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ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / सर्दियों की शुष्क हवा बालों को रूखा-सूखा बना देती है. बालों का यह रूखापन बालों को खुरदुरा बनाता है जिससे हेयर टेक्सचर पर भी फर्क पड़ता है. ऐसे में बालों पर शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है. शहद को बालों पर सही तरह से लगाया जाए तो बालों की कायापलट हो जाती है. शहद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है. इससे बालों पर चिकनाहट और चमक आती है जिससे बाल देखने में खूबसूरत नजर आने लगते हैं. शहद को बालों पर दूध के साथ मिलाकर लगा सकते हैं. दूध और शहद को साथ लगाने पर बालों को अमीनो एसिड्स, प्रोटीन, विटामिन, आयरन और जिंक भी मिलता है. यहां जानिए मुलायम बाल पाने के लिए किस तरह करें दूध और शहद का इस्तेमाल और कौनसे-कौनसे घरेलू नुस्खे बालों को बनाते हैं मुलायम.
मुलायम बालों के घरेलू उपाय |
शहद और दूध
बालों को मुलायम बनाने में दूध और शहद का कमाल का असर नजर आता है. इन्हें बालों पर लगाने के लिए एक कटोरी में दूध लें और उसमें 2 चम्मच शहद लेकर मिला लें. इस मिश्रण को बालों की जड़ों से लेकर सिरों तक लगाएं और कम से कम 20 से 25 मिनट लगाकर रखने के बाद धोकर छुड़ा लें. बाल मुलायम हो जाएंगे और बालों का टेक्सचर भी बेहतर होगा.
दूध और केला
दूध और केले का हेयर मास्क बनाकर भी बालों पर लगाया जा सकता है. हेयर मास्क बनाने के लिए आधा पका केला लेकर आधे कप दूध के साथ मिक्स करें. इसे बालों पर आधा घंटा लगाकर रखने के बाद सिर धो लें. बाल मुलायम हो जाएंगे और उंगलियों से फिसलने लगेंगे.
दही और शहद
खुरदुरे बालों को मुलायम बनाने में दही और शहद का हेयर मास्क भी असरदार होता है. इस हेयर मास्क को बनाना भी बेहद आसान है. एक कप में दही लें और दही की एक चौथाई मात्रा में शहद मिला लें. इस हेयर मास्क को बालों पर 20 मिनट लगाकर रखने के बाद सिर धो लें. बालों में नमी आती है और बाल मुलायम बनते हैं.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / होंठों की स्किन बाकी शरीर की स्किन से ज्यादा मुलायम और कोमल होती है और इसीलिए इसपर मौसम का असर जल्दी पड़ता है. सर्दियों में खासकर होंठों के कटने-फटने, शुष्क होने और खुरदुरे नजर आने की दिक्कत बढ़ जाती है. होंठ इस तरह फटने लगते हैं तो उन्हें एकबार फिर मुलायम बनाने की कोशिश करनी पड़ती है. यहां ऐसे ही कुछ घरेलू लिप बाम दिए जा रहे हैं जिन्हें आसानी से घर पर बनाया जा सकता है. ये लिप बाम बनने में आसान होने के साथ ही बेहद असरदार भी होते हैं और होंठों को मुलायम बनाने में असर दिखाते हैं. इन लिप बाम से होंठों के ऊपर एक सुरक्षा कवच बन जाता है जो होठों को मॉइश्चराइज्ड रखता है और उन्हें फटने या रूखे होने नहीं देता है. जानिए घर पर कैसे बनाते हैं ये लिप बाम.
मुलायम होंठों के लिए घर पर बने लिप बाम |
फ्रेश शुगर लिप बाम
इस शुगर लिप बाम को लिप स्क्रब की तरह भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है. लिप बाम बनाने के लिए चीनी, शहद और ऑलिव ऑयल की जरूरत होगी. एंटी-बैक्टीरियल और विटामिन बी के गुण वाला यह लिप बाम होंठों को सन डैमेज से बचाने में कारगर है. लिप बाम बनाने के लिए 2 चम्मच चीनी और एक चम्मच शहद को मिलाएं और इसमें आधा चम्मच ऑलिव ऑयल डाल लें. इसे मिक्स करें और बस तैयार है आपका लिप बाम.
घी वाला लिप बाम
प्राकृतिक घी के गुणों वाले इस लिप बाम से होंठ हाइड्रेटेड भी होते हैं और होठों पर चमक भी बनी रहती है. आपको बस इतना करना है कि आधा कप चुकुंदर को घिसें और उसका रस निकालकर अलग रख लें. एक चम्मच घी को चुकुंदर के रस में मिलाएं और फ्रिज में जमाने रख दें. इस लिप बाम को मुलायम होंठ पाने के लिए लगाया जा सकता है.
