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नई दिल्ली। शौर्यपथ ।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद द्वारा प्रियंका गांधी वाड्रा को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने की मांग के बाद उनके पति रॉबर्ट वाड्रा भी खुले तौर पर इस विचार के समर्थन में सामने आ गए हैं। वाड्रा का कहना है कि प्रियंका को आगे लाने की मांग सिर्फ एक जगह से नहीं,बल्कि हर तरफ से उठ रही है।
गौरतलब है कि संसद के हालिया शीतकालीन सत्र में राहुल गांधी की विदेश यात्रा के बाद से प्रियंका की सक्रियता को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा पहले से ही तेज थी। वाड्रा का यह बयान कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही संभावित खींचतान को और उभारता दिख रहा है।
जब रॉबर्ट वाड्रा से इमरान मसूद के बयान पर प्रतिक्रिया पूछी गई, तो उन्होंने आईएएनएस से कहा, "मांग तो सब जगह से है कि प्रियंका आगे आएं। मांग यह भी है कि मुझे राजनीति में आना चाहिए। लेकिन अभी हमें असली मुद्दों पर फोकस करना है, जो लोगों से जुड़े हैं।"
उधर, इमरान मसूद ने मंगलवार को दावा किया था कि अगर प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री होतीं, तो वह बांग्लादेश की घटनाओं पर इंदिरा गांधी की तरह करारा जवाब देतीं। उन्होंने कहा, "उन्हें प्रधानमंत्री बनाइए और देखिए कि वे कैसी प्रतिक्रिया देती हैं।"
प्रियंका गांधी ने हाल ही में बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा मजबूती से उठाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि धर्म और पहचान के आधार पर हिंसा किसी भी सभ्य समाज में अक्षम्य है और भारत सरकार को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जेपी नड्डा ने राजनीतिक बयानबाजी के लिए सारी मर्यादा को तार-तार किया है। जेपी नड्डा के बयान से भाजपा के माथे से झीरम का कलंक नहीं मिटेगा। कांग्रेस ने झीरम हमले में अपने नेताओं की पूरी एक पीढ़ी को खोया है और उस समय राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी। भाजपा केंद्र में पिछले बारह साल से सरकार में है। एनआईए ने तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह से पूछताछ क्यों नहीं किया? क्यों एनआईए ने आज तक झीरम हमले के दोषियों तक नहीं पहुंच पायी? जेपी नड्डा इस प्रकार का बयान दे रहे है, उनके पास तथ्यात्मक आधार क्या है, एनआईए उनसे पूछताछ करनी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा डरती है झीरम का सच सामने आ जायेगा तो वह बेनकाब हो जायेगी। रमन सिंह से बड़ा क्रूर शासक आजाद भारत में आज तक नहीं हुआ। एक साथ विपक्ष के 32 नेताओं की हत्या हो गयी और तत्कालीन सरकार सच सामने आने देने से रोकने में पूरी ताकत लगा रखी थी। भाजपा के बड़े नेता जीरम की जांच को रोकने लगातार कोशिशें करते रहे उसमें साफ है झीरम के पीछे तत्कालीन भाजपा सरकार की भूमिका संदिग्ध थी। भाजपा के तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक झीरम की जांच रोकने पीआईएल क्यों लगाया था?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि झीरम घाटी कांड एक ऐसा कांड था जिसने कांग्रेस के नेतृत्व की एक पूरी पीढ़ी को ही समाप्त कर दिया था। स्वतंत्र भारत में हुई दुर्दान्त और हृदय विदारक घटना भारतीय जनता पार्टी के शासन काल में डॉ. रमन सिंह के राज में घटित हुई थी इसके गुनाहगारों को सजा से बचाने के लिए भाजपा लगातार षड़यंत्र करती रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आज भी छत्तीसगढ़ की जनता जानना चाहती है कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा को घोर नक्सल इलाके में ही क्यों हटाया गया था? झीरम नरसंहार भाजपा के लिए उसकी तत्कालीन सरकार द्वारा की गई चूक मात्र हो सकती है तथा उसकी तत्कालीन सरकार द्वारा किया गया एक षड्यंत्र मात्र हो सकता है। कांग्रेस के लिए झीरम वह घाव है जो कभी नहीं भर सकता। यह घटना देश के लोकतंत्र के माथे पर लगा वह कलंक है जो कभी नही मिट सकता। कांग्रेस ने झीरम में अपने नेताओं की पूरी पीढ़ी को खोया है।
