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LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / अच्छी त्वचा के लिए एक्सफोलिएटिंग, क्लेंजिंग, टोनिंग और मोइश्चराइजिंग करना जरूरी है. ये चार चीजें स्वस्थ और ग्लोइंग स्किन के स्तंभ हैं. हम सब ये जानते हैं कि क्लेंजिंग क्या होती है. हालांकि, बहुत से लोग ये नहीं जानते हैं कि क्लेंजिंग और टोनिंग दोनों साथ-साथ चलते हैं. एक ओर जां क्लेंजिग आपके चेहरे को साफ करता है तो वहीं टोनर बची हुई धूल-मिट्टी को हटाने का काम करता है.
हालांकि, यदि आपकी ऑयली स्किन है तो आपके लिए क्लेंजिंग और टोनिंग दोनों ही बहुत अधिक जरूरी है. टोनिंग की मदद से आपके पोर्स छोटे हो जाते हैं और स्किन का पीएच स्केल बना रहता है. इसके साथ ये आपके चेहरे पर प्रोटेक्शन लेयर बनाते हैं और मोइश्चराइजर लगाने से पहले एक बेस तैयार कर देते हैं. साथ ही यहां दिए गए टोनर्स को आप आसानी से घर पर बना सकते हैं.
1. सेब का सिरका
- एक चम्मच सेब का सिरका और एक कप पानी को मिक्स कर लें.
- अब कॉटन पैड को इसमें भिगो लें और चेहरे को साफ कर लें.
2. पुदीने की पत्तियां
- 6 कप पानी उबालें.
- अब इसमें कुछ पुदीने की पत्तियों को डालें.
- इस मिक्स्चर को ठंडा होने दें.
- कॉटन पैड को इसमें भिगो लें और अपने चेहरे को साफ कर लें.
3. नींबू का रस और पेपरमिंट टी
- एक चम्मच नींबू का रस और पेपरमिंट टी बैग लें और इसमें 1 कप गर्म पानी मिला लें.
- टी बैग को पानी में बैठ जाने दें और कुछ मिनट के लिए इस पानी को ऐसे ही छोड़ दें.
- अब पानी में से टी बैग निकाल लें और पानी को ठंडा होने दें.
- कॉटन पैड को इसमें भिगोएं और अपने चेहरे को साफ कर लें.
4. एलोवेरा जेल
- एलोवेरा की एक पत्ती को काटे और उसमें से जेल निकाल लें.
- एक कप पानी में 2 चम्मच जेल को अच्छे से मिला लें.
- इस सॉल्यूशन को अपने चेहरे पर कॉटन पैड से लगाएं.
- ये सॉल्यूशन आपके सनबर्न और रैश को भी ठीक करता है.
5. खीरा
- आधा ताजा खीरा लें और इसके छोटे छोटे टुकड़े कर लें.
- अब एक बर्तन में एक कप पानी डालें और कटा हुआ खीरा डालें.
- पानी में खीरे को ब्लेंड कर लें.
- इसे ठंडा होने दें और फिर छनी से पानी को छान लें.
- कॉटन पैड की मदद से इसे अपने चेहरे पर लगाएं.
6. बर्फ का पानी
- बर्फ के पानी में कॉटन पैड को डालें और इसे अपने चेहरे पर लगाएं.
- आप चाहें तो सीधे बर्फ को भी अपने चेहरे पर रगड़ सकती हैं.
7. कच्ची अंबी का बीज
- कुछ कच्ची अंबी के बीज लें.
- इन बीज को पानी के बर्तन में रखें और उसे 30 मिनट के लिए उबाल लें.
- पानी को ठंडा होने दें
- हर बार मुंह धोने के बाद इस टोनर का अपने चेहरे पर इस्तेमाल करें.
8. कैमोमाइल
- 5 मिनट के पानी में कैमोमाइल चाय की पत्ति के बैग को उबालें.
- अब इसे ठंडा होने दें और फिर एक बोतल में ये पानी डाल लें.
- हर बार मुंह धोने के बाद अपने चेहरे पर कॉटन पैड की मदद से इसे लगाएं.
9. नींबू का रस
- 1 कप पानी में 1 चम्मच नींबू का रस मिला लें.
- इस सॉल्यूशन को कॉटन पैड की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं.
- आप चाहें तो सीधे नींबू के छिलके को अपने चेहरे पर रगड़ सकती हैं.
- इससे आपके चेहरे से टैन हटेगा और ऑयल भी कंट्रोल होगा.
10. ग्रीन टी
- ग्रीन टी बैग को उबालें और इसे ठंडा होने दें.
- इस चाय को हर बार मुंह धोने के बाद टोनर के रूप में लगाएं.
बता दें कि ऑयली त्वचा के लिए टोनर बेहद आवश्यक हैं और ये आपकी त्वचा को फ्रेश और ग्रीस फ्री रखते हैं. इसके अलावा ये मुंहासों को होने से रोकते हैं.