बीजवैक्स लिप बाम
इस हाइड्रेटिंग लिप बाम को बनाने के लिए एक चम्मच बीजवैक्स को पिघला लें. इसमें एक चम्मच नारियल का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर मिक्स करें. इस लिप बाम में एक से दो कैप्सूल विटामिन ई की भी मिला लें. इस लिप बाम को जब चाहे जब फटे होंठों पर लगा सकते हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का बहुत महत्व होता है. माना जाता है कि इस दिन सकारात्मक और दैवीय शक्तियां पृथ्वी लोक पर आती हैं. मान्यतानुसार, पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है और कहा जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने पर जीवन में सुख-समृद्धि आती है और व्यक्ति को आरोग्य का वरदान मिलता है. पूर्णिमा के दिन पितरों की पूजा भी की जाती है और बहुत से जातक इस दिन पितरों का तर्पण करते हैं. इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करना भी शुभ होता है और सूर्योदय के बाद पेड़ की परिक्रमा की जाती है. मार्गशीर्ष माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को मार्गशीर्ष पूर्णिमा कहा जाता है. इस दिन ऐसी कुछ चीजें हैं जिन्हें घर में लाना बेहद शुभ कहा जाता है.
पूर्णिमा के दिन किन चीजों को लाएं घर
पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 26 दिसंबर, मंगलवार सुबह 5 बजकर 46 मिनट से शुरू होगी और इस दिन का समापन अगले दिन 27 दिसंबर, बुधवार सुबह 6 बजकर 2 मिनट पर हो जाएगा. उदयातिथि और चंद्रोदय को ध्यान में रखते हुए मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा 26 दिसंबर के दिन ही मनाई जाएगी. इसी दिन पूजा-अर्चना की जाएगी और दान, स्नान व व्रत आदि कार्य पूर्ण होंगे.
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर जिन चीजों को घर लाया जा सकता है उनमें चांदी का सिक्का और कौड़ी शामिल हैं. इसके अलावा, घर में इस दिन कुबेर यंत्र लाया जा सकता है और घर में एकाक्षी नारियल रखना भी बेहद शुभ होता है.
ऐसे करें पूर्णिमा की पूजा
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठने की सलाह दी जाती है. इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान किया जाता है अथवा डुबकी लगाई जाती है. माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा-आराधना की जा सकती है. इस दिन भक्त उपवास भी रखते हैं और अन्य सात्विक भोजन का सेवन करते हैं. पूर्णिमा की पूजा सूर्योदय के बाद और चंद्रमा के दर्शन करने के पश्चात ही समाप्त होती है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व होता है. मोक्षदा एकादशी के व्रत को भी बेहद शुभ माना जाता है. मोक्षदा एकादशी के दिन पूजा-पाठ करने पर भक्तों को मान्यतानुसार मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है. मान्यतानुसार, इस दिन कुछ विशेष मंत्रों का जाप करना भी बेहद शुभ होता है जिससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख और शांति का आगमन होता है. जानिए इस साल कब मनाई जाएगी मोक्षदा एकादशी और किन मंत्रों का किया जा सकता है जाप.
मोक्षदा एकादशी के मंत्र |
पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहते हैं. इस साल 22 दिसंबर, शुक्रवार के दिन मोक्षदा एकादशी पड़ रही है. इसी दिन एकादशी का व्रत रखा जाएगा और भगवान विष्णु की पूजा की जाएगी. 22 दिसंबर की सुबह 8 बजकर 16 मिनट से एकादशी की तिथि शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन 23 दिसंबर की सुबह 7 बजकर 11 मिनट पर हो जाएगा. मोक्षदा एकादशी की पूजा में कुछ विशेष मंत्रों का जाप करना भी बेहद शुभ माना जाता है.
पहला मंत्र
श्री विष्णु भगवते वासुदेवाय मंत्र
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय
दूसरा मंत्र
नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
तीसरा मंत्र
शांता कारम भुजङ्ग शयनम पद्म नाभं सुरेशम।
विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम।
लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म।
चौथा मंत्र
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।।
पांचवा मंत्र
दन्ता भये चक्र दरो दधानं,
कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृता ब्जया लिंगितमब्धि पुत्रया,
लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
छठा मंत्र
विष्णु के पंचरूप मंत्र
ॐ अं वासुदेवाय नम:।।
ॐ आं संकर्षणाय नम:।।
ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:।।
ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:।।
ॐ नारायणाय नम:।।
ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / खरमास के महीने में मान्यतानुसार किसी तरह के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, जैसे शादी, गृह प्रवेश और मुंडन आदि की मनाही होती है. इस साल 16 दिसंबर से खरमास का महीना शुरू हुआ है और अगले साल 24 जनवरी तक खरमास रहने वाले हैं. खरमास के दौरान बहुत से कामों को करने से परहेज की सलाह दी जाती है तो वहीं कुछ काम ऐसे भी हैं जिन्हें शुभ माना जाता है. पंचांग के अनुसार, खरमास पूरा एक महीने तक चलचा है. खरमास तब लगते हैं जब सूर्य देव राशि परिवर्तन करके धनु राशि में प्रवेश करते हैं, इसे धनु संक्रांति कहते हैं. धनु संक्रांति से ही खरमास की शुरूआत हो जाती है. इसके बाद मकर संक्राति के साथ ही खरमास का समापन होता है.
