July 24, 2026
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    सेहत / शौर्यपथ / मुंहासें एक सामान्य स्किन प्रोबल्म है, जो कई महिलाओं को परेशान करते हैं. कई तरह के महंगे स्किन प्रोडक्ट्स और ट्रीटमेंट्स के बाद बहुत सी महिलाओं ने अपने मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करना शुरू किया औरर उन्हें सही में इसका असर भी दिखाई दिया. ऐसे में गुलाब जल को आपको मुंहासें दूर करने के लिए जरूर ट्राय करके देखना चाहिए. न केवल गुलाब जल आपकी त्वचा के पीएच स्केल को बैलेंस करता है, बल्कि यह मुंहासों से भी छुटकारा दिलाता है और आपकी त्वचा को जवां बनाता है.
    मुंहासों के लिए गुलाब जल का क्यों करें इस्तेमाल?
    गुलाब जल में एस्ट्रिजेंट प्रोपर्टीज होती हैं, जो आपकी त्वचा के लिए टोनर का काम करती है. यह आपकी त्वचा से धूल मिट्टी और कीटाणुओं को निकालकर पोर्स को खोलता है और चेहरे की डीप क्लेंजिंग करता है. साथ ही ये ढीली त्वचा को वापस से टाइट भी करता है. ये आपकी त्वचा पर बहुत ही कोमल रहता है और एक्सेस ऑयल को भी रोकता है.

    हालांकि, गुलाब जल में मौजूद एंटी बैक्टीरियल, एंटीमाइक्रोबायल और एंटी इंफ्लामेटरी प्रोपर्टीज इसे मुंहासों से छुटकारा दिलाने के लिए लाभकारी बनाती हैं. इसकी एंटी बैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबायल प्रोपर्टीज मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया को दूर रखती हैं और त्वचा को साफ करती हैं.

    वहीं इसक एंटी इंफ्लामेटरी प्रोपर्टीज आपके दर्द को कम करती है और त्वचा को जल्दी से ठीक करने में मदद करती है. इसलिए हम आपके लिए कुछ ऐसे तरीके लाए हैं, जिनसे आप भी मुंहासों से छुटकारा पा सकती हैं.

    1. गुलाब जल का स्प्रे
    गुलाब जल को स्प्रे के रूप में लगाने से भी मुंहासें करने वाले बैक्टीरिया दूर रहते हैं.

    आपको चाहिए
    - गुलाब जल
    - एक छोटी स्प्रे बोतल

    ऐसे करें इस्तेमाल
    - सबसे पहले स्प्रे बोतल में गुलाब जल डाल लें और साइड में रख लें.
    - अपने चेहरे को क्लेंजर से साफ करें और सुखा लें.
    - अब अपने चेहरे पर गुलाब जल छिड़कें.
    - इसे 20 से 30 सेकेंड के लिए चेहरे पर रहने दें.
    - अब टिशू से अपना चेहरा साफ कर लें.
    - आप चाहें तो मोइश्चराइजर में मिला कर भी इसे लगा सकती हैं.
    - आप रोज इस स्प्रे को अपने चेहरे पर लगाएं और कुछ ही वक्त में आपको बदलाव नजर आने लगेगा.

    2. गुलाब जल और मुल्तानी मिट्टी
    ऑयली त्वचा के लोगों के लिए ये फेस मास्क एक दम परफेक्ट है. मुल्तानी मिट्टी चेहरे से एक्सेस ऑयल को सोख लेती है और चेहरे को डीप क्लेंज करती है. ये घरेलू नुस्खां त्वचा को ऑयल और मुंहासों से दूर रखने में मदद करेगा.

    आपको चाहिए
    - 1 टेबलस्पून मुल्तानी मिट्टी
    - 1 टेबलस्पून गुलाब जल

    ऐसे करें इस्तेमाल
    - दोनों को अच्छे से मिला लें और एक स्मूथ पेस्ट बना लें.
    - अपना चेहरा धो लें और पानी सुखा लें.
    - अब इस पेस्ट को अपने चेहरे और गले पर लगाएं.
    - पेस्ट के सूखने तक इसे लगा रहने दें.
    - अब अपने चेहरे को सामान्य पानी से धो लें.
    - इस मास्क का अपने चेहरे पर दो बार इस्तेमाल करें.

    3. गुलाब जल और सेब का सिरका
    सेब के सिरके को इसकी एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लामेटरी प्रोपर्टीज के लिए जाना जाता है. ये दोनों ही मुंहासों को दूर करती हैं और त्वचा को साफ और स्वस्थ बनाती हैं.

    आपको चाहिए
    - आधा कप गुलाब जल
    - 2 टीस्पून सेब का सिरका

    ऐसे करें इस्तेमाल
    - अपने चेहरे को क्लेंजर से धो लें और सुखा लें.
    - अब एक कप में सेब के सिरके और गुलाब जल को मिला लें.
    - एक रुई का टुकड़ा लें और इसे मिक्स्चर में डालें और फिर चेहरे पर लगाएं.
    - अब अपने चेहरे को सूखने दें.
    - इसके बाद अपने चेहरे पर मोइश्चराइजर लगाएं.
    - इस घरेलू नुस्खे का हफ्ते में कम से मक 2 बार इस्तेमाल करें.

    4. गुलाब जल और चंदन
    नेचुरल स्किनकेयर की बात आती है तो चंदर जादू की तरह काम करता है. चंदन में मौजूद एंटी इंफ्लामेटरी प्रोपर्टीज जलन को कम करती है और धूल मिट्टी को बाहर निकालकर त्वचा को साफ करती है.

    आपको चाहिए
    - 2 टेबलस्पून चंदन का पाउडर
    - 1 टेबलस्पून गुलाब जल

    ऐसे करें इस्तेमाल
    - गुलाब जल और चंदन के पाउडर को एक बाउल में मिक्स कर के पेस्ट बना लें.
    - अब अपने चेहरे को क्लेंजर से धो लें और सुखा लें.
    - इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने तक छोड़ दें.
    - अब अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें.
    - आप इस नुस्खे का हफ्ते में 3 से 4 बार इस्तेमाल कर सकते हैं.

