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रायपुर / शौर्यपथ /
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता श्री सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा की सरकार आने के बाद से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अपनी मूल भावना से भटक गई है। रोजगार की कानूनी गारंटी देने वाली यह योजना अब प्रदेश में अघोषित रूप से ठप पड़ी है।
श्री वर्मा ने बताया कि प्रदेश के 70 प्रतिशत से अधिक गांवों में मनरेगा का कोई कार्य नहीं चल रहा, जिससे मजदूर परिवार रोजी-रोटी की समस्या से जूझ रहे हैं और उन्हें पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार स्पष्ट करे कि प्रदेश में कितने स्थानों पर मनरेगा के कार्य संचालित हो रहे हैं और पिछले 20 महीनों में कितने परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ में प्रतिवर्ष लगभग 18 करोड़ कार्य दिवस सृजित किए जाते थे। लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद इस योजना पर रोक-टोक और कटौती शुरू हो गई। उन्होंने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के समय प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य को 100 दिन का गारंटेड रोजगार मिलता था, जिसमें सड़क निर्माण, तालाब व कुएं की खुदाई, जल संरक्षण एवं सूखा राहत जैसे कार्य शामिल थे। यदि 15 दिन के भीतर काम नहीं मिलता था तो मजदूरी का भुगतान किया जाता था। लेकिन अब न तो पर्याप्त काम दिया जा रहा है और न ही मजदूरी का समय पर भुगतान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां गरीब विरोधी हैं। पूरे देश में मनरेगा के तहत 27 करोड़ मजदूर पंजीकृत हैं, लेकिन मोदी सरकार एक-तिहाई यानी 9 करोड़ मजदूरों को भी सालभर में पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं करा पा रही है। 100 दिन के रोजगार की गारंटी तो दूर, 30 दिन का काम भी मजदूरों को नहीं मिल पा रहा है।
छत्तीसगढ़ में भाजपा की डबल इंजन सरकार बनने के बाद मजदूरों की स्थिति और भी बदहाल हो गई है। श्री वर्मा ने कहा कि यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है और सरकार को तुरंत प्रभाव से मनरेगा के कार्य प्रारंभ कर मजदूरों को रोजगार और मजदूरी उपलब्ध करानी चाहिए।
रायपुर/शौर्यपथ /
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) की विश्वसनीयता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि जिन परीक्षाओं को यूपीएससी की तर्ज पर निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने का वादा किया गया था, वे आज गोपनीयता भंग और अनियमितताओं के कारण मजाक बन गई हैं।
बैज ने आरोप लगाया कि पीएससी परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं की जांच ऐसे लोगों से कराई जा रही है, जो पात्र नहीं हैं। एक वेबसाइट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बिलासपुर पीजीबीटी कॉलेज में डेपुटेशन पर कार्यरत शिक्षक एवं एलबी शिक्षक, यहां तक कि प्राचार्य तक, कॉपियां जांच रहे हैं। इस मामले में विद्याभूषण शर्मा, सलीम जावेद सहित अन्य नाम सामने आए हैं, किंतु आयोग की ओर से न तो खंडन किया गया और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि –
“पीएससी परीक्षा में प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उत्तरपुस्तिका जांच तक की प्रक्रिया गोपनीय रहती है। जब परीक्षकों के नाम सार्वजनिक हो रहे हैं तो निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। भाजपा सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच आवश्यक है।”
बैज ने बताया कि बस्तर में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। अनेक गांवों का संपर्क टूट गया है, सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और लोगों का अनाज, पशु-पक्षी बह गए हैं। उन्होंने सरकार से प्रभावित परिवारों को तत्काल मुआवजा, राशन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लागू किए जाने को लेकर बैज ने कहा कि इसका छत्तीसगढ़ के निर्यात क्षेत्र पर गहरा असर पड़ेगा। प्रदेश से अमेरिका को गैर-बासमती चावल, तेंदूपत्ता, जड़ी-बूटियां, जैविक फल, शहद, हस्तशिल्प, धातु एवं लकड़ी की मूर्तियां, एल्युमिनियम उत्पाद आदि निर्यात होते हैं। नए टैरिफ के कारण ये उत्पाद अमेरिका में महंगे होंगे, जिससे खरीदी घटेगी और उत्पादकों को आर्थिक नुकसान तथा बेरोजगारी में वृद्धि होगी।