खरमास में कौनसे काम नहीं करने चाहिए
माना जाता है कि खरमास के दौरान किसी तरह की डील नहीं करनी चाहिए, खासकर में कहीं निवेश, सोना-चांदी, रत्न और नई जमीन से जुड़े कार्य नहीं करने चाहिए.
इस महीने गौना भी नहीं करना चाहिए. अगर लड़की की शादी हो गई है और वो घर पर है तो उसका गौना खरमास के महीने में करने से परहेज करना चाहिए.
घर खरीदने के लिए भी इस महीने को सही नहीं माना जाता है.
खरमास के महीने में शादी ना करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे दांपत्य जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है.
किसी भिखारी को बुरा-भला कहकर घर से नहीं भगाना चाहिए. साथ ही, किसी का भी बुरा करने से बचें.
इस महीने तामसिक भोजन से परहेज करने की सलाह दी जाती है. लहसुन, शराब, मांस-मछली और प्याज के सेवन से बचने के लिए कहा जाता है.
कुछ काम माने जाते हैं शुभ
खरमास के महीने में पूजा-पाठकरना अच्छा माना जाता है.
सूर्य देव की उपासना के लिए यह महीना अच्छा है. इस महीने सूर्य देव को रोजाना अर्घ्य देना शुभ मानते हैं.
भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा के लिए भी यह महीना शुभ है.
खरमास में बृहस्पति देव की पूजा करने और मंत्रों का जाप करने पर शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है.
इतिहास / पश्चिम के नस्लवादी इतिहासकारों व भारत के वामपंथियों ने हिंदू सभ्यता को हीन ठहराने की कोशिश में एक अजीब सिद्धांत प्रतिपादित किया--
"इतिहास बताता है कि भारत में सदैव बाहर से लोग आये, यहाँ से कोई बाहर कहीं गया ही नहीं"
इस स्थापना को एक उर्दू शेर द्वारा कुछ इस निहायत कमीनगी से वर्णित किया गया-
"काफिले आते गये, हिंदुस्तां बनता गया।"
यह शेर नस्लवादी, वामपंथी और मुस्लिमों की अपवित्र दुरभसंधि का जीताजागता प्रमाण है।
पर वास्तविकता यह है कि भारत का, भारतीय संस्कृति का निर्माण देव जाति व उसके महानायकों यथा महारुद्र शिव, राम व कृष्ण, बुद्ध जैसे परमपूजित दैवी महापुरुषों द्वारा और वर्तमान स्वाध्याय विहीन अधिकांश हिंदुओं के अनजाने महानायकों जैसे सुयज्ञ, भरत, बोधिधर्मन आदि के द्वारा किया जा चुका था।
इन महानायकों द्वारा स्थापित आर्य संस्कृति की मशाल को लेकर साहसी हिंदू युवकों द्वारा संसार के कई स्थानों पर सांस्कृतिक उपनिवेशों की स्थापना की जिनमें से मध्यएशिया स्थित आग्नेय कोण क्षेत्र प्रमुख था।
हिंदुओं ने पिछले हजार वर्ष में क्या-क्या खोया है उसका न तो कोई हिसाब है और न किसी हिंदू को कोई चिंता है।
कभी अपनी दीवार तक सिमटा 'चिन' इतिहास की दुहाई देकर आज पामीर पर दावा ठोक चुका है और उसके दस प्रतिशत हिस्से पर कब्जा भी कर चुका है जबकि मध्यएशिया में प्राचीनकाल से काबिज हिंदुओं को अपने पूर्वजों की खोई विरासत को पाना तो दूर जानने की भी इच्छा नहीं।
वस्तुतः आस्था की दुहाई देकर भारत के पौराणिक इतिहास को चमत्कारिक दैवीय रूप देकर हमने स्वयं अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी जबकि इतिहास को हथियार बनाकर हम इन क्षेत्रों की जनजातियों को उनके हिंदू अतीत का परिचय देकर उनकी घर वापसी करवा सकते थे।
अगर मक्का की गलियों में तेरह लोगों का झुंड अरबी संस्कृति को मध्य एशिया तक फैला सकता है तो 'जातिस्मरण', उन्हें वापस भी ला सकता है।
मध्यएशिया व अफगानिस्तान स्थित-
'पिशाई' को ऋग्वैदिक 'पिशाच' जाति, 'पठानों' को ऋग्वैदिक 'पक्थ' जाति,
'अफ्रीदियों' को ऋग्वैदिक 'आप्रीत' जाति,
की पहचान को अपनी शोधपुस्तिका #इंदु_से_सिंधु में विस्तृत रूप से रखने पर विरोध मुस्लिमों ने नहीं बल्कि जातिवादी गुंडों ने किया जो नाम भर से हिंदू थे जबकि मेरा एक छोटा सा प्रयास था यह बताने का कि हिंदू जाति का सांस्कृतिक इतिहास व इसका विस्तार कितना अधिक था।
उसी क्रम में मध्य एशिया में बार-बार एक नाम आता है और वह है- 'तोखारिस्तान'
