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भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र के बिजनेस एक्सीलेंस विभाग द्वारा गुणवत्ता-2020 के तहत संयंत्र स्तरीय क्वालिटी सर्कल एवं 5-एस प्रोजेक्ट प्रस्तुतीकरण प्रतियोगिता-2020 का महती आयोजन किया जा रहा है। बीई विभाग द्वारा यह आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है। यह प्रतियोगिता संयंत्र में क्वालिटी सर्कल व 5-एस के तहत किए गए इनोवेटिव कार्यों को प्रस्तुत करने का एक सार्थक मंच प्रदान करता है। इसके तहत संयंत्र की क्वालिटी सर्कल व 5-एस टीमें अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुतीकरण से अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। यह महत्वपूर्ण प्रतियोगिता बिजनेस एक्सीलेंस विभाग के महाप्रबंधक श्री मनोज कुमार दुबे के नेतृत्व एवं वरिष्ठ बिजनेस एनालिशिस्ट सुनील कुमार देशमुख के समन्वय में आयोजित किया गया है।
सर्वाधिक 78 टीमों के भाग लेने का नया रिकॉर्ड
कोरोना के संकट के बावजूद संयंत्र बिरादरी ने अपने सृजनशीलता की धमक दिखाई है। संयंत्र प्रत्येक चुनौती पर विजय पाने के लिए अनेक क्रिएटिव कार्यों को अंजाम दिया है। यही वजह है कि संयंत्र के बिजनेस एक्सीलेंस विभाग द्वारा गुणवत्ता-2020 के प्रतियोगिता में इस वर्ष सर्वाधिक 78 टीमों ने भाग लेने का रिकॉर्ड कायम किया है। जबकि विगत वर्ष आयोजित इस प्रतियोगिता में 55 टीमों ने भाग लिया था। इस प्रकार कोरोना संकट के बाद भी संयंत्र बिरादरी की सृजनात्मक भागीदारी में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस वर्ष भाग लेने वाले 78 टीमों में से क्वालिटी सर्कल में 41 टीमें, 5-एस में 26 टीमें तथा लीन क्वालिटी सर्कल में 11 टीमें भाग ले रही हैं।
पहली बार लीन क्वालिटी सर्कल का आगाज
उल्लेखनीय है कि भिलाई इस्पात संयंत्र में क्वालिटी सर्कल का प्रारंभ वर्ष 1988 से किया गया। इसी प्रकार संयंत्र में 5-एस गतिविधियों को वर्ष 2010 में प्रारंभ किया गया। इसी क्रम में वर्ष 2020 में इस प्रतियोगिता में एक नया वर्ग जोड़ा गया है। जिसके तहत लीन क्वालिटी सर्कल को इस प्रतियोगिता में पहली बार शामिल किया गया है। लीन क्वालिटी सर्कल में उन टीमों को शामिल किया जाता है, जो इससे पूर्व क्वालिटी सर्कल के समस्या निदान टूल्स के प्रयोग में परिपक्व हो चुके हैं।
सिर्फ केस-स्टडी मूल्यांकन से होगा परिणामों का निर्धारण
कोरोना महामारी के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष प्रतियोगिता का आंकलन क्वालिटी सर्कल में सिर्फ केस-स्टडी मूल्यांकन तथा क्यूसी रजिस्टर के आधार पर किया जायेगा। केस-स्टडी मूल्यांकन में 100 अंक तथा क्यूसी रजिस्टर में 20 अंक रखे गये हैं। इसी क्रम में 5-एस टीमों का तथा लीन क्वालिटी सर्कल का मूल्यांकन केस-स्टडी हेतु निर्धारित 100 अंक के आधार पर किया जायेगा। कोरोना के मद्देनजर इस वर्ष साक्षात प्रस्तुतीकरण नहीं किया जायेगा।
तीन स्ट्रीमों में होगी प्रतियोगिता
इस प्रतियोगिता में क्वालिटी सर्कल टीम में कुल 6 सदस्य जिसमें गैर-कार्यपालक वर्ग के 5 सदस्य तथा फेसिलिटेटर के रूप में कार्यपालक के एक सदस्य भाग ले सकेंगे। क्वालिटी सर्कल का आयोजन तीन अलग-अलग स्ट्रीम में आयोजित किया गया है। जिसमें ऑपरेशन में कार्य करने वाले कार्मिक मैन्यूफेक्चरिंग स्ट्रीम में, मेंटेनेंस व अन्य सहायक सेवाओं में संलग्न कार्मिक मैन्यूफेक्चरिंग सपोर्ट स्ट्रीम में तथा अन्य सेवाओं में संलग्न कार्मिक प्योर सर्विसेस स्ट्रीम में अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर सकते हैं। इसी प्रकार 5-एस टीम तथा लीन क्वालिटी सर्कल टीम के प्रत्येक टीम में कुल 4 सदस्य होंगे। जिसमें गैर-कार्यपालक वर्ग के 3 सदस्य तथा फेसिलिटेटर के रूप में एक कार्यपालक सदस्य भाग ले सकेंगे।
बीएसपी के ब्रांड इमेज बनाने में मदद
संयंत्र बिरादरी के सृजनशीलता को संपोषित करने हेतु इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में जीतने वाले कार्मिक आगे क्यूसीएफआई के चैप्टर कन्वेंशन व नेशनल कन्वेंशन मेंं भाग लेने की पात्रता हासिल करते हैं। बिजनेस एक्सीलेंस विभाग के महाप्रबंधक श्री मनोज कुमार दुबे के नेतृत्व एवं वरिष्ठ बिजनेस एनालिशिस्ट श्री सुनील कुमार देशमुख के समन्वय में इसमें बेहतर केस-स्टडी प्रस्तुत करने हेतु बीई विभाग द्वारा समय-समय पर समग्र प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस प्रतियोगिता के चलते संयंत्र में किए गए विभिन्न मॉडिफिकेशनों को राष्ट्रीय स्तर पर स मान प्राप्त होता है और सेल-बीएसपी के ब्रांड इमेज के निर्माण में मदद मिलती है।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / अक्सर होता है जब हम ऑफिस में होते हैं तब हमें अपना फोन वाइब्रेट/साइलेंट मोड पर रखना होता है लेकिन जब घर आ जाते हैं तो उसी फोन को रिंग मोड पर लाना भूल जाते हैं और कई बार अधिकतर जरूरी कॉल मिस्ड हो जाती हैं। ऐसी में कई बार परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। इससे बचने के लिए आप गूगल के ट्रस्टेड प्लेस फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी मदद से आपके घर पहुंचते ही फोन पर से लॉक हट जाएगा। साथ ही वह वाइब्रेट/साइलेंट से हटकर रिंगटोन मोड में आ जाएगा।
फोन में मौजूद kट्रस्टेड प्लेसl को सेट करने के लिए पहले फोन की सेटिंग्स में जाएं, उसके बाद स्मार्ट लॉक के अंदर जाएं। फोन के सर्च मेन्यू में जाकर सीधे kस्मार्ट लॉकl सर्च करने से भी उस विकल्प में पहुंच सकते हैं। kस्मार्ट लॉकl में जाने के लिए पासवर्ड की जरूरत होगी, उसे टाइप करने के बाद आपके सामने स्मार्ट लॉक के विकल्प आ जाएंगे। इसमें सबसे ऊपर kऑन बॉडी डिटेक्शनl है। दूसरे नंबर पर kट्रस्टेड प्लेसl नाम का विकल्प है। इसके बाद उपयोगकर्ता जिस लोकेशन पर अपना फोन अनलॉक रखना चाहते हैं, उसे kएड ट्रस्टेड प्लेसl में जाकर शामिल कर सकते हैं। ध्यान रखें अगर आप घर की लोकेशन या ऑफिस की लोकेशन को शामिल करना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि उस वक्त आप घर पर ही हों क्योंकि ट्रस्टेड प्लेस जीपीएस से वर्तमान लोकेशन लेता है। इसमें एक से ज्यादा लोकेशन को शामिल किया जा सकता है। उसके लिए एड प्लेस नाम के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
ऑफिस पहुंचते ही ऑन हो जाएगा वाइब्रेट मोड