राजधानी रायपुर के शांति नगर इरिगेशन कॉलोनी को तोड़कर वहां होटल, मॉल और क्लब बनाने की संभावित योजना पर भी बैज ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि रायपुर में पहले से ही ग्रीनरी और खेल मैदानों की कमी है। सरकार को चाहिए कि उस क्षेत्र को ऑक्सीजोन या खेल मैदान के रूप में विकसित करे। यदि व्यावसायिक निर्माण करना ही है, तो इसके लिए पर्याप्त जगह वाले नवा रायपुर का चयन किया जाए।
यह प्रेस विज्ञप्ति सुशील आनंद शुक्ला, अध्यक्ष – कांग्रेस संचार विभाग, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी की गई।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आज पत्रकार वार्ता में भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि राज्य और देश की नीतिगत विफलताओं का खामियाजा आम जनता, उद्योग जगत और कर्मचारी भुगत रहे हैं।
बस्तर में बाढ़ से तबाही, तत्काल राहत व मुआवजा की मांग
दीपक बैज ने कहा कि बस्तर संभाग में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
कई मार्ग अवरुद्ध हैं, दर्जनों गांव जलमग्न हो चुके हैं। मकान गिर गए, मवेशी बह गए और वाहनों के डूबने की खबरें हैं। एक पर्यटक परिवार के चार सदस्यों की मौत भी हुई है। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू करे और नुकसान का आंकलन कर पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए।
मुख्यमंत्री विदेश में, प्रदेश में उद्योग बंद
कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री निवेश लाने विदेश (जापान और दक्षिण कोरिया) गए हैं, जबकि प्रदेश में ही हालात चिंताजनक हैं। भाजपा शासन में अब तक 4288 कंपनियां बंद हो चुकी हैं। स्पंज आयरन, रोलिंग मिल, राइस मिल, सहकारी शक्कर कारखाने बंद पड़े हैं। महंगी बिजली और उद्योग विरोधी नीतियों को उन्होंने जिम्मेदार बताया।
बैज ने पूछा – “जब अपने उद्योग बंद हो रहे हैं तो बाहर से निवेशक यहां क्यों आएंगे?”
एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल पर सरकार को घेरा
बैज ने कहा कि प्रदेश में 16000 से अधिक एनएचएम कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगें मानने की बजाय बर्खास्तगी की धमकी दे रही है। चुनाव के दौरान भाजपा ने “मोदी की गारंटी” के तहत नियमितीकरण का वादा किया था। 21 महीने बीत चुके हैं, पर वादा पूरा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा, “डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद यह कहना कि यह केंद्र का मामला है, जनता और कर्मचारियों को गुमराह करना है।”
अमेरिकी टैरिफ को बताया मोदी सरकार की विफलता
दीपक बैज ने कहा कि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ बढ़ा दिया है, जिससे हमारे उद्योग प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा, मोदी खुद को ट्रंप का मित्र बताते थे, फिर अब चुप क्यों हैं? यदि अमेरिका ऐसा कर सकता है तो भारत को भी अमेरिकी उत्पादों पर वैसा ही कदम उठाना चाहिए।
भाजपा कार्यकर्ता ने मांगी इच्छा मृत्यु
बैज ने भाजपा के अंदरूनी हालात पर भी सवाल उठाए।सूरजपुर जिले के पूर्व मंडल महामंत्री विशंभर यादव ने मुख्यमंत्री से इच्छा मृत्यु मांगी है।यादव दो साल पहले रायपुर में प्रधानमंत्री मोदी की सभा में जाते समय सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। इलाज में 35 लाख से अधिक खर्च हो चुका है, घर-बार बिक चुका है और वे स्थायी रूप से विकलांग हो गए हैं।
भाजपा की सरकार बनने के बावजूद उन्हें कोई मदद नहीं मिली।
बैज ने कहा – “भाजपा कार्यकर्ताओं को देवतुल्य बताती है, लेकिन सच यह है कि संकट में अपने ही कार्यकर्ताओं को बेसहारा छोड़ देती है।”
निष्कर्ष :दीपक बैज ने प्रेसवार्ता के अंत में कहा कि भाजपा सरकार को चाहिए कि वह बस्तर बाढ़ राहत कार्य, उद्योग संकट, एनएचएम कर्मचारियों की मांग और अमेरिकी टैरिफ जैसे गंभीर मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई करे, वरना जनता में सरकार के प्रति असंतोष और बढ़ेगा।
रायपुर / शौर्यपथ /
मुख्यमंत्री के विदेश प्रवास और नए निवेश आकर्षित करने के दावों पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल किया है कि – “छत्तीसगढ़ में जून 2025 तक 18,940 पंजीकृत कंपनियां संचालित थीं, इनमें से 4,288 कंपनियां आखिर क्यों बंद हो गईं?”
