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व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / सकट चौथ का व्रत संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए रखा जाता है. माघ महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह व्रत रखा जाता है. इस साल सकट चौथ 29 जनवरी सोमवार को मनाया जाएगा. इसे तिल कुटा चौथ, संकष्टी चतुर्थी, संकटी चौथ और माही चौथ भी कहते हैं. मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश ने देवताओं का संकट दूर किया था. महिलाएं संतान की सुरक्षा और दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं. इस दिन भगवान गणेश के साथ चंद्रमा की भी पूजा होती है. व्रती महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर विधिवत पूजा करती हैं. आइए जानते हैं इस दिन चंमा को अर्घ्य देने का क्या महत्व है.
चंद्रमा की पूजा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा को मन का कारक माना गया है. चंद्रमा की पूजा से सौभाग्य की प्राप्ति होती है. चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन नकारात्मक विचारों से मुक्त होता है. हिंदू धर्म शास्त्रों में चंद्रमा को औषधियों का स्वामी और शीतलता का कारक माना जाता है. यही कारण है कि सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है.
कैसे दें अर्घ्य
संकट चौथ को भगवान गणेश की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए. इसके लिए चांदी के बर्तन दूध में जल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना उत्तम माना गया है.
सकट चौथ का महत्व
पौराणिक कथा के मुताबिक, सकट चौथ के दिन ही भगवान गणेश ने माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा की थी. मान्यता है कि व्रत से संतान के जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं. गणेश जी की पूजा और चंद्रदेव को विधि(संतान के लिए गणेश स्तोत्र का पाठ) अनुसार अर्घ्य देने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / विटामिन डी एक फैट में घुलनशील विटामिन है, जो हड्डियों, दांतों और मसल्स को हेल्दी बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाता है. विटामिन डी इम्यूनिटी को बढ़ावा देने, कई बीमारियों के जोखिम को कंट्रोल करने और आपके मूड को ठीक रखने में मदद करता है. विटामिन डी डाइट में लिए गए कैल्शियम के एब्जॉर्प्शन के लिए जिम्मेदार है. इसलिए, यह आपकी हड्डियों और दांतों के लिए जरूरी है. हालांकि, सर्दियों के मौसम में विटामिन डी के बेहतर लेवल को बनाए रखना मुश्किल है. सूरज की रोशनी के संपर्क में आने पर आपका शरीर विटामिन डी बनाता है और सर्दियों में आपकी सूरज की रोशनी तक पहुंच सीमित होती है. इसलिए, आपके विटामिन डी लेवल को बढ़ावा देना जरूरी है. सर्दियों में अपने विटामिन डी लेवल को बढ़ाने के कुछ सबसे बेस्ट तरीकों को जानने के लिए आगे पढ़ें.
विटामिन डी के लेवल को बढ़ाने के तरीके |
1. विटामिन डी वाले फूड्स
आप डाइट के जरिए अपने विटामिन डी लेवल में सुधार कर सकते हैं. विटामिन डी से भरपूर कुछ फूड्स जिन्हें आप अपनी विंटर डाइट में शामिल कर सकते हैं:
मशरूम
साल्मन
अंडे की जर्दी
दूध
फॉर्टिफाइड फूड्स
2. सूरज की रोशनी को मिस न करें
सर्दियों के दौरान कुछ दिनों में आपको सूरज की रोशनी देखने को मिल सकती है. ऐसे दिनों में धूप में बैठने की कोशिश करें. यह आपको विटामिन डी प्राप्त करने में मदद करेगा और साथ ही ठंडे मौसम से जरूरी राहत भी देगा.
आलस्य और ठंडा मौसम आपको बाहर निकलने से रोक सकता है. इसलिए, कुछ धूप पाने के लिए हर दिन बाहर टहलने की कोशिश करें.
3. लक्षणों को नजरअंदाज न करें
थकान, दर्द, दर्द, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और बार-बार इंफेक्शन होना विटामिन डी की कमी के कुछ लक्षण हैं. अगर आप भी इन लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं तो इन्हें नजरअंदाज न करें. अपने हेल्थ केयर एक्सपर्ट से बात करें.
4. सप्लीमेंट लें
अगर आपका विटामिन डी लेवल बहुत कम है तो आप अपनी डाइट में विटामिन डी सप्लीमेंट शामिल कर सकते हैं. हालांकि, पहले अपने विटामिन डी लेवल की जांच करवाना और अपने हेल्थ केयर एक्सपर्ट से सलाह लेने के बाद ही सप्लीमेंट लेना चाहिए.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /सर्दी का मौसम मटर का मौसम भी है. सर्दी के मौसम में हरी मटर आसानी से मिल जाती है. परांठे से लेकर करी तक, हरी मटर को कई चीजों में शामिल किया जा सकता है. हरी मटर जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है. बहुत से लोग नहीं जानते कि हरी मटर प्लांट बेस्ड प्रोटीन का एक कमाल का स्रोत है. लगभग 100 ग्राम हरी मटर में 5 ग्राम प्रोटीन होता है. सिर्फ प्रोटीन ही नहीं, हरी मटर में कई प्रकार के जरूरी पोषक तत्व होते हैं जिन्हें आपको अपनी विंटर डाइट में जरूरी शामिल करना चाहिए. यहां हम हरी मटर के कुछ अद्भुत स्वास्थ्य लाभों के बारे में बता रहे हैं जो आपको इस सर्दी में जरूर खाने चाहिए.