दफ्तर या कॉलेज क्लास में फोन कॉल आने पर तेज आवाज में बजने लगते हैं, जो कई बार शर्मिंदगी में डाल सकता है। इससे बचने के लिए आप गूगल असिस्टेंट के kरूटीनl फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं। रूटीन में उपयोगकर्ता अपनी जरूरत के मुताबिक बदलाव भी कर सकता है।
ऐसे करें सेट
इसके लिए सबसे पहले फोन के सामने बोलें kहे गूगलl ताकि वॉयस असिस्टेंट को सक्रिय किया जा सके। इसके बाद फोन स्क्रीन में नीचे की ओर दाईं तरफ दिए गए kएक्सप्लोरl विकल्प पर क्लिक कर दें। इसके बाद दाईं तरफ ऊपर की ओर जीमेल पर लगी प्रोफाइल फोटो मिलेगी, उस पर क्लिक करें। ऐसा करने से एक छोटी स्क्रीन खुलेगी, जिममें सेटिंग्स नाम का विकल्प होगा, उस पर क्लिक कर दें। इसमें kयूोर इनफोl लिखा मिलेगा, उसी के पास kअसिस्टेंटl भी लिखा हुआ दिखाई देगा, जिसपर आपको क्लिक करना है। kअसिस्टेंटl पर क्लिक करने के बाद कुछ नए विकल्प स्क्रीन पर दिखना शुरू होंगे, उन विकल्पों में नीचे की तरफ स्क्रॉल करके जाने पर kरूटीनl नामक विकल्प दिखेगा। kरूटीनl में कुछ रेडी मेड विकल्प मिलेंगे, जो गुड मॉर्निंग, बेड टाइम लीविंग होम, आई होम और कम्यूटिंग टू वर्क जैसे विकल्प मिलेंगे।
ऑफिस जाते वक्त खुद ब खुद चलने लगेंगे गाने या न्यूज
दफ्तर जा रहे हैं तो गूगल असिस्टेंट के kकम्यूटिंग टू वर्कk विकल्प आपके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। इसके लिए फोन पर हे गूगल के बाद kलेट्स गो टू वर्कl बोलना होगा, उसके बाद फोन पर आज के कैलेंजर संबंधी जानकारियां और मौसम की जानकारी मिलेगी, फिर संगीत या समाचार बजने लगेंगे। ध्यान रखें कि इसमें आप बदलाव कर सकते हैं। बदलाव करने के लिए पहले आपको रूटीन नाम के विकल्प के अंदर जाकर kकम्यूटिंग टू वर्कl वाले विकल्प पर क्लिक करना होगा, उसके बाद नीचे नीले रंग में दिए गए विकल्प kएड एक्शनl पर क्लिक करना होगा। ऐसा करने के बाद दो विकल्प मिलेंगे, जिसमें से ब्राउजर पॉप्यूलर एक्शन पर क्लिक करना होगा। इसमें वॉल्यूम से लेकर अधिकतर सेटिंग्स को कस्टमाइज किया जा सकता है।
घर जाने से पहले अपने आप चला जाएगा मैसेज
उपयोगकर्ता वापस घर जा रहा है और वह चाहता है कि इस बात की जानकारी वह अपने माता-पिता, भाई-बहन या फिर पत्नी को दे दे तो गूगल खुद-ब-खुद मैसेज कर देगा। इसके लिए आपको होम वाले रूटीन पर क्लिक करने के बाद kएड एक्शनl पर जाना होगा, उसके बाद नीचे की तरफ कम्यूनिकेशन के विकल्प में उपयोगकर्ता को सेंड ए टेक्स्ट नाम का विकल्प दिखाई देगा, उसके सामने बने बॉक्स पर क्लिक करना होगा ताकि वह नीला हो जाए और उसके बाद इसी बॉक्स के दूसरी तरफ सेटिंग्स का आइकन होगा, उस पर क्लिक करना होगा। ऐसा करने के बाद आपके सामने दो बॉक्स आएंगे, सबसे ऊपर वाले बॉक्स पर उस नंबर को डालना होगा, जिसे भेजना चाहते हैं और उसके बाद नीचे वाले बॉक्स में संदेश को टाइप किया जा सकता है।
गूगल असिस्टेंट क्या है
गूगल असिस्टेंट को खासतौर से स्मार्टफोन यूजर की सहूलियत के लिए तैयार किया गया है, जो सवालों के जवाब देता है। गूगल पर आप कुछ भी सवाल पूछते है तो वह 80 प्रतिशत जवाब सही ही देता है। गूगल असिस्टेंट से आप वॉइस कमांड देकर कुछ भी काम कर सकते है। चाहे आपको इंटरनेट पर कुछ भी सर्च करना हो आप कर सकते है।
2016 में लॉन्च किया गया था गूगल असिस्टेंट हे गूगल, जो तब गूगल होम का हिस्सा था
2017 में इसकी शुरुआत एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम वाले फोन में भी हो गई थी
सम्पादकीय / शौर्यपथ / अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला न केवल सुखद, बल्कि न्यायपूर्ण भी है। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ देर से सही, लेकिन उचित फैसला किया है, इससे न केवल पीड़ित पक्ष, बल्कि सुशांत सिंह राजपूत के समर्थकों का भी मनोबल बढ़ेगा। 14 जून को हुई सुशांत की मौत को पहली नजर में आत्महत्या का मामला माना गया था, लेकिन बाद में जैसे परिस्थिति जन्य तथ्य और विरोधाभास सामने आते गए, उससे यह मामला गंभीर बनता गया। विशेष रूप से सुशांत के पिता द्वारा बिहार में दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट में जिस तरह से आरोप लगाए गए, उससे यह बात लोगों के दिल तक पहुंची कि सुशांत के साथ विगत छह महीने से लगातार नाइंसाफी हो रही थी। यदि कुछ क्षण के लिए यह मान भी लिया जाए कि उन्होंने आत्महत्या की है, तो भी इस संदेह की पर्याप्त गुंजाइश है कि सुशांत को उस ओर दुष्प्रेरित किया गया। सुशांत की मौत से पहले ही उनकी निराशा, अवसाद का सिलसिला शुरू हो चुका था। यह बात भी सामने आ चुकी है कि यह कुशल अभिनेता अपनी सफलता, संपन्नता, ऊर्जा और युवा चुस्ती के बावजूद इतना हतोत्साहित था कि उसे दवाइयों की जरूरत पड़ रही थी। सबसे बड़ी बात कि दवाइयां वही लोग खिला रहे थे, जिन पर आरोप लग रहे हैं। जो लोग उन्हें डॉक्टर के पास ले जा रहे थे, वही लोग सुशांत को उनके परिवार से दूर कर रहे थे। दुखद है कि ये सारे इशारे मुंबई पुलिस को नहीं दिख रहे थे। ऐसे में, सीबीआई जांच को टालना मुश्किल था।
बिहार पुलिस की जांच को जिस तरह से प्रभावित किया गया, जिस तरह से बिहार के जांच दल के साथ अपराधियों या कोरोना संदिग्ध जैसा सुलूक किया गया, उससे भी लोगों को लगने लगा कि मुंबई पुलिस पर सोलह आना भरोसा नहीं किया जा सकता। मुंबई पुलिस की छवि पर जो दाग लग रहे थे, उन पर सीबीआई जांच के आदेश के साथ सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग गई। अब मुंबई पुलिस के पास एक ही रास्ता है कि वह सीबीआई की जांच में सहयोग करे और सीबीआई की जांच टीम के साथ कतई वैसा सुलूक न करे, जैसा उसने बिहार पुलिस के साथ किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बेशक बिहार पुलिस का मनोबल बढ़ेगा। उसकी एफआईआर और जांच की दिशा सही साबित हुई है। बिहार पुलिस को अभी तक जो तथ्य हासिल हुए हैं, उन्हें सीबीआई को सौंपने का समय आ गया है।
अब सीबीआई को इस मामले की तह में जाकर सुशांत की मौत के मूलभूत कारणों को उजागर करना होगा। बॉलीवुड में हुई इस मौत के अनगिनत दुखद पहलू हैं, जो यह संकेत करते हैं कि सिनेमा दुनिया की नैतिक बुनियाद कितनी जर्जर है। किस तरह से सामंतवाद या मठाधीशी का ढर्रा चल पड़ा है। किस तरह से अनेक अयोग्य और आपराधिक किस्म के लोग भी गुट बनाकर अपने-अपने गलत ढंग से यहां गुजारा कर रहे हैं। सीबीआई जांच अगर शक्तिशाली होते बॉलीवुड की आपराधिक बुराइयों तक पहुंच पाई, तो इससे देश का भी भला होगा। छोटे शहरों और सामान्य परिवारों के प्रतिभावानों के साथ वहां कैसा व्यवहार होता है, यह जानने की जरूरत पूरे देश को है। वह दुखद दास्तां भी सामने आनी चाहिए, जिसे सुशांत अपने साथ लिए गए हैं। सीबीआई को ध्यान रखना होगा कि उस पर अब देश की निगाह है।