    5. गुलाब जल और नींबू
    नींबू में काफी अधिक मात्रा में विटामिन सी होता है, जो मुंहासों के लिए काफी लाभकारी है. इसके अलावा नींबू बहुत ही अच्छा स्किन ब्राइटनिंग एजेंट भी है, जो आपकी त्वचा के स्कार्स को हटाता है. ये नुस्खा आपको मुंहासें से मुक्स साफ त्वचा देगा.

     

    नजरिया /शौर्यपथ / कई मौके आते हैं, जब देश हमें प्रेरित करता है। वर्ष 1992 के ओलंपिक के समय मैं छोटा था, वहां भारतीय खिलाड़ियों की टीम को देश का प्रतिनिधित्व करते हुए देखना मेरे लिए बहुत प्रेरणादायी था। तब लिंबा राम ने कैसे निशाना साधा था, उत्सव-तमाशे का कैसा माहौल था! खिलाड़ी कैसे अपने बेहतरीन प्रदर्शन के अभियान में लगे थे। तब मुझे ओलंपिक में हॉकी महाशक्ति के रूप में हमारी विरासत के बारे में भी पता था, और यह कुछ ऐसा था, जिसने मुझे अपनी खेल यात्रा और भारत को गौरव दिलाने के लिए प्रेरित किया।

    मुझे याद है, जब 11 अगस्त, 2008 को बीजिंग ओलंपिक में मैंने स्वर्ण पदक जीता, तब मुझे नहीं लगा था कि मैंने जीत लिया है। जीतने के बाद भी मेरा ध्यान जीत की प्रक्रिया पर लगा था। कैसे सर्वश्रेष्ठ करना है, यही बात मेरे दिमाग में चल रही थी। हालांकि जैसे-जैसे चीझें साफ हुईं, मुझे स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ। जीवन के एक लक्ष्य तक पहुंचने की खुशी महसूस हुई। इस बात ने मेरे मन को छू लिया कि मेरे एक काम ने पूरे देश को कैसे प्रभावित किया है।

    पिछले वर्षों में खेलों में बढ़ती भागीदारी बहुत प्रोत्साहित करती है। एथलीटों का समर्थन करने के लिए आगे आने वाले अधिक से अधिक लोगों को देखना बहुत अच्छा लगता है। उदाहरण के लिए, एक औसत जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भी भागीदारी बढ़ गई है, जब मैं इस स्तर पर प्रतिस्पद्र्धा करता था, तब इतने लोग नहीं आते थे। आज हर खेल में किसी न किसी रोल मॉडल का उदय खिलाड़ियों को पेशेवर खेल की राह दिखाता है, इसे पोषित-प्रोत्साहित करने की जरूरत है। अगले दशक में मैं निश्चित ही अधिक एथलीटों को विश्व विजेता बनते देख सकता हूं, और उम्मीद है, मैं लंबे समय तक भारत का एकमात्र व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता नहीं रहूंगा।

    आज खेलों में निवेश की जरूरत है। देश में प्रचुर प्रतिभा है। सही खेल ढांचा हो और खिलाड़ी विकास में दूरदर्शिता हो, तो प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। कई मायने में यह हो भी रहा है। मैंने सरकार में खेलों के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धता देखी है। यही वजह है, मैं इस देश में खेलों के विकास को बहुत आशावादी रूप से देखता हूं। खेल विकास के लिए सरकार भी करे और कॉरपोरेट सेक्टर जितना ज्यादा शामिल हो, उतना बेहतर होगा।
    कोरोना न होता, तो इस समय ओलंपिक का माहौल होता। यह उन खिलाड़ियों के लिए निराशा की बात है, जिन्होंने टोक्यो खेलों को ध्यान में रखते हुए वर्षों से तैयारी की है। हालांकि, इससे कई युवा एथलीटों को तैयार होने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। कोरोना ने हमें एक कदम पीछे लेने और आगे के कदमों की योजना बनाने का समय दिया है। यह अंतत: इस पर निर्भर करता है कि आप स्थिति को कैसे देखते हैं और इससे भी महत्वपूर्ण कि आप इसका अधिकतम उपयोग कैसे करते हैं। बेशक, जो अवसर का लाभ उठाएगा, वह जरूर जीतेगा।

    आज जो दौर है, उसका हममें से कई लोगों पर प्रभाव पड़ा है और इस पर काबू पाने के लिए सेहतमंद और सुरक्षित रहना हमारे लिए अहम है। जितना संभव हो, घर पर रहने और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने, जैसे मास्क पहनने और हाथ धोने से भी एक बड़ा फर्क आएगा। आप एक दिनचर्या रखें और बिना अपवाद पालन करें। जो छोटे व्यायाम घर पर किए जा सकते हैं, जितना संभव हो, करें। साथ ही, अच्छे भोजन से न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक सेहत में भी मदद मिलेगी।
    हमें अपनी मजबूती के साथ देश की मजबूती के बारे में भी जरूर सोचना है। इस देश को कैसे आकार दिया जाएगा, यह बात भारत के युवाओं के परस्पर सामंजस्य और सामूहिक विकास में योगदान के लिए सक्षम होने पर निर्भर है। हमें अपने देश के युवाओं का साथ देना होगा। युवा जो कुछ कर सकते हैं, उन्हें उसी दिशा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करना होगा। ऐसा करते हुए हम भारतीयों की एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित कर सकते हैं, जो देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
    एक उद्यमी, खिलाड़ी या किसी अन्य पेशे में सफलता के लिए आप जिस भी क्षेत्र को चुनें, अपने इरादे को बुलंद रखें। सीखने के लिए हमेशा तैयार रहें। दुनिया का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, आपका भी बदलेगा, अगर आप पूरी लगन से अपनी मंजिल पर पूरा ध्यान लगाएंगे।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं) अभिनव बिंद्रा, ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता

     

