August 08, 2026
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        आस्था /शौर्यपथ /हिन्दू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त सबसे अच्छा समय माना जाता है. इस मुहूर्त में किया गया कार्य सफल होता है, ऐसी मानयता है. इसको परमात्मा का समय कहा जाता है. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजे से लेकर 5:30 तक होता है, जो लोग इस मुहूर्त में उठते हैं उनपर सदैव देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. इस मुहूर्त में उठकर योग और पूजा पाठ करना बहुत अच्छा माना जाता है. ऐसे में आजआपको यहां पर 2 मंत्र बताते हैं, जिसे आप ब्रह्म मुहूर्त में जपते हैं, तो फिर आपको इसके शुभ फल प्राप्त होंगे. इन मंत्रों का जाप करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहेगा.
    ब्रह्म मुहूर्त मंत्र पहला
    इस मंत्र का जाप आप अपनी हथेलियों को देखते हुए करें.
    कराग्रे वसति लक्ष्मीः,कर मध्ये सरस्वती।
    करमूले तू ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम्।।
    अर्थ- इस मंत्र का अर्थ है कि हथेलियों में मां लक्ष्मी, देवी सरस्वती और भगवान विष्णु का निवास है और मैं उनके दर्शन कर रहा हूं.
    दूसरा ब्रह्म मुहूर्त मंत्र
    इस मंत्र का जाप करने के लिए आप सबसे पहले सुखासन मुद्रा में बैठ जाएं. इसके बाद अपनी दोनों आंखों को बंद करके इस मंत्र का जाप करें.
    ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च।
    गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु॥
    अर्थ- ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव , सूर्य, चंद्रमा, भूमि सुत यानी मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु सभी ग्रहों को शांत रखें. इस मंत्र का जाप करने से सभी ग्रह आपके अनुकूल रहेंगे.

    उमंगÓ वार्षिक समारोह में जमकर थिरके शारदा विद्यालय के विद्यार्थी

          भिलाई / शौर्यपथ /'उमंगÓ वार्षिकोत्सव के तृतीय दिवसीय का आयोजन शनिवार की शाम शारदा विद्यालय वैशालीनगर के छात्रों द्वारा शकुन्तला विद्यालय रामनगर भिलाई के सुसज्जित प्रांगण में सम्पन्न हुआ। संस्था के डायेरक्टर संजय ओझा के साथ माता वीणापाणि के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर आशीष लिया। शाम की शोभा बने अतिथियो का तिलक-बैच एवं पुष्पगुच्छ से अभिनंदन किया गया। राजगीत के समवेत स्वर से छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना के साथ सत्र के शैक्षिक गैर शैक्षिक प्रगति में विशेष स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को नगद पुरस्कार राशि और सम्मान प्रतीक से पुरस्कृत किया गया। विद्यालय का वार्षिक रिपोर्ट हेड मिस्ट्रेस अनामिका राय द्वारा प्रस्तुत किया गया।
    सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत इनक्रेडिबल छत्तीसगढ़Ó नृत्य से हुई। जिसमें राज्य के 12 माही पर्वो के झाँकियां प्रस्तुत की गयी। 'डिजलिंग्स स्टसिÓ एटीज 80ह्य मे हमे लाइफ हैकर मोबाइलÓ नृत्य की जोरदार प्रस्तुति देखने को मिली। 'मनोहरम् नृत्य में श्रीकृष्ण की माधुर्य लीला की मनमोहन रूप दर्शाया वहीं 'रावणÓ नृत्य में पंडित रावण के अंह व आतंकी चरित्र को दर्शाते हुए रावण वध को दिखा गया।
          अतिथि ने कार्यक्रम के स्वरूप को देखते हुए कहा आज विद्यालय सिर्फ पाठ्क्रम की सीमाओं तक ही समाहित नहीं रहा विद्यालय का प्रथम व मजबूत संकल्प कि विद्यार्थियों का कलम-किताब-कौशल त्रिय-आयामी विकास हो, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए शकुंतला ग्रुप ऑफ स्कूल्स की शैक्षिक प्रणाली में हमेशा प्रतिबद्ध दिखाई देती है। अभिभावकों को संबोधित करते हुए ग्रुप ऑफ स्कूल्स के डायरेक्टर संजय ओझा ने कहा विद्यार्थियों को मात्र शिक्षित ही नहीं बनाते बल्कि उसे योग्य बनाते हैं। इसी दृष्टि से आज शाला में छात्र अपनी प्रतिभा निखार रहा है, चाहे वह साइंस फील्ड हो, खेलकूद की गतिविधियों हो, आर्ट एण्ड क्राफ्ट हो या कक्षा में उत्तम परीक्षा परिणाम।
        जो अभ्यार्थी किसी कला क्षेत्र में पीछे है, उसकी कमजोरी उसकी अनुपस्थिति है। मुझे अभिभावको से यही कहना है कि आप अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाए। मेरा यह विश्वास है कि इस संस्था से पढ़ विद्यार्थी देश-विदेश में भिलाई का डंका बजायेगे। कार्यक्रम की पूर्णता पर प्रभारी रिंकू कुदेसिया ने धन्यवाद ज्ञान किया। इस अवसर पर ग्रुप के गणमान्य विपिन कुमार प्राचार्य शकुन्तला विद्यालय, ममता ओझा मैनेजर शारदा विद्यालय रिसाली सेक्टर, प्रभारी राजेश वर्मा, वनिता ओझा, प्रतीक ओझा एवं सभी
    शिक्षक-शिक्षिकायें उपस्थित थे।