नजरिया / शौर्यपथ / आज हिरोशिमा दिवस है। साल 1945 में 6 अगस्त के दिन ही दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने इस जापानी शहर पर ‘लिटिल ब्यॉय’ नामक परमाणु बम गिराए थे। और इसके तीन दिनों बाद 9 अगस्त को जापान के ही नागासाकी में ‘फैट मैन’ नामक एक अन्य परमाणु बम गिराया गया था। इन बमों की तबाही ऐसी मची कि दोनों शहरों में लगभग साढ़े तीन लाख लोग झटके में मारे गए, जबकि विकिरण का प्रभाव ऐसा फैला कि बाद की कई पीढ़ियां विकलांग पैदा होती रहीं। आज विश्व में परमाणु हथियारों की संख्या लगभग 13,450 हो गई है, जिनकी मारक क्षमता इन दोनों बमों से कई गुना ज्यादा है। ये हथियार अपने अल्पकालीन और दीर्घकालीन प्रभाव से मानव सहित पृथ्वी के अधिकांश जीवन को समाप्त करने की विध्वंसक क्षमता रखते हैं। बेशक शीत युद्ध के चरम के समय की तुलना में आज परमाणु हथियारों के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है, फिर भी तमाम विशेषज्ञ यही मानते हैं कि परमाणु हथियारों से जुड़ा खतरा कम नहीं हुआ है, बल्कि बढ़ गया है।
इसके अनेक कारण दिखाई देते हैं। पहली वजह तो यह है कि उस समय अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों के नियंत्रण की जो संधियां या समझौते थे, उनका असर तेजी से कम होता जा रहा है। इनमें से एक संधि ‘द इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस’ (आईएनएफ) 2019 में टूट चुकी है, जबकि दूसरी बड़ी संधि ‘न्यू स्टार्ट’ के अगले साल फरवरी में नवीनीकरण की संभावना बहुत कम है, क्योंकि इसकी तैयारी बहुत धीमी नजर आ रही है। दूसरा कारण यह है कि परमाणु शस्त्र कम करने के समझौते समय के साथ-साथ कई कमियों के शिकार हो गए। वर्ष 1987, 1991 और 1993 में अमेरिका और सोवियत संघ (या रूस) के बीच तीन महत्वपूर्ण समझौते हुए थे, जिनका व्यापक स्तर पर स्वागत किया गया था और यह माना गया था कि अब इन दोनों देशों में बडे़ पैमाने पर परमाणु शस्त्र नष्ट किए जाएंगे, पर वास्तविक स्थिति मानव विकास रिपोर्ट 1994 बताती है, जिसके मुताबिक, ‘इन संधियों से तनाव कम तो हुआ, लेकिन इनकी अपनी सीमाएं हैं। इनमें यह निर्देश नहीं दिया गया है कि ‘वारहेड’ को ही नष्ट कर दिया जाए।’
एक समय था, जब परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा मुख्य रूप से दो बड़ी ताकतों अमेरिका और रूस की ओर से था, पर अब परमाणु हथियार नौ देशों के पास हैं। इतना ही नहीं, आतंकवादियों के पास भी छोटे परमाणु हथियार पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। फिर, चार-पांच ऐसे देश भी हैं, जो निकट भविष्य में परमाणु हथियार प्राप्त कर सकते हैं। एक अनुमान यह भी जताया गया है कि अमेरिका से संबंध अधिक तनावपूर्ण होने के बाद चीन तेजी से अपने परमाणु शस्त्र बढ़ा सकता है। हाल ही में स्टॉकहोम पीस रिसर्च संस्थान ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जिन देशों के पास परमाणु हथियार हैं, वे सभी इनके आधुनिकीकरण की दौड़ में हैं। इसके अलावा, युद्ध में परमाणु हथियारों के ‘टैक्टिकल’ हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आशंका भी जताई जा रही है। इसका अर्थ है कि किसी देश की बढ़ती सेना को रोकने के लिए रणभूमि में इसका इस्तेमाल हो सकता है।
इन्हीं तमाम कयासों को ध्यान में रखते हुए कई विशेषज्ञ यह मानने लगे हैं कि परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त, जिस तरह से अंतरिक्ष क्षेत्र का सैन्यीकरण तेजी से बढ़ रहा है, वह भी चिंता का विषय है। दुनिया में अमन-शांति बहाल करने की दिशा में काम करने वाले कई संस्थानों का मानना है कि किसी भी हालत में अंतरिक्ष क्षेत्र में किसी परमाणु हथियार का प्रवेश नहीं होना चाहिए। ऐसे में, मौजूदा वक्त की मांग यही है कि परमाणु हथियारों की विध्वंसकता के अभिशाप से धरती को मुक्त किया जाए। इसके लिए विश्व स्तर पर सभी अमनपसंद नागरिकों और संस्थाओं को एक बड़ा वैश्विक अभियान चलाना चाहिए।
इसमें कोई दोराय नहीं कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य देश भी परमाणु हथियारों से मुक्त धरती के पैरोकार हैं। हम भी परमाणु हथियार विहीन धरती के उद्देश्य का समर्थन करते हैं, जबकि हम एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र हैं। हम इसलिए इसमें मुखर हैं, क्योंकि परमाणु शक्ति होने के बावजूद एक जिम्मेदार राष्ट्र का अपना दायित्व बखूबी समझते हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) भारत डोगरा, सामाजिक कार्यकर्ता
सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ /करोड़ों भारतीयों की आस्था के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्मस्थल पर भव्य मंदिर का सपना सदियों पुराना था, और अब जब वह साकार रूप लेने लगा है, तो स्वाभाविक ही तमाम आस्थावान लोगों के लिए यह खुशी का एक अवसर है। अयोध्या में मंदिर-निर्माण का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल एक सूत्र वाक्य दोहराया कि ‘राम सबके हैं और सब राम के हैं।’ इस वाक्य के गहरे निहितार्थ हैं। यह एक समरस समाज का आधार वाक्य है। निर्माण की प्रस्तावना है। यह प्रस्तावना धर्म के दायरे से आगे जाकर राष्ट्र-निर्माण से जुड़ती है। जाहिर है, राष्ट्र का निर्माण कभी थमता नहीं, वह हर पल आकार लेता रहता है। अपने नागरिकों में, अपनी संस्थाओं के जरिए। और किसी भी समाज में संस्थाओं का निर्माण होता है, उनमें जनता के अटूट विश्वास से। इसलिए मंदिर-निर्माण का यह अवसर याद दिला रहा है कि हमें अपनी राष्ट्रीय संस्थाओं की मर्यादा को भी कमतर नहीं करना चाहिए।