    सम्पादकीय / शौर्यपथ / स्वतंत्र भारत ने विकसित राष्ट्र होने की ओर एक लंबा सफर तय कर लिया है, और अभी आगे का लंबा सफर हमें जल्दी पूरा करना है। बताते हैं, भारत कम से कम 2035 तक युवाओं का देश है, उसके बाद हमारी आबादी में युवाओं की तादाद कम होती जाएगी। इसलिए अगले 15 वर्ष हमारे लिए बहुमूल्य हैं। हमें 1947 में जो भारत मिला था, वह अंग्रेजी शासन द्वारा बुरी तरह प्रताड़ित व शोषित था। कृषि अर्थव्यवस्था भारत की रीढ़ थी, गुलामी के दौर में सबसे पहले उसी पर प्रहार हुआ था। साल 1901 से 1941 के बीच भारत में प्रति व्यक्ति खाद्यान्न उत्पादन में 24 प्रतिशत की गिरावट आई थी। तब देश की 70 प्रतिशत जमीन पर जमींदारों का कब्जा हो गया था। अंग्रेज और जमींदार मिलकर फसल व मेहनत का आधा हिस्सा छीन लेते थे, लेकिन आज न तो अंग्रेज हैं और न जमींदार। व्यापक समाज को सामने आने का मौका मिला। नतीजा सामने है, भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार पीपीपी (परचेजिंग पावर पैरिटी) के हिसाब से दुनिया में तीसरे स्थान पर है और भारतीय अर्थव्यवस्था का स्थान दुनिया में पांचवां माना जाता है। आज हमारी अर्थव्यवस्था उस ब्रिटेन से भी बड़ी है, जिसने हमें कभी गुलाम बना रखा था। अनेक पैमाने हैं, जिनसे भारत की आर्थिक मजबूती को देखा जा सकता है। 1946 के आसपास भारतीय अर्थव्यवस्था में कुल बचत सकल राष्ट्रीय उत्पाद का महज 2.75 प्रतिशत थी, जो 1971-75 में 12.35 प्रतिशत और मार्च 2019 में 30.1 प्रतिशत पहुंच गई। बचत से यह संकेत मिलता है कि हम नए निवेश में कितने सक्षम हैं। निवेश की हमारी क्षमता बढ़ती जा रही है। ज्यादा दशक नहीं बीते हैं, दुनिया भारत की आर्थिक ताकत नहीं जानती थी। मंदी से मुकाबले के दौर में भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने दुनिया में अपने महत्व को बेहतर ढंग से स्थापित किया।
    बेशक, हमारी आर्थिक आजादी में कमियां भी हैं और तभी तो पांचवें नंबर की अर्थव्यवस्था वाला देश प्रति व्यक्ति आय के मामले में दुनिया में 100 देशों में भी शामिल नहीं है। सामाजिक पैमाने पर भारत के विकास को लंबा सफर तय करना है। संकेत स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था के आकार मात्र से पूरे देश को नहीं देखा जा सकता। अगर हम अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में अग्रणी पांच देशों में शामिल हैं, तो सामाजिक विकास के पैमाने पर भी हमें पांच नहीं, तो टॉप 50 में तो रहना ही चाहिए। यदि हम टॉप सामरिक शक्तियों में शुमार किए जाते हैं, तो हमें कम से कम पांच टॉप रक्षा सामान उत्पादक देशों में भी होना चाहिए। बेशक तरक्की हुई है, सामाजिक, आर्थिक, सामरिक, हर मोर्चे पर, और आज जो भारत है, वह 1962 में नहीं था। लेकिन उतना ही सच है कि पूरे समर्पण के साथ अगर स्वतंत्र देश की सेवा होती, तो हम आज से कहीं ज्यादा मजबूत और सुरक्षित होते।
    भारत में जितनी कमियां हैं, उससे कहीं ज्यादा संभावनाएं हैं। हाल के वर्षों के आंकड़ों को देखें, तो कहीं न कहीं सेवा क्षेत्र पर देश का अत्यधिक भार पड़ रहा है। सेवा क्षेत्र देश के विकास में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान कर रहा है। चिंता यह है कि औद्योगिक योगदान 29 प्रतिशत और कृषि योगदान महज 17 प्रतिशत है। सेवा क्षेत्र को मजबूत करते हुए हमें कृषि और उद्योग पर पहले से ज्यादा ध्यान देना होगा, तभी हमारी स्वतंत्रता विकसित और सशक्त होगी।

     

    मेलबॉक्स / शौर्यपथ / अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी...’ कवि मैथिलीशरण गुप्त की ये पंक्तियां नारी जीवन की दयनीय अवस्था को सटीक बयां करती हैं। हमारे देश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। विडंबना है कि यहां देवियों की पूजा की जाती है, पर महिलाओं को आमतौर पर खिलौना समझ लिया जाता है। देश की लचर न्याय-व्यवस्था इसके लिए जिम्मेदार है। महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले भली-भांति जानते हैं कि कानून उन्हें कठोर दंड नहीं दे सकता। फिर, हमारा समाज अब भी इतना पुरुष प्रधान तो है ही कि आजादी के इतने वर्षों के बाद भी महिलाओं को सारे अधिकार देने से बचता है। हालांकि, सरकारें अपनी तरफ से लगातार प्रयास करती रही हैं, लेकिन अब भी संकीर्ण सोच में बदलाव लाने की कई कोशिशें करनी होंगी। यदि सरकार और समाज मिलकर प्रयास करें, तो इसमें कोई दोराय नहीं कि हम महिलाओं के लिए एक आदर्श देश बना सकते हैं।
    राजेंद्र प्रसाद, रांची, झारखंड

