August 07, 2026
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       सेहत टिप्स /शौर्यपथ /बादाम एक ऐसा ड्राई फ्रूट है जो आपकी ओवरऑल हेल्थ का ध्यान रखता है, यह आपकी स्किन को भी हेल्दी रखता है और बाल को चमकदार. लेकिन बादाम को रोज कितनी मात्रा में खाना चाहिए, इस बात के बारे में जानना जरूरी है. हम आपको इस आर्टिकल में अल्मंड उम्र के अनुसार डाइट में कितना शामिल करना चाहिए, उसके बारे में बताने वाले हैं, ताकि आप इसका भरपूर लाभ उठा सकें.
    एक दिन में कितने बादाम खाएं
    - 5 से 10 साल के बच्चे को हर दिन 2 से 4 बादाम खाना चाहिए. वहीं, बादाम हर किसी को अपनी पाचन शक्ति के अनुसार खाना चाहिए. कुछ लोग को 2 बादाम भी सूट नहीं करता है और पेट से जुड़ी समस्या शुरू हो जाती है.
    - ऐसे में आपको बादाम खाने की शुरूआत 2 बादाम से करनी चाहिए, जब आपको सूट करे तो आप हर हफ्ते बादाम को अपनी डाइट में बढ़ाते जाइए.
    बादाम खाने के फायदे

      आस्था /शौर्यपथ / अयोध्या में जनवरी में होने वाले रामलला  प्राणप्रतिष्ठा समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं. इस विशाल समारोह को लेकर साधु-संतों में तो खासा उत्साह है ही, अयोध्या  के आम लोग भी इसे लेकर काफी खुश हैं. मंदिर के गर्भगृह के निर्माण का काम पिछले काफी समय से तेजी से चल रहा है और अब ये अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है. साल 2020 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यहां 67 एकड़ जमीन की पूरी साफ-सफाई करवाई गई, जिसमें से 2 एकड़ जमीन पर मंदिर का निर्माण किया जा रहा है.
    प्राण प्रतिष्ठा के पहले हुई ये तैयारियां
    पुजारियों का किया गया चयन
    मंदिर के महत्व को देखकर वहां के पुजारियों के चयन में खास सावधानी बरती जा रही है. कर्मकांड और धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार 300 पुजारियों में से 21 पुजारियों का चयन कर उन्हें उचित ट्रेनिंग दी जा रही है. इनमें से चयनित पुजारियों को यहां रखकर अन्य को दूसरे मंदिरों में भेजा जाएगा.
             कोर्ट के फैसले के बाद पिछले कुछ समय से यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया है. जाहिर है कि इन श्रद्धालुओं के आने से मंदिर में आने वाले चढ़ावे में भी काफी बढ़ोतरी हुई है. श्रद्धालु न केवल मंदिर के लिए धन बल्कि सोने चांदी का भी चढ़ावा दे रहे हैं. ऐसे में इस दान और चढ़ावे के प्रबंधन के लिए मंदिर परिसर के निकट ही बैंक कर्मियों को भी तैनात किया गया है.
    घाटों की भी हुई मरम्मत
        केवल मंदिर ही नहीं बल्कि आस-पास के पूरे इलाके का कायाकल्प किया जा रहा है. नदी के किनारे घाट बनाए जा रहे हैं या फिर पुराने घाटों की मरम्मत की जा रही है. जल निकासी की व्यवस्था को बेहतर बनाया जा रहा है. इसके साथ ही मंदिर से 22 किलोमीटर दूर जहां मस्जिद का निर्माण किया जा रहा है उसके लिए भी फंड जुटाए जा रहे हैं, ताकि इसके निर्माण का कार्य भी जल्द शुरू किया जा सके.

     व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में गीता का बहुत महत्व है. महाभारत के दौरान कुरुक्षेत्र के युद्ध में श्री कृष्ण अर्जुन के बीच जो बातचीत हुई उसे श्रीमद्भागवत गीता  में बताया गया है. सनातन धर्म ने इसे इकलौता ऐसा ग्रंथ माना जाता है जिसकी जयंती मनाई जाती है. जी हां, गीता जयंती हर साल मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन मनाई जाती है. इस बार ये दिन 22 दिसंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा, आइए आपको बताते हैं गीता जयंती का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
    कब मनाई जाएगी गीता जयंती
    पंचांग के अनुसार, गीता जयंती मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है, जो इस बार 22 दिसंबर को मनाई जाएगी. इसका शुभ मुहूर्त सुबह 8:15 से शुरू होगा, उसका समापन 23 दिसंबर को सुबह 7:10 पर होगा. इस साल गीता जयंती पर 3 बड़े शुभ योग भी बन रहे हैं- शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग.
