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दुर्ग / शौर्यपथ / निजी विधालय की फीस बढ़ोतरी को लगाम लगाने के लिए फीस नियामक गठन कर भूपेश बघेल सरकार का छत्तीसगढ़ वासियों के लिए एक ओर महत्पूर्ण जनप्रिय इतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री द्वारा लिये गये इस फैसले पर कांग्रेसी नेता एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष युकां अयूब खान ने उनके प्रति आभार व्यक्त किया है।
अयूब खान ने आगे कहा कि जबसे प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आयी है तबसे लगातार अनेक लाभकारी योजनाएं की घोषणा और राहत देने का कार्य भूपेश बघेल सरकार कर रही है जैसे किकिसानो के कर्ज माफ करना ओर सरकार घोषणा के अनुसार किसानो बोनस देना, वायपारियो उद्योगतियों के लिए जमीन फ्रीहोल्ड की घोषणा , आमजनता के लिए बिजली बिल आधा करना, ए पी ल और बी पी एल कार्ड धारियों को राशन देना, छत्तीसगढ़ वासियों राशन कार्ड से अस्पतालों में तय सीमा खर्चों तक मुफ्त इलाज देना , जमीन रजिस्ट्री शुल्क कम करना ये इन सभी फैसले से प्रदेश के हर वर्ग को राहत मिला और फायदा हुआ है
अब सरकार का एक और निर्णय मध्यम वर्गीय और गरीब परिवार के हित को लेकर प्रदेश निजी विद्यालयो बेतहाशा फीस वृद्धि को रोक लगाने के लिए फीस नियामक गठन करने का फैसला लेना जिसमें प्रदेश के सभी स्कूल हर वर्ष की फीस या अन्य शुल्क के बढ़ोतरी के पूर्व नियामक से परमिशन लेना होगा ओर नियामक कमेटी में सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रीगण ताम्रध्वज साहू, रवीन्द्र चोबे ओर शिक्षा मंत्री प्रेम सिंह टेकाम सदस्य होंगे और इनके द्वारा फीस के मांप कर फीस लागू करना होगा जिसमें निश्चित फीस बढ़ोतरी कम होगी ओर लगाम में रहेगी जिसका सीधा असर मध्य वर्गी ओर गरीब परिवार को मिलेगा।
शौर्यपथ / वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण उत्तराखंड में पर्यटन उद्योग पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव तथा उनसे जुड़ी समस्याओं एवं सुझावों पर विचार-विमर्श के दौरान औद्योगिक प्रतिनिधयों ने साहसिक पर्यटन शुरू करने और क्वारंटीन अवधि कम करने के सुझाव दिए हैं। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर की मौजूदगी में होटल, राफ्टिंग, एयरो स्पोट्र्स, सीआईआई और फिक्की के 20 से अधिक प्रतिनिधियों की शनिवार को यहां वचुर्अल बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने यह सुझाव दिया। श्री जावलकर ने सरकार की तरफ से उद्योग के कर्मियों को उपलब्ध करायी जा रही मदद की जानकारी दी और उद्योग से सरकार को सहयोग करने की अपेक्षा जाहिर की। होटल उद्योग प्रतिनिधियों ने कोविड टेस्ट के सम्बंध में असमंजस की स्थिति से अवगत कराया। साथ ही पर्यटकों हेतु क्वारंटीन अवधि सात दिन से कम किये जाने का सुझाव दिया गया। राज्य के बॉर्डर पर पर्यटक सहायता केन्द्र भी स्थापित किये जाने के सुझाव दिए गए। शादी समारोह व अन्य कार्यक्रमों से सम्बन्धित आयोजनों में अधिकतम 5० अतिथियों की सीमा के स्थान पर प्रति वर्ग मी० के आधार पर अतिथियों की संख्या के निधार्रण करने का सुझाव दिया गया है।
ऑनलाईन बैठक के दौरान राफ्टिंग व साहसिक पर्यटन से जुड़े प्रतिनिधियों द्वारा साहसिक पर्यटन की गतिविधियों को खोले जाने का अनुरोध किया गया है। साथ ही ट्रैकिंग गतिविधियों को खोलने के लिए वन विभाग को दिशा-निदेर्श जारी किये जाने का भी सुझाव दिया गया। साहसिक पर्यटन की गतिविधियों के संचालन हेतु एडवेंचर टुअर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इण्डिया (एटीएएआई) द्वारा तैयार की गई गाईडलाइन्स को प्रयोग में लाने का सुझाव दिया गया। सीआईआई के प्रतिनिधि ने पर्यटकों से जुड़ी समस्याओं एवं उनके समाधान के लिए कॉल सेंटर स्थापित किये जाने का सुझाव दिया। फिक्की के प्रतिनिधि द्वारा राज्य में पर्यटन को बढ़ाने के उद्देश्य से पर्यटकों को इनसन्टिवध्डिस्काउंट दिये जाने के साथ ही सकारात्मक प्रचार अभियान चलाये जाने का भी सुझाव दिया गया। कोविड से सम्बन्धित सभी प्रोटोकॉल गाईडलाइन्स पर स्पष्ट आदेश जारी किये जाने के सुझाव दिये गये, जिसमें किसी प्रकार का असमंजस न हो। श्री जावलकर ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा पर्यटन उद्योग के कार्मिकों को तात्कालिक सहायता के रूप में 1000 रुपये प्रति कार्मिक उपलब्ध कराये जाने हेतु धनराशि जिलाधिकारियों को उपलब्ध कराई गई है, जिसमें लगभग 2.5० करोड़ की धनराशि वितरित भी की जा चुकी है।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /ऐसा माना जाता है कि अधेड़ उम्र में लोगों का व्यवहार रूखा और चिड़चिड़ा हो जाता है। लेकिन, अधेड़ उम्र के लोग असल में अन्य उम्र के लोगों की तुलना में ज्यादा सकारात्मक होते हैं। एक हालिया शोध के अनुसार 40 से 60 साल की उम्र के लोग युवाओं और बुजुर्गों की तुलना में कहीं ज्यादा सकारात्मक होते हैं।
