August 07, 2026
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       व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / नानकशाही कैलेंडर के अनुसार, हर साल पौष माह की सप्तमी तिथि पर सिक्खों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती मनाई जाती है. आज 17 जनवरी के दिन गुरु गोबिंद सिंह जी की 357वीं जयंती मनाई जा रही है. गुरु गोबिंद सिंह सिख धर्म के नौंवे गुरु तेगबहादुर के पुत्र थे. गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिख धर्म के नियम बनाए थे जिनका आज भी इस धर्म को मानने वाले पालन करते हैं. गुरु महाराज को अपने जीवनकाल में दमन और भेदभाव के खिलाफ लड़ने के लिए और सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत बनने के लिए भी जाना जाता है. आज इस दिन की शुभकामनाएं आप भी अपने जानने वालों को कुछ खास मैसेज भेजकर दे सकते हैं.
    गुरु गोबिंद सिंह जयंती के शुभकामना संदेश |
    राज करेगा खालसा, बाके रहे न कोए
    वाहेगुरु का खालसा, वाहे गुरु की फतेह
    गुरु गोबिंद सिंह जयंती की शुभकामनाएं!
    गुरु गोबिंद जयंती की शुभकामनाएं
    सिर पर मेरे गुरुवर का हाथ
    हरपल हरदम वो मेरे साथ
    है विश्वास वही राह दिखाएंगे
    मेरे सारे बिगड़े काम बन जाएंगे.
    गुरु गोबिंद सिंह जयंती की शुभकामनाएं!
    वाहे गुरु का आशीष सदा मिले
    ऐसी कामना है हमारी,
    गुरु की कृपा से आएगी,
    घर-घर में खुशहाली .
    गुरु गोबिंद सिंह जयंती की शुभकामनाएं!
    सवा लाख से एक लड़ाऊं,
    चिड़ियों सों मैं बाज लड़ाऊं
    तभी गोविंद सिंह नाम कहाऊं
    गुरु गोबिंद सिंह जयंती की शुभकामनाएं!
    खुशियां और आपका जन्म जन्म का साथ हो,
    हर किसी की जुबां पर आपकी ही बात हो.
    जीवन में कभी कोई मुसीबत आए तो
    आपके सिर पर गुरु गोबिंद सिंह जी का हाथ हो.
    गुरु गोबिंद सिंह जयंती की शुभकामनाएं!
    गुरु गोबिंद सिंह
    तुम हो प्राण प्यारे
    तुं बिन जग से
    मुझे कौन तारे
    गुरु गोबिंद सिंह जयंती की शुभकामनाएं!
    तेरी मेहर का कोई जवाब नहीं,
    तेरे जैसा कहीं कोई दीदार नहीं,
    नशा तेरी इबादत का कभी न उतरे,
    मेरे लिए इससे बड़ी कोई बात नहीं.
    गुरु गोबिंद सिंह जयंती की शुभकामनाएं!
    वाहे गुरु का आशीष सदा मिले,
    ऐसी है मेरी कामना.
    गुरु गोबिंद सिंह जयंती की शुभकामनाएं!
    गुरु गोबिंद सिंह जी के सदकर्म हमें सदा राह दिखाएंगे
    वाहे गुरु के ज्ञान से सबके बिगड़े काम बन जाएंगे
    गुरु गोबिंद सिंह जयंती की शुभकामनाएं!

    आस्था /शौर्यपथ / पूजा करने से कई तरह के नियम जुड़े हुए हैं. माना जाता है कि पूजा में चढ़ाए जाने वाले भोग का भी विशेष महत्व होता है. बहुत से लोग पूजा करते तो हैं लेकिन पूजा में भगवान के समक्ष लगाए भोग को लेकर उलझन में रहते हैं कि भोग को खाएं या ना खाएं और अगर खाएं तो किस तरह खाएं. यहां जानिए भगवान को भोग लगाने से जुड़े नियमों के बारे में और भगवान को लगाए गए भोग को खाने के सही समय के बारे में.