एक ऐसे दौर में, जब हम कुदरती व मानवीय विध्वंसों से लोहा ले रहे हैं, निर्माण का महत्व कहीं अधिक शिद्दत से महसूस होना चाहिए। हमें कितना कुछ गढ़ना अभी शेष है, यह महामारी हमें बता रही है और देश की सरहदें भी इसके संकेत कर रही हैं। गौर कीजिए, देश में कोविड-19 से मरने वालों की तादाद 40 हजार तक पहुंच गई है और उनमें से कई सारे लोगों की जान हम इसलिए नहीं बचा सके, क्योंकि हमारे पास उनके इलाज की माकूल व्यवस्था नहीं थी। लाखों भारतीय हर साल बाढ़ की चपेट में आकर महीनों खानाबदोश जिंदगी जीते हैं। ऐसे में, एक सशक्त भारत रचने के लिए न सिर्फ हमें अभी बहुत सारे अस्पतालों व स्कूलों की दरकार है, बल्कि अनगिनत पुलों, पनाहगाहों, ताल-तलैयों और सीमाओं पर सड़कों-बंकरों के जाल की भी आवश्यकता है। जाहिर है, इनके लिए बहुत सारे संसाधनों की जरूरत है। और यह कोई बाहर वाला हमें नहीं देगा। इस देश के नागरिकों को अपने कर्म से अर्जित करने पड़ेंगे। राष्ट्र-निर्माण के लिए उनमें भाईचारे की कमी नहीं पड़नी चाहिए।
अयोध्या में कारसेवकों की कमी न पहले थी और न भविष्य में पडे़गी। कभी किसी धर्म के आयोजन में लोग अपनी श्रद्धा से न धन की कमी पड़ने देते हैं और न श्रम-बल की। आज भारत-निर्माण को भी उसी भाव की जरूरत है। खासकर कोरोना काल में देश को अपने नागरिकों की श्रद्धा युक्त समझदारी की बहुत जरूरत है। धीरोदात्त राम ने अपने जीवन में धीरज के साथ विकट संकटों का सामना किया, तभी वह जीत का पथ निर्माण कर सके थे। अयोध्या में प्रधानमंत्री का संयम के साथ कोरोना के मुकाबले का आह्वान राम के इसी रूप से प्रेरित था। धैर्य के साथ सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करके ही हम इस महामारी से अपने देश को मुक्ति दिला सकते हैं। एक लंबे विवाद और ध्वंस के पटाक्षेप के बाद अयोध्या की फिजाओं ने खुशियों की खुनक महसूस की है। और इस दिन की पटकथा लिखने में पूरे भारत के नागरिक समाज ने अपने धैर्य, उत्साह, संतोष और समझदारी की रोशनाई मिलाई है। भारत-निर्माण के लिए इसी भाव को स्थाई रूप देने की जरूरत है। बहुलतावादी भारत में बन रहा भव्य राम मंदिर हमारे सामाजिक-सामुदायिक भाईचारे और शांति का संदेश पूरी दुनिया को दे सके, यह पूरा देश चाहेगा। आखिरकार राम सबके हैं और सब राम के हैं।
ओपिनियन / शौर्यपथ / खुशी, खूबसूरती और खैर-खैरियत के साथ श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण का शुभारंभ हो गया है। यह सिर्फ मेरे भारत के लोगों के संस्कार, संस्कृति और संकल्प की शक्ति का ही करिश्मा है। मुझे याद है, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले मेरे सरकारी निवास पर 5 नवंबर, 2019 को धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय 100 से ज्यादा प्रबुद्ध लोगों की बैठक हुई थी। गौर करने की बात है कि उस बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में सभी ने एकमत से यह तय किया था कि सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या मुद्दे पर जो भी फैसला आएगा, उसका दोनों पक्ष पूरा सम्मान भी करेंगे और स्वीकार भी करेंगे। जब फैसला आया, तब सभी पक्षों ने वैसा ही किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को किसी ने भी अपनी जीत या हार के रूप में नहीं लिया और सभी ने शांति-सद्भाव के साथ फैसले को स्वीकार किया।
अब श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का शुभारंभ हो गया है, उधर सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन भी दे दी गई है। बोर्ड ने निर्माण के लिए समिति का भी गठन कर दिया है।
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का भूमि पूजन सद्भाव और समरसता के साथ संपन्न होना ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की ताकत और ‘अनेकता में एकता’ की शक्ति के साथ पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान की धाक मजबूत करता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम किसी सीमित दायरे में नहीं बांधे जा सकते। वह न केवल हिन्दुस्तान, बल्कि पूरी मानवता के लिए आदर्श हैं।
कवि अल्लामा इकबाल ने अपनी मृत्यु (1938) से पूर्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के लिए जो कहा था, वह एक बार फिर हमें गर्व का एहसास कराता है।
लबरेज है शराब-ए-हकीकत से जाम-ए-हिंद।
सब फलसफी हैं खित्ता-ए-मगरिब के राम-ए-हिंद।।
यह हिंदियों के फिक्र-ए-फलक रस का है असर।
रिफअत में आसमां से भी ऊंचा है बाम-ए-हिंद।।
इस देस में हुए हैं हजारों मलक सरिश्त।
मशहूर जिनके दम से है दुनिया में नाम-ए-हिंद।।
है राम के वुजूद पे हिन्दोस्तां को नाज।
अहले-नजर समझते हैं उनको इमाम-ए-हिन्द।।
दशकों से जिस मुद्दे ने भारत के लोगों को बेचैन कर रखा था, जिसके समाधान के लिए महंत रामदास जी परमहंस और हाशिम अंसारी एक ही रिक्शे से मुकदमे की पैरवी के लिए अदालत जाया करते थे। हाशिम अंसारी के मन में भी भगवान राम के प्रति भरपूर श्रद्धा थी, तभी तो इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद उन्होंने कहा था, ‘अब यह विवाद यहीं खत्म होना चाहिए, श्रीराम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण हो, अयोध्या का विकास हो, अब यही मेरी तमन्ना है’। तब से अब तक सरयू में खूब पानी बह चुका है, अब न महंत रामदास जी परमहंस इस दुनिया में हैं, और न हाशिम अंसारी। खुशी की बात यह है कि हाशिम अंसारी के बेटे कल के भव्य ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने हैं। भारत का इतिहास इस बात का गवाह रहेगा कि कितना लंबा खिंचा है अयोध्या का यह मामला। आज सम्मान, सहमति और सद्भाव के सुंदर माहौल में यह विवाद खत्म ही नहीं हुआ, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का सपना भी साकार होने जा रहा है।