हरी मटर खाने के शानदार स्वास्थ्य लाभ |
1. न्यूट्रिशनल प्रोफाइल
प्रोटीन के अलावा, हरी मटर में फाइबर, विटामिन ए, विटामिन सी, फोलेट, आयरन, जिंक, विटामिन बी और कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स सहित जरूरी पोषक तत्व होते हैं.
2. वजन घटाने में मदद मिल सकती है
हरी मटर को आप आसानी से अपने वेट लॉस डाइट में शामिल कर सकते हैं. इनमें कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है. साथ ही हाई फाइबर और प्रोटीन होने से आपको लंबे समय तक भरे रहने में मदद कर सकती है.
हाई फाइबर और प्रोटीन वाले फूड्स आपको लंबे समय तक भरा रखकर और आपकी भूख को दबाकर आपकी कुल कैलोरी सेवन को कम कर सकते हैं.
3. डायबिटीज फ्रेंडली
हरी मटर ब्लड शुगर लेवल को प्रभावी ढंग से कंट्रोल कर सकती है. लो जीआई स्कोर के साथ हरी मटर ब्लड शुगर में अचानक बढ़ोत्तरी की बजाय धीरे-धीरे बढ़ाती है.
हाई फाइबर भी कार्ब्स के अवशोषण को धीमा कर देती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल को रेगुलेट करने में मदद मिल सकती है.
4. हार्ट हेल्थ और इम्यूनिटी को बढ़ावा दें
हरी मटर एंटीऑक्सिडेंट और मैग्नीशियम, पोटेशियम और कैल्शियम जैसे जरूरी हार्ट हेल्दी मिनरल्स का एक अच्छा स्रोत हैं. ये ब्लड प्रेशर नंबर को कंट्रोल करके, कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करके और हार्ट हेल्थ को बढ़ावा देकर आपकी हेल्थ को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं.
हरी मटर में मौजूद हाई विटामिन सी आपके इम्यून फंक्शन को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकता है.
5. पाचन में सुधार लाता है
हरी मटर में मौजूद फाइबर मल त्याग में सुधार कर सकता है और कब्ज, सूजन और अन्य पाचन समस्याओं को रोक सकता है.
इस सर्दी में हरी मटर के गुणों को न चूकें.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /पत्तागोभी को अपनी डाइट में शामिल करने से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं. यह क्रूसिफेरस सब्जी विटामिन सी और के से भरपूर है, जो बेहतरीन मिनरल हैं जो हेल्दी हड्डियों और एक मजबूत इम्यून सिस्टम को बनाए रखने में मदद करते हैं. फाइबर से भरपूर पत्तागोभी पाचन को आसान बनाती है और आंतों को हेल्दी रखती है. पत्तागोभी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट सूजन को कम करने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में सहायता करते हैं. इसके अलावा पत्तागोभी में ऐसे तत्व शामिल होते हैं जो कैंसर को रोकने में सक्षम हो सकते हैं, क्योंकि पत्तागोभी को कई तरीकों से तैयार किया जा सकता है.
पत्तागोभी खाने के सबसे आश्चर्यजनक फायदे |
1. हेल्दी हार्ट
एनआईएच के अनुसार, अपनी हाई एंथोसायनिन सामग्री के कारण, गोभी ब्लड प्रेशर को कम कर सकती है और युवा और मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं में हार्ट डिजीज के खतरे को कम कर सकती है.
2. पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है
क्या आप जानते हैं कि पत्तागोभी की हाई प्रोबायोटिक सामग्री पाचन को बेहतर बनाने में सहायता करती है, कब्ज से बचने में मदद करती है और कोलन हेल्थ को सपोर्ट करती है.
3. बेहतर आंखों की रोशनी
जेक्सैन्थिन और ल्यूटिन से भरपूर पत्तागोभी हेल्दी आंखों के लिए जरूरी हैं. यह लेंस और रेटिना को यूवी किरणों से बचाता है और इसमें विटामिन ई को रिवाइव करने की क्षमता होती है, जो अच्छी आंखों की रोशनी के लिए एक बड़ी एंटीऑक्सीडेंट है.