मनरेगा से गांधी जी का नाम हटाना भाजपा का राजनैतिक दिवालियापन - दीपक बैज
रायपुर । शौर्यपथ
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मनरेगा कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाने का निर्णय भाजपा की गांधीजी के प्रति विद्वेष को दर्शाता है। यह भाजपा का राजनैतिक दिवालियापन है। गांधीजी श्रम की गरिमा, सामाजिक न्याय और सबसे गरीबों के प्रति राज्य की नैतिक जिम्मेदारी के प्रतीक रहे है। यह नाम परिवर्तन गांधीजी के मूल्यों के प्रति भाजपा-आरएसएस की दीर्घकालिक असहजता और अविश्वास को दर्शाता है तथा एक जन-केंद्रित कल्याणकारी कानून से राष्ट्रपिता के जुड़ाव को मिटाने का प्रयास है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने महात्मा गांधी नेशनल रोजगार गारंटी (मनरेगा) के रूप में रोजगार को कानूनी गारंटी दिया था लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा की साय सरकार का नाम बदलकर बंद करने की साजिश कर रही है। मोदी सरकार मनरेगा को बंद करना चाहती है। मोदी सरकार के 11 सालों में मनरेगा को पर्याप्त बजट नहीं दिया। हर साल मनरेगा के बजट में 30 से 35 प्रतिशत की कटौती की गयी है। पिछले 11 वर्षों में मनरेगा की मजदूरी में न्यूनतम वृद्धि है, जिसके कारण मजदूर वर्ग की आय स्थिर हो गयी है तथा महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि महात्मा गांधी नेशनल रोजगार गारंटी मनरेगा का नाम बदलने के लिऐ संसद में विधेयक लाना मोदी सरकार की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति दुर्भावना को प्रदर्शित करता है। नाथूराम के महिमामंडन के लिए महात्मा गांधी के पुण्य स्मृति को मिटाने का षड़यंत्र कर रही है। भाजपा सोचती है कि वह एक योजना से गांधीजी का नाम बदलकर गांधी जी को जनमानस से दूर कर लेगी तो यह उनकी भूल है। गांधीजी भारत के जनमन में बसे है, भाजपा का कोई भी षड़यंत्र भारत के लिए गांधीजी के योगदान को मिटा नहीं सकता।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मनरेगा जन आंदोलनों से जन्मा कानून है, जो ‘‘हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो’’ के वादे को अपने भीतर समेटे हुए है। इसने ग्रामीण भारत के लोगों को काम मांगने का कानूनी अधिकार दिया, पूरे ग्रामीण भारत में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की, विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत किया, महिलाओं और भूमिहीनों को सशक्त बनाया तथा लागू किए जा सकने वाले अधिकारों के माध्यम से श्रम की गरिमा को कायम रखा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यूपीए की मनमोहन सरकार के दौरान ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को हर साल 100 दिन का गारंटेड रोजगार प्रदान किया जाता था, इसमें सड़क निर्माण, तालाब और कुएं की खुदाई जल संरक्षण और सूखा राहत जैसे सार्वजनिक कार्य शामिल किए जाते थे, यदि आवेदक को 15 दिन के भीतर काम उपलब्ध नहीं कर पाए तो व्यक्ति मजदूरी के भुगतान का पात्र माना जाता था, लेकिन भाजपा की सरकार आने के बाद से हितग्राहियों को ना काम मिल रहा है, ना भुगतान।