    भगवान को लगाया भोग कब खाना चाहिए
    मान्यतानुसार पूजा करने के बाद भगवान को भोग लगाना चाहिए और इस भोग को तकरीबन 2 से 4 मिनट तक मंदिर में ही रखें.
    मंदिर में परदा लगाकर रखें और इस परदे से भोग को ढक दें. अब 5 मिनट बाद इस भोग को प्रसाद  स्वरूप सभी को वितरित करने के लिए निकाल लें.
    भोग लगाते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि भोग कभी भी सीधा जमीन पर नहीं रखना चाहिए. भोग हमेशा किसी सतह पर या भगवान के समक्ष किसी बर्तन पर ही रखकर ही चढ़ाना चाहिए.
    जब भी आप भोग लगाएं तो इस बात का ध्यान रखें कि भोग के साथ पानी भी मंदिर में रखें. इस तरह भगवान के समक्ष मंत्रों का उच्चारण करके भोग लगाना शुभ होता है.
    जो भोग भगवान को लगाया जा रहा है उसमें मिर्च या नमक नहीं डाला जाता. अधिकतर मीठा भोग  ही भगवान के समक्ष चढ़ाया जाता है और मीठे प्रसाद को ही शुभ मानते हैं.
    यह ध्यान में रखना जरूरी है कि भोग को भगवान के समक्ष घंटों तक रखकर ना रखें. भगवान के समक्ष रखा भोग कुछ देर बाद ही हटा लेना चाहिए. लंबे समय तक भोग को देवी-देवता के समक्ष रखना अच्छा नहीं मानते हैं.
    भगवान के समक्ष हमेशा ताजा भोग ही रखा जाता है. जिन देवी-देवता पर खासतौर से बासी भोग लगाया जाता है उनके अलावा सभी को ताजा भोग लगाना ही शुभ होता है.

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ /अदरक को उसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है. आम भाषा में हम अक्सर ही कहते हैं कि सर्दी हो या खांसी जुकाम, अदरक वाली कड़क चाय पी ली तो सेहत खुद ब खुद दुरुस्त हो जाएगी. लेकिन, अदरक की दूध वाली कड़क चाय नहीं बल्कि बिना दूध वाली जिंजर हर्बल टी भी सेहत को अनेक फायदे देती है. इस चाय को चुटकियों में तैयार किया जा सकता है. अदरक की यह चाय आयुर्वेदिक औषधी की तरह असर दिखाती है. इसे पीकर कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें तो दूर होती है हैं साथ ही कई बीमारियों में भी यह चाय फायदेमंद होती है. जानिए रोजाना खाली पेट किस तरह अदरक की चाय बनाकर पी सकते हैं और सेहत को इससे कौन-कौनसे फायदे मिलते हैं.
    अदरक की चाय पीने के फायदे |
    अदरक में विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, कॉपर, जिंक और मैग्नीज की अच्छी मात्रा पाई जाती है. इस चाय को खाली पेट पिया जाए तो शरीर को कई फायदे मिलते हैं. इस चाय को बनाने के लिए एक कप पानी में अदरक को छोटे टुकड़ों में काटकर डालिए और इस पानी को उबाल आने तक पका लीजिए. कप में छानें और हल्का शहद या नींबू का रस स्वाद के लिए मिला लें. तैयार है अदरक की हर्बल टी.
    इम्यूनिटी होती है बूस्ट
    अदरक की यह चाय नेचुरल इम्यूनिटी बूस्टर की तरह काम करती है. इसे पीने पर शरीर को एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मिलते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने में असर नजर आता है. इसके अलावा, अदरक शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया को दूर करने में भी असरदार होता है.
    पाचन रहता है अच्छा
    डाइजेस्टिव हेल्थ को बेहतर करने के लिए भी अदरक की चाय पी जा सकती है. अदरक की चाय पेट कई दिक्कतों जैसे ब्लोटिंग, एसिडिटी और पेट दर्द को कम करती है.
