August 25, 2026
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    राजनीति

    राजनीति (1230)

      रायपुर/ शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नक्सलवाद खात्मे की तिथि 31 दिसम्बर 2026 बताये जाने पर सवाल खड़ा करते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा नक्सलवाद खात्मे को लेकर क्या केंद्रीय गृहमंत्री एवं मुख्यमंत्री के बीच मतभेद है? केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह नक्सलवाद खात्मे की डेड लाईन 31 मार्च 2026 बताते है, वही गृहमंत्री के साथ बैठक के पश्चात मुख्यमंत्री मीडिया के सवालो का जवाब देते हुए कहते है, 31 दिसम्बर 2026 तक नक्सलवाद खत्म होगा। आखिर क्या चल रहा है? इन दोनों प्रमुखों के बयान से जनता भ्रमित है।सच क्या है? जनता जाना चाहती है। जनता केंद्रीय गृहमंत्री के बयान पर भरोसा करें या राज्य के मुखिया पर?

    प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा पूरा प्रदेश चाहता है कि नक्सलवाद खत्म हो।इसकी ठोस रणनीति बने ताकि भविष्य में इस प्रकार से हिंसात्मक गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगे। फोर्स और सुरक्षा के जवान लगातार नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक कार्यवाही कर रहे है। लेकिन गृहमंत्री और मुख्यमंत्री के बयान का विरोधभास संसय पैदा कर रहा है। क्या केंद्रीय गृहमंत्री हड़बड़ी में है, इसलिये 31 मार्च की बात कर रहे है और मुख्यमंत्री वास्तविकता को जान रहे है, इसलिये 31 दिसम्बर 2026 तक कि डेड लाईन बता रहे है।
    प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा नक्सलवाद खात्मे को लेकर मुख्यमंत्री को स्पस्ट जवाब जनता को देना चाहिए। नक्सलवाद के खिलाफ चलाये जा रहे मुहिम में पूरा प्रदेश एक साथ खड़ा हुआ है, लेकिन गृहमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच समन्वय की कमी नजर आ रही जो दोनों के अलग-अलग बयान से झलक रहा है। ये प्रदेश के हित में नही है।

      रायपुर/ शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नक्सलवाद खात्मे की तिथि 31 दिसम्बर 2026 बताये जाने पर सवाल खड़ा करते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा नक्सलवाद खात्मे को लेकर क्या केंद्रीय गृहमंत्री एवं मुख्यमंत्री के बीच मतभेद है? केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह नक्सलवाद खात्मे की डेड लाईन 31 मार्च 2026 बताते है, वही गृहमंत्री के साथ बैठक के पश्चात मुख्यमंत्री मीडिया के सवालो का जवाब देते हुए कहते है, 31 दिसम्बर 2026 तक नक्सलवाद खत्म होगा। आखिर क्या चल रहा है? इन दोनों प्रमुखों के बयान से जनता भ्रमित है।सच क्या है? जनता जाना चाहती है। जनता केंद्रीय गृहमंत्री के बयान पर भरोसा करें या राज्य के मुखिया पर?

    प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा पूरा प्रदेश चाहता है कि नक्सलवाद खत्म हो।इसकी ठोस रणनीति बने ताकि भविष्य में इस प्रकार से हिंसात्मक गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगे। फोर्स और सुरक्षा के जवान लगातार नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक कार्यवाही कर रहे है। लेकिन गृहमंत्री और मुख्यमंत्री के बयान का विरोधभास संसय पैदा कर रहा है। क्या केंद्रीय गृहमंत्री हड़बड़ी में है, इसलिये 31 मार्च की बात कर रहे है और मुख्यमंत्री वास्तविकता को जान रहे है, इसलिये 31 दिसम्बर 2026 तक कि डेड लाईन बता रहे है।
    प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा नक्सलवाद खात्मे को लेकर मुख्यमंत्री को स्पस्ट जवाब जनता को देना चाहिए। नक्सलवाद के खिलाफ चलाये जा रहे मुहिम में पूरा प्रदेश एक साथ खड़ा हुआ है, लेकिन गृहमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच समन्वय की कमी नजर आ रही जो दोनों के अलग-अलग बयान से झलक रहा है। ये प्रदेश के हित में नही है।