    स्वतंत्रता दिवस का जश्न
    आज देश आजादी का महान पर्व मना रहा है। देश को स्वतंत्र हुए 73 वर्ष हो गए। इन वर्षों में हमने काफी कुछ हासिल किया है। वर्ष 1947 से 2020 तक की यात्रा पर गौर करें, तो यही लगता है कि फर्श से अर्श तक का सफर हमने तय किया है। एक वक्त यहां खाने के भी लाले थे, मगर अब हम इतना अनाज उगा लेते हैं कि जरूरतमंद देशों को भी भेजते हैं। नई-नई तकनीक और प्रौद्योगिकी को भी हमने खूब अपनाया है। कहा तो यह भी जाता है कि भारतीय प्रतिभा के बूते ही अमेरिका का सिलिकॉन वैली आकार ले सका। फिर भी, काफी कुछ किया जाना अभी शेष है। गरीबी उन्मूलन की दिशा में लगातार काम करने के बाद बावजूद हमें अब तक इसमें बहुत सफलता नहीं मिली है। इसी तरह, पठन-पाठन का माहौल भी बेहतर बनाना एक बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी खर्च भी बढ़ाने होंगे। अगर ये सब हम कर सके, तो निश्चय ही आने वाले वर्ष भारत के हैं।
    समिधा, महरौली, नई दिल्ली

    संकल्प लें आज
    स्वतंत्रता दिवस भारतीयों के लिए हर्षोल्लास का दिन है, लेकिन कोरोना-काल ने इस दिन मनने वाले विभिन्न कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया है, जिससे जश्न मानो फीका पड़ गया है। आजादी की सुखद अनुभूति जिस तरह आज से सात दशक पहले लोग किया करते थे, आज भी वैसा ही करते हैं। हालांकि, आजाद होने के बाद लोगों ने सोचा था कि अपना मुल्क होगा, तो बेहतर शासन प्रणाली कायम होगी। मगर दुर्भाग्य से लोकतंत्र की सभी खूबियों को हम अपना नहीं सके हैं। राजनेताओं-नौकरशाहों के गठजोड़ से आम जन कितने संतुष्ट हैं, यह आसानी से समझा जा सकता है। सरकार ने बेशक कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन जब तक भ्रष्टाचार का खात्मा नहीं होगा, तब तक आजादी का वास्तविक एहसास मुश्किल है।
    मिथिलेश कुमार, भागलपुर

    हर नागरिक प्रहरी
    आज क्यों देशभक्ति दो राष्ट्रीय पर्वों में सिमटकर रह गई है? 15 अगस्त और 26 जनवरी के अलावा पूरे साल शायद ही कोई इसकी बात करता है। सवाल यह है कि हम हर समय देशभक्त जैसा आचरण क्यों नहीं करते, ताकि रामराज्य कायम हो? आज आजादी के लिए नहीं, बल्कि देश के भीतर जड़ें जमा रहे आतंकवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमें लड़ना है। मुखौटा पहने अपनों से टकराना है। यह लड़ाई पहले से कहीं ज्यादा गंभीर और बड़ी है, क्योंकि इसमें कौन अपना है और कौन पराया, यह समझना मुश्किल है। इसलिए आज हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए कि वह प्रहरी बनकर भ्रष्टाचारियों, अपराधियों और आतंकवादियों से लडे़।
    शिवांगी खत्री, माछरा, मेरठ

     

    ओपिनियन / शौर्यपथ / वह साल 1918 था। महात्मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे तीन वर्ष हो चले थे। अहमदाबाद में बापू को लगा कि उन्हें हल्का पेचिश हो गया है। फिर भी, कस्तूरबा द्वारा बनाई गई खीर देखकर वह लोभ रोक न पाए और अपनी सेहत बुरी तरह बिगाड़ बैठे। बाद के वर्षों में सत्य के साथ प्रयोग में उन्होंने लिखा, ‘यह यमदूत के लिए पर्याप्त निमंत्रण था’। गांधी को दरअसल स्पेनिश फ्लू के कारण पेट संबंधी दिक्कतें हुई थीं। इस फ्लू ने पहले विश्व युद्ध के आखिरी वर्ष में पूरी दुनिया को तबाह कर दिया था। लेखिका लौरा स्पिने ने अपनी किताब द पेल राइडर में इस महामारी के बारे में काफी कुछ बताया है।

    महज एक साल पहले तक हमारी दुनिया भी स्थिर लग रही थी। राजनीति, अर्थव्यवस्था, प्रभुत्व और रिश्तों के वैश्विक तार इस तरह आपस में गुंथे हुए थे कि उनकी गांठों का खुलना असंभव लग रहा था। मगर दिसंबर, 2019 में सब कुछ बदल गया। चीन के वुहान में एक वायरस ने एक इंसान को संक्रमित किया। यह वह वायरस था, जो चमगादड़ों में रहता है। अमूमन इस तरह के मामले जल्द ही अंजाम तक पहुंच जाते हैं। इंसान संक्रमण-मुक्त हो जाता है और हालात पटरी पर लौट आते हैं। मगर इस बार वायरस के पास यह क्षमता थी कि वह एक इंसान से दूसरे को संक्रमित कर सके। अगर 1918 का स्पेनिश फ्लू तालाब में उठने वाली तरंग की तरह फैला, तो कोरोना वायरस ने तालाब में ऐसी हिलोरें पैदा कर दी हैं, जो पत्थर के लगातार उछलते रहने से बनती रहती हैं। यह बीमारी न सिर्फ हमारी सेहत और कमजोर वर्गों की आजीविका पर कहर बनकर टूटी है, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था और मनोबल को भी इसने पर्याप्त नुकसान पहुंचाया है। पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इससे मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर पड़ा है, उसको कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।

    आज स्वतंत्रता दिवस के दिन, जब पीछे मुड़कर हम देखते हैं, तो हमें उन तीन डोर की जरूरत महसूस होती है, जो भारत व दुनिया को आपस में बांधकर रख सकती है। पहली डोर है, अपने नागरिकों को सम्मान के साथ स्वीकार करना। दूसरी डोर है, इस महामारी से बाहर निकलने का तरीका समझना और तीसरी, नई राह पर चलना।

    भारत से अपरिचित किसी के लिए भी यह जानना अद्भुत होगा कि लॉकडाउन-1 के बाद से देश ने किस तरह से काम किए हैं। हमारे डॉक्टरों, नर्सों और अस्पतालों ने बिना थके मेहनत की है। छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक के प्रशासनिक अधिकारियों ने भी अपनी-अपनी नींद त्याग दी। हमारे वैज्ञानिक, इंजीनियर, उद्योगपति, किसान, सभी एक साथ आगे आए। सरकार और नौकरशाही में हर स्तर पर इस महामारी के तमाम पहलुओं से निपटने की प्रतिबद्धता दिखी, जो आज भी कायम है। वाकई, यह असाधारण समय है, जहां हर दिन फैसले लेने पड़ रहे हैं, और वह भी पेचीदा व विविध इनपुट के आधार पर।