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ / विटामिन बी12 कम लेने से चलने में परेशानी, जोड़ों में गंभीर दर्द और शरीर का रंग पीला पड़ने लगता है और धीरे-धीरे सांस लेने में भी परेशानी होने लगती है. इसके अलावा इस विटामिन की कमी आपकी मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर डालती है. इसकी कमी चिड़चिडापन, तनाव और अवसाद का भी कारण बनती है. अगर आपको इसमें से कोई लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत अपनी डाइट में विटामिन बी12 फूड शामिल कर लेने चाहिए.
    विटामिन बी 12 फूड |
    1- शाकाहारियों के लिए दही विटामिन बी12 का सबसे अच्छा स्रोत है. एक कप सादे दही में लगभग 28% विटामिन बी12 होता है.
    2- दूध विटामिन बी12 के साथ-साथ प्रोटीन, कैल्शियम और खनिजों से भरपूर होता है. दूध से बने प्रोडक्ट, जैसे- पनीर विटामिन के अच्छे स्रोत हैं. दूध अन्य विटामिन बी 12 फूड की तुलना में पेट में तेजी से और आसानी से अवशोषित हो सकता है.
    3- शाकाहारी लोगों के लिए चोकर और साबुत गेहूं जई जैसे फोर्टिफाइड अनाज में विटामिन बी 12 के साथ-साथ फोलेट, आयरन और विटामिन ए की भी भरपाई हो जाती है. फोर्टिफाइड अनाजका नियमित सेवन आपके शरीर में विटामिन बी 12 के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है.
    4-फोर्टिफाइड यीस्ट में बहुत सारा विटामिन बी12 होता है. इस खमीर की थोड़ी सी मात्रा भोजन को जायकेदार स्वाद दे सकती है. पूरी तरह से फोर्टिफाइड यीस्ट के एक चम्मच में 2.4 एमसीजी विटामिन बी12 होता है. स्वाद के लिए आप इस फोर्टिफाइड यीस्ट को सॉस या करी में मिलाकर खा सकते हैं.
    5- नोरी सूखा हुआ खाद्य समुद्री शैवाल है जिसमें अच्छी मात्रा में विटामिन बी12 होता है. इसे पर्पल लेवर के नाम से भी जाना जाता है, आमतौर पर जापान जैसे एशियाई देशों में खाया जाता है. अध्ययनों के अनुसार, 4 ग्राम सूखी नोरी दैनिक विटामिन बी 12 की जरूरत को पूरा करती है. आप इसे नाश्ते के रूप में ले सकते हैं या सुशी में इसका उपयोग कर सकते हैं.