      रायपुर/शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि 2 साल में ही भाजपा सरकार जनता की नजरों से गिर गई है, अब भाजपा के ही सांसद, विधायक अपने सरकार के क्रियाकलापों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल रहे हैं। राजिम कुंभ में करोड़ों रुपए का बजट कहां खर्च हुआ? जब वहां भारी अव्यवस्था है साधु संतों से लेकर स्थानीय कलाकारों का अपमान हो रहा है, श्रद्धालुओं को भारी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। कोई ढंग का इंतजाम नहीं है फिर पैसे कहां खर्च किया गया? क्या कुंभ के आयोजन के नाम से भ्रष्टाचार कर उसमें भी बंदरबांट किया जा रहा है? भाजपा विधायक रोहित साहू मेला स्थल में अधिकारियों पर भड़ास निकालकर जनता को भ्रमित कर रहे है क्योंकि कुंभ के आयोजन में वो भी कमेटी में है। ऐसे में उनकी नाराजगी बताती है कि सरकार में कितना भर्राशाही चल रही है।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि वरिष्ठ भाजपा नेता ननकी राम कंवर लगातार सरकार के भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अराजकता के खिलाफ आवाज उठा रहे लेकिन उनके आवाज की अनदेखी की जा रही। ननकी राम के आरोपों पर सरकार की चुप्पी बताती है कि सभी गड़बड़ियां सरकार के इशारे पर हो रही है।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जम्बूरी में करोड़ो रुपया की गड़बड़ी हुई, 33 हजार शिक्षकों की भर्ती, यातायात अव्यवस्था और कानून व्यवस्था पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया फिर चुप हो गये? सांसद विजय बघेल मोदी की गारंटी पूरा करने सरकार को पत्र लिखे, फिर चुप्पी साध ली? राजेश मूणत शहर की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाये, फिर चुप हो गये? विधायक सुनील सोनी खराब सड़क, खराब सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़ा किये, फिर चुप हो गये? अब रोहित साहू राजिम कुंभ पर सवाल खड़ा कर रहे है। यह बताता है कि पूरी की पूरी सरकार भ्रष्ट है जो भाजपाई हिस्सा नहीं पा रहे वो तिलमिला रहे।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार के कामकाजों से नाराज सवाल उठाने वाले सांसद, विधायक यदि जनता के प्रति खुद को जिम्मेदार मानते है तो सरकार की नाकामियों के चलते इस्तीफा क्यों नहीं देते? इसी को कहते है मुंह में राम बगल में छुरी, एक ओर जनता की हितैषी बनने का स्वांग करो, दूसरी ओर सत्ता की मलाई खाओ। भाजपा नेताओं की राजनैतिक नौटंकी जनता देख और समझ रही है। ये प्रोपोगंडा चलने वाला नहीं है।

       रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार एवं मिलरों के सांठ-गांठ के चलते गरीबों को इस माह चावल देने गोदामों में चावल नहीं है। कस्टम मिलिंग के बाद मिलरों के द्वारा पूरा चावल जमा नहीं कराना सरकार की कमजोरी है। सरकार ने इस माह एकमुश्त दो माह का चावल देने का आदेश जारी किया लेकिन वास्तविकता यह दो माह दूर की बात एक माह का चावल देने लायक स्टॉक सरकारी गोदाम में नहीं है। राशन दुकान में गुणवत्ताहीन खराब चावल मिलने की शिकायत लगातार हो रही है। बस्तर में 30 हजार टन सड़ा चावल वितरण करने दिया गया। जिसका विरोध हुआ, अकेले रायपुर जिला में 75 राईस मिलर ने 7,500 टन कस्टम मिलिंग का जमा नहीं किया गया। पूरे प्रदेश में यही स्थिति है। सरकार ने चावल जमा नहीं करने वाले राईस मिलर पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की? उन्हें ब्लैक लिस्टेड क्यों नहीं किया गया? उनसे चावल की रिकवरी क्यां नहीं की गई? इससे समझ में आ रहा है दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल काली है।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकारी गोदाम में चावल नहीं है, फोर्टिफाइड राइस का टेंडर नहीं हुआ है, फिर गरीबों को दो माह का चावल एकमुश्त देने का आदेश क्यों दिया गया? ये आदेश गरीबों के साथ भद्दा मजाक है, अपमान है। क्या खाद्य संचालनालय के अधिकारी बेसुध रहते है? उन्हें अपने विभाग की स्टॉक के बारे में जानकारी नहीं है? बड़ी अराजक स्थिति है? राशन कार्डधारी पहले ही खराब क्वालिटी की सड़ा हुआ चावल राशन दुकानों से मिलने की शिकायत कर रहे है। जिस पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। क्या विभाग, खाद्य मंत्री के बिना जानकारी इस प्रकार से आदेश दिया है? क्या ये आदेश विभागीय मंत्री के अनुमोदन से हुआ है? लाखों टन चावल जिसमें फोर्टिफाइड चावल कैसे मिलेगा?

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जिस प्रकार से खाद्य विभाग की कार्यशैली है इस बात का प्रमाण है विभागीय मंत्री के नियंत्रण में कुछ भी नहीं है? खाद्य मंत्री को इसका जवाब देना चाहिए कि खाली गोदाम से गरीबों के घर तक दो माह का चावल कब पहुंचेगा? सरकार के अजीबोगरीब फरमान से खाद्य अधिकारी एवं राशन दुकान संचालक सभी परेशान है। गरीबों को चावल देने के नाम से भाजपा सरकार गुमराह कर रही है। सरकार तत्काल फोर्टिफाइड मिला चावल की व्यवस्था कर, राशन कार्डधारियों को दे।

    अभियान चलाकर 15 दिन और धान खरीदी की जाये -कांग्रेस

       रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बंद कर दिया है। लेकिन अभी भी प्रदेश के लाखों किसान अपना धान नहीं बेच पाये है। इस साल सरकार ने मात्र 53 दिन ही धान खरीदा। अंतिम तिथि भी 31 जनवरी थी, लेकिन अंतिम 2 दिन शनिवार और रविवार होने के कारण खरीदी नहीं हुई। पूर्व में घोषित 75 दिन भी पूरी खरीदी नहीं किया गया। इस वर्ष सरकार के द्वारा घोषित लक्ष्य 165 लाख मीट्रिक टन था, लेकिन सरकार ने मात्र 139 लाख 85 हजार मीट्रिक टन ही धान खरीदी किया गया। लक्ष्य से 25 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदी किया गया। पिछले साल सरकार ने 149 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा था, इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले 9 लाख 15 हजार मीट्रिक टन कम की खरीदी की गयी।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कुल 27 लाख किसानों का पंजीयन हुआ था, जिसमें से 2.5 लाख किसान अपना धान नहीं बेच पाये। लगभग 5 लाख किसानो का एग्रीस्टेक पोर्टल की परेशानी के कारण पंजीयन नहीं हुआ। किसानों को धान बेचने से रोकने बिना सहमति जबरिया रकबा सरेंडर करवा दिया गया। पूर्व से जारी टोकन को निरस्त करवाया गया। हजारो किसान सरकार के इस षडयंत्र का शिकार हुये। धान का टोकन नहीं मिलने, धान की खरीदी नहीं होने के कारण प्रदेश के महासमुंद, कवर्धा, कोरबा, जैसे स्थानों पर अनेको किसानों ने आत्महत्या का प्रयास किया। एक ने आत्महत्या भी किया। यह बताता है कि प्रदेश में धान खरीदी के कारण किसान परेशान हुये। सिर्फ नारायणपुर, बलरामपुर, बस्तर में पिछले साल के लगभग बराबर धान की खरीदी हुई, शेष सभी जिलों में 5 प्रतिशत से लेकर 32 प्रतिशत तक कम खरीदी सरकार ने किया।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार की तरफ से कम खरीदी के लिये जश्न मनाया गया। अपने कर्मचारियो को जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से जिलेवार हुई धान खरीदी के आंकड़े जारी किये गये, जिसमें किस जिले में कितनी खरीदी हुई। पिछले साल से कितने प्रतिशत कमी हुई इसका ब्योरा है। सरकार ने अपने आंकड़े में माना है कि प्रदेश के अधिकांश जिलो में पिछले साल के मुकाबले कम खरीदी हुई इसके लिये खाद विभाग, राजस्व विभाग, सहकारिता विभाग नान एवं जिला तथा ब्लाक के अधिकारियो को एसएमएस के जरिये बधाई दिया गया है। यदि लक्ष्य से कम खरीदी हुई है तो किस बात की बधाई। बधाई दे रहे मतलब साफ है आपका ईरादा कम खरीदी का था, आप उसमें कामयाब हुये। लक्ष्य से कम के लिये फटकार लगानी थी, नहीं लगाये क्यो? मतलब कम खरीदी ही आपका लक्ष्य था।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार अभियान चलाकर धान खरीदी 15 दिनों के लिये फिर शुरू करें ताकि बचे सभी किसानों का धान समर्थन मूल्य में खरीदा जा सके।