मेलबॉक्स / शौर्यपथ / कोरोना के इस भयावह दौर में बच्चे काफी दिनों से विद्यालय नहीं जा रहे हैं, लेकिन अब वे ऑनलाइन क्लास से पढ़ने को बोरियत भरा समझने लगे हैं। विद्यालयों की भूमिका हमारे जीवन में बहुत अधिक होती है। जीवन को गढ़ने और सार्थक बनाने के जो प्रयास विद्यालयों में किए जाते हैं, वे सचमुच एक अच्छे और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए जरूरी माने जाते हैं। कोरोना संक्रमण के भय से बंद विद्यालयों के खुलने का इंतजार अब सारे बच्चे कर रहे हैं, ताकि वे बचपन की बुनियाद मजबूत बना सकें। वाकई, घर पर न तो उन्हें कक्षा जैसा वातावरण मिल रहा है और न स्कूल जैसी सुविधा। लंबे समय तक स्क्रीन देखना बच्चों के लिए अब असहज भी होता जा रहा है। ऐसे में, जब तक विद्यालय नहीं खुलते, तब तक यदि हर अध्यापक अपने आस-पास के बच्चों के साथ थोड़ा समय बिताकर उनकी रुचि और उत्साह को बनाए रखने में मदद करे, तो यह एक बेहद सकारात्मक पहल होगी।
हरीश कुमार शर्मा, बख्तावरपुर गांव
मास्क है जरूरी
पूरी दुनिया इस समय कोरोना महामारी से जूझ रही है, जिसमें बचाव के हर उपाय अपनाने की बात सभी विश्लेषक कह रहे हैं। इन उपायों में दैहिक दूरी का पालन, भीड़-भाड़ से परहेज, साबुन से लगातार हाथ धोना और मास्क का इस्तेमाल प्रमुख हैं। मगर हमारे देश में कुछ लोग मास्क से आजादी का अभियान चलाकर दूसरे लोगों को गुमराह कर रहे हैं। मास्क को गुलामी का प्रतीक बताते हुए वे समाज में यह भ्रम फैला रहे हैं कि यह कोरोना वायरस का प्रसार नहीं रोकता, बल्कि कई बीमारियों की सौगात दे जाता है। ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। आपदा की इस मुश्किल घड़ी में यदि इस तरह की अफवाहें फैलाई जाएंगी, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
सुरेंद्र जाखड़, सीकर, राजस्थान
माही-दौर याद रहेगा
दुनिया के महान क्रिकेटरों में शुमार महेंद्र सिंह धौनी के संन्यास लेने के साथ ही भारतीय क्रिकेट का एक अध्याय समाप्त हो गया। मैदान पर उनकी कमी खलेगी। उन्होंने विश्व स्तर पर भारत को एक अलग पहचान दिलाई। बतौर कप्तान उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि शायद ही कभी भुलाया जा सकेगा। यही कारण है कि वह देश के सबसे सफल कप्तानों की सूची में शीर्ष पर रहेंगे। हालांकि, वनडे और टेस्ट में उनका खेल अब हम नहीं देख पाएंगे, लेकिन आईपीएल में उनके हेलीकॉप्टर शॉट का नजारा देखने को मिल सकता है। क्रिकेट प्रेमी इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
अभिषेक सिंह, जौनपुर
एकजुट लड़ाई जरूरी
देश की सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाया है कि कोरोना काल में इंजीनियरिंग और मेडिकल की परीक्षा तय समय पर ली जाएगी। देखा जाए, तो जीवन चलने का ही नाम है। मसले, मुश्किलें, संघर्ष मानव जीवन का हिस्सा हैं। कोरोना महामारी भले ही देश को खोखला कर दे, पर हमें एक नई शुरुआत करनी ही होगी, इसीलिए बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। परंतु यह भी सत्य है कि हमें हमारी व्यवस्था मजबूत बनानी होगी, क्योंकि सावधानी हटी-दुर्घटना घटी! कोरोना महामारी में सतर्कता बेहद आवश्यक है। जरूरी है कि प्रशासन और जनता, दोनों साथ मिलकर इसके लिए प्रयास करें। इससे अवश्य ही संक्रमण का प्रसार रोका जा सकता है। आवश्यकता है कि हम परिस्थिति की गंभीरता को समझते हुए अपने विवेक का पूर्ण इस्तेमाल करें और सरकार द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें। हालांकि, प्रशासन का यह भी कर्तव्य है कि दैहिक दूरी का पालन करवाते हुए परीक्षा आयोजित करवाए, ताकि संक्रमण फैलने का कोई खतरा न हो।
राजेंद्र प्रसाद, रांची, झारखंड
ओपिनियन / शौर्यपथ / पिछले दिनों संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंध शुरू करने का फैसला किया, जिसने विश्व समुदाय का खासा ध्यान खींचा है। यह संकेत है कि इस क्षेत्र में सियासी समीकरण नए सिरे से गढे़ जा रहे हैं। पिछले कुछ समय से ऐसी कोशिशें जारी हैं, जिसके तीन प्रमुख कारक हैं। पहला, 1950 के दशक के बाद से इस क्षेत्र के तमाम देशों के नीति-निर्धारण में फलस्तीन का मसला प्रमुखता से शामिल रहा है। दूसरा, अरब और ईरान के रिश्तों में कड़वाहट, जो 1979 की ईरानी-क्रांति से पहले से चल रही है। और तीसरा कारक है, तुर्की साम्राज्य के गौरव को फिर से स्थापित करने की एर्दोगन की महत्वाकांक्षा।
पाकिस्तान कश्मीर मसले पर समर्थन जुटाने के लिए अरब, ईरान और तुर्की, तीनों मुल्कों से अपने रिश्तों का बेजा फायदा उठाता रहा है। ईरान के साथ-साथ उसे अरब देशों से भी आर्थिक मदद मिलती रही है। मगर पहली बार यहां के प्रमुख राष्ट्रों के साथ रिश्तों में संतुलन साधने में उसे काफी मुश्किलें पेश आ रही हैं। पाकिस्तानी विदेश मंत्री महमूद कुरैशी ने तो चेतावनी भी दी थी कि यदि इस्लामिक सहयोग संगठन जम्मू-कश्मीर के मसले पर विदेश मंत्रियों की बैठक नहीं बुलाता, तो वह इस संगठन के बाहर कश्मीर मसले को उठाएगा। इससे पाकिस्तान और खाड़ी देशों की आपसी दरारें जगजाहिर हुई हैं। मगर यह तनाव कोई नया नहीं है।
दरअसल, पाकिस्तान और खाड़ी देशों में तनातनी 2014 में शुरू हुई, जब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान से यह गुजारिश की थी कि वह अपनी सैन्य टुकड़ी यमन की जंग में उनकी मदद के लिए भेजे। पाकिस्तान की हुकूमत ने संसद की मंजूरी के बाद ही ऐसा करने की बात कही। यह एक असामान्य घटना थी, क्योंकि अतीत में पाकिस्तान की हुकूमत विदेश नीति से जुडे़ प्रमुख फैसले बिना संसद की सहमति से लेती रही थी। लिहाजा, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने जल्द ही समझ लिया कि ईरान के साथ विवाद में पाकिस्तान उनका साथ देने के लिए तैयार नहीं है और संसद की अनुमति केवल बहाना है।