4. कैंसर से बचाता है
सल्फोराफेन एक एंटीऑक्सीडेंट है जिसमें शक्तिशाली कैंसर रोधी गुण होते हैं जो पत्तागोभी में पाए जाते हैं. इसके अलावा पत्तागोभी में ब्रैसिनिन और आइसोथियोसाइनेट्स होते हैं, जो शरीर से कार्सिनोजेन्स को बेअसर करने और खत्म करने की क्षमता रखते हैं. साथ ही पत्तागोभी में पाए जाने वाले रसायन पेट, फेफड़े, कोलन, लिवर, यूरिनरी ब्लैडर और ब्रेस्ट कैंसर को बढ़ने से रोक सकते हैं.
5. स्ट्रॉन्ग इम्यूनिटी
एनआईएच के अनुसार, पत्तागोभी में विटामिन सी होता है. ये व्हाइट ब्लड सेल्स को स्टिमुलेट करता है और इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /विंटर में खांसी सर्दी की समस्या घर घर में रहती है. ऐसे में अगर आप अपने डेली लाइफ में काली मिर्च और शहद को शामिल कर लें तो इससे कई तरह की समस्याएं दूर हो सकती हैं. दरअसल, काली मिर्च औेर शहद में एंटीबैक्टीरियल, एंटीइंफ्लामेर्टी गुण होते हैं जो शरीर को कई तरह के संक्रामक बीमारियों से बचाने और दर्द आदि को दूर करने में मदद कर सकता है. ये शरीर की इम्यूनिटी को भी बढ़ाने का काम करता है जिससे सिजनल खांसी, सर्दी, जुकाम, बुखार आदि की संभावना कम हो जाती है. तो आइए जानते हैं कि विंटर में काली मिर्च(black pepper) और शहद मिलाकर खाने से क्या क्या फायदा मिल सकता है.
विंटर में काली मिर्च और शहद खाने के फायदे
वजन करता है कम
सुबह सुबह अगर आप खाली पेट काली मिर्च और शहद को मिलाकर गर्म पानी में डालें और यह काढ़ा पियें तो आपका वजन कम हो सकता है. दरअसल, काली मिर्च में फाइटोन्यूट्रिएंट्स पाया जाता है जो चर्बी घटाने में मदद करता है.
कब्ज होता है दूर
अगर आप कब्ज की समस्या से परेशान रहते हैं तो आप सुबह उठते ही गर्म पानी में काली मिर्च का पाउडर और शहद मिलाकर पियें. आपका पेट साफ हो जाएगा.
गले में आराम
अगर आप खांसी से परेशान हैं और गले में दर्द हो चुका है तो आप गुनगुने पानी में काली मिर्च पाउडर और शहद मिलाकर पियें. आप एक चम्मच में शहद और काली मिर्च मिलाकर मुंह में रख लें. इस तरह आपको तुरंत खांसी से आराम मिलेगा.
डिप्रेशन होता है दूर
अगर आप मेंटली स्ट्रेस में रहते हैं और डिप्रेशन महसूस होता है तो आप काली मिर्च और शहद का सेवन करें. इसके लिए सबसे पहले आप काली मिर्च को तवे पर भून लें और पाउडर बना लें. अब चाय का काढ़ा के रूप में इसका इस्तेमाल करें. चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल करें.
सेहत टिप्स/शौर्यपथ / सर्दियों में जल्दी उठने के कुछ नुकसान हो सकते हैं. ठंडा तापमान बिस्तर की गर्माहट को छोड़ना चुनौतीपूर्ण बना सकता है, जिससे असुविधा और ठंड से संबंधित बीमारियों जैसे संभावित हेल्थ रिस्क हो सकते हैं. सुबह धूप न निकलने से आपका मूड और एनर्जी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि शरीर की सर्कैडियन लय सर्दियों की गहरी सुबह के साथ तालमेल बिठाने में संघर्ष कर सकती है. इसके अलावा ज्यादा सोने की टेंपटेशन या लंबे समय तक अंधेरे के कारण नींद के पैटर्न में गड़बड़ी का अनुभव आपकी पूरी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकि समय से सोने और हमेशा जल्दी उठने की सिफारिश की जाती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि सर्दियों में जल्दी उठने से नुकसान भी हो सकते हैं.
सर्दियों में जल्दी उठने के बड़े नुकसान |
1. कोल्ड एक्सपोजर और हेल्थ रिस्क
सर्दियां जल्दी बढ़ने से लोगों को ठंडे तापमान का सामना करना पड़ता है, जिससे ठंड से संबंधित बीमारियां, शीतदंश (फ्रॉस्टबाइट) और रेस्पिरेटरी प्रोब्लम्स का खतरा बढ़ जाता है. कम तापमान के लंबे समय तक संपर्क में रहने से हार्ट सिस्टम पर दबाव पड़ सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है.