तोखारिस्तान, जिसे संस्कृत ग्रंथों में कहा गया--'तुषार भूमि या तुषारस्थान' अर्थात बर्फ का क्षेत्र।
इस क्षेत्र में बसने वाले लोगों को कहा गया --'तुषारी' या 'तुखारी'।
तुखारी! प्राचीन काल में मध्य एशिया में स्थित तारिम द्रोणी में बसने वाली एक ऐसी जाति के लोग जो हिन्द-यूरोपीय भाषाएँ बोलने वाले सब से प्राचीनतम लोग थे और जिनका उल्लेख संस्कृत ग्रंथों में बहुत हुआ है।
अथर्ववेद में इन्हें शक और बाह्लीक जातियों से सम्बंधित बताया गया है। इन्हें कहीं-कहीं कंबोज भी कहा गया है।
चीनी स्रोतों के अनुसार इनका 'युइची' अर्थात कुषाणों की पितृजाति से गहरा सम्बन्ध था।
लेकिन दृष्टव्य यह है कि तारिम बेसिन के ये इंडो-यूरोपियन लोग खुद को 'अग्नि', 'कुसी' और 'क्रोरान' बुलाते थे और 'कारा' शहर का प्राचीन नाम 'अग्नि' था, जिसे संस्कृत में 'अग्निदेश' कहा गया। यहाँ यह भी दृष्टव्य है कि हिंदू ग्रंथों की दस दिशाओं में एक दिशा आग्नेय कोण भी है।
उत्तरी तारिम के मरूद्यानों में कृषक समुदाय सर्वप्रथम लगभग 2,000 ई.पू. में प्रकट हुए और दूसरी शताब्दी ई.पू. तक, ये बस्तियां शहर-राज्यों में विकसित हो गई थीं, जो उत्तर में खानाबदोश लोगों और पूर्व में चीनी साम्राज्यों द्वारा ढकी हुई थीं।
ये शहर व्यापारियों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव व मंडी के रूप में था।
तोखारियों की 'उत्तरी जियोंग्नू' अर्थात हूणों से बहुत झड़पें हुई, जिसके बाद इन्होनें तारिम द्रोणी का इलाक़ा छोड़ दिया।
वर्तमान अफगानिस्तान के 'तखार प्रांत' का नाम इसी जाति पर पड़ा है।
तोखारिस्तान के दो केन्द्र हिंदू संस्कृति के बड़े केंद्र बनकर उभरे जिनमें एक तो मध्यएशिया में एक बड़े साम्राज्य के रूप में भी विकसित हुआ जिनके विषय में अगले अंक में।
यह आलेखमाला यों तो जेएनयू में हुए मध्येशियाई राजदूतों व इतिहासकारों के सम्मेलन में सबमिट किये गए मेरे रिसर्चपेपर व उद्बोधन पर आधारित है पर यह मूल रूप से 'अनंसंग हीरोज-इंदु से सिंधु तक' में वर्णित अध्यायों का विस्तार है जिसमें भारत की आर्य हिंदू संस्कृति के विकास व विकास को अत्यंत सरल व सुरुचिपूर्ण भाषा में संपूर्ण प्रमाणों सहित वर्णित किया गया है।(फेसबुक वाल से )
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /क्या आप जानते हैं कि 10 मिनट तक फेस की मसाज करने से आपके चेहरे की झुर्रियां दूर हो सकती हैं और स्किन टाइट भी हो सकती है? चेहरे की मालिश करने से स्किन की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन तेजी से पहुंचती है और ब्लड सर्कुलेशन को भी बढ़ावा मिलने में मदद मिलती है. ये झुर्रियों और फाइन लाइन्स को कम करने में मदद कर सकती हैं. इतना ही नहीं, मालिश करते समय स्किन पर हल्का सा दबाव डालने से स्किन केयर प्रोडक्ट्स को अच्छे से एब्सॉर्ब करने और बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिल सकती है.
इसलिए यहां हमने उन स्टेप्स की लिस्ट तैयार की है जिन्हें करके आप अपनी स्किन को रिंकल फ्री और स्किन को टाइट घर पर ही कर सकते हैं.
सबसे पहले शुरूआत माथे से करेंगे. इसके लिए अपने पोर को अपने माथे पर रखते हुए, उन्हें ऊपर और फिर बगल में, अपनी हेयरलाइन की ओर ले जाएँ. इसे 30 सेकंड तक ऐसे ही करें.
फिर आंखों के आस पास आएं और अपनी उंगलियों के सिरों को अपनी कनपटी पर रखें. इसके बाद, अपनी उंगलियों को अपनी आंखों के नीचे, नाक की डायरेक्शन में घुमाना शुरू करें. इस पैटर्न को करते समय लगभग 40 सेकंड के लिए एक ही डायरेक्शन में करें.
इसके बाद, अपने पोर को अपने गालों के पास ले जाएं, अपनी नाक के पुल के पास, और हल्के से उन्हें अपने गालों से नीचे अपने कानों की तरफ स्वाइप करें. इस पूरी प्रोसेस को पूरा करने में लगभग 30 सेकंड का समय लगता है.