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जापान और दक्षिण कोरिया जाकर विदेशी निवेश का ढिंढोरा पीट रहे हैं, जबकि प्रदेश की हकीकत यह है कि पहले से संचालित स्पंज आयरन प्लांट, रोलिंग मिलें, राइस मिल, सहकारी शक्कर कारखाने और एथेनॉल प्लांट भाजपा सरकार की उपेक्षा और उद्योग-विरोधी नीतियों की वजह से ठप हो गए हैं।
वर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कृषि और वनोपज प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी। सीमेंट और स्टील उत्पादन में छत्तीसगढ़ ने नए कीर्तिमान स्थापित किए थे। लेकिन भाजपा की सरकार आते ही उद्योगों पर लगातार चोट की गई—20 महीनों में चार बार बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई।
आज की स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ के उद्योगों को पड़ोसी राज्यों उड़ीसा, झारखंड और मध्यप्रदेश की तुलना में डेढ़ गुना महंगी औद्योगिक बिजली चुकानी पड़ रही है। कांग्रेस काल में बनी उद्योग नीति को बदलकर भाजपा सरकार ने स्थानीय उद्योगों को बर्बाद करने की राह पर धकेल दिया।
वर्मा ने आगे कहा—
“भाजपा सरकार एक तरफ छत्तीसगढ़ के लघु और कुटीर उद्योगों तथा रीपा (रूरल इंडस्ट्रियल पार्क) जैसी योजनाओं को समाप्त करने पर तुली है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री विदेशी धरती पर उद्यमियों को आमंत्रित कर छत्तीसगढ़ की जनता को गुमराह कर रहे हैं।”
कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि बीते 20 महीनों में हजारों उद्योग बंद होने से लाखों युवा बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन में नाकाम भाजपा सरकार अपनी नाकामी से ध्यान भटकाने के लिए केवल “राजनीतिक पर्यटन” कर रही है।
? यह मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में भाजपा सरकार की औद्योगिक नीतियों बनाम कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों के मुकाबले के रूप में उभर चुका है।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि सरकार की लापरवाही के कारण छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना ठप होने की स्थिति में पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों को पिछले 17 माह से भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते अस्पतालों ने गरीबों का इलाज बंद करने की अंतिम चेतावनी सरकार को दे दी है।
दीपक बैज ने कहा— “यदि निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत गरीब मरीजों का इलाज बंद कर देंगे तो हजारों जरूरतमंद लोग संकट में आ जाएंगे। कई गंभीर बीमारियों का इलाज केवल निजी अस्पतालों में ही संभव है, जबकि सरकारी अस्पतालों पर पहले से ही भारी दबाव है।”
कांग्रेस शासन में स्वास्थ्य ढांचे को किया गया था मजबूत
बैज ने दावा किया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को 2018 की तुलना में ढाई गुना बेहतर किया था।
जिला अस्पतालों को मल्टी स्पेशलिटी सेंटर में बदला गया था।
ब्लॉक स्तर पर भर्ती सुविधा विकसित की गई।
डायलिसिस व क्रिटिकल केयर यूनिट शुरू किए गए।
25 लाख तक की मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना लागू की गई।
4000 से अधिक डॉक्टर, नर्स और तकनीकी स्टाफ की नियमित भर्ती की गई।
हाट बाजार क्लिनिक, मोहल्ला क्लीनिक, दाई दीदी क्लिनिक, हमर अस्पताल और हमर लैब जैसे कार्यक्रम शुरू किए गए।
भाजपा शासन में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल – बैज
बैज ने कहा कि भाजपा सरकार के आने के बाद महज़ 11 महीनों में ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराकर रह गई है। मेकाहारा से लेकर उपस्वास्थ्य केंद्र तक की स्थिति भगवान भरोसे है। मलेरिया, पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों से रोज मौतें हो रही हैं। सुकमा के गोगुंडा गांव में 15 दिनों में 10 आदिवासियों की मलेरिया से मौत हो गई। मलेरिया संक्रमण दर 8 गुना बढ़ चुकी है। हमर अस्पताल, हाट बाजार क्लिनिक और मोहल्ला क्लिनिक जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रम ठप हो चुके हैं।
त्वरित निर्णय की मांग
दीपक बैज ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल निजी अस्पतालों का बकाया भुगतान नहीं किया तो आयुष्मान योजना के तहत इलाज पूरी तरह बंद हो जाएगा और गरीब जनता को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
20 अगस्त को तीन नए चेहरों ने ली शपथ, विभाग भी आवंटित — पूर्व CM बोले, कांग्रेस सरकार को नहीं मिली थी अनुमति, अब भाजपा ने कैसे कर लिया विस्तार?