    गीता जयंती पर शुभ योग
        शिवयोग- गीता जयंती पर पड़ने वाले शिवयोग का समय सुबह 11:00 बजे से रात 9:08 तक है.
        सर्वार्थ सिद्धि योग- सर्वार्थ सिद्धि योग की शुरुआत सुबह 7:10 से होगी, जो कि देर रात 9:36 तक रहेगा.
        रवि योग- रवि योग सुबह 7:02 से 21:30 तक मनाया जाएगा.
    ऐसे मनाएं गीता जयंती
    हिंदू धर्म में गीता ग्रंथ ऐसा है जिसकी जयंती मनाई जाती है. ऐसे में आप एकादशी का व्रत कर सकते हैं और गीता जयंती पर गीता के उपदेशों को पढ़ कर अपने दिन की शुरुआत कर सकते हैं. अपने मंदिर में गीता ग्रंथ को स्थापित कर सकते हैं और इसके पाठ कर सकते हैं.
    घर में रखें गीता, तो भूल कर भी ना करें ये काम
    अगर आप अपने घर में गीता रखते हैं और उसका पाठ करते हैं, तो कुछ विशेष नियम आपको अपनाने चाहिए-
    - इसे साफ और पवित्र स्थान पर ही रखें.
    - बिना नहाए गंदे हाथ या मासिक धर्म में गीता को स्पर्श न करें.
    - गीता को कभी भी जमीन पर रखकर ना पढ़ें.
    - इसे पढ़ने के लिए पूजा की चौकी या लकड़ी से बने स्टैंड का इस्तेमाल करें.
    - गीता को हमेशा एक लाल कपड़े में बांधकर रखें.
    - गीता का पाठ पढ़ने के लिए आसान बिछाए और नीचे बैठकर गीता का पाठ करें.
    - गीता का पाठ करने से पहले भगवान गणेश और श्री कृष्ण का स्मरण करें.
    - अगर गीता का कोई अध्याय शुरू किया जाए तो उसे बीच में ना छोड़े, अध्याय को पूरा पढ़ने के बाद ही उठें.

     व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /पूर्णिमा यानि वो दिन जिस दिन पूरा चंद्रमा दिखता है. लेकिन हिंदू धर्म में हर पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है और उन्हें अलग-अलग नाम से जाना जाता है. पूर्णिमा के दिन व्रत, दान, स्नान, सूर्य देव  को अर्घ्य देने का खास महत्व होता है, ऐसे में आइए हम आपको बताते हैं आने वाले साल में जनवरी से लेकर दिसंबर तक कब-कब पूर्णिमा की तिथि पड़ेगी और इसका शुभ मुहूर्त क्या है.
    जनवरी
      साल 2024 की पहली पूर्णिमा 25 जनवरी 2024 गुरुवार के दिन पड़ेगी इस पौष पूर्णिमा कहा जाता है. इस पूर्णिमा की तिथि 24 जनवरी रात 9:52 से शुरू हो जाएगी, जो कि 25 जनवरी गुरुवार 11:26 तक रहेगी.
    फरवरी
      फरवरी में माघ पूर्णिमा तिथि 24 फरवरी के दिन मनाई जाएगी, लेकिन इसकी शुरुआत 23 फरवरी 2024 को 3:36 से शुरू हो जाएगी, जो कि 24 फरवरी, शनिवार शाम 6:03 तक रहेगी.
    मार्च
     25 मार्च 2024 को फाल्गुन पूर्णिमा मनाई जाएगी. इसका शुभ मुहूर्त 24 मार्च 2024 को सुबह 9:57 से शुरू होकर 25 मार्च दोपहर 12:32 तक रहेगा.
    अप्रैल
      23 अप्रैल 2024 को चैत्र पूर्णिमा मनाई जाएगी, जो 23 अप्रैल दोपहर 3:27 पर शुरू होगी और 24 अप्रैल को 5:20 पर पूर्णिमा की तिथि खत्म हो जाएगी.