चौथा स्टेप है अपने होठों के पास के एरिया की मालिश करना. इसके लिए अपनी उंगलियों को अपने होठों के आस-पास के एरिया में रखना है, बीच वाली उंगली को निचले होंठ के नीचे और तर्जनी को ऊपरी होंठ के ऊपर रखें, फिर धीरे-धीरे उंगलियों को अपने कानों की डायरेक्शन में दबाए और खींचना शुरू करें. इस प्रोसेस को चालीस सेकंड तक करें.
उसके बाद, अपनी ठुड्डी के नीचे के हिस्से पर अपने पोर रखकर मालिश करें और उन्हें धीरे-धीरे ऊपर की ओर, अपने जबड़े की लाइन तक, अपने कानों की ओर 50 सेकंड के लिए खींचें.
दूसरे लास्ट स्टेप पर आते हुए, धीरे से अपनी गर्दन की मालिश करें, अपने पोर को अपनी ठोड़ी के ठीक नीचे रखें, और धीरे-धीरे उन्हें अपने कॉलरबोन की ओर ले जाना शुरू करें. इस प्रोसेस को करने के लिए, पोर को जबड़े की लाइन के साथ ले जाकर कॉलरबोन तक लाएं. इस प्रोसेस को 30 सेकंड तक करें.
और आखिर में अपने पोरों से अपने पूरे चेहरे की मालिश करें. उन्हें उठाते हुए, उन्हें हेयरलाइन के साथ ऊपर की ओर ले जाएं. इस लास्ट स्टेप को दो मिनट के लिए करें.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /स्किन केयर में अक्सर ही अलग-अलग तरह की चीजें शामिल की जाती हैं जो त्वचा को निखरा हुआ और चमकदार बनाने में मदद करती हैं. यहां भी ऐसे ही एक तेल का जिक्र किया जा रहा है जिसे चेहरे पर लगाने से चेहरे पर बेदाग निखार नजर आता है. यह तेल है नारियल का तेल. सर्दियों में अक्सर ही त्वचा ड्राई हो जाती है और बेजान दिखती है. ऐसे में फैटी एसिड्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर नारियल के तेल का इस्तेमाल चेहरे को नमी देने में मदद करता है. यहां जानिए इस तेल को चेहरे पर किस तरह लगाएं कि त्वचा कई गुना बेहतर दिखने लगे.
निखरी त्वचा के लिए नारियल का तेल |
चेहरे पर रात के समय नारियल का तेल लगाने पर यह स्किन पर मॉइश्चर लॉक कर देता है और एक बैरियर की तरह काम करता है. इसके अलावा, नारियल के तेल से मालिश करके सोने पर त्वचा पर ब्लड फ्लो बेहतर होता है. नारियल के तेल की कुछ बूंदे हथेली पर लेकर इसे रातभर चेहरे पर लगाकर रखें और अगली सुबह उठकर चेहरा धो लें. हालांकि, इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि अगर आपकी स्किन जरूरत से ज्यादा ऑयली है तो आपको नारियल का तेल रातभर लगाए रखने से परहेज करना चाहिए. जैसा कि जाहिर है कि नारियल का तेल बैरियर की तरह काम करता है, ऐसे में चेहरे पर अगर लंबे समय तक नारियल का तेल लगाकर रखा जाएगा तो पहले से ऑयली स्किन और ज्यादा ऑयली हो सकती है. वहीं, ऑयली स्किन पर नारियल का तेल कमाल का साबित होता है.
ये तेल भी आते हैं काम
चेहरे पर नारियल के तेल के अलावा और भी कुछ तेल हैं जिन्हें रात के समय लगाकर सोया जा सकता है. बादाम का तेल भी स्किन के लिए अच्छा है. इसमें मौजूद विटामिन ई के गुण त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं.
ऑलिव ऑयल को भी चेहरे पर लगाया जा सकता है. इसकी भी कुछ बूंदे ही चेहरे पर लगाई जाती हैं और रातभर लगाकर रखने के बाद चेहरा धोया जाता है.
चेहरे के लिए जोजोबा ऑयल भी अच्छा है. इसकी भी 2 से 3 बूंदे त्वचा पर लगाई जा सकती हैं.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /अगर आपका घर या आंगन सुंदर पौधों से हरा भरा रहे तो इससे घर की खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं. इतना ही नहीं घर में पेड़ पौधे लगाने से पॉजिटिव एनर्जी भी घर में आती है, लेकिन जब ठंड पड़ती है तो मौसम में बदलाव के कारण यह पेड़ पौधे मुरझा जाते हैं और कई बार मुरझाकर मर जाते हैं. ऐसे में अक्सर लोगों का सवाल होता है कि सर्दी के दिनों में हमें कैसे पेड़ पौधे घर में लगाने चाहिए? . तो हम आपको बताते हैं 10 इनडोर प्लांट्स जो सर्दियों में घर में आसानी से पनप सकते हैं.
कुछ खास इंडोर प्लांट्स |
स्पाइडर प्लांट
सर्दियों के दौरान घर के अंदर या आंगन में स्पाइडर प्लांट लगाना एक बेस्ट ऑप्शन हो सकता है, क्योंकि यह किसी भी मौसम में आसानी से पनप सकता है और घर को एक एसथेटिक लुक देता है.