    टिप्स /शौर्यपथ / अगर आप यूरिक एसिड जैसी बीमारी की चपेट में आ गए हैं तो फिर आपको खान पान में बहुत सावधानी बरतनी होगी. क्योंकि डाइट में होने वाली गड़बड़ी ही ऐसी गंभीर बीमारी का कारण बनती है. आपको बता दें कि इस बीमारी में हड्डियों के बीच गैप आ जाता है, जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न होने लगती है. आपको फिजिकल वर्क करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में हम आपको यहां पर बाजरे और अजवायन वाली रोटी खाना यूरिक एसिड में कैसे फायदेमंद है, उसके बारे में बताने वाले हैं.
    बाजरे के आटे में अजवायन मिलाकर खाने के फायदे |
    1- दरअसल, बाजरे की रोटी में आप अजवाइन मिलाकर खाते हैं तो आपके शरीर में बढ़ी यूरिक एसिड की मात्रा घट सकती है. असल में बाजरे में प्यूरीन कम होता है और फाइबर ज्यादा होता है, जो शरीर से यूरिक को यूरिन के सहारे बाहर निकालने में मदद करती है. असल में फाइबर युक्त फूड यूरिक एसिड को अवशोषित करने में मदद करता है. अगर आप इनका सेवन रोज करने लगते हैं, तो फिर आपके शरीर से धीरे-धीरे यूरिक जड़ से खत्म हो सकता है.
    2- वहीं, अजवायन में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण बॉडी के किसी भी हिस्से में होने वाले दर्द को कम करती है और सूजनको भी. यह नैचुरल तरीके से यूरिक एसिड को कम करते हैं.

        आस्था /शौर्यपथ /हिंदू धर्म में पितरों का विशेष महत्व होता है. माना जाता है कि परिवार के बड़े सदस्य मृत्योपरांत पितृ कहलाते हैं. किसी घर में पितृ दोष तब लगता है जब उस घर के पितृ नाराज हो जाते हैं. अक्सर अंतिम संस्कार में हुई गलतियां और किसी की असामयिक मृत्यु भी पितृ दोष का कारण बन जाती है. पितृ दोष को ना हटाया जाए तो यह पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है. यहां जानिए उन कारणों के बारे में जिनसे पितृ दोष लग सकता है. इन गलतियों को करने से बचा जाए तो परिवार पर पितृ दोष नहीं लगता है.
    पितृ दोष का कारण बनने वाली गलतियां
    पितृ दोष कैसे लगता है यह जानने से पहले पितृ दोष के लक्षणों की पहचान करना जरूरी है. पितृ दोष लगने पर शादी में रुकावटें आ सकती हैं. इसके अतिरिक्त शादीशुदा जिंदगी की दिक्कतें बढ़ सकती हैं. दंपति का संतान सुख से वंचित रहना भी पितृ दोष के कारण हो सकता है. घर में नकारात्मकता फैलने, आर्थिक दिक्कतें होने और किसी सदस्य का बीमार रहना भी पितृ दोष के लक्षणों में शामिल है. निम्न वो गलतियां हैं जिनसे पितृ दोष लगता है.
    मृत्यु के पश्चात व्यक्ति का अंतिम संस्कार सही तरह से पूरे विधि-विधान से ना किया जाए तो पितृ दोष लग सकता है.
    पितरों का श्राद्ध ना करने पर भी पितृ दोष लगता है.
    पितरों का या घर के बड़े बुजुर्गों और माता-पिता का अपमान करने पर भी पितृ दोष लग सकता है.
    नीम, बरगद या पीपल के पेड़ को काटने पर भी पितृ दोष लग सकता है.
    जिन घरों में रोज-रोज कलेश होते हैं और कलह होती रहती है उन घरों में पितृ दोष लगने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं.
    अशांत घर-परिवार में भी पितृ दोष लग सकता है.
    पितृ दोष के उपाय
    पितृ दोष से बचने के लिए मान्यतानुसार पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है.
    घर में शाम के समय दीया जलाना भी शुभ माना जाता है. पितरों की पूजा और उनसे क्षमायाचना की जा सकती है.
    पितरों का तर्पण और श्राद्ध किया जा सकता है.
    निर्धन और निर्बल की मदद करने से पितृ प्रसन्न हो सकते हैं.