अमेरिका और नीदरलैंड में 30,000 लोगों पर किए गए शोधों की समीक्षा करने वाले शोधकर्ताओं ने पाया कि अधेड़ उम्र के लोग जीवन में अच्छी चीजें होने लेकर ज्यादा सकारात्मक होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अधेड़ लोग जो अपने जीवन में मूल्यों और संतुष्टि को ज्यादा कीमती समझते हैं वे अच्छी बातों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं। हालांकि, शोध में यह पता चला कि जर्मनी के लोग अधेड़ उम्र में भी सकारात्मक नहीं होते। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विलियम चोपिक ने कहा, जैसे-जैसे लोग परिपक्व होते हैं वे अपने काम में अधिक सक्षम हो जाते हैं।
सफलता उनके लिए थोड़ी आसान हो जाती है क्योंकि वे अपने जीवन के विभिन्न कार्यों में महारत हासिल कर लेते हैं, इसलिए वे अधेड़ उम्र तक पहुंचते ही अधिक आशावादी बनने लगते हैं। अधेड़ उम्र के लोग जीवन में आगे बढ़ने पर कम ध्यान केंद्रित करते हैं और जो वर्तमान में मौजूद है उसे खुशी से जीने को कोशिश करते हैं।
अमेरिका और नीदरलैंड में यह सकारात्मक रवैया 60 साल की उम्र के बाद घटने लगता है। प्रोफेसर चोपिक ने जर्नल ऑफ रिसर्च इन पर्सनैलिटी ने बताया कि सकारात्मक रवैया स्वास्थ्य और लोगों के नजरिये से जुड़ा होता है इसलिए उम्र बढ़ने पर इसमें कमी आती है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / परिवार बढ़ाने की कोशिशों में जुटे पुरुष जरा गौर फरमाएं। इजरायल में हुए एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि रात में टीवी देखने, मोबाइल पर गेम खेलने या लैपटॉप पर दोस्तों के साथ चैटिंग करने की आदत पिता बनने की खुशी छिन सकती है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी के कारण शुक्राणुओं के उत्पादन और गुणवत्ता में आना इसकी मुख्य वजह है।
तेल अविव स्थित असुता मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने अपने ‘स्लीप एंड फैटीग सेंटर’ में नपुंसकता का इलाज करा रहे 116 पुरुषों के शुक्राणुओं के नमूने इकट्ठे किए। ये पुरुष 21 से 59 साल के आयुवर्ग में आते थे। सभी प्रतिभागियों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल और सोने की आदत से जुड़ी एक प्रश्नावली भरवाई गई।
शोधकर्ताओं ने पाया कि दिन ढलने के बाद स्मार्टफोन, टीवी या लैपटॉप का अत्यधिक इस्तेमाल करने से न सिर्फ शुक्राणुओं के उत्पादन में कमी आती है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। शुक्राणुओं के तैरकर अंडाणुओं तक पहुंचने और उनके आकर्षित करने की क्षमता भी घट जाती है।
मुख्य शोधकर्ता डॉ. अमित ग्रीन के मुताबिक स्क्रीन से निकलने वाले नीली रोशनी स्लीप हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ के उत्पादन में बाधा डालती है। इससे व्यक्ति देर रात तक जगा तो रहता ही है, साथ ही उसमें स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का स्त्राव भी बढ़ जाता है। दोनों ही अवस्थाएं शुक्राणुओं की सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं। व्यक्ति को यौन उत्तेजना में कमी की शिकायत सता सकती है।
‘जर्नल स्लीप’ के हालिया अंक में प्रकाशित में ग्रीन ने शाम से ही स्क्रीन का इस्तेमाल घटाने की सलाह दी। उन्होंने यह भी बताया कि स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी कोशिकाओं में विभाजन की प्रक्रिया को भी अनियंत्रित कर सकती है। इससे कैंसर से मौत के खतरा 50 फीसदी तक बढ़ जाता है।
जेब में न रखें मोबाइल-
-सितंबर 2017 में टेक्नियॉन यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए अध्ययन में स्मार्टफोन को पैंट की जेब में रखने से बचने की नसीहत दी गई थी। शोधकर्ताओं का दावा था कि फोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरणें शुक्राणुओं को नष्ट करती हैं। इससे व्यक्ति को नपुंकता की शिकायत हो सकती है।
सावधान-
-मोबाइल-टीवी की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी ‘मेलाटोनिन’ के उत्पादन में बाधा डालती है
-स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का स्राव बढ़ाती है, इससे शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में कमी आती है
लत ये गलत लग गई-
-75 फीसदी से अधिक पुरुष फोन को सिरहाने रखकर सोते हैं
-पार्टनर के मुकाबले 02 गुना ज्यादा समय गैजेट के साथ बिताते हैं
