लोग श्री राम की भक्ति में लीन हैं. अलौकिक, अप्रतिम मंदिर में विराजमान हुए श्रीराम को आदर्श पुरुष क्यों कहा जाता है, जानिए. भगवान विष्णु के सभी अवतारों में श्री राम को ऐसा अवतार कहा गया है, जो सभी युगों से प्रासंगिक रहे हैं. उनका जीवन ऐसा है जो व्यक्ति को आदर्श बनने को प्रेरित करता है. उनके चरित्र को लेकर आज भी कहा जाता है कि उनकी तरह मर्यादा का पालन करना चाहिए.  भगवान श्री राम एक अच्छे बेटे, भाई पुत्र और राजा ही नहीं बल्कि अपनी हर भूमिका में आदर्श कहे जाते हैं.
    बेटे के रूप में राम
      राजा दशरथ के सबसे बड़े और लाडले पुत्र होते हुए भी राम ने पिता के वचन के लिए सब त्याग दिया. श्री राम ने जो आदर्श पुरुष का रूप त्रेता में पेश किया, वह आज भी मिसाल है. न उन्हें राज्य पाने की लालसा थी और ना ही किसी प्रकार का धन प्रेम. उन्होंने पुत्र धर्म को ही सर्वोत्तम माना. वनवास जाने के समय भी माता कैकेयी समेत तीनों माताओं के चरण स्पर्श किए. कैकेयी माता के प्रति भी कभी कोई संदेह नहीं किया.
    शांतप्रिय राम
      धुर्नविद्धा में निपुण, अत्यंत पराक्रमी होने के बाद भी राम सदैव शांतिप्रिय रहे हैं. चाहे राज्य छिन जाना हो या पत्नी का अपहरण, वे अपने जीवन में सदैव शांत दिखते हैं. वनवासी जीवन को भी वे चाव से गले लगाते हैं.
    भाई के रूप में राम  
     अपने भाईयों और बहन से प्रेम करने वाले श्रीराम आदर्श पुरुष हैं. वे अपने जीवन में परिवार की रक्षा को सदैव तत्पर दिखे. लक्ष्मण को भी वे साथ इसलिए नहीं ले जाना चाहते थे क्योंकि वनवास की कठिनाइयों से भाई को दूर रखना चाहते थे. राम ऐसे भाई की आदर्श छवि प्रस्तुत करते हैं, जो हर सुख-दुख में परिवार का साथ नहीं छोड़ता.
    सखा हैं राम
     श्रीराम सुग्रीव, विभीषण से सखा के रूप में अगाध प्रेम दर्शाते हैं. सुग्रीव को न्याय दिलाकर राज्य वापस दिलाकर सखा का हर कर्त्तव्य निभाते हैं. रावण वध के बाद विभीषण को राजा बनाते हैं.   
    मोक्षदायी राम
      राम मोक्षदायी हैं. देवी अहिल्‍या का उद्वार किया, कई राक्षसों को मुक्ति दी. सीता हरण करने वाले रावण को भी मुक्ति प्रदान की. आदर्श पुरुष राम यहां दिव्य पुरुष की छवि प्रस्तुत करते हैं.
    राजा राम
      राजा राम के राज को आदर्श राज्य कहा जाता है. रामराज्य की कल्पना आज भी की जाती है, उसके उदाहरण दिए जाते हैं. प्रजा के लिए अपनी पत्नी को त्याग देने वाले राम आदर्श पुरुष की पराकाष्ठा प्रस्तुत करते हैं.

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