    गरियाबंद की घटना बिगड़ती कानून व्यवस्था का परिणाम

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि गरियाबंद से बेहद ही दुर्भाग्यजनक खबर आ रही है, वहां के दुतकैया गांव में एक समुदाय के घरों को जला दिया गया। वहां पर एक अपराधी के द्वारा फैलाए जा रहे आतंक के कारण यह घटना घटी। यह घटना पुलिस और सरकार की लापरवाही का परिणाम है। पुलिस सचेत होती अराजक तत्व पर कार्यवाही करती तो शायद यह घटना नहीं होती। मै दोनों पक्षों से शांति की अपील करता हूं तथा घटना की न्यायिक जांच की मांग करता हूं। इसके पहले बलौदाबाजार, कवर्धा, बलरामपुर के बाद गरियाबंद में जनता ने कानून हाथ में लिया है। इससे साफ है लोगों का सरकार और उसके कानून व्यवस्था पर भरोसा नहीं है।

    बजट से छत्तीसगढ़ ठगा गया

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कल मोदी सरकार का जो बजट प्रस्तुत हुआ। उसमें एक बार फिर छत्तीसगढ़ का उल्लेख सिर्फ एक जगह है। विशेष कारीडोर में वह भी छत्तीसगढ़ की जनता के लिये नहीं छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा का दोहन उद्योगपति मित्र आसानी से कर सके। इसलिये राज्य के विकास के लिये बस्तर, सरगुजा क विकास के लिये बजट में कुछ नहीं है।

    एपस्टीन फाईल को लेकर भाजपा चुप क्यों है

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि एपस्टीन फाइल के बारे में मोदी और भाजपा चुप क्यों है इस मामले में प्रधानमंत्री और भाजपा को स्पष्टीकरण देना चाहिये की एपस्टीन फाइल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम से देश की छवि धूमिल हो रही है।

    पत्रकार वार्ता में प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, महामंत्री दीपक मिश्रा, सकलेन कामदार, वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, सुरेन्द्र वर्मा, अशोक राज आहूजा, अमरजीत चावला, प्रवक्ता सत्य प्रकाश सिंह, अजय गंगवानी उपस्थित थे।

       रायपुर/ शौर्यपथ / आम बजट में प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि इस बजट से महिलाएं काफी हताश एवं निराश है। आम बजट में महिलाओं को हर बार की तरह इस बार भी निराशा ही मिला। 2014 में 100 दिन में महंगाई कम करने की बात नरेन्द्र मोदी जी ने कहे थे महिलाओं को समझ नहीं आ रहा है कि नरेन्द्र मोदी के गिनती में 100 दिन आएंगे या नहीं। आम बजट पर महंगाई से निजात मिलेगा आश लगाये महिलाएं बैठी थी लेकिन बेलगाम महंगाई पर वित्त मंत्री भी चुप्पी साध ली है। जब सीतारमण जी वित्त मंत्री बनी तब महिलाओं में खुशी की लहर थी कि महिला वित्त मंत्री है तो हमारा किचन हरा भरा रहेगा, महिला होने के नाते महिलाओं की परेशानी अच्छा से समझेगी लेकिन सब विपरीत हो गया, किचन में संकट छा गया। किचन में लगने वाले चिमनी के दाम बढ़ाये गये है।