सबसे खूबसूरत बात यह है कि देश के न किसी मोहल्ले में तनाव है, न किसी शहर में अशांति, और न किसी गांव में हंगामा, सभी ने इस ऐतिहासिक अवसर का स्वागत किया है। सब इस गौरवपूर्ण क्षण के गवाह बनकर आनंदित हैं। यही नहीं, आज के कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने भगवान श्रीराम को संपूर्ण मानवता, इंसानियत और इंसाफ का प्रतीक बताया है।
हमारे देश के मुस्लिम समाज को किसी विदेशी आक्रमणकारी की करतूतों-गुनाहों का गुनहगार नहीं समझा जा सकता। इस ऐतिहासिक क्षण का उसने भी सकारात्मक सोच के साथ स्वागत किया है। एक मुल्क के तौर पर हमारी प्राथमिकताएं सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति है। यह बदलते हुए भारत की नई पीढ़ी समझ चुकी है, इसलिए नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद समाज का हर हिस्सा प्रगति में बराबर का हिस्सेदार और भागीदार बन रहा है। उदाहरण के लिए, अभी-अभी प्रशासनिक सेवाओं के परिणाम आए हैं, जिसमें अल्पसंख्यक समाज के 187 नौजवान चुने गए हैं। इन नौजवानों में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के होनहार भी शामिल हैं। मोदी सरकार के ‘बिना भेदभाव सबके सशक्तीकरण, काबिलियत की कद्र’ का नतीजा है कि आज समाज के सभी वर्ग तरक्की की दिशा में हमसफर बन रहे हैं। इसी तरह, साल 2017-2018 के भी प्रशासनिक सेवाओं के परिणाम काफी उत्साहवद्र्धक रहे हैं। आजादी के बाद सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक समाज के लोग प्रशासनिक सेवाओं में अब चुने जा रहे हैं। जो लोग आज तक मुस्लिम समाज को भावनात्मक मुद्दों में उलझाकर वास्तविक सवालों से भरमाने का चक्रव्यूह रचते रहे, उनको भी अब यह अच्छी तरह समझ में आ रहा है कि मोदी सरकार का ‘विकास का मसौदा’, ‘वोट के सौदे’ से कोसों दूर है।
हमने सदियों पुराने सद्भाव के जिस रास्ते को चुना है, वही ‘नए भारत, मजबूत भारत, समावेशी भारत’ की नई इबारत लिखेगा। भारत की संस्कृति समावेशी सोच से भरपूर रही है। हिन्दुस्तान अकेला देश है, जहां दुनिया के सभी धर्मों के मानने वाले रहते हैं, जहां समाज के सभी वर्गों के धार्मिक, सामाजिक अधिकार सुरक्षित हैं। भारत अकेला देश है, जहां मंदिरों के घंटे, मस्जिदों की अजान, गुरुद्वारों की गुरुवाणी, चर्च की प्रार्थनाओं की गूंज हमेशा बनी रहती है। विभिन्न धर्मों की मिली-जुली यह गूंज दुनिया को हिन्दुस्तान के समावेशी समाज का खूब एहसास कराती है।
बुधवार को भव्य राम मंदिर के निर्माण के शुभारंभ का संदेश पूरी दुनिया के लिए स्पष्ट है कि भारत में किसी ने इसे अपनी विजय नहीं कहा। सभी ने मानवता और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। सभी ने सद्भाव से भरपूर समावेशी समाज के संकल्प को दोहराया। यह हमारे लिए सबक भी है और संदेश भी। हमें इसी सबक या संदेश को आने वाले दिनों में भी सार्थक करते चलना है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) मुख्तार अब्बास नकवी, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री
// शहीद महेन्द्र कर्मा के नाम पर तेंदूपत्ता संग्राहक , सामाजिक सुरक्षा योजना का शुभारंभ
// प्रदेश के 12.50 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को मिलेगा लाभ
// गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं को मिला पहला भुगतान, मुख्यमंत्री श्री बघेल ने अंतरित किए 1.65 करोड़ रूपए
// 46 हजार 964 गोबर विक्रेताओं को मिला लाभ
// शहीद महेन्द्र कर्मा को उनकी जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि
// मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गोबर विक्रेताओं से की चर्चा
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि गोधन न्याय योजना देश-दुनिया की एक अनूठी योजना है। इस योजना पर सभी लोगों की निगाह है। उन्होंने कहा कि येाजना के शुरूआत के एक पखवाड़े के भीतर इसके उत्साह जनक परिणाम देखने और सुनने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों के जीवन में बदलाव लाने वाली तथा लोगों को बारहों महीने रोजगार देने वाली योजना है। मुख्यमंत्री बघेल आज अपने निवास कार्यालय में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत गोबर खरीदी के पहले भुगतान का शुभारंभ करते हुए उक्त बातें कही। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 46 हजार 964 गोबर विक्रेताओं के खाते में एक करोड़ 65 लाख रूपए की राशि आनलाइन अंतरित की।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम की शुरूआत में शहीद महेन्द्र कर्मा की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके नाम पर प्रदेश में ‘तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना‘ का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने पूर्व मंत्री और लोकप्रिय नेता शहीद श्री महेंद्र कर्मा की जयंती पर उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण उन्हेें विनम्र श्रद्धंाजलि दी। इस अवसर पर मंत्रिमंडल के सभी सदस्यगणों ने भी शहीद श्री कर्मा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा है कि श्री महेन्द्र कर्मा बस्तर टाइगर के नाम से जाने जाते थे, वे आदिवासियांे के हक की हर लड़ाई में दमदारी से खड़े रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना देश-दुनिया में अपने तरह की पहली अनूठी योजना है, जिसमें पशुपालकों, किसानों