रायपुर/शौर्यपथ
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय प्रदेश में 14,85,142 से अधिक शहरी एवं ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास का निर्माण हो चुका था एवं 8 लाख से अधिक प्रधानमंत्री ग्रामीण एवं शहरी आवास की राज्यांश की राशि 3,200 करोड़ रुपए कांग्रेस सरकार ने केंद्र के पास जमा करवा दी थी। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 18 लाख नया प्रधानमंत्री आवास देने का जो वादा किया था वह गरीबों के साथ धोखा और छल साबित हुआ है। बीते 2 साल में 18 लाख नया प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत नहीं हुए हैं, बल्कि भाजपा सरकार में प्रधानमंत्री आवास ने बुलडोजर चलाकर तोड़ने का काम किया है। जो भी प्रधानमंत्री आवास बना है वह कांग्रेस सरकार के दौरान ही बना है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान प्रदेश के पांच संभाग के सभी जिला में तेजी से प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण निर्माण किया गया था रायपुर संभाग जिला रायपुर 29480, बलौदाबाजार 45373, धमतरी 40388, गरियाबंद 45902, महासमुंद 73266, सरगुजा संभाग जिला बलरामपुर 44188, जशपुर 61784, कोरिया 13416, मनेन्द्रगढ़ 23172, सूरजपुर 37568, सरगुजा स्वीकृत 65904, बस्तर संभाग जिला बस्तर 23063, बीजापुर 4449, नारायणपुर 3829, सुकमा 10118, दंतेवाड़ा 11179, कोंडागांव 15994, कांकेर 29207, बिलासपुर संभाग जिला बिलासपुर 59123, गौरेला 27608, जांजगीर-चांपा 45436, कोरबा 64837, मुंगेली 49225, रायगढ़ 57793, सक्ती 46585, सारंगढ़ 47796, दुर्ग संभाग जिला बालोद 32394, बेमेतरा 32724, दुर्ग 23700, कबीरधाम 48657, खैरागढ़ 19052, मोहला 15490, राजनांदगांव 27442 है जो केंद्र के स्वीकृत 1176142 ग्रामीण आवास है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि जिस प्रकार से गरियाबंद जिला में 1,000 से अधिक अधूरे मकानों की गृह प्रवेश की जानकारी लगी है, अब तो प्रधानमंत्री के हाथों हुई 3 लाख 50 मकान के गृह प्रवेश पर भी सवाल उठने लग गए हैं। इसकी जांच होनी चाहिए, उन साढ़े तीन लाख मकान में कितने मकान पूर्ण हो चुके हैं? कितने अपूर्ण है? अधूरे मकानों के गृह प्रवेश कराने के दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। भाजपा सरकार को अपने इस कृत्य के लिए आवासहीनों से माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा का 2 साल छत्तीसगढ़ बेहाल
रायपुर/(shouryapath) प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने भारतीय जनता पार्टी की 2 साल की सरकार को खस्ता हाल बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में अपराध का ग्राफ बढ़ा है और अपराधी बेलगाम होते जा रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ा है। हर तीन घंटे में एक महिला दुष्कर्म का शिकार हो रही हैं। सिर्फ बलात्कार ही नहीं हत्या, लूट, अपहरण जैसे अपराधों के मामलों में भी रायपुर प्रदेश में सबसे आगे है। आंकड़ों के मुताबिक दुष्कर्म के मामले में रायपुर पहले पायदान पर है, जबकि बिलासपुर दूसरे और कोरबा तीसरे नंबर पर है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि फरवरी 2025 के इन सब आंकड़ों में बलात्कार के आंकड़े सबसे ज्यादा चौकाने वाले हैं। प्रदेश में एक साल के भीतर बलात्कार के कुल 3191 केस दर्ज किए गए हैं। इस हिसाब से रोज प्रदेश में 8 से 9 महिलाएं दुराचार का शिकार बन रही हैं। इस तरह से छत्तीसगढ़ में हर 3 घंटे में एक महिला के साथ दुष्कर्म की घटना हो रही