         आस्था /शौर्यपथ /हिंदू धर्म में सोलह संस्कार होते हैं और विवाह उनमें से एक है. विवाह में कई तरह की रस्में निभाई जाती हैं जिनका बहुत महत्व होता है. विवाह की रस्मों में जयमाला एक अहम रस्म है. इस रस्म में वर और वधु एक दूसरे को फूलों की माला पहनाते हैं. धार्मिक परंपरा के अनुसार, जयमाला को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं और उन्होंने भगवान विष्णु को जयमाला पहना कर पति के रूप स्वीकार किया था. आइए जानते हैं जयमाला की रस्म का क्या महत्व है.
    शादी में जयमाला पहनाने का धार्मिक महत्व
          पौराणिक कथाओं में जयमाला या वरमाला का उल्लेख मिलता है. मान्यतानुसार माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को वरमाला पहनाकर पति के रूप में स्वीकार किया था. भगवान शिव और माता पार्वती और राम और सीता के विवाह वर्णन में भी जयमाला का उल्लेख मिलता है.
    एकदूसरे को स्वीकारना
           वर वधु को एक दूसरे को वरमाला पहनना एक तरह से एक दूसरे को स्वीकार करने का प्रतीक है. यह दोनों के मन को मिलाने का काम करता है जिससे विवाह का बंधन मजबूत होता है. एक दूसरे के गले में फूलों की माला पहनाकर वर और वधु एक दूसरे को आने वाले जीवन की शुभकामनाएं देते हैं.
    फूल है प्रेम का प्रतीक
         जयमाला के लिए माला फूलों से तैयार की जाती है और फूल प्रेम, सौंदर्य और उत्साह के प्रतीक माने जाते हैं. फूलों से बनी जयमाला वर और वधु के साझा जीवन में प्रेम, सौंदर्य और उत्साह का प्रतीक होती है.

    ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /सर्दियों में स्किन का नेचुरल ऑयल सूखने लगता है. प्रदूषण और धूल का भी स्किन पर बुरा प्रभाव पड़ता है. स्किन को हेल्‍दी और नरिश बनाए रखने के लिए हिमालय के इन बाथिंग बार्स को आज़माएं. हिमालय के पास त्वचा, बालों और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के लिए कई ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट मार्केट में मौजूद हैं. बाथिंग बार को अपने ब्‍यूटी रूटिन में शामिल करने से आपको हेल्‍दी,
    1. बादाम और गुलाब साबुन
    हिमालय का यह पौष्टिक बार बादाम और गुलाब के गुणों से समृद्ध है, जो स्किन को सॉफ्ट बनाता है. यह त्वचा को नमी प्रदान करता है और उसे आराम पहुंचाता है. सर्दी के मौसम में इस साबुन की टिकिया से अपनी स्किन को मौसम से बचाएं.
    2. खीरा और नारियल साबुन
    यह खीरा और नारियल साबुन बार सुस्त और डैमेज स्किन को तरोताजा और रिजूवनेट करता है. जबकि नारियल का तेल हर तरह की स्किन के लिए एक प्रभावी मॉइस्चराइज़र के रूप में काम करता है, खीरा एक बेस्‍ट स्किन कंडीशनिंग एजेंट है जो त्वचा को फिर से जीवंत, मुलायम और चिकना बनाता है.
    3. नीम और हल्दी साबुन
    यह पौष्टिक साबुन नीम और हल्दी के गुणों से समृद्ध है जो त्वचा को धूल और प्रदूषण जैसी अशुद्धियों से बचाता है. नीम एक बेस्‍ट स्किन केयर इंग्रेडिएंट है जो ड्राई स्क्नि से राहत देने और त्वचा को आराम देने के लिए जानी जाती है. हल्दी में मजबूत एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा को आराम पहुंचाते हैं.
    4. हिमालय आयुर्वेद सैंडल ग्लो साबुन
    हिमालय के इस आयुर्वेदिक चंदन बार में चंदनदी रोपना तेल शामिल है. यह चंदन फ्री एक ट्रेडिशनल आयुर्वेदिक तेल है और अपने हीलिंग गुणों के लिए जाना जाता है. साबुन में चंदन का तेल भी होता है जो त्वचा को पोषण और मुलायम करने और लंबे समय तक रहने वाली खुशबू के लिए जाना जाता है.
    ये नाज़ुक कीमती पीस फेस्टिव सीज़न के लिए बिल्कुल परफेक्‍ट हैं. ऐप स्टोर या गूगल प्ले से एनडीटीवी बिग बोनस ऐप डाउनलोड करें, ऐप पर रजिस्टर करें और शॉपर्स स्टॉप से खरीदारी करते समय 4% तक रिवॉर्ड पाने के लिए अपने सभी बैंक कार्ड लिंक करें. एक बार जब आप अपने कार्ड को ऐप से लिंक कर लेते हैं, तो जब आप उन्हीं कार्डों का यूज करेंगे, तो आपका वीआईएनआर बैलेंस बढ़ जाएगा, बिना कुछ और करने, कहने या दिखाने के. इन रिवॉर्ड तक पहुंचने के लिए आपको एक न्यूनतम राशि की खरीदारी करनी होगी.अपने क्रेडिट और डेबिट कार्ड को ऐप से लिंक करना पूरी तरह से सुरक्षित है, इसलिए आपको चिंता करने की कोई बात नहीं है. एनडीटीवी बिग बोनस के साथ आपको मिलने वाले रिवॉर्ड किसी भी क्रेडिट कार्ड या बैंक रिवॉर्ड प्रोग्राम से मिलने वाली किसी भी राशि से अधिक हैं और इस वीआरएनआर बैलेंस का यूज ऐप पर दीए गए किसी भी ब्रांड पर शॉपिंग करने के लिए किया जा सकता है.