2. सर्कैडियन लय का बिगड़ना
सर्दियों में बहुत जल्दी जागने से प्राकृतिक सर्कैडियन लय गड़बड़ हो सकती है, क्योंकि सुबह का समय काफी ठंडा होता है. इस गड़बड़ी से नींद की कमी हो सकती है, मूड, ब्रेन फंक्शन पर असर पड़ सकता है. यह अतिसंवेदनशील व्यक्तियों के लिए सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (एसएडी) को भी बढ़ा सकता है.
3. धूप कम मिलना
जल्दी उठने वाले सर्दियों की सुबह के दौरान आप धूप नहीं ले पाते हैं. ये कमी सेरोटोनिन और मेलाटोनिन को प्रभावित कर सकती है, जिससे नींद-जागने का चक्र बाधित हो सकता है और संभावित रूप से मूड से रिलेटेड डिसऑर्डर और नींद में खलल पड़ सकता है.
4. प्रोडक्टिविटी में कमी
ठंडी और अंधेरी सर्दियों की सुबहें प्रोडक्टिविटी में कमी ला सकती हैं, क्योंकि लोगों को अपने बिस्तर की गर्माहट छोड़ना चुनौतीपूर्ण लग सकता है. यह ऑफिस या स्कूल में आपकी परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकता है.
5. एनर्जी जल्दी से कम होना
जल्दी उठने वालों को अक्सर ठंडी सुबह के दौरान हीटिंग की जरूरत होती है, जिससे एनर्जी की ज्यादा जरूरत होती है. इसलिए सर्दियों की सुबह हमेशा आपको थका हुआ महसूस करा सकती है.
जबकि जल्दी उठने के अपने फायदे हैं, सर्दियों में ऐसा करने से कई नुकसान होते हैं. सर्दियों के मौसम के दौरान अपनी प्राथमिकताओं और स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, जल्दी उठने और पर्याप्त आराम करने के बीच संतुलन बनाना जरूरी है.
योग /शौर्यपथ / योग कई स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने और कई बीमारियों का इलाज करने में मदद करता है. बता दें कि आसन, प्राणायाम, ध्यान, मुद्रा ये सभी कई बीमारियों से दूर करने में मदद करता है. आज हम बात करेंगे हमारे शरीर के सबसे नाजुक अंगों में से एक आंखों की. आजकल लोगों की लाइफस्टाइल और खानपान ऐसा हो गया है जिसका असर हमारी आंखों की रोशनी पर पड़ता है और वो कमजोर हो जाती हैं. आज के समय में छोटी उम्र के बच्चों को भी चश्मा लगाना पड़ता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ योगासन आपकी आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं वो 5 योगासन जो आपकी आंखों की रोशनी को बढ़ाकर चश्मा उतारने में मदद कर सकते हैं.
सिद्धा वॉकिंग
शरीर को गर्माहट देने के लिए सिद्ध वॉक या योगा वॉक किया जा सकता है. इसे करने के लिए जमीन पर आकृति 8 अक्षर का आकार बना लें. अब इसी आकार में उत्तर से दक्षिण और दक्षिण से उत्तर वॉक करनी होती है. इस दौरान सबसे ज्यादा इस बात पर ध्यान देना है कि आपको वॉक के दौरान मेडिटेशन करना है. और दोनों दिशा में समय देख कर एक समान समय पर वॉक करना है.
अदोमुखिस्वानासन
हर आसन की तरह अदोमुखिस्वानासन करने के भी फायदे होते हैं. ये योगासन आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद कर सकता है. इसके साथ ही यह शरीर को एक्टिव रखने में भी मदद करता है.
सर्वांगासन
सर्वांग' का मतलब है 'शरीर के सभी अंग'. जैसा की इसके नाम से ही साफ है कि इस आसन को करने से पूरे शरीर को लाभ मिलता है. इसलिए यह आसन आखों की रोशनी को बढ़ाने में भी मदद कर सकता है. यह पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने के लिए एक बेहतरीन मुद्रा है.
शीर्षासन
शीर्षासन को सभी योगासनों का राजा कहा जाता है. इस एक आसन से आपको मिलते हैं एक नहीं 7-7 फायदे. इनके बारे में जानकर आप इसे जरूर अपनी दिनचर्या में शामिल करेंगे. इन्हीं फायदों में से एक है आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए इस योगासन का फायदा. इस आसन को रोजाना करने से ये आपकी आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद कर सकता है.