रायपुर। शौर्यपथ ।
छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमाती दिख रही है। प्रदेश में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री के साथ कुल 14 मंत्रियों की सरकार अब सत्ता संचालन कर रही है। 20 अगस्त को शपथ ग्रहण के साथ ही तीन नए चेहरों – दुर्ग से गजेंद्र यादव, आरंग से गुरु खुशवंत सिंह एवं सरगुजा संभाग से राजेश अग्रवाल – को कैबिनेट मंत्री बनाया गया और देर शाम इन्हें विभाग भी आवंटित कर दिए गए।
लेकिन, इस विस्तार के तुरंत बाद प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “मौजूदा मंत्रिमंडल अवैधानिक है।” बघेल के मुताबिक, कांग्रेस सरकार ने 2018 से ही 14 मंत्री शामिल करने की कोशिशें की थीं और इस विषय को न केवल विधानसभा में उठाया गया बल्कि केंद्र को भी प्रस्ताव भेजा गया था, मगर तत्कालीन केंद्र शासन ने अनुमति नहीं दी।
अब सवाल यह उठ रहा है कि भाजपा सरकार ने किस आधार पर 14 मंत्रियों का मंत्रिमंडल गठित किया और क्या इसे केंद्र की औपचारिक मंजूरी मिली है?
"हरियाणा मॉडल" की तर्ज पर छत्तीसगढ़
सूत्र बताते हैं कि राज्य में "हरियाणा मॉडल" अपनाते हुए 14 सदस्यों की कैबिनेट बनाई गई है। लेकिन पूर्व CM के आरोपों ने यह बहस शुरू कर दी है कि क्या इस मॉडल को प्रदेश में लागू करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई है, या फिर यह सिर्फ़ राजनीतिक प्रयोग है?
सियासी गर्माहट और आने वाले सवाल
भूपेश बघेल के बयान के बाद से कांग्रेस हमलावर है और भाजपा को इस पर स्पष्टीकरण देना होगा कि आखिर अब जो संख्या बढ़ाई गई, उसकी संवैधानिक वैधता क्या है। प्रदेश की सियासत में अब चर्चाओं का नया दौर शुरू हो गया है—“क्या राज्य सरकार ने केंद्र की मंजूरी लेकर ही यह कदम उठाया है या फिर यह निर्णय सिर्फ़ राजनीतिक दबाव और दिखावे के तहत लिया गया?”
