August 07, 2026
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        आस्था /शौर्यपथ / अगर आप भी मन की अशांति से जूझ रहे हैं और जीवन में शांति का अनुभव करना चाहते हैं तो बहुत जरूरी है मन को शांत रखना. ऐसे में सबसे पहले जहन में यही सवाल आता है कि आखिर दिमाग को शांत कैसे किया जाए. तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं बुद्ध कि वो विचार  जो आपको अपना मन शांत रखने में मदद कर सकते हैं. जीवन में अगर आपने इन विचारों को आत्मसात कर लिया तो जिंदगी जीने का नजरिया बदल जाएगा और मन को शांत करने में मदद मिलेगी.
     मन शांत रखने के गौतम बुद्ध के विचार
        प्रेम ही वो जरिया है जिससे घृणा को खत्म किया जा सकता है.घृणा से घृणा खत्म नहीं हो सकती.
         बीती हुई बात में उलझना नहीं चाहिए ना ही भविष्य को लेकर परेशान रहना चाहिए.
         जो कुछ भी आपके पास है उसे बड़ा चढ़ा कर दिखाना गलत है. दिखावा नहीं करना चाहिए और ना ही किसी से ईर्ष्या होनी चाहिए.
        अच्छी किताबें पढ़ने और प्रवचन सुनने का फायदा तब तक नहीं है जब तक आप उसे आत्मसात नहीं करते.
         क्रोध कोयले की तरह होता है. इससे आपका विवेक नष्ट हो जाता है और सोचने समझने की शक्ति खत्म होती है.
         बहुत अधिक खुशी आपके पास हो ये सोचने की बजाय बहुत अधिक खुशी आप दे पाएं इस बारे में सोचना
         सूर्य चंद्रमा और सत्य ये वो तीन चीजें हैं, जिन्हें ज्यादा देर तक छुपा कर नहीं रखा जा सकता है.
         क्रोध में हजारों शब्द गलत बोलने से अच्छा है चुप रहना, क्योंकि मौन जीवन में शांति लाता है.

      सेहत टिप्स /शौर्यपथ /हर भारतीय थाली के लिए सबसे जरूरी चीज चटनी होती है. जगह के हिसाब से चटनी का बेस बदलता जाता है लेकिन चटनी होती जरूर है. इससे खाने का स्‍वाद दोगुना हो जाता है. कई लोग इस साइड डिश को मेन डिश की तरह खाते हैं. लेकिन स्वाद बढ़ाने वाली चटनी आपके हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकती हैं. जी हां, अलसी के बीज  को पीसकर बनाई गई चटनी आपके लिए काफी ज्यादा फायदेमंद हो सकती है. आइए आपको बताते हैं इसके फायदे के बारे में और इसे कैसे बनाया जा सकता है.
    अलसी के बीज से बनी चटनी
    आपने टमाटर की चटनी, धनिया की चटनी, पुदीने की चटनी या दुसरी किसी भी चीज से बनी चटनी एक बार जरूर खाई होगी. लेकिन आपने शाहद ही अलसी के बीज से बनी चटनी  के बारे में सुना होगा. इस चटनी को खाने से आपको बहुत सारे फायदे हो सकते हैं. ये हेल्थ के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं. अलसी के बीज में भारी मात्रा में हेल्दी फैट, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और विटामिन्स पाए जाते हैं. ये आपको कई सारे रोगों से दूर रख सकती हैं. आइए जानते हैं इस चटनी को बनाने की विधि.
    ऐसे बनाएं अलसी के बीज की हेल्दी चटनी
    जरूरी सामग्री
        भूने हुए अलसी के बीज - 150 ग्राम
        सफेद तिल - 100 ग्राम
        बादाम - 50 ग्राम
        लहसून की कलियां - 10 से 20
        लाल मिर्च - 4 से 5
        नमक - 1 चम्मच
        जीरा - 1 चम्मच
        सबसे पहले सभी चीजों को एक साथ तवे पर भून लें और ब्राउन कर लें.