    उल्टी की दिक्कत
    जी मितलाना, मॉर्निंग सिकनेस और उल्टी की दिक्कत दूर करने के लिए भी अदरक की चाय पी सकते हैं. अदरक की चाय में एंटी-नोशिया गुण होते हैं. इस चाय से सिर का दर्द भी कम होता है.
    घट सकता है वजन
    वेट मैनेजमेंट में भी इस चाय के फायदे देखने को मिलते हैं. अदरक की चाय मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करती है. इस चाय को पीने पर कैलोरी और फैट बर्न होता है. ऐसे में अदरक की चाय का सेवन वजन घटाने में असरदार है.
    जोड़ों का दर्द कम होता है
    एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के चलते अदरक की चाय पीने पर जोड़ों के दर्द की दिक्कत में आराम मिलता है. अदरक की चाय को घुटनों के दर्द से राहत पाने के लिए सुबह-शाम पिया जा सकता है.

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ /ठंड के मौसम में हल्दी वाले दूध को पीने की सलाह दी जाती है. क्योंकि हल्दी की तासीर गर्म होती है जो शरीर को अंदर से गर्म रखने और ठंड से बचाने में मददगार है. सर्दियों के मौसम में खांसी, सर्दी-जुकाम, गले में खराश आदि समस्या में हल्दी वाले दूध का सेवन फायदेमंद माना जाता है. हल्दी एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर होती है. जो शरीर को कई लाभ पहुचाने में मददगार है लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि हल्दी वाले दूध का सेवन करने से शरीर को नुकसान भी पहुंच सकता है. जी हां आपने बिल्कुल सही सुना कुछ लोगों के लिए हल्दी वाला दूध नुकसानदायक साबित हो सकता है. तो चलिए जानते हैं किन लोगों को हल्दी वाले दूध का सेवन नहीं करना चाहिए.
    हल्दी वाले दूध के नुकसान-
    1. आयरन-
    जरूरत से ज्यादा हल्दी वाला दूध पीने से आयरन की कमी हो सकती है. हल्दी आयरन के अवशोषण में बाधा उत्पन्न कर सकती है. इससे उन लोगों में आयरन की कमी हो सकती है. इसलिए अगर आपको आयरन की कमी है तो आप हल्दी वाले दूध का सेवन करने से बचें.
    2. ब्लड शुगर-
    ब्लड शुगर के मरीजों के लिए नुकसानदायक है हल्दी वाले दूध का सेवन. आपको बता हैं कि अधिक मात्रा में हल्दी वाला दूध पीने से ब्लड शुगर लेवल भी कम हो सकता है.
    3. डाइजेशन-
    जिन लोगों को अपच, एसिडिटी और डायरिया जैसी समस्याएं बार-बार होती हैं इनको हल्दी वाले दूध के सेवन से बचना चाहिए. क्योंकि हल्दी वाले दूध के सेवन से ये समस्या और बढ़ सकती है.
    4. प्रेगनेंसी-
    प्रेगनेंसी में कई चीजें खाने और पीने की मनाही होती है. प्रेगनेंसी के दौरान कुछ भी खाने पीने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से जरूर परामर्श करें. क्योंकि ये सिर्फ आपकी सेहत नहीं बल्कि आपके पेट में पल रहे बच्चे की सेहत से भी जुड़ा हुआ है. हल्दी की तासीर गर्म होती है ऐसे में हल्दी वाले दूध का सेवन हानिकारक हो सकता है.

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ / गले में खराश, अपच या कंजेशन जैसी कई मेडिकल कंडिशन के इलाज के लिए अक्सर गर्म पानी पीने की सलाह दी जाती है. क्या आप जानते हैं कि बहुत ज्यादा गर्म पानी पीने से आपकी सेहत पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है. जबकि गर्म पानी पीने के बहुत सारे फायदे माने जाते हैं, लेकिन हर एक चीज साइडइफेक्ट के साथ आती है. कई लोग मानते हैं कि गर्म पानी पीने से आपकी इम्यूनिटी पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. यहां जानिए क्यों सीमित मात्रा में करना चाहिए गर्म पानी का सेवन.