आगे की राजनीतिक दिशा
एक तरफ भाजपा सरकार अपने नए मंत्रियों के साथ प्रशासनिक गति पकड़ने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस “ग़ैरक़ानूनी मंत्रिमंडल” के मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई की रणनीति बना रहा है। आने वाले दिनों में इस मसले पर न केवल विधानसभा में तेज़ हलचल देखने को मिलेगी, बल्कि प्रदेश की जनता भी सरकार और विपक्ष दोनों की राजनीतिक चालों पर कड़ी नज़र बनाए रखेगी।
? यह खबर राजनीतिक निहितार्थों से भरपूर है और सीधे तौर पर जनता के विश्वास बनाम संवैधानिक वैधता की बहस खड़ी करती है।
दुर्ग शहर की अव्यवस्था से जनता निराश, अतिक्रमण और गंदगी ने बढ़ाई परेशानी; कैबिनेट मंत्री बने गजेंद्र यादव से विकास की नई गाथा लिखने की आस
दुर्ग / शौर्यपथ / नगरीय निकाय चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी श्रीमती अलका बाघमार ने शहरवासियों से अतिक्रमण मुक्त दुर्ग, स्वच्छ और व्यवस्थित बाजार, भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई जैसी कई बड़ी घोषणाएँ की थीं। इन वादों पर भरोसा जताते हुए दुर्ग की जनता ने मतदान के माध्यम से उन्हें महापौर के रूप में चुना। लेकिन महज़ कुछ महीनों के कार्यकाल में ही नगर सरकार की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।
शहर के मुख्य मार्गों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा, जवाहर नगर से सुराना कॉलेज तक फैली गंदगी और कचरे के ढेर, सड़कों के किनारे अवैध अतिक्रमण, जगह-जगह बुझी पड़ी स्ट्रीट लाइटें और थोड़ी-सी बारिश में ही पूरे शहर का जलभराव जैसी समस्याओं ने जनता को निराश किया है। दो महीने तक चले 'महासफाई अभियानÓ का परिणाम भी कुछ घंटों की बारिश में ही धुल गया।
इन हालातों ने न केवल महापौर की कार्यशैली पर बल्कि महापौर चयन में निर्णायक भूमिका निभाने वाले दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। जनता का मानना है कि जिस प्रत्याशी को उन्होंने सांसद के प्रभाव से चुना, वही अब अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
जनता की आवाज़
व्यापारीयो का कहना है – "बाजार क्षेत्र में हर दिन ट्रैफिक जाम और गंदगी से जूझना पड़ता है। हम उम्मीद कर रहे थे कि महापौर बनने के बाद कुछ सुधार होगा, परंतु हालात जस के तस हैं।"
स्थानीय निवासियों ने कहा – "महज कुछ घंटों की बारिश में ही पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जनता पूछ रही है कि आखिर सफाई और नालों की देखरेख का जिम्मा किसका है?"
सुराना कॉलेज के छात्र बोले – "हमारे कॉलेज के सामने कचरे के ढेर और आवारा मवेशियों की समस्या महीनों से बनी हुई है। प्रशासन और नगर निगम दोनों ही सिर्फ आश्वासन देते हैं।"
अब नजरें टिकी हैं मंत्री गजेंद्र यादव पर
ऐसे में अब उम्मीद की किरण दिख रही है दुर्ग शहर के विधायक गजेंद्र यादव से, जिन्हें हाल ही में प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। यह संयोग स्वर्गीय हेमचंद यादव के बाद पहली बार आया है जब दुर्ग शहर विधानसभा का कोई विधायक मंत्री पद से सुशोभित हुआ है।
जनता को विश्वास है कि गजेंद्र यादव के मंत्री बनने से शहर के विकास की नई गाथा लिखी जाएगी। बड़े पद के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है और अब नागरिकों की अपेक्षा है कि मंत्री गजेंद्र यादव गुटबाजी और राजनीतिक खींचतान से ऊपर उठकर दुर्ग के लिए ठोस कार्य करेंगे।
दुर्ग की जनता चाहती है कि—
सड़कों और नालों की तत्काल मरम्मत हो,
अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई की जाए,
स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था को प्राथमिकता मिले,
और जिला मुख्यालय के रूप में दुर्ग का विकास पूरे प्रदेश में मिसाल बने।
आज दुर्ग की जनता जिस अव्यवस्था और उपेक्षा से गुजर रही है, उससे निकलने का रास्ता केवल मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवेदनशील नेतृत्व ही दिखा सकता है। ऐसे में शहरवासियों की निगाहें एक बार फिर अपने विधायक और अब मंत्री बने गजेंद्र यादव पर टिकी हैं कि वे दुर्ग की तकदीर बदलने की दिशा में निर्णायक कदम उठाएँ।
?? विश्लेषण बॉक्स