        इसके बाद इस पाउडर में अंदाज से पानी मिलाकर मिक्सी में डालकर पीस लें और किसी एयरटाइट कंटेनर में रख दें.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /मान्यतानुसार जब सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास शुरू हो जाते हैं. खरमास एक महीने लगता है और यह वह समय है जिसमें बहुत से धार्मिक कार्य नहीं किए जाते हैं. इस साल खरमास 16 दिसंबर, शनिवार से शुरू हो रहे हैं और इनका समापन 15 जनवरी, 2024 में होगा. खरमास के दिनों में सूर्य देव और देवगुरू बृहस्पति की विशेष पूजा की जाती है. खरमास के दौरान ऐसे बहुत से काम हैं जिन्हें करना बेहद शुभ माना जाता है. मान्यतानुसार इन कामों को करने पर सूर्य देव और बृहस्पति देव  प्रसन्न हो सकते हैं.
    खरमास में कुछ काम माने जाते हैं बेहद शुभ
        खरमास के दिनों में सूर्य देव की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है. इस दौरान प्रतिदिन स्नान पश्चात सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. सूर्य को लाल फूल और लाल चंदन से अर्घ्य देना शुभ होता है. इससे कुंडली में सूर्य की स्थिति भी मजबूत हो सकती है.
        खरमास के दिनों में सूर्य के एकाक्षरी बीज मंत्र का जाप करना शुभ होता है. बीज मंत्र ॐ घृणि: सूर्याय नम: का जाप लाल चंदन की माला से किया जा सकता है.
        रविवार के दिन खासतौर से सूर्य देव की पूजा की जाती है. इसीलिए खरमास के दौरान हर रविवार व्रत रखना बेहद शुभ होता है. रविवार के दिन गुड़, गेंहू, लाल या नारंगी कपडे़ का दान भी किया जा सकता है.
        सूर्य चालीसा  का पाठ किया जा सकता है. इसे बेहद कल्याणकारी माना जाता है.
        खरमास में देवगुरू बृहस्पति की पूजा करना भी बेहद शुभ होता है. बृहस्पति देव की पूजा करने पर माना जाता है कि जीवन में उन्नति आती है. पूजा के लिए गुरुवार के दिन व्रत रखा जा सकता है.
        खरमास में बृहस्पति चालीसा का पाठ किया जा सकता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा भी की जा सकती है.
        बृहस्पति पूजा में ॐ ब्रं बृहस्पति नमः मंत्र का जाप किया जा सकता है.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / पंचांग के अनुसार, हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है. एक प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि पर कृष्ण पक्ष में रखा जाता है और दूसरा प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष में पड़ता है. प्रदोष व्रत की विशेष धार्मिक मान्यता भी है. माना जाता है कि प्रदोष व्रत रखने पर भगवान भोलेनाथ  प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों पर अपनी कृपादृष्टि बनाए रखते हैं. इस दिन भोलेनाथ के साथ ही मां पार्वती की पूजा भी की जाती है. कहते हैं प्रदोष व्रत रखने पर जातक के परिवार में खुशियां आती है, रोग दूर होते हैं, परिवार के सदस्यों की दीर्घायु होती है और कष्टों से मुक्ति मिलती है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष महीना लग चुका है. ऐसे में मार्गशीर्ष महीने  का प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और किस मुहूर्त में प्रदोष व्रत की पूजा की जाएगी जानिए यहां.
     प्रदोष व्रत की पूजा |
          मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस महीने पंचांग के अनुसार 10 दिसंबर, रविवार की सुबह 7 बजकर 13 मिनट पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन 11 दिसंबर, सोमवार सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर हो जाएगा. इस चलते उदया तिथि के अनुसार मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत 10 दिसंबर, रविवार के दिन रखा जाएगा.
    प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल  में की जाती है. प्रदोष काल में पूजा का शुभ मुहूर्त 10 दिसंबर, रविवार शाम 5 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 8 मिनट तक रहेगा.
    पूजा और उपाय
        प्रदोष व्रत के दिन पूजा में शिवलिंग पर जलाभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है. कहते हैं थोड़ा जल बचाकर अपने घर लाना चाहिए और व्रत का पारण इस जल को ग्रहण करके करना चाहिए.
        वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए मां पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करनी चाहिए.
        इस दिन जरूरतमंदों को वस्त्र दान में देना भी शुभ माना जाता है.
        शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करना भी शुभ होता है.
        प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले जल को घर के मंदिर में भी रखा जा सकता है.