बोस्टन फर्न
बोस्टन फर्न का पौधा बहुत खूबसूरत और ट्रॉपिकल लुक घर को दे सकता है. ये आसानी से सर्दी के मौसम में भी पनप जाता है.
आर्किड
आर्किड एक विदेशी पौधा है, जो सर्द वातावरण में आसानी से बढ़ता है. इसे आप घर के अंदर लगा सकते है. इसके फूल बेहद ही खूबसूरत होते हैं.
जेड प्लांट
लकी प्लांट के नाम से मशहूर जेड प्लांट भी आसानी से सर्दियों के मौसम में पनप सकता है, इसे आप घर के अंदर या बाहर दोनों जगह लगा सकते हैं.
पीस लिली
अगर आप अपने घर में सोंधी खुशबू चाहते हैं और सुंदर फूलों से घर आंगन को सुसर्जित करना चाहते हैं, तो आप सर्दियों के दिनों में पीस लिली घर में लगा सकते हैं.
फ्लेमिंग केटी
छोटे-छोटे नारंगी रंग के फ्लावर्स घर के आंगन में बहुत खूबसूरत लगते हैं और घर को एक पॉजिटिव एनर्जी देते हैं. ऐसे में आप सर्दियों के दिनों में फ्लेमिंग केटी पौधा घर में लगा सकते हैं.
चाइनीस एवरग्रीन प्लांट
बड़े-बड़े शेडेड लाइट और डार्क ग्रीन की पत्तियों वाले चाइनीस एवरग्रीन प्लांट्स किसी भी मौसम में आसानी से पनप जाते हैं, इसे आप घर के अंदर और बाहर दोनों जगह लगा सकते हैं.
पेटूनिया
अगर आप अपने घर में रंग-बिरंगे फूल लगाना चाहते हैं, तो आप पेटूनिया प्लांट घर में लगा सकते हैं. इसके फूल सफेद, नीले और गुलाबी रंग के होते हैं और बहुत सुंदर लगते हैं.
बैंबू प्लांट
बैंबू प्लांट एक एवरग्रीन पौधा है, जिसे आप कांच की बर्नी से लेकर गमले में आसानी से लगा सकते हैं. सर्दियों के दिनों में ये आसानी से पनप जाते हैं और उन्हें बहुत कम पानी की जरूरत पड़ती है.
लैंटाना
लैंटाना एक इंडियन प्लांट है, जो भारत के वातावरण के अनुकूल होता है. यह किसी भी सीजन में घर के आंगन में आसानी से पनप जाता है और उसके फूल बहुत ही खूबसूरत होते हैं.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / ठंड अपने चरम पर पहुंच चुका है. ऐसे में बड़े सर लेकर बच्चे, सभी को नहाने में मौत आती हैं. सभी लोग पानी वाले किसी भी काम को करने से बचते हैं. लेकिन कुछ लोग ऑफिस के चलते शाम में घर वापस आने पर नहाते हैं और अपने छोटे बच्चे को भी उसी समय नहलाते हैं. गर्मी में तो ये ठीक है लेकिन ठंड का मौसम में ऐसा करना गलत है. ठंड में अगर बॉडी पर अधिक ठंडा पानी डाला गया तो इससे बॉडी को बहुत नुक्सान हो सकता है. बल्कि डॉक्टर सीधे सिर पर पानी डालने से मना करते हैं क्योंकि इससे ब्रेन हेमरेज होने का खतरा रहता है. वासे तो बच्चों को रात में नहलाना ज्यादा रिस्की हो सकता हैं. लेकिन फिर भी अगर आप ऐसा करना चाहते हैं तो आइए आपको बताते हैं कि आप अपने बच्चे को रात में नहलाते समय किन बातों का ध्यान रखें.
रात को अपने बच्चे को नहलाते समय ध्यान में रखें ये बातें |
भूलकर भी ना यूज करें ठंडा पानी
ठंड के मौसम में दिन के समय में भी ठंडा पानी बर्दास्त के बाहर होता है. ऐसे में अगर आप अपने बच्चे को रात में ठंडे पानी से नहलाएंगे तो ये उनकी नाजूक स्किन के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता हैं. ऐसा करने से उनकी त्वचा लाल हो सकती हैं और इंफेक्शन होने का भी डर रहता है. अपने बच्चे को हमेशा हल्के गुनगुने पानी से नहलाएं.
सीधे रजाई में लेकर ना जाएं
अगर आपकी भी आदत हैं अपने बच्चे को रात में नहलाकर उसे सिधे रजाई में लेकर घूस जाने की तो इसे आज और अभी से छोड़ दें. ऐसा करने से उसके बॉडी का तापमान अचानक से बदलता हैं जिससे वायरल बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही इससे बच्चे को सांस से जुड़ी समस्या हो सकती हैं.