-25 प्रतिशत पुरुष पत्नी के बजाय स्मार्टफोन की शक्ल देखकर सोते हैं
-33 फीसदी रिश्तों में सुधार के लिए फोन की लत से काबू पाना चाहते हैं
खाना खजाना /शौर्यपथ / सन्डे को अगर आप कुछ स्पेशल बनाने की सोच रहे हैं, तो आज बनाएं तंदूरी गोभी टिक्का-
सामग्री
गोभी- 1
गाढ़ा दही- 1 कप
लाल मिर्च पाउडर- 1/2 चम्मच
गरम मसाला पाउडर- 1 चम्मच
चाट मसाला पाउडर- 1 चम्मच
हल्दी पाउडर- 1/2 चम्मच
धनिया पाउडर- 1 चम्मच
अजवाइन- 1/2 चम्मच
कसूरी मेथी- 1 चम्मच
बेसन- 3 चम्मच
तेल- आवश्यकतानुसार
नमक- स्वादानुसार
विधि
गोभी की कलियों को काटकर धो लें और चार से पांच मिनट तक भाप में पका लें। गोभी को भाप पर पकाने से मसाले बेहतर तरीके से उसमें समा पाते हैं। भाप पर पकी हुई को गोभी को एक बड़े से बाउल में निकाल लें। उस बाउल में तेल के अलावा अन्य सभी सामग्री डालें और हल्के हाथों से मिलाएं। बाउल को ढककर आधे घंटे के लिए छोड़ दें। कड़ाही में आवश्यकतानुसार तेल गर्म करें और उसमें गोभी के टुकड़ों को डालें। मध्यम आंच पर कुछ मिनट तक पकाएं। तली हुई गोभी एक बाउल में निकालें। कोयले का एक छोटा-सा टुकड़ा गर्म करें। जब कोयला लाल हो जाए तो उसे एक स्टील की कटोरी में डालें। इस कटोरी को तंदूरी गोभी वाले बाउल के बीच में रख दें। कटोरी में एक चम्मच घी डालें और बाउल को एक मिनट के लिए ढक दें। ऐसा करने से कोयले का फ्लेवर गोभी टिक्का में समा जाएगा। तंदूरी गोभी को सर्विंग प्लेट में डालें। हरी चटनी और प्याज के छल्लों के साथ सर्व करें।
सेहत / शौर्यपथ / आयुर्वेद में तुलसी को रोग नाशक जड़ी-बूटी माना जाता है। तुलसी को कई बीमारियों में दवा की तरह इस्तेमाल करने के साथ स्किन इन्फेक्शन में भी तुलसी की पत्तियों को इलाज किया जाता है। आइए, जानते हैं तुलसी के फायदे-
तुलसी के पोषक तत्व
तुलसी में पाए जाने वाले पोषक तत्व तुलसी की पत्तियों में विटामिन और खनिज तत्व मौजूद होते हैं। इसमें मुख्य रूप से विटामिन सी, कैल्शियम, जिंक और आयरन आदि पाए जाते हैं। इसके साथ ही तुलसी में सिट्रिक, टारटरिक एवं मैलिक एसिड पाया जाता है।
तुलसी के फायदे
खांसी अथवा गला बैठने पर तुलसी की जड़ सुपारी की तरह चूसी जाती है।
श्वास रोगों में तुलसी के पत्ते काले नमक के साथ सुपारी की तरह मुंह में रखने से आराम मिलता है।
तुलसी की हरी पत्तियों को आग पर सेंक कर नमक के साथ खाने से खांसी तथा गला बैठना ठीक हो जाता है।
तुलसी के पत्तों के साथ 4 भुनी लौंग चबाने से खांसी जाती है।
तुलसी के कोमल पत्तों को चबाने से खांसी और नजले से राहत मिलती है।
खांसी-जुकाम में - तुलसी के पत्ते, अदरक और काली मिर्च से तैयार की हुई चाय पीने से तुरंत लाभ पहुंचता है।
10-12 तुलसी के पत्ते तथा 8-10 काली मिर्च के चाय बनाकर पीने से खांसी जुकाम, बुखार ठीक होता है।
फेफड़ों में खरखराहट की आवाज़ आने व खांसी होने पर तुलसी की सूखी पत्तियां 4 ग्राम मिश्री के साथ देते हैं।
काली तुलसी का स्वरस लगभग डेढ़ चम्मच काली मिर्च के साथ देने से खाँसी एकदम शान्त होती है।
10 ग्राम तुलसी के रस को 5 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी, अस्थमा एवं श्वांस रोगों को ठीक किया जा सकता है।
स्किन केयर के लिए तुलसी
तुलसी पिंपल्स और एक्ने पर भी काम करता है। तुलसी रक्त में से टॉक्सिन्स और अशुद्धि हटा कर उसे साफ़ करने का काम करता है। इसमें एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो एक्ने को कम करता है। आप इसके लिए तुलसी पत्तियों का पेस्ट बनाकर उसमें गुलाबजल मिलाएं और 10 मिनट के लिए चेहरे पर लगाएं और फिर सादे पानी से धो लें।
धर्म संसार / शौर्यपथ /खुशहाली का संदेश देने वाला त्योहार ओणम दक्षिण भारत विशेषकर केरल में बहुत ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह ऐसा त्योहार है जो केरल के राजा महाबली की याद में हर वर्ष मनाया जाता है। दस दिनों तक इस उत्सव को उल्लास से मनाया जाता है। यह त्योहार संपूर्णता से भरा हुआ है। हर घर को यह पर्व खुशियों से भर देता है। प्रत्येक घर को फूलों से सजाया जाता है। यह ऐसा त्योहार है जिसमें पूजा मंदिर में नहीं बल्कि घर में की जाती है।