       आस्था /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में तुलसी  के पौधे को बहुत ही पवित्र माना गया है. हर घर में तुलसी माता की पूजा की जाती है. शास्त्रों में कहा गया है कि घर में तुलसी पूजा करने पर शुभ फल प्राप्त होते हैं और घर परिवार में फैली नकारात्मकता दूर हो जाती है. ऐसे में हिंदू घरों में तुलसी का पौधा अक्सर आंगन में देखा जाता है. लेकिन तुलसी के पौधे की पूजा के कुछ खास नियम है. यूं तो हर माह में     तुलसी पूजा करनी चाहिए लेकिन अक्सर लोग खरमास के दौरान तुलसी पूजा  से कतराने लगते हैं. कहा जाता है कि खरमासमें मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, इसलिए इस माह में तुलसी की पूजा भी नहीं करनी चाहिए. चलिए जानते हैं कि खरमास में तुलसी की पूजा करनी चाहिए या नहीं और खरमास में तुलसी की पूजा करने पर क्या होता है.
    खरमास में तुलसी पूजन करें या नहीं  
     लोगों के बीच मान्यता है कि खरमास में चूंकि मांगलिक और शुभ काम रोक दिए जाते हैं इसलिए तुलसी पूजा नहीं करनी चाहिए. लेकिन शास्त्रों में कहा गया है कि खरमास में मांगलिक कार्यक्रम रुकते हैं और धार्मिक कार्यक्रम किए जाते हैं. ऐसे में जब खरमास में ग्रह अपना अशुभ प्रभाव डालते हैं. ज्यादा से ज्यादा धार्मिक कार्यक्रम करके इनका अशुभ प्रभाव कम करने की कोशिश करनी चाहिए. इसलिए खरमास में तुलसी पूजन जरूर करना चाहिए. इसे धार्मिक कार्य की तरह देखना चाहिए और घर-परिवार में ग्रहों का अशुभ प्रभाव और नकारात्मकता दूर करने के लिए पूरे माह तुलसी का पूजन करना चाहिए.
    खरमास में तुलसी पूजन का फल और नियम
       शास्त्रों में कहा गया है कि खरमास में तुलसी का पूजन करने पर भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और जातक के घर में खुशहाली आती है. तुलसी पूजन से ग्रहों का अशुभ प्रभाव कम होता है और घर में सकारात्मकता आती है. खरमास में रोज तुलसी पूजन कर सकते हैं लेकिन इससे संबंधित एक खास नियम का ध्यान रखना चाहिए. खरमास में तुलसी की पूजा करते समय तुलसी के पत्तों को स्पर्श करने से बचना चाहिए. ऐसा करने पर तुलसी का पौधा दूषित माना जाता है. इसलिए आप अगर खरमास में तुलसी का पूजन कर रहे हैं तो दीपक बाती जरूर करें लेकिन तुलसी के पत्तों को हाथ ना लगाएं और ना ही इन पत्तों को तोड़ें.

      आस्था /शौर्यपथ /महाभारत के युद्ध के समय अर्जुन के मनोबल हार जाने पर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हे कर्म का ज्ञान दिया था. भगवान श्रीकृष्ण का यह संदेश पूरे संसार को गीता के रूप में उपलब्ध है. गीता में मनुष्य के मन में उठने वाले सभी तरह के संशय का समाधान बताया गया है. यहां तक कि तनाव और डिप्रेशन  जैसी स्थिति में भी गीता पढ़ने से राहत मिलती है. आइए जानते हैं मन की किस स्थिति में गीता के कौन से श्लोक के पाठ से राहत मिल सकती है.
    मन की किस स्थिति में गीता का कौनसा श्लोक का करें पाठ
    संघर्ष से परेशान
    अगर आप अपने जीवन में आ रहे संघर्ष से परेशान हैं और इसके कारण तनाव में रह रहे हों तो गीता का यह श्लोक पढ़ें.
    हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम् वा भोक्ष्यसे महिम्
    तस्मात् उत्त्रूठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्रय:
    सफलता नहीं मिल रही हो |
    काफी प्रयास के बावजूद सफलता नहीं मिलने से निराश हो तो मनोबल बढ़ाने के लिए गीता के इस श्लोक का पाठ करें
    कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचना
    मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते साड्गोस्त्वकर्मणि
    मन को भटकने से रोकने के लिए
    अगर मन बेचैन हो और बेकार की बातों की ओर ध्यान ज्यादा हो तो गीता का यह श्लोक मदद कर सकता है.