यमन मसले पर पाकिस्तान से निराश होने के बावजूद इमरान खान के सत्ता संभालने के बाद सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात उसकी मदद के लिए आगे आए। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने साल 2019 में पाकिस्तान का दौरा किया। सऊदी अरब ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को तीन अरब अमेरिकी डॉलर देने का भी फैसला किया, क्योंकि तब मुल्क का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खाली हो गया था। उसने तेल मुहैया कराने में पाकिस्तान को 3.2 अरब डॉलर की रियायत भी दी। मगर बाद के महीनों में, इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के लिए अपनी न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान तुर्की, मलेशिया और ईरान के राष्ट्राध्यक्षों के साथ बैठकें कीं। इसके बाद वह मलेशिया में इस्लामी देशों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए तैयार थे, पर इस यात्रा को स्थगित कर दी। सऊदी अरब की नजर में यह इस्लामी दुनिया में उसके नेतृत्व को चुनौती देने वाला कदम था और उसने इसे इस्लामिक सहयोग संगठन के बरअक्स संगठन खड़ा करने की कोशिश के रूप में देखा।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के मतभेद लगातार सुलगते रहे हैं। सऊदी अरब का साथ देने को तो पाकिस्तान तैयार नहीं है, लेकिन वह चाहता है कि सऊदी उसके एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद करे। वह भारत के खिलाफ इस्लामी देशों के संगठन का भी इस्तेमाल करना चाहता है। नतीजतन, सऊदी अरब ने 3.2 अरब अमेरिकी डॉलर की रियायती तेल सुविधा का नवीनीकरण नहीं किया, जिसकी अवधि पिछले मई माह में समाप्त हो चुकी है। इसके अलावा, उसने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को दिए गए एक अरब डॉलर को वापस करने की मांग भी कर दी है। जाहिर है, कोरोना महामारी के इस संकट काल में जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक दुश्वारियों का सामना कर रहा है, तब सऊदी अरब के साथ बिगड़ते रिश्ते उसकी मुश्किलें और बढ़ाएंगे।
बहरहाल, मिस्र द्वारा कैंप डेविड समझौते के बाद इजरायल से कूटनीतिक रिश्ते बनाने के करीब चार दशकों के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने इजरायल की तरफ अपना हाथ बढ़ाया है। उधर, तुर्की ने अमीरात के साथ अपने राजनयिक संबंध तोड़ने की धमकी दी है। यह संकेत है कि तुर्की अरब देशों को किनारे करके अब तमाम इस्लामी मुल्कों को अपने झंडे के नीचे लाने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
तेल की मांग में आई गिरावट की वजह से सऊदी अरब सहित खाड़ी के राजतंत्र मुश्किल माली हालत का सामना कर रहे हैं। इससे चीन और भारत का महत्व बढ़ गया है, जो सऊदी तेल के प्रमुख खरीदार हैं। सऊदी अरब को अपने बजट को संतुलित रखने के लिए प्रति बैरल न्यूनतम 80-84 अमेरिकी डॉलर की कीमत की जरूरत है, जबकि अभी तेल की कीमत 45 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। इस बीच तुर्की एक आक्रामक विदेश नीति पर आगे बढ़ रहा है। अप्रैल महीने में लीबिया में हस्तक्षेप करने के बाद यूनान और साइप्रस के साथ उसका तनाव बढ़ रहा है। इसमें उसे यूरोपीय संघ का भी विरोध झेलना पड़ रहा है। यह मामला पूर्वी भूमध्य सागर में तेल और गैस की खोज से जुड़ा है।
एर्दोगन की एकेपी पार्टी ने संसद में अपना पूर्ण बहुमत खो दिया है। पिछले साल तो यह पार्टी इस्तांबुल मेयर के प्रतिष्ठित चुनाव में भी हार गई थी। दरअसल, एर्दोगन आक्रामक विदेश नीति के सहारे अपनी गिरती लोकप्रियता को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, और मुस्लिम दुनिया के सऊदी नेतृत्व को चुनौती दे रहे हैं। यह ऐसे समय में हो रहा है, जब उनका देश एक बडे़ आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
इधर, पाकिस्तान बदतर आर्थिक स्थिति का सामना कर रहा है, लेकिन जम्मू-कश्मीर पर अपनी सोच को बदलने के लिए तैयार नहीं है। तुर्की के वोल्कान बोजकिर, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के अगले सम्मेलन के अध्यक्ष होंगे, अभी-अभी पाकिस्तान-यात्रा से लौटे हैं। प्रधानमंत्री इमरान खान और विदेश मंत्री कुरैशी ने उनके साथ बातचीत में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया है। यह संकेत है कि सितंबर में शुरू हो रहे संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में क्या हो सकता है। तुर्की से मेल-मिलाप बढ़ाने से सऊदी अरब सहित अन्य अरब देशों के साथ भी उसके रिश्ते पर असर पडे़गा, जो पहले से ही तनावपूर्ण है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) दिनकर प्रकाश श्रीवास्तव, ईरान में भारत के पूर्व राजदूत
कृषि कालेज का एक साल हुआ पूरा, पहले बैच ने पूरी की पहले साल की पढ़ाई
साल भर की गई कड़ी मेहनत से निखरने लगा भूमि अनुदेशक प्रक्षेत्र का रूप
इस बार शतप्रतिशत रिजल्ट, अब 48 छात्रों को मिलेगा प्रवेश
दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के पहले सरकारी कृषि कालेज की सौगात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले साल इसी दिन दी थी। पाटन की समृद्ध धरा में प्रगतिशील किसानों की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने, कृषि के क्षेत्र में हुनरमंद युवाओं को अवसर देने मुख्यमंत्री ने मर्रा में महाविद्यालय आरंभ करने का निर्णय लिया था। एक साल के भीतर महाविद्यालय की छोटी सी टीम ने इसका स्वरूप निखारने में कड़ी मेहनत की है। राज्य शासन ने यहां आधुनिक कृषि महाविद्यालय के लिए 87 एकड़ भूमि हस्तांतरित की। इसमें 72 एकड़ में भूमि अनुदेशक प्रक्षेत्र बनाने का निर्णय लिया गया। कृषि की पढ़ाई कमरों से अधिक फील्ड में होती है। इसके लिए फील्ड के आकार का चयन, फिर इसे तकनीकी जरूरतों के अनुरूप विकसित करने का जतन इस साल भर में हुआ। प्रोफेसर छात्रों के साथ अध्यापन कक्षों में रहे, फिर मर्रा के किसानों की भूमि में उन्हें ले गए। यहां उन्होंने फील्ड में पढ़ाई कराई। फिर बचे समय में वे भूमि अनुदेशक प्रक्षेत्र में आए, जिसे विकसित करना था। यहां मनरेगा मजदूरों के माध्यम से प्रक्षेत्र विकसित कराया गया। साढ़े सात सौ मजदूरों को जो मर्रा, आमालोरी और गुढिय़ारी के थे, उन्हें लाकडाउन के दौरान भी रोजगार मिला। महाविद्यालय के बुनियाद खड़ी करने में डीन डॉ. अजय वर्मा का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने अपनी टीम के साथ अनुदेशक प्रक्षेत्र में साल भर कड़ी मेहनत की। प्रोफेसर