से 2 रूपए प्रति किलो की दर पर गौठानों में खरीदी की जा रही है। इस योजना के माध्यम से एक ओर जहां पशुपालकों को आर्थिक लाभ होगा, दूसरी ओर प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना से लोगों को कई फायदे मिलेंगे। इससे गांवों में बारह महीने लोगों को रोजगार सुलभ होगा। गोबर विक्रय करने से ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों को नियमित आमदनी होगी। इसके अलावा गौठानों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन होगा। खुले में चराई पर रोक लगेगी और किसान एक से अधिक फसलों का उत्पादन कर सकेंगे। इससे पशुओं के संरक्षण तथा संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के हर गौठानों में रोजगार ठौर स्थापित किए जाएंगे। गौठानों में इसके लिए एक-एक एकड़ जमीन को आय मूलक व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इनमें समूहों के सदस्य गोबर से वर्मी कम्पोस्ट के अलावा गौमूत्र से फिनाईल तथा औषधि का निर्माण, साबुन, अगरबत्ती का निर्माण, धान कुट्टी मशीन के माध्यम से चावल निकालने और सिलाई मशीन के माध्यम से सिलाई-बुनाई आदि जैसी विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण एवं संचालन सुगमता से कर सकेंगे और इससे उन्हें गांव में ही रोजगार और जीवन यापन का जरिया मिलेगा।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने जशपुर, जांजगीर-चांपा, सुकमा, बलौदाबाजार जिले कीे विभिन्न गौठान समितियों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं, पशुपालक एवं गोबर विक्रेताओं से गोधन न्याय योजना के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने गोबर विक्रय करने वाले लोगों से भुगतान की राशि प्राप्त होेने, महिला स्व-सहायता समूहों से उनके द्वारा संचालित गतिविधियों विशेषकर वर्मी कम्पोस्ट खाद के निर्माण एवं विक्रय की स्थिति, गौठानों में आने वाले पशुओं की संख्या एवं उनके चारे-पानी के प्रबंध के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने गौठान समितियों से गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट टांका पर्याप्त संख्या में तैयार करने तथा स्थानीय स्तर पर ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों का संचालन गौठानों में सुनिश्चित करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 31 प्रकार के लघु वनोपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही है। लघु वनोपज के वेल्यू एडिशन के कार्य गौठानों में करके अतिरिक्त लाभ अर्जित किए जाने की दिशा में हम सब को मिलकर काम करना है। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से समाज के सभी वर्ग के लोगों को न्याय योजना का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य में इस योजना की लोकप्रियता और इसकी सफलता को देखते हुए अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ ही मुख्य सचिव एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम के शुभारंभ में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने गोधन न्याय योजना की अब तक की गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की परिकल्पना आज मूर्तरूप ले चुकी है। यह योजना ग्राम पंचायतों के बाद गांव तक विस्तारित होगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गोबर खरीदी के एवज में गोबर विक्रेताओं को 15 दिन के भीतर उनके बैंक खाते में राशि के भुगतान का जो वादा किया था, वह आज पूरा हो रहा है। इस योजना के तहत हर 15वें दिन गोबर विक्रेताओं को भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत 20 जुलाई से 1 अगस्त तक राज्य में कुल 4140 गौठानों में पंजीकृत 65 हजार 694 हितग्राहियों में से 46 हजार 964 हितग्राही द्वारा 82 हजार 711 क्विंटल गोबर का विक्रय किया गया, जिसकी कुल राशि 2 रूपए प्रति किलो की दर से 1 करोड़ 65 लाख रूपए पशुपालकों के बैंक खातों में जमा की गई है। इस योजना से 38 प्रतिशत महिला हितग्राही, 48 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 39 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति, 8 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं 5 प्रतिशत सामान्य वर्ग के हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। गोबर खरीदी का आगामी भुगतान 20 अगस्त को किया जाएगा। कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस योजना के अंतर्गत राज्य के रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी और बालोद जिलों में सबसे अधिक गोबर विक्रय किया गया है। इसी प्रकार नगरीय क्षेत्रों में रायपुर एवं दुर्ग के पशुपालकों ने सबसे ज्यादा गोबर विक्रय किया गया है।
प्रदेश में शुरू हुई शहीद महेन्द्र कर्मा तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना
प्रदेश में आज से शुरू हुई शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना में तेंदूपत्ता संगहण कार्य में लगे पंजीकृत संग्राहक परिवार के मुखिया (50 वर्ष से अधिक आयु न हो) की सामान्य मृत्यु पर नामांकित व्यक्ति अथवा उत्तराधिकारी को 2 लाख रूपए की अनुदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। दुर्घटना से मृत्यु होने पर दो लाख रूपए अतिरिक्त प्रदान किया जाएगा। दुर्घटना में पूर्ण विकलांगता की स्थिति में 2 लाख रूपए और आंशिक विकलांगता की स्थिति में एक लाख रूपए की सहायता अनुदान राशि दी जाएगी।
वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप तेन्दूपत्ता संग्राहकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशुद्ध रूप से वन विभाग द्वारा संचालित होने वाली शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को बीमित किए जाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा संचालित बीमा योजना के बंद होने के कारण प्रदेश सरकार द्वारा यह सामाजिक सुरक्षा योजना तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत बीमा दावा के प्रकरणों का तत्परता से निराकरण एवं पीड़ित परिवार को एक माह के भीतर दावा राशि का भुगतान हो सकेगा। उन्होंने कहा कि संग्राहक परिवार के मुखिया की 50 से 59 आयु वर्ष के बीच सामान्य मृत्यु होती है, तो 30 हजार रूपए, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 75 हजार रूपए, दुर्घटना में पूर्ण विकलांगता की स्थिति पर 75 हजार रूपए और आंशिक विकलांगता की स्थिति में 37 हजार 500 रूपए की सहायता अनुदान राशि परिवार के नामांकित व्यक्ति अथवा उत्तराधिकारी को दी जाएगी।
इस अवसर पर मंत्री सर्वश्री रविन्द्र चौबे, मोहम्मद अकबर, ताम्रध्वज साहू, टी. एस. सिंहदेव, डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, डॉ. शिव कुमार डहरिया, कवासी लखमा, गुरू रूद्र कुमार, अमरजीत भगत, श्रीमती अनिला भेंड़िया, संसदीय सचिव श्री शिशुपाल सोरी एवं चंद्रदेव राय, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री प्रदीप शर्मा, श्री रूचिर गर्ग, श्री विनोद वर्मा, मुख्य सचिव आर. पी. मण्डल, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू एवं अमिताभ जैन, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता, वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन की मंशा के अनुरूप वर्षों से काबिज वन भूमि का मालिकाना हक मिलने से वनवासियों को खुशी है, वहीं अब वे काबिज वन भूमि पर बेदखली के भय से मुक्त होकर कृषि कार्य कर रहे हैं।
कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोलर के कालीराम को वन भूमि का मालिकाना हक मिलने से उनके जीवन में खुशियों की बहार आ गई है। राज्य शासन द्वारा वन अधिकार पट्टा वितरण करने की योजना की सराहना करते हुए श्री कालीराम कहते हैं कि वर्षों से काबिज 2 एकड़ वन भूमि का वन अधिकार पट्टा मिलने से मेरी चिंता दूर हो गई है और बेदखली का भय भी समाप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा मनरेगा के तहत मेरी उबड़-खाबड़ जमीन पर समतलीकरण का कार्य होने से जहां मेरी भूमि कृषि योग्य हो गई है। वहीं मेरे द्वारा 2 एकड़ में धान की फसल लगाई गई है। कालीराम अपने खेत में लहलहाती फसलों को देखकर भविष्य में होने वाली आमदनी के बारे में सोच कर काफी खुश हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा वनवासियों और किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
रायपुर / शौर्यपथ / रायपुर में आयुर्वेदिक डॉक्टर की पत्नी के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है। मामला खम्हारडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत अवंति विहार का है जहां आयुर्वेदिक डॉक्टर अपने परिवार सहित 8 साल पूर्व उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में निवास करने पहुंचे थे। उत्तर प्रदेश छोडऩे की वजह पति के बिजनेस पार्टनर द्वारा छेड़छाड़ किया जाना था।
घटना की जानकारी देते हुए थाना प्रभारी ममता शर्मा अली ने बताया कि आरोपी बलबीर सिंह व बबलू सैफी अली द्वारा वर्ष 2019 में थाना क्षेत्र अंतर्गत पीडि़ता का बलात्कार किया गया व उसकी अश्लील फोटो खींच ली गई ,आरोपियों द्वारा लगातार अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दी जाती रही। पीडि़ता ने पुलिस को बताया कि आरोपी उसके पति व बच्चों को भी जान से मारने की धमकी दिया करते थे जिसके कारण वह डर के चलते घटना का जि़क्र किसी को नहीं किया। अब लगातार मानसिक प्रताडि़त होने के बाद पीडि़ता ने घटना की जानकारी अपने पति को दी जिसके बाद पीडि़ता ने अपने परिजनों के साथ पहुंच थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाया।
थाना प्रभारी शर्मा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ ढ्ढक्कष्ट की धारा 376,506,34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। आरोपी उत्तरप्रदेश के निवासी है।
रायपुर / शौर्यपथ / वन विभाग को कवर्धा वनमंडल के अंतर्गत भारेमदेव वन्य प्राणी अभ्यारण चिल्फी परिक्षेत्र नंदनी टोला में 29 जुलाई को मृत एक नर बायसन प्रकरण को महज 05 दिनों में सुलझाने में बड़ी कामयाबी मिली है। इसमें ग्राम कुमान और नंदनी गांव के सभी 9 आरोपियों के विरूद्ध अपराध दर्ज कर गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया गया है।
इस पूरे प्रकरण को सुलझाने में एक ओर जहां वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मागर्दशन रहा तो वहीं दूसरी ओर आरोपियों की पहचान करने में अचानकमार टाईगर रिजर्व के जर्मन शेफर्ड स्निफर डॉग नेरो से भी अहम मद्द मिली। ग्राम कुमान और नंदनी गांव के 9 ग्रामीणों द्वारा वन्यप्राणी बायसन की अवैध शिकार की नीयत से जी.आई. विद्युत तार के करंट का उपयोग कर उक्त घटना को अंजाम दिया गया था। कवर्धा वन मंडल की टीम द्वारा 4 अगस्त को 9 आरोपियों को जी.आई.तार से बिजली का करंट देकर वन्य प्राणी बायसन के अवैध शिकार के अपराध में गिरफ्तार किया गया। इनके विरूद्ध वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम तथा भारतीय वन अधिनियम के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया। वन्य प्राणी गौर या बायसन के अवैध शिकार के प्रकरण में सभी नौ आरोपियों को कवर्धा वन मंडल द्वारा चालान कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां न्यायालय के आदेश के तहत गिरफ्तार किए गए सभी 9 आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