    गर्म पानी पीने के गंभीर दुष्प्रभाव |
    1. जलन
    बहुत ज्यादा गर्म पानी पीने से आपके मुंह, गले और पाचन तंत्र में जलन हो सकती है. गर्म पानी का सेवन करने से पहले इसे सुरक्षित तापमान तक ठंडा करना जरूरी है.
    2. डिहाइड्रेशन
    अगर गर्म पानी का ज्यादा सेवन किया जाए तो यह डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है. बहुत ज्यादा गर्म पानी पीने से आपके शरीर में लिक्विड की कमी हो सकती है, जिससे डिहाइड्रेशन हो सकता है.
    3. पाचन संबंधी परेशानी
    जबकि अक्सर पाचन में मदद के लिए गर्म पानी की सिफारिश की जाती है, लेकिन बहुत ज्यादा गर्म पानी का सेवन पेट की परत में जलन पैदा कर सकता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.
    4. मिनरल इनबैलेंस
    लंबे समय तक बहुत गर्म पानी के सेवन से शरीर में जरूरी मिनरल्स की कमी हो सकती है. ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्म पानी से बहुत ज्यादा पसीना आ सकता है और लिक्विड की कमी हो सकती है, जिसकी वजह से इलेक्ट्रोलाइट इनबैलेंस हो सकता है.
    5. दांतों पर असर
    बहुत गर्म पानी समय के साथ आपके दांतों के इनेमल को नष्ट कर सकता है, जिससे दांतों की सेंसिटिविटी बढ़ जाती है और कैविटी का खतरा बढ़ जाता है. गर्म पानी को पीने से पहले थोड़ा ठंडा कर लेना सबसे अच्छा है.

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हिन्दू धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है. इस दिन साधक मौन व्रत रखकर विष्णु भगवान की पूजा अर्चना करते हैं. इस दिन श्रद्धालु गंगा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, सरस्वती और नर्मदा नदी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं. ऐसी मान्यता है कि मौनी अमावस्या को स्नान-ध्यान कर भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को सौ यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है.ऐसे में इसबार मौनी अमावस्या किस दिन मनाई जाएगी और इसकी पूजा विधि क्या है आइए जानते हैं.
    मौनी अमावस्या शुभ मुहूर्त
    इस साल माघ अमावस्या 09 फरवरी को सुबह 08 बजकर 02 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 10 तारीख को 4 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगा. उदया तिथि 9 को है इसलिए मौनी अमावस्या इस दिन ही मनाई जाएगी.
    शुभ योग -
    मौनी अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है इस बार.यह योग 7 बजकर 5 मिनट से शुरू हो रहा है जो देर रात 11 बजकर 29 मिनट तक रहेगा.
    मौनी अमावस्या पूजा विधि -
    -मौनी अमावस्या के दिन सबसे पहले भगवान विष्णु को प्रणाम करें.
    -इस दिन बोलने की मनाही होती है. इस दिन आप बहते जल में काला तिल प्रवाहित करें.
    -इस दिन पीपल के पेड़ में भी जल का अर्घ्य दें.
    -इस दिन विष्णु चालीसा और मंत्र का जाप करें.

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हिन्दू धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है. इस दिन साधक मौन व्रत रखकर विष्णु भगवान की पूजा अर्चना करते हैं. इस दिन श्रद्धालु गंगा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, सरस्वती और नर्मदा नदी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं. ऐसी मान्यता है कि मौनी अमावस्या को स्नान-ध्यान कर भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को सौ यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है.ऐसे में इसबार मौनी अमावस्या किस दिन मनाई जाएगी और इसकी पूजा विधि क्या है आइए जानते हैं.