    मई
      वैशाख पूर्णिमा का पावन त्योहार 23 मई 2024 को मनाया जाएगा, जो कि 22 मई शाम 6:49 पर शुरू हो जाएगा और 23 मई गुरुवार 7:24 तक रहेगा.
    जून
      जून के महीने में ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जाएगी, जो 22 जून 2024 को होगी. हालांकि, इसकी तिथि की शुरुआत 21 जून शाम 7:33 पर शुरू हो जाएगी जो 22 जून शाम 6:39 पर खत्म होगी.
    जुलाई
      आषाढ़ पूर्णिमा व्रत 21 जुलाई 2024 को पड़ेगा, इसकी शुरुआत 20 जुलाई शाम 6:01 से होगी और 21 जुलाई शाम 3:48 पर यह पूर्णिमा खत्म हो जाएगी.

    अगस्त
       श्रावण मास की पूर्णिमा 19 अगस्त 2024 को मनाई जाएगी, जिसकी तिथि 3:07 से शुरू होगी और इसका समापन 19 अगस्त 2024 को सोमवार रात 11:57 पर होगा.
    सितंबर
      भाद्रपद पूर्णिमा 18 सितंबर 2024 बुधवार के दिन मनाई जाएगी, जिसकी शुरुआत 17 सितंबर सुबह 11:40 पर होगी और 18 सितंबर, बुधवार सुबह 8:06 पर इसका समापन होगा.
    अक्टूबर
     आश्विन पूर्णिमा व्रत इस साल 17 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा, इसकी शुरुआत 16 अक्टूबर रात 8:44 पर होगी जो कि 17 अक्टूबर, गुरुवार शाम 4:58 तक रहेगी.
    नवंबर
      साल 2024 में कार्तिक पूर्णिमा की तिथि 15 नवंबर 2024 को मनाई जाएगी, इसकी तिथि 6:21 पर शुरू होगी और समापन 3:00 बजे होगा.
    दिसंबर
      मार्गशीर्ष पूर्णिमा दिसंबर के महीने में 15 तारीख को मनाई जाएगी. इसकी शुरुआत 14 दिसंबर शाम 5:01 पर होगी और इसका समापन 15 दिसंबर 2024 को दोपहर 2:33 पर होगा.

        ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /मौसम बदलने पर त्वचा पर भी असर पड़ने लगता है. सर्दियों में खासकर त्वचा ड्राई और डल नजर आने लगती है जिसका बड़ा कारण सर्दियों की शुष्क हवा होता है. ऐसे में स्किन को निखरा हुआ और चमकदार बनाने के लिए घर पर ही कुछ फेस पैक्स बनाकर लगाए जा सकते हैं. इन फेस पैक्स से गालों को गुलाबी बनने में मदद मिलती है और त्वचा चमकती है सो अलग. ये फेस पैक्स बनाने में भी बेहद आसान हैं और इन अलग-अलग चीजों से बने फेस पैक्स त्वचा को अलग-अलग फायदे देने में कारगर हैं.
    सर्दियों में निखरी त्वचा के लिए फेस पैक्स |
    कॉफी का फेस पैक
       इस फेस पैक को बनाने के लिए एक कटोरी में 2 चम्मच कॉफी का पाउडर ले लें. इसमें एक चम्मच शहद और जरूरत के अनुसार दूध मिलाकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को चेहरे पर तकरीबन 20 मिनट लगाए रखने के बाद चेहरा धो लें. कॉफी फेस पैक्स  त्वचा निखर जाती है और चेहर से पिंपल्स और दाग-धब्बे कम होने लगते हैं.
       चावल के आटे का फेस पैक
        इस फेस पैक को बनाने के लिए एक चम्मच चावल का आटा लें और उसमें एक चम्मच ओटमील और 2 चम्मच शहद मिला लें. इस तैयार फेस पैक को चेहरे और गर्दन पर लगाएं और फिर चेहरा धोकर साफ करें. चावल से त्वचा को एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मिलते हैं और गंदगी भी त्वचा से हट जाती है.
    पपीता और दूध
        स्किन को क्लेंज करने के लिए पपीते का फेस पैक   बनाकर लगाया जा सकता है. इस फेस पैक से स्किन को विटामिन ई के गुण भी मिलते हैं और स्किन डैमेज कम होने लगता है. फेस पैक बनाने के लिए पपीते को मसलकर कटोरी में डालें और उसमें जरूरत के अनुसार दूध लेकर पेस्ट बनाएं. चेहरे पर इस फेस पैक को लगाएं और आधे घंटे बाद चेहरा धोकर साफ करें. स्किन निखरने में असर दिखता है.