    इस भयावह साल की करीब-करीब दो-तिहाई यात्रा हमने पूरी कर ली है, अब पहले से कहीं अधिक जरूरी है कि हम संजीदा हो जाएं, अपने दायित्व को समझें और अपनी आजीविका फिर से हासिल करें। हाथ पर हाथ धरे बैठकर किसी चमत्कार की उम्मीद कतई न करें। बेशक, हमने इस वायरस के बारे में काफी कुछ जाना है, और हमें अब भी बहुत कुछ समझना है। लेकिन विज्ञान के कुछ निष्कर्ष बेहद यकीनी हैं। उन पर अमल करके हम इस वायरस को हरा सकते हैं और पुरानी जीवनशैली फिर से पा सकते हैं। मास्क का इस्तेमाल, दैहिक दूरी का पालन जैसे व्यवहार, दवा और वैक्सीन हमें इस महामारी से निश्चय ही बाहर निकाल देंगे, लेकिन हमें इससे उबरने और अपनी समृद्धि फिर से हासिल करने के लिए नए रास्ते खोजने होंगे। कोरोना के प्रकोप ने हमारे लोगों, उनकी उम्मीदों और हमारी सरकारों को एक धरातल पर ला दिया है। हमें अब एक साथ काम करना होगा, क्योंकि हमारे पास यही एकमात्र भविष्य है।

    हमें भारत-निर्माण की तरफ बढ़ना होगा और इसके लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे नौजवानों के पास अवसर उपलब्ध हों। भारत के विकास की इस नई गाथा में नेतृत्व सिर्फ युवा ही संभाल सकते हैं। जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत अभियान जैसी कई प्रमुख योजनाएं हमारे पास हैं, तो स्टार्ट-अप, कृषि व उद्यमिता में तमाम अवसर, जहां योग्यता को भरपूर तवज्जो मिलती है। इन सबको भुनाने के लिए हमारे युवाओं को उच्च शिक्षा और कौशल हासिल करने के हर मौके ढूंढ़ने होंगे। कुछ क्षेत्र तो ऐसे हैं, जहां बहुत कम उम्र के नौजवान भी प्रशिक्षण पाकर विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं। इसके लिए उन्हें कोडिंग या मशीनों के संचालन में प्रशिक्षण की जरूरत है। इसी तरह, कृषि उपकरणों का विकास व रखरखाव भी अब बहुत महत्वपूर्ण हो चला है। लिहाजा कंप्यूटर विज्ञान और कोडिंग सीखने के हर उपलब्ध मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। अगर हमारे ग्रामीण इलाकों में ऐसे कार्यक्रम चलाए जाते हैं, तो वे मूल्य-वद्र्धित उत्पादों के निर्यात के बडे़ गढ़ बन सकते हैं। साथ ही, बेहतर जीवन-यापन के लिए वे लोगों को लुभाने भी लगेंगे।

    जाहिर है, यहां विज्ञान और तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है और उनको केंद्र में रखकर ही नीतियां बननी चाहिए। वर्षों बाद लोगों ने शोध और अनुसंधान की मांग की है, जो बताता है कि वैज्ञानिकों से कैसी अपेक्षाएं हैं। इसीलिए हमारे ऊपर बहुत भारी जिम्मेदारी है। महामारी ने बता दिया है कि हमारा लक्ष्य क्या होना चाहिए। हमें आत्म-विश्वास और आत्म-निर्भरता से पर्यावरण, जैव विविधता और टिकाऊ विकास पर पर्याप्त ध्यान देना होगा। 1918 में फ्लू के शिकार महात्मा गांधी कमजोर नहीं पड़े थे, बल्कि उन्होंने पूरी दृढ़ता से उसका मुकाबला किया था। इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें फिर से वही रास्ता अपनाने की ओर बढ़ना चाहिए।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं) के विजय राघवन, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, भारत सरकार

     

    भिलाई / शौर्यपथ /  महापौर परिषद के सदस्य नीरज पाल की अध्यक्षता एवं आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी की उपस्थिति में आज शुक्रवार को निगम के सभागार में सोशल डिस्टेंस मेंटेन करते हुए महापौर परिषद की बैठक हुई। जहां एसटीपी की स्थापना के लिए विष्णु केमिकल लिमिटेड औद्योगिक क्षेत्र को अनुमति प्रदान करने के लिए सर्वसम्मति से महापौर परिषद के सदस्यों ने सहमति जताई! इस प्रस्ताव पर सहमति जताने के साथ ही निगम को इससे राजस्व की प्राप्ति भी होगी! जल कार्य विभाग द्वारा किए गए गणना के अनुसार 5 रुपए प्रति किलोलीटर नाले की जल को लेने की एवज में लिया जाएगा! जितना जल विष्णु केमिकल लिमिटेड द्वारा लिया जाएगा उसकी गणना इसी आधार पर करते हुए राशि की वसूली की जाएगी! बता दें कि विष्णु केमिकल लिमिटेड औद्योगिक क्षेत्र नंदिनी रोड भिलाई के द्वारा एसटीपी की स्थापना की अनुमति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था! 