राजनीतिक समीकरण:दुर्ग महापौर चुनाव में विजय बघेल की भूमिका ने भाजपा की स्थानीय राजनीति में हलचल मचाई थी। महापौर पर सवाल खड़े होने से उनकी साख भी प्रभावित हो रही है। गजेंद्र यादव की सक्रियता अब भाजपा के भीतर संतुलन साधने में अहम साबित हो सकती है।
मुख्य चुनौतियाँ:
नगरीय निकाय में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था पर अंकुश लगाना
सफाई व्यवस्था और जलभराव की स्थायी समस्या का समाधान
शहर में अवैध अतिक्रमण और यातायात अव्यवस्था पर सख्त कार्रवाई
जनता की उम्मीदों को जल्द ठोस कामों में बदलना
संभावनाएँ:यदि गजेंद्र यादव अपने मंत्री पद का प्रभाव शहर के विकास में दिखा पाते हैं तो वे न केवल दुर्ग बल्कि प्रदेश स्तर पर भी एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर सकते हैं। वहीं, यदि अव्यवस्था जस की तस रही तो इसका सीधा राजनीतिक असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संभावित विदेश दौरे से पहले विस्तार की चर्चा तेज़
90-सदस्यीय विधानसभा में संवैधानिक सीमा अनुसार अधिकतम 14 मंत्री (मुख्यमंत्री सहित) संभव—वर्तमान में 11
क्या 33% महिला भागीदारी की ‘आदर्श परिपाटी’ मंत्रिमंडल में दिखेगी?
रायपुर/विशेष संवाददाता शौर्यपथ
छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार की अटकलें एक बार फिर परवान चढ़ गई हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि 18 से 21 अगस्त के बीच किसी भी दिन मंत्रिमंडल में नए चेहरों को जगह मिल सकती है। फिलहाल सरकार में मुख्यमंत्री सहित 11 मंत्री हैं; संवैधानिक सीमा के अनुरूप तीन रिक्त पद भरे जा सकते हैं। चर्चा यह भी है कि इस विस्तार में महिला प्रतिनिधित्व को प्रमुखता दी जाएगी ताकि 33% आरक्षण की ‘आदर्श परिपाटी’ का संदेश कैबिनेट स्तर पर भी जाए।
मुख्य विवरण
संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 164(1A) के तहत 90-सदस्यीय विधानसभा में मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या 14 तय है (मुख्यमंत्री सहित)।
वर्तमान स्थिति: सरकार में 11 मंत्री कार्यरत; 3 स्थान रिक्त।
चर्चा: 18–21 अगस्त के बीच विस्तार की संभावना—आधिकारिक घोषणा शेष।
राजभवन के ‘दरबार हॉल’ का नाम ‘छत्तीसगढ़ मंडपम’ किए जाने व यहीं शपथ समारोह की तैयारी की चर्चा—औपचारिक पुष्टि प्रतीक्षित।
महिला प्रतिनिधित्व: नारा नहीं, नीति
वर्तमान मंत्रिपरिषद में महिला मंत्रियों की संख्या 1 है। यदि कैबिनेट 14 तक भरता है, तो 33% के आदर्श मानक के हिसाब से कम-से-कम 5 महिलाओं की हिस्सेदारी का लक्ष्य प्रतीकात्मकता से आगे बढ़कर नीतिगत भागीदारी का संकेत देगा। विस्तार में कम-से-कम 1–2 नई महिला चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा है। बस्तर से लता उसेंडी और दुर्ग संभाग से भावना बोहरा (जिन्हें 2024 में ‘उत्कृष्ट विधायक’ के रूप में सम्मानित किए जाने का उल्लेख है) जैसे नाम सियासी चर्चा में हैं।
केंद्र स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘नारी शक्ति वंदन’ (33% आरक्षण) के पैरोकार रहे हैं और यह विधेयक संसद से पारित हो चुका है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के लिए यह विस्तार ‘आदर्श राज्य’ की छवि गढ़ने का अवसर बन सकता है।
संभावित दावेदारों की भूमिका: दिए गए नाम सियासी चर्चाओं में चल रहे संभावित विकल्प हैं; आधिकारिक सूची/घोषणा शेष है। उद्देश्य सभी प्रमुख दावेदारों की भूमिका और संभावित संकेत को समग्रता से रखना है।
1) गजेन्द्र यादव: दुर्ग से कांग्रेस के पिछले तीस सालो से लगातार हार / जीत के बावजूद प्रत्याशी रहे अरुण वोरा को चुनावी मैदान में आसान शिकस्त दी आसान इसलिए कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ कांग्रेसी ही मैदान में परदे के पीछे खड़े रहे शहर की जनता भी लगातार एक ही कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन से उब चुकी थी निष्क्रियता और चाटुकारिता से घिरे विधायक की छवि के कारण दुर्ग विधान सभा में चुनावी मौसम में यह चर्चा रही कि भाजपा से कोई भी प्रत्याशी मैदान में होगा जीत निश्चित है ऐसे में भाजपा प्रत्याशी गजेन्द्र यादव को आसान और बड़ी जीत मिली.वर्तमान समय में विधायक यादव और महापौर बाघमार की राजनैतिक दुरी संगठन के कार्यकर्ताओ की विधायक से दुरी के साथ साथ दल्बद्लुओ की फौज का करीबी होना चर्चा का विषय है तो सामाजिक स्तर पर यादव समाज के प्रतिनिधितत्व एक बड़ा फेक्टर साथ दे रहा है .