    श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेनद्रिय:
    ज्ञानं लब्धा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति
    क्रोध पर नियंत्रण |
    क्रोध पर नियंत्रण के लिए गीता का इस श्लोक का पाठ करें
    क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहास्मृतिविभ्रम:
    स्मृतिभ्रंशाद्धुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रश्यति

     आस्था/शौर्यपथ/ त्रीदेवों में से एक भगवान विष्णु को सुख-समृद्धि और शुभ का देवता माना जाता हैं. उनकी पूजा करने से मां लक्ष्मी  भी प्रसन्न होती हैं और जातक को धन-धान्य का भी लाभ मिलता है. पूरे साल में अगहन महीने को विष्णु भगवान की पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. उनके सभी रूपों में से खास श्री कृष्ण की पूजा करने की खास मान्यता है. इस महीने को सबसे ज्यादा पवित्र और पुण्यदायी माना जाता हैं. गंथ्रों में इस महीने में तीर्थ स्थान पर जाना और स्नान करना बहुत शुभ माना गया हैं. ऐसा करने से आपके सभी पाप धुल जाते हैं और आपके उपर भगवान विष्णु की खास कृपा होती है.
    अगहन मास 2023
      हिन्दू पंचांग का नौंवा महीना मार्गशीर्ष हैं जिसे अगहन भी कहते हैं. इस महीने में भगवान श्री कृष्ण और भगवान विष्णु की पूजा करने का खास महत्तव है. गीता में भगवान कृष्ण ने खुद कहा था कि सभी महीनों में सबसे पवित्र और मेरी पूजा के लिए मार्गशीर्ष महीना  सबसे उत्तम है. अगर बात करें इस साल की तो साल 2023 में अगहन मास की शुरुआत 28 नवंबर से हुई है जो 26 दिसंबर को खत्म होगी.
    अगहन मास श्री विष्णु का ऐसे करें अभिषेक
      स्कंद पुराण में अगहन मास के दौरान भगवान विष्णु के जलाभिषेक का खास महत्तव बताया गया हैं. ऐसा करने से आपको महापुण्य की प्राप्ति हो सकती हैं. आइए जानते हैं  किस चीज का अभिषेक करने से क्या लाभ मिल सकते हैं.
    1. जलाभिषेक - अगहन मास में भगवान विष्णु को सिधे जल नहीं चढ़ाना चाहिए. जलाभिषेक करने के लिए शंख में पानी भरकर नमो नारायणाय मंत्र का जाप करते हुए धीरे-धीरे जल उनके उपर चढ़ाएं. इससे आप पाप मुक्त हो सकते हैं.
    2. दूध से अभिषेक - मान्यता है कि अगर आप अगहन के दौरान भगवान विष्णु का दूध से अभिषेक करते हैं तो इससे आपको स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है. साथ ही आपको चंद्र, इंद्र और मरुद्गण के समान पद मिल सकता है.
    3. शहद से अभिषेक - भगवान विष्णु का अभिषेक अगर आप शहद में चीनी मिलाकर करते हैं तो आपको राजा का पद मिल सकता है.
    4. शंख बजाकर करें अभिषेक - अगर आप विष्णु जी का अभिषेक शंख बजाकर करते हैं तो इससे आपके पितरों के लिए स्वर्ग का रास्ता खुल जाता है.
    5. तीर्थ के जल से अभिषेक - किसी खास तीर्थ के जल को अगर आप शंख में भरकर उससे अभिषेक करते हैं तो आप अपने पूरे कुल सहित खुद भी मोक्ष पा सकते हैं.

        लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / कहते हैं बच्चे फूल से कोमल होते हैं जिन्हें चोट भी बहुत जल्दी लगती है. बच्चों के साथ बुरा व्यवहार रखा जाए या उन्हें दुख पहुंचाने के लिए कुछ कहा जाए तो बच्चों के दिलोदिमाग पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है. देखा जाता है कि बड़े होने के बाद भी बच्चों को ये बातें परेशान करती हैं. बहुत से बच्चे माता-पिता से दूरी भी बना लेते हैं. बच्चों के लिए पैरेंट्स के ये काम मानसिक तौर पर पीड़ा पहुंचाने वाले होते हैं जिस कारण बच्चे जिंदगी में तो आगे बढ़ जाते हैं लेकिन बचपन की ही कुछ यादें उनके लिए हमेशा दुख की वजह बनी रहती हैं. ऐसे में आपके बच्चे को इस तरह की मानसिक पीड़ा ना हो इसके लिए आप इन कामों को करने से परहेज कर सकते हैं या कुछ बातों का ख्याल रख सकते हैं.