दुर्ग / शौर्यपथ / महापौर धीरज बाकलीवाल की बड़ी माॅ जी द्वारा बड़े पुण्योदय के साथ अपने जीवन को सार्थक करने हेतु सल्लेखना व्रत धारण कर 105 आर्यिक तपोमति माताजी के संघ के सानिध्य में डोंगढ़गड़ में नश्वर शरीर का त्याग किया गया। जिनका अंतिम संस्कार आज 5 अगस्त बुधवार को दुर्ग के शिवनाथ नदी रोड में स्थित नसिया में किया गया।
श्रीमती भगवती देवी के अंतिम संस्कार में स्टेट वेयरहाउसिंग काॅरपोरेशन अध्यक्ष माननीय अरुण वोरा जी, महापौर धीरज बाकलीवाल, एमआईसी मेम्बर अब्दुल गनी, ऋषभ जैन, मनदीप सिंी भाटिया, अनुप चंदानियाॅ, वरिष्ठ पार्षद मनद जैन, पार्षद विजयेन्द्र भारद्वाज, मनीष बघेल, कांग्रेस नेता फत्तेसिंह भाटिया, अलताफ अहमद, राजेश शर्मा, सहित अध्यक्ष श्री दिगंबर जैन पंचायत के पदाधिकारी सैकड़ों की संख्या के अलावा खण्डेलवाल पंचायत के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी, और सदस्य एवं परिवार के सदस्य धीसुलाल, मदनलाल बाकलीवाल, सुरजमल, प्रकाशचंद बाकलीवाल, छितरमल महेन्द्र कुमार बाकलीवाल, निर्मलकुमार, सुशील कुमार, राजेन्द्र कुमार बाकलीवाल एवं समस्त बाकलीवाल परिवार अधिक संख्या में उपस्थित थे ।
भिलाई नगर / शौर्यपथ / गोधन न्याय योजना के अंतर्गत निगम क्षेत्र के पंजीकृत 38 पशुपालकों को 89934 रूपए पहला भुगतान किया गया। इस योजना के तहत सबसे अधिक वार्ड-3 यादव मोहल्ला कोसा नगर निवासी मनोज यादव ने गोबर बेचकर 9296 रूपए कमाए। मनोज के पास 23 गाय और भैंस हैं। उन्होंने 20 जुलाई को ही पंजीयन कराया तथा 1 अगस्त तक गोधन न्याय योजना के अंतर्गत शहरी गौठान में 4648 किलोग्राम गोबर बेचा। श्री यादव को दो रूपए की दर से उन्हें बुधवार को समन्वय समिति ने बैंक के माध्यम से 9296 रूपए भुगतान किया गया। इसी प्रकार वार्ड-3 निवासी भरत लाल यादव ने 4032 किलोग्राम गोबर बेचा था। उन्हें 8065 रूपए भुगतान किया गया। योजना के नोडल अधिकारी व उपायुक्त अशोक द्विवेदी ने बताया कि गोधन न्याय योजना के अंतर्गत पशुपालक गोबर बेचने अपना पंजीयन निरंतर करा रहे हैं। इनमें से 38 हितग्राही 20 जुलाई से लगातार शहरी गौठान में गोबर बेच रहे हैं। इस तरह से 20 जुलाई से 1 अगस्त की अवधि में पंजीकृत 38 पशुपालकों से कुल 44,967 किलोग्राम खरीदी गई। जिसका पहला भुगतान बैंक खाते के माध्यम किया गया।
पशुपालक करवा सकते है पंजीयन
गोधन न्याय योजना के अंतर्गत कोई भी पशुपालक जोन कार्यालय से संपर्क कर पंजीयन करवा सकता है। निगम प्रशासन की ओर से चिन्हित स्थल पर ले जाकर गोबर बेच सकता है। जोन-1 अंतर्गत शहरी गौठान कोसा नगर, जोन-4 एसएलआरएम सेंटर में गोबर खरीदी की व्यवस्था की गई है। इसी तरह से जोन-2, जोन -3 और जोन-5 में भी गोबर खरीदा जाएगा। पंजीकृत हितग्राहियों के बैंक खाता के माध्यम से 15-15 दिन के अंतराल में भुगतान किया जाएगा।
गोधन न्याय योजना के नोडल अधिकारी ने की समीक्षा
निगम उपायुक्त अशोक द्विवेदी ने निगम के सभागर में गोधन न्याय योजना की समीक्षा की। सभी जोन आयुक्त को अपने क्षेत्र के चिन्हित स्थलों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने कहा। जल्द से जल्द से गोबर खरीदी शुरू करने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने स्व सहायता समूह की महिलाओं को गोधन न्याय योजना की विस्तृत जानकारी भी दी तथा डॉक्यूमेंटेशन को लेकर अद्यतन करने कहा। बैठक में उपायुक्त तरूण पाल लहरे, लेखा अधिकारी जितेन्द्र ठाकुर, पीएमयू के शुभम पाटनी, सभी जोन आयुक्त और समन्वय समिति की महिलाएं मौजूद थी।
// 46 हजार 964 हितग्राहियों को 1.65 करोड़ रूपए का होगा भुगतान
शहीद महेन्द्र कर्मा को उनकी जयंती के अवसर पर अर्पित करेंगे श्रद्धांजलि
// शहीद महेन्द्र कर्मा के नाम पर प्रदेश में शुरू होगी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना
// प्रदेश के 12.50 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को मिलेगा लाभ
// मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गोबर विक्रेताओं से भी करेंगे चर्चा
// राम वन गमन पथ पर दिया जाएगा प्रस्तुतीकरण
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 5 अगस्त को अपने रायपुर निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राज्य सरकार की अभिनव योजना 'गोधन न्याय योजनाÓ के तहत गोबर खरीदी का पहला भुगतान हितग्राहियों के खाते में अंतरित करने की प्रक्रिया का शुभारंभ करेंगे। श्री बघेल इस अवसर पर प्रदेश में शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना का भी शुभारंभ करेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री बघेल दोपहर 3 बजे शहीद महेन्द्र कर्मा की जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे और वन मंत्री मोहम्मद अकबर का उद्बोधन होगा। मुख्यमंत्री 3.15 बजे गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर खरीदी की राशि का हितग्राहियों के खाते में अंतरण प्रक्रिया का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री बघेल इसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों से चर्चा करेंगे। दोपहर 3.35 बजे मुख्यमंत्री शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना का शुभारंभ करने के बाद कार्यक्रम को सम्बोधित करेंगे। पर्यटन विभाग के अधिकारियों द्वारा दोपहर 3.50 बजे राम वन गमन पथ पर प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री बघेल गोधन