धूप में पूरा दिन खड़े रहकर काम का निरीक्षण करते रहे और अनुदेशक क्षेत्र की जमीन निखरती रही। जब कृषि महाविद्यालय बनता है तो अकादमिक आयोजन भी होते हैं जिसमें विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं। डॉ. अजय वर्मा ने बताया कि यहां राज्य स्तरीय कृषि मेले का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 500 किसानों ने हिस्सेदारी की। इसके संचालन और रखरखाव में भी रोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं। इसके लिए राज्य शासन ने 29 लाख रुपए महाविद्यालय को प्रदान किये। मशरूम उत्पादन के लिए 35 लाख रुपए प्रदान किये। भारत रत्न संत विनोबा भावे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, मर्रा की स्थापना कर मुख्यमंत्री ने बड़ी पहल की है। इस साल यहाँ 48 छात्रों को एडमिशन मिल सकेगा। मुख्यमंत्री के मर्रा में शिक्षक रहे श्री हीरा सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यहां पढ़ाई की, अब यहां उन्होंने कृषि के लिए महाविद्यालय शुरू कर दिया। यह उनकी गुरु दक्षिणा है।
दुर्ग / शौर्यपथ / कोरोना संकट को देखते हुए इंजीनियरिंग कालेज प्रबंधन छात्रों को इंस्टालमेंट में फीस देने की सुविधा उपलब्ध कराएं ताकि एक साथ वित्तीय भार अभिभावकों पर न पड़े। कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने यह बात जिले के इंजीनियरिंग कालेज के प्रबंधकों की बैठक में कही। उन्होंने कहा कि इंस्टालमेंट से फीस देने की सुविधा देने से अभिभावकों को भी राहत मिलेगी और प्रबंधन को भी महाविद्यालय चलाने के लिए आवश्यक फीस मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में संतुलन के रास्ते से काम करना होगा। हमें देखना होगा कि अभिभावकों को किसी तरह की दिक्कत न हो, साथ ही कालेज प्रबंधन को भी समय-समय पर इंस्टालमेंट के रूप में फीस की राशि मिलती रहे ताकि उन्हें अपने महाविद्यालय के सुचारू रूप में संचालन में सहायता मिलती रहे। कलेक्टर ने कहा कि फीस शासन की निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप ही लें। इस संबंध में शासन द्वारा दिये गए निर्देशों के अनुरूप पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिले में तकनीकी शिक्षा की बेहतरी के लिए आपके सुझाव हमेशा आमंत्रित हैं। आपको किसी भी तरह से फीडबैक देना है आप प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं। विद्यार्थियों को बेहतरीन तकनीकी शिक्षा मिल सके, इसी लक्ष्य को लेकर हम सब कार्य कर रहे हैं। बैठक में अपर कलेक्टर बीबी पंचभाई एवं डिप्टी कलेक्टर सुश्री दिव्या वैष्णव भी उपस्थित थीं।
बीजापुर / शौर्यपथ / शासन की स्वरोजगार योजना से लाभान्वित होकर बीजापुर तहसील अंतर्गत ईटपाल निवासी प्रहलाद नाईक गांव में हाॅलर मिल स्थापित कर खेती-किसानी के साथ ही इसे आय का अतिरिक्त जरिया बना चुका है। प्रहलाद नाईक अपने गांव में हाॅलर मिल के माध्यम से ईटपाल, जैतालूर और मांझीगुड़ा के किसानों तथा ग्रामीणों की धान कुटाई सहित गेहूं, चावल, दाल, रागी इत्यादि की पिसाई का कार्य कर रहे हैं। प्रहलाद नाईक ने बताया कि परिवार के पास केवल ढाई एकड़ कृषि भूमि के मद्देनजर खेती-किसानी के अलावा गांव में ही स्वरोजगार अपनाने की सोच रहे थे। इस बीच वर्ष 2015-16 में अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति के अधिकारी ने स्माॅल बिजनेस योजनान्तर्गत स्वरोजगार स्थापित करने की जानकारी देने के साथ ही बैंक के माध्यम से 6 प्रतिशत रियायती ब्याज दर पर3 लाख रूपए ऋण उपलब्ध कराये जाने के बारे में बताया। इस योजना के सम्बन्ध में परिवार के सदस्यों तथा मित्रों से चर्चा कर गांव में ही हाॅलर मिल स्थापित करने के लिए आवेदन पत्र जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति के कार्यालय में जमा कर दिया। इसके बाद उक्त प्रकरण पर 3 लाख रूपए ऋण की स्वीकृति दी गयी। इस ऋण राशि गांव में पूर्व से निर्मित शेड में ही हाॅलर मिल स्थापित किया।
प्रहलाद नाईक बताते हैं कि पहले लोग बीजापुर जाकर धान की मिलिंग और गेहूं, चावल, रागी की पिसाई का कार्य करवाते थे। लेकिन जब गांव में ही हाॅलर मिल लग गया तो ईटपाल, जैतालूर सहित मांझीगुड़ा के लोग धान की मिलिंग करवाने के साथ ही गेहूं, चावल, दाल, रागी की पिसाई करवा रहे हैं। जिससे उन्हे घर पर ही स्वरोजगार उपलब्ध हुआ है। प्रहलाद नाईक बताते हैं इस काम से उन्हे हर महीने 5 से 6 हजार रूपए आमदनी होती है। त्यौहार तथा शादी-ब्याह के सीजन में ग्रामीण धान की मिलिंग तथा आटा-दाल पिसाई ज्यादा करवाते हैं तो आमदनी में भी इजाफा होता है। जिसके फलस्वरूप 3 लाख रूपए ऋण राशि में से अब तक एक लाख 56 हजार रूपए ऋण राशि अदा कर चुके हैं। प्रहलाद ने बताया कि अपने परिवार के ढाई एकड़ कृषि भूमि में धान की फसल लेने के साथ ही रबी सीजन के दौरान एक एकड़ रकबा में साग-सब्जी का उत्पादन करते हैं। जिससे 5 सदस्यीय परिवार का आसानी के साथ भरण-पोषण कर रहे हैं, वहीं बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं। प्रहलाद शासन की स्वरोजगार योजना से लाभान्वित होकर गांव घर में ही आय का जरिया मिलने से खुश है और इसके लिए सरकार को साधुवाद दिया।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मार्गदर्शन एवं राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के प्रयासों से प्रदेश में आम लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में ई-कोर्ट के माध्यम से राजस्व विभाग के कार्यों का सरलीकरण कर राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण की सार्थक शुरूआत हुई है। अब प्रदेश के सभी जिलों में ई-कोर्ट के तहत राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया जा रहा है जिससे लोगों को इसका लाभ मिलने लगा है।
इससे पहले राजस्व न्यायालय में दर्ज सभी प्रकरणों की जानकारी लेने के लिए जिला अथवा तहसील मुख्यालय आना पड़ता था। राजस्व ई-कोर्ट की शुरूआत होने से संबंधितों के लिए राजस्व न्यायालय में प्राप्त होने वाले सभी आवेदन ऑनलाइन दर्ज कर आवेदक को पावती मिल रही है। साथ ही पक्षकारों को उनके प्रकरणो में की जा रही कार्यवाही की अद्यतन जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो रही है। विचारधीन प्रकरण एवं खसरा की जानकारी भी ई कोर्ट में उपलब्ध है। पक्षकारों को सुनवाई के बाद आगामी पेशी तारीख की एसएमएस या मैसेज के माध्यम से सूचना भी दी जा रही है। प्रत्येक न्यायालय की वाद सूची ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा रहा है।