हलासन
अगर हम हलासन जिसमें हल का अर्थ है 'हल' और आसन योग मुद्रा की ओर संकेत है. अंग्रेजी में इसे प्लो पोज के नाम से जाना जाता है. ये आसन शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /आपकी डाइट आपके वजन को कंट्रोल करने में बहुत ज्यादा असर डालती है. आप चाहे कितनी भी एक्सरसाइज कर लें, जब तक आप अपने खाने को कंट्रोल नहीं करेंगे, तब तक आपका वजन कभी कम नहीं हो सकता. जबकि आटा हमारी डाइट का एक मेन हिस्सा है, यह हमारे वजन पर भी प्रभाव डालता है. रोटी एक मुख्य भोजन है और इसीलिए जब लोगों को वजन घटाने के लिए रोटी कम करने के लिए कहा जाता है, तो यह उनके लिए बहुत डिफीकल्ट हो जाता है. हालाँकि, सामान्य गेहूं के आटे के अलावा कई ऐसे ऑप्शन्स हैं जो वेट लॉस में मदद कर सकते हैं. आइए जानते हैं उन आटों के बारे में जो वजन घटाने में आपकी मदद कर सकते हैं.
जई का आटा
जई का आटा सबसे हेल्दी आटों में से एक है जिसे आप सामान्य गेहूं के आटे के बजाय चुन सकते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि यह सॉल्युबल फाइबर से भरपूर है जो ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने और पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है. यह बीटा-ग्लूकन का भी अच्छा सोर्स है जो कोलेस्ट्रॉल के प्रभाव को कम करता है. जई के आटे में कैलोरी कम होती है और इसलिए जब आप अपनी कैलोरी कम करने की कोशिश कर रहे हों तो यह एक बढ़िया ऑप्शन है.
कुट्टू का आटा
इसके बाद आता है कुट्टू का आटा जो फाइबर से भरपूर होता है. यह भूख को कंट्रोल करता है. इस आटे में मौजूद फाइबर डाइजेशन को हेल्दी रखने में मदद करता है. इस आटे में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और इस प्रकार यह धीरे-धीरे ब्लडफ्लो में ग्लूकोज छोड़ता है, जिससे शरीर में एनर्जी बनी रहती है और ब्लड शुगर कंट्रोल में रहती है. इसके अलावा, यह भूख को कंट्रोल करके वेट लॉस में मदद कर सकता है.
चौलाई का आटा
प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे कई पोषक तत्वों से भरपूर, चौलाई का आटा गेहूं के आटे का एक बढ़िया ऑप्शन है. ये पोषक तत्व स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं और वजन घटाने के दौरान शरीर को काम करने और एनर्जेटिक बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. इसके अलावा, यह फाइबर से भरपूर है और इस प्रकार पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है.
रागी या नचनी
रागी फाइबर और अमीनो एसिड से भरपूर एक ग्लूटेन-फ्री आटा है. यह आपको पेट को भरा हुआ महसूस कराता है और वजन घटाने की प्रोसेस को तेज कर देता है. इसके अलावा इसे पचाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है.
ज्वार
ज्वार एक ग्लूटेन-फ्री आटा है जो प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, विटामिन बी और सी से भरपूर होने के कारण वजन घटाने में मदद करता है. ज्वार की पोषण संबंधी समृद्धि पाचन में मदद करती है. शुगर को कंट्रोल कर के हार्ट को हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /सर्दियों के मौसम में कई तरह की सब्जियां और फल मिलते हैं जो खाने में स्वादिष्ट और सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं. आज हम बात करेंगे संतरे की. जो सर्दियों में खूब मिलते हैं और यह अपने स्वास्थय लाभों के लिए भी जाना जाता है. सिर्फ इस फल को नहीं बल्कि संतरे के जूस का सेवन भी किया जाता है. हालांकि ये सेहत के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन सर्दियों के मौसम में इस फल का सेवन कब किया जाना चाहिए इस बारे में बहुत कम लोगों को पता होता है. गलत समय में इसका सेवन गैस और कब्ज की समस्या का कारण बन सकता है. इसलिए अगर आप इस फल के सेवन से फायदा पाना चाहते हैं तो इस आर्टिकल में जानें ऑरेंज खाने का सही समय क्या है.
ठंड में संतरा कब खाना चाहिए
संतरा खट्टा होता है इसलिए इसका सेवन रात के समय नहीं करना चाहिए. आप दोपहर के समय या सुबह इस फल का सेवन कर सकते हैं. लेकिन एक बात का ध्यान रखें को आप खाली पेट इसका सेवन व करें, इसकी वजह से एसिड रिफलैक्स कर सकता है.
संतरे में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो स्किन के लिए भी बेहद हेल्दी होता है यह स्किन के कोलेजन को बूस्ट करने के साथ स्किन को टाइट बनाने में मदद करता है. सर्दियों में इसका सेवन पेट के लिए भी फायदेमंद हो सकता है.
संतरे में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इसलिए इसका सेवन पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद कर सकता है.
आंखों के लिए भी इस फल का सेवन बेहद फायदेमंद हो सकता है. जिन लोगों की आई साइट वीक है उन्हें इसको जरूर खाना चाहिए.