इस त्योहार को लेकर पौराणिक कथा के अनुसार केरल में महाबली नामक राजा राज्य करते थे। भगवान श्री हरि विष्णु ने वामन अवतार धारण कर उनसे तीन पग भूमि मांगी और तीन पग में तीनों लोक को माप लिया। भगवान वामन ने जब तीसरा पग रखा तो राजा बलि पाताल लोक चले गए। राजा बलि के दान और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उनसे वर मांगने को कहा। राजा बलि ने कहा कि प्रभु मैं वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने का समय चाहता हूं। माना जाता है कि ओणम पर राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने आते हैं और अपनी प्रजा के लिए उमंग तथा खुशियां लाते हैं। इस त्योहार में भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना की जाती है। भगवान के वामन अवतार की पूजा की जाती है। ओणम मलयाली हिंदुओं का नववर्ष माना जाता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोरोना संक्रमण के चलते इस साल मोहर्रम में सड़कें वीरान रही वहीं लोगों ने घर में ही रहकर कर्बला के शहीदों को याद किया।
जिले में अबकी बार एक से 10वीं तक निकलने वाले गश्ती, मातम और इमामबाड़ा से निकलने वाला शाही जूलूस कोरोना के कारण स्थगित रहा। राज्य सरकार के निदेर्शों और स्थानीय पुलिस प्रशासन के सख्ती के कारण जहां वह इमाम हुसेन और कर्बला के शहीदों के गम को नहीं मना सके वहीं उन्हें इस बात का दुख था कि ऐसा न कर पाने के कारण कहीं कोई अनहोनी न न हो जाये।इस बार मुहर्रम का जूलूस स्थगित हो जाने से सबसे ज्यादा ठेले, मुहर्रम में ताजिया बनाने वालों और अलम उठाने वालो पर पड़ा है। उल्लेखनीय है कि गोरखपुर का मुहर्रम पूरे प्रदेश में सबसे मशहूर है और पूवीर् उत्तर प्रदेश के अधिकतर जिले अपने मुहर्रम के कार्यक्रम गोरखपुर में स्थित इमाम बाडा के मियां साहब फरूख अदनान शाह के निदेर्शों पर होता है।
शिया और सुन्नी समुदाय के लोग मुहर्रम अपने-अपने तौर तरीकों से मनाते हैं। शिया समुदाय के लोगों ने इस दौरान महिलाओं का मजलिस सम्पन्न हुआ जिसमें शहीदों के बलिदान को याद किया गया जबकि सुन्नी समुदाय न कोविड-19 के आदेशों का पालन करते हुए अपने घरों में शहीदे कर्बला पर कार्यक्रम किये गए। 9वीं मुहर्रम को आज शनिवार को इमाम बाडाा पर रखे जाने वाले ताजिये नजर नहीं आये। शहीदों के याद में लोगों को शर्बत भी नहीं पिलाया गया।
इसके अलावा इमाम बाडें में रखे सोने और चांदी के ताजिए का दर्शन करने वाले जो विभिन्न प्रान्तों से भी गोरखपुर आते थे वह नहीं आ सके। इस ताजिए का दर्शन मुहर्रम के एक से दसवी दिन तक किया जाता रहा है। 10वीं मुहर्रम का दरवाजा बन्द हो जाने के बाद अगले साल ही दर्शन करने मौका मिल पायेगा।
छत्तीसगढ़ सरकार जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभा रही है- राहुल गांधी
संसद-विधानसभा संविधान की रक्षा के लिये जरूरी, भावनाओं से बचेगा संविधान- सोनिया गांधी
छत्तीसगढ़ सरकार अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर कर रही है फैसले
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समावेशी दृष्टिकोण से सभी की बेहतरी के लिए कर रहे हैं काम
नये विधानसभा भवन का निर्माण शीघ्र पूरा होगा- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाना और लोकतांत्रिक व्यवस्था की अगुवाई हमारा संकल्प- डा. महंत
छत्तीसगढ़ विधासभा भवन के नवीन भवन का नवा रायपुर में शिलान्यास: 270 करोड़ रुपए की लागत से 51 एकड़ में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा नया भवन

रायपुर / शौर्यपथ / सांसद श्रीमती सोनिया गांधी एवं सांसद राहुल गांधी और मोतीलाल वोरा की वर्चुअल उपस्थिति में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत ने आज नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नये भवन के निर्माण के लिए बटन दबाकर शिलापट का अनावरण किया। नवा रायपुर के सेक्टर 19 में लगभग 270 करोड रुपए की लागत से यह भवन महानदी और इंद्रावती भवन के पीछे 51 एकड़ में बनेगा। मुख्य भवन का निर्माण 52 हजार 497 वर्ग मीटर में किया जाएगा।
इस अवसर पर सांसद श्रीमती सोनिया गांधी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नये भवन के लिए छत्तीसगढ़ की जनता को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संसद और विधानसभा लोकतंत्र के सबसे बड़े स्तंभ और पवित्र मंदिर हैं। यहां संविधान की रक्षा होती है, लेकिन यह याद रखना होगा कि संविधान भवनों से नहीं भावनाओं से बचेगा। उन्होंने कहा कि हमारे पुरखों ने आजादी की लड़ाई लड़ी, उनके सपनों पूरा करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। श्रीमती सोनिया गांधी ने देश की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश और समाज में नफरत फैलाने वाली ताकतें लोकतंत्र के सामने चुनौती बन गई हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में हैं, लोकतांत्रिक संस्थाएं ध्वस्त की जा रही हैं। नफरत फैलाने वाली ताकतें चाहती हैं कि समाज के सभी वर्ग के लोग अपना मुंह बंद रखें। वह देश का मुंह बंद करना चाहती हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, डा. राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर ने यह सोचा नहीं होगा कि आजादी के 73 वर्ष बाद ऐसे कठिन समय का सामना लोगों को करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज हम शपथ लें कि हम समाज के अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर फैसले लेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री बघेल और छत्तीसगढ़ सरकार के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है। उन्होंने इस मौके पर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों, आदिवासियों, गरीबों के हित में किए जा रहे कामों के साथ ही राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, सुपोषण अभियान, तेंदूपत्ता संग्रहण दर में वृद्धि का उल्लेख किया और कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समावेशी दृष्टिकोण से सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रहे हैं।
सांसद राहुल गांधी ने अपने प्रेषित संदेश में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जनता के प्रति अपने उत्तरदायित्व को बेहतर तरीके से निभा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने इस फैसले से किसानों-गरीबों-मजदूरों के हाथों में पैसा पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ सरकार के जनोन्मुखी कार्य आगे भी जारी रहेंगे। श्री राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ के नये विधानसभा के शिलान्यास के लिए सभी को बधाई दी। सांसद राहुल गांधी के इस संदेश का वाचन संसदीय मंत्री रविंद्र चौबे ने किया।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मौके पर अपने उद्बोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी और भारत माता के जयकारे से की। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर अटल नगर आबाद हो, इसको लेकर छत्तीसगढ़ सरकार चौतरफा उपाय कर रही है। मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आवास बनाने की शुरुआत बीते वर्ष की जा चुकी है। कोरोना संक्रमण की वजह से काम में थोड़ा विलंब हुआ। संसदीय सचिवों को नवा रायपुर में ही आवास आबंटित किए गए हैं। मुख्यसचिव नवा रायपुर में निवास करने लगे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी वर्षों में यहां राज्यपाल, मंत्रीगण और शासन-प्रशासन से जुड़े सभी लोग रहने लगेंगे, यहां सुविधाएं बढ़ेंगी। इस नये शहर को बसाने की सभी अड़चनें दूर हो जाएंगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हमारी यह कोशिश रहेगी कि विधानसभा का नया भवन जल्दी बनकर तैयार हो जाए और हम सब छत्तीसगढ़ की पौने तीन करोड़ जनता और छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा के लिए यहां बैठेंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में सांसद श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी की वर्चुअल उपस्थिति के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नये भवन के शिलान्यास अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बधाई देते हुए कहा कि उनकी परिकल्पना के अनुरूप सर्वसुविधायुक्त आधुनिक तकनीक से लैस भव्य भवन की आधारशिला रखी गई है। यह भवन नहीं, लोकतंत्र का मंदिर है। इस मौके पर हम सभी विधायकगण संकल्प लेते हैं कि हम भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की अगुवाई करेंगे। इस मौके पर उन्होंने छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदारी निभाने वाले पुरखों को नमन किया और उम्मीद जताई कि पुरखों के आशीर्वाद से हम सब छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटे रहेंगे। डा. महंत ने इस मौके पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि आप सभी को छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा का मौका मिला है। उन्होंने गरीबों, किसानों, मजदूरों, आदिवासियों, वंचितों की बेहतरी के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि जनकल्याण के कार्यों के लिए सभी का सहयोग मिल रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ बाबा गुरुघासी दास, संत कबीर की धरती है। छत्तीसगढ़ वास्तव में प्रेम की धरती है। हम सब प्रेम और सद्भाव का उदाहरण बनें।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना संकटकाल में मास्क लगाएं परंतु वाणी की मिठास बनाए रखें। सोशल डिस्टेंसिंग रखें, परंतु दिलों के बीच दूरी न आने दें। नेता प्रतिपक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने विधानसभा भवन के शिलान्यास के लिए मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष सहित सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधायकों के लिए भी निकट भविष्य में आवास की व्यवस्था होगी।