    बच्चों को मानसिक तौर पर प्रभावित करने वाले काम
    हर बात पर चिल्लाना
        कई बार बच्चों से सख्ती के लिए तो कई बार आदतन माता-पिता बच्चों से हर बात कहने सुनने के लिए चिल्लाते हैं. पैरेंट्स का इस तरह चिल्लाते रहना बच्चों में डर का कारण बनने लगता है. बच्चे छोटी-बड़ी गलतियों पर झूठ का सहारा भी केवल इसलिए लेने लगते हैं कि उन्हें माता-पिता की डांट ना खानी पड़े.
    दूसरों के सामने निंदा करना
    चाहे बच्चे हों या बड़े कोई नहीं चाहता कि उनकी बाहरी लोगों के सामने निंदा की जाए. बच्चों के मन पर इस तरह किसी और के सामने शर्मिंदगी का पात्र बनना गहरी चोट करता है. पैरेंट्स ऐसा बच्चे को सबक सिखाने के लिए करते हैं, लेकिन बार-बार यही किया जाए तो बच्चे का आत्मविश्वास कम होने लगता है और मानसिक तौर पर भी उसको तकलीफ होती है.
    बच्चों की भावनाएं नकारना
    अक्सर बच्चे जो कुछ टीवी में या फिर अपने दोस्तों को करते हुए देखते हैं वही करने लगते हैं. कई बार बच्चे बहुत इमोशनल फील करते हैं या खुश महसूस करते हैं तो अपने माता-पिता को गले लगाने के लिए आगे बढ़ते हैं. अगर इस पल में वे अपने बच्चे को गले लगाने के बजाय उसे धुत्कार दें तो बच्चे का मनोबल टूट जाता है. इसलिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चे की भावनाओं को ना नकारें बल्कि उनकी भावनाओं का सम्मान करें. अपनी इमोशनली अनस्टेबिलिटी से बच्चों को प्रभावित करना सही नहीं है.
    खुश होते देख कुछ बुरा कह देना
    बच्चे मन के सच्चे होते हैं. कई बार वे गलत स्थितियों में भी खुश हो जाते हैं. अगर पापा ने मम्मी का मजाक उड़ा दिया है तो बच्चे खुशी से खिलखिलाने लगते हैं या मम्मी ने पापा को चिढ़ाया हो तो बच्चे ठहाका लगा देते हैं. ऐसे में बच्चों के इस खुशी के पल में उसे कुछ बुरा कहना या उसपर हाथ उठाना बच्चे को प्रभावित करता है. बच्चों को इस व्यवहार से गहरा दुख भी पहुंचता है.
    बच्चों को कभी अपने फैसले ना लेने देना
    बच्चे गलतियां करके ही सीखते हैं लेकिन सीखते जरूर हैं. बच्चों को अपने फैसले लेने से ही रोक दिया जाए तो बच्चो को खुद से कुछ भी सीखने में दिक्कत होने लगेगी. इसके अलावा बच्चों के वृद्धि और विकास पर भी फर्क पड़ता है. बहुत से बच्चे इससे खुद को कैद और जकड़ा हुआ भी महसूस करने लगते हैं.

        व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /यूं तो हिंदू धर्म में हर माह की अमावस्या तिथि पितरों के तर्पण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है लेकिन साल के अंत में आने वाली मार्गशीर्ष अमावस्या बहुत ही खास होती है. इसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाता है. कहते हैं कि इस अमावस्या पर पितरों के लिए किए गए उपाय पितृ दोष से मुक्ति दिलाते हैं और घर-परिवार में शांति और सुख का माहौल कायम करते हैं. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. इस साल यानी 2023 में मार्गशीर्ष अमावस्या 12 दिसंबर, मंगलवार के दिन पड़ रही है. ऐसे में इस दिन हनुमान जी की भी पूजा काफी फलदायी साबित होगी. चलिए जानते हैं कि मार्गशीष अमावस्या पर किन उपायों को करने से पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है और घर में शादी-ब्याह की रुकावटें हट सकती हैं.
    मार्गशीर्ष अमावस्या के उपाय |
       आपको बता दें कि पितृ दोष और मांगलिक दोष के चलते घर के कुछ सदस्यों के विवाह में कई तरह की रुकावटें आ जाती हैं. ऐसे में मार्गशीष अमावस्या पर किए गए उपाय इन परेशानियों से निजात दिलाते हैं. मार्गशीष माह की इस अमावस्या पर किए गए ये उपाय पितरों को शांत करेंगे और घर में शादी योग्य सदस्यों के विवाह के योग जल्द बनेंगे.