2) राजेश अग्रवाल (सरगुजा)
क्षेत्रीय महत्व: सरगुजा संभाग का प्रतिनिधित्व मज़बूत करता है, जहाँ संतुलन साधना आवश्यक माना जा रहा है। उत्तरी छत्तीसगढ़ की प्राथमिकताओं—सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई—पर फोकस।
3) गुरु खुशवंत साहिब (रायपुर संभाग ): गुरु खुशवंत साहिब प्रदेश के एक बड़े वर्ग के धार्मिक guru के रूप में जाने जाते है ऐसे में प्रदेश सरकार इस बड़े वर्ग को भी साधने के लिए इन्हें मौका दे सकती है . एससी /एसटी वर्ग को प्रतिनिधितव मिलने से इस वर्ग के मतदाता का रुझान भी पार्टी की तरफ ज्यादा रहेगा ऐसे में इनकी दावेदारी की भी प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है और इन्हें केबिनेट में जगह मिलने की बात से चर्चो का बाजार गर्म है .
4) राजेश मूणत : लंबे समय से सक्रिय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी रखने वाले वरिष्ठ नेता।अनुभवी हाथों से विभागीय डिलीवरी में तेजी लाने का संकेत। किन्तु पिछली बार भाजपा की सत्ता में रहने के दौरान महत्तवपूर्ण विभाग कीई जिम्मेदारी सँभालने वाले पूर्व मंत्री राजेश मुड़त के कई विभागीय कार्यो में अनियमितता और कमीशनखोरी की चर्चो से पूर्व की भाजपा सरकार को काफी नुकसान हुआ था और सत्ता हाथ से जाने का एक बड़ा कारण भी मुड़त को माना गया .
5) अमर अग्रवाल: भाजपा के कद्दावर नेता के रूप में पहचान अनुभवी होने के साथ साथ प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ विधायक व लम्बे प्रशासनिक कार्यो का अनुभव किन्तु बड़ी अड़चन यह कि प्रदेश सरकार की वर्तमान राजनितिक गलियारों में चर्चा के अनुसार नए एवं युवा विधायको को यह मौका देने का जोर कही ना कही अमर अग्रवाल जैसे वरिष्ठ भाजपा विधायक को दरकिनार करता नजर आ रहा है वर्तमान समय में मंत्री मंडल में नए विधायको को जिम्मेदारी मिली जो सरकार की मंशा के अनुरूप जोश के साथ कार्य को अंजाम दे रहे है वही नै पीढ़ी को आगे करने की रणनीति कार्यकर्ताओ में भी उम्मीद की किरण के रूप में एक सार्थक माहौल को जन्म दे रही जो संगठन के लिए भी काफी महत्तवपूर्ण है भविष्य की राजनीती के
6) भावना बोहरा (दुर्ग संभाग ): भावना बोहरा : महिला सशक्तिकरण की नई पहचान
पंडरिया विधानसभा से पहली बार चुनाव जीतने वाली विधायक भावना बोहरा ने अपने सामाजिक और विकास कार्यों से जनता के बीच गहरी छाप छोड़ी है। धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने वाली बोहरा को 2024 में उत्कृष्ट विधायक सम्मान भी मिला। व्यावसायिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं पर पकड़ बनाकर प्रशासनिक दक्षता दिखाई है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि प्रदेश सरकार उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान देती है तो यह न केवल महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम होगा, बल्कि भाजपा संगठन को भी महिलाओं के बीच सशक्त नेतृत्व प्रदान करेगा।
निष्कर्षक संकेत: यदि तीन रिक्त स्थान में 2 पुरुष + 1 महिला या 1 पुरुष + 2 महिलाएँ का फार्मूला अपनता है, तो क्षेत्रीय-सामाजिक संतुलन के साथ महिला प्रतिनिधित्व का संदेश भी जाता है। दूसरी ओर 3 पुरुष विकल्प चुनने की स्थिति में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने का रोडमैप अगले फेरबदल में स्पष्ट करना होगा।