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ /कमजोर पेट वालों को अपने मनपसंद फूड खाने के बारे में कई बार सोचना पड़ता है. क्योंकि वो कुछ भी खाते हैं तो पेट में मरोड़, दर्द, गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है. ऐसे लोगों को कुछ घरेलू उपाय अपना लेनी चाहिए. हम यहां पर आंवला के फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आपके पेट की हालत में सुधार आ जाएगा.
    आंवला के फायदे
    - आंवला का चूर्ण रोज एक चम्मच गरम पानी के साथ खाने से पेट की सेहत अच्छी बनी रहेगी. आंवले के पानी में असाधारण उच्च विटामिन सी सामग्री के लिए प्रसिद्ध है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है.
    - सर्दियों के महीनों के दौरान, जब संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, तो आंवले के प्रतिरक्षा-बढ़ाने वाले गुण आपके लिए किसी रामबाण से कम नहीं हैं.
    - आप आंवले के जूस का भी सेवन कर सकते हैं. यह आपके बाल और स्किन दोनों के लिए अच्छा होता है. तो अब से आप आंवले को जरूर अपनी डाइट में शामिल करें.
    आंवले के पोषक तत्व
    इसमें विटामिन सी, एंटी ऑक्सीडेंट, आयरन, ऐन्थो साइनिन, फ्लैवोनोइड्स और पोटेशियम होता है जो शरीर के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व हैं.

    आस्था /शौर्यपथ /हिंदू धर्म में पूजा-पाठ में कपूर जलाकर आरती करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस घर में सुबह और शाम कपूर जलाया जाता है, उस घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार कम हो जाता है और सकारात्मकता बढ़ जाती है. माना जाता है कि उस घर में सुख, समृद्धि और धन की कभी कमी नहीं होती. ऐसा माना जाता है कि कपूर में इन पांच चीजों को मिलाकर जलाना शुभ होता है.
    कपूर में इन 5 चीजों को मिलाकर जलाएं
    1. लौंग और कपूर - धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूरज ढलने के पहले नियमित रूप से कपूर के साथ लौंग जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और धन की कभी-कमी नहीं होती.
    2. इलायची और कपूर - ऐसी मान्यता है कि घर में सुख समृद्धि का संचार बढ़ाने और आय के साधनों में बढ़ोत्तरी के लिए सुबह शाम कपूर के साथ तीन इलायची नियमित रूप से जलाएं.
    3. गुलाब का फूल और कपूर - किसी भी तरह की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए सुबह के समय कपूर के साथ एक गुलाब का फूल जलाएं. ऐसा प्रतिदिन करने से धन संबंधी समस्याएं खत्म हो सकती हैं, ऐसा माना जाता है.
    4. देसी घी और कपूर - अगर कोई व्यक्ति पितृ दोष से पीड़ित है तो उसे अपने घर के मंदिर में नियमित रूप से देसी घी में कपूर डुबोकर जलाना चाहिए, इस उपाय से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, ऐसी मान्यता है.
    5. चमेली का तेल और कपूर - नियमित रूप से कपूर में कुछ बूंदें चमेली के तेल की डालकर जलाने से हर तरह की आर्थिक तंगी दूर होती है और धन आगमन के संसाधन बढ़ जाते हैं, ऐसी मान्यता है.