है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जब-जब कोई स्लोगन दिया है, तब-तब उसका विपरीत ही हुआ है। जैसे की बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नारा पर बेटियों के ऊपर अत्याचार, अनाचार की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है और ना ही बेटी आगे पढ़ पा रही है, वैसे ही एक और स्लोगन भारतीय जनता पार्टी ने दिया है, हमने बनाया है और हम ही सवारेंगे लेकिन इसके विपरीत प्रदेश की जल, जंगल, जमीन को बेचने की तैयारी में लगे हुए हैं। विष्णु देव साय के सरकार में बिजली, खाद, जमीन, घर, रेत सीमेंट महंगा। मूलभूत के सभी वस्तुओं के दाम में वृद्धि होती जा रही है।
रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बिजली बिल सरकार प्रायोजित लूट के उदाहरण है। हर जगह बिजली उपभोक्ताओं की शिकायत है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से उनकी खपत वास्तविक खपत से अधिक बताई जा रही है, स्मार्ट मीटर सामान्य मीटर की तुलना में बहुत तेजी से चल रहा है। बिजली उपभोक्ताओं का यह अधिकार है कि अपनी वास्तविक खपत को जान सके। चेक मीटर का प्रावधान पहले से ही था, लेकिन यह सरकार अपनी लूट पर परदेदारी करने के लिए चेक मीटर लगाने और मीटर चेक करवाने उपभोक्ताओं से 1000 और 1500 रुपए शुल्क लेने का प्रावधान कर दिया गया है, यदि मीटर में गड़बड़ी का आरोप उपभोक्ता लगा रहे हैं, तो उसे मुफ्त में चेक किया जाए, किसी भी तरह से अतिरिक्त शुल्क अनुचित है। यह प्रावधान सरकार ने गड़बड़ी छुपाने के लिये किया है। मीटर चेक शुल्क का प्रावधान तत्काल वापस ले सरकार।
भाजपा सरकार बिजली बिल के नाम पर जनता को लूट रही है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार ने बिजली के दाम चार बार बढ़ा दिया। 400 यूनिट हाफ योजना को बंद कर दिया। स्मार्ट मीटर लगा दिया इन सबसे बिजली के दाम बेतहाशा बढ़ गए, जनता परेशान है। सरकार, जनता को राहत देने के बजाय अब बिजली के दामों में 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार (एफपीपीएस) के रूप में अतिरिक्त चार्ज इस महीने से लगाने जा रही, इससे बिजली के दाम एक बार फिर से बढ़ेंगे। कांग्रेस, सरकार के इस निर्णय का विरोध करती है। सरकार, कोयले का सेस कम होने के कारण बिजली का दाम कम तो नहीं कर रही, ऊपर से एक नया टैक्स लगा रही।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि 400 यूनिट तक छूट को आधी करके 200 यूनिट किया, उसमें भी यह शर्त लगा दिया गया कि खपत 400 यूनिट से अधिक होते ही सारी छूट, राहत, रियायत पूरी तरह खत्म। ऊपर से सभी घरों में स्मार्ट मीटर लगाकर अधिक वसूली कर रहे है। अधिक मुनाफाखोरी के लालच में यह सरकार अनाप-शनाप बिजली बिल वसूलने के लिए नए नए पैंतरे अपना रही है।
रायपुर / शौर्यपथ /
रायपुर लोकसभा प्रत्याशी एवं पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने आज पत्रकार वार्ता में पीएम पोषण योजना के तहत एल्यूमिनियम बर्तन खरीदी को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार ने एल्यूमिनियम बर्तन खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर बच्चों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ किया है।