लोकनिर्माण एवं गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का भवन महानदी भवन एवं इंद्रावती भवन के बीच पिछले हिस्से में रिक्त भूमि पर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी रूप-रेखा दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के सामने स्थित नार्थ एवेन्यू एवं साउथ एवेन्यू जैसी रखी गई है। नये विधानसभा भवन के सामने राजपथ जैसा मार्ग बनेगा, जिसके जरिये महानदी एवं इंद्रावती भवन से पैदल भी विधानसभा पहुंचा जा सकेगा। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बनने वाले नए भवन में छत्तीसगढ़ की गौरवशाली और समृद्ध संस्कृति तथा परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। विधानसभा भवन में अत्याधुनिक लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम का भी निर्माण किया जाएगा । भविष्य को ध्यान में रखते हुए नये विधानसभा भवन में करीब 150 से 200 विधायकों के बैठने की व्यवस्था एवं अध्यक्षीय दीर्घा, अधिकारी दीर्घा, प्रतिष्ठित दर्शक दीर्घा, पत्रकार दीर्घा एवं दर्शक दीर्घा का निर्माण किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों, नेता प्रतिपक्ष एवं उपाध्यक्ष और मुख्य सचिव तथा विधानसभा के प्रमुख सचिव, सचिव एवं अन्य सचिव के लिए कक्ष, मीटिंग हॉल एवं स्टाफ कक्षों का निर्माण किया जाएगा। नवीन भवन में विभिन्न समिति कक्षों का निर्माण, पुस्तकालय, एलोपैथिक, होम्योपैथिक एवं आयुर्वेदिक औषधालय, पोस्ट ऑफिस, रेल्वे रिजर्वेशन काऊंटर एवं बैंक के लिए भी कक्षों का निर्माण होगा। विधानसभा के चारों ओर सड़क निर्माण, वृक्षारोपण सहित सौन्दर्यीकरण का कार्य किया जाएगा।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / ईयरफोन लगाकर संगीत सुनते समय लोग अक्सर इस कदर मशगूल हो जाते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि आसपास क्या घट रहा है। कई बार वे आपात स्थिति से भी अनजान रहते हैं। मगर अब ऐसा नहीं होगा।
दरअसल, गूगल अपने पिक्सल बड्स में अटेंशन अलर्ट फीचर , शामिल करने जा रहा है। इससे ईयरफोन एआई और सेंसर की मदद से आपात स्थितियों को पहचानकर संगीत की ध्वनि धीमी कर देगा, ताकि यूजर को पता चल सके कि उसके आसपास क्या हो रहा है। नया अपडेट गूगल के टच कंट्रोल हेडफोन में उपलब्ध है।
अटेंशन अलर्ट फीचर कुत्ते के भौंकने और बच्चे के रोने की आवाज के अलावा एंबुलेंस के सायरन की ध्वनि भांप सकेगा। गूगल अपने पिक्सल बड ईयरफोन के लिए इस आपातकालीन साउंड डिटेक्शन मोड का परीक्षण कर रहा है।
इस मोड से आपात स्थिति आने पर पिक्सल बड्स में संगीत की आवाज खुद ही धीमी हो जाएगी और यूजर को आसपास की स्थिति का अंदाजा लग सकेगा। फिलहाल इस फीचर का परीक्षण चल रहा है। हालांकि, इससे बैटरी जल्द खर्च होगी।
ऐसे कर सकेंगे इस्तेमाल-
-एंड्रॉयड-10 से लैस पिक्सल फोन की सेटिंग में जाकर कनेक्टेड डिवाइस का विकल्प चुनें। इसके बाद पिक्सल बड्स सेटिंग्स में जाएं और साउंड के विकल्प पर टैप करें। फिर एक्सपेरिमेंटल सेक्शन में जाकर अलर्ट को ऑन या ऑफ करें।
खाना खजाना / शौर्यपथ / वेज बिरयानी बहुत ही स्वादिष्ट होती है। वेज बिरयानी बनाने का तरीका बहुत आसान है। यह झटपट तैयार होने वाली रेसिपी है, आइए सीखतें हैं - वेज बिरयानी बनाने की विधि -
सामग्री
बासमती चावल - 1 कप
देशी घी - 1/4 कप
तेल - 1/4 कप
जीरा - 1/2 छोटी चम्मच
हल्दी पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच
अदरक - 1 इंच टुकड़ा कद्दूकस किया हुआ
धनिया पाउडर - 1 छोटी चम्मच
लाल मिर्च पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच
नमक - स्वादानुसार
काजू - 2 टेबल स्पून
काली मिर्च - 7-8
बड़ी इलाइची- 2
लॉग - 5-6
फूल गोभी कटा हुआ - 1 कप,
हरा धनियां - 2 बारीक कटा हुआ,
गाजर - दो तीन कटी हुई
मटर - आधी कटोरी
आलू -आधी कटोरी
टमाटर -आधी कटोरी
प्याज -आधी कटोरी
विधि
सबसे पहले सभी सब्जियों को अच्छे से साफ करके काट लें और अब कुकर में देशी घी डालकर गर्म करें। फिर उसमें जीरा और खड़े मसाले डालकर भूनें और अब प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें अब उसमें कटी हुई सब्जियां, सभी मसाले और चावल डालकर चलाएं चावलों को एक मिनट लिए चलाएं। अच्छे से मसालों में मिला दें और अब पानी डालकर कुकर बंद कर दें। एक सीटी लगाकर गैस बंद कर दें और जब कुकर का प्रेशर निकल जाए तब हरा धनिया डालकर गर्मागर्म वेज बिरयानी का आनंद लें।