सीधे पानी में ना डालें
कई लोग अपने बच्चे को नहलाने के लिए सीधे बाथ टब में डाल देते हैं. ऐसा करना बंद कर दें. छोटे बच्चों को नहलाने के लिए पहले उनकी बॉडी को टावल भीगोकर अच्छी तरह से पोछें. फिर उन्हें हल्के गर्म पानी से वाइप करें. बड़ों की तरह उन्हें मग से या तेज शावर से नहलाने से बचे.
नहलाने के बाद दें कुछ टाइम
बच्चे को नहलाने के तुरंत बाद कई लोग उसे ठंड ना लगे सोचकर जल्दी से कपड़े पहना देते हैं. ऐसा करना गलत हैं. अगर आप अपने बच्चे को ठंड में रात में नहला रहे हैं तो एक साफ और सॉफ्ट तौलिया तैयार रखें. बच्चे को नहलाने के तुरंत बाद इस तौलिया से ढक सकते हैं.
बॉडी को करें मॉइस्चराइज
बच्चे को ठंड में रात में नहलाने के तुरंत बाद उसके पूरे शरीर को अच्छी तरह से मॉइस्चराइज करें. ठंड के मौसम में रात के समय नहलाने से उनकी बॉडी ड्राई और सुस्ख हो सकती हैं. इसलिए बॉडी को सॉफ्ट और हाइड्रेटेड रखने के लिए तुरंत बाद मॉइस्चराइज करके ही कपड़े पहनाएं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /ठंड शुरू होने के साथ, माता-पिता अपने बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में चिंतित होने लगते हैं. क्योंकि सर्दी के मौसम में उनकी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है. जिससे आम बीमारियां हो जाती हैं. चूंकि बच्चे अक्सर खाने का विरोध करते हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो जाता है कि उनकी इम्यूनिटी मजबूत हो. मौसमी बदलावों के लिए डाइट में बदलाव जरूरी है, और सर्दियों के मौस में आने वाले फल, सब्जियां और नट्स को शामिल कर बच्चों की इम्यूनिटी तो बढ़ाने में मदद मिल सकती है. पोषण सलाहकार रूपाली दत्ता मौसमी सब्जियों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए सर्दियों के दौरान सामान्य तापमान बनाए रखने में शरीर की क्षमता पर जोर देती हैं. पालक, मेथी, चुकंदर और गाजर न केवल इम्युनिटी बूस्टर हैं बल्कि आवश्यक पोषक तत्वों के रिच भी हैं.
गाजर का रस-
गाजर एक विंटर स्टेपल है, और इसका जूस गुडनेस प्राप्त करने का एक शानदार तरीका है. बीटा कैरोटीन, विटामिन ए, बी6 और सी, पोटैशियम और फॉस्फोरस से भरपूर गाजर का जूस एक नेचुरल इम्यूनिटी बूस्टर है. आप इसे सलाद, या सैंडविच में मिला सकते हैं और अपने बच्चे को इसका आनंद लेने दे सकते हैं.
संतरे का रस-
संतरे सिर्फ स्वादिष्ट नहीं होते, ये पोषक तत्वों का पावरहाउस भी हैं. विटामिन ए, विटामिन बी, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर संतरे का रस आपके बच्चे की इम्यूनिटी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है. इसे प्योर संतरे के रस के साथ लिक्विड रखें या थोड़ा सा चुकंदर या गाजर का रस मिलाकर क्रिएटिव बनें.
केसर दूध-
केसर का दूध फैंसी लग सकता है, लेकिन इसे बनाना आसान है और यह कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है. विटामिन ए और के, पोटैशियम, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-वायरल गुणों के साथ, केसर इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद कर सकता है. यह एक कम्फर्टेबल ड्रिंक है जिसका आनंद आपका बच्चा उठा सकता है, खासकर ठंड के महीनों में.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / जीरा एक ऐसा मसाला है जिसे तड़का लगाने से लेकर सेहत तक के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जीरा को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. जीरे को वैज्ञानिक भाषा में सीमिनियम साइमिनियम कहा जाता है. जीरा खाने को सुगंधित और एक अलग टेस्ट देने का काम कर सकता है. जीरे को आप तड़के के अलावा रायता, सलाद और छाछ में भी इस्तेमाल कर सकते है. जीरे को एक कारगर औषधि भी माना जाता है. जीरे की तासीर गर्म होती है. जिसे आप सर्दियों के मौसम में इस्तेमाल कर सकते हैं. जीरे में फाइबर आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैंगनीज, सेलेनियम, जिंक, विटामिन्स और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. जो शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मदद कर सकते हैं. जीरा एक बेहतरीन एंटी-ऑक्सीडेंट है. तो चलिए जानते हैं जीरे से होने वाले फायदे.
जीरा से मिलने वाले फायदे-
1. मुंह की बदबू-
मुंह की बदबू को दूर करने के लिए आप जीरे का इस्तेमाल कर सकते हैं. सबसे पहले आप जीरा और सेंधा नमक को महीन पीस लें. फिर इस पाउडर से दांतों में मसाज करें. ये दांतों के दर्द और मुंह की बदबू से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकता है. अगर दांतों में दर्द है तो आप इसे दिन में 2 बार कर सकते हैं.