उपाध्याय ने बताया कि एल्यूमिनियम बर्तनों में भोजन पकने से होने वाले दुष्प्रभाव वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं, इसी कारण केंद्र और कोर्ट ने सरकारी भोजन निर्माण में इनके उपयोग पर रोक के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद राज्य में टेंडर जारी कर दिए गए, जिससे खरीद प्रक्रिया की मंशा और पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडरों को ऐसे तैयार किया गया कि केवल चुनिंदा फर्मों—जैसे हृक्र ्रह्यह्यशष्द्बड्डह्लद्गह्य, त्रड्डठ्ठश्चड्डह्लद्ब श्वठ्ठह्लद्गह्म्श्चह्म्द्बह्यद्गह्य, स्द्धह्म्द्ब क्रड्डद्व ष्टह्म्द्गड्डह्लद्बशठ्ठ—को ही लाभ मिले। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी इन्हीं फर्मों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई, जबकि कई योग्य और कम दर वाले सप्लायरों को तकनीकी शर्तों के नाम पर बाहर कर दिया गया।
उपाध्याय ने कहा कि हाल ही में स्पोट्र्स किट टेंडर में सुप्रीम कोर्ट की नाराजग़ी और री-टेंडर के आदेश के बाद भी विभाग ने सीख नहीं ली है। लगातार टेंडरों पर संदेह यह दर्शाता है कि खरीद प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कम होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कुछ अधिकारियों, चुनिंदा ठेकेदारों और सत्ता से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों के बीच गठजोड़ से टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा, "यह लड़ाई राजनीति की नहीं, बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य की रक्षा की है। टेंडरों को निजी संपत्ति समझकर बांटने की प्रवृत्ति लोकतंत्र नहीं—लूटतंत्र है। और इस लूटतंत्र का अंत होना चाहिए।"
उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की, यह कहते हुए कि राज्य सरकार पीएम की मंशा को पलीता लगा रही है।
मुख्य माँगें:
पोषण योजना में एल्यूमिनियम बर्तनों के उपयोग पर तुरंत रोक।
सभी टेंडरों की विस्तृत और पारदर्शी समीक्षा।
क्करू क्कह्रस्॥्रहृ की गाइडलाइन का कड़ाई से पालन।
मिलीभगत सामने आने पर दोषियों पर कठोर कार्रवाई।
विभाग में सक्रिय कथित गठजोड़ की निष्पक्ष जांच।
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, सुरेन्द्र वर्मा, सत्यप्रकाश सिंह, अशोक ठाकुर, संदीप तिवारी और विनोद कश्यप उपस्थित रहे।
दुर्ग / शौर्यपथ / भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) दुर्ग विधानसभा में संगठनात्मक शिथिलता और लगातार मिल रही अनुशासनहीनता की शिकायतों के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए संपूर्ण पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष वरुण केवळतानी द्वारा जारी आदेश ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस संगठन अब ढिलाई, निष्क्रियता और निर्देशों की अनदेखी को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
गंभीर कार्यक्रमों में अनुपस्थिति बनी कार्रवाई का मुख्य आधार
आदेश में उल्लेखित है कि जिला कांग्रेस के महत्वपूर्ण एवं गरिमामय कार्यक्रमों में वरिष्ठ नेतृत्व स्वयं उपस्थित था, किंतु NSUI दुर्ग विधानसभा के पदाधिकारियों की अनुपस्थिति लगातार देखी गई। कई बार सूचित किए जाने के बावजूद समिति के एक भी पदाधिकारी की उपस्थिति दर्ज नहीं हुई।
संगठन ने इसे “कर्तव्य के प्रति उदासीनता और अनुशासनहीनता” बताते हुए कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया।
नोटिस का जवाब न देना बना निर्णायक कारण
दिनांक 06 दिसंबर 2025 को स्पष्टीकरण हेतु नोटिस जारी किया गया था, परंतु किसी भी पदाधिकारी द्वारा निर्धारित समय सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। NSUI जैसे अनुशासन-आधारित संगठन में इसे गंभीर त्रुटि माना गया। यही कारण रहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने सामूहिक रूप से सभी पदाधिकारियों के पद समाप्त करने का फैसला सुना दिया।
राजनीतिक रूप से बड़ा संकेत—युवा संगठन में साफ-सफाई की शुरुआत?