‘हरियाणा मॉडल’ का संदर्भ
चर्चित ‘हरियाणा मॉडल’ का आशय संख्या-संतुलन और कार्य-वितरण वाले संकुचित-सक्षम कैबिनेट से है। छत्तीसगढ़ पहले से 14 की संवैधानिक सीमा में आता है; अतः यहाँ ‘मॉडल’ का अर्थ प्रशासनिक कार्यकुशलता और संतुलित प्रतिनिधित्व की कार्यशैली से है, न कि किसी कानूनी अपवाद से।
चुनावी गणित बनाम शासन-प्राथमिकताएँ
विधानसभा चुनावों के चक्र में प्रायः अंतिम वर्ष चुनावी मोड में बीतता है। ऐसे में इस विस्तार के बाद नए मंत्रियों के पास करीब दो वर्ष होंगे—अपने विभागीय प्रदर्शन से संदेश देने के लिए। क्षेत्रीय संतुलन (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर), सामाजिक संतुलन (ST/SC/OBC/सामान्य/धार्मिक-भाषाई समुदाय) और राजनीतिक योगदान/संगठनात्मक सक्रियता—इन तीनों कसौटियों पर संतुलित चयन सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत देगा।
कैबिनेट विस्तार सरकार के राजनीतिक मनोविज्ञान और शासन-दृष्टि की परीक्षा है। यदि महिला प्रतिनिधित्व को अर्थपूर्ण ढंग से बढ़ाया जाता है, तो यह संदेश जाएगा कि छत्तीसगढ़ में नारी शक्ति केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय-निर्माण की मेज़ पर बराबरी से बैठी है।आधिकारिक निर्णय आते ही नामों/तिथियों/स्थल का उल्लेख अद्यतन किया जाएगा।
रायपुर/शौर्यपथ।
प्रदेश में शिक्षकों की कमी और युक्तियुक्तकरण नीति को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश का कोई भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है, जबकि वास्तविकता यह है कि बेमेतरा, बालोद, धमतरी, कोरबा, बस्तर, राजनांदगांव सहित सभी जिलों में बच्चे, पालक और आम नागरिक शिक्षक नियुक्ति की मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन और चक्काजाम कर रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप: शिक्षा व्यवस्था ढह गई
ठाकुर ने कहा कि युक्तियुक्तकरण के चलते स्कूलों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। सरकार के “गुणवत्ता सुधार” के दावे बेईमानी साबित हो रहे हैं। 57,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के बजाय, सरकार ने 10,463 स्कूल बंद कर दिए और नये सेटअप में पद घटाकर शिक्षकों को भयादोहन किया। हर माह सैकड़ों शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन पिछले 20 महीनों में एक भी नियमित शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई।
एक-दो शिक्षकों पर चल रहे हैं स्कूल
कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि कई प्राथमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल महज एक या दो शिक्षकों पर निर्भर हैं, जिससे पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित है। “युक्तियुक्तकरण का फैसला शिक्षा के क्षेत्र में आत्मघाती कदम साबित हो रहा है,” ठाकुर ने कहा। “बच्चे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने को तैयार नहीं।”
तत्काल सुधार की मांग
ठाकुर ने मांग की कि सरकार सभी प्रभावित स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए, जबरन मर्ज किए गए स्कूलों का डिस्कोड वापस करे और शिक्षकों को पुनः उनके मूल स्कूलों में भेजे। साथ ही, जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