राजस्व प्रशासन ने पारदर्शिता लाने एवं राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए ई-कोर्ट व्यवस्था प्रारंभ की गई है। राजस्व न्यायालयों में संधारित किए जाने वाले दायरा पंजी, वाद पंजी एवं अर्थदण्ड पंजी को ई-कोर्ट व्यवस्था के अंतर्गत ऑनलाईन किया गया है। ई-कोर्ट में विचाराधीन प्रकरणों से संबंधित भूमि की जानकारी ऑनलाईन उपलब्ध करायी गई है। आम जनता को भू अभिलेखों की दुरूस्ती हेतु ऑनलाईन आवेदन करने एवं आवेदन पर की गई कार्यवाही की वर्तमान स्थिति ऑनलाईन देखने की सुविधा पटवारी द्वारा संधारित नामांतरण पंजी को भी ऑनलाईन नामांतरण पंजी में परिवर्तित किया गया है। भू अभिलेखों तक लोगों की आसान पहुंच सुनिश्चित करने हेतु एन्ड्राइड एप्प पर उपलब्ध कराया गया है। खसरा एवं बी-1 की डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रतिलिपि ऑनलाईन निःशुल्क कही से भी कभी भी प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
राजस्व ई-कोर्ट के तहत राजस्व न्यायालय मे कलेक्टर से लेकर नायब तहसीलदार तक के सभी न्यायालय पंजीबद्ध हैं। प्रकरणो के पंजीयन से लेकर अंतिम निराकरण तक सारी कार्यवाही जैसे कि आदेश पत्र लिखना, साक्ष्य अंकित करना एवं अंतिम आदेश पारित करना आदि ऑनलाइन करने या अपलोड करने का प्रावधान है। राजस्व न्यायालय मे प्राप्त होने वाले सभी आवेदन ऑनलाइन दर्ज कर आवेदक को पावती प्रदाय करने की व्यवस्था की गई है। पक्षकारों को उनके प्रकरणो मे की जा रही कार्यवाही की अद्यतन जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा रहा है। विचारधीन प्रकरण एवं खसरा की जानकारी ई-कोर्ट में उपलब्ध है। पक्षकारों को सुनवाई पश्चात आगामी पेशी तारीख की एसएमएस या मैसेज के माध्यम से सूचना संप्रेषण का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक न्यायालय की वाद सूची भी ऑनलाइन उपलब्ध करने का प्रावधान कोर्ट में हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / राम वनगमन पर्यटन परिपथ राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत वर्तमान में मौजूद धार्मिक स्थलों को यथावत रखते हुए निर्माण विकास कार्य किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न शोधपत्रों, अभिलेखों एवं मान्यता अनुसार भगवान श्री राम ने अपने वनवास काल के 14 वर्षों में से अधिकांश समय छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर व्यतीत किए थे। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा, ऐतिहासिकता एवं प्रचीन मान्यताओं से पर्यटकों को परिचित कराने राम वनगमन परिपथ के विकास की योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। राम वनगमन पर्यटन परिपथ को विकसित करने के लिए प्रथम चरण में 9 स्थलों का चयन किया गया है। इन स्थलों में सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) शामिल हैं।
राम वनगमन पर्यटन परिपथ के विकास का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों एवं आगन्तुकों को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रथम चरण में चयनित 9 स्थानों पर कोई भी नया मंदिर निर्माण नहीं किया जा रहा है। अपितु इन स्थानों पर वर्तमान में मौजूद धार्मिक स्थलों, मंदिरों एवं अन्य धार्मिक संरचनाओं को यथावत् रखते हुए परिसर एवं आस-पास के स्थान में पर्यटक सुविधाओं के विकास का कार्य किया जाएगा। इससे पर्यटकों को इन क्षेत्रों में आकर्षित किया जा सकेगा। पर्यटक स्थानीय मान्यताओं, लोक-कला संस्कृति से परिचित हो सकेंगे इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो सकेंगे। पर्यटन मंडल के अधिकारियों ने बताया कि रामाराम जिला सुकमा में पर्यटकों की सुविधा के लिए कैफेटरिया, गार्डन, पेयजल, दुकानें, यात्राी शेल्टर, ट्रेकिंग रूट, पार्किंग आदि अधोसंरचना का विकास प्रस्तावित है।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन द्वारा नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान राज्य में विभिन्न राज्यों से प्रवासी श्रमिकों के गांवों में आने पर उन्हें ऐसे समय में बरसात के मौसम में भी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। उनके द्वारा काम की मांग किए जाने पर पौधारोपण, मुर्गी शेड, बकरी शेड, पक्का फर्श निर्माण, पंचायत भवन, धान चबूतरा निर्माण, गौठानों में वर्मी टांका एवं नाडेफ निर्माण, आगंनबाड़ी भवन निर्माण और प्रधानमंत्री आवास निर्माण के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही अन्य हितग्राही मूलक एवं आजीविका मूलक कार्यों में निरंतर रोजगार प्रदाय किए जा रहे हैं। कांकेर जिले में योजनांतर्गत 3 हजार 142 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
कोरोना महामारी काल में जहां जरूरतमंद परिवारों को काम की मांग के आधार पर रोजगार प्रदान किया जा रहा है। वहीं जिले के पंजीकृत दिव्यांगजनों को भी मनरेगा के तहत रोजगार प्रदान कर मदद की जा रही है। जिला पंचायत के सीईओ डॉ. संजय कन्नौजे ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में अब तक जिले में 2 हजार 108 परिवारों को 100 दिवस कार्य दिया जा चुका है। साथ ही जिले में एक वित्तीय वर्ष में गर्भवती माताओं को कम से कम 50 दिवस कार्य करने पर एक माह का मातृत्व भत्ता 5 हजार 910 रूपए प्रदान किया जा रहा है।
इस प्रकार कोरोना महामारी व बरसात के मौसम में भी जरूरतमंद लोगों और दिव्यांगजनों को काम की मांग करने पर निरंतर रोजगार प्रदाय किया जा रहा है, जिससें उन्हें आर्थिक मदद मिल रही है। वहीं दूसरी ओर गांव में परिसम्पतियों का निर्माण भी हो रहा है। ग्रामीणों के लिए गौठान और वहां मुर्गी शेड, बकरी शेड के निर्माण से आजीविका के नये आयाम विकसित हो रहे हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / महिलाओं को गौठानों से तरक्की की नई राह मिल गई है। कुछ महीनों तक रोजगार के अभाव में आर्थिक तंगी से जूझ रही बिलासपुर जिले की ग्राम परसदा की महिलाओं पर यह कहावत सही साबित हो रही है। ग्राम परसदा की गौठान में जय मां लक्ष्मी स्व सहायता समूह की 10 महिलाएं जैविक खाद बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। साथ ही गांव की अन्य महिलाओं को वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। शासन द्वारा समूह की 10 महिलाओं को वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने का प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रशिक्षित होने के बाद अब ये महिलाएं खाद का उत्पादन कर रही हैं, जिससे उनके जीवन में आर्थिक समृद्धि आ रही है।