2. आयरन-
जीरे को आयरन का अच्छा सोर्स माना जाता है. अगर आप आयरन की कमी महसूस करते हैं तो आप जीरे को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.
3. छींक आने पर-
सर्दियों के मौसम में सर्दी-जुकाम होना एक आम समस्या में से एक हैं. सर्दी की वजह से छींक आना शुरू हो जाती है. अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही होता है तो आप जीरे का ऐसे इस्तेमाल कर सकते हैं. जीरे को अच्छी तरह से भून लें. और इसकी एक पोटली बनाकर समय-समय पर सूंघते रहें. ऐसा करने से छींक आना बंद हो जाएगी और सर्दी में भी आराम मिल सकता है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हर साल 24 एकादशी मनाई जाती हैं जिनमें से एक है मोक्षदा एकादशी. नाम के ही अनुसार, माना जाता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने पर जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती है. पंचांग के अनुसार, मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाई जाती है और इसी दिन एकादशी का व्रत रखा जाता है. मान्यतानुसार एकादशी का व्रत रखने वाले भक्तों को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही पूर्वजों की आत्मा को शांति भी मिलती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, मोक्षदा एकादशी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. यहां जानिए किस दिन मोक्षदा एकादशी है और इस दिन किन चीजों को घर लाना माना जाता है बेहद शुभ.
कब है मोक्षदा एकादशी |
पंचांग के अनुसार, इस साल 22 दिसंबर के दिन मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी तिथि 22 दिसंबर की सुबह 8 बदकर 16 मिनट से शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन 23 दिसंबर की सुबह 7 बजकर 11 मिनट पर हो जाएगी. इस चलते 22 दिसंबर के दिन मनाई जा रही है. एकादशी के अगले 23 दिसंबर दोपहर 1 बदकर 22 मिनट से 3 बजकर 25 मिनट के बीच एकादशी के व्रक का पार किया जा सकता है.
वैष्णव समाज के लोग मान्यतानुसार 23 दिसंबर के दिन मोक्षदा एकादशी का व्रत रखेंगे और 24 दिसंबर की सुबह 7 बजकर 10 मिनट से सुबह 9 बजकर 14 मिनट के बीच व्रत का पारण करेंगे.
इस दिन कुछ चीजें खरीदना होता है शुभ
मोक्षदा एकादशी के दिन कामधेनु गाय घर लाना माना जाता है शुभ. कहते हैं इस गाय की मूर्ति की पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि आती है.
सफेद हाथी की प्रतिमा भी घर लाई जा सकती है. कहते हैं सफेद हाथी भगवान विष्णु का प्रिय होता है.
तुलसी का पौधा घर लाना भी शुभ माना जाता है. कहते हैं तुलसी मां लक्ष्मी का स्वरूप हैं. इसीलिए मोक्षदा एकादशी पर घर में तुलसी लाई जा सकती है.
इस दिन घर में मछली की प्रतिमा भी लाई जा सकती है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हर महीने के चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश के लिए समर्पित किया जाता है. गणेश चतुर्थी के दिन व्रत करने से भगवान गणेश की कृपा होती हैं और जीवन धन-धान्य से भर जाता है. ऐसे में इस महीने की गणेश चतुर्थी व्रत बहुत खास हैं. इस दिन धनु संक्रांति भी है. साथ ही वरद गणेश चतुर्थी व्रत सर्वार्थ सिद्धि योग में पड़ रहा है. आइए जानते हैं इसकी तिथि, पूजा करने का सही समय, शुभ मुहूर्त और व्रत खोलने का सही समय.
वरद चतुर्थी 2023: तिथि और शुभ मुहूर्त |
साल का अंतिम गणेश चतुर्थी व्रत वरद चतुर्थी होता है. इस साल ये व्रत 16 दिसंबर 2023, शनिवार को है. इस दिन को बहुत खास माना जा रहा है क्योंकि इसी दिन धनु संक्रांति हैं और खरमास महीने की शुरूआत हो रही हैं. हर साल वरद चतुर्थी का व्रत मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को होता है. इस बार चतुर्थी तिथि की शुरूआत 15 दिसंबर 2023 को रात 10:30 बजे से हो रही हैं जो 16 दिसंबर 2023 को रात 08:00 बजे खत्म होगी.
गणेश पूजा का शुभ समय - 16 दिसंबर 2023 को सुबह 11:14 से 01:18 बजे तक
चंद्र दर्शन का वर्जित समय - 16 दिसंबर 2023 को सुबह 10:18 से 08:59 बजे तक
वरद चतुर्थी 2023: शुभ योग का मुहूर्त |
हिन्दू मान्यताओं और पंचाग के अनुसार इस साल वरद चतुर्थी के व्रत पर खास योग बन रहा हैं. सर्वार्थ सिद्धि योग से इस दिन किसी भी काम को करना शुभ हो सकता हैं.
वरद चतुर्थी सर्वार्थ सिद्धि योग शुरूआत - 16 दिसंबर 2023 को सुबह 06:24 बजे
वरद चतुर्थी सर्वार्थ सिद्धि योग समाप्त - 17 दिसंबर 2023 को सुबह 04:37 बजे पर
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