आस्था /शौर्यपथ / अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम है और पूरे देश में इसकी चर्चा हो रही है. देश भर के लोगों में इस कार्यक्रम को लेकर भरपूर उल्लास और उत्साह का वातावरण है. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश-विदेश में हजारों अतिथि शामिल होने वालें हैं. आइए जानते हैं क्या होती है प्राण प्रतिष्ठा और क्यों जरूरी है यह अनुष्ठान.
प्राण प्रतिष्ठा
प्राण प्रतिष्ठा हिंदू धर्म का प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान है. जब भी कोई मंदिर बनता है और उसमें देवी- देवताओं की मूर्ति स्थापित की जाती है तो उनकी पूजा के पहले उनमें प्राण प्रतिष्ठा की जाती है. प्राण का अर्थ हाेता है जीवन इसलिए प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ हुआ प्रतिमा में देवी देवताओं को आने का आह्वान करना.
प्राण प्रतिष्ठा से पहले
प्राण प्रतिष्ठा के पहले तक प्रतिमाओं का पूजा के योग्य नहीं माना जाता है. उस समय तक प्रतिमा निर्जीव रहती है. विधि-विधान से प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उसमें देवी देवताओं का वास माना जाता है.
प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया
प्राण प्रतिष्ठा के लिए प्रतिमा को सम्मानपूर्वक मंदिर लाया जाता है. जहां प्रतिमा की स्थापना होनी है वहां द्वार पर प्रतिमा का विशिष्ट स्वागत किया जाता है. प्रतिमा को सुगंधित चीजों का लेप लगाकर दूध से नहलाया जाता है. इसके बाद प्रतिमा को मंदिर के गर्भ गृह में रखा जाता है और प्राण प्रतिष्ठा की विशेष पूजन प्रक्रिया शुरू की जाती है. प्रतिमा का मुख हमेशा पूर्व दिशा की ओर ही रखा जाता है. इसके बाद देवता को आमंत्रित करने के लिए मंत्रपाठ किया जाता है. सबसे पहले प्रतिमा के आंखों से परदा हटाया जाता है. ये प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिर मंदिर में उस देवता की मूर्ति की पूजा अर्चना होती है.
घर में पत्थर की प्रतिमा
धर्म के विद्वानों के अनुसार घर में पत्थर की प्रतिमा नहीं रखना चाहिए क्योंकि इन प्रतिमाओं को रखने पर रोज उसकी उचित प्रकार की पूजा और अनुष्ठान करना जरूरी होता है. विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा के साथ स्थापित देव प्रतिमाओं की उचित पूजा पाठ नहीं किए जाने पर ये आसपास रहने वालों को भारी हानि हो सकती है.
आस्था /शौर्यपथ / रामायण में वर्णन है कि भगवान श्री राम को 14 वर्षों का वनवास मिला था. इस वनवास में भगवान राम के साथ उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण भी साथ गए थे. तीनों अयोध्या छोड़ 14 वर्ष तक भारत के उत्तर से शुरू कर दक्षिण तक विभिन्न स्थानों पर रहे. वनवास काल में श्रीराम और लक्ष्मण कई ऋषि-मुनियों से शिक्षा और विद्या ग्रहण की. आइए जानते हैं वनवास के दौर प्रभु राम कहां-कहां गए.
केवट ने पार कराया तमसा नदी
रामायण और शोधकर्ताओं के अनुसार श्री राम अयोध्या से निकलकर सबसे पहले तमसा नदी पहुंचे, जो अयोध्या से 20 किमी दूर है. यहां से तीनों ने गोमती नदी पार कर प्रयागराज से 20-22 किलोमीटर दूरी पर स्थित श्रृंगवेरपुर पहुंचे. यह उस समय निषादराज का राज्य था. यहीं पर गंगा के तट पर उन्होंने वट से गंगा पार करवाने के लिए कहा था. रामायण में इलाहाबाद से 22 मील उत्तर-पश्चिम की ओर स्थित 'सिंगरौर' का मिलता है. यह नगर गंगा घाटी के तट पर स्थित था. इलाहाबाद जिले में कुरई नामक जगह है.
चित्रकूट
श्री राम ने संगम के समीप यमुना नदी को पार किया और चित्रकूट पहुंचे. राम को वापस अयोध्या ले जाने के लिए भरत चित्रकूट पहुंचे थे. चित्रकूट के पास ही सतना (मध्यप्रदेश) अत्री ऋषि का आश्रम था. श्रीराम ने आश्रम में कुछ वक्त बिताया था.
दंडकारण्य
अत्रि ऋषि के आश्रम के बाद श्रीराम ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के घने जंगलों को अपना आश्रय स्थल बनाया. श्री राम ने अपने वनवास का सबसे ज्यादा समय यहीं बिताया. यहां लगभग 10 वर्षों से भी अधिक समय तक रहे थे.