यह फैसला न केवल संगठनात्मक अनुशासन का संदेश देता है, बल्कि आने वाले समय में कांग्रेस द्वारा अपने युवा मोर्चे को नए सिरे से सक्रिय, जिम्मेदार और जमीनी रूप से मजबूत करने की स्पष्ट राजनीतिक रणनीति भी दिखाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र कांग्रेस संगठन युवा नेतृत्व में ऊर्जा और जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहता है, ताकि जमीनी स्तर पर संगठन मजबूती से खड़ा हो सके।
किसे भेजा गया संदेश?
सामूहिक पदमुक्ति का यह फैसला साफ संकेत देता है कि संगठन में केवल पद धारण करने से नहीं, सक्रियता और समर्पण से पहचान बनेगी। कार्यकर्ताओं को वरिष्ठ नेतृत्व के निर्देशों और कार्यक्रमों को प्राथमिकता देनी होगी। कांग्रेस अब निष्क्रिय इकाइयों और गैर-जिम्मेदार पदाधिकारियों पर निगरानी और कार्रवाई दोनों करेगी।
आगे क्या?
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि NSUI दुर्ग विधानसभा की नई संरचना जल्द घोषित की जाएगी।नई टीम में सक्रिय, जमीनी, प्रतिबद्ध और संगठनात्मक गतिविधियों में निरंतर भागीदारी करने वाले युवाओं को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
NSUI दुर्ग विधानसभा में की गई यह कड़ी कार्रवाई केवल आंतरिक अनुशासन का मामला नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की नई नीति का संकेत भी है—“अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस, और सक्रियता ही संगठन में सम्मान का आधार।”
रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में किसानों, दलितों, आदिवासियों की जमीनों के लूटने का षड्यंत्र चल रहा। सरकार जमीनों के इस लूट की सहभागी है। कल खैरागढ़ छुईखदान गया था, वहां पर सिमेंट प्लांट लगाने के नाम पर किसानों की जमीन जबरिया अधिग्रहित की गयी, जनसुनवाई का विरोध कर रहे ग्रामाणों पर लाठियां चलवाई गयी। पूरे प्रदेश में उद्योगों कोयला खदानों आदि के नाम पर किसानों की जमीन जबरिया अधिग्रहित की जा रही, किसान विरोध कर रहे तो उन पर लाठियां चलाई जा रही। हसदेव, अमोरा, तमनार, खैरागढ़, मैनपाट, बीजापुर, बैलाडीला कांकेर में यही हुआ, सरकार ने लोगों की सहमति के बिना उनकी जमीनों को उद्योगपतियों को दे दिया। खैरागढ़, अमोरा, तमनार, मैनपाट में ग्रामीणों पर लाठियां चलवाई गई। यह सरकार उद्योगपतियों की दलाल बन गई है।
दुर्दांत नक्सलियों के प्रकरण वापस लेंगे, निर्दोष आदिवासियों के बारे में कब फैसला होगा?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मंत्रिमंडल के द्वारा समर्पित नक्सलियों के आपराधिक प्रकरण वापस फैसले लेने की और उसकी समीक्षा की फैसला का निर्णय बेहद ही दुर्भाग्यजनक है। सरकार बताये जो झीरम कांड में शामिल थे, जो ताड़मेटला, रानीबोदली, एडसमेटा जैसे नरसंहार में शामिल थे, जो सैकड़ों हजारों नरसंहार में शामिल थे, क्या उनका भी अपराधिक प्रकरण सरकार वापस लेगी? सरकार की अपनी नक्सल नीति है, मुख्यधारा में लाने के लिए, सरकार