    गाजर और शहद
      सर्दियों में गाजर खूब खरीदा जाता है. इसे स्किन केयर का हिस्सा भी बना सकते हैं. एक कटोरी में चावल को घिसकर लें और उसमें थोड़ा शहद मिला लें. इस पेस पैक को चेहरे और गर्दन पर 15-20 मिनट लगाकर रखने के बाद धोएं. गाजर स्किन से एक्सेस ऑयल को हटाता है और डल स्किन को शहद से चमक मिल जाती है.

        ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /धूल, प्रदूषण, हानिकारक सूर्य की किरणें और खराब खानपान स्किन को अंदर और बाहर से डैमेज कर देते हैं. इसके कारण चेहरे पर मुंहासे, पिंपल, झाईं, झुर्रियां और फाइन लाइन नजर आने लगती हैं. ऐसे में चेहरा उम्र से पहले बूढ़ा दिखता है. लेकिन आप सही स्किन केयर फॉलो करें, तो स्किन ग्लोइंग और यंग बनी रहेगी. हम यहां पर कोकोनेट ऑयल में 3 चीज मिलाकर फेस को मसाज देने के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आपके फेस पर कसाव  आएगा और रिंकल   भी धीरे-घीरे कम होने लग जाएगी.
     नारियल तेल में शहद मिलाकर लगाने के फायदे  - अगर आपके चेहरे पर झुर्रियां और फाइन लाइन्स नजर आ रही हैं, तो नारियल तेल में शहद थोड़ा सा मिक्स करके फेस को मसाज दीजिए. आप इसको 15 से 20 मिनट चेहरे पर लगाकर रखिए. फिर साफ पानी से चेहरा धो लीजिए. आप इसका इस्तेमाल हफ्ते में 2 से 3 बार इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे आपकी स्किन ग्लोइंग नजर आएगी.
    नारियल तेल में कैस्टर ऑयल के फायदे - रिकल्स को कम करने के लिए आप इन दोनों को भी मिक्स करके चेहरे पर लगा सकते हैं. कैस्टर ऑयल में एंटीऑक्सीडेंट्स होता है जो एजिंग साइन को कम करता है. यह कोलेजन उत्पादन भी बढ़ाता है. यह स्किन पर कसाव लाता है. इससे झुर्रियां कम होती हैं.
    नारियल तेल और विटामिन-ई कैप्सूल  - आप नारियल तेल में विटामिन ई कैप्सूल मिक्स करके स्किन को हाइड्रेट कर सकती हैं. इससे भी एजिंग साइन कम होती है.
    आप इसको फेस पर लगाकर हल्के हाथों से चेहरे को मसाज दीजिए. इससे आपको कुछ दिनों में अंतर नजर आने लगेगा.

     ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / एलोवेरा का पौधा औषधीय माना जाता है. एलोवेरा की पत्ती को अलग-अलग तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है. एलोवेरा स्किन के लिए फायदेमंद है, यह बालों को फायदे देता है और इसे सेहत दुरुस्त रखने के लिए खानपान का हिस्सा भी बनाया जा सकता है. बालों के लिए एलोवेरा जैल   के फायदों की बात करें तो एलोवेरा स्कैल्प की सफाई करते हैं, स्कैल्प को नमी देते हैं, बालों को बढ़ने  में मदद करते हैं, बालों का टेक्सचर बेहतर करते हैं, बालों को लंबा बनाते हैं और बालों की मोटाई बढ़ाने में भी असरदार हैं. एलोवेरा विटामिन ए, बी12, सी और ई से भरपूर होता है. इसमें फैटी एसिड्स और अमीनो एसिड्स की भी अच्छी मात्रा होती है जो हेयर फॉलिकल्स को बेहतर करती है. वहीं, एलोवेरा का इस्तेमाल बालों को धूप से होने वाले डैमेज से भी दूर रखते हैं. जानिए बालों पर किन-किन तरीकों से लगा सकते हैं एलोवेरा.