    मौनी अमावस्या शुभ मुहूर्त
    इस साल माघ अमावस्या 09 फरवरी को सुबह 08 बजकर 02 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 10 तारीख को 4 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगा. उदया तिथि 9 को है इसलिए मौनी अमावस्या इस दिन ही मनाई जाएगी.
    शुभ योग -
    मौनी अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है इस बार.यह योग 7 बजकर 5 मिनट से शुरू हो रहा है जो देर रात 11 बजकर 29 मिनट तक रहेगा.
    मौनी अमावस्या पूजा विधि -
    -मौनी अमावस्या के दिन सबसे पहले भगवान विष्णु को प्रणाम करें.
    -इस दिन बोलने की मनाही होती है. इस दिन आप बहते जल में काला तिल प्रवाहित करें.
    -इस दिन पीपल के पेड़ में भी जल का अर्घ्य दें.
    -इस दिन विष्णु चालीसा और मंत्र का जाप करें.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होना है.इससेले आज अनुष्ठान का कार्यक्रम शुरू हो रहा है. आज परिसर में पूजा का पहला दिन है. वहीं कल रामलला की मूर्ति के साथ शोभायात्रा निकाली जाएगी.साथ ही कल मंगल कलश में सरयु नदी के जल को लेकर श्रद्धालु मंदिर पहुंचेंगे. वहीं, 18 जनवरी को गणेश अंबिका पूजन होगा और 19 जनवरी को वरुण और वास्तु पूजन से अनुष्ठान की विधिवत शुरूआत होगी.
    वहीं, 19 जनवरी को अग्नि पूजन, नवग्रह स्थापना और हवन होना है जबकि 20 जनवरी को सरयू नदी के जल से गर्भगृह को धोने के बाद वास्तु शांति और अन्नाधिवास होगा. इसके अलावा 21 जनवरी को 125 कलशों से गर्भगृह का दिव्य स्नान होगा और 22 जनवरी को सुबह पूजन के बाद मृगशिरा नक्षत्र में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी.
    आपको बता दें कि आज से केवल 7 दिन रह गए हैं राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में. ऐसे में मंदिर का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है. श्रीराम मंदरि के गर्भ गृह में स्वर्ण जणित सभी 14 दरवाजे लगा दिए गए हैं.सागौन की लकड़ी से बने इन दरवाजों पर सोने की परत चढ़ाई गई है. इन दरवाजों पर दो हाथियों की अक्श उकेरे गए हैं जिसके उपरी हिस्से में महलनुमा आकृति बनी हुई है जिसमें दो सेवक हाथ जोड़े खड़े हैं.
    वहीं, राम मंदिर प्रांगण के लिए वड़ोदरा से मंगाई गई स्पेशल धूपबत्ती आज से जलाई जाएगी. जिसे राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महेंद्र नित्य गोपाल दास जलाएंगे. ये खास धूपबत्ती 3610 किलो और 108 फिट लंबी है. माना जा रहा है कि यह धूपबत्ती लगभग डेढ़ महीने तक जलती रहेगी जिसकी खूशबू 50 किलो मीटर तक फैलेगी. इस अगरबत्ती को बनाने के लिए कई तरह की जड़ी बूटियों का इस्तेमाल किया गया है. इसे स्पेशल रथ से वड़ोदरा से आयोध्या लाया गया है.
    यही नहीं राम मंदिर में सोने का एक नगाड़ा भी रखा गया है, जिसका वजन है 500 किलो ग्राम. इसकी आवाज 1 किलोमीटर दूर तक सुनाई देगी. इसे गुजरात से विशेष रथ से यहां लाया गया है. इसका ढांचा लोहे औऱ तांबे से तैयार किया गया है. इस नगाड़े की खासियत है कि इसपर धूप और बारिश का कोई असर नहीं पड़ेगा.

    टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / वजन कम करने के लिए आपको अपनी डाइट में कैलोरी की मात्रा कम करने की जरूरत होती है. साबुत गेहूं की रोटियों में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है और इन्हें छोड़ना बहुत आसान नहीं है क्योंकि ये बचपन से ही आपके दैनिक आहार का हिस्सा रही हैं. एक गेहूं की चपाती में लगभग 104 कैलोरी होती है. ऐसे में अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो गेहूं की जगह दूसरे हेल्दी अनाज को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. आइए जानते हैं गेहूं के बदले किन अनाजों को आप रोटी बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, जो वजन कम करने में आपकी मदद करेंगे.
    वजन कम करने के लिए गेहूं की जगह खाएं इन आटे की रोटियां |
    रागी की रोटी : रागी, जिसे अंग्रेजी में फिंगर मिलेट कहा जाता है, भारत के कई हिस्सों में अक्सर खाया जाता है. रागी की रोटी कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर होती है, जो इन्हें हेल्थ के लिए बेहतरीन बनाती है. रागी में मौजूद फाइबर आपको लंबे समय तक तृप्त रखने में मदद करता है और अत्यधिक खाने से रोकता है. इसमें ट्रिप्टोफैन भी होता है, जो एक एमिनो एसिड है जो वजन कम करने में आपकी मदद करता है. स्वाद बढ़ाने के लिए आटे में नमक, धनिया, अजवाइन या जीरा मिला लें.
    ​बाजरे की रोटी : बाजरा एक भूरे रंग का अनाज है. इसमें मैग्नीशियम, जिंक, आयरन और कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, जो इसे गेहूं का एक पौष्टिक विकल्प बनाता है. बाजरे की रोटियों में मौजूद उच्च फाइबर आपको लंबे समय तक भरा हुआ रखने में मदद करती है. जरूरी विटामिन आपको शेप में बने रहने में मदद करते हैं. यह आपको सूजन और वॉटर रिटेंशन से छुटकारा दिलाने में भी मदद करता है.
    बेसन की रोटी : चने से बना बेसन वजन कम करने के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है. हेल्दी रोटी तैयार करने के लिए आधा बेसन और आधा मल्टीग्रेन आटा मिला सकते हैं. बेसन में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, जो भूख को दबाने में मदद करती है और आपको ओवर ईटिंग करने से रोकती है.

      सेहत टिप्स /शौर्यपथ / योग फिटनेस, लचीलेपन और मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने का एक शानदार तरीका है.योग करने से हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियां दूर रहती हैं. इस लेख में, हम मधुमेह रोगियों में ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल करने के लिए कुछ बेहतरीन योग आसनों के बारे में बताएंगे, जो इस बीमारी से पीड़ित लोगों को जरूर रूटीन में शामिल करना चाहिए.
    ब्लड शुगर कंट्रोल टिप्स -
    ताड़ासन - ताड़ासन भी आप कर सकते हैं. यह आपके ब्लड शुगर मैनेज करने में अहम भूमिका निभाता है. इससे आपकी रीढ़ की हड्डियां मजबूत होती हैं. इससे आपका पॉश्चर अच्छा होता है.
    शीर्षासन - इससे भी आपका ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है. यह आसन करने से इम्यूनिटी बूस्ट होती है और आप एनर्जेटिक बने रहते हैं. यह ब्रेन में ब्लड सर्कुलेशन को तेज करता है. इससे आपकी मेमोरी तेज होती है.
    अर्ध उष्ट्रासन- इसको नियमित करने से कमर में लचीलापन आता है. यह आसन भी आपके पाचन तंत्र को मजबूत करता है. यह आपके कोलेस्ट्रोल लेवल को भी कंट्रोल करता है.
    मर्जरी आसन - यह आसन करने से शरीर के सारे अंगों की अच्छी स्ट्रेचिंग होती है. यह रक्त संचार को बढ़ावा देने में मदद करता है. इसको करने से आपकी शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत को लाभ मिलता है. यह रीढ़ और गर्दन को मजबूत बनाने का काम करता है.

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