    आस्था /शौर्यपथ /कुंडली हमारे जीवन का दर्पण होती हैं। कुंडली में मौजूद ग्रहों का व्यक्ति के जीवन पर काफी गहरा प्रभाव देखने को मिलता है. कुंडली के किस भाव में कौन सा ग्रह है या किन ग्रहों के साथ उसकी युति है, इससे आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी मिलती है. यहां हम बात करेंगे कुंडली के पहले यानी लग्न भाव में अगर अशुभ ग्रह मौजूद हों, तो उसका व्यक्ति पर क्या असर देखने को मिल सकता है.
    कुंडली के प्रथम भाव में शनि - अगर कुंडली के प्रथम भाव में शनि हैं, तो व्यक्ति अंतर्मुखी स्वभाव का हो सकता है. शारीरिक रूप से भी वह थोड़ा कमजोर हो सकता है. इनका बचपन तनावपूर्ण हो सकता है. इतना ही नहीं ऐसे व्यक्ति को काफी परिश्रम के बाद ही सफलता की प्राप्ति होती है.शनि की इस स्थिति के प्रभाव से व्यक्ति एकांतप्रिय हो सकता है. ये काफी हठी और काफी हद तक उदासीन हो सकते हैं. आप अपने विरोधियों पर भारी पडेंगे और किसी भी स्थिति में उनपर विजय प्राप्त कर लेंगे.
    कुंडली के प्रथम भाव में राहु - कुंडली के प्रथम भाव में राहु आपको आगे बढ़ाने में मदद तो करेंगे, लेकिन राहु के प्रभाव से व्यक्ति मादक पदार्थों की ओर आकर्षित होगा और उसे नशे की लत लग सकती है. इस भाव में राहु के प्रभाव से मिश्रित फल की प्राप्ति होती है. ऐसे लोग परोपकारी और धैर्यवान होते हैं. ऐसे लोगों को धन की कमी नहीं होगी, क्योंकि किसी न किसी तरीकों से व्यक्ति को धन की आवक होती रहेगी. ये लोग बड़ों के साथ विनम्र व्यवहार करते हैं. इनका पढ़ाई में ध्यान कम हो सकता है, लेकिन ये व्यावहारिक हो सकते हैं. इतना ही नहीं ये दूसरों से अपना काम करवाने में सक्षम होते हैं. हालांकि, जो वादा करते हैं, उसे पूरा करना चाहते हैं. ये बुद्धिमान और व्यवहार कुशल भी होते हैं.
    कुंडली के प्रथम भाव में मंगल- लाल ग्रह मंगल को उग्र माना जाता है. अगर कुंडली में मंगल हों, तो व्यक्ति ऊर्जा से लबरेज होता है. किसी भी काम में वह काफी तेजी दिखाता है और ऐसे में आपको थोड़ा धैर्य से काम लेने की जरूरत होती है. ऐसे व्यक्ति को दबाव में रहना पसंद नहीं होता है. ये काफी मुखर प्रवृत्ति के होते हैं. प्रथम भाव में मंगल हो तो व्यक्ति को शत्रुओं से परेशानी हो सकती है. बच्चों को लेकर भी परेशानी हो सकती है. ऐसा भी हो सकता है कि जीवनसाथी के साथ आपके संबंध अच्छे न हो. इनकी सेना, चिकित्सा या फिर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में रुचि देखने को मिल सकती है. प्रथम भाव में मंगल के प्रभाव से व्यक्ति का स्वभाव थोड़ा गुस्सैल हो सकता है.
    कुंडली के प्रथम भाव में केतु- कई मामलों में केतु को पहले घर में शुभ नहीं माना जाता है, लेकिन कई बार ये व्यक्ति को बेहद विचारशील और आध्यत्मिक उन्नति वाला भी बना देता है. ऐसे लोग परिश्रम के दम पर धनवान बन सकते हैं. भाई बंधुओं का सहयोग मिलने के कारण सुखी रहते हैं, लेकिन केतु अशुभ हो तो कई बार ये जरूरत से ज्यादा चंचल और डरपोक होते हैं और बुरी संगति में आसानी से फंस सकते हैं.

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