    बालों पर एलोवेरा लगाने के तरीके |  
    नींबू के साथ
       ग्रीसी और चिपचिपाहट बालों की दिक्कत दूर करने के लिए नींबू के रस और एलोवेरा जैल को साथ मिलाकर लगाएं. 2 चम्मच एलोवेरा जैल लें और उसमें एक चम्मच नींबू का रस और एक कप पानी मिलाएं. इस मिश्रण को बालों पर लगाएं और कुछ मिनटों बाद ही बालों को सादे पानी से धोकर साफ कर लें.
    कैस्टर ऑयल के साथ
       एलोवेरा को बालों पर कैस्टर ऑयल के साथ मिलाकर लगाया जा सकता है. इससे सिर की अच्छे से मालिश करने पर स्कैल्प की सफाई होती है और स्कैल्प को नमी भी मिलती है. ड्राई और फ्लेकी स्कैल्प पर इस तरह लगाया जा सकता है एलोवेरा.
    दही के साथ
     डैंड्रफ  दूर करने और बालों को चमक देने के लिए दही और एलोवेरा का हेयर मास्क बनाकर लगाया जा सकता है. इस हेयर मास्क को बनाने के लिए आधा कर दही में बराबर मात्रा में एलोवेरा जैल या एलोवेरा का ताजा गूदा मिला लें. इस हेयर मास्क को बालों पर 30 से 45 मिनट लगाकर रखने के बाद धोएं.
    नारियल तेल के साथ
      एलोवेरा जैल और नारियल तेल को एकसाथ मिलाएं और पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को बालों पर आधा घंटा लगाकर रखने पर ही फायदा मिल जाता है. इससे हेयर फॉलिकल्स को बेहतर होने में मदद मिलती है.
    शहद के साथ
      एलोवेरा जैल के भरपूर गुण पाने के लिए इसमें शहद  मिलाकर बालों पर लगाएं. दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर बालों पर आधा घंटा लगाए रखने के बाद सिर धो लें. बालों पर चमक नजर आने लगती है.
    एलोवेरा और मेथी
      बालों को बढ़ाने के लिए इस हेयर मास्क  को लगाएं. बालों का झड़ना रोकने में भी इस हेयर मास्क का अच्छा असर नजर आता है. मेथी के दानों को रातभर भिगोकर रखें और अगली सुबह पीस लें. इस पेस्ट में एलोवेरा मिलाएं और फिर सिर पर 25 से 30 मिनट लगाएं और सिर धोकर साफ करें. हफ्ते में एक बार इस हेयर मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / नए साल में त्योहारों की शुरुआत मकर संक्रांति  से होगी. पूरे वर्ष में 12 संक्रांति मनाई जाती है, लेकिन मकर संक्रांति का महत्व सबसे ज्यादा है. इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इसी दिन खरमास भी समाप्त होता है. देश भर में मकर संक्रांति मनाई जाती है. इसे कई नामों जैसे उत्तरायण, पोंगल, मकरविलक्कु, माघ बिहु से जाना जाता है.आइए जानते हैं इस वर्ष मकर संक्रांति की तिथि  और स्नान व दान करने का शुभ मुहूर्त.
    किस दिन मनाई जाएगी मकर संक्रांति |
    साल 2024 में मकर संक्रांति 15 जनवरी सोमवार को मनाई जाएगी. 15 जनवरी को  सूर्य प्रातः: 2 बजकर 54 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. मान्यता है कि मकर संक्रांति पर पवित्र नदी में स्नान करने के बाद दान करने से पुण्य लाभ होता है.
    मकर संक्रांति पुण्य काल - सुबह 06.41- शाम 06.22
    अवधि - 11 घंटे 41 मिनट
    मकर संक्रांति महा पुण्य काल - सुबह 06.41 - सुबह 08.38
    अवधि - 1 घंटा 57 मिनट
    मकर संक्रांति महत्व |
     मान्यता है कि सूर्य के उत्तरायण समय देवी देवताओं का शुभ समय होता है, सूर्य देव के उत्तरायण होते ही स्वर्ग के द्वार खुलते हैं. मान्यता है कि जो उत्तरायण और शुक्ल पक्ष में देह त्यागता है उसे जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है. यही कारण है कि भीष्म पितामह शरशैया पर प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण का इंतजार किया था. इस दिन किया गया गंगा स्नान जन्म-जन्म के पापों से मुक्ति दिलाता है, ऐसी मान्यता है. इस दिन तिल, जूते, अन्न, तिल, गुड़, वस्त्र, कंबल का दान करने से शनि और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है, ऐसा माना जाता है.