    शव दफन के लिए जमीन उपलब्ध कराने पर भी लिया फैसला
     भिलाई क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय द्वारा शव दफन के लिए कब्रिस्तान, सतनामी समाज एवं कबीरपंथी समुदाय के शव के अंतिम संस्कार के लिए जमीन की मांग लंबे समय से की जा रही थी, मांग के अनुसार निगम क्षेत्र में बड़े भूखंड की आवश्यकता है, परंतु जमीन की अनुपलब्धता के चलते इसके लिए नगर पालिक निगम भिलाई सीमा क्षेत्र से बाहर लगे हुए ग्रामीण क्षेत्र में नजूल रिक्त भूमि उपलब्ध कराने नजूल शाखा कार्यालय कलेक्टर, दुर्ग को पत्र प्रेषित किया जाएगा! महापौर परिषद के सदस्यों ने इसके लिए सहमति दी है!
    पुराने नेहरू नगर के सामने बने उद्यान की देखरेख
    , संधारण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य ओल्ड नेहरू नगर रेसिडेंस एसोसिएशन करेगी पुराने नेहरू नगर के सामने बने उद्यान की देखरेख, संधारण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य स्वयं के  व्यय से करने के लिए कनिका जैन अध्यक्ष/प्रबंधन समिति ओल्ड नेहरू नगर प्रेसिडेंट एसोसिएशन के द्वारा आवेदन किया गया था! इस प्रकरण को जोन आयुक्त ने महापौर परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया! महापौर परिषद के सदस्यों ने चर्चा उपरांत 1 वर्ष के लिए 15 शर्तों के आधार पर उद्यान के देखरेख, संधारण एवं सौंदर्यीकरण करने पर सहमति जताई है! यदि 1 वर्ष में इन शर्तों का उल्लंघन प्रबंधन द्वारा किया जाता है तो इस पर उचित एवं अंतिम निर्णय लेने का अधिकार आयुक्त का होगा!
    इसी प्रकार से जोन क्रमांक एक एवं 4 में पाइपलाइन संधारण कार्य, स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत पीली मिट्टी चौक, रेशने आवास, नेहरू नगर पूर्व में स्थित, ट्रेंचिंग ग्राउंड के पास, संतोषी पारा में स्थित, आईटीआई के पीछे स्थित एसएलआरएम सेंटर में पुनर्चक्रण किए जाने योग्य कचरे के कचरा पृथकीकरण एवं गीले कचरे से खाद तैयार किए जाने के कार्य हेतु निविदा आमंत्रण के संबंध में, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं की नियुक्ति हेतु अनुमोदन के संबंध में, कुरूद के तालाब को मछली पालन हेतु पंजीकृत मछुआ सहकारी समिति को लीज पर आवंटन करने पर महापौर परिषद के सदस्यों द्वारा चर्चा की गई! बैठक में महापौर परिषद के सदस्य लक्ष्मीपति राजू, जोहन सिन्हा, डॉ दिवाकर भारती, दुर्गा प्रसाद साहू, सूर्यकांत सिन्हा, सुभद्रा सिंह, सत्येन्द्र बंजारे, जी राजू, सुशीला देवांगन, सदीरन बानो, निगम उपायुक्त अशोक द्विवेदी एवं तरुण पाल लहरें, जोन आयुक्त सुनील अग्रहरि, अमिताभ शर्मा एवं पूजा पिल्ले, स्वास्थ्य अधिकारी धर्मेंद्र मिश्रा, लेखा अधिकारी जितेंद्र ठाकुर, सचिव जीवन वर्मा, सहायक स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

    दुर्ग / शौर्यपथ /  जैन समाज का एक प्रतिनिधिमंडल जिसमें जैन समाज के सभी संप्रदाय के लोग ओसवाल पंचायत के बैनर तले दुर्ग जिला कलेक्टर डॉक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे तथा दुर्ग नगर निगम कमिश्नर बर्मन को एक ज्ञापन सौंपकर जैन समाज का सबसे बड़ा त्यौहार पर्यूषण पर्व पर जीव हत्या पर रोक लगाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा । इसके साथ ही जिला कलेक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे को सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश की कॉपी भी  संलग्न कर जानकारी दी जिसमें 15 अगस्त से लेकर 22 अगस्त तक सभी बूचडख़ाने पर रोक लगाने का आदेश पारित किया गया है। इस आदेश की कॉपी जिला कलेक्टर एवं  निगम कमिश्नर बर्मन को दी गई है। ओसवाल पंचायत दुर्ग के द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहां गया की पर्यूषण पर्व पर पूरे भारतवर्ष में जैन धर्म के द्वारा जप तप उपवास अनुष्ठान के माध्यम से सभी धार्मिक क्रियाएं शहर के आध्यात्मिक वातावरण को शुद्ध बनाने हेतु यह सभी प्रयोग पूरे भारतवर्ष में आयोजित होते हैं और ऐसे समय में मूक पशुओं की निर्मम हत्या कर शहर का आध्यात्मिक वातावरण खराब होता है वातावरण की शुद्धता के लिए इन दिनों में सभी मुक्त पशुओं की हत्या पर सर्वोच्च न्यायालय ने 8 दिनों के लिए सभी कत्लखाने बंद रखने का आदेश जारी किया है अखिल भारती पशु पक्षी कल्याण बोर्ड भारत सरकार ने सभी राज्य सरकारों को पर्यूषण पर्व पर  पशु वध  रोकने  आदेशित किया है । जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल में ओसवाल पंचायत दुर्ग के अध्यक्ष गौतम बोथरा मदन जैन गौतम सांखला, नवीन संचेती, निर्मल बाफना, ताराचंद कांकरिया, टीकम  छाजेड़, किशोर कोठारी, नवीन बोथरा, निर्मल श्री श्री माल, गौतम बाटिया, ताराचंद कोचर सहित जैन समाज के विभिन्न संप्रदाय के प्रमुख सदस्य जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल में विशेष रुप से उपस्थित थे।