पंचवटी
दण्डकारण्य में मुनियों के आश्रमों में रहने के बाद श्रीराम नासिक में अगस्त्य मुनि के आश्रम गए. नासिक के पंचवटी अगस्त ऋषि के आश्रम में भी श्रीराम ने वनवास का कुछ समय यहां बिताया. यही वह स्थान है, जहां पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी. इसके बाद दोनों भाइयों ने खर व दूषण के साथ युद्ध किया. इस क्षेत्र में मारीच और खर और दूषण के वध के बाद राक्षसराज रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और जटायु का भी वध किया. सीता को खोजते हुए श्रीराम-लक्ष्मण तुंगभद्रा तथा कावेरी नदियों के क्षेत्र में पहुंचे. मार्ग में वे पम्पा नदी के पास शबरी आश्रम भी गए, जो आजकल केरल में स्थित है. वे ऋष्यमूक पर्वत की ओर बढ़े. यहां उन्होंने हनुमान और सुग्रीव से भेंट की . इसके बाद श्रीराम ने अपनी सेना का गठन किया और लंका की ओर चल पड़े.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /आंखें हमारी शरीर का सबसे नाजुक अंग होते हैं, जिसपर हम सबसे ज्यादा बेरहम होते है. घंटों तक मोबाइल देखना हो या फिर धूल मिट्टी प्रदूषण हो, आंखों पर इसका सबसे ज्यादा इफेक्ट पड़ता है और यही कारण है कि कम उम्र में भी आजकल बच्चों को मोटे-मोटे चश्में लग जाते हैं और बड़े होने तक उनकी आंखों की रोशनी का कम हो जाती है या फिर उन्हें आंखों का ऑपरेशन करवाना पड़ता है. ऐसे में आज हम आपको बताते हैं भारतीय रसोई में मौजूद 9 सुपर फूड जो आंखों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
नजर का चश्मा हटाने के उपाय |
पत्तेदार सब्जियां: पालक, केला और कोलार्ड साग ल्यूटिन और जेक्सैंथिन एवं एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं जो आंखों को हानिकारक रोशनी से बचाते हैं.
गाजर: गाजर में बीटा-कैरोटीन होता है, जो विटामिन ए का बड़ा सोर्स है. यह आंखों की अच्छी रोशनी बनाए रखने में मदद करता है.
खट्टे फल: संतरे, नींबू और अंगूर में विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है, जो मोतियाबिंद के खतरे को कम कर सकता है और उम्र से संबंधित आंखों की समस्या धीमा कर सकता है.
बेरीज: ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और रासबेरी एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन, खासकर विटामिन सी से भरपूर होते हैं, जो आंखों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है.
फैटी फिश: सैल्मन, मैकेरल और सार्डिन में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो सूखी आंखों को रोकने और आंखों की ओवरऑर हेल्थ को बरकरार रखने में मदद कर सकता है.
मेवे और सीड्स: बादाम, अखरोट, चिया सीड्स और अलसी के बीज में विटामिन ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो आंखों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं.
अंडे: अंडे ल्यूटिन, जेक्सैन्थिन, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं जो आंखों की हेल्थ को बढ़ावा देते हैं.
बीन्स: राजमा, दाल और चने में जिंक और बायोफ्लेवोनॉइड्स होते हैं, जो आंखों को स्वास्थ्य रखते हैं.
बेल पेपर: बेल पेपर खासकर रंगीन लाल और पीली बेल पेपर विटामिन सी और बीटा-कैरोटीन से भरपूर होती हैं, जो आंखों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं.
सौंफ किचन में जरूर होता है. इसका सेवन लोग माउथ फ्रेशनर के रूप में करते हैं. दरअसल, इसके औषधि गुण आपकी सेहत के लिए बहुत लाभकारी हैं क्योंकि इनमें एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ए , सी और डी प्रचुर मात्रा में होते हैं. इसके अलावा सौंफ में लोहा , जस्ता, तांबा, कैल्शियम , पोटेशियम, फाइबर और मैग्नीशियम शामिल हैं. जिन लोगों की आंख की रोशनी कमजोर हो रही है उनको तो सौंफ का सेवन जरूर करना चाहिए. आइए जानते हैं इसके अन्य फायदे.
क्या सौंफ खाने से आंख की रोशनी तेज होती है |
1- आप एक गिलास दूध में सौंफ , बादाम और मिश्री का मिक्सचर मिलाकर पीते हैं तो फिर यह आपकी आंखों की सेहत को बेहतर करेगा. इससे रोशनी तेज होगी. आप इसमें हल्दी और काली मिर्च एड करके भी पी सकते हैं.
2- रात में सोने से पहले आप अगर ऐसा कर लेते हैं तो आपको इसके फायदे दोगुने मिलेंगे. सौंफ का सेवन आंखों से जुड़ी समस्याओं को दूर करेंगे. इससे आपकी सेहत पर सकारात्मक असर पड़ेगा.