ध्यान रखें खड़े मसाले को ही साबुत मसाले कहा जाता है। कुकर में चावल यदि गिलास से नाप के रखें जाएं तो ज्यादा अच्छा रहता है क्योंकि पानी का अंदाज आसानी से लगा सकते हैं। एक गिलास चावल में डेढ़ गिलास पानी और 2 गिलास चावल में ढाई गिलास पानी। लेकिन याद रखे चावल बासमती ही होने चाहिए।
सेहत / शौर्यपथ / आमतौर पर वजन कम करने के लिए लोग सबसे पहले खाना छोड़ देते हैं या डाइटिंग करना शुरू कर देते हैं लेकिन इन सब तरीकों से वजन कम करने की जगह शरीर में कमजोरी आ जाती हैं और बार-बार बीमार होने का खतरा मंडराने लगता है। ऐसे में ध्यान देने की बात यह है कि वजन कम होने पर कमजोरी महसूस न होना ही एक हेल्दी वेट का संकेत है। ऐसे में अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो आपको नाश्ते में हेल्दी चीजें लेनी चाहिए. आइए, जानते हैं कौन-सी हैं वे चीजें-
दलिया- वजन संतुलित रखने के लिए ज्यादातर लोग दलिया का सेवन करते हैं। इसे आप दूध में मिलाकर या फिर सब्जियों के साथ बनाकर खा सकते है। कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, मिनरल से भरपूर दलिया आसानी से पच जाता है।
ओट्स- फाइबर का स्त्रोत माना जाता है। इसमें एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं, जो आपको स्वस्थ रखने के साथ दिल की बीमारियों से भी बचाते हैं। ओट प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है और शुगर व कॉलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखता है।
मल्टीग्रेन ब्रेड सैंडविच- नाश्ते के लिए मल्टीग्रेन ब्रेड सैंडविच सबसे फायदेमंद है। इसमें आप सब्जियां जैसे टमाटर, खीरा आदि डालकर बना सकते है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है, जिसे अधिक मास, मल मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। संपूर्ण भारत की हिंदू धर्मपरायण जनता इस पूरे मास में पूजा-पाठ, भगवत भक्ति, व्रत-उपवास, जप और योग आदि धार्मिक कार्यों में संलग्न रहती है।
ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है। यही वजह है कि श्रद्धालुजन अपनी पूरी श्रद्धा और शक्ति के साथ इस मास में भगवान को प्रसन्न कर अपना इहलोक तथा परलोक सुधारने में जुट जाते हैं।
अब सोचने वाली बात यह है कि यदि यह माह इतना ही प्रभावशाली और पवित्र है, तो यह हर तीन साल में क्यों आता है? आखिर क्यों और किस कारण से इसे इतना पवित्र माना जाता है? इस एक माह को तीन विशिष्ट नामों से क्यों पुकारा जाता है? इसी तरह के तमाम प्रश्न स्वाभाविक रूप से हर जिज्ञासु के मन में आते हैं। तो आज ऐसे ही कई प्रश्नों के उत्तर और अधिक मास को गहराई से जानते हैं-
वैज्ञानिक आधार-
अधिक मास- वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिक मास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिक मास का नाम दिया गया है।
अधिक मास का पौराणिक आधार-
अधिक मास के लिए पुराणों में बड़ी ही सुंदर कथा सुनने को मिलती है। यह कथा दैत्यराज हिरण्यकश्यप के वध से जुड़ी है। पुराणों के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने एक बार ब्रह्मा जी को अपने कठोर तप से प्रसन्न कर लिया और उनसे अमरता का वरदान मांगा। चूंकि अमरता का वरदान देना निषिद्ध है, इसीलिए ब्रह्मा जी ने उसे कोई भी अन्य वर मांगने को कहा। तब हिरण्यकश्यप ने वर मांगा कि उसे संसार का कोई नर, नारी, पशु, देवता या असुर मार ना सके। वह वर्ष के 12 महीनों में मृत्यु को प्राप्त ना हो। जब वह मरे, तो ना दिन का समय हो, ना रात का। वह ना किसी अस्त्र से मरे, ना किसी शस्त्र से। उसे ना घर में मारा जा सके, ना ही घर से बाहर मारा जा सके।
इस वरदान के मिलते ही हिरण्यकश्यप स्वयं को अमर मानने लगा और उसने खुद को भगवान घोषित कर दिया। समय आने पर भगवान विष्णु ने अधिक मास में नरसिंह अवतार यानि आधा पुरुष और आधे शेर के रूप में प्रकट होकर, शाम के समय, देहरी के नीचे अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का सीना चीर कर उसे मृत्यु के द्वार भेज दिया।
मल मास क्यों कहा गया?-
हिंदू धर्म में अधिक मास के दौरान सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। इसलिए इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृह प्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मल मास पड़ गया है।
पुरुषोत्तम मास का नाम क्यों और कैसे पड़ा-
अधिक मास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिक मास को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है। इस विषय में एक बड़ी ही रोचक कथा पुराणों में पढ़ने को मिलती है। कहा जाता है कि भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना पद्धति से हर चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किए। चूंकि अधिक मास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ, तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार ना हुआ। ऐसे में ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे ही इस मास का भार अपने उपर लें। भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और इस तरह यह मल मास के साथ पुरुषोत्तम मास भी बन गया।