    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि बेलगाम महंगाई को कम करने के लिये केंद्र सरकार का कोई प्रयास नही है। आम बजट सिर्फ नाम का रह गया है। 9.6 करोड़ लोगों को मुफ्त गैस कनेक्शन देने की इस बजट में बात कही जा रही है लेकिन इस बात का जिक्र नही किया गया कि मोदी सरकार के गलत नीति के कारण गैस सिलेंडर के दाम 1200 रुपये हो गये है। दैनिक जीवन के आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ती जा रही है। उस पर इस बजट में कुछ भी नही। सोना, चांदी आम व्यक्ति के पहुँच से पहले ही बाहर थी अब इस बजट के बाद से सोना, चांदी को लोग सिर्फ सपने में देखेंगे हकीकत में खरीदने के बारे में सोचेगे भी नहीं। मोदी ने कहा था कि सबके खाते में 15-15 लाख आयेंगे महिलाएं बेसब्री से इंतजार कर रही थी कि इस बजट से 15 लाख मिल जायेंगे लेकिन इस बार भी निराशा ही हाथ लगा।

    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सीता रमन जी का नवां बजट था इस बजट ने भी पिछले बजट के समान आधी आबादी महिलाओं का बजट में अनदेखी किया गया है। महिला सुरक्षा के नाम पर बजट में कुछ नही। इस बजट से हर वर्ग निराश है। बजट के नाम से जनता के साथ धोखा है।

    शौर्यपथ राजनितिक /
    प्रयागराज में आयोजित माघी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि अब यह उत्तर प्रदेश की राजनीति का ऐसा केंद्र बन गया है, जहाँ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सत्ता, संगठन और संत-समाज के साथ संबंधों की गहन परीक्षा हो रही है। शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार, प्रशासनिक कार्रवाई और उसके बाद उभरे विरोधाभासी राजनीतिक संकेतों ने सरकार को एक जटिल चक्रव्यूह में खड़ा कर दिया है।
    शंकराचार्य बनाम प्रशासन: विवाद की जड़
    माघी मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद के पालकी यात्रा को लेकर प्रशासन और संत-समाज के बीच टकराव सामने आया। सरकार की ओर से शंकराचार्य पर “व्यवस्था बाधित करने” जैसे आरोप लगाए गए और लगातार नोटिस भेजे गए। इसके विपरीत, उसी प्रतिबंधित क्षेत्र में ‘सातवाँ बाबा’ का वाहन से प्रवेश—और उस पर किसी प्रकार की रोक-टोक या कार्रवाई का अभाव—प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
    संत-समाज में यह संदेश गया कि नियम सबके लिए समान नहीं हैं, और यही असंतोष का मूल बनता चला गया।
    संत-समाज में दरार, सनातन में विभाजन
    इस घटनाक्रम के बाद साधु-संत दो गुटों में बँटते दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर शंकराचार्य की पदवी और वैधता तक पर सवाल उठने लगे—जो किसी भी सरकार के लिए बेहद संवेदनशील स्थिति है।
    भारत के चार शंकराचार्यों में से कुछ का खुला समर्थन, तो कुछ का मौन—दोनों ही अलग-अलग अर्थों में देखा जा रहा है। जहाँ समर्थन स्पष्ट संदेश देता है, वहीं मौन को भी कहीं न कहीं समर्थन या रणनीतिक दूरी के रूप में व्याख्यायित किया जा रहा है।
    सरकार के भीतर दो स्वर
    सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सार्वजनिक रूप से शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद को बारंबार प्रणाम, सम्मान-स्नान और मामला समाप्त करने की अपील कर सरकार के भीतर मौजूद दो अलग-अलग दृष्टिकोणों को उजागर कर दिया।
    एक ओर मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रशासनिक सख्ती और नोटिस, दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री का नरम और समन्वयी रुख—यह विरोधाभास केवल संत-समाज ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया।
    केंद्रीय नेतृत्व का मौन और संगठनात्मक संकेत
    इस पूरे प्रकरण में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की चुप्पी भी कम अर्थपूर्ण नहीं है। न तो खुला समर्थन, न ही स्पष्ट असहमति—यह मौन कई तरह के राजनीतिक संदेश देता है।
    इसी क्रम में उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी की नियुक्ति—जो कथित तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली पसंद नहीं माने जाते—भी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक संतुलन और शक्ति-वितरण के संकेत देती है।
    2027 से पहले योगी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती
    यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि मामला केवल एक शंकराचार्य या एक मेला-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। यह सनातन समाज की भावनाओं, संतों के सम्मान, और सत्ता-संगठन के समीकरणों से जुड़ा व्यापक प्रश्न बन चुका है।
    यह भी चर्चा में है कि केशव प्रसाद मौर्य की दिल्ली से निकटता और योगी आदित्यनाथ की कथित बढ़ती दूरी, भविष्य की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।
    निष्कर्ष: परीक्षा की घड़ी
    माघी मेले में हुआ यह विवाद उत्तर प्रदेश सरकार के लिए चेतावनी संकेत है। यदि संत-समाज और आम सनातन अनुयायी स्वयं को उपेक्षित या भेदभाव का शिकार महसूस करते हैं, तो इसका प्रभाव सीधे विधानसभा चुनाव 2027 पर पड़ सकता है।
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है—
    क्या वे प्रशासनिक सख्ती, संत-सम्मान और संगठनात्मक संतुलन के बीच इस राजनीतिक चक्रव्यूह को तोड़ पाएँगे?
    या फिर यह घटनाक्रम आने वाले समय में उनकी सत्ता-यात्रा का सबसे कठिन मोड़ साबित होगा—यह निर्णय अब उनके अगले कदमों पर निर्भर करता है।