3- आपको बता दें कि सौंफ में एंटीऑक्सीडेंट्स, आयरन, विटामिन सी और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाएं जाते हैं जो आंखों की रोशनी को तेज करता है. तो आज से ही आप इसको अपनी रूटीन का हिस्सा बनाएं.
4- सौंफ में कैलोरी कम होती है और यह वजन नियंत्रित करने में उपयोगी सामग्री हो सकती है. इसके अलावा, यह वजन घटाने में मदद कर सकता है क्योंकि यह कैल्शियम, विटामिन सी, आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम से भरपूर होता है.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / पैनिकोरका एक तरह का हर्ब प्लांट है जिसे मैक्सिकन मिंट या पत्थर चट्टा के नाम से भी जाना जाता है. इस पौधे के पत्तियों में कई तरह के औषधियों गुण पाए जाते हैं. दक्षिण भारत में बच्चों के खांसी और जुकाम के इलाज लिए इसका उपयोग किया जाता है. पैनिकोरका की पत्तियों से तैयार किया गया ऑयल बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. इससे स्कैल्प की खुशकी और हेयरफॉल जैसी की समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. ये बालों को मजबूत बनाता है और साथ ही हेयर ग्रोथ में भी मददगार साबित होता है. आइए जानते हैं पैनिकोरकाऑयल तैयार करने का तरीका.
पैनिकोरकाऑयल बनाने के इंग्रेडिएंट्स
पैनिकोरका प्लांट की ढेर सारी पत्तियां
कोकोनट ऑयल
कैसे बनाएं
सबसे पहले पैनिकोरका की पत्तियों को अच्छी तरह से साफ कर लें. साफ किए पत्तियों को सुखा लें. इसके बाद पत्तियों को अच्छी तरह से क्रश कर लें. इससे पत्तियों से ऑयल निकलने में आसानी होगी.एक पैन में कोकोनट ऑयल को गर्म करें और पैनिकोरका की पत्तियों को उसमे डाल दें. अब ऑयल को बीस मिनट तक गर्म करें. ऑयल के ठंडा होने पर उसे छान लें . इसे किसी साफ और सूखे कंटेनर में स्टोर कर लें. पैनिकोरका ऑयल तैयार है.
ऐसे करें अप्लाई
इस ऑयल को बालों और स्कैल्प पर हल्के हाथों से मसाज करें और रात भर लगा रहने दें. सुबह बालों का शैंपू करें. इस ऑयल के यूज का असर जल्दी ही बालों पर नजर आने लगेगा और बालों की ग्रोथ काफी तेज हो जाएगी. इससे स्कैल्प की ड्राईनेस की समस्या भी दूर हो जाएगी.
आस्था/शौर्यपथ /धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और यश की प्राप्ति होती है. विशेष रूप से देवी लक्ष्मी की पूजा धन, धान्य और वैभव के लिए किया जाता है. हर व्यक्ति माता लक्ष्मी को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाना चाहता है. देवी-देवताओं को फूल विशेष प्रिय होते हैं और पूजा में उनके प्रिय फूल चढ़ाने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं. देवी लक्ष्मी को भी कई फूल अत्यंत प्रिय हैं. उन फूलों को माता लक्ष्मी को चढ़ाकर आप उन्हें जल्दी प्रसन्न कर सकते हैं. ऐसे फूलों को आप अपनी बगिया में लगा सकते हैं जिससे वे हर दिन लक्ष्मी पूजा के लिए आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं. आइए जानते हैं कौन से फूल माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय है जिन्हें हम अपने घर में लगा सकते हैं.
मां लक्ष्मी के प्रिय फूल |
अपराजिता
नीले रंग के छोटे-छोटे अपराजिता के फूल माता लक्ष्मी को बहुत पसंद होते हैं. अपराजिता का पौधा बेल के रूप में होता है और आसानी से घर में गमले में लगाया जा सकता है. एक बार पौधे के लग जाने पर ढेर सारे फूल लगेंगे और पूजा के लिए कभी फूलों की कमी नहीं रहेगी.
कमल
माता लक्ष्मी अपने हाथों में कमल के फूल धारण करती हैं और उन्हें कमल के गुलाबी फूल अत्यंत प्रिय होते हैं. कमल का पौधा पानी में उगता है. इसे आप अपने घर में थोड़े बड़े आकार के टब में लगा सकते हैं.
पारिजात
छोटे-छोटे सफेद और बेहद अच्छी गंध वाले पारिजात के फूल चढ़ाने से माता लक्ष्मी बेहद प्रसन्न होती हैं. पारिजात का पौधा सालोंसाल फूल देते हैं.
लाल गुड़हल
लाल रंग के गुड़हल के फूल भी माता लक्ष्मी को प्रिय हैं. इसका पौधा आसानी से घर में लगाया जा सकता है. एक बार पौधा लगा देने पर साल भर फूल देने वाले इस पौधे से आपको हर दिन पूजा के लिए फूल मिलते रहेंगे.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