इसका महत्व क्यों है?-
हिंदू धर्म के अनुसार प्रत्येक जीव पंचमहाभूतों से मिलकर बना है। इन पंचमहाभूतों में जल, अग्नि, आकाश, वायु और पृथ्वी सम्मिलित हैं। अपनी प्रकृति के अनुरूप ही ये पांचों तत्व प्रत्येक जीव की प्रकृति न्यूनाधिक रूप से निश्चित करते हैं। अधिक मास में समस्त धार्मिक कृत्यों, चिंतन-मनन, ध्यान, योग आदि के माध्यम से साधक अपने शरीर में समाहित इन पांचों तत्वों में संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। इस पूरे मास में अपने धार्मिक और आध्यात्मिक प्रयासों से प्रत्येक व्यक्ति अपनी भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति और निर्मलता के लिए उद्यत होता है। इस तरह अधिक मास के दौरान किए गए प्रयासों से व्यक्ति हर तीन साल में स्वयं को बाहर से स्वच्छ कर परम निर्मलता को प्राप्त कर नई उर्जा से भर जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किए गए प्रयासों से समस्त कुंडली दोषों का भी निराकरण हो जाता है।
अधिक मास में क्या करना उचित-
आमतौर पर अधिक मास में हिंदू श्रद्धालु व्रत-उपवास, पूजा-पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन, मनन को अपनी जीवनचर्या बनाते हैं। पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ-हवन के अलावा श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। अधिक मास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसीलिए इस पूरे समय में विष्णु मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं, उनके पापों का शमन करते हैं और उनकी समस्त इच्छाएं पूरी करते हैं।
पितृ पक्ष और नवरात्रि प्रारंभ
में
लगभग एक मास का अंतर क्यों !
वर्ष 2020 में पितृ पक्ष 02 सितंबर 2020 से प्रारंभ होकर 17 सितंबर 2020 तक रहेगा, इसके बाद 18 सितंबर से 16 अक्टूबर 2020 तक मल मास रहेगा जिस कारण पितृ पक्ष और नवरात्रि में लगभग एक मास का अंतर होगा। ऐसा संयोग इसके पूर्व 1963 और 2001 में हुआ था।
शौर्यपथ । पतितपावनी गंगा को देव नदी कहा जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गंगा स्वर्ग से धरती पर आई है। मान्यता है कि गंगा श्री हरि विष्णु के चरणों से निकली है और भगवान शिव की जटाओं में आकर बसी है। श्री हरि और भगवान शिव से घनिष्ठ संबंध होने पर गंगा को पतित पाविनी कहा जाता है। मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है। एक दिन देवी गंगा श्री हरि से मिलने बैकुण्ठ धाम गई और उन्हें जाकर बोली," प्रभु ! मेरे जल में स्नान करने से सभी के पाप नष्ट हो जाते हैं लेकिन मैं इतने पापों का बोझ कैसे उठाऊंगी? मेरे में जो पाप समाएंगे उन्हें कैसे समाप्त करूंगी?" इस पर श्री हरि बोले,"गंगा! जब साधु, संत, वैष्णव आ कर आप में स्नान करेंगे तो आप के सभी पाप घुल जाएंगे।" गंगा नदी इतनी पवित्र है की प्रत्येक हिंदू की अंतिम इच्छा होती है उसकी अस्थियों का विसर्जन गंगा में ही किया जाए लेकिन यह अस्थियां जाती कहां हैं? इसका उत्तर तो वैज्ञानिक भी नहीं दे पाए क्योंकि असंख्य मात्रा में अस्थियों का विसर्जन करने के बाद भी गंगा जल पवित्र एवं पावन है। गंगा सागर तक खोज करने के बाद भी इस प्रश्न का पार नहीं पाया जा सका। सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की शांति के लिए मृत व्यक्ति की अस्थि को गंगा में विसर्जन करना उत्तम माना गया है। यह अस्थियांं सीधे श्री हरि के चरणों में बैकुण्ठ जाती हैं। जिस व्यक्ति का अंत समय गंगा के समीप आता है उसे मरणोपरांत मुक्ति मिलती है। इन बातों से गंगा के प्रति हिन्दूओं की आस्था तो स्वभाविक है। वैज्ञानिक दृष्टि से गंगा जल में पारा अर्थात (मर्करी) विद्यमान होता है जिससे हड्डियों में कैल्सियम और फोस्फोरस पानी में घुल जाता है। जो जलजन्तुओं के लिए एक पौष्टिक आहार है। हड्डियों में गंधक (सल्फर) विद्यमान होता है जो पारे के साथ मिलकर पारद का निर्माण होता है। इसके साथ-साथ यह दोनों मिलकर मरकरी सल्फाइड साल्ट का निर्माण करते हैं। हड्डियों में बचा शेष कैल्शियम, पानी को स्वच्छ रखने का काम करता है। धार्मिक दृष्टि से पारद शिव का प्रतीक है और गंधक शक्ति का प्रतीक है। सभी जीव अंततःशिव और शक्ति में ही विलीन हो जाते हैं। हर हर गंगे
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