जय मां लक्ष्मी स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि उन्होंने 56 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाया और उसमें से 36 क्विंटल खाद की बिक्री भी कर ली है। खाद बेचने से उन्हें 33 हजार रूपये प्राप्त हुए हैं। खाद की खरीदी उद्यानिकी विभाग द्वारा की गई है। अब समूह की महिलाओं ने गोधन न्याय योजना के तहत गोबर से खाद बनाना शुरू कर दिया है। पूर्व में गोबर कम मात्रा में मिलने से वर्मी कम्पोस्ट बनाने का कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा था लेकिन अब गोधन न्याय योजना के लागू होने से पर्याप्त मात्रा में गोबर मिल रहा है। राज्य शासन की गोधन न्याय योजना से यहां की महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और भविष्य में इस योजना से और अधिक तरक्की करने की नयी आस उनमें जगी है। राज्य शासन को धन्यवाद देते हुए समूह की महिलाएं कहती है कि इन योजनाओं के चलते ही अब वे किसी पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज व्रत रखा जाता है। इस साल यह व्रत 21 अगस्त 2020 को पड़ रहा है। हरतालिका तीज व्रत का उत्तर भारत में विशेष महत्व है। इस व्रत में महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए माता पार्वती और भगवान शिव की अराधना करती हैं।
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, हरतालिका तीज व्रत में मिट्टी से बनी शिव-पार्वती प्रतिमा का विधिवत पूजन किया जाता है। इसके साथ ही हरतालिका तीज व्रत कथा को सुना जाता है। मान्यता है कि कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर के लिए इस व्रत को रखती है। कहते हैं कि एक बार व्रत रखने के बाद इस व्रत को जीवनभर रखा जाता है। बीमार होने पर दूसरी महिला या पति इस व्रत को रख सकता है।
हरतालिका तीज व्रत का विशेष महत्व-
शास्त्रों के अनुसार, हरतालिका तीज व्रत में कथा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि कथा के बिना इस व्रत को अधूरा माना जाता है। इसलिए हरतालिका तीज व्रत रखने वाले को कथा जरूर सुननी या पढ़नी चाहिए।
हरतालिका तीज व्रत कथा-
शास्त्रों के अनुसार, हिमवान की पुत्री माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए बालकाल में हिमालय पर्वत पर अन्न त्याग कर घोर तपस्या शुरू कर दी थी। इस बात पार्वती जी के माता-पिता काफी परेशान थे। तभी एक दिन नारद जी राजा हिमवान के पास पार्वती जी के लिए भगवान विष्णु की ओर से विवाह का प्रस्ताव लेकर पहुंचे। माता पार्वती ने यह शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया।
पार्वती जी ने अपनी एक सखी से कहा कि वह सिर्फ भोलेनाथ को ही पति के रूप में स्वीकार करेंगी। सखी की सलाह पर पार्वती जी ने घने वन में एक गुफा में भगवान शिव की अराधना की। भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में पार्वती जी ने मिट्टी से शिवलिंग बनकर विधिवत पूजा की और रातभर जागरण किया। पार्वती जी के तप से खुश होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था।
Hartalika Teej 2020 Puja: हरतालिका तीज की पूजा में इन चीजों की होगी जरूरत
Hartalika Teej :हरतालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पतियों की लंबी आयु के लिए व्रत रखती है। यूपी, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाद्रपद महीने की तृतीया तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला रहकर अगले दिन व्रत का पारण करती हैं। सबसे पहले इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। इस व्रत में भगवान शिव-पार्वती के विवाह की कथा सुनी जाती है।
पूजा साम्रगी
भगवान शिव और पार्वती की मूर्ति रखने के लिए प्लेट
जिस पर पूजा की जाएगी लकड़ी का पाटा
लकड़ी के पाटे पर बिछाने के लिए लाल या पीले रंग का कपड़ा
पूजा के लिए नारियल
पानी से भरा कलश
आम के पत्ते
घी
दिया
अगरबत्ती और धूप
दीप जलाने के लिए देसी घी
आरती के लिए कपूर
पान के पत्ते
सुपारी
केले
दक्षिणा
बेलपत्र
धतूरा
शमी की पत्तियां
जनेऊ
चंदन
माता के लिए चुनरी
सुहाग का सामान
मेंहदी
काजल सिंदूर
चूड़ियां, बिंदी
गौर बनाने के लिए मिट्टी और पंचामृत
सिद्ध व साध्य योग में 21 को हरितालिका तीज, पति की खातिर महिलाएं रखेंगी व्रत, होगी शिव-पार्वती की पूजा
महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिये भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि शुक्रवार 21 अगस्त को हरितालिका तीज करेंगी। महिलाएं 24 घंटे का निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और पार्वती की पूजा करेंगी। पौराणिक मान्यता है कि माता पार्वती सबसे पहले भगवान शिव को वर को रूप में प्राप्त करने के लिए हरितालिका तीज का व्रत रखा था। इधर बाजार में तीज को लेकर फल-फूल, सौंदर्य प्रसाधन की जमकर खरीदारी हो रही है।
21 को रात दो बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त
आचार्य विप्रेंद झा माधव के मुताबिक शुक्रवार को सूर्योदय से लेकर रात 2 बजे तक तृतीया तिथि है। महिलाएं उस दिन सिद्ध तथा साध्य योग में शिव व पार्वती की पूजा करेंगी। शास्त्र के अनुसार इस दिन सुहागन स्त्रियों द्वारा उपवास रहकर श्रद्धापूर्वक शिव-पार्वती का पूजन करने से अखंड सौभाग्य, संतान, धन-वैभव की प्राप्ति होती है। शिव के समान पति की कामना के लिए कुंवारी लड़कियां भी इस व्रत को पूरे विधि-विधान के साथ करती हैं। इसी दिन भगवान विष्णु ने वाराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध किया था।
गजकेशरी योग में होगी पूजा
ज्योतिषाचार्य पीके युग के मुताबिक 21 अगस्त को मंगल, गुरु, शनि व सूर्य अपनी खुद की राशि में रहेंगे। इससे गजकेशरी और बुधादित्य योग का संयोग बनेगा। यह बहुत ही शुभ संयोग है। महिलाओं के सौभाग्य के कारक ग्रह गुरु भी खुद की राशि धनु में रहेंगे।
प्रदोष काल में पूजन सर्वोत्तम