      शौर्यपथ / साल 2024 में ग्रह गोचर से कई शुभ व राजयोग का निर्माण होने वाला है. राजयोग बनाने वालों में न्याय के ग्रह शनिदेव   भी शामिल हैं. अगले वर्ष शनिदेव अपने मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विचरण करेंगे. इससे केंद्र त्रिकोण राजयोग  का निर्माण होगा, इस राजयोग का कुछ राशियों   पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ने वाला है. इस प्रभाव से तीन राशियों के लिए भाग्योदय और धन लाभ के प्रबल योग बनते नजर आ रहे हैं. इन राशियों पर शनिदेव की विशेष कृपा होगी. आइए जानते हैं केंद्र त्रिकोण राजयोग से किन राशियों का होने वाला है भाग्योदय. कब है मकर संक्रांति? जानिए तिथि और स्नान और दान करने का शुभ मुहूर्त
    इन राशियों पर होगा केंद्र त्रिकोण राजयोग का प्रभाव
    कुंभ राशि
        कुंभ राशि के जातको पर केंद्र त्रिकोण राजयोग का बहुत लाभ पड़ने वाला है. यह राजयोग कुंभ के लग्न भाव में ही बनने वाला है. इसके कारण राशि के जातकों का आत्मविश्वास बहुत बढ़ जाएगा. मान्यता है कि इसके प्रभाव और शनिदेव की कृपा से हर काम में सफलता मिलती है. भाग्य का साथ देने से कई सुअवसर मिलेंगे जिससे करियर में तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे. दांपत्य जीवन में भी खुशहाली रहेगी.
    सिंह राशि
      केंद्र त्रिकोण राजयोग सिंह राशि के जातकों के लिए शुभ साबित होगा. यह राजयोग सिंह राशि के सप्तम भाव में बनने जा रहा है. इसके प्रभाव से आय में वृद्धि हो सकती है. करियर व कारोबार में अतिरिक्त सफलता प्राप्त कर सकते हैं. यह समय आप पर धार्मिक प्रभाव बढ़ा सकता है इसलिए धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी. जीवनसाथी के साथ अच्छा तालमेल रहेगा.
    वृश्चिक राशि
       वृश्चिक राशि के जातकों के लिए केंद्र त्रिकोण राजयोग अनुकूल साबित होगा. यह राजयोग वृश्चिक राशि के चतुर्थ भाव में बनने वाला है. इसके प्रभाव से वाहन और संपत्ति सुख की प्राप्ति हो सकती है. भाग्य का साथ मिलने से तरक्की के नए मार्ग बन सकते हैं. नौकरी करने वालों को कार्य में अच्छी खबर मिल सकती है.

      आस्था /शौर्यपथ / अयोध्या राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर आमंत्रित बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को भव्य परिसर में ज्यादा पैदल चलने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि मंदिर निर्माण ट्रस्ट उनके लिए ई-वाहनों का संचालन कराएगा. मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट राम जन्मभूमि पर आने वाले बुजुर्ग आगंतुकों के लिए विशेष व्यवस्था करेगा. वरिष्ठ नागरिकों को भव्य परिसर में ज्यादा पैदल चलने की जरूरत नहीं होगी.
         उन्होंने बताया कि राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ बीमार लोगों के लिए भी ई-वाहनों का संचालन किया जाएगा. ट्रस्ट जल्द ही दर्जनों छोटे ई-वाहन खरीदेगा. ये ई-वाहन 12 यात्रियों की क्षमता वाले बैटरी चालित ‘गोल्फ कार्ट' होंगे.
         मिश्रा ने बताया कि इस सुविधा का लाभ लेने के लिए वरिष्ठ नागरिक राम मंदिर प्रवेश द्वार के स्वागत कार्यालय पर संपर्क कर सकते हैं. उन्हें ई-वाहनों में बैठाकर गर्भगृह के निकटतम बिंदु तक ले जाया जाएगा और उसी गाड़ी में वापस लाया जाएगा.
      उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था उन श्रद्धालुओं के लिए होगी जो मुख्य द्वार से गर्भगृह तक 25-30 मीटर तो चल सकते हैं, लेकिन 600 मीटर की दूरी तय नहीं कर सकते.
      मिश्रा ने बताया कि ट्रस्ट श्रद्धालुओं को चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराएगा.

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