    दुर्ग। शौर्यपथ
    छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदामों से करोड़ों रुपये मूल्य के धान के कथित रूप से "मुसवा (चूहा)" द्वारा नष्ट किए जाने के भाजपा सरकार के दावे के खिलाफ दुर्ग में कांग्रेस ने ऐसा प्रतीकात्मक और राजनीतिक प्रतिकार किया, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया। किसानों की मेहनत पर पर्दा डालने और धान घोटाले की जिम्मेदारी चूहों पर डालने के आरोपों के बीच जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के नेतृत्व में मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को एक अनोखा "मुसवा प्रदर्शन" आयोजित किया गया।

    राजीव भवन से कलेक्टर कार्यालय तक ढोल-नगाड़ों, नारों और प्रतीकात्मक झांकियों के साथ निकली यह रैली पूरी तरह राजनीतिक संदेश से भरी रही। प्रदर्शन का केंद्र बनी "चूहा झांकी", जिसमें चूहे के वेश में सजे कार्यकर्ता नाचते-गाते आगे बढ़े और हाथों में धान लेकर यह जताते रहे कि भाजपा सरकार अपनी नाकामी और भ्रष्टाचार को "चूहा खा गया" कहकर छुपाने की कोशिश कर रही है।

    इस प्रदर्शन में दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल की भूमिका सबसे प्रमुख रही। उन्होंने कहा कि धान किसानों की मेहनत का प्रतीक है और उसे चूहों के खाते में डालना सरकार की असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। "यदि सरकार का दावा है कि धान चूहे खा गए, तो आज कांग्रेस वही चूहे सरकार को सौंप रही है। अब जवाब सरकार दे," उन्होंने तीखे शब्दों में कहा। धीरज बाकलीवाल ने इसे केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि किसानों के आत्मसम्मान पर सीधा हमला बताया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने प्रतीकात्मक रूप से पिंजरे में बंद चूहे प्रशासन को सौंपे। इन चूहों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि असल जिम्मेदारी किसी जानवर की नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की है। कलेक्टर कार्यालय परिसर में भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश और किसान आक्रोश साफ दिखाई दिया।

    इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष ने कहा कि सरकार धान खरीदी की समय-सीमा नहीं बढ़ा रही है और टोकन व्यवस्था को सीमित रखकर किसानों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है और बड़ी मात्रा में धान खरीदी से बाहर रह जाने का खतरा है।

    प्रदर्शन के बाद दुर्ग कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें करोड़ों के धान घोटाले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों व मंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई, किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित करने, टोकन सीमा बढ़ाने और खरीदी की समय-सीमा में विस्तार की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।

    कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार ने किसानों के हित में तुरंत निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेशव्यापी और उग्र रूप लेगा। दुर्ग में निकली यह "मुसवा बारात" अब भाजपा सरकार की कथित विफलता, भ्रष्टाचार और किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ एक मजबूत राजनीतिक प्रतीक बनकर सामने आ गई है।

    'वीबीजीरामजीÓ के नाम पर रोजगार गारंटी खत्म करने का आरोप, दुर्ग में उबाल

    दुर्ग / शौर्यपथ।
    केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का स्वरूप बदलकर वीबीजीरामजी किए जाने के विरोध में कांग्रेस का आक्रोश तेज हो गया है। दुर्ग जिला युवा कांग्रेस (ग्रामीण) के अध्यक्ष जयंत देशमुख के नेतृत्व में युवा कांग्रेस ने दुर्ग सांसद विजय बघेल के निवास का घेराव करने की चेतावनी दी है। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर 7 दिनों के भीतर ठोस निर्णय लेने की मांग की गई है। चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो सांसद निवास का घेराव किया जाएगा।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे 'मनरेगा बचाओ संग्रामÓ अभियान के तहत युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मनरेगा में किए गए बदलावों से गरीब मजदूरों की रोजगार गारंटी को कमजोर किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा बजट कैपिंग कर योजना की मांग-आधारित प्रकृति को समाप्त किया जा रहा है, वहीं फंडिंग का बोझ राज्यों पर डालकर केंद्र अपना दायित्व निभाने से पीछे हट रहा है।

    दुर्ग ग्रामीण युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष जयंत देशमुख ने कहा कि मनरेगा देश के गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों की जीवनरेखा है, लेकिन केंद्र सरकार इसे योजनाबद्ध तरीके से कमजोर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 100 दिनों की रोजगार गारंटी को 125 दिनों का भ्रम बताकर प्रचार किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में बजट कटौती, बढ़ता केंद्रीकरण और राज्यों पर दबाव डालकर मजदूरों के अधिकार छीने जा रहे हैं।

    जयंत देशमुख ने दुर्ग सांसद विजय बघेल से स्पष्ट शब्दों में मांग की कि वे केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर मनरेगा में किए गए बदलावों को वापस करवाएं, अन्यथा नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि यदि 7 दिनों के भीतर कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो युवा कांग्रेस सांसद निवास का घेराव कर आंदोलन को और तेज करेगी।

    इस विरोध प्रदर्शन में प्रभारी आस मोहम्मद खान, इंदु वर्मा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष गुरदीप सिंह भाटिया, ब्लॉक अध्यक्ष गोपी वर्मा, यशवंत देशमुख, हेमंत साहू, पंकज सिंह, आशीष वर्मा, शशांक साहू, समीर साहू, नज़रुल इस्लाम, अहमद चौहान, दीपांकर साहू, सूरज, फिरोज खान, विकास साहू, आकाश सेन, राम वर्मा, कय्यूम खान, प्रवीण देवांगन, राकेश निषाद, प्रांजल कुर्रे, शुभम देशमुख, राहुल साहू सहित सैकड़ों युवा कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
    युवा कांग्रेस ने दो टूक कहा कि गरीब मजदूरों के हक पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो यह आंदोलन सड़क से संसद तक ले जाया जाएगा।

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