न्याय योजना के तहत 20 जुलाई से 1 अगस्त तक गोबर खरीदी की पहली किश्त की राशि 5 अगस्त को सहकारी बैंक के माध्यम से हितग्राहियों के खाते में अंतरित करेंगे। राज्य में कुल 4140 गौठानों में पंजीकृत 65 हजार 694 हितग्राहियों में से 46 हजार 964 हितग्राही द्वारा 82 हजार 711 क्विंटल गोबर का विक्रय किया गया, जिसकी कुल राशि 2 रूपए प्रति किलो की दर से 1 करोड़ 65 लाख रूपए पशुपालकों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। इस योजना का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर के पशुपालकों तक पहुंचाया जा रहा है, जिसमें 38 प्रतिशत महिला हितग्राही, 48 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 39 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति, 8 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं 5 प्रतिशत सामान्य वर्ग के हितग्राही हैं। गोबर खरीदी का आगामी भुगतान 15 अगस्त को किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत राज्य के रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी और बालोद जिलों में सबसे अधिक गोबर विक्रय किया गया है। इसी प्रकार नगरीय क्षेत्रों में रायपुर एवं दुर्ग के पशुपालकों ने सबसे ज्यादा गोबर विक्रय किया गया है।
गोधन न्याय योजना देश में अपने तरह की प्रथम योजना है, जिसमें पशुपालकों, किसानों से 2 रूपए प्रति किलो (परिवहन व्यय सहित) की दर पर गौठानों में खरीदी की जा रही है। खरीदे गए गोबर से गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर इसका सहकारी समितियों के माध्यम से विक्रय किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से एक ओर पशुपालकों को आर्थिक लाभ होगा। दूसरी ओर प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
दुर्ग / शौर्यपथ / लायंस क्लब छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश कि ईकाई डिस्ट्रिक्ट 3233 सी के गवर्नर लायंस जयप्रकाश अग्रवाल ने अपने सत्र 2020-2021 की कार्यकारणी का विस्तार किया गया जिसमे दुर्ग जिले के लायंस क्लब के सदस्य अय्युब खान की समाजिक सेवा और सक्रियता से कोरोना काल मे कार्य करते हुये देख कर डिस्ट्रिक्ट 3233 सी महत्वपुर्ण जि़म्मेदारी देते हुये लायंस क्लब का डिस्ट्रिक्ट चैयरपर्सन की नियुक्ति की है।
लायन अय्युब खान ने बताया की लायंस क्लब विश्व कि जानी मानी और बहुत बड़ी समाजिक संस्था है जिसके शाखा या ईकाई दुनियाँ के हर देश मे और उन देश के हर शहरों मे है और लगातार अपने ही सौजन्य और आपस मे मिलकर सहयोग कर समाज कि सेवा ,गरीबों और जरूरतमंद लोगो क़ो मदद करते है और वर्षों करते आ रहे इस संस्था मे मुझे बड़ी जि़म्मेदारी दी गई जिसमे छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के लग भग 98 क्लब है नगरीय सौन्दर्य करण का कार्य स्वच्छ भारत अभियान के तहत दिया गया हई जिसके लिए मै गवर्नर जयप्रकाश अग्रवाल जी और वरिष्ट सदस्यो का आभार मानता हूँ ॥
मुख्यमंत्री बघेल ने राज्यपाल सुश्री उइके की राखी मिलने पर कहा: आपने मुझे स्नेह, आर्शीवाद और राखी भेजकर जो विश्वास व्यक्त किया है, वह मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता और सम्मान का विषय
मुख्यमंत्री ने बहन सुश्री उइके को पत्र के साथ उपहार में भेजी साड़ी(लुगरा)
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके द्वारा रक्षाबंधन पर्व पर भेजी गई राखी मिलने पर प्रसन्नता प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि रक्षाबंधन और भुजलिया पर्व के अवसर पर आपने मुझे स्नेह, आर्शीवाद तथा राखी भेजकर जो विश्वास व्यक्त किया है, वह मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता तथा सम्मान का विषय है। श्री बघेल ने बहन सुश्री उइके को रक्षाबंधन पर्व की परंपरा अनुरूप भाई की तरफ से शुभकामनाओं सहित उन्हें नगद राशि और साड़ी उपहार में भेजी है।
मुख्यमंत्री बघेल ने बहन सुश्री उइके को लिखे पत्र में कहा है कि रक्षाबंधन का यह पर्व हमारे पारिवारिक संबंधों को नए शिखर पर पहुंचाने का माध्यम बना है। आपका संरक्षण मेरे और राज्य के लिए सौभाग्य का विषय है। मुख्यमंत्री के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन करने, कोरोना महामारी से निपटने और प्रदेश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने के लिए आपने मेरा जो उत्साहवर्धन किया है, उसके लिए मैं सदैव आपका आभारी रहूूंगा।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह पावन पर्व हमारी महान संस्कृति के गरिमामय उत्कर्ष का प्रतीक भी है, जो बहनों के प्रति भाईयों के संकल्पों को सुदृढ़ बनाता है। आपने उत्तरदायित्वों के प्रति सजग करते हुए मुझे जो शुभकामनाएं प्रेषित की है, उसके लिए मैं कृतज्ञता व्यक्त करता हॅू तथा आपको विश्वास दिलाता हॅू कि आपकी भावनाओं के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह पूरी निष्ठा तथा परिश्रम से करूंगा।
दुर्ग / शौर्यपथ / रक्षाबंधन के दिन यानि 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक भद्रा काल रहेगा। इस समय राखी नहीं बांधनी चाहिए। कहा जाता है कि रावण की बहन ने भद्रा काल में ही रावण को राखी बांधी थी, जिसके कारण रावण का विनाश हो गया।
राखी का पर्व सुबह 09:30 बजे से आरंभ होगा। दोपहर में 01:35 बजे से लेकर शाम को 04:35 बजे तक का समय राखी बांधने के लिए अति शुभ है। इसके बाद शाम को 07:30 बजे से 09:30 बजे तक राखी बांधने के लिए मुहूर्त शुभ रहेगा। ( भागवत कथा वाचक - प. मनोज शर्मा जी )
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