    पितृ दोष दूर करने का उपाय
       भौमवती अमावस्या के दिन जातक को त्रिपिंडी श्राद्ध करना चाहिए. ऐसा करने पर तीन पीढ़ियों के पितर तृप्त हो जाते हैं और जातक के परिवार पर लगा पितृ दोष खत्म हो जाता है. इस दिन जातक को नहा धोकर त्रिपिंडी श्राद्ध करना चाहिर और पितरों के जल तर्पण करना चाहिए.
    मंगल दोष दूर करने का उपाय
          जिन लोगों को मंगल दोष लगा है या जो लोग मांगलिक हैं, उनके विवाह में अक्सर देर हो जाती है या फिर विवाह में तरह-तरह की अड़चनें आती है. मंगल दोष को दूर करने के लिए भौमवती अमावस्या के दिन मंगल ग्रह के बीज मंत्र ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः का 108 बार जाप करना चाहिए. इस दिन जातक का मंगल ग्रह से जुड़ी चीजें जैसे सोना, गुड़, लाल कपड़े, मूंगा, घी, लाल मसूर की दाल, केसर और तांबे के बर्तनों का दान करना शुभ माना जाता है. इससे मंगल ग्रह का दोष दूर होता है.
    घर परिवार की तरक्की का उपाय
         अगर घर परिवार में तरक्की नहीं हो रही है और आर्थिक तंगी हो रही है तो इस दिन पानी में थोड़े से तिल डालकर उससे नहाना चाहिए. इसके बाद पितरों को जल देना चाहिए और पितृ सूक्ति का पाठ करना चाहिए. ऐसा करने से पितर खुश होते हैं और घर में तरक्की होने लगती है.

    आस्था /शौर्यपथ /पूजा-पाठ में दीया जरूर जलाया जाता है. पूजा में दीया जलाना बेहद शुभ होता है और दीया जलाने से कई तरह की विशेष मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं. माना जाता है कि सही तरह से दीया जलाया जाए तो पूजा का फल भी मिलता है और भगवान की पूरी कृपा भी भक्तों को प्राप्त होती है. लेकिन, बहुत भक्त दीया जलाने से जुड़ी कई बातों से अनजान होते हैं. ऐसे में सही तरह से दीया ना जलाने पर पूजा का फल नहीं मिलता है और भगवान क्रोधित भी हो सकते हैं. यहां जानिए दीया जलाने का सही तरीका, सही समय और सही दिशा समेत कुछ बातों के बारे में.
    दीया जलाने से जुड़े नियम |
    किस दिशा में रखें दीया
    माना जाता है कि दीया जलाने की दिशा विशेष महत्व रखती है. मंदिर के पास हमेशा पश्चिम दिशा की ओर मुख करके दीया जलाने के लिए कहा जाता है. माना जाता है कि ऐसा करने पर दीपक का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
    किस ओर रखें दीया
    आमतौर पर पूजा के समय मंदिर में तेल या घी के दीये जलाए जाते हैं परंतु घी और तेल के दीये को रखने का तरीका अलग-अलग होता है. मान्यतानुसार, दीया अगर घी का हो तो उसे भगवान के दाहिने हाथ की तरफ रखना शुभ होता है और यदि दीया तेल का है तो उसे भगवान के बाएं हाथ की ओर रखा जाता है.
    दीये की बाती
    दीये पर किस तरह की और किस तरह से बाती लगाई जा रही है इसका भी विशेष महत्व होता है. माना जाता है कि घी के दीये में फूल बाती लगानी चाहिए और वहीं अगर दीया तेल का हो तो उसमें लंबी खड़ी बाती लगाई जाती है. दीपक की बाती को कभी भी दक्षिण दिशा की ओर मुख करके नहीं रखा जाता है, यह दिशा अच्छी नहीं मानी जाती है.
    कैसा दीया नहीं चुनना चाहिए
    मंदिर में जिस दीये को जलाया जा रहा है वह बिल्कुल ठीक होना चाहिए और कहीं से भी टूटा-फूटा नहीं होना चाहिए. खंडित दीया शुभ नहीं माना जाता है. खंडित दीपक जलाने पर माना जाता है कि भगवान नाराज हो सकते हैं और इस दीये का शुभ फल भी नहीं मिलता है.

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