    दुर्ग / शौर्यपथ /लगभग  दो महीने में ग्राम भाठागांव में बीस एकड़ में लगाए गए मुनगा के साढ़े छह हजार पौधे अब सफलता से बढ़ रहे हैं। इस प्लांटेशन कार्य को आज संभागायुक्त टीसी महावर ने देखा। उन्होंने कहा कि कई मायने में यह कार्य बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें कई पहलु शामिल हैं। जैसे मुनगा प्लांटेशन के माध्यम से पौधरोपण का बड़ा काम है। मुनगा कुपोषण से लडऩे में बहुत बड़ा माध्यम साबित होता है। इसके अलावा आजकल औषधीय उपयोग के लिए भी मुनगा की बड़ी भूमिका सामने आई है। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने बताया कि मनरेगा के माध्यम से प्लांटेशन का कार्य किया गया। ड्रिप इरीगेशन और बोर की सुविधा के लिए डीएमएफ से पंद्रह लाख रुपए दिये गए। इस प्रकार केवल दो महीनों में ही यह तैयार हो गया है। मुनगा के पौधों की उत्तरजीविता कम रहती है लेकिन यहां पौधे पनप रहे हैं। कलेक्टर ने बताया कि इसमें स्वसहायता समूह भी जुड़े हुए हैं। उद्यानिकी विभाग द्वारा इन्हें सब्जी रोपण के संबंध में तकनीकी जानकारी एवं मार्गदर्शन प्रदाय किया जा रहा है। इसके माध्यम से एक पूरी पंक्ति में बरबट्टी, करेला एवं अन्य सब्जी लगाई जा रही है। इसके अलावा गेंदा जैसे फूलों का रोपण भी किया गया है। 
    मरीन ड्राइव की तर्ज पर बनाया जा रहा नकटा तालाब देखा-
     संभागायुक्त ने नकटा तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य भी देखा। लगभग पांच करोड़ 26 लाख रुपए की लागत से इसके सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। सौंदर्यीकरण का मैप संभागायुक्त ने देखा। इंजीनियरों ने बताया कि इसका लैंडस्केप रायपुर के मरीन ड्राइव की तरह सुंदर होगा। इसी तरह हनुमान तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य भी किया जा रहा है। संभागायुक्त ने कहा कि तालाबों के संरक्षण में इस बात का ध्यान रखें कि उनका कैचमेंट एरिया प्रभावित न हो। इस पर इंजीनियरों ने कहा कि सौंदर्यीकरण कार्य इस प्रकार हो रहा है कि इससे तालाब का कैचमेंट एरिया बढ़ेगा। मूलत: सौंदर्यीकरण और विरासत के संरक्षण की दिशा में काम हो रहा है। संभागायुक्त ने कहा कि नकटा तालाब पाटन के सबसे पुराने तालाबों में से है। यह बहुत अच्छी पहल है कि हम अपनी धरोहरों को इस तरह संरक्षित रखने की दिशा में और उन्हें अधिक उपयोगी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
    मोहल्ला कक्षाएं भी देखी-
     संभागायुक्त और कलेक्टर ने ग्राम बटंग में चल रही मोहल्ला कक्षाएं भी देखी। अधिकारियों ने बताया कि पूरी तरह सैनिटाइजेशन करने के पश्चात एवं सोशल डिस्टेंसिंग का खास ध्यान रखकर ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक भवनों में पाठ पढ़ाये जा रहे हैं। संभागायु्क्त भी शिक्षक की भूमिका में नजर आये। उन्होंने बच्चों से गणित के और सामान्य ज्ञान के प्रश्न पूछे। बच्चों ने मुख्यमंत्री का नाम और जिले से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों का सफलतापूर्वक उत्तर दिया। 
    ठकुराइनटोला में देखा सोलर प्रोजेक्ट- संभागायुक्त ने ठकुराइनटोला में सोलर प्रोजेक्ट देखा। यह बिल्कुल खारून नदी से लगकर बनाया जा रहा है। लगभग डेढ़ करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट से 75 एकड़ खेतों में सिंचाई हो सकेगी और लगभग 46 किसान परिवार लाभान्वित होंगे। संभागायुक्त ने गैरपरंपरागत ऊर्जा को बढ़ावा देने के उपायों की प्रशंसा की।

    दुर्ग / शौर्यपथ / कोविड संक्रमण को रोकने के लिए काम करते हुए इससे संक्रमित होकर एवं स्वस्थ होकर लौटे कोरोना वारियर्स का सम्मान स्वाधीनता दिवस के अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री रविन्द्र चौबे द्वारा किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:-
    स्वतंत्रता दिवस सम्मान समारोह श्रेणी स्वास्थ्य - रविचंद्र प्रकाश, कोल्डचैन हैडलर, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, मरोदा, अश्विनी साहू, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, छावनी, लक्ष्मी नारायण, क्र्लक, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, छावनी, राजकुमारी यादव, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, छावनी, अशोक वर्मा, लैब टेक्नीशियन, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, बैकुण्ठधाम, अशोक साहू, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, कोसानगर श्रीमती श्वेता जोसेफ, स्टॉफ नर्स, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, छावनी, श्रीमती तुलसी चतुर्वेदी, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, घासीदास वार्ड, कमलकांत साहू, लैब टेक्नीशियन, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, बघेरा, श्रीमती द्रोपती, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, एस.एस.के. आदर्श नगर, श्रीमती दिव्या, स्टॉफ नर्स, शहरी प्रथामिक स्वास्थ्य केन्द्र, पोटिया, पोषण लाल यादव, फार्मा. ग्रेड-2, सामूदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाटन, दिव्या सनपाल, फार्मा. ग्रेड-2, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाटन, टिमनमन लाल साहू, फार्मा. ग्रेड-2, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाटन, मारुति वैष्णव, सफाई कर्मचारी (जे.डी.एस.), सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाटन, धनंजय साहू, वाहन चालक (जे.डी.एस.), सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र झीट, श्रीमती सेती बाई, सफाई कर्मचारी (जे.डी.एस.),प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बटरेल, श्रीमती सीमा साहू, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गाड़ाडीह, श्रीमती देवीला चंद्राकर, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, उपस्वास्थ्य केन्द्र पचपेड़ी पाटन] टेकेश्वर साहू, टी.बी.एच.बी., दुर्ग, श्रीमती इंद्र अमृत, एस.टी.एस., पाटन, डॉ दुर्गेश वर्मा, दंत चिकित्सा अधिकार, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र उतई, चंद्रशेखर पटेल, लैब टेक्नीशियन, डॉ. हरिओम चंद्राकर, चिकित्सा अधिकारी, प्राथ. स्वा. केन्द्र जुनवानी खम्हरिया, श्रीमती रेवती शिवारे, एम.टी. टेकापार बोरी, मंजू पांडे, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, उप स्वास्थ्य केन्द्र मातरा, श्रीमती उमा साहू, एम.टी., बरहापुर, श्रीमती गोमती साहू, मितानीन, करेली पुरदा, श्रीमती लता देती, मितानीन, करेली पुरदा होमिन देशमुख, मितानीन, पोटिया सेवति बोरी, टुपेन्द्र मढ़रिया, पुरूष स्वास्थ्य कार्यकर्ता, उप स्वास्थ्य केन्द्र, कपसदा, श्रीमती अन्नपूर्णा साहू, नेवई, श्रीमती नेहा मार्टिन, स्टॉफ नर्स, जिला अस्पताल दुर्ग, श्रीमती इंदू सिंग, स्टॉफ नर्स, जिला अस्पताल दुर्ग, तोरण लाल ठाकुर, औषधालय सेवक, आयुर्वेद चिकित्सा विभाग और प्रकाश सिंह ठाकुर, औषधालय सेवक, आयुर्वेद चिकित्सा विभाग का नाम शामिल है।