उनके पुनर्वास के बारे में फैसला करे लेकिन गंभीर आपराधिक घटना में शामिल नक्सली और सामान्य घटना में बंद जिसके खिलाफ चार्जशीट तक नहीं दाखिल कर पाये उनके बारे में सरकार अपना मत स्पष्ट करे। नक्सली के नाम पर जिन आदिवासियों को सरकार ने नक्सली बताकर जबरिया बंद कर रखा है, जिनके बारे में अदालत में चालान तक नहीं पेश किया गया है। सरकार बताये उनको छोड़ने के लिये क्या किया जा रहा है? जो निर्दोष है किसी घटना और हत्या में शामिल नहीं थे, उनके बारे में पहले फैसला लिया जाना चाहिये। पुलिस के द्वारा सिर्फ टारगेट पूरा करने के लिये सैकड़ों आदिवासियों को जेल में बंद किया था। जो निर्दाष है उनके बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है, पहले तो उनके लिये फैसला होना चाहिये।
एसआईआर की समय सीमा तीन माह और बढ़ाया जाए
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आज एसआईआर की अंतिम दिन है। अभी तक सभी नागरिकों का एसआईआर नहीं हो पाया है। प्रदेश के बहुत से नागरिक रोजी-रोटी के लिए बाहर गए हैं, उनका एसआईआर नहीं हुआ है। आज भी लाखों लोगों का फॉर्म बीएलओ तक नहीं पहुंचा है। हमारी मांग है एसआईआर की अवधि 3 माह और बढ़ाई जानी चाहिए। ताकि हर नागरिक का नाम मतदाता सूची में आ सके।
आरक्षक भर्ती परीक्षा में घोटाला हुआ है
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में घोटाला हुआ है इस बात को कांग्रेस पार्टी और अभ्यर्थी लगातार उठाते रहे हैं। अभी जब परिणाम घोषित हुए हैं उसके बाद घोटाले की पुख्ता सबूत सामने आ रहे हैं। एक ही क्रमांक के 33 अभ्यर्थियों के आवेदन सामने आए हैं, वे सभी चयनित किये गये है। एक अभ्यर्थी को लिखित परीक्षा में 39 नंबर मिला है उसका उसका चयन हो गया है। शारीरिक परीक्षा का पूर्णांक 100 नंबर का है यदि उसे शारीरिक परीक्षा में 100 में 100 मिला होगा तो भी उसका कुल अंक 139 ही होगा, जबकि 143 नंबर वाले का चयन नहीं हुआ। लिखित परीक्षा का नंबर सार्वजनिक हो सकता है तो शारीरिक परीक्षा का नंबर क्यों नहीं जारी हुआ? दोनों मिलाकर प्राप्तांक क्यों नहीं जारी किया गया? सरकार भर्ती परीक्षा में घोटाले कर युवाओं के सपने बेच रही है। पुलिस आरक्षक ही नहीं फॉरेस्ट आरक्षक, आरआई परीक्षा सहित अनेकों परीक्षाओं में भाजपा सरकार ने घपले करवाया है।
सोसायटियों का लिमिट फिक्स खरीदी बाधित हो रही
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार ने सभी सोसायटियों के लिए एक दिन की अधिकतम खरीद सीमा तय कर दी है। एनआईसी ऐसा सिस्टम तय किया है लिमिट के बाद कंप्यूटर लॉक हो जाता है। जिसके कारण सोसायटियां चाह कर भी लिमिट से अधिक धान नहीं खरीद सकती। इस लिमिट के कारण दोपहर के बाद सोसायटी में सन्नाटा पसर जाता है। इस लॉक के कारण नियत समय में सभी किसानों का धान कैसे बिक पाएगा? सरकार जानबूझकर यह लिमिट सिस्टम बनाई है ताकि समर्थन मूल्य में कम खरीदी करनी पड़े।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