आचार्य के मुताबिक हरितालिका तीज का पूजन प्रदोष(संध्याकाल) काल में सबसे बढ़िया माना जाता है। महिला व्रती प्रदोष काल में भगवान शिव, मां पार्वती और गणेश भगवान की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा करती हैं। पूजन में फल-फूल के साथ सौंदर्य प्रसाधन की सभी वस्तुएं रखी जाती हैं। हरितालिका तीज व्रत की परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है। माता पार्वती ने पहली बार शिव की बालू की प्रतिमा बनाकर पूजा किया था। तब शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया। आज भी महिलाएं मिट्टी से भोलेनाथ-गौरी की मूर्ति बनाकर उनकी पूजा करती हैं। पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर विधि-विधान से पूजा कर कथा श्रवण करती हैं।
पूजा का शुभ मुहूर्त
सुबह 6 बजे से 9 बजे
दोपहर 12. 08 बजे से 02.25 बजे
शाम 6. 16 बजे से रात 9.16 बजे
पूजन में करें अर्पण
- पंचामृत से शिव स्नान के बाद रेशमी वस्त्र अर्पित करें
- गुलाब व इत्र अर्पण कर धूप दिखाएं
- हरा-लाल या पीला वस्त्र धारण कर पूजा करें
- मां पार्वती को हल्दी व भोलेनाथ को सफेद चंदन अर्पित करें
- शिव का शृंगार तथा ओम नमः शिवाय का जाप करें
- शिव-पार्वती को पीला फूल का हार चढ़ाकर रुद्राष्टकम का पाठ करें
- शिव जी को बेलपत्र और दूर्वा चढ़ाए, मेहंदी जरूर लगाएं
- शृंगार की वस्तुओं का दान करें
- शिव-पार्वती को सुगंधित पुष्प अर्पित करें
- सफेद चंदन तथा घी का दीपक प्रज्वलित करें
- महादेव को श्वेत पुष्प अर्पित करें
नजरिया / शौर्यपथ / जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था डिजिटल होती जा रही है, वैसे-वैसे रोजगार बाजार का परिदृश्य भी बदलता जा रहा है। स्थिति यह है कि भविष्य में कई रोजगार ऐसे भी होंगे, जिनके नाम हमने अब तक सुने भी नहीं हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले वर्ष में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में 18 फीसदी की वृद्धि हुई और देश तेजी से डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में, डिजिटल होती भारतीय अर्थव्यवस्था के तहत स्थानीय एवं वैश्विक, दोनों ही स्तरों पर कौशल प्रशिक्षित भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ गए हैं।
यह स्पष्ट दिख रहा है कि कोविड-19 के बीच भी वैश्विक डिजिटल कंपनियां भारत में डिजिटलीकरण के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि व खुदरा क्षेत्र के ई-कॉमर्स में बड़ी मात्रा में निवेश करती दिखाई दे रही हैं। कोविड-19 के बीच भारत में डिजिटल भुगतान उद्योग, ई-कॉमर्स तथा डिजिटल मार्केटिंग जैसे सेक्टर तेजी से आगे बढे़ हैं और इनमें रोजगार के मौके भी बढ़े हैं। यदि हम डिजिटल भुगतान उद्योग की ओर देखें, तो पाते हैं कि नोटबंदी में भी डिजिटल भुगतान उतनी तेजी से नहीं बढ़ा था, जितनी ऊंची छलांग उसने कोरोना महामारी के पिछले चार महीनों में लगाई है।
नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर ऐंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) की अध्यक्ष देवयानी घोष द्वारा डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रतिभाओं के रोजगार मौकों पर हाल ही में दी गई टिप्पणी का उल्लेख करना उपयुक्त होगा। देवयानी ने कहा है कि इस समय प्रतिभा के संदर्भ में भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था में लाभ की स्थिति में है, लेकिन कोरोना महामारी के बाद की दुनिया में मौजूदा आईटी प्रतिभाओं को उभरते तकनीकी कौशल से फिर से लैस करने और दुनिया में खुद को खड़ा रखने के लिए नवाचार यानी इनोवेशन पर जोर देना होगा। निस्संदेह, सरकारी कदमों से डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिला है, पर अभी इस दिशा में बहुआयामी प्रयासों की जरूरत बनी हुई है। हमें डिजिटलीकरण के लिए आवश्यक बुनियादी जरूरत संबंधी कमियों को दूर करना होगा। चूंकि बिजली डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण जरूरत है, अत: ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की पर्याप्त पहुंच और आपूर्ति जरूरी है।
चूंकि हमारी आबादी का एक बड़ा भाग अब भी डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था की दृष्टि से पीछे है, अत: उसे डिजिटल बैंकिंग की ओर आगे बढ़ाना होगा। खासतौर से अभी ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के पास डिजिटली भुगतान के लिए बैंक-खाते, इंटरनेट की सुविधा वाले मोबाइल फोन या क्रेडिट-डेबिट कार्ड जैसी सुविधाएं नहीं हैं, इसलिए ऐसी सुविधाएं बढ़ाने का अभियान जरूरी होगा। फिर ऑनलाइन धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीणों का ऑनलाइन लेन-देन में अविश्वास बना हुआ है, इसलिए ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार को अपनी साइबर सुरक्षा मजबूत करनी पड़ेगी।
देश में डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के लिए मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में देश को आगे बढ़ाना जरूरी है। मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड टेस्ट करने वाली वैश्विक कंपनी ओकला के मुताबिक, अप्रैल 2020 में मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में 139 देशों की सूची में भारत 132वें पायदान पर है। ओकला के मुताबिक, अप्रैल 2020 में भारत की औसत मोबाइल ब्रॉडबैंड डाउनलोड स्पीड 9.81 एमबीपीएस रही, वहीं इसकी औसत अपलोड स्पीड 3.98 एमबीपीएस थी। मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में दक्षिण कोरिया, कतर, चीन, यूएई, नीदरलैंड, नॉर्वे बहुत आगे हैं। इतना ही नहीं, स्पीड के मामले में भारत को पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों ने भी पीछे छोड़ रखा है। ऐसे में, भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार के मौकों का फायदा लेने के लिए इंटरनेट स्पीड बढ़ाने के अधिकतम प्रयास करने होंगे।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के आधार को मजबूत करने की जरूरत है, तभी यह क्षेत्र ज्यादा से ज्यादा रोजगार देने की स्थिति में होगा। उम्मीद है कि देश की नई पीढ़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था के पीछे छिपे अवसरों को तलाशेगी और देश-दुनिया की नई जरूरतों के मुताबिक अपने आप को सुसज्जित करेगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) जयंतीलाल भंडारी, अर्थशास्त्री
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