    स्वंतंत्रता दिवस समारोह में कोरोना वारियर्स का सम्मान श्रेणी स्वछता
    श्रीमती टिकेश्वरी निषाद, सफाई मित्र, नगर पालिक निगम दुर्ग, दयाराम विश्वकर्मा, सफाई कर्मचारी, नगर पालिक निगम भिलाई, सुरन्ना, सफाई कर्मचारी, नगर पालिक निगम भिलाई, नेत्रों बाग, सफाई कर्मचारी, नगर पालिक निगम भिलाई, गजरत पिता नारायण, सफाई कर्मचारी, नगर पालिक निगम भिलाई, श्रीमती रंजीता धुर्वे, सफाई कर्मचारी, नगर पालिक निगम भिलाई, श्रीमती नगमा धुर्वे, सफाई कर्मचारी, नगर पालिक निगम भिलाई, श्री दिलेश्वर सोनवानी, सफाई कर्मचारी, नगर पालिक निगम रिसाली का नाम शामिल है।

    स्वतंत्रता दिवस समारोह में कोरोना वारियर्स का सम्मान श्रेणी (पुलिस विभाग)

    ब्रम्हानंद देशलहरे, प्रधान आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, आर.के. तिवारी, प्रधान आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, उत्तम कुमार सोनी, प्रधान आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, पंकज चौबे, प्रधान आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, झग्गर सिंह टंडन, सहायक उप निरीक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, अर्जुन लाल पटेल, उप निरीक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, रमेन्द्र कुमार, उप निरीक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, संतोष वानखेड़े, आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, तोरण सांडिल्य, आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, ओमप्रकाश देशमुख, आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, शकील खान, आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, शशिकांत यादव, आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, विकास सिंह, आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, प्रिंस तिवारी, आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, कौशल साहू, आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, सत्येन्द्र मढ़रिया, आरक्षक, जिला पुलिस बल दुर्ग, श्रीमती धर्मिन साहू, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाडी केन्द्र बोरिगारका 1, श्रीमती कमलेश्वरी गजपाल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाडी केन्द्र बोरिगारका 2, श्रीमती उत्तरा पाटिल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाडी केन्द्र मोतिमपुर 02, श्रीमती शिवकुवंर यादव, आंगनबाड़ी सहायिका, आंगनबाड़ी केन्द्र सिपकोन्हा 03, श्री अशोक पारकर, पंचायत सचिव, जनपद पंचायत धमधा, श्रीमती भूपेश्वरी राय सरपंच, ग्राम पंचायत दारगांव का नाम शामिल है।

    खाना खजाना / शौर्यपथ /आपको अगर अनोखी रेसिपीज बनाने का शौक है, तो आप मैक्रोनी कप रेसिपी ट्राई कर सकते हैं।

    सामग्री :
    नमकीन बिस्कुट- 20
    चीज- 1/2 कप
    दूध- 3 चम्मच
    बटर- 3 चम्मच
    मैक्रोनी- 8 चम्मच
    तेल- 2 चम्मच
    बारीक कटी प्याज, शिमला मिर्च और पत्ता गोभी- 5 चम्मच
    नमक- स्वादानुसार
    टोमैटो सॉस- 2 चम्मच


    विधि :
    मैक्रोनी को उबाल लें। पैन में तेल गर्म करें और उसमें प्याज और सभी सब्जियों को पांच मिनट तक पकाएं। नमक डालें। दो मिनट और पकाएं। उबली हुई मैक्रोनी डालें, सॉस डालें। अच्छी तरह से मिलाएं और गैस ऑफ कर दें। अब कप बनाने के लिए एक पॉलिथिन में बिस्कुट डालें और बेलन की मदद से बिस्कुट का बारीक पाउडर बना लें। ओवन को 350 डिग्री फॉरेनहाइट पर पहले से गर्म कर लें। एक बाउल में बिस्कुट का यह पाउडर डालें। बाउल में आधा कप चीज और दूध डालें। दूध धीरे-धीरे डालें। बिस्कुट को गूंद लें। मफिन पैन पर बटर लगाएं। थोड़ा-सा मिश्रण मफिन कप में डालें और उसे अच्छी तरह से फैलाकर छोटे से कप का आकार दें। चार मफिन कप ऐसे ही बनाएं और उसे 350 डिग्री फॉरेनहाइट पर तीन से चार मिनट तक बेक करें। किनारे से जब उसका रंग सुनहरा हो जाए तो फोर्क की मदद से मफिन कप को हल्का-सा ढीला कर दें, पर उसे बाहर न निकालें। अब तैयार मैक्रोनी को कप में डालें। ऊपर से कद्दूकस किया चीज डालें। मैक्रोनी कप को वापस ओवन में डालें और चीज के पिघलने तक बेक करें। दो-तीन मिनट के बाद मैक्रोनी कप को चम्मच की मदद से मफिन कप से बाहर निकाल लें। गर्मागर्म सर्व करें।

    